।। संघ प्रार्थना ।।



 Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) Bhagwa Dwaj

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।१।।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।२।।

समुत्कर्षनिःश्रेयस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम् ।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् ।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।३।।

।। भारत माता की जय ।।


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9 comments:

Udan Tashtari said...

हमारे घर के पास शाखा का कैम्प लगता था, वहीं से गुजरते समय सुनी प्रार्थना लगती है.

Anonymous said...

माफ़ करना क्या आप इसका अर्थ बता सकते है? गलत ना समझे मै मुस्लिम हू इसका अर्थ जनना चाह्ता हू

Anonymous said...
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mahashakti said...

उपरोक्‍त हटाई गई टिप्‍पणी में प्रार्थना का अपमान किया गया था इस लिये हटाई गई।

xxx said...

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम् ।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते ।।१।।


प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये ।
अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिं
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं
स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत् ।।२।।


समुत्कर्षनिःश्रेयस्यैकमुग्रं
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्रानिशम् ।
विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम् ।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम् ।।३।।


।। भारत माता की जय ।।

पद्म सिंह said...

अगर कोई इस प्रार्थना का अर्थ जानना चाहता है तो बड़ी अच्छी बात है...लोग संघ पर अनायास जो आरोप लगाते हैं उनको यह प्रार्थना ही स्पष्ट कर देगी कि संघ का वास्तविक लक्ष्य क्या है ...
अर्थ-
पैरा १- हे ममता मयी वत्सला मातृभूमि तुम्हें प्रणाम
इस हिन्दू भूमि पर मै सुख पूर्वक बड़ा हुआ हूँ
इस भूमि की रक्षा के लिए मेरा यह नश्वर शरीर मै मातृभूमि को अर्पण करते हुए इस भूमि को बार बार प्रणाम करता हूँ.
२- हे सर्व शक्तिमान परमेश्वर इस हिन्दू राष्ट्र के घटक के रूप में मै तुमको सादर प्रणाम करता हूँ. आपके ही कार्य के लिए हम कटिबद्ध हुए हैं. हमें इस कार्य को पूरा करने हेतु आशीर्वाद दें. हमें ऐसी शक्ति दीजिए कि हम इस पूरे विश्व को जीत सकें और ऐसी नम्रता दें कि पूरा विश्व हमारे सामने नतमस्तक हो. यह रास्ता काँटों भरा है, इस कार्य को हमने स्वयं स्वीकारा है और इसे सुगम कर काटों रहित करेंगे.
३-उच्च ऐसा आध्यात्मिक सुख और महान ऐसी ऐहिक समृद्धि को प्राप्त करने का एकमात्र श्रेष्ट साधन उग्र वीरव्रत की भावना हमारे अंदर सदैव जलती रहे. तीव्र और अखण्ड ध्येय निष्ठां की भावना हमारे अंतःकरण में जलती रहे. आपकी असीम कृपा से हमारी यह विजय शालिनी संगठित कार्यशक्ति हमारे धर्म का संरक्षण कर इस राष्ट्र को परम वैभव पर ले जाने में समर्थ हो.

अर्थात हमारे लिए राष्ट्र धर्म ही सर्वोपरि है...
भारत माता की जय !

Vijay Goel said...

माँ भारती की स्वर्णिम माटी हमें है चन्दन।
माटी हमारी पूजा माटी हमारा वंदन।।

punit modha said...

Bharat mata ki jay

Akhilesh Tripathi said...

ओ3म् आब्रह्मन आ ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायताम् ।आराष्ट्रे राजन्यःशूरऽषव्योऽतिव्याधिःमहारथो जायताम् ।