विवदित लेख, नारद और पंगेबाज- मोहल्‍ला



पहली बात- विवदित लेख,
मुझे अति प्रश्‍न्‍नता हो रहा है कि लोगों ने भड़काऊ लेखों पर टिप्‍पणी करना छोड़ दिया है। मेरे पिछले लेख मे एक भी टिप्‍प्‍णी नही आई, मात्र भूले बिसरे केन्‍द्र से अरूण जी ही आये। ऐसा नही है कि उसे किसी ने पढ़ा ही नही था। पढने वालो की संख्‍या भी कम नहीं थी। नारद के आकड़ों के अनुसार कुल 60 के करीब हिट्स प्राप्‍त हुई थी। ऐसा नही था कि मेरा लेख केवल भड़काऊ था, बल्कि वह सत्‍य के निकट भी था। मैने किसी भी प्रकार की अर्नगल बातों से परहेज किया था। मै अर्नगल बातों पर विश्वास नही करता हूँ, और सत्य बातों को ही रखने का पक्षधर हूँ। पिछले लेख पर टिप्पणी न होने का कारण यह भी हो सकता है जो आप खुद जानते है। शायद मोहल्‍ला तथा मोहल्‍ला प्रेमियों को मेरी चुनौ‍ती स्वीकार नही है और इनकी पत्रकारिता मात्र छलावा है यह अपने वैमनस्‍य रूप को टीवी पर दिखा नही पाते है तो इसलिये इन्‍होने ब्‍लागिग का सहारा लेना पड़ रहा है। अगर इनको लगता है कि ये सत्य कह रहे है तो जितनी पकड़ के साथ ये लोग ब्‍लाग मे तहलका मचाये हुऐ है उतनी ही तेजी से टीवी मे भी हाथ आजमाऐ।
 
दूसरी बात- नारद
कल मैने अपने ब्लाग पर एक चित्र डाला था करीब रात 8 बजे के आस पास जब मै रात्रि 10 बजे देखता हूँ कि मेरा ब्‍लाग कहीं पर दिख ही नही रहा था। पिछले कई घन्‍टों से पहले और दूसरे नम्‍बर की पोस्‍ट अपने स्‍थान पर यथावथ थे। फिर मैने नीचे देखना शुरू किया तो पता चला कि वह काफी नीचे चली गई है। अर्थात दोपहर 12 बजे के भी बहुत आगें और मात्र 12 धन्‍टे भी मेरी वह पोस्‍ट पहले पृष्ठ पर नही रही जबकि आज भी मेरे पहले से पोस् की गई पोस्ट आज भी यथावत है। शायद मुहल्‍ले वालो की जगह मेरी रेटिंग कम हो गई हो। :)
 
तीसरी बात- पंगेबाज- मोहल्‍ला
पंगेबाज बनाम मोहल्‍ला - मोहल्‍ला प्रकरण की उपज है पंगेबाजी और इस पंगेबाजी के दोषी है हम सब चिठ्ठाकारों द्वारा मोहल्‍ला को दी जाने वाली छूट के परिणाम स्‍वरूप उदय हुआ था पंगेबाजी का । न तो अरूण जी उस समय सक्रिय चिठ्ठाकारिता कर रहे थे। जो कुछ भी मोहल्‍ले की अर्नगल बाते छापना शुरू किया था निश्चित रूप से मोहल्‍ला के गलत बयानों से जन समूहिक की भावनाओं का उत्‍तेजित हो जाना स्‍वाभाविक ही था। निश्चित है कि जब किसी के स्‍वाभिमान को ललकारा जायेगा तो निश्चित है कि रक्‍त शिराओं मे विद्युत प्रवाहित हो ही जाती है। अनेकों लोगों को गुजरात दंगा तो दिखता है किनतु गोधरा प्रकारण क्‍यों नही दिखता है। यदि गोधरा मे ट्रेन की बोगियॉं न जलाई गई होती तो गुजरात के आगे की भयावह स्थिति देखने को न मिलती।
एक बन्‍धु ने आज अपने लेख मे जिक्र किया था कि जब एक हिन्‍दू मरता है तो पॉच मुस्‍लमान मारे जाते है। तो प्रश्‍न यह उठता है कि वह एक हिन्‍दू अखिर क्‍यों मारा जाता है? क्‍या इसका जवाब किसी के पास है? गुजरात दंगे वाले क्‍यों गोरखपुर और मऊ के दगें को भूल जाते है जिसमे अनेकों हिन्‍दूओं की जाने गई किन्‍तु किस धर्मर्निपेक्ष रहनुमाओं को नही लगा कि वह भी मरने वाले अदमी ही थे। बस कुछ कमी थी तो वे मुस्‍लमान न थे नही तो यह एक राष्‍ट्रीय स्‍तर का मुद्दा बना और धर्मर्निपेक्षता के मौलवी अपना हिन्‍दू विरोधी तकिया कलाम पढ़ना शुरू कर देते।
भारत एक स्‍वतंत्र विचारों वाला देश है जहॉं पर हर प्रकार के लोग रहते है। सभी को अपने रीति रिवाजों से जीने का हक है। आज मुस्लिम आजादी के समय से 6 से 20 प्रतिशत पर जा पहुचे है जबकि बग्‍लादेश और पाकिस्‍तान मे हिन्‍दू 10 से 2 प्रतिशत पर आ पहुचे है तो आप सोच ही सकते है कि मुस्लिमों का कितना खतरा है भारत में? पाकिस्‍तान में मुख्‍य न्‍यायमूर्ति भगवान दास को अपने धर्म की शपथ नही दी सकती है वह भी सिर्फ अल्‍लाह की शपथ ले सकते है।
एक दूसरे को गाली देने से कोई फायदा नही है। दूसरों की कमियों को बताने से पहले अगर अच्‍छाईयों को देखें तो जिस बात को लेकर यहाँ झगडा हो रहा है वह नही होने वाला था।


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क्‍या ईसा और मुहम्‍द से गणेश अलग है?



हाल में ही मुझे गणेश जी की चित्र की आवाश्‍यकता हुई और मैने गूगल की शरण लिया तो देखा तो उपरोक्‍त चित्र पाया, इसे देख कर मन में क्षोभ भी उत्‍पन्‍न हुआ। कि विश्‍व मे किस तरह हिन्‍दू देवी देवताओं का अपमान किया जाता है। और विभिन्‍न कम्‍पनिया अपने प्रचार मे उनका प्रयोग करते है। अगर ईसा और मुहम्‍मद साहब के सम्‍बन्‍ध मे यह ठीक नही है तो क्‍या गणेश जी के सम्‍बन्‍ध मे यह कहाँ तक उचित है।
एक कम्‍पनी तो विभिन्‍न देवी देवताओं के चित्र वस्‍त्रों पर प्रिन्‍ट है। वस्‍त्रों की बात तक तो ठीक थी पर उसे अन्‍त: वस्‍त्रों पर प्रिन्‍ट करना क्‍या हिन्‍दू भावनाओं को चोट पहुँचने के लिये नही है। तनिक विचार करें कि क्‍या यह उचित है ?



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लगातार 18 मैचों मे हार का क्‍या कारण है ?



हे राम! क्‍या हो रहा है ? लगातार 18 मैचों मे मेरी क्रिकेट टीम को हार का सामना करना पड़ा, यह दुर्भाग्‍य का विषय है कि जिस टीम मे मै रहता हूँ उस टीम को हार का मुँह देखना पड़ता है। यह मात्र संयोग है या कुछ और ही।
हर दिन नही टीम बनाई जाती है। और सभी की खेल के प्रति सभी खिलाडि़यों की यह जिज्ञासा होती है कि क्‍या आज प्रमेन्‍द्र भइया (मैं) जिस टीम मे रहेगें वह टीम जितेगी कि नही ? मैच के बाद हर खिलाडी के जुबान पर एक ही बात होती है कि आज फिर जिस टीम मे प्रमेन्‍द्र भइया थे वह टीम हार गई।
यह शायद फील्‍ड का दोष है या कुछ और जब से हम लोग डीएसए क्रिकेट स्‍टेडियम मे खेलने जा रहे है मेरी टीम को जीत का स्‍वाद नही मिला है। मै यह कह सकता हूँ कि हर व्‍यक्ति को जीत का स्‍वाद मिल गया है, केवल मुझे छोड़कर।
ऐसा नही है कि जब भी मै हारा हूँ, मैने खराब प्रदर्शन किया है 18 मैचों मे केवल मै एक बार अपने प्रर्दशन के कारण हारा हूँ। जिसमे मैने एक ओवर मे 22 रन दनादन दिये थे। बाकी सर्वकालीन 18 मैचों मे अब तक लगभग 22 ओवरों 57 विकेट ले चुका हूँ जिसमे एक ओवर की लगातार चार बालों पर चार विकेट लिये थे। रनों का भी अम्‍बार लगाने मे कभी पीछे रहा हूँ। अब तक 222 से ज्‍यादा रन बना चुका हूँ।
पर आज के मै मे तो हद हो गई जीता जीताया मैच हाथ से निकट गया, आठ ओवरों मे जीत के लिये 42 रन बनाने थे। दो खिलाड़ी 18 गेंदों मे मात्र 6 रन ही बना पाये थे चूकिं हमारा नियम होता है कि हर किसी को बैटिंग मे प्रथमिकता देने की होती है। पर एक खिलाड़ी तो लगातार 14 गेंदे झेल गया। तो टीम मे कप्‍तान ने उसे रिटायर कर मुझे उतरने को कहा और मै रनिग छोर पर खडा था तभी वालिंग होती है और एक विकेट गिर जाता है। स्‍कोर होता है 19 गेंद 7 रन 1 विकेट। अर्थात जीतने के लिये 29 गेंदों पर 35 रन फिर स्‍ट्राइक मुझे मिलती है और फिर अगले दो ओवरों मे 1 छक्‍का और 2 चौका स्‍कोर होता है 5 ओवर 36 बन गये थे । और अगले ही गेद पर मै लम्‍बा शॉट खेलने के और एक अच्‍छे कैच के कारण आउट होना पडा और मेरे बाद दो विकेट शेष थे जीतने के लिये चाहिये था 1 गेंदों मे 7 रन पर धन्‍य हो मेरी टीम उसके आगे बिना रन बनाये आल आउट हो गई। सभी को लग रहा था कि आज मेरी टीम जीत जायेगी किल्‍तु नियति को मेरी हार ही पंसद थी। और हर जुबान पर फिर से यही चर्चा कि प्रमेन्‍द्र भइया जिस टीम मे रहते हे वो टीम डीएसए क्रिकेट स्‍टेडियम कभी नही जीती है। और सब हंसी के साथ घर चल देते है इस चर्चा केसाथ कि क्‍या कर मेरी टीम जी‍तेगी। मेरी हार का क्‍या कारण है क्‍या आपको पता है ?


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जिस मोहल्‍ले में गन्‍दगी तो वहॉं मत जाओं



गन्‍दगी किसी को पंसद नही है फिर भी क्‍यों जाते हो गन्‍दगी पर ? मोहल्‍ला नामक एक कुख्‍यात ब्‍लाग समाज समाज विद्वेश फैलाने का काम कर रहा है माफ कीजिएगा मैने समाज का नाम दे कर गलती कर रहा हूँ। कम्‍प्युटर तक ही सीमित है मोहल्‍ले की गन्‍दगी। केवल इनका उद्देश्‍य है कि हम लोगों मे फूट डाला जाये और ये लोग बैठ तमाशा देखें। 
इन लोगों की स्थिति मुहल्‍ले की गन्‍दी सुअर की तरह है कि कितना भी अच्‍छा आप उनको खाना दीजिये किनतु अपशिस्‍ट पदार्थ के बिना उनका पेट नही भरता उन्‍ही की प्रजाति मे कुछ इस प्रकार के पत्रकार भी आते है। जो कितने भी विषय लिखने को न हो किन्‍तु इन्‍हे हिन्‍दुत्‍व विरोध के अलावा कुछ सूझता ही नही है। 
मै तो सिर्फ इनता कहूँगा कि मोहल्‍ले की गलत पोस्‍ट का कद्धपि उत्‍तर मत दीजिये। गन्‍दगी को एक जगह तक सीमित रखिये। निश्चित है कि गन्‍दगी मे जायेगें तो आपके साथ गन्‍दगी आयेगी ही चाहे वो पैरों से ही क्‍यों न आये। जहॉं तक टिप्‍पणी की बात है तो जो भी अन्‍य टिप्‍पणी उनके ब्‍लाग पर आती है न तो उनका कोई मलिक होता है। यह सब टिप्‍पणी मोहल्‍ले के कर्त्‍ताधर्ता स्‍वयं बैठ कर कर देते है। क्‍योकि खुराफात के लिये कुछ तो करना ही होगा।


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स्‍टार न्‍यूज पर हमला मीडिया के बडबोले मुँह पर तमाचा



स्‍टार न्‍यूज पर लोकतंत्र पर हमला न हो कर बल्कि छद्म पत्रकारिता के मुँह पर किया गया वज्र पात था। आज की पत्रकरिता केवल और केवल बिकती है, पैसा फेको तमाशा देखों के तर्ज पर। आज के दौर मे मीडिया पैसों की वह रोटी जिसे कुत्‍ता भी नही पूछता पर निर्भर करती है। भारत मे न्‍यूज चैनल कुकुरमुत्‍ते की तरह उपज गये है। और हर के पास एक से बढ़कर एक न्‍यूज होती है जो केवल उनके पास ही होती है और दूसरे न्‍यूज चैनल का उस महान न्‍यूज का नामोनिशान नही होता है।
 
अपने आप को लोकतंत्र का चौथा स्‍तम्‍भ कहने वाली मीडिया की नीव अब कमजोर हो गई है। जहॉं पत्रकारिता सत्‍य के लिये जानी जाती थी, वही आज कौड़ी के भाव बिक रही है। हर न्‍यूज चैनल पर किसी न किसी राजनैतिक पार्टी का अधिपत्‍य है। तो एसे मे मीडिया पर विश्‍वास करना खुद से विश्‍वासघात के बराबर है।


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पुदीने के फायदे और पुदीने के औषधीय गुण



पुदीने से हम सभी परिचित है और हम स‍ही भिन्न तरीके से अपने जीवन में पुदीने का उपयोग करते है जैसे  कि पुदीने से चटनी बनाई जाती है, या जलजीरा बनाने में इस्तेमाल होता है लेकिन यहां हम आपको बता दें के पुदीने में कई तरह के औषधीय गुण होते हैं, और इनसे बड़ी-बड़ी तकलीफों का इलाज होता है। और पुदीना बहुत सारी एंटीबायोटिक दवाओं में भी काम में लिया जाता है अगर आप जानना चाहते हैं के पुदीने के क्या क्या फायदे हैं और क्या इसके औषधीय गुण हैं इस पोस्ट को आप पूरा अंत तक पढ़ते रहे और जानें पुदीने के औषधीय गुणों के बारे में। पुदीना गुणों की खान है साधारण सा दिखने वाला यह पौधा अपने आप में बहुत शक्तिशाली और चमत्कारी प्रभाव रखता है गर्मियों में पुदीने की चटनी खाना भी सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। पुदीना औषधीय गुणों के साथ-साथ आपके चेहरे के सौंदर्य निखार के लिए भी बहुत लाभदायक है, इसके अलावा पुदीना एक बहुत अच्छी एंटीबायोटिक दवा भी है। इस पोस्ट में हम आज हम लोग पुदीने से होने वाले फायदे के बारे में ही बात करेंगे।
पुदीने के फायदे अथवा पुदीने के लाभ
  • पुदीने में फाइबर मौजूद रहते हैं और इसमें मौजूद फाइबर आपके कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कम करने में मदद करता है, और इसमें मौजूद मैग्नीशियम आपकी हड्डियों को ताकत देता है और इन्हें मजबूत बनाता है। बढे व्यक्ति को उल्टी होने पर 2 चम्मच पुदीना हर 2 घंटे में उस रोगी को पिलाएं इससे जी मचलना या उलटी जैसी बीमारी में बहुत जल्दी आराम मिल जाता है।
  • अगर आपको पेट संबंधी और अन्य बीमारियां हैं तो पुदीने की पत्तियों को ताजा नींबू का रस और इस के बराबर मात्रा में शहद के साथ मिलाकर लेने से पेट की लगभग सभी बीमारियों में जल्दी आराम मिल जाता है।
  • सर्दी जुकाम या पुराना नजला हो इसके लिए आप थोड़ा पुदीने का रस लें और इसमें काली मिर्च और थोड़ा सा काला नमक मिला लें और जिस तरह हम लोग चाय बनाते हैं ठीक वैसे ही इस को चाय की तरह उबालकर पीने से सर्दी जुकाम और खांसी व बुखार में बहुत जल्द राहत मिल जाती है।
  • अगर किसी को बहुत ज्यादा हिचकी आ रही हैं तो उसके लिए ताज़ा पुदीने की कुछ पत्तियां चबाने से यह उनका रोशनी छोड़कर इसकी वाले मरीज को पिलाने से तुरंत हिचकिया बंद हो जाती हैं।
  • माहवारी सही और समय पर ना आने पर आप पुदीने की सूखी पत्तियों को चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को दिन में दो बार शहद के साथ मिलाकर नियमित रुप से कुछ दिल देने से माहवारी सही से आती है और समय पर आना शुरू हो जाती है।
  • अगर किसी को चोट लग जाए या फिर खरोंच आ जाए तो उस स्थान पर कुछ पुदीने की ताजा पत्तियां लेकर उन्हें पीसकर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है। और अगर आपको किसी भी तरह की दाद, खाज, खुजली है या और अन्य प्रकार का कोई और चर्म रोग है तो आप ताजा पुदीने की पत्तियों को लेकर अच्छी तरह पीस लें और इस लेप को अपनी प्रभावित त्वचा में लगाएं इससे बहुत जल्दी आराम मिलता है।
  • अगर आपके मुंह से बदबू आती है तो इसके लिए आप बाजार से पुदीना की पत्तियां ले आएं और इसको छांव में अच्छी तरह से सुखा लें, और इसके बाद इन सूखी पत्तियों का अच्छी तरह से चूर्ण बना लें और आप इससे मंजन की तरह इस्तेमाल करें ऐसा करने से आपके मसूड़े स्वस्थ होंगे और आपके मुंह से दुर्गंध आना बिल्कुल बंद हो जाएगी। इस प्रयोग को आप कम से कम 2 सप्ताह या ज्यादा से ज्यादा 1 महीने तक कर सकते हैं।
  • गले के रोगों में पुदीने के रस को नमक के पानी के साथ मिलाकर कुल्ला करने से आप की आवाज भी साफ होती है और यदि गले में भारीपन या गला बैठने की शिकायत हो तो वह भी इससे दूर हो जाती है।
  • गर्मी की वजह से घबराहट होने पर या जी मिचलाने पर एक चम्मच सूखे पुदीने की पत्तियां और आधा छोटा चम्मच इलायची का चूर्ण एक गिलास पानी में उबालकर, ठंडा होने के बाद पीने से बहुत जल्दी आराम मिलता है और साथ ही हैजा होने की शिकायत है तो प्याज का रस और नींबू का रस पुदीना के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से बहुत जल्द आराम मिल जाता है।
  • हैजे में पुदीना, प्याज का रस, नींबू का रस बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। उल्टी-दस्त, हैजा हो तो आधा कप पुदीना का रस हर दो घंटे से रोगी को पिलाएं।
  • अजीर्ण होने पर पुदीने का रस पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  • पेटदर्द और अरुचि में 3 ग्राम पुदीने के रस में जीरा, हींग, कालीमिर्च, कुछ नमक डालकर गर्म करके पीने से लाभ होता है।
  • प्रसव के समय पुदीने का रस पिलाने से प्रसव आसानी से हो जाता है।
  • बिच्छू या बर्रे के दंश स्थान पर पुदीने का अर्क लगाने से यह विष को खींच लेता है और दर्द को भी शांत करता है।
  • दस ग्राम पुदीना व बीस ग्राम गुड़ दो सौ ग्राम पानी में उबालकर पिलाने से बार-बार उछलने वाली पित्ती ठीक हो जाती है।
  • पुदीने को पानी में उबालकर थोड़ी चीनी मिलाकर उसे गर्म-गर्म चाय की तरह पीने से बुखार दूर होकर बुखार के कारण आई निर्बलता भी दूर होती है।
  • धनिया, सौंफ व जीरा समभाग में लेकर उसे भिगोकर पीस लें। फिर 100 ग्राम पानी मिलाकर छान लें। इसमें पुदीने का अर्क मिलाकर पीने से उल्टी का शमन होता है।
  • पुदीने के पत्तों को पीसकर शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार चाटने से अतिसार सें राहत मिलती है।
  • तलवे में गर्मी के कारण आग पड़ने पर पुदीने का रस लगाना लाभकारी होता है।
  • हरे पुदीने की 20-25 पत्तियां, मिश्री व सौंफ 10-10 ग्राम और कालीमिर्च 2-3 दाने इन सबको पीस लें और सूती, साफ कपड़े में रखकर निचोड़ लें। इस रस की एक चम्मच मात्रा लेकर एक कप कुनकुने पानी में डालकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
  • ताजा-हरा पुदीना पीसकर चेहरे पर बीस मिनट तक लगा लें। फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। यह त्वचा की गर्मी निकाल देता है।
  • हरा पुदीना पीसकर उसमें नींबू के रस की दो-तीन बूँद डालकर चेहरे पर लेप करें। कुछ देर लगा रहने दें। बाद में चेहरा ठंडे पानी से धो डालें। कुछ दिनों के प्रयोग से मुँहासे दूर हो जाएँगे तथा चेहरे की कांति खिल उठेगी।
  • पुदीने का सत निकालकर साबुन के पानी में घोलकर सिर पर डालें। 15-20 मिनट तक सिर में लगा रहने दें। बाद में सिर को जल से धो लें। दो-तीन बार इस प्रयोग को करने से बालों में पड़ गई जुएँ मर जाएँगी।
  • पुदीने के ताजे पत्तों को मसलकर मूर्छित व्यक्ति को सुंघाने से मूर्छा दूर होती है।
  • पुदीने और सौंठ का क्वाथ बनाकर पीने से सर्दी के कारण होने वाले बुखार में राहत मिलती है।
  • इसमें मौजूद फ़ाइबर कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है और मैगनीशियम हड्डियों को ताक़त देता है। उल्टी होने पर आधा कप पुदीना रोगी को पिलाएं। फ़ायदा होगा। इसकी पत्तियों का रस नींबू-शहद के साथ लेने से पेट की बीमारियों में आराम मिलता है।
  • पुदीना बहुत ठंडा होता है और यह डाइजेशन की प्रॉब्लम को दूर कर देता है। यह पेट के कीड़ों को भी मार देता है।
  • पुदीने का रस काली मिर्च व काले नमक के साथ चाय की तरह उबालकर पीने से जुकाम, खांसी व बुखार में राहत मिलती है। पुदीने की पत्तियां चबाने या उनका रस निचोड़कर पीने से हिचकियां बंद हो जाती हैं।
सौंदर्य के लिए पुदीने का उपयोग कैसे करें
तेलीय त्वचा के लिए पुदीने का फेशियल
अगर आपकी त्वचा तैलीय है तो आपके लिए पुदीने से बना हुआ फेशियल काफी अच्छा रहेगा इसके लिए आप दो बड़े चम्मच अच्छी तरह से पिसी हुई पुदीने की पत्तियां दो चम्मच दही और एक बड़ा चम्मच ओटमील इन सबको मिलाकर एक घोड़ा ले बना लें और इस लेप को अपने चेहरे पर 15 मिनट तक लगा रहने दें इसके बाद इसे आपके चेहरे को ठंडे पानी से धो लें सप्ताह में कम से कम दो बार यह प्रयोग करने से आपकी तेलीय त्वचा सही हो जाती है और साथ ही आपके चेहरे से कील मुंहासे और झाइयां दूर होती हैं। पुदीने के रस को मुलतानी मिट्टी के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लेप करने से आपकी ऑयली त्वचा सही हो जाती है और चेहरे से झुर्रियां कम हो जाती है इसके अलावा इसको लगाने से आपके चेहरे की चमक बढ़ जाती है और अगर आप शराब में पुदीने की पत्तियों को पीसकर में चेहरे पर लगाएंगे तो इससे दाग धब्बे और झाइयां भी बिल्कुल साफ हो जाती हैं।



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मेरी दो पहियों की गाड़ी जिसमे बैठने का तैयार थी नौ सवारी




मैने गत दिनों एक पोस्‍ट "आजा मेरी गाड़ी मे बैठ जा" अपने अन्‍य Timeloss : समय नष्‍ट करने का एक भ्रष्‍‍ट साधन पर डाला था उसमे बैठने के लिसे 9 यात्रियों ने लिफ्ट माँगा था। चूकिं मै 9 इन लिये नही कह रहा कि मुझे नौ टिप्‍प्‍णियॉं मिली थी। कारण यह है समीर लाल जी, यह कारण भी नही है कि उन्‍होने दो बार टिप्‍प्‍णी कि मुख्‍य कारण है समीर लाल जी की साईज, समीर लाल जी के साईज के हिसाब से उनका दोहरा टिकट लगता है।
चलिये यह तो टिकट का मामला था किसी तरह समीर लाल जी ने इसे निपटा लिया किन्‍तु समीर लाल जी सहित नौ यात्रियों की समस्‍या थी कि गाड़ी रूक ही नही थी, इसका भी कारण था कि टिप्‍प्‍णी के रूप मे कोई लेडिस सवारी दिख नही रही थी। :)
भारत की गाडि़यों मे एक स्‍लोगन देखने को मिलता है वों है - बुरी नज़र वाले तेरा मुँह काला, उसी प्रकार मेरें पोस्‍ट के अन्‍त मे यह स्‍लोगन है-
जो मेरे ब्‍लाग पर आया है और पढ़ कर बिना टिप्‍पणी के जायेगा।
मेरी बददुआ है कि उसके अगले लेख की मॉंग का सिन्‍दूर उजड जायेगा।
मॉंग का सिन्‍दूर उजड तात्‍पर्य है कोई टिप्‍प्‍णी न आने से है। ;)
यह कहने का भी एक कारण है कल मैने साभार एक लेख कट पेस्‍ट किया था लगभग एक दर्जन बन्‍धु दर्शन देने आये थे किन्‍तु मेरी कट पेस्‍ट और जागरण पर पढने की मेहनत पर थूकना(कुटिप्‍पणी करना कि अच्‍छा कट पेस्‍ट किया है भाई) भी उचित नही समझा। अब एक सूनी माँग के मुँह से श्राप नही तो फूल झडे़गा। ;)


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त्रिफला चूर्ण लाभ, उपयोग, खुराक और दुष्प्रभाव



त्रिफला आयुर्वेद में कई रोगों का सटीक इलाज करता है।  यह 3 औषधियों से बनता है। बेहड, आंवला और हरड इन तीनों के मिश्रण से बना चूर्ण त्रिफला कहा जाता है। ये प्रकृति का इंसान के लिए रोगनाशक और आरोग्य देने वाली महत्वपूर्ण दवाई है। जिसके बारे में हर इंसान को पता होना चाहिए। ये एक तरह की एन्टिबायोटिक है। त्रिफला आपको किसी भी आयुर्वेदिक दुकान पर मिल सकता है। लेकिन आपको त्रिफला का सेवन कैसे करना है और कितनी मात्रा में करना है ये भी आपको पता होना चाहिए। हाल में हुए एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है की त्रिफला के सेवन से कैंसर के सेल नहीं बढ़ते । त्रिफला के नियमित सेवन से चर्म रोग, मूत्र रोग और सिर से संबन्धित बीमारियां जड़ से ख़त्म करती है।

 त्रिफला के फायदे
  • सांस सम्‍बंधी समस्‍या
    त्रिफला का प्रयोग सांस से जुड़े रोगों के उपचार में भी किया जाता है। त्रिफला के नियमित सेवन से सांस लेने पर होने वाली समस्या दूर होती है और फेफड़ों के संक्रमण (Lungs Infection) में भी फायदा होता है।
  • मोटापा
    ज्यादा मोटापे या चर्बी से परेशान लोगों को त्रिफला के सेवन की सलाह दी जाती है। त्रिफला, शरीर से वसा (Fat) को कम करता है, जो मोटापे को दूर करने में मदद करता है।
  • डायबिटीज में उपयोगी
    डायबिटीज या शुगर के इलाज में त्रिफला बहुत प्रभावी औषधि होती है। यह पेन्‍क्रियाज को प्रभावित करता है, जो रक्त में इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाता की मात्रा है और इंसुलिन, शर्करा के स्‍तर को संतुलित रखता है।
  • प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएजो लोग कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण बार- बार बीमार होते हैं, उन्हें त्रिफला का सेवन करना चाहिए। त्रिफला के सेवन से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और सभी प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता रखता है। इसके अलावा यह शरीर में एंटीबॉडी की मात्रा को बढ़ाता है, जो एंटीजन के खिलाफ लड़ते है और शरीर को जीवाणुओं से मुक्त रखता है।

  • एंटी- ऑक्‍सीडेंट
    त्रिफला का सेवन रोजाना करना चाहिए। क्योंकि इसमें एंटी- ऑक्‍सीडेंट के गुण मौजूद होते हैं, जो बढ़ती उम्र के असर को कम करता है और आपको उम्र के अनुसार ज्‍यादा जवां रखता है।
  • रक्त शोधक
    त्‍वचा से जुड़े रोगों के उपचार में भी त्रिफला अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। त्रिफला, शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालकर ब्‍लड यानि खून साफ करता है और त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं से आराम दिलाता है।
  • पेट के रोगों में लाभदायक
    त्रिफला की तीनों जड़ी- बूटियां (हरड, बहेडा व आंवला) शरीर की आंतरिक सफाई करती हैं। त्रिफला चूर्ण को गौमूत्र के साथ सेवन करने से अफारा, पेट दर्द, प्लीहा वृद्धि आदि समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
  • सिरदर्द में लाभदायक
    आज की भागदौड़ वाली जीवनशैली के कारण तनाव या सिरदर्द जैसी समस्या आम बात हो गई है। इस तरह की समस्‍या को दूर करने में त्रिफला लाभकारी हो सकता है। त्रिफला, हल्दी, नीम की छाल, गिलोय आदि को पानी में तब तक उबालें, जब तक पानी आधा न रह जाए। बाद में इस पानी को छानकर सुबह- शाम गुड़ या शक्कर के साथ सेवन करें। ऐसा करने से तनाव, अवसाद, सिरदर्द आदि की समस्याएं दूर हो जाती है।
  • कब्‍ज में कारगर
    कब्‍ज की परेशानी में त्रिफला बहुत ही कारगर साबित होता है। इसके सेवन से कब्‍ज की पुरानी से पुरानी समस्‍या भी दूर हो जाती है। रात को सोते समय त्रिफला चूर्ण को गर्म दूध या गर्म पानी के साथ खाने से कब्ज की परेशानी में आराम मिलता है।
  • आंखों की रोशनी बढ़ाए
    त्रिफला का रोजाना सेवन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच त्रिफला भिगोकर रखें और सुबह भिगोए हुए त्रिफला को मसल और छानकर आंखों को धोएं। ऐसा करने आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके अलावा त्रिफला चूर्ण को पानी में भिगो कर रखें और शाम पानी छानकर पीएं। यह आंखों से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर करता है।
  • मुंह की दुर्गन्‍ध दूर करे
    यदि आपके मुंह से दुर्गन्‍ध आती है तो त्रिफला आपके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। एक गिलास ताजे पानी में एक चम्मच त्रिफला दो से तीन घंटे के लिए भिगोएं और बाद में इस पानी अच्छी तरह कुल्ला करें, मुंह की दुर्गन्ध से छुटकारा अवश्य मिलेगा। इसके अलावा त्रिफला चूर्ण से मंजन करने से भी मुंह के छाले और मुंह की दुर्गन्ध भी दूर होते हैं।
  • हीमोग्‍लोबिन बढ़ाए
    यदि आप एनीमिया या खून की समस्या से परेशान हैं तो त्रिफला आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है। त्रिफला का नियमित रूप से सेवन करने पर शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं बढ़ती व संतुलित रहती हैं जो रक्त में हीमोग्‍लोबिन बढ़ाने का काम करती है।
 त्रिफला के नुकसान
  • बिना सलाह त्रिफला लेने से हो सकता है नुकसान
    वैसे तो त्रिफला बिल्कुल सुरक्षित और असरदार आयुर्वेदिक दवा है लेकिन अगर इसे बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के लेते रहने से कुछ समस्याएं हो सकती हैं। दरअसल, पुराने जमाने में लोगों को एक साथ कई रोग नहीं होते थे लेकिन आज व्यक्ति को एक साथ की रोग होते हैं। ऐसे में अगर वह बिना डॉक्टर की सलाह पर त्रिफला या ऐसी अन्य दवाएं लेता है तो हो सकता है कि उसे दूसरी समस्याओं का सामना करना पड़े।
  • गर्भावस्था में परहेज
    त्रिफला की तासीर गर्म और खुस्क होती है, इसलिए गर्भवती महिलाओं को त्रिफला का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। यदि कोई महिला गर्भावस्था के दौरान त्रिफला का सेवन करती है तो इससे घबराहट, पेचिश व अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
  • हो सकता है डायरिया
    त्रिफला अक्सर गैस्ट्रिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है, लेकिन कई बार बिना परामर्श के अधिक मात्रा में सेवन करने से डायरिया जैसी समस्या हो सकती है। इसके अलावा इसका दुष्प्रभाव शरीर में पानी की कमी यानी डीहाइड्रेशन की समस्या भी पैदा कर सकता है।
  • अनिद्रा की समस्यात्रिफला का अत्यधिक सेवन करने से कई बार लोगों को अनिद्रा (नींद न आना) की परेशानी हो जाती है
  • ब्लड प्रेशर पर प्रभावत्रिफला के अधिक सेवन से लूज मोशन यानी दस्त की शिकायत हो जाती है, जिससे रोगी का ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है। ऐसे स्थिति में ब्लड प्रेशर के मरीज को कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
त्रिफला लेते समय ये सावधानियाँ रखें
  • 6 साल से कम उम्र के बच्चों को त्रिफला न दें।
  • कुछ लोगों को त्रिफला के सेवन से ज़्यादा नींद आती है।
  • त्रिफला सेहत के लिए वरदान है लेकिन प्रेग्नेंसी और स्तनपान के दौरान इसका सेवन न करें।
  • रात में त्रिफला के सेवन से कुछ लोगों में ज़्यादा मूत्र आने की समस्या भी पायी जाती है इसलिए ऐसी शिकायत होने पर रात्रि में इसका सेवन न करें।
  • अगर आप लम्बे समय तक इसका सेवन करते हैं तो इसकी मात्रा कम लें और छोटी अवधि के लिए त्रिफला का सेवन करें तो त्रिफला अधिक मात्रा में ले सकते हैं।


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ब्‍लाग मालिक द्वारा की जा रही है अपने ब्‍लाग पर दूसरों के नाम पर टिप्‍पणियॉं



कतिपय एक ब्‍लॉंग के लेख पर ब्‍लाग मालिकों द्वारा की जा रही है दूसरों के नाम पर टिप्‍पणियॉं जो गलत है और ब्‍लागिंग मर्यादा के खिलाफ है। हिन्‍दी ब्‍लागिंग के प्रतिष्‍ठत सदस्‍यों से अ‍नुरोध है कि मामले की गम्‍भीरता देखते हुए उचित कार्यवाही करे। चूकिं दूसरे के नाम की टिप्‍पणी खुद करना, शोभनीय नही है। अखिर कोई किसी के लेख को कैसे बिना अनुमति क टिप्‍पणी के रूप मे ले सकता है? लेख अपनी जगह मायने रखता है और टिप्‍पणी अपने जगह।विषय की गम्‍भीरता को देखें क्‍योकि यह हिन्‍दी चिठ्ठाकारिता को ठेस पहुँचा‍ती है।


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अल्‍पसंख्य‍क मामले मे स्‍थागानादेश



इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के कल के निर्णय को उत्‍तर प्रदेश सरकार द्वारा चुनौती देते हुऐ इलाहाबाद हाईकोर्ट में विशेष पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस एसआर आलम और कृष्णमुरारी की खंडपीठ ने फ़ैसले पर रोक लगा दी।
निर्णय पर रोक लगाने से पूर्व भारत सरकार के पूर्व वरिष्‍ठ स्‍थाई अधिवक्‍ता श्री बी.एन.सिंह ने न्‍यायालय से इस मामले पक्ष बनने की बात कहते हुऐ कहा कि यह मामला काफी महत्‍वपूर्ण है और इसे सोमवार को रखा जाये ताकि इसमें इन्‍टर विनर अप्‍लीकेशन दाखिल की जा सके। न्‍यायालय ने उक्‍त याचना को अनसुना करते हुऐ कहा पहले आप इन्‍टर विनर अप्‍लीकेसन लाये तभी आपको सुना जा सकता है। इसके जवाब मे श्री सिंह ने कहा यह पुनर्विचार याचिका इतनी जल्‍दी आई है और इसे न्‍यायालय ने इतनी त्‍वरित सुनवाई हेतु न्‍यायलय मे मगवा लिया है अत: इसमें इन्‍टर विनर नही दिया जा सका है।
इस मामले मे सरकार का पक्ष रखते हुए उत्तर प्रदेश के महा-अधिवक्ता एसएमए काज़मी ने कि न्यायालय ने ये फ़ैसला अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया है क्योंकि याचिका में ये मुद्दा उठाया ही नहीं गया था। तकनीकि आधार पर न्‍यायलय ने कल के रोक लगा कर सुनवाई की अगली तिथि 14/5/2007 निर्धारित कर दिया है।


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माननीय न्‍यायमूर्ति पर ही आक्षेप! क्‍या यही लोकतंत्र है ?



माननीय इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के तत्‍कालीन ऐतिहासिक फैसला कि उत्‍तर प्रदेश के मुसलमान अब अल्‍पसंखक नही है। न्‍यायालय के इस फैसले से सेक्‍युलर राजनैतिक दलों मे ज्‍यादा बेचैनी है कि उनके प्रिय वोटर अब अल्‍पसंख्‍यक नही रह गये है। बेचैनी होना स्‍वाभाविक भी है हमेशा मुयलमानों को बरगला कर वोट की राजनीति खेलते थे। अखिर सेक्‍यूलिरिज्‍म के नाम पर हिन्‍दूओं के साथ भेद भाव ? हिन्‍दु हितों की बात करना हिन्‍दुत्‍व व सम्‍प्रादयिकता है, और मुस्लिम हितों की बात करना धर्मनिरपेक्षता। यह कैसा राजनीति ?
माननीय इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के माननीय न्‍यायमूर्ति श्री शम्‍भू नाथ श्रीवास्‍तव के इस निर्णय को यह कहा जाना कहा तक उचित होगा कि यह फैसला असवैधानिक ? मानानीय न्‍यायमूर्ति ने अपने फैसले मे क्‍या गलत कहा? इसका विश्‍लेषण इन निर्णय का विरोध करने वालों को करना चाहिये। सो‍चनीय विषय है कि जब भारत आजाद हुआ था तब भारत मे मुस्लिमों की जनसंख्‍या का प्रतिशत 5% प्रतिशत के आसपास था इस प्रकार इस समप्रदाय की जनसंख्‍या मे कई गुनी वृद्धि देखने के मिली। जिसकी जनसंख्‍या मे चार गुने से अधिक की वृ‍द्धि हो रही है वह अल्‍पसंख्‍यक कैसे हो सकता है? अगर विश्‍लेषण किया जाये तो यह प्रतीत होता है कि भारत के सभी राज्‍यों मे मुस्लिम धर्म की जनसंख्‍या 10% से अधिक है और यह कई राज्‍यो मे 20-30 प्रतिशत से उपर है कई राज्‍य ऐसे है जहॉं हिन्‍दूओं की जनसंख्‍या 30% से भी कम है। वहॉं भी हिन्‍दू समुदाय बहुसंख्‍यक हो सकता तो तो मुस्लिम समुदाय को अल्‍पसंख्‍यक धो‍षित किया जाना कहॉं तक उचित होगा?
अखिर अल्‍पसंयकों को नापने के लिये क्‍या पैमाना होना चाहिये? आज अपना देश विश्‍व का दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम देश है भले ही धर्म निरपेक्ष राष्‍ट्र कहा जाये किन्‍तु मुस्लिमों की जनसंख्‍या को झुटलाया नही जा सकता है। वह देश जहॉं विश्‍व के दूसरे नम्बर पर सबसे अधिक मुस्लिम रहते है वहॉं पर मुस्‍लिम अल्‍पसंख्‍यक कैसे हो सकते है। देश के ऐसे मक्‍कार नेताओं की तुच्छ सोच का नतीजा है कि इनती अधिक संख्‍या मे होने के बाद भी मुसिलमों को अपने को अल्‍पसंख्‍यक धोषित करने के लिये संर्घष करना पड़ रहा है। और मुस्लिम समान इस भ्रम मे हे कि उन्‍हे इस धूर्तो के बल पर अल्‍पसंख्‍यक बनाये रखा जायेगा।
मै टेलीविजन देख रहा था और उस समय एक समाचार चैनल मे एक समाजवादी पार्टी के मुस्लिम नेता की हताशा देखते ही दिख रही थी। मै उनकी बात को सुन का सकते मे आ गया क्‍ि कोई व्‍यक्ति इस तरह से माननीय न्‍यायमूर्ति के उपर अक्षेप कैसे कर सकता है। यह तो प्रत्‍यक्ष रूप से न्‍यायमूर्ति तथा न्‍यायलय की अवमानना का प्रश्‍न उठता है। उन नेता के कथन थे -
यह न्‍यायाधीश राजनीति से प्रेरित है और इसके पहले भी वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय पर विवादित निर्णय दे चुके है। यह उत्तर प्रदेश के चुनाव के देखते हुए फैसला आया है।
नेता द्वारा यह कहा जाना पूरी न्‍याय व्‍यवस्‍था पर प्रश्‍न चिन्‍ह लगाना है। क्‍या अब मुस्लिमों का न्‍यायालय के प्रति कोई उत्‍तर दायित्‍व नही ? लगता है कि यही स्थिति रही तो कोई भी न्‍यायाधीश न्‍याय की तरफ सोच भी नही सकता है। मुझे याद है कि एक बिहार उच्‍च न्‍यायालय के माननीय न्‍यायमूर्ति ने एक बार अपने फैसले मे मुस्लिम ध्‍वनि विस्‍तारक(लाउडस्‍पीकर) के सम्‍बन्‍ध मे फैसला दिया था पूरी पूरा का पूरा मुस्लिम समुदाय न्‍यायमूर्ति के खिलाफ हो गया, उनके आवास पर पत्‍थर बाजी कि गई बाद मे न्‍यायमूर्ति को अपना तबादला अन्‍य राज्‍य मे करवाना पढ़ा। क्‍या इस मुस्लिम नेता का बयान भउकाउ नही था कया यह माननीय न्‍यायमूर्ति के खिलाफ उनमाद का प्रतीक नही था।
इस फैसले पर कुछ लोगों का कहना है कि यह असवै‍धानिक फैसला है पर हाल मे माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने अपने आदेश मे कहा था कि उसे सविंधान का अधिकार है वह तय कर सकता है कि क्‍या संवैधानिक है या असंवैधानिक, त‍ब उच्‍च न्‍यायलय के फैसले को असवैधनिक कहना कहॉं तक सही है? अगर फैसला गलत है तो क्‍या सवोच्‍च न्‍यायालय की मौत हो गई है। माननीय न्‍यायमूर्तियों पर सीधा अक्षेप किया जाना कहॉं तक सहीहै ?क्‍या इससे न्‍याय व्‍यवस्‍था बरकरार रहेगी?


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इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय का एतिहासिक फैसला



आज इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय ने एतिहासिक फैसला दिया कि उत्‍तर प्रदेश मे मुस्लिम अल्‍पसंख्‍यक नही है। न्‍यायालय ने कहा कि चूकिं मुस्लिमों की जनसंख्‍या उत्‍तर प्रदेश मे 18% से ज्‍यादा है इस लिये इन्‍हे अल्‍पसंख्‍यक कहा जाना गलत है। न्‍यायालय ने यह भी कहा कि उत्‍तर प्रदेश मे एक दर्जन से ज्‍यादा ऐसे जिले है जहॉं पर मुस्लिमों की जनसंख्‍या 40% से ज्‍यादा है।
नवीन जनगणना के अनुसार न्‍यायालय ने कहा कि भारत की आजादी के समय से घोषित अल्‍पसंख्‍यक सदा हमेशा के लिये अल्‍पसंख्‍यक घोषित नही रह सकते है। जैसा कि अल्‍पसंख्‍यकों के सम्‍बन्‍ध में आजादी के समय अल्‍पसंख्‍यकों के सम्‍बन्‍ध में 5% कम को ही अल्‍पसंख्‍यक माना जाय। जोकि आजादी के समय हिन्‍दू धर्म के अलवॉं सभी धर्मो की जनसंख्‍या 5% से कम थी जो कि आज मुस्लिम समुदाय आज 18% से ज्‍यादा है।
न्‍यायालय के इस आदेश के बाद यह तय हो जाता है कि मुस्लिम समुदाय जो पिछले कई दशकों की अल्‍पसंख्‍यक सुख भोग रहे थे वह अब नही भोग पायेगें।


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मुलायम हमारी चड्डी है



चड्डी की महिमा किसी से छिपी नही है। वो भी अगर चड्डी मुलायम हो तो बात कि क्‍या ? मुलायम देश की आन बान शान, रोशनी, अधेरा, रोजी, मोना हो सकते है तो चड्डी क्‍यो नही हो सकते ? चड्डी की महिमा किसी से छिपी नही है चाहे मंत्री हो या प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री हो या फिर सी एम का पीए या‍ गरीब से गरीब और अमीर से अमीर चड्डी हमारे सभी के जीवन का अभिन्‍न अंग है चड्डी रोजी, रोशनी और मोना की तरह।

आजकल के दौर मे टीवी मे एक चड्डी मे एक युवक पूंरे देश में दिखता है, कोई और कारण नही है सिर्फ अपनी चड्डी की वजह से एक लड़की उस पर फिदा भी हो जाती है। शायद विज्ञापन मे चड्डी की ताकत का एहसास दिलाने की कोशिस किया जाता है कि देख बेटा चड्डी मे कितना दम है? चड्डी तो एक फैशन हो गया है तरह तरह की कलात्‍मक चड्डियॉं बाजार मे आ रही है, कुछ तो ऐसी है कि पहनो न पहनों बराबर है, उनकी ही मॉंग बाजार मे ज्‍यादा है लोगों कि सोच होगी मै इसमे कैसा लगूँगा? मुझे भी इस तरह के अंडरवियर मे देख कर मेरी प्रेमिका टीवी वाले की तरह किस करेगी।

उत्‍तर प्रदेश के चुनाव में चड्डी और भी महत्‍वपूर्ण हो जायेगी क्‍योकि मुलायम हमारी चड्डी जो ठहरा, भाई आप ही विचार कीजिऐ कोई अपनी सबसे मुलायम चड्डी का विरोध कैसे कर सकता है। चुनावों मे च ड्डी की भूमिका काफी बढ़ गई है हाल मे आयोजित एक चड्डी समारोह मे प्रदेश के मुखिया ने अगली बार सत्‍ता मे आने पर प्रत्‍येक नागरिकों को मुफ्त चड्डी देने की घोषणा की है, धोषणा के ट्रायल के रूप मे इस चुनाव मे पार्टी कार्यकर्ता को चुनाव प्रचार के दौर केवल अण्‍डवियर मे ही रहने के निर्देश जारी किये गये है। इस चुनाव के लिये कुछ नमूने के रूप मे कुछ अण्‍डरवियर रखें गयें है। जो पार्टी के कार्यकर्ताओं की इइसव च्‍छा के अनुसार दिये जायेगे। यहॉं धोषणा पत्र मे कुछ चुनिन्‍दा चड्डी ही रखी गई है। कुछ खास माडल के अण्‍डर वियर केवल कार्यलय मे ही उपलब्‍ध है क्‍योकि इनके चित्र धोषण पत्र मे छापने से चुनाव आचार संहिता का उलंघन माना जाता । चुनाव कार्यालय अर्थात मुलायम अण्‍डरवियर केन्‍द्र है जहॉं पर कार्यकर्ता अपने मन की अन्‍य डिजायन की उपलब्घ है।
 
 
खास तौर पर युवा प्रत्‍याशियों के लिये
 
ये है वाम पंथी भाईयों की चड्डी





 
यह है खास तौर पर डाक्‍टर प्रत्‍यासियों के लिये
 
यह है बाहुबली प्रत्याशियों की चड्डी
 
कैजुअल चड्डी सेक्‍यूलर पार्टी के प्रत्‍याशियों के लिये

 
यह खास तौर पर उन प्रत्‍याशियों की चड्डी है जो आधुनिक है सफेद पोश नही रहना चहते है और जो कम कपडों के शौकिन है।


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विन्‍डोज लाइव राइटर का प्रयोग



काफी दिनों पहले इसके बारे मे सुना था और और प्रयोग करने की कोशिस भी किया किन्‍तु सफलता नही मिला। आज प्रात: श्री अफलातून जी ने फिर से इसके बारे मे बताया और मै इसका प्रयोग करने की ओर अग्रसर हुआ। आज यह पहला लेख इससे डालने जा रहा हूँ अभी सफलता की आशा कम ही है।
आज अफलातून जी ने बताया‍ कि इसमे ऑफ लाइन लिखकर आप अपने लेख को अपने ब्‍लाग पर डाल सकते है। यही देखने का प्रयास कर रहा हूँ कि यह चमत्‍कार होता है कि नही। मै अक्सर आँन लाइन होकर लेख लिखता हूँ और बिना पढ़े उसे पोस्‍ट कर देता हूँ। जिसके कारण मेरे लेखों मे व्‍याकराणात्‍म अशुद्धियॉं देखने को मिलती है। लाइव राइटर के कारण अब इस प्रकार की अशुद्धियॉं कम देखने को मिल सकती है।
पहले तो मै अक्‍सर माइक्रोसॉफ्ट वर्ड पर लिख कर अपने ब्‍लाग पर जा कर पेस्‍ट कर देता था इससे भी गल्‍तियॉं कम होती थी। ठीक है अब मै इसे पोस्‍ट करने का प्रयास करता हूँ देखता हूँ कि यह होता है कि नही ।


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एक भीनीं सी मुस्‍कान और भगवान के प्रति धन्‍यवाद



मै प्रतापगढ़ जा रहा था एक रेलवे क्रासिंग पड़ती है उस समय अमृतसर से हाबड़ा जाने वाली ट्रेन का समय था। फाटक बंद था। मै भी गाड़ी से उतर कर रेल को देखने पटरी की ओर चल दिया तभी देखता हूँ कि एक कुत्‍ता रेल की पटरी पर दौड़ रहा था उसके पीछे ट्रेन थी ट्रेन से भी तेज दौड़ने के प्रयास मे कुत्‍ता और तेज दौड़ रहा था पर पर वह कुदरत की चाल से ट्रेन को पछाड़ पाने में असमर्थ था। ट्रेन का अगला हिस्सा आगे कि ओर कुछ ज्‍यादा झुका होता है ट्रेन से पहले कुत्‍ते का एक टक्कर मारी और कुत्‍ता नीचे की ओर लेट गया हो सकता हो पीड़ा के मारे ही क्‍यों न हो फिर बचने की प्रयास में खड़ा होता है और फिर वह डिब्‍बों के नीचे भाग से टकराया और फिर लेट गया। ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि तीसरी बार जब वह उठा तो ट्रेन जा चुकी थी और और वह पूर्ण रूपेण जीवित था। पर चोट तो लगी ही थी। जैसा कि मैने इस दृश्‍य का देखने वाला पहला शक्‍स था मेरे तो रोगटें खड़े हो गये। मेरे मन ईश्‍वर से बस इतनी ही प्रार्थना थी कि वह बच जाये। कहते है कि भगवान से कुछ सच्‍चे हृदय से माँगों तो भगवान कभी इनकार नही करते और आज प्रत्‍यक्ष रूप से देखने को मिला। मेरी निगाह एक टक कुत्‍ते पर पर थी और वह लगड़ाते हुऐ जा रहा था। मेरे साथ वह कई दर्जन लोगों के मुख पर एक भीनीं सी मुस्‍कान और भगवान के प्रति धन्‍यवाद देखने को मिल रहा था। मै भी अपने गन्‍तव्य की और चल दिया।


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पढ़ोगें तो मूर्ख बन जाओंगे के साथ कुछ गम्‍भीर प्रश्‍न



आज अप्रेल फूल दिवस है, यानि अंग्रेज भाईयों ने हम भार‍तीयों के लियें मूर्ख बनाने का दिन भी दिन भी निर्धारित कर गये है। मै इस दिवस को नही मानता हूँ, पर देशी हवा के बयार मे मूर्खाता का ऐसा प्रचलन हुआ है कि‍ मै सोचने को मजबूर हूँ कि क्या इसकी भी आवाश्‍यकता ?
 यह हमारी तुच्‍छ मानसिकता की सोच है कि हम न्‍यू इयर, वैलेंटाइन डे, अप्रेल फूल डे, जैसे अन्‍तार्राष्‍ट्रीय दिवस तो जो शोर से मनाते है। किन्‍तु हम कुछ अन्‍य इनसे भी ज्‍यादा महात्‍वपूर्ण दिवस क्यो भूल जाते है। मै पाश्चात संस्‍कृति अपनाने का विरोधी नही हूँ , विरोधी हूँ तो पाश्‍चात संस्कृति की गंदगी अपनाने का।
जब हम न्‍यू इयर, वैलेंटाइन डे, अप्रेल फूल डे मनाते है तो मनाऐ किन्‍तु हमने विश्‍व मातृ दिवस, विश्‍व पितृ दिवस, विश्‍व संगीत दिवस, विश्‍व फोटों ग्राफी दिवस, चिक्तिसक दिवस, पत्रकारिता दिवस, विश्‍व थ्रियेटर दिवस, अन्‍तर्राष्‍ट्रीय परिवार दिवस, अन्‍तार्राष्‍ट्रीस प्रेस स्‍वतन्‍त्रता दिवस, विश्‍व श्रमिक दिवस, विश्‍व विरासत दिवस, राष्‍ट्रीय युवा दिवस, विश्‍वमितव्‍ययिता दिवस, विश्‍व खाद्य दिवस और विश्‍व मांसाहार दिवस की ओर कभी ध्‍यान दिया ?
 मैने यहॉं पर जिनते भी दिवस गिनाऐ है, उन सभी दिवसों का सम्‍बन्‍ध किसी ने किसी हिन्‍दी चिठ्ठाकार से अवश्‍य है। पर शोक और क्षोभ का विषय है कि कोई भी कभी भी इन सर्वाधिक मत्‍वपूर्ण दिवसों पर न तो कभी लिखा ही न ही बधाई का आदान प्रदान हुआ।
 क्‍या हमने पाश्‍चात गंदगी को एकत्र करने का ठेका ले रखा है ? यह सोचनीय विषय है। आज मै नारद पर गया तो चारों दिशाओं मे मानवता के हत्‍यारे जार्ज बुश का चेहरा नजर आ रहा था। जैसा कि मुझे अनुमान तो था कि आज मूर्ख दिवस है पर इसे देख कर पक्‍का यकीन भी हो गया है। एक दो लेख को देखा तो मजाक मय ही महोल था। फिर मुझे लगा कहीं सभी के चिठ्ठे पर मूर्ख बनाने का अभियान न चल रहा हो। और कही किसी पर टिप्‍प्‍णी किया तो मूर्ख की श्रेणी में न खड़ाकर दिया जाये।

मैनें आज के दिन के सारे लेख जिनकी हेडिग नारद पर थी सभी एक साथ एक सामान्‍य सा वाक्‍य (को पढ़ोगें तोमूर्ख बन जाओंग) जोड़ कर पढ़ना चालू किया तो
ग़ज़लें और कविताएँ इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
कविता सीखो हे कविराज… इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
धर्म के नाम पर - को पढ़ोगें तो मूर्ख बन जाओंगे
आरक्षण : चाहिये ही चाहिये को पढ़ोगें तो मूर्ख बन जाओंगे
कादम्बिनी कार्यकारी सम्पादक श्री विष्णु नागर की क़लम से इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
एप्रिल वाला फ़ूल के फल इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
सोवियत संघ में नेताजी के साथ क्या हुआ? इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
गूगल टीआईएसपी: ब्रॉडबैंड दा बाप इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
शर्त सिर्फ़ एकः हिन्दी में लिखो (प्रतियोगिता) इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
फुरसतिया बोले हमहू साइट बनैबे… इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
यह कदम्ब का पेड़ इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
न्‍यायपालिका पर ताला क्‍यों नहीं लगा देते? इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
सौ चूहे खाकर चले अर्जुन सिंह हज करने इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
अप्रेल-फूल इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
आरक्षण : आ....क थू इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
हिटलर से बड़ा तानाशाह राहुल गांधी इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
Super Hot & Sexy Angelina Jolie !!! इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!
Bunch of Jokers?…..really? इसे पढ़ोगे तो मूर्ख बन जाओगे!

आगे और भी है और आप को पढ़ोगें तो मूर्ख बन जाओंगे लगा कर पढ़ सकते है। अब आप खुद सोचिये कि कौन आज लेख पढ़ कर मूर्ख बनना चाहेगा।
एक बात तो मुझे समझ मे आती कि जो लोग दूसरे सचेत लोगों को मूर्ख बनाने मे लगे होकर हँसते है वे उसने बड़े मूर्ख है जो वास्‍तव मे मूर्ख होते है।


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