महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता



महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता 
महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता
इलाहाबाद विजेता आधिवक्ता उप विजेता मुन्शी
आयोजन स्‍थल लूकरगंज मैदान
आयोजक महाशक्ति
सहयोग अधिवक्‍ता व मुन्‍शी गण
महाशक्ति क्रिकेट प्रतियोगिता हर वर्ष की भाति वर्ष 2005 मे भी आयोजित की गयी। इस प्रतियोयिता मे एक मैत्री व सद्भभावना मैच खेला जाता है जिसमे इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के अधिवक्‍ता तथा उनके कर्मचारियो (मुन्शियो) के बीच खेला जाता है जिसमे न कोई साहब होता है न कोई मुन्‍शी। इस मैच का आयोजन उच्‍च न्‍यायालय के शीतावकाश अर्थात दिसम्‍बर माह मे होता है।


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प्रमेन्द्र प्रताप सिह



प्रमेन्द्र प्रताप सिह प्रमेन्द्र प्रताप सिह


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यौन शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय Ayurvedic Tips to Increase Sexual Potency



यौन शक्ति बढ़ाने के आयुर्वेदिक नुस्खे 
सेक्स लाइफ से संतुष्ट नहीं है। अगर आपको लगता है कि आपकी शक्ति इतनी ज्यादा नहीं है कि आप ज्यादा देर तक यौन सुख का आनंद ले सकें, तो अपनाइए कुछ आसान से टिप्स जो आपकी यौन शक्ति को बढ़ाएगा। आयुर्वेद और बुजुर्गों के अनुभव के आधार पर हम लाए हैं आपके लिए कुछ खास ऐसे नुस्खे जो ना सिर्फ यौन शक्ति में वृद्धि कर सकते हैं बल्कि इनके प्रयोग से शारीरिक शक्ति और सुंदरता में भी बढ़ोतरी हो सकती है। पेश है आसान और अचूक नुस्खे सेक्स पॉवर बढ़ाने के-
  • 100-100 ग्राम उड़द व गेहूं का आटा और पिप्पली चूर्ण लेकर उसमें 600 ग्राम शकर की चाशनी और सूखे मेवे मिलाकर लड्डू बनाएं। इसे 30-40 ग्राम की मा‍त्रा में लेकर हर रोज रात को सोने से पहले खाकर ऊपर से दूध पीएं। इसके सेवन से सेक्स संबंधी सभी शिकायतें दूर हो जाती हैं और शारीरिक शक्ति में बढ़ोतरी होती है।
  • प्याज को सलाद, सब्जी या अन्य व्यंजन के रूप में सेवन करने से सेक्स की कमजोरी और महिलाओं की माहवारी की अनियमितता दूर होती है।
  • पेठे का मुरब्बा बनाकर सुबह-शाम सेवन करने से कामशक्ति बढ़ती है या फिर पेठे के बीज का चूर्ण बनाकर 3-5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से भी लाभ होता है।
  • सेक्स संबंधी स‍‍‍भी विकारों के लिए सिंघाड़े का सेवन रामबाण औषधि है। 5-10 ग्राम सिंघाड़े के आटे को दूध में पकाकर सुबह-शाम सेवन करने सेक्सुअल प्रॉब्लम्स दूर होती हैं। इसका नियमित सेवन सेक्स टॉनिक का काम करता है।

यौनशक्ति और कामशक्ति बढ़ाने के उपाय 
आज के समय में व्‍यस्‍ततम जीवन सेक्‍स की समस्‍याओं का बहुत बड़ा कारण है, वास्‍तव में हम ही अपनी इस समस्‍या के सबसे बड़े कारण है कि इसे एक गम्‍भीर रोग मान कर इसे विकराल रूप दे दिया है वास्‍तव मे ऐसी कुछ समस्‍याएं है जिसे हम दूर कर हम काफी लाभ प्राप्‍त कर सकते है।
  • तनाव से बचें : किसी भी तरह के तनाव से दूर रहें। अगर आप स्ट्रेस्ड हैं तो मेडिटेशन करें और अपना मूड बदलें। साथ ही ये भी जरुरी है कि आप अच्छी नींद लें।
  • लूब्रिकेशन का इस्तेमाल करें : "द जर्नल ऑफ सेक्शुअल मेडिसिन" की एक रिसर्च के मुताबिक जो पुरुष लूब्रिकेशन और कॉन्डम का इस्तेमाल करते हैं वो ज्यादा देर तक यौन सुख का आनंद उठा पाते हैं।
  • खुद को लिमिट में ना बांधे : हफ्ते में एक बार, महीने में एक बार, इस तरह की लिमिट में अपने रिश्ते को ना बांधे। इसकी जगह बार बार सेक्स करें। इससे लंबे समय तक आपका स्टैमिना बना रहेगा।
  • एक्टिव रहें : यौन क्रिया में काफी ऊर्जा और मेहनत लगती है। और इस ऊर्जा आपको एक्ससाइज़ करने से ही मिल सकती है। व्यायाम करने से ना सिर्फ आपका स्टैमिना बढ़ता है बल्कि रक्त संचालन भी बेहतर होता है।
  • दिमाग को चिंता मुक्त रखें : क्या होगा..कैसे होगा..इस तरह की किसी भी यौन अपेक्षा से अपने दिमाग को पूरी तरह से मुक्त रखें। खुद पर किसी भी तरह का दबाव ना डालें।
  • संतुलित आहार खाएं : अपनी यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए जरुरी है कि आप अपने खान-पान पर पूरा ध्यान दें। अपने खाने में लो फैट वाली चीजों को शामिल करें। फल और सब्जियां ज्यादा खाएं। इससे आपका शरीर स्वस्थ रहेगा और आपकी शारीरिक और मानसिक दोनों शक्ति बढ़ेगी।
  •  ऐल्कॉहॉल से दूर रहें : अगर आप सेक्स का भरपूर आनंद उठाना चाहते हैं तो शराब और ऐल्कॉहॉल मिक्स्ड ड्रिंक्स से दूर रहें। इनका इस्तेमाल शरीर को कमजोर करता है।
  • खाने में प्रोटीन लें : वैसे भोजन का सेवन करें जिसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो। अंडे की सफेदी, दूध, दूध से बनी चीजें, मछली, चिकन इन सब में काफी प्रोटीन होता है। 
  • डिपरेशन: बहुत अधिक तनाव से होने वाले हार्मोनल परिवर्तन, पौष्टिक विकार, यौन-शाक्ति कम करने के मुख्य कारणों मे से एक है।
  • भारी व जटिल व्यायाम: आवश्यकता से अधिक भारी-भरकम व्यायामो का प्रशिक्षण शरीर मे उपस्थित आवश्यक वसा को कम कर देता है, जिसका असर शरीर मे जरूरी मेटाबोलिजम तथा अन्य हार्मोनो पर प़डता है और यौन-शक्ति मे कमी आने लगती है आहार: गर्म तथा अधिक मसालेदार आहर का प्रयोग भी इसका एक कारण है।
  • शराब का दुरूपयोग: शराब-सिगरेट तथा तंबाकु के अत्याधिक सेवन से जननांग की कोशिकाए शीथल प़ड जाती है। जो यौन-शक्ति कमजोर होने का मुख्य कारण है। एक लौंग को चबाकर उसकी लार को लिंग के पिछले भाग पर लगाने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।
लिंग में कड़ापन और वीर्य गाढ़ा करने के सरल नुस्खे
यौन-संबध बनाने के लिए जितना ध्यान मानसिक तैयारी और कामात्तेजना को देना चाहिए उतना ही ध्यान अपनी यौन-शाक्ति पर भी देना आवश्यक है। यौन-शक्ति के अभाव मे एक बेहतरीन रोमांटिक माहौल में भरपूर तैयारी के साथ बनाया गया संबंध कारगर साबित नही होता है और आप यौन-सुख से वंचित रह जाते है। जिन व्यक्तियों में यौन-शक्ति का अभाव होता है वह सेक्स के दौरान थो़डी देर मे ही खुद को कमजोर महसूस करने लगते है। इस अभाव के कारण अधिकतर लोगो में शामिदंर्गी का बोध बढ़ जाता है और वह अपने साथी के साथ यौन-संबंध बनाने मे झिझकने लगते है। हाल ही मे वैज्ञानिको द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार यह पाया गया है कि शारीरिक रूप से कमजोर और अस्वस्थ लोगो मे यौन-शक्ति की कमी होने की संभावना अधिक होती है। आइए यौन-शक्ति क्षीण होने के कारण तथा अन्य कारणो तथा निवारणो पर विचार करते है:-
  • सुअर की चर्बी और शहद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर लिंग पर लेप करने से लिंग में मजबूती आती है।
  • हींग को देशी घी में मिलाकर लिंग पर लगा लें और ऊपर से सूती कपड़ा बांध दें। इससे कुछ ही दिनों में लिंग मजबूत हो जाता है।
  • भुने हुए सुहागे को शहद के साथ पीसकर लिंग पर लेप करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है।
  • जायफल को भैंस के दूध में पीसकर लिंग पर लेप करने के बाद ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। सुबह इस पत्ते को खोलकर लिंग को गर्म पानी से धो लें। इस क्रिया को लगभग 3 सप्ताह करने से लिंग पुष्ट हो जाता है।
  • शहद को बेलपत्र के रस में मिलाकर लेप करने से हस्तमैथुन के कारण होने वाले विकार दूर हो जाते हैं और लिंग मजबूत हो जाता है।
  • रीठे की छाल और अकरकरा को बराबर मात्रा में लेकर शराब में मिलाकर खरल कर लें। इसके बाद लिंग के आगे के भाग को छोड़कर लेप करके ऊपर से ताजा साबुत पान का पत्ता बांधकर कच्चे धागे से बांध दें। इस क्रिया को नियमित रूप से करने से लिंग मजबूत हो जाता है।
  • बकरी के घी को लिंग पर लगाने से लिंग मजबूत होता है और उसमें उत्तेजना आती है।
  • बेल के ताजे पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से लिंग में ताकत पैदा हो जाती है।
  • धतूरा, कपूर, शहद और पारे को बराबर मात्रा में मिलाकर और बारीक पीसकर इसके लेप को लिंग के आगे के भाग (सुपारी) को छोड़कर बाकी भाग पर लेप करने से संभोग शक्ति तेज हो जाती है।
  • असगंध, मक्खन और बड़ी भटकटैया के पके हुए फल और ढाक के पत्ते का रस, इनमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग लिंग पर करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली बनता है।
  • पालथ लंगी का तेल, सांडे का तेल़, वीर बहूटी का तेल, मोर की चर्बी, रीछ की चर्बी, दालचीनी का तेल़, आधा भाग लौंग का तेल, 4 भाग मछली का तेल को एकसाथ मिलाकर कांच के चौड़े मुंह में भरकर रख लें। इसमें से 8 से 10 बूंदों को लिंग पर लगाकर ऊपर से पान के पत्ते को गर्म करके बांध लें। इस क्रिया को लगातार 1 महीने तक करने से लिंग का ढीलापन समाप्त हो जाता है़, लिंग मजबूत बनता है। इस क्रिया के दौरान लिंग को ठंडे पानी से बचाना चाहिए।
  • इमली के बीजों को पानी में छिलका उतरने तक भिगो लें। इसके बाद इन बीजों का छिलका उतारकर चूर्ण बना लें। इसके लगभग आधा किलो चूर्ण में इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से लगभग 2 ग्राम चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक नियमित रूप से फांकने के बाद ऊपर से दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।
  • बरगद के पके हुए फलों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और इसमें मिश्री मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में रोजाना शाम को दूध के साथ लेने से एक सप्ताह के बाद ही वीर्य गाढ़ा होना शुरू हो जाता है। इस चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक सेवन किया जा सकता है।
  • लगभग आधा किलो देशी फूल की कच्ची कलियों को डेढ़ लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी उबलने के बाद जल जाने पर इस मिश्रण को बारीक पीसकर 5-5 ग्राम की गोलियां बनाकर एक कांच के बर्तन में रखकर ऊपर से ढक्कन लगा दें। इसमें से 1 गोली को रोजाना सुबह के समय दूध के साथ लेने से संभोग करने की शक्ति बढ़ती है और वीर्य भी मजबूत होता है।
  • लगभग 10 ग्राम बिदारीकंद के चूर्ण को गूलर के रस में मिलाकर चाट लें। इसके ऊपर से घी मिला हुआ दूध पीने से जो व्यक्ति संभोग क्रिया में पूरी तरह से सक्षम नहीं होते उनके शरीर में भी यौन शक्ति का संचार होने लगता है।
  • देशी फूल की तुरंत उगी अर्थात नई कोंपलों को सुखाकर और पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोजाना 6 ग्राम की मात्रा में फांककर ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध पीने से वीर्य पुष्ट होता है। इसके अलावा इसका सेवन करने से पेशाब के साथ वीर्य का आना और स्वप्नदोष जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।
  • चिरौंजी, मुलहठी और दूधिया बिदारीकंद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को लगभग 1 सप्ताह तक लेने से और ऊपर से दूध पीने से वीर्य के सारे दोष दूर होते हैं और वीर्य बढ़ जाता है।
  • सोंठ, सतावर, गोरखमुंडी, थोड़ी सी हींग और देशी खांड को एक साथ मिलाकर सेवन करने से लिंग मजबूत और सख्त होता है और बुढ़ापे तक ऐसा ही रहता है। इसके अलावा इसको लेने से वीर्य बढ़ता है और शीघ्रपतन जैसे रोग दूर हो जाते हैं। इस चूर्ण का सेवन करते समय गुड़ और खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सिंघाड़े के आटे का हलुआ, उड़द और चने की दाल का हलुआ, अंडों की जर्दी का गाय के घी में तैयार किया हुआ हलुआ, मेथी और उड़द की दाल के लडडू, आंवले की चटनी, गेहूं, चावल, बराबर मात्रा में जौ और उड़द का आटा और उसमें थोड़ी सी पीपल को डालकर तैयार की गई पूडि़यां और नारियल की खीर आदि का सेवन करने से हर तरह के धातु रोग नष्ट हो जाते हैं, वीर्य पुष्ट होता है और संभोग करने की शक्ति बढ़ती है।
  • लगभग 10-10 ग्राम सफेद प्याज का रस और शहद, 2 अंडे की जर्दी और 25 मिलीलीटर शराब को एक साथ मिलाकर रोजाना शाम के समय लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है।
  • लगभग 5 बादाम की गिरी, 7 कालीमिर्च और 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ तथा जरूरत के अनुसार मिश्री को एक साथ मिलाकर पीस लें और फंकी लें। इसके ऊपर से दूध पी लें। इस क्रिया को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से संभोगक्रिया के समय जल्दी वीर्य निकलने की समस्या दूर हो जाती है।
  • उड़द की दाल को पानी में पीसकर पिट्ठी बनाकर कढ़ाई में लाल होने तक भून लें। इसके बाद गर्म दूध में इस पिसी हुई दाल को डालकर खीर बना लें। अब इसमें मिश्री मिलाकर किसी कांसे या चांदी की थाली में परोसकर सेवन करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। इस खीर को लगभग 40 दिनों तक प्रयोग करने से लाभ होता है।
  • 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
  • 200 ग्राम लहसुन पीसकर उसमें 60 मिली शहद मिलाकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर ढक्कन लगाएं और किसी भी अनाज में 31 दिन के लिए रख दें। 31 दिनों के बाद 10 ग्राम की मात्रा में 40 दिनों तक इसको लें। इससे यौन शक्ति बढ़ती है।
  • एक ग्राम जायफल का चूर्ण प्रातः ताजे जल के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही यौन दुर्बलता दूर होती है।
  • दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है और यौन दुर्बलता दूर होती है।
  • शीतकाल में सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर नियमित खाएं, ऊपर से इलायची- शक्कर डालकर उबला हुआ दूध पीजिए। यह उत्तम यौन शक्तिवर्धक है।

यौन-शाक्ति बढ़ाने के अन्य उपाय
  • मालिश: सारे शरीर पर एक जोरदार मालिश, शरीर की सुस्त प़डी मांसपेशियो तथा तंत्रिकाओ को ऊर्जा प्रदान कर पुन:जीवित करने मे मदद करती है। लिंग की मालिश या लेप करते समय एक बात का ध्यान रखें कि लिंग के मुंह के नीचे सफेद रंग का बदबूदार मैल जमा हो जाता है। इस मैल को समय-समय ठंडे पानी से धोकर साफ करते रहने चाहिए।
  • ठंडा हिप स्त्रान: यौन अंगो की नसे श्रोणि क्षेत्र से नियत्रिंत होती है, इसलिए सुबह या शाम को दस मिनट के लिए ठंडा हिप स्त्रान अवश्य ले।
  • योगासन: योगा, ध्यान और ऎसी कई अन्य सकारात्मक ऊर्जा तकनीकियों का प्रयोग करे जो आपके दिमाग को तनाव से मुक्त करता है तथा यौन ऊर्जा बढ़ाता है। द्रोणासन, सर्वागआसन, हलासन जैसे योगसान यौन-शक्ति बढ़ाने मे अत्यधिक लाभदायक होते है।
  • अंतराल: सेक्स दैनिस दिनचर्या का अभिन्न अंग है, हो सकता है कि आप इससे उबाऊ महसूस करने लगे इसलिए यौन-संबंध रोजाना ना बनाए, एक या दो दिन का अंतराल अवश्य रखे।
  • मुद्राऎं : सेक्स भी एक कला है जिसे हमारी ऎतिहासिक पुस्तको मे विस्तार से समझाया गया है, जिस प्रकार नृत्यकला की मुद्राए होती है। उसी प्रकार यौन क्रियाओं क भी विभिन्न मुद्राऎं होती है। नित्य नई मुद्राओं का प्रयोग आपके यौन-जीवन मे नयेपन के साथ-साथ आपको फिट भी रखेगा। किसी मनोचिकित्सक की सलाह अवश्य ले इस बात का विशेष ध्यान रखिए कि आपक कोई भी उपाय चुने परन्तु उसका पूरी नियमितता के साथ प्रयोग करे ये अवश्य लाभदायक सिद्ध होगा और आप अपने यौन-जीवन को और अधिक सुखमय बना पायेगे।
पुरुषों की यौनिक आम समस्याएँ
  • संभोग क्रिया के समय नशीले पदार्थों के सेवन से बचे, तनावमुक्त रहे आमतौर पर महिलाएं सेक्स संबंधी समस्याओं से घिरी रहती है, लेकिन ऐसा नहीं कि पुरूषों को यौन समस्याएं नहीं होती। पुरूषों में अकसर तनाव संबंधी समस्याओं के कारण यौन समस्याएं होती है। विटामिन बी के सेवन से पुरूष सेक्स संबंधी कई समस्याओं से अपना बचाव कर सकते हैं। बहरहाल, आइए जानते हैं पुरूषों में सेक्स संबंधी समस्याओं के बारे में।
  • पुरुषों में सेक्स समस्याओं की बात आते ही सबसे पहले उन लोगों पर ध्यान जाता है, जो चाह कर भी सेक्स में रुचि नहीं ले पाते हैं या जिनकी सेक्स करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती।
  • सेक्स क्षमता में कमी पुरुषों में आम समस्या बन चुकी है। इसके वास्तविक कारण होते हैं सेक्स हॉरमोन टेस्टोस्टेरोन की कमी। पुरुषों में 40 की उम्र के पार होने पर रक्त में टेस्टोस्टेरोन की मात्रा में कमी आना एक आम बात है। हार्मोन में कमी उम्र के साथ जुड़ी समस्या है लेकिन कुछ लोग अपनी उम्र की शुरुआत में ही इससे पीड़ित हो जाते हैं। ये डाइबिटीज या अन्य तनाव संबंधी कारणों से भी पनप सकता है। रक्त में टेस्टोस्टेरोन की कमी से शरीर में थकान, दिमागी परिवर्तन, अनिद्रा के साथ ही सेक्स की चाहत में कमी हो जाती है।
  • यौन समस्याओं में सबसे आम समस्या है पुरुषों में शीघ्रपतन। सेक्स क्रिया के दौरान पुरुष स्खलन होने के साथ ही पुरुष की उत्तेजना शांत हो जाती है फिर चाहे उसकी महिला साथी की कामोत्तेजना शांत न भी हो।
  • ज्यादातर लोगों में सेक्स में दिलचस्पी खत्म होने का सबसे बड़ा कारण इरेक्टाइल डिस्फंक्शन यानी लिंग की मांसपेशियां कमजोर पड़ना है। ये समस्या कई बार विटामिन बी के सेवन न करने से, कई बार बुरी आदतें व लाइफस्टाइल के कारण हो सकती है। कई लोगों में तनाव संबंधी समस्याओं के कारण ऐसा होता है।
  • शराब पीने वालों कोकीन, आदि ड्रग्स लेने वाले लोग सेक्स के प्रति उदासीन होते हैं। मोटापा व्यक्ति को सेक्स से विचलित करता है। कई बीमारियां जैसे- हृदय रोग, एनीमिया और मधुमेह जैसी बीमारियां भी पुरुष को सेक्स के प्रति उदासीन बनाती हैं।
  • तनाव संबंधी समस्याएं या अत्यधिक व्यस्त रहने वाले लोगों का सेक्स जीवन भी उदासीन हो जाता है।
  • बहुत से लोगों को यह भम्र हो जाता है कि एक उम्र के बाद शरीर में सेक्स शक्ति में कमी आ जाती है। लेकिन ये धारणा गलत है क्योंकि यदि इस उम्र के पुरुष अपने स्वास्थ्य की ठीक प्रकार से देखभाल करते हैं तो वह सेक्स का आनन्द उसी प्रकार से ले सकते हैं, जिस प्रकार से एक युवा पुरुष सेक्स क्रिया का आनन्द लेता है।
  • सेक्स इच्छा में कमी कई बार अधिक दवाइयों का प्रयोग करने, शरीर में रोगों का प्रभाव होने, मूत्रनली से संबंधित रोग होने, तनाव होने और मानसिक समस्या के कारण हो सकते हैं।
  • बढ़ती उम्र में पुरूषों में सेक्स इच्छा तेज हो जाना भी एक समस्या है जिसका कारण प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ जाना है।
  • पुरूष अपनी यौन समस्याओं से निजात पाने के लिए विटामिन बी का सेवन कर, तनाव संबंधी समस्याओं को दूर कर और पौष्टिक आहार लेते हुए अपनी सही तरह से देखभाल कर सकते हैं।
  • ज्यादातर हारमोनों से जुड़ी हुई बीमारियों में यौन इच्छा में कमी आ जाती है। इससे या तो जनन अंग ठीक से विकसित नहीं होते या फिर यौन इच्छा में कमी आ जाती है। पीयुषिका ग्रन्थि की बीमारियों के अलावा, अवटुअतिसक्रियता, अवटुअल्पसक्रियता, डायबिटीज़, और कुशिंग संलक्षण/बीमारी यौन इच्छा को कम कर सकते हैं।


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ईशावास्‍योपनिषद् Isavasyopanishad



ईशावास्‍योपनिषद् (अनुवाद एवं अर्थ सहित) 
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

॥ अथ ईशोपनिषत् ॥

ॐ ईशा वास्यमिदँ सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥१॥
अनुवाद :- अखिल विश्‍व मे जो कुछ भी गतिशील अर्थात चर अचर पदार्थ है, उन सब मे ईश्‍वर अपनी गतिशीलता के साथ व्‍याप्‍त है उस ईश्‍वर से सम्‍पन्‍न होते हुये से तुम त्‍याग भावना पूर्वक भोग करो। आसक्‍त मत हो कि धन अथवा भोग्‍य पदार्थ किसके है अथार्थ किसी के भी नही है ? अत: किसी अन्‍य के धन का लोभ मत करो क्‍योकि सभी वस्‍तुऐ ईश्‍वर की है। तुम्‍हारा क्‍या है क्‍या लाये थे और क्‍या ले जाओगे।

कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतँ समाः।
एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति न कर्म लिप्यते नरे ॥२॥
अनुवाद:- इस भौतिक जगत् मे शास्‍त्र निर्दिष्‍ट अर्थात अग्निहोत्र आदि कमों को करते हुये सौ वर्षो तक जीने की इच्‍छा करें यही मनुष्‍य की अधिकतम आयु है इस प्रकार मनुष्‍यत्‍वाभिमानी कर्म लिप्‍त नही होगे। इसके अतिरिक्‍त दूसरा मार्ग भी नही है।

असुर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽऽवृताः।
तांस्ते प्रेत्याभिगच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः ॥ ३ ॥
अनुवाद:-  वे असुर सम्बन्धी लोक आत्मा के अदर्शन रूप अज्ञान से अच्छादित हैं। जो कोई भी आत्मा का हनन करने वाले हैं वे आत्मघाती जीव मरने के अनन्तर उन्हीं लोकों में जाते हैं। (अर्थात जो कोई भी आत्महत्या अथवा आत्मा के विरुद्ध आचरण करते हैं वे निश्चित रूप से प्रेत-लोक में जाते हैं।

अनेजदेकं मनसो जवीयो नैनद्देवा आप्नुवन्पूर्वमर्षत्।
तद्धावतोऽन्यानत्येति तिष्ठत्तस्मिन्नपो मातरिश्वा दधाति ॥ ४ ॥
वह आत्मतत्त्व अपने स्वरूप से विचलित न होनेवाला, एक तथा मन से भी तीव्र गतिवाला है। इसे इंद्रियाँ प्राप्त नहीं कर सकतीं क्योंकि यह उन सबसे पहले (आगे) गया हुआ है। वह स्थिर होनेपर भी अन्य सब गतिशीलों को अतिक्रमण कर जाता है। उसके रहते हुए ही वायु समस्त प्राणियों के प्रवृत्ति रूप कर्मों का विभाग करता है ॥4॥

तदेजति तन्नैजति तद्दूरे तद्वन्तिके।
तदन्तरस्य सर्वस्य तदु सर्वस्यास्य बाह्यतः ॥ ५ ॥
वह आत्मतत्त्व चलता है और नहीं भी चलता। वह दूर है और समीप भी है। वह सबके अंतर्गत है और वही इस सबके बाहर भी है (अर्थात वह परमात्मा सृष्टि के कण कण में व्याप्त है

यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति।
सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ॥ ६ ॥

जो सम्पूर्ण प्राणियों को आत्मा मे ही देखता है और समस्त प्राणियों मे भी आत्मा को ही देखता है, वह इस [सार्वात्म्यदर्शन]- के कारण ही किसीसे घृणा नहीं करता ॥6॥

यस्मिन्सर्वाणि भूतान्यात्मैवाभूद्विजानतः।
तत्र को मोहः कः शोक एकत्वमनुपश्यतः ॥ ७ ॥

जिस अवस्था में विशेष ज्ञानप्राप्त योगी की दृष्टि में सम्पूर्ण चराचर जगत परमात्मा ही हो जाता है उस अवस्था में ऐसे एकत्व देखने वाले को कहाँ मोह और कहाँ शोक ?

स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रण-मस्नाविरं शुद्धमपापविद्धम्।
कविर्मनीषी परिभूः स्वयम्भू-र्याथातथ्यतोऽर्थान् व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः ॥ ८ ॥

वह ईश्वर सर्वत्र व्यापक है,जगदुत्पादक,शरीर रहित,शारीरिक विकार रहित,नाड़ी और नस के बन्धन से रहित,पवित्र,पाप से रहित, सूक्ष्मदर्शी,ज्ञानी,सर्वोपरि वर्तमान,स्वयंसिद्ध,अनादि,प्रजा (जीव) के लिए ठीक ठीक कर्म फल का विधान करता है|

अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते।
ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायां रताः ॥ ९ ॥

जो अविद्या (कर्म)- की उपासना करते हैं वे [अविद्यारूप] घोर अन्धकार मे प्रवेश करते हैं और जो विद्या (उपासना)-मे ही रत हैं वे मानों उससे भी अधिक अन्धकार मे प्रवेश करते हैं।

अन्यदेवाहुर्विद्ययाऽन्यदाहुरविद्यया।
इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ॥ १० ॥

विद्या (ज्ञान)-से और ही फल है तथा अविद्या (कर्म)-से और ही फल है। ऐसा हमने बुद्धिमान् पुरुषों से सुना है, जिन्होने हमारे प्रति उसकी व्यवस्था की थी ॥१०॥

विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह।
अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते ॥ ११ ॥

जो विद्या और अविद्या-इन दोनों को ही एक साथ जानता है, वह अविद्या से मृत्यु को पार करके विद्या से अमरत्व प्राप्त कर लेता है ॥११॥

अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽसम्भूतिमुपासते।
ततो भूय इव ते तमो य उ सम्भूत्यां रताः ॥ १२ ॥

जो कारण प्रकृति कारण (अव्यक्त प्रकृति) की उपासना करते हैं वे गहरे अन्धकार में प्रवेश करते हैं |और जो कार्य प्रकृति (व्यक्त प्रकृति) में रमते हैं वे उससे भी अधिक अन्धकार को प्राप्त होते हैं ॥१२॥

अन्यदेवाहुः सम्भवादन्यदाहुरसम्भवात्।
इति शुश्रुम धीराणां ये नस्तद्विचचक्षिरे ॥ १३ ॥

हिरण्यगर्भ की उपासना से और ही फल बताया गया है; तथा अव्यक्त प्रकृति की उपासना से और फल बताया गया है। इस प्रकार हमने बुद्धिमानों से सुना है ,जिन्होने  हमारे प्रति हमे समझाने के लिए उनकी व्याख्या की थी।

सम्भूतिं च विनाशं च यस्तद्वेदोभयं सह।
विनाशेन मृत्युं तीर्त्वा सम्भूत्याऽमृतमश्नुते ॥ १४ ॥

जो असम्भूति (अव्यक्त प्रकृति) और संभूति (हिरण्य गर्भ ) को साथ साथ जानता है; वह कार्य ब्रह्म की उपासना से मृत्यु को पार करके असम्भूति के द्वारा प्रकृति लय रूप अमरत्व को प्राप्त कर लेता है।

हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्।
तत्त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये ॥ १५ ॥

सत्य (आदित्य मण्डलस्थ ब्रह्म) का मुख ज्योतिर्मय पात्र से ढका हुआ है। हे पूषन मुझ सत्या धर्मा को आत्मा की उपलब्धि कराने के लिए तू उसे उघाड़ दे।

पूषन्नेकर्षे यम सूर्य प्राजापत्य व्यूह रश्मीन् समूह तेजः।
यत्ते रूपं कल्याणतमं तत्ते पश्यामि योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि ॥ १६ ॥

हे जगत पोषक सूर्य ! हे  एकाकी गमन करने वाले ! , यम (संसार का नियमन करनेवाले), सूर्य (प्राण और रस का शोषण करने वाले), हे प्रजापतिनंदन ! आप ताप (दुःखप्रद किरणों को) हटा लीजिये और आपका अत्यन्त मंगलमय रूप है उस को मैं देखता हूं जो वह पुरुष (आदित्य मण्डलस्थ) है वह मैं हूं॥16॥

वायुरनिलममृतमथेदं भस्मांतं शरीरम्।
ॐ क्रतो स्मर कृतं स्मर क्रतो स्मर कृतं स्मर ॥ १७ ॥

मेरा प्राण सर्वात्मक वायु रूप सूत्रात्मा को प्राप्त हो क्योकि वह शरीरों में आने जाने वाला जीव अमर है ;और यह शरीर केवल भस्म पर्यन्त है इसलिये अन्त समय में हे मन  ! ओउम् का स्मरण कर, अपने द्वारा किए हुये कर्मों  स्मरण कर, ॐ का स्मरण कर, अपने द्वारा किये हुए कर्मों  का स्मरण कर॥१७॥

अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान्।
युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नमउक्तिं विधेम ॥ १८ ॥

हे अग्नि देव ! हमें कर्म फल भोग के लिए सन्मार्ग पर ले चल। हे देव तू समस्त ज्ञान और कर्मों को जानने वाला है। हमारे पाखंड पूर्ण पापों को नष्ट कर। हम तेरे लिए अनेक बार नमस्कार करते है।

॥ इति ईशोपनिषत् ॥

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥

ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

ईश्वर का निरन्तर स्मरण करते हुए निष्काम कर्म करना।अखिल ब्रह्माण्ड में जो भी जड-चेतन पदार्थ हैं, यह सारे ईश्वर से व्याप्त हैं। ईश्वर का स्मरण करते हुए त्यागपूर्वक उनका भोग करो, उनमें आसक्त मत होओ, क्योंकि धन और भोग्य पदार्थ किसके हैं  अर्थात किसी के नहीं हैं। इस प्रकार कर्म करते हुए सौ वर्षों तक जीने की इच्छा करनी चाहिये। ऐसे कर्म तुम में लिप्त नहीं  होंगे। इससे भिन्न और कोई मार्ग नहीं है जिससे मनुष्य कर्म-बन्धन से मुक्त हो सके। 


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