हस्तमैथुन अथवा हैंड प्रैक्टिस



हस्‍त मैथुन एक स्‍वा‍भाविक और नैसर्गिक क्रिया है, इसे कोई बीमारी कहना एक भ्रांति है। समान्‍य यौन क्रिया की भाति यह भी एक क्रिया है। हमारे पुराणों मे कहा गया कि अति सर्वत्र वर्जयेत, ये एक सत्य है कि किसी भी कार्य की जरूरत से ज्‍यादा करना नुकसान दायक भी है। आप इस लेख मे ऐसे ही हस्‍तमैथुन के लाभ और हानियां के बारे मे पढ़ सकेगे। हस्तमैथुन अथवा हैंड प्रैक्टिस की लत छोड़ने के आसान तरीके जाने, इससे पहले यह जानलेना आवश्यक है कि यह क्या है और कितना हानिकारक है

हस्तमैथुन (मास्टरबेशन) क्या है
सबसे पहले यह जान लेना आवश्यक है कि हस्तमैथुन एक ऐसी क्रिया है जिसमे व्यक्ति बिना किसी पार्टनर (पुरुष या महिला) के खुद के द्वारा ही अपनी यौन इच्छाओ को संतुष्ट करता है और अपने संवेदनशील अंग के साथ खेलकर वह स्खलन के माध्यम से आत्मसंतुष्टि पाता है। इसे आम भाषा में मुठ मारना, मुठ्ठी मरना भी कहा जाता है। व्यक्ति के द्वारा अपने हाथ से लिंग को तेजी के साथ गति देकर वीर्य को निकाल देना हस्तमैथुन कहलाता है। हस्तमैथुन को दूसरी भाषा में आत्ममैथुन कहते हैं। किशोर अवस्था में अधिकांश युवक हस्तमैथुन की क्रिया को करना शुरू कर देते हैं। कई पुरुष अपने मित्रों को हस्तमैथुन करते देखकर खुद हस्तमैथुन करने लगते हैं। हस्तमैथुन को बढ़ावा देने वाली वह किताबें भी होती है जो सेक्स क्रिया को जगाती है। अक्सर देखा गया है कि हस्तमैथुन करने से मन के अंदर हीन भावना पैदा हो जाती है। इस क्रिया को करने के बाद हस्तमैथुन करने वाला यह सोचता है कि वह इस प्रकार की गलती दोबारा कभी नहीं करेगा परन्तु वह पुरुष अपने मन को काबू न रख पाने की वजह से पुनः हस्तमैथुन की क्रिया करने को मजबूर हो जाता है और इस तरह से हीनभावना के शिंकजे में फंस जाता है। इस रोग को एंजाएटी न्यूरोसिस के नाम से भी जाना जाता है। 


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