अलसी एक फायदे अनेक




अलसी एक फायदे अनेक
अलसी एक बहुत लाभदायक औषधी है इस औषधी केबारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इसे आयुर्वेद में एक विशेष भोजन माना है। केवल गेहूँ की रोटी खाने से बचें, चना, ओट्स, रागी, अलसी मिली मिस्सी रोटी खायें तथा इस औषधी के निम्न लाभ है-
  1. आयवर्द्धक है। मस्तिष्क, आंखे, स्नायुतंत्र के लिए राम बाण ईलाज है।
  2. रक्तचाप, मधुमेह, जोड़ो के दर्द में, मोटापा, कैंसर आदि रोगों को रोकने की शक्ति है।
  3. हृदय रोग जैसे रोगों में लाभदायक है।
  4. यदि मां के स्तन से दूध नहीं आ रहा है तो 24 घंटे में इसके सेवन से दूध आऐगा।
  5. कब्ज, बवासीर, भगन्दर, जैसे रोगों में सहायक है।
  6. अलसी पित्त की थैली में पथरी का नाश करती है।
  7. त्वचा की झुर्रियां दूर करती है।
  8. गठिया, गाउट, मोच को ठीक करती है।
  9. जिगर, गुर्दे, आर्थराईटिस, थाॅइराइड को ठीक करती है।
  10. अस्थमा, माईग्रेन जैसे रोगो में सहायक है।
सेवन विधि:
  • मिक्सी में पीसकर आटे में मिला कर ले, रोटी,पराठा बना कर सेवन करें।
  • लडडू, आदि भी बना सकते हैं।
  • अंकुरित अलसी का स्वाद भी कुछ अनोखा है।
  • सब्जी, दाल, सलाद में भी डाल सकते हैं।
  • 30 व 36 ग्राम प्रतिदिन सेवन कर सकते हैं।


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अल्प ब्लाग जीवन के फटे में पैबँद



फुरसतिया जी का लेख परदे के पीछे-कौन है बे? को पडा लगा कि तो लगा कि छद्म नाम के साथ लेख करना गलत नही है पर नाम लिख कर दूसरो पर टिप्‍पडी करना गलत है नाम न लिखने की परम्‍परा आज की नही है कई लोग इसे निभाते चले आ रहे है। प्रत्‍येक व्‍यक्ति को अपनी बात को कहने का हक है चाहे जैसे हो कह सकता है स्‍वामी जी तथा छाया जी भी अपनी बात सफलता पूर्वक कह रहे है तथा कोई इन लोगो को काई नही जानता है। स्‍वामी जी तो प्रत्‍येक व्‍यक्ति पर मुह फाड के टिप्‍पडी तथा पोस्ट कर रहे है तथा हम इनके बेनाम पोष्‍टो को झेल रहे है नाम नही पता है तो इनकी दादा गिरी भी झेलनी पडती है।
अब एक जगह देख लिजिये कि स्‍वामी जी के क्‍या वाक्‍य है :- आप जितना समय यहाँ अपनी समझदारी का प्रदर्शन करने में लगाते रहे हैं उसका एक अंश अपने ब्लाग पर "संस्क्रत" को "संस्कृत" कैसे लिखें वो सीखने पर लगाएं. समय आ गया है की आपके अल्प ब्लाग जीवन के फटे में पैबँद लगानें शुरु करे - शुरुआत खराब की है आपने. यदी अपने पाठकों का सम्मान चाहते हैं तो आपकी छवि और ब्लाग दोनो को सुधारना शुरु करें. यहाँ सब आपके शुभाकाँक्षी ही हैं। स्‍वामी जी को उन्‍हे दूसरो का संस्क्रत गलत लगता है जबकि कि यदि का यदी लिखा है वह गलत नही लगता। तुलसी दास जी ने स्‍वामी जी जैसे लोगो के लिये ठीक ही समरथ को नही दोष गोसाईं!!" स्‍वामी जी आप तो समर्थवान है उनसे कहां गलती होने वाली है गलती तो हम लोग ही करते है और हमे ही अल्प ब्लाग जीवन के फटे में पैबँद लगानें पडेगे स्‍वामी जी लोग तो समर्थवान हे अच्‍छा लिखे या खराब लोग पडेगे भी तथा टिप्‍पडी भी करेगे और वाह वाह भी ।
छिपकर लिखने का मतलब है कि आप दूसरो को भला बुरा कहते है किन्‍तु नाम इस लिये छिपाते है कोई दूसरा आपके नाम को लेकर आक्षेप न करे। छद्म नाम से लेख लिखने का मतलब है कि या तो आप मनत्री है, राजनेता है, अधिकारी है या आंतकी है जो नाम छिपाने की जरूरत है। मै तो यही कहूगा कि छिप कर लेख करने तो ठीक है पर छद्म नाम का सहारा किसी पर व्‍ययक्तिगत टिप्‍पडी नही करनी चाहिये।
हमे तो जुम्‍मा जुम्‍मा आये 4 दिन ही हुआ है और अभी तो पैबन्‍द लगाने का समय है सो तो हम लगायेगे ही और ऐसा ही चलता रहा तो वक्‍त आपका भी आयेगा।


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पैनकार्ड के बारे में सामान्य जानकारी



परमानेंट अकाउंट नम्बर (पैन) एक फोटो पहचान पत्र है, जिसमें प्रत्येक कार्डधारी के लिए 10 अंकों वाला एक अल्फा न्युमेरिक नम्बर आवंटित की जाती है। इसे भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है और आयकर रिटर्न दाखिल करने के दौरान पैन नंबर उद्धृत करना अनिवार्य है। इसके अलावे, पैन का उपयोग बैंक में खाता खुलवाने, पासपोर्ट बनवाने, ट्रेन में ई-टिकट के साथ यात्रा करते समय पहचान पत्र के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
नया पैन कार्ड बनवाने में नहीं होगी कोई परेशानी, फॉलो करें सिर्फ ये 4 स्टेप्स
आम-जन को अपना नया पेन कार्ड बनाने हेतु किसी भी नजदीकी कियोस्क (ई-मित्र/सी.एस.सी.) पर आवेदऩ-पत्र A49 आई.डी. सहीत जमा कर आवेदन करवाया जा सकता है। कियोस्क द्वारा आवेदन करने हेतु ई-मित्र की वेब साईट पर 96 रू.प्रति आवेदन की रसीद जारी कर पेन कार्ड की वेबसाईट (http://www.myutiitsl.com/EMITRAPAN/) पर आॅनलाईन आवेदन करना होता है। 

कियोस्क द्वारा की जाने वाली प्रक्रिया ई-मित्र पाॅर्टल पर की जाने वाली प्रक्रिया
  • कियोस्क धारक द्वारा नये पेन कार्ड बनाने हेतु प्राप्त आवेदन-पत्र A49 की जांच की जावे की आवेदन पत्र सही-सही भरा गया है। जैसे आवेदक का नाम, पिता का नाम, जन्म दिनांक, पता इत्यादी और आवेदन पत्र के साथ आई.डी.अथवा पते के दस्तावेज की प्रति संलग्न हो।
  • सब कुछ ठीक होने पर आवेदन पत्र की ई-मित्र वेबसाईट पर entry करने हेतु लाॅगीन करे।
  • Avail Service से Department Income Tax और Service PAN Card का चयन कर पुछे जा रहे आवेदक की सूचना भरें
  • अंत में भुगतान माध्यम Cash का चयन करते हुए Pay करें।
  • अब आपके DMP पर 96 रू.की रसीद जारी हो जाती है।
  • आवेदन प्रत्र को कियोस्क अपने पास रखे। 
पैन का उपयोग इन कार्यों के लिए अनिवार्य रूप से किया जाता है:
  • आयकर (आईटी) रिटर्न दाखिल करने के लिए,
  • शेयरों की खरीद-बिक्री हेतु डीमैट खाता खुलवाने के लिए,
  • एक बैंक खाता से दूसरे बैंक खाता में 50,000 रुपये या उससे अधिक की राशि निकालने अथवा जमा करने अथवा हस्तांतरित करने पर,
  • टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) जमा करने व वापस पाने के लिए।
  • कोई भी व्यक्ति, फर्म या संयुक्त उपक्रम पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए कोई न्यूनतम
  • अथवा अधिकतम उम्र सीमा नहीं है।
  • अच्छी गुणवत्ता वाली पासपोर्ट आकार की दो रंगीन फोटो
  • शुल्क के रूप में 94 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट या चेक
  • व्यक्तिगत पहचान के प्रमाण की छायाप्रति
  • आवासीय पता के प्रमाण की छायाप्रति
यदि आपने पूर्व में पैन आवेदन किया है तो उसकी वर्तमान स्थिति जानिये और यदि आपका पैन कार्ड खो गया है और आपको अपना पैन नम्बर नहीं पता है तो पुनः आवेदन हेतु अपना पुराना पैन नम्बर जानिये.


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ओशो के विचार एवं लेख - सेक्स एक शक्ति है उसको समझिए



हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम तो बात करने में भयभीत होते हैं। हमने तो सेक्स को इस भांति छिपा कर रख दिया है जैसे वह है ही नहीं, जैसे उसका जीवन में कोई स्थान नहीं है। जब कि सच्चाई यह है कि उससे ज्यादा महत्वपूर्ण मनुष्य के जीवन में और कुछ भी नहीं है। लेकिन उसको छिपाया है, उसको दबाया है। दबाने और छिपाने से मनुष्य सेक्स से मुक्त नहीं हो गया, बल्कि मनुष्य और भी बुरी तरह से सेक्स से ग्रसित हो गया। दमन उलटे परिणाम लाया है। शायद आपमें से किसी ने एक फ्रेंच वैज्ञानिक कुए के एक नियम के संबंध में सुना होगा। वह नियम है: लॉ ऑफ रिवर्स इफेक्ट। कुए ने एक नियम ईजाद किया है, विपरीत परिणाम का नियम। हम जो करना चाहते हैं, हम इस ढंग से कर सकते हैं कि जो हम परिणाम चाहते थे, उससे उलटा परिणाम हो जाए।
ओशो के विचार एवं लेख सेक्स एक शक्ति है, उसको समझिए

कुए कहता है, हमारी चेतना का एक नियम है—लॉ ऑफ रिवर्स इफेक्ट। हम जिस चीज से बचना चाहते हैं, चेतना उसी पर केंद्रित हो जाती है और परिणाम में हम उसी से टकरा जाते हैं। पांच हजार वर्षों से आदमी सेक्स से बचना चाह रहा है और परिणाम इतना हुआ है कि गली-कूचे, हर जगह, जहां भी आदमी जाता है, वहीं सेक्स से टकरा जाता है। वह लॉ ऑफ रिवर्स इफेक्ट मनुष्य की आत्मा को पकड़े हुए है।
जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर।

क्या कभी आपने यह सोचा कि आप चित्त को जहां से बचाना चाहते हैं, चित्त वहीं आकर्षित हो जाता है, वहीं निमंत्रित हो जाता है! जिन लोगों ने मनुष्य को सेक्स के विरोध में समझाया, उन लोगों ने ही मनुष्य को कामुक बनाने का जिम्मा भी अपने ऊपर ले लिया है। मनुष्य की अति कामुकता गलत शिक्षाओं का परिणाम है। और आज भी हम भयभीत होते हैं कि सेक्स की बात न की जाए! क्यों भयभीत होते हैं? भयभीत इसलिए होते हैं कि हमें डर है कि सेक्स के संबंध में बात करने से लोग और कामुक हो जाएंगे।
 जिन लोगों ने मनुष्य को सेक्स के विरोध में समझाया, उन लोगों ने ही मनुष्य को कामुक बनाने का जिम्मा भी अपने ऊपर ले लिया है। मनुष्य की अति कामुकता गलत शिक्षाओं का परिणाम है।

मैं आपको कहना चाहता हूं, यह बिलकुल ही गलत भ्रम है। यह शत प्रतिशत गलत है। पृथ्वी उसी दिन सेक्स से मुक्त होगी, जब हम सेक्स के संबंध में सामान्य, स्वस्थ बातचीत करने में समर्थ हो जाएंगे। जब हम सेक्स को पूरी तरह से समझ सकेंगे, तो ही हम सेक्स का अतिक्रमण कर सकेंगे।
जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर।

जगत में ब्रह्मचर्य का जन्म हो सकता है, मनुष्य सेक्स के ऊपर उठ सकता है, लेकिन सेक्स को समझ कर, सेक्स को पूरी तरह पहचान कर। उस ऊर्जा के पूरे अर्थ, मार्ग, व्यवस्था को जान कर उससे मुक्त हो सकता है। आंखें बंद कर लेने से कोई कभी मुक्त नहीं हो सकता। आंखें बंद कर लेने वाले सोचते हों कि आंख बंद कर लेने से शत्रु समाप्त हो गया है, तो वे पागल हैं। सेक्स के संबंध में आदमी ने शुतुरमुर्ग का व्यवहार किया है आज तक। वह सोचता है, आंख बंद कर लो सेक्स के प्रति तो सेक्स मिट गया। अगर आंख बंद कर लेने से चीजें मिटती होतीं, तो बहुत आसान थी जिंदगी, बहुत आसान होती दुनिया। आंखें बंद करने से कुछ मिटता नहीं, बल्कि जिस चीज के संबंध में हम आंखें बंद करते हैं, हम प्रमाण देते हैं कि हम उससे भयभीत हो गए हैं, हम डर गए हैं। वह हमसे ज्यादा मजबूत है, उससे हम जीत नहीं सकते हैं, इसलिए हम आंख बंद करते हैं। आंख बंद करना कमजोरी का लक्षण है। और सेक्स के बाबत सारी मनुष्य-जाति आंख बंद करके बैठ गई है। न केवल आंख बंद करके बैठ गई है, बल्कि उसने सब तरह की लड़ाई भी सेक्स से ली है। और उसके परिणाम, उसके दुष्परिणाम सारे जगत में ज्ञात हैं।
अगर सौ आदमी पागल होते हैं, तो उसमें से अट्ठानबे आदमी सेक्स को दबाने की वजह से पागल होते हैं। अगर हजारों स्त्रियां हिस्टीरिया से परेशान हैं, तो उसमें सौ में से निन्यानबे स्त्रियों के हिस्टीरिया के, मिरगी के, बेहोशी के पीछे सेक्स की मौजूदगी है, सेक्स का दमन मौजूद है।

अगर सौ आदमी पागल होते हैं, तो उसमें से अट्ठानबे आदमी सेक्स को दबाने की वजह से पागल होते हैं। अगर हजारों स्त्रियां हिस्टीरिया से परेशान हैं, तो उसमें सौ में से निन्यानबे स्त्रियों के हिस्टीरिया के, मिरगी के, बेहोशी के पीछे सेक्स की मौजूदगी है, सेक्स का दमन मौजूद है। अगर आदमी इतना बेचैन, अशांत, इतना दुखी और पीड़ित है, तो इस पीड़ित होने के पीछे उसने जीवन की एक बड़ी शक्ति को बिना समझे उसकी तरफ पीठ खड़ी कर ली है, उसका कारण है। और परिणाम उलटे आते हैं।
वह हैरान हो जाएगा यह जान कर कि आदमी का सारा साहित्य सेक्स ही सेक्स पर क्यों केंद्रित है? आदमी की सारी कविताएं सेक्सुअल क्यों हैं?

अगर हम मनुष्य का साहित्य उठा कर देखें, अगर किसी देवलोक से कभी कोई देवता आए या चंद्रलोक से या मंगल ग्रह से कभी कोई यात्री आए और हमारी किताबें पढ़े, हमारा साहित्य देखे, हमारी कविताएं पढ़े, हमारे चित्र देखे, तो बहुत हैरान हो जाएगा। वह हैरान हो जाएगा यह जान कर कि आदमी का सारा साहित्य सेक्स ही सेक्स पर क्यों केंद्रित है? आदमी की सारी कविताएं सेक्सुअल क्यों हैं? आदमी की सारी कहानियां, सारे उपन्यास सेक्स पर क्यों खड़े हैं? आदमी की हर किताब के ऊपर नंगी औरत की तस्वीर क्यों है? आदमी की हर फिल्म नंगे आदमी की फिल्म क्यों है? वह आदमी बहुत हैरान होगा; अगर कोई मंगल से आकर हमें इस हालत में देखेगा तो बहुत हैरान होगा। वह सोचेगा, आदमी सेक्स के सिवाय क्या कुछ भी नहीं सोचता? और आदमी से अगर पूछेगा, बातचीत करेगा, तो बहुत हैरान हो जाएगा। आदमी बातचीत करेगा आत्मा की, परमात्मा की, स्वर्ग की, मोक्ष की। सेक्स की कभी कोई बात नहीं करेगा! और उसका सारा व्यक्तित्व चारों तरफ से सेक्स से भरा हुआ है! वह मंगल ग्रह का वासी तो बहुत हैरान होगा। वह कहेगा, बातचीत कभी नहीं की जाती जिस चीज की, उसको चारों तरफ से तृप्त करने की हजार-हजार पागल कोशिशें क्यों की जा रही हैं?
सेक्स है फैक्ट, सेक्स जो है वह तथ्य है मनुष्य के जीवन का। और परमात्मा? परमात्मा अभी दूर है। सेक्स हमारे जीवन का तथ्य है।

आदमी को हमने परवर्ट किया है, विकृत किया है और अच्छे नामों के आधार पर विकृत किया है। ब्रह्मचर्य की बात हम करते हैं। लेकिन कभी इस बात की चेष्टा नहीं करते कि पहले मनुष्य की काम की ऊर्जा को समझा जाए, फिर उसे रूपांतरित करने के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। बिना उस ऊर्जा को समझे दमन की, संयम की सारी शिक्षा, मनुष्य को पागल, विक्षिप्त और रुग्ण करेगी। इस संबंध में हमें कोई भी ध्यान नहीं है! यह मनुष्य इतना रुग्ण, इतना दीन-हीन कभी भी न था; इतना विषाक्त भी न था, इतना पायज़नस भी न था, इतना दुखी भी न था।मनुष्य के भीतर जो शक्ति है, उस शक्ति को रूपांतरित करने की, ऊंचा ले जाने की, आकाशगामी बनाने का हमने कोई प्रयास नहीं किया। उस शक्ति के ऊपर हम जबरदस्ती कब्जा करके बैठ गए हैं। वह शक्ति नीचे से ज्वालामुखी की तरह उबल रही है और धक्के दे रही है। वह आदमी को किसी भी क्षण उलटा देने की चेष्टा कर रही है।

क्या आपने कभी सोचा? आप किसी आदमी का नाम भूल सकते हैं, जाति भूल सकते हैं, चेहरा भूल सकते हैं। अगर मैं आप से मिलूं या मुझे आप मिलें तो मैं सब भूल सकता हूं—कि आपका नाम क्या था, आपका चेहरा क्या था, आपकी जाति क्या थी, उम्र क्या थी, आप किस पद पर थे—सब भूल सकता हूं, लेकिन कभी आपको खयाल आया कि आप यह भी भूल सके हैं कि जिससे आप मिले थे, वह आदमी था या औरत? कभी आप भूल सके इस बात को कि जिससे आप मिले थे, वह पुरुष है या स्त्री? कभी पीछे यह संदेह उठा मन में कि वह स्त्री है या पुरुष? नहीं, यह बात आप कभी भी नहीं भूल सके होंगे। क्यों लेकिन? जब सारी बातें भूल जाती हैं तो यह क्यों नहीं भूलता?

हमारे भीतर मन में कहीं सेक्स बहुत अतिशय होकर बैठा है। वह चौबीस घंटे उबल रहा है। इसलिए सब बात भूल जाती है, लेकिन यह बात नहीं भूलती। हम सतत सचेष्ट हैं। यह पृथ्वी तब तक स्वस्थ नहीं हो सकेगी, जब तक आदमी और स्त्रियों के बीच यह दीवार और यह फासला खड़ा हुआ है। यह पृथ्वी तब तक कभी भी शांत नहीं हो सकेगी, जब तक भीतर उबलती हुई आग है और उसके ऊपर हम जबरदस्ती बैठे हुए हैं। उस आग को रोज दबाना पड़ता है। उस आग को प्रतिक्षण दबाए रखना पड़ता है। वह आग हमको भी जला डालती है, सारा जीवन राख कर देती है। लेकिन फिर भी हम विचार करने को राजी नहीं होते—यह आग क्या थी? और मैं आपसे कहता हूं, अगर हम इस आग को समझ लें तो यह आग दुश्मन नहीं है, दोस्त है। अगर हम इस आग को समझ लें तो यह हमें जलाएगी नहीं, हमारे घर को गरम भी कर सकती है सर्दियों में, और हमारी रोटियां भी पका सकती है, और हमारी जिंदगी के लिए सहयोगी और मित्र भी हो सकती है। लाखों साल तक आकाश में बिजली चमकती थी। कभी किसी के ऊपर गिरती थी और जान ले लेती थी। कभी किसी ने सोचा भी न था कि एक दिन घर में पंखा चलाएगी यह बिजली। कभी यह रोशनी करेगी अंधेरे में, यह किसी ने सोचा नहीं था। आज? आज वही बिजली हमारी साथी हो गई है। क्यों? बिजली की तरफ हम आंख मूंद कर खड़े हो जाते तो हम कभी बिजली के राज को न समझ पाते और न कभी उसका उपयोग कर पाते। वह हमारी दुश्मन ही बनी रहती। लेकिन नहीं, आदमी ने बिजली के प्रति दोस्ताना भाव बरता। उसने बिजली को समझने की कोशिश की, उसने प्रयास किए जानने के। और धीरे-धीरे बिजली उसकी साथी हो गई। आज बिना बिजली के क्षण भर जमीन पर रहना मुश्किल मालूम होगा।
 कौन सिखाता है सेक्स आपको इस सेक्स का इतना प्रबल आकर्षण, इतना नैसर्गिक केंद्र क्या है?
 मनुष्य के भीतर बिजली से भी बड़ी ताकत है सेक्स की। मनुष्य के भीतर अणु की शक्ति से भी बड़ी शक्ति है सेक्स की। कभी आपने सोचा लेकिन, यह शक्ति क्या है और कैसे हम इसे रूपांतरित करें? एक छोटे से अणु में इतनी शक्ति है कि हिरोशिमा का पूरा का पूरा एक लाख का नगर भस्म हो सकता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि मनुष्य के काम की ऊर्जा का एक अणु एक नये व्यक्ति को जन्म देता है? उस व्यक्ति में गांधी पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में महावीर पैदा हो सकता है, उस व्यक्ति में बुद्ध पैदा हो सकते हैं, क्राइस्ट पैदा हो सकता है। उससे आइंस्टीन पैदा हो सकता है और न्यूटन पैदा हो सकता है। एक छोटा सा अणु एक मनुष्य की काम-ऊर्जा का, एक गांधी को छिपाए हुए है। गांधी जैसा विराट व्यक्तित्व जन्म पा सकता है।

सेक्स है फैक्ट, सेक्स जो है वह तथ्य है मनुष्य के जीवन का। और परमात्मा? परमात्मा अभी दूर है। सेक्स हमारे जीवन का तथ्य है। इस तथ्य को समझ कर हम परमात्मा के सत्य तक यात्रा कर भी सकते हैं। लेकिन इसे बिना समझे एक इंच आगे नहीं जा हमने कभी यह भी नहीं पूछा कि मनुष्य का इतना आकर्षण क्यों है? कौन सिखाता है सेक्स आपको?

सारी दुनिया तो सिखाने के विरोध में सारे उपाय करती है। मां-बाप चेष्टा करते हैं कि बच्चे को पता न चल जाए। शिक्षक चेष्टा करते हैं। धर्म-शास्त्र चेष्टा करते हैं। कहीं कोई स्कूल नहीं, कहीं कोई यूनिवर्सिटी नहीं। लेकिन आदमी अचानक एक दिन पाता है कि सारे प्राण काम की आतुरता से भर गए हैं! यह कैसे हो जाता है? बिना सिखाए यह कैसे हो जाता है? सत्य की शिक्षा दी जाती है, प्रेम की शिक्षा दी जाती है, उसका तो कोई पता नहीं चलता। इस सेक्स का इतना प्रबल आकर्षण, इतना नैसर्गिक केंद्र क्या है? जरूर इसमें कोई रहस्य है और इसे समझना जरूरी है। तो शायद हम इससे मुक्त भी हो सकते हैं।


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