गज़ल



तुम्हारे दिल में मेरा प्यार कितना रहता है,
बताऊं कैसे कि इकरार कितना रहता है।
समन्दर हूँ लेकिन, गोते लगाने से पेश्तर,
हमारे प्यार का एहसास कितना रहता है।
न चाहते हुए भी सब्ज़ बाग में मैंने,
तेरे किरदार से तकरार किया है मैंने।
दिल के टुकड़े को एक जरीना ने देखो,
मरते दम तक दिखाया कि प्यार रहता है।


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5 comments:

Anonymous said...

इसे मैं गज़ल मानने से खुले आम इंकार करता हूँ, गज़ल को इस तरह बेइज्जत न करें तो बेहतर.

Anonymous said...

इसे मैं गज़ल मानने से खुले आम इंकार करता हूँ, गज़ल को इस तरह बेइज्जत न करें तो बेहतर.

Udan Tashtari said...

भाव उम्दा हैं. गजल के नियम का पालन नही हुआ, बस. बेनामी की टिप्पनी को दिल से न लगायें मगर ध्यान जरुर दें.

mahashakti said...

चूकिं हम कोई परिपक्‍व रचनाकार या कवि नही है। इस लिये हो सकता है कि उक्‍त रचना में कोई त्रुटि रह गई हो। निश्चित रूप से आपकी टिप्‍पणी हमें मर्गदर्शन करती रहेगी।

आपकी नसीहततों से कवि/गज़लकार सीख लेगें।

टिप्‍पणी के लिये धन्‍यवाद

Tara Chandra Gupta said...

benami ji vaise to mai kavita,gazal ki rachna nahi karta. maine koshish ki hi.dire- dheere sudar aa jayega. vaise mai aapko yad dilana chahta hoo ki jaishanker prasad ko rachna prarmbh me unki hindi samagh me nahi aati thi lekin.................mai lekh likhta hoon.