महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता



महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता 
महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता
इलाहाबाद विजेता आधिवक्ता उप विजेता मुन्शी
आयोजन स्‍थल लूकरगंज मैदान
आयोजक महाशक्ति
सहयोग अधिवक्‍ता व मुन्‍शी गण
महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता हर वर्ष की भाति वर्ष 2005 मे भी आयोजित की गयी। इस प्रतियोयिता मे एक मैत्री व सद्भभावना मैच खेला जाता है जिसमे इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के अधिवक्‍ता तथा उनके कर्मचारियो (मुन्शियो) के बीच खेला जाता है जिसमे न कोई साहब होता है न कोई मुन्‍शी। इस मैच का आयोजन उच्‍च न्‍यायालय के शीतावकाश अर्थात दिसम्‍बर माह मे होता है।


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प्रमेन्द्र प्रताप सिह



प्रमेन्द्र प्रताप सिह प्रमेन्द्र प्रताप सिह


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मोटापा घटाने के 20 रहस्य



मोटापे से दुनिया की आज आधी आबादी परेशान है। मोटापा बढने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से प्रमुख है-अधिक चर्बी युक्त आहार का सेवन करना, कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन करना, असंतुलित व्यवहार और मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापा का कारण बनता है, शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है, बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा वयस्क होने पर भी रह सकता है और हाइपोथाइरॉयडिज़्म आदि जैसे कारण मुख्य हैं। हम सभी मानते हैं कि यदि आप मोटे हैं तो कम खाइये और ज्यादा से ज्यादा व्यायाम कीजिये। पर ऐसा नहीं है, यदि ऐसा होता तो काफी लोग अपना वजन आसानी से कम कर चुके होते। अगर आप भी मोटापे का शिकार हैं और आपका वजन व्यायाम करने के बाद भी कम नहीं हो रहा है तो कहीं ना कहीं कुछ कमी रह गई है। यानी इसका यह मतलब नहीं है कि आप जरुरत से कम खाने लगे या फिर बहुत ज्यादा व्यायाम करने लगें। इसका यह मतलब होता है कि आपको अपनी लाइफ स्‍टाइल में कुछ मामूली और जरूरी परिवर्तन करने होंगे। आज हम आपको कुछ ऐसे ही आसान तरीके बताएंगे, जिन्हें अपना कर आप मोटापे से काफी हद तक छुटकारा पा सकते हैं। पर आप को ख्याल रखना होगा कि अगर आपको मोटापा घटाना है तो इसे नियमित करना होगा नहीं तो आपको केवल निराशा के और कुछ हासिल नहीं होगा।

जो भी लोग अपने दैनिक भोजन में क्षारीय तत्वों का अधिक सेवन करते हैं, उनके लिये अच्छी खबर-क्षारीय तत्वों का अधिक सेवन करते हैं-वजन को कम और जोड़ों के दर्द में आराम। आयुर्वेद की औषधियों में क्षार को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाना भी उक्त बात की पुष्टि करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार एल्कलायन पीएच (Alkaline Phosphatase) (क्षारीय फॉस्फेट) से युक्त आहार जिसमें फलों, सलाद, नारियल एवं बादाम का सेवन सम्मिलित है, आपकी पाचन क्षमता को ठीक रखने के साथ-साथ जोड़ों के दर्द एवं वजन कम करने में भी मददगार है। इस सिद्धांत के अनुसार हम जो कुछ भी खाते हैं, वह अंत में एक मिनरल एसिड या एल्कली (Mineral Acid or Alkali) (खनिज अम्ल या क्षार) के रूप में परिवर्तित हो जाता है। हमारे शरीर की आवश्यकता एल्कलायन यानी क्षार की ही होती है। अत: हमें अपने शरीर को अधिक एसिडयुक्त खाद्य पदार्थों के द्वारा होने वाले पीएच ओवरलोड से बचाने का प्रयास करना चाहिए। भोजन में अत्यधिक शर्करा, मांसाहार, शराब, डेरी प्रोडक्ट, ब्रेड इत्यादि के सेवन से हमें बचना चाहिए। अत्यधिक मात्रा में एसिड ओवरलोड को नयूट्रलायज करने के लिए, शरीर हड्डियों से कैल्शियम एवम् मैग्नीशियम को लेने लगता है, ताकि शरीर का पीएच लेबल ठीक रहे। अतः हमें भोजन में उन फलों, शाक-सब्जियों का अधिक प्रयोग करना चाहिए, जिससे शरीर का पीएच लेबल ठीक रहे। आगे से भोजन में लें क्षारीय तत्वों को अधिक, जिससे आपका पाचन सहित जोड़ों का दर्द एवं वजन रहेगा नियंत्रित।

मोटापा घटाने के 20 रहस्य
  • यदि आप ने मोटापा घटाने का प्‍लान नहीं बनाया तो समझिये कि आप कभी पतले नहीं हो सकते। एक असली गोल बनाइये कि आप कितने दिनों में कितना वजन कम कर सकते हैं। एक बात का ख्याल रखियेगा कि खुद को परेशानी में ना डालियेगा।
  • नींद मोटापे से लड़ती है। रिसर्च के मुताबिक 7 से 8 घंटों की कम नींद भूख पैदा करती है, जिससे आप जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं और मोटापा बढ जाता है।
  • कई लोग खाना भी 4 टाइम खाएंगे और स्‍नैक्‍स भी। यदि आपको मिनट-मिनट पर स्‍नैक्‍स खाने की आदत है तो खाना थोड़ा कम खाइये, क्‍योंकि इससे शरीर में कैलोरीज बढ जाती है।
  • कई लोग बस दिन भर खाते रहते हैं और उन्‍हें पता ही नहीं होता कि वे कितना खाना खा जाते हैं। आपने दिन भर में कितना खाया उसका हिसाब रखिये।खूब चलिये: कार और बाइक होने के कारण बहुत से लोग पैर का उपयोग नहीं करते। वजन कम करने के लिये सीढ़ियों का प्रयोग करें। इसके अलावा अपना मन पसंद स्‍पोर्ट्स खेलें।
  • 65 प्रतिशत लोग शुगर वाला पेय या कोल्‍ड्रिक्‍स आदि बहुत पीते हैं, जिससे पेट तो भरता नहीं बल्कि कैलोरी अलग से मिलती हैं।
  • एक कडक डाइट पर जाना आपके दिमाग और शरीर पर दोनों पर ही भारी पड़ सकता है। इसलिये एक सफल डाइट प्‍लान पर टिके रहने के लिये हफ्ते में एक बार पिज्‍जा या चाउमीन खा सकते हैं। ऐसा करने से आप संतुष्ट बने रहेंगे और अपनी डाइट को अच्छे से फॉलो करेंगे।
  • यदि आप पुरुष हों या फिर महिला, भारी वजन उठाने से आपका फैट बर्न होगा। इससे माँसपेशियां बनती हैं और शरीर का मैटाबॉलिज्‍़म बढता है। जब आप भारी वजन उठाते हैं तो आप बहुत तेजी से कैलोरीज़ बर्न करने लगते हैं।
  • दोस्तों और रिश्तेदारों को खुद बताइये कि आप इन दिनों वजन कम कर रहे हैं, जिससे वे लोग भी आप का सपोर्ट करें।
  • एक दिन में कई तरह के व्यायाम करें जैसे, 5 मिनट कार्डियो ट्रेडमिल, बाइक करने के तुरंत बाद डंबेल सर्किट, स्‍ट्रेचिंग और बेंट ओवर रो करें। इन व्यायामों को 8 बार लगातार करें।
  • वेट लॉस करना है तो अपने आहार से पास्‍ता, चावल और ब्रेड आदि को हटा कर फल और सब्‍जियां शामिल करें। इससे अगर आप ज्‍यादा भी खाएंगे तो भी वजन नहीं बढेगा।
  • यदि आपके पास जिम के लिये पैसे नहीं हैं तो घर पर ही रस्‍सी कूदिये। पहले 50 बार कूदिये और बाद में उसे बढा कर 100 कर दीजिये।
  • एक्‍सरसाइज करते वक्‍त केवल 10 से 30 सेकेंड का ही रेस्‍ट लें।
  • यदि आप थका देने वाले व्‍यायामों को एक साथ मिला देंगे तो आपका वजन जल्‍दी कम होगा। यानी की पुशअप करते करते साथ में बुर्पी एक्‍सरसाइज कर लीजिये।
  • जो लोग दिन में दो से तीन बार खाना खाते हैं उन्‍हें हफ्ते में 1 दिन उपवास जरुर रखना चाहिये। यह एक अच्‍छी टेक्‍नीक है जिससे आप आराम से वजन कम कर सकते हैं।
  • खूब ज्‍यादा फैट खाइये: रिसर्च में बताया गया है कि आपके भोजन में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक वसा होना चाहिये। हाई फैट फूड जैसे, मेवे, एवोकाडो और तेल आदि आपको वजन कम करने में ज्‍यादा सहायता करेंगे। लेकिन अपने आहार में ट्रांस फैट यानी की जमा हुआ फैट ना लें।
  • प्रोटीन खाने से मासपेशियां बनती हैं और फैट बर्न होता है। इसके अलावा पेट भी भरा रहता है।
  • हम आपको शराबी बनने की हिदायत नहीं दे रहे हैं, बल्‍कि यह कह रहे हैं कि आप दिन भर में खूब सारा पानी पीजिये। इससे आपको भूख नहीं लगेगी और पेट भी भरा रहेगा। भोजन करने के पहले भी 1 गिलास पानी पीना चाहिये, इससे आप मोटापे से बचे रहेंगे।
  • कई लोगों को अपने भोजन में ठीक मात्रा में प्रोटीन नहीं मिल पाती तो ऐसे में उन्‍हें प्रोटीन शेक पीना चाहिये। जितना वजन हो उससे दो गुना प्रोटीन का सेवन करना उचित माना गया है।
वजन और मोटापा कम : अपनायें दस नुस्खे 
  • नीबू का रस 15 ग्राम, 15 ग्राम शहद व 125 ग्राम गरम पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट 2 या 3 महीने तक लगातार पीये मोटापा कम होगा।
  • अधिक मीठा व अधिक नमक न लें; नमक व मीठा दोनों एकदम बन्द कर देने से मोटापा तीव्रता से कम होता है।
  • तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद व दो चम्मच शहद एक गिलास पानी में मिलाकर कुछ दिन पीने से मोटापा कम होता है।
  • सोने से पहले कम से कम 2 घण्टा पहले भोजन करें।
  • खाने के बाद एक कप गरम पानी घूंट-घूंट चाय की तरह पीये, मोटापा कम होगा।
  • दही का सेवन करने से शरीर की फ़ालतू चर्बी कम होती है। अत: दूध के बजाय दही या मट्ठे का सेवन करें।
  • एक कप गाजर के रस में एक चौथाई कप पालक का रस मिलाकर पीयें, एक या दो महीने तक लगातार पीने से लाभ होगा।
  • पैदल घूमने जायें व साइकिलिंग करें! मोटापा घटाने वाले आसन करने से विशेष लाभ होता है। जैसे-उत्तानपदासन; हलासन, धनुरासन, भुजंगासन, सूर्य नमस्कार आदि। सूर्य नमस्कार एक पूर्ण व्यायाम है, जो शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखता है व मोटापा कम करता है।
  • नित्य प्रात: प्राणायाम या व्यायाम करें; प्राणायाम करने से शरीर का मैटाबलिजम सिस्टम ठीक होता है।
  • अनामिका अंगुली के टौप भाग पर अंगूठे से दबाकर कम से कम 5 मिनट तक एक्यूप्रेशर करे; दिन में दो या तीन बार ऐसा कर सकते हैं! शरीर का वेट सन्तुलित रहेगा।


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ईशावास्‍योपनिषद् Isavasyopanishad भावार्थ एवं अनुवाद सहित



ईशावास्योपनिषद (अनुवाद एवं अर्थ सहित) 
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते
॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

॥ अथ ईशोपनिषत् ॥

ॐ ईशा वास्यमिदँ सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥१॥
अनुवाद :- अखिल विश्‍व मे जो कुछ भी गतिशील अर्थात चर अचर पदार्थ है, उन सब मे ईश्‍वर अपनी गतिशीलता के साथ व्‍याप्‍त है उस ईश्‍वर से सम्‍पन्‍न होते हुये से तुम त्‍याग भावना पूर्वक भोग करो। आसक्‍त मत हो कि धन अथवा भोग्‍य पदार्थ किसके है अथार्थ किसी के भी नही है ? अत: किसी अन्‍य के धन का लोभ मत करो क्‍योकि सभी वस्‍तुऐ ईश्‍वर की है। तुम्‍हारा क्‍या है क्‍या लाये थे और क्‍या ले जाओगे।

कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतँ समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे ॥२॥
अनुवाद:- इस भौतिक जगत् मे शास्‍त्र निर्दिष्‍ट अर्थात अग्निहोत्र आदि कमों को करते हुये सौ वर्षो तक जीने की इच्‍छा करें यही मनुष्‍य की अधिकतम आयु है इस प्रकार मनुष्‍यत्‍वाभिमानी कर्म लिप्‍त नही होगे। इसके अतिरिक्‍त दूसरा मार्ग भी नही है।

असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽऽवृताः।
तांस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः ॥ ३ ॥
अनुवाद:-  वे असुर सम्बन्धी लोक आत्मा के अदर्शन रूप अज्ञान से अच्छादित हैं। जो कोई भी आत्मा का हनन करने वाले हैं वे आत्मघाती जीव मरने के अनन्तर उन्हीं लोकों में जाते हैं। (अर्थात जो कोई भी आत्महत्या अथवा आत्मा के विरुद्ध आचरण करते हैं वे निश्चित रूप से प्रेत-लोक में जाते हैं।

अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन्पूर्वमर्षत्।
तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्तस्मिन्नपो मातरिश्वा दधाति ॥ ४ ॥
वह आत्मतत्त्व अपने स्वरूप से विचलित न होनेवाला, एक तथा मन से भी तीव्र गतिवाला है। इसे इंद्रियाँ प्राप्त नहीं कर सकतीं क्योंकि यह उन सबसे पहले (आगे) गया हुआ है। वह स्थिर होनेपर भी अन्य सब गतिशीलों को अतिक्रमण कर जाता है। उसके रहते हुए ही वायु समस्त प्राणियों के प्रवृत्ति रूप कर्मों का विभाग करता है ॥4॥

तदेजति तन्नैजति तद्दूरे तद्वन्तिके।
तदन्तरस्य सर्वस्य तदु सर्वस्यास्य बाह्यतः ॥ ५ ॥
वह आत्मतत्त्व चलता है और नहीं भी चलता। वह दूर है और समीप भी है। वह सबके अंतर्गत है और वही इस सबके बाहर भी है (अर्थात वह परमात्मा सृष्टि के कण कण में व्याप्त है

यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति।सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ॥ ६ ॥
जो सम्पूर्ण प्राणियों को आत्मा मे ही देखता है और समस्त प्राणियों मे भी आत्मा को ही देखता है, वह इस [सार्वात्म्यदर्शन]- के कारण ही किसीसे घृणा नहीं करता ॥6॥

यस्मिन्सर्वाणि भूतान्यात्मैवाभूद्विजानतः।
तत्र को मोहः कः शोक एकत्वमनुपश्यतः ॥ ७ ॥
जिस अवस्था में विशेष ज्ञानप्राप्त योगी की दृष्टि में सम्पूर्ण चराचर जगत परमात्मा ही हो जाता है उस अवस्था में ऐसे एकत्व देखने वाले को कहाँ मोह और कहाँ शोक ?

स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रण-मस्नाविरं शुद्धमपापविद्धम्।
कविर्मनीषी परिभूः स्वयम्भू-र्याथातथ्यतोऽर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः ॥ ८ ॥
वह ईश्वर सर्वत्र व्यापक है,जगदुत्पादक,शरीर रहित,शारीरिक विकार रहित,नाड़ी और नस के बन्धन से रहित,पवित्र,पाप से रहित, सूक्ष्मदर्शी,ज्ञानी,सर्वोपरि वर्तमान,स्वयंसिद्ध,अनादि,प्रजा (जीव) के लिए ठीक ठीक कर्म फल का विधान करता है|

अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते।
ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायां रताः ॥ ९ ॥
जो अविद्या (कर्म)- की उपासना करते हैं वे [अविद्यारूप] घोर अन्धकार मे प्रवेश करते हैं और जो विद्या (उपासना)-मे ही रत हैं वे मानों उससे भी अधिक अन्धकार मे प्रवेश करते हैं।

अन्यदेवाहुर्विद्ययाऽन्यदाहुरविद्यया।
इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ॥ १० ॥
विद्या (ज्ञान)-से और ही फल है तथा अविद्या (कर्म)-से और ही फल है। ऐसा हमने बुद्धिमान् पुरुषों से सुना है, जिन्होने हमारे प्रति उसकी व्यवस्था की थी ॥१०॥

विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह।
अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते ॥ ११ ॥
जो विद्या और अविद्या-इन दोनों को ही एक साथ जानता है, वह अविद्या से मृत्यु को पार करके विद्या से अमरत्व प्राप्त कर लेता है ॥११॥

अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽसम्भूतिमुपासते।
ततो भूय इव ते तमो य उ सम्भूत्यां रताः ॥ १२ ॥
जो कारण प्रकृति कारण (अव्यक्त प्रकृति) की उपासना करते हैं वे गहरे अन्धकार में प्रवेश करते हैं |और जो कार्य प्रकृति (व्यक्त प्रकृति) में रमते हैं वे उससे भी अधिक अन्धकार को प्राप्त होते हैं ॥१२॥

अन्यदेवाहुः सम्भवादन्यदाहुरसम्भवात्।
इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ॥ १३ ॥
हिरण्यगर्भ की उपासना से और ही फल बताया गया है; तथा अव्यक्त प्रकृति की उपासना से और फल बताया गया है। इस प्रकार हमने बुद्धिमानों से सुना है ,जिन्होने  हमारे प्रति हमे समझाने के लिए उनकी व्याख्या की थी।

सम्भूतिं च विनाशं च यस्तद्वेदोभयं सह।
विनाशेन मृत्युं तीर्त्वा सम्भूत्याऽमृतमश्नुते ॥ १४ ॥
जो असम्भूति (अव्यक्त प्रकृति) और संभूति (हिरण्य गर्भ ) को साथ साथ जानता है; वह कार्य ब्रह्म की उपासना से मृत्यु को पार करके असम्भूति के द्वारा प्रकृति लय रूप अमरत्व को प्राप्त कर लेता है।

हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्।
तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये ॥ १५ ॥
सत्य (आदित्य मण्डलस्थ ब्रह्म) का मुख ज्योतिर्मय पात्र से ढका हुआ है। हे पूषन मुझ सत्या धर्मा को आत्मा की उपलब्धि कराने के लिए तू उसे उघाड़ दे।

पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह तेजः।
यत्ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥ १६ ॥
हे जगत पोषक सूर्य ! हे  एकाकी गमन करने वाले ! , यम (संसार का नियमन करनेवाले), सूर्य (प्राण और रस का शोषण करने वाले), हे प्रजापतिनंदन ! आप ताप (दुःखप्रद किरणों को) हटा लीजिये और आपका अत्यन्त मंगलमय रूप है उस को मैं देखता हूं जो वह पुरुष (आदित्य मण्डलस्थ) है वह मैं हूं॥16॥

वायुरनिलममृतमथेदं भस्मांतं शरीरम्।
ॐ क्रतो स्मर कृतं स्मर क्रतो स्मर कृतं स्मर ॥ १७ ॥
मेरा प्राण सर्वात्मक वायु रूप सूत्रात्मा को प्राप्त हो क्योकि वह शरीरों में आने जाने वाला जीव अमर है ;और यह शरीर केवल भस्म पर्यन्त है इसलिये अन्त समय में हे मन  ! ओउम् का स्मरण कर, अपने द्वारा किए हुये कर्मों  स्मरण कर, ॐ का स्मरण कर, अपने द्वारा किये हुए कर्मों  का स्मरण कर॥१७॥

अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान्।
युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नमउक्तिं विधेम ॥ १८ ॥
हे अग्नि देव ! हमें कर्म फल भोग के लिए सन्मार्ग पर ले चल। हे देव तू समस्त ज्ञान और कर्मों को जानने वाला है। हमारे पाखंड पूर्ण पापों को नष्ट कर। हम तेरे लिए अनेक बार नमस्कार करते है।

॥ इति ईशोपनिषत् ॥

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥

ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

ईश्वर का निरन्तर स्मरण करते हुए निष्काम कर्म करना।अखिल ब्रह्माण्ड में जो भी जड-चेतन पदार्थ हैं, यह सारे ईश्वर से व्याप्त हैं। ईश्वर का स्मरण करते हुए त्यागपूर्वक उनका भोग करो, उनमें आसक्त मत होओ, क्योंकि धन और भोग्य पदार्थ किसके हैं  अर्थात किसी के नहीं हैं। इस प्रकार कर्म करते हुए सौ वर्षों तक जीने की इच्छा करनी चाहिये। ऐसे कर्म तुम में लिप्त नहीं  होंगे। इससे भिन्न और कोई मार्ग नहीं है जिससे मनुष्य कर्म-बन्धन से मुक्त हो सके। 


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