हिन्‍दी चिठ्ठा जगत मे भूत



मैने कुछ समय पूर्व समीर लाल जी के ब्‍लाग पर अपनी टिप्‍पणी देखी थी, उस पर से मेरा नाम गायब था और आज फिर एक अपनी टिप्‍पणी देखी तो फिर से मेरा नाम गायब था। हिन्‍दी चिठ्ठाकारी में कोई जादूगर तो नही आ गया है। आज जो यह टिप्‍पणी देखी Anonymous said...
ज्‍यादा कुछ नही बस बढिया है। :)
 
दूसरी टिप्‍प्‍णी का उल्‍लेख नही कर रहा हूँ क्‍योकि वह विवादित है पर समीर लाल जी के ब्‍लाग परही है। :)
 
यह मेरी टिप्‍पणी थी पर मेरे नाम की जगह लिख गया Anonymous हो गया। क्‍या माजरा है इसका भी शोध होना चाहिये, कहॉं है नीलिमा जी (अन्‍यथा मत लिजियेगा), कही ब्‍लाग जगत मे भूत प्रेत तो नही आ गया है। कहॉं है ई-ओझा माफ कीजियेगा मतलब था ई-पडि़त से पूजा अनुष्‍ठान जो करवाना था, आज टिप्‍प्‍णी से ही नाम गायब हो रहा है कल को लेख, कविता और फोटो मे से गायब हुआ तो ............. !


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4 comments:

notepad said...

महाशक्ति जी कैसी बाते करते है, भूत वूत मन का वहम होत है बस. दो सवालो का जवाब दीजिए पहले तो. मौत ने आपका क्या बिगाडा है जो उसके गले पडना चाह्ते है? और दूसरा कि भूत कही आप ही.... बाप रे बाप !!!!

mahashakti said...

आदरणीया नोटपैड जी, भूत तो केवल शीर्षक था,
वैसे मेरे टिप्‍पणी गायब हुई इसका क्‍या मजरा है।
मौत तो अन्तिम सत्‍य है, जो हर व्‍यक्ति से साथ्‍ होती है हर पल न जाने किस घड़ी गले मे आ जाये, आज मै आपके प्रश्‍न का उत्‍तर दे रहा हूँ, मौत देवी कब प्रश्‍न्‍न हो जाये और मै न रहूँ।

आप किसी चिठ्ठाकार से पूछ सकती है, कि कौन मेरे से भूत से परेशान नही है। :)

notepad said...

"मौत तो अन्तिम सत्य है..."
अन्तिम तो कुछ नही है और है भी तो तुम अन्त पर पहुचने की जल्दी मे क्यो हो .यात्रा का आनन्द स्वय यात्रा मे है गन्तव्य मे नही.और सच भी कुछ होता है अब तो यह भी एक विवाद है .खैर...!!

Pratik Pandey said...

चिट्ठा जगत में पहले से ही इतने भूत हैं, नए भूत की घुसने की जुर्रत भी नहीं होगी ।