हमारा भारत ऐसे ही महान होगा ?





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Breaking News : हैंडग्रेनेड और एके 47 का जखीरा मुसलमान के घर में



Exclusive
आज हमारे पड़ोस के मुस्लिम घर में हैंडग्रेनेड, एके-47, तंमाचे, बन्दूख, गोला बरूद और तेजाब का भारी जखीरा मिला, गौरतलब हो कि यह व्यक्ति काग्रेस का स्थानीय नेता है। यह मामला प्रकाश में यों आया कि पिता और पुत्र के बीच भारी विवाद हुआ और इस विवाद की गम्भीरता इस कदर बढ़ी कि नौबत तेजाब फेकने तक आ गई। पिता ने पुत्र पर तेजाब फेकने का प्रयास किया। लेकिन यहॉं कहावत शिद्ध करते हुये बेटे ने मियॉं की जूती मियाँ पर ही दे मारी और यह विवाद थाने जा पहुँचा। बेटे ने अपने मामला अपने ऊपर आता देख घर में चल रहे पिता के सारे आतंकवादी कारनामे को उजागर कर पिता के नाम को रौशन करने में कोई कसर नही छोड़ी।

पुलिस द्वारा मारे गये छापे में इस प्रकार की घातक जखीरे से आस-पास के लोग दहशत में थे। लोग आतंकवाद का चेहरा इनती नजदीक से देखकर हतप्रभ थे और उनमें भय भी व्यप्त था कि ये औजार किस लिये और किस षड़यंत्र को अंजाम देने के लिये एकत्र किये जा रहे थे?


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हम भी बन गये चर्चित चिट्ठाकार



बहुत दिनों के बाद हमारे दिन भी आखिर फिर ही गये, जब एक महीने में 2 दर्जन से ज्‍यादा पोस्‍टे ठेलते थे तो कोई फूछता ही नही था और आज दिन यह है महीने में 2-4 पोस्‍टें लिखने पर हमें चर्चित चिट्ठाकार की श्रेणी मे लाकर खड़ा कर दिया गया है।
 
जैसा की आपने पढ़ा ही होगा कि मैने कुछ दिनों पूर्व मेरी और श्री आलोक जी के मध्‍य इलाहाबाद जक्‍ंशन पर एक लघु मुलाकात हुई थी जिसकी पोस्‍ट मैने लिखी और आपने पढ़ी थी। अब यही से हिन्‍दी फिल्‍मो की तरह रोमांचक मोड़ आ जाता है। बहुत दिनों बाद जंग खाये ब्‍लाग राईटर का उपयोग कर पोस्‍ट लिख रहा था। उसमें महाशक्ति के दो एकान्‍ट लिख रहे थे, पहला वो जिस पर मै नियमि‍त लिखता हूँ दूसरा वो जिस पर मै टेम्‍पलेट आदि का टेस्‍ट करता हूँ। भूल वश वह दूसरे खाते चली गई और प्रकाशित भी हो गई। सबसे बड़ी बात ये कि ये भी भी पढ़ी गई और टिप्‍प्‍णी भी बटोरे में सफल रही है। ये सब कुछ हो रहा था और मुझे इसका पता ही नही चला और मै बाट के बटोही महाशक्ति पर की पोस्‍ट पर टिप्‍पडियों की बाट जोह रहा था।
 
मुझे अपनी इस पोस्ट की जानकारी आज चिट्ठाचर्चा के जरिये हुई। जब चिट्ठाचर्चा पर गया तो नये चिट्ठाकार के रूप में महाशक्ति का एक और नाम पाया। आश्‍चर्य हुआ की हमारी ब्‍लाग के हेडर पर लिखी पंचलाईन पढ़ने के बाद भी हमसे टकराने की हिम्‍मत कौन कर रहा है। मन कह रहा था कि शेर बूढ़ा क्‍या हुआ, सियारो की लोय लग गई। चिट्ठाचर्चा से लिंक खोला लिंक काम नही कर रहा था। और भी सस्‍पेस जागृत हुआ कि लेख लिखा गया और डीलिट भी होगा गया, और हमें पता नही। लिंक में सुधार किया तो पता चला कि ये तो हम ही है। खोदा पहाड़ निकला चूहिया।
 
काफी दिनो बाद चिट्ठाचर्चा में अपनी चर्चा होते देख चर्चित होने का भी अनुभव प्राप्‍त कर लिया। मुझे खेद है कि उस नये ब्‍लाग पर आई प्रतिक्रियाओं का जवाब नही दे सका। चिट्ठाचर्चा का भी आभार की मुझे मेरे ही लेख की सूचना दी। :)




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हिन्‍दी के प्रथम चिट्ठाकार से मुलाकात



काफी दिनो से मुझे समय नही मिल रहा था किन्‍तु काफी लोग कहते है कि समय निकाला जाता है, उनमें से मै भी एक हूँ। अपनी व्‍यस्‍तताओं के आगे मुझे बहुत कुछ सूझ नही रहा था। हिन्‍दी के प्रथम चिट्ठकार श्री आलोक जी का प्रयाग आने के कार्यक्रम का मेल मुझे दो दिन पूर्व ही मिल गया था। किन्‍तु मै मेल का प्रतिउत्‍तर न दे सका और न ही काल के द्वारा कोई सूचना ही किन्‍तु उनकी आई मेल को मैने तारांकित कर लिया था। 14 दिसम्‍बर को करीब 11 बजे मैने श्री आलोक जी से सम्‍पर्क किया और उन्‍होने बताया कि वो करीब 2 बजे की ट्रेन से वापसी कर रहे है, इसी पर एक और इलाहाबाद जक्शंन पर ब्‍लागर मीट की रूप रेखा तैयार हो गई।
 
किन्‍तु यही पर एक दिक्‍कत हो गई, करीब 12.45 पर मेरे मोबाइल की बैटरी काफी काम हो गई थी मुझे भय था कि कही यहॉं मिलने के समय पर समय यह खत्‍म न हो जाये। मैने उसे स्‍वीच ऑफ करके चर्जिग पर लगा दिया। जो करीब 1.05 तक चार्जिग पर लगा रहा। जैसे ही मैने उसे चर्जिग से हटाया तो आलोक जी का मिस्‍ड काल की सूचना और उनका SMS दोनो से मिली और मैने उन्‍हे फोन लगाया और 5 मिनट पर स्‍टेशन पर पहुँचने की बात कही। इस बार मै काफी जल्‍दी में था, दूध का जला छांछ भी फूँक फुँक भी पीता है। जब समीर लाल जी आये थे वो दिन हमें याद था अब रिस्‍क लेने के मूड में नही था। हमने प्‍लेट फार्म टिकट भी नही लिया, जबकि मेरे भइया बार बार लेने के लिये कह रहे थे। टिकट न लेने का भी कारण था जो मेरे और भइया के बीच रहस्‍य है।
 
स्‍टेशन पर चाय का जिक्र तो श्री आलोक जी कर ही चुके है, पर उन्होने बिस्‍किट का जिक्र नही किया वो हम कर देने है। आलोक जी ने चाय की कै‍न्‍टीन से ग्लूकोस बिस्किट की मॉंग ही किन्‍तु दुकादार ने कहा कि नही है, मैने उसे प्रियागोल्‍ड का CnC देने को कहा जो स्‍वाद में 50-50 और Parle Krack Jack की तरह ही था। इस बार मेरे साथ मेरे भइया मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह भी थे कुछ समय पूर्व मेरे ब्‍लाग पर मेरी अनुपस्थिति में ब्‍लाग लेखन किया था। अगर हम लोगों में काफी चर्चाऍं आयोजित हुई, जिसका ज्‍यादा जिक्र करना समय व्‍यर्थ करना ज्‍यादा होगा। क्‍योकि जब ब्लागर आपस में बात करते है तो बहुत कुछ बातें गोपनीय होती है। :)
 
अन्‍तोगत्‍वा 2 बजे हमारी ब्‍लागर मीट समाप्‍त हुई। आलोक जी ने हमें एक बहुत अच्‍छी पुस्‍तक भेंट की जो मेरे उपयोगी है। हम जल्‍दीबाजी में ठीक से मेहमान नवाजी न कर सके उसका हमें अफसोस है। जल्‍द ही मिलने के वायदे के साथ हमें ब्‍लागर भेंट वार्ता समाप्‍त हो गई।


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अल्‍लाह ने दिये अबाध बिजली अपूर्ति की गांरटी



आज बकरीद के मौके पर बिजली कटौती नही होगी। खबर है कि कल प्रदेश सरकार की मुखिया ने अल्‍लाह से एक दिन के अल्‍लाह मियॉं से उनके पास रखे जेनरेटर की मॉंग की थी जिसे अल्‍लाह मियॉं ने धर्मनिरर्पेक्ष सरकार के सर्मथन में बिजली के असीमित अतिरक्ति उत्‍पाद की मॉंग को स्‍वीकार कर लिया। जिसे आज सम्‍पूर्ण उत्‍तर प्रदेश के 24 घन्‍टे आबाध बिजली की आपूर्ति की जायेगी।
 
यहॉं तो 10 बजे बिजली कटनी चाहिये थी अभी तक 10.30 तक कटी नही, क्‍या आपकी सरकारो ने भी ऐसी कोई मॉंग अल्‍लाह मियां से की हो जो टिप्‍पणी के माध्‍यम से जरूर सूचित कीजिएगा। काश हमारे भगवान के पास भी कोई अतिरक्ति जेनरेटर होता, तो हमारे भी त्‍यौहार उजाले में मनाये जाते।


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श्रद्धांजली - अमर शहीद मेजर संदीप उन्‍नीकृष्‍णन



जुलाई 2008 में हम्‍पी यात्रा के दौरान के चित्र



भारत माता को भी नाज होगा कि उसके रक्षा की खतिर देश में सपूतों की कमी नही है, उन्‍ही में से एक है मेजर संदीप उन्‍नीकृष्‍णन जो मुम्‍बई हमले मे देश की रक्षा करते हुयेबीर गति को प्राप्‍त हुये। धन्‍य होगी वह मॉं की कोख और पिता की गोद जिसने इस महान सपूत को जन्‍म दिया और पाला होगा। भले ही आज मेजर हमारे बीच नही है किन्‍तु उनका जज्‍बा और यादे हमारे बीच जरूर है।

मेजर आज भी हमारे बीच है, एक प्रेरणा स्‍त्रोत के रूप में, आतंकवाद की लड़ाई में प्रखर योद्धा के रूप में। उनके परिवार को उन नाज होगा कि उनका पुत्र देश के लिये शहीद हुआ किन्‍तु उनके शहीद होने से माता पिता ने अपना पुत्र, बहन-भाईयों ने भाई, पत्नि ने पति और पुत्र-पुत्रियों ने अपना पिता खोया है। अमर शहीद से बना शून्‍य ताजिन्‍दगी उनके परिवार वालो को उनकी याद दिलाता रहेगा।

इस राष्‍ट्रीय दुख की घड़ी में हम सब यही प्रार्थना कर सकते है कि उनके परिवार जनो को इस आपर छति से लड़ने का साहस प्रदान करें।


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हे भगवान जी हमारी नानी को वापस बुला लो'



कुछ दिन पूर्व अदिति की नानी का हमारे यहॉं आने का कार्यक्रम हुआ। किन्‍तु अद‍िति से पुरानी दुश्‍मनी थी, करीब जब अदिति ढ़ेड साल की थी और नानी के यहॉं गई थी तभी से उसकी नानी से नही पटती थी। दुश्‍मनी की हद इस तरह तक की थी, वह नानी को अपने घर से भगाने के लिये भगवान से प्राय: प्रार्थना भी करती थी, जब तक की नानी चली नही गई। प्रार्थना की अपनी स्‍टाईल भी थी '' हे भगवान जी हमारी नानी को वापस बुला लो'' एक न दिन तो उनकी नानी को वापस जाना ही था और वह दिन भी आ गया और भोर में ही नानी अदिति के उठने से पहले चली गई। जब अदिति उठती है तो नानी को नई पाती है, घर में पूछती है कि नानी कहॉं है उसे पता चलता है नानी चली गई तो वह बोली है - भले भई चली गई, भगवान जी हमार सुन लीहिन।
अदिति के चित्र अन्‍य चित्रों के लिये क्लिक करें




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कामोत्तजक पुरूष और अम्‍बूमणि रामदौस



आज खबर पढ़ रहा था तो पढ़ने में आया कि कोई हालीवुड स्टार ह्यूं जैकमैन 2008 के सबसे कामोत्‍तेजक अर्थात Sexy पुरुष चुने गए है। भारतीय के लिये शर्म की बात यह की भारत का को नंग धडग आदमी इस दौड़ में शामिल नही हो पाया। जॉन अब्राहम, सलमान, हासमी पता नही कितने कपड़ा उतारू एक्‍टरों की मेहनत पर बट्टा लग गया। ये भारतीय एक्‍टर कितनी मेहनत करते है कमोत्तेजक कहलाने में किन्‍तु हो गया ढ़ाक के तीन पात, देश की बात होने पर सिर्फ इन्‍ही के चर्चे होते है किन्‍तु जहॉं विदेश की बात आती है, दुनिया में इनका नामो निशान नही होता है, बिल्‍कुल क्रिकेट खिलाडियों की तरह भारत में जो खेलने आता है उसे पटक के हरा देते है, किन्‍तु जब विदेश दौरे में हार जाते है तो कहते है कि बेईमानी कर के जीत लिये, खिसियानी बिल्‍ली खम्‍भा नोचे, ऐसे है भारतीय एक्‍टर और भारतीय क्रिकेट टीम।
 
आज कल तो सेक्‍स और सेक्‍सी दोनो ने समाज में बहुत गंदा वातावरण फैला दिया है। इसी में रामदौस भी अड़ गये है कि अब मर्द की शादी मर्द से करा के ही दम लेगे, चाहे मनमोहन साहब कितने खफ़ा क्‍यो न हो ? मनमोहन साहब भी करे तो करे क्‍या चार दिन के मेहमान जो ठहरे पता नही अगली बार कुर्सी मिले भी कि न मिले, गे मामले में उनकी रूचि देख कर लगता है कि शायद कही साहब अपने लिये नये पार्टनर तो नही खोज रहे है, अब पता चला कि Sexy Man ऐसे लोगो के लिये चुना जाता है अब तो उन्‍हे सबसे कमोत्तजक पुरूष ह्यूं जैकमैन पंसद आ ही जायेगे सूत्रों से पता चला है कि उन्‍हे पीएम इन वेटिंग से जितना खतरा नही है उससे ज्‍यादा राहुल बाबा से है। चुनाव का समय है सुनाई दे रहा था कि राहुल बाबा को 84 के सिक्ख दंगो का खेद है, मुस्लिम इन्दिरा दादी ने सिक्‍खो पर दंड़ा करने में कसर नही छोड़ी थी अब ईसाई पुत्र राहुल हिन्‍दुओं पर दंड़ा किये पड़े है। चुनाव आ रहा है तो राजनीति खेली ही जायेगी, वो चाहे अच्‍छी हो या गंदी राजनीति तो राजनीति होती है, आज कल केन्‍द्रीय खाजने में कमी की खबर आ रही है, जॉच करने में पता चला कि कुछ मनमोहन साहब मैडम के आदेश पर अमेरिका के गरीब में बॉट आये और जो कुछ बचा वो मुस्लिम अनुदान आयोग में चला गया, मुस्लिम छात्रों को वजीफा।
 
खैर बहुत बेबात की बात हो गई, पर रामदौस वाली बात शतप्रतिशत सही है, तभी वे समलैंगिक (gay) सम्बनधों के पीछे पड़ा है, पहले से ही यह आदमी बद्दिमाग लग रहा था किन्‍तु आज कल चुनाव में हार के डर पता नही क्‍या क्‍या कर रहे है। कुछ लोगो का कहना है कि इसमें गलत क्‍या है तो मेरा कहना है कि हर प्रश्न का उत्‍तर नही होता है। अब भाई आका वही है तो जो करे सर आखो में, अब वो मर्द को दर्द देना चाहते है तो हम क्‍या कर सकते है, हमारी Constituency से भी नही है कि हम उन्हे उनके कृत्‍य से रोकने के लिये वोट न देने की घमकी दे सकते है। अगर वे हमारी Constituency से होते भी तो कोई फर्क नही पड़ता, वे इतना सब पड़ने के बाद स्‍यवं जान जाते कि बंदा हमको तो वोट नही ही देगा।
खैर शेष फिर .................
जॉब सम्‍बन्‍धी महत्‍वपूर्ण सूचना


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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : छात्रसंघ पर प्रतिबन्‍ध अनुचित



इलाहाबाद विश्वविद्यालय : छात्रसंघ पर प्रतिबन्‍ध अनुचितइलाहाबाद विश्वविद्यालय और छात्र राजनीति का बहुत पुराना रिस्ता है, इसी रिस्‍ते को आज इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय प्रशासन के द्वारा छात्र संद्य चुनाव न करवा कर तोड़ जा रहा है। हो सकता हो कि छात्र संद्य के चुनाव न करवाने से इलाहाबाद विश्वविद्यालय को काफी फायदे मिलते है, जैसा कि कुछ छात्र नेताओं के मुँह से मैने सुना है कि छात्रसंद्य के आभाव में जो पैसा छात्रों के कल्‍याण हेतु आता है वह सब केवल विवि प्रशासन जेब तक ही सीमित हो कर रह जाता है । मुझे इस बात में काफी दम भी लगती है क्‍योकि मैने स्‍वय इलाहाबाद विवि के छात्रावास और अध्‍ययन कक्ष देखे है जिनमें व्‍यवस्‍था के नाम पर आपको कुछ नही मिलेगा। आज जब इला‍हाबाद वि‍श्वविद्याल केन्‍द्रीय दर्जा प्राप्‍त कर चुका है और वहॉं व्‍यवस्‍था के नाम पर सिर्फ अव्‍यवस्‍था दिखती है तो निश्‍चित रूप से दाल में कुछ काला है कि बात जरूर सामने आती है।

आज इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन की अराजकता से ग्रसित है। जब यह विश्वविद्यालय स्‍वनियत्रण में आया है तब से इसके कुलपति अपने आपको विश्वविद्यालय के सर्वेसर्वा मानने लगे है। करोड़ो रूपये की छात्र कल्‍याण हेतु आर्थिक सहायता सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है। जो काम छात्रों के काम छात्र संघ होने पर तुरंत हो जाता था आज कर्मचारी उसी काम को करने में हफ्तो लगा देते है। जिस छात्र संघ ने कई केन्‍द्रीय मंत्री और राज्‍य सरकार को मंत्री देता आ रहा है उस पर प्रतिबंध लगाना गैरकानूनी है। आज जबकि जेएनयू और डीयू जैसे कई केन्‍द्रीय विश्वविद्यालयों में चुनाव हो रहे है तो इलाहाबाद केन्‍द्रीय विवि में चुनाव न करवाना निश्चित रूप से विश्‍वविद्यालय प्रशासन द्वारा अपनी खामियों के छिपाने का प्रयास मात्र है।

विश्वविद्यालय राजनीति का अखड़ा नही है किन्तु छात्रसंघ से देश को प्रतिनिधित्‍व का साकार रूप मिलता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिये कि अपनी गलती को मान कर छात्रों के सम्‍मुख मॉफी मॉंग कर जल्‍द ही चुनाव तिथि घोषित करना चाहिये। वरन युवा शक्ति के आगे प्रशासन को झ़कना ही पड़ेगा।


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इलाहाबाद का यश चला बनारस



 
आज भारतीय जनता पार्टी ने डाक्‍टर मुरली मनोहर जोशी को वाराणसी से लड़ाने की धोषणा कर ही दी, जिसका अनुमान इलाहाबाद के लोगो को काफी पहले लग चुका था। इलाहाबाद से डाक्‍टर जोशी का जाना इलाहाबाद और इलाहाबादियों दोनो के लिये धक्के के समान है। 2004 के आम चुनावों में जिस प्रकार डाक्‍टर जोशी पराजित हुये वह दुर्भागयपूर्ण था। डाक्‍टर जोशी करीब 32 हजार वोटो से इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से चुनाव हारे थे,यह हार बेमानी थी क्‍योकि करछना के मौजूदा विधायक रेवती रमण और डाक्‍टर जोशी के मध्‍य करछना में वोटो का अंतर 29 हजार का था,जो चौकाने वाला परिणाम दे रहा था। खैर रात गई बात गई अब समय है कि नई परिस्थियों के हिसाब से संयोजन किया जाये।

डाक्‍टर जोशी एक बड़े राजनेता के साथ साथ एक बड़े वैज्ञानिक, अच्‍छे शिक्षक भी रहे है। भाजपा में उनकी छव‍ि केसरिया छव‍ि के नेता के रूप में जानी जाती है। शायद ही आज भाजपा के पास उनसे ज्‍यादा अच्‍छा राष्‍टवादी विचारधारा का वक्‍ता उपलब्‍ध हो। राममंदिर से लेकर कश्‍मीर यात्रा तक डा. जोशी भारतीय जनमानस में हमेशा याद किये जाते है। 1996 की 13 दिन की वाजपेई सरकार में डाक्‍टर जोशी को गृहमंत्री का दायित्‍व दिया जाना निश्चित रूप से आज भी उनकी स्थिति आडवानी जी के बाद दूसरे नम्‍बर के नेता की है। इसमें दो राय नही होनी कि अगली भाजपा सरकार में वे महत्‍वपूर्ण पद से नवाजे जायेगे।

डाक्‍टर जोशी ने इलाहाबाद के अंदर जो कुछ भी किया वह इलाहाबाद के विकास के लिये पर्याप्‍त है उतना पिछले 5 सालों में नही हुआ। शिक्षा और विकास के मामलो में जोशी ने इलाहाबाद को नये आयामो तक पहुँचाया। इलाहाबाद को डाक्‍टर जोशी कमी जरूर खलेगी। और अब भाजपा का नया विकल्‍प इलाहबाद में क्‍या होगा यह एक बड़ी चुनौती का प्रश्‍न होगा।


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साध्वी पर षड़यंत्र



कल के मेरे लेख पर आज श्री दिवाकर प्रताप सिंह की विशेष टिप्पणी मिली, जो बातें उन्होने रखी वह विचारणी है, इसी परिपेक्ष में मै उक्त टिप्पणी को आपके समाने रख रहा हूँ ताकि बात दूर तक जाये।
"एक बात और जिस समय मालेगांव में विस्फोट हुआ उसी समय गुजरात के मोडासा में भी विस्फोट हुआ। खुफिया एजेंसियों का तब कहना था कि इन दोनों विस्फोटों के पीछे एक ही आतंकवादी संगठन का हाथ है। जब साफ है कि मालेगांव में हुए दोनों विस्फोटों के पीछे उद्देश्य और विस्फोट करने का तरीका एक ही है तो फिर सीबीआई साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से पूछताछ करने की कोशिश क्यों नहीं कर रही है? ये बड़ा सवाल है और इस सवाल का जबाव ढूंढने में ही साध्वी की गिरफ्तारी और कथित हिंदू आतंकवाद के खुलासे के पीछे छुपे राजनीतिक छल-प्रपंच का भंडाफोड़ हो पाएगा। फिलहाल साध्वी सभी वैज्ञानिक जांचों में बेदाग निकल गई हैं और अब एटीएस (एन्टी टेरेरिस्ट स्क्वाड) साध्वी के खिलाफ मिले सबूतों और उसकी ब्रेनमैपिंग व नार्कों टेस्ट के नतीजों को सार्वजनिक करने के बजाय अब साध्वी की साधना की आड़ लेकर अपनी गलतियों को छुपाने की कोशिश कर रहा है। इस मामले में बुरी तरह फंस चुकी एटीएस इसे साध्वी की साधना का कमाल बता रही है और दोबारा से परीक्षण की बात कह रहा है।"


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मुस्लिम सेक्यूलर और हिन्दू सम्प्रदायिक क्यो ?



आज देश में दहशत का माहौल बनाया जा रहा है, कहीं आंतकवाद के नाम पर तो कहीं महाराष्ट्रवाद के नाम पर। आखिर देश की नब्ज़ को हो क्या गया है। एक तरफ अफजल गुरू के फांसी के सम्बन्ध में केन्द्र सरकार ने मुँह में लेई भर रखा है तो वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र की ज्वलंत राजनीति से वहॉं की प्रदेश सरकार देश का ध्यान हटाने के लिये लगातार साध्वी प्रज्ञा सिंह पर हमले तेज किये जा रही है और इसे हिन्दू आंतकवाद के नाम पर पोषित किया जा रहा है। य‍ह सिर्फ इस लिये किया जा रहा है कि उत्तर भार‍तीयों पर हो रहे हमलो से बड़ी एक न्यूज तैयार हो जो मीडिया के पटल पर लगातार बनी रहे। 

आज भारत ही नही सम्पूर्ण विश्व इस्लामिक आंतकवाद से जूझ रहा है, विश्व की पॉंचो महाशक्तियॉं भी आज इस्लामिक आंतकवाद से अछूती नही रह गई है। आज रूस तथा चीन के कई प्रांत आज इस्लामिक आलगाववादी आंतकवाद ये जूझ रहे है। इन देशों में आज आंतकवाद इसलिये सिर नही उठा पा रहे है क्‍योकि इन देशों में भारत की तरह सत्तासीन आंतकवादियों के रहनुमा राज नही कर रहे है।

भारत में आज दोहरी नीतियों के हिसाब से काम हो रहा है, मुस्लिमों की बात करना आज इस देश में धर्मर्निपेक्षता है और हिन्दुत्व की बात करना इस देश में सम्प्रादयिकता की श्रेणी में गिना जाता है। आज हिन्दुओं को इस देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया गया है। इस कारण है कि मुस्लिम वोट मुस्लिम वोट के नाम से जाने जाते है जबकि हिन्दुओं के वोट को ब्राह्मण, ठाकुर, यादव, लाला और एसटी-एससी के नाम से जाने जाते है। जिस ये वोट हिन्‍दू मतदाओं के नाम पर निकलेगा उस दिन हिन्दुत्व और हिन्दू की बात करना सम्प्रादायिकता श्रेणी से हट कर धर्मनिर्पेक्षता की श्रेणी में आ जायेगा, और इसे लाने वाली भी यही सेक्यूलर पार्टियॉं ही होगी।


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पिपिहरी तो नही मिली, भोपा लिया था



मैने पिछली पोस्ट में मेला और गॉंव यात्रा का वर्णन किया था, उस लघु मेला और यात्रा वर्णन को आप सभी ने काफी पंसद और मुझे प्रोत्साहित भी किया। आठ तारीख को लिखे इस वर्णन में 14 अक्टूबर तक टिप्पणी मिली। आज कल समयाभाव के दौर से गुजर रहा हूँ किन्तु एक दम से लिखना छोड़ देने की अपेक्षा गाहे बगाहे ही लिख पाता हूँ।

14 अक्टूबर को भाई अभिषेक ओझा ने कहा कि - मेला में पिपिहरी ख़रीदे की नहीं? उस पर एक और टिप्‍पणी सोने पर सुहागा साबित हुई और मै इस लेख को लिखने पर विवश हो गया। दूसरी टिप्णी सम्‍माननीय भाई योगेन्द्र मौदगिल ने कहा कि - अभिषेक जी ने जो पूछा है उसका जवाब कब दे रहे हो प्यारे। भाई Anil Pusadkar, श्री अनूप शुक्ल जी,श्री डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर तथा प्रखर हिन्‍दुत्‍व का हार्दिक अभार व्यक्त करता हूँ। उसी के आगे थोड़ा वर्णन और सही ........

इसके आगे से ......... गॉंव से लौट कर मै बिल्कुल थक चुका था, 5 अक्टूबर की थकवाट बदस्तूर कई दिनों तक जारी भी रही, चलिये उसका वर्णन भी कर ही देता हूँ, हमेंशा हम मित्र मंडली बना कर दशहरा चौक का मेला घूमते थे, किन्तु इस बार गॉंव से लौटते ही बहुत तेज बुखार पकड़ लिया, जो एकादशी तक जारी रहा, मित्र शिव को पहले ही मै मना कर चुका था कि अब कोई मेला नही जायेगे, रात्रि को सभी लोग चले गये। हम तो बेड रेस्ट करते हुये फिल्‍म गोल देख रहे थे। रात्रि पौने 12 बजे गोल खत्‍म होते ही मैने सभी को दशहरे की बधाई देने के लिये फोन किया। सभी तो प्रसन्‍न थे किन्तु मेरे न जाने से सभी निराश भी थे। अगले दिन एकादशी को प्रयाग के चौक में बहुत धासू रोशनी का पर्व होता है, उसका आमंत्रण भी मिला किन्तु मै अब कोई रिस्‍क नही लेना चाहता क्‍योकि मुझे 12 अक्टूबर को परीक्षा भी देना था। इस तरह तो मेरा दशहरा का मेला रसहीन ही बीता। जिसका मुझे मलाल रहेगा, क्‍योकि साथियों के साथ घूमने का अपना ही मजा होता है।
 
5 अक्टूबर के बाद किसी मेले में जाना नही हुआ, किन्तु 5 अक्टूबर को ही मैने अभिषेक भाई की शिकायत दूर कर दिया था, 5 तरीख को मेरी इच्छा के विपरीत आईसक्रीम खिला दिया गया जो आगे के मेला के लिये नासूर साबित हुई। मेला में मुझे पिपीहरी तो नही मिली किन्तु 5 रूपये का भोपा जरूर खरीदा थाथा, जो शानदार और जानदार दोनो था। जो घर पहुँचे पर सुबह का सूरज भी नही देख सका। कारण भी स्पष्‍ट था कि अदिति ने सभी खिलौनो के साथ ऐसा खेला कि तीन चार गुब्‍बरे और भोपा क्रय समय के 12 घन्‍टे के अंदर अन्तिम सॉंसे गिन रहे थे। खैर जिसके लिये खरीदा था उसने खेल लिया मन को बहुत अच्छा लगा। सारे गुब्‍बारे और भोपा नष्‍ट होते ही अदिति की स्थिति देखने लायक थी, जब अन्तिम गुब्‍बारा फूटा तो अदिति बोली- हमारे छोटे चाचा मेला जायेगे, और गुबबारा लैहिहै। गुब्‍बारा तो बहुत आये किन्तु हम मेला नही जा सकें।
 
आज मैने एडब्राइट लगया है, पता नही इससे कोई फायदा पहुँचेगा भी या नही अभी तक एडब्राइट के ही विज्ञापन आ रहे है तो उम्‍मीद कम ही है। खैर महीने भर इसे भी देख ही लेते है। गूगल एडसेंस ने तो रंग दिखाये ही थे अब देखना है कि एडब्राईट का रंग चोखा होता है कि नही। :) अभी इतना ही फिर मिलेगे फिल्‍म 1920 की कहानी थोड़े मेरे विचार के साथ, जो मैने इन दिनो देखी थी। मेला के चित्र जल्‍द ही आदिति के ब्‍लाग पर।


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दशहरे का मेला और हमारी नींद



रविवार को इलाहाबाद के सिविल लाइन्स में दशहरे के मेले का आयोजन था, मेरी इस मेले में घूमने की कोई इच्छा नही थी, किन्तु मित्रों के आग्रह को मै टाल नही सका, सर्वप्रथम मेले के लिये घर से अनुमति जरूरी थी, जो मुझे मिल गई थी। यह पहली बार मेरा ऐसा मेला था जिममें मैने रात्रि 1 बजे के बाद तक घूमता रहा। सर्वप्रथम मै पहुँचा तो मित्रों का प्रश्न था कि घर से कितने बजे तक समय लेकर आये हो ? मैने 1 बजे तक का समय दे दिया था। रात्रि भर हम घूमते रहे, काफी मजा आया। हम कुछ मित्र करीब 1 महीने बाद मिल रहे थे, विभिन्‍न प्रकार के चर्चाओं में हमने भाग लिया।

रात्रि ढाई बज रहे थे तब मैने कहा कि अब इस कार्यक्रम को समाप्त किया जाना चाहिये,कुछ की नानुकुर के बाद कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा हुई। मुझे घर पहुँचते और सोते सोते 3.30 बज गये थे। करीब 5 बजे थे कि मेरी ऑंख खुल चुकी थी। मेरी आदत है कि मै एक बार 5 बजे जरूर उठ जाता हूँ। वैसा मेरे साथ उस दिन भी हुआ, कुल मिला कर मै दो घन्‍टे भी नही सो पाया था। सुबह पापा जी और दोनो भइया को गॉंव जाना था, किन्‍तु पिछले दिन भइया रायवरेली गये थे तो उन्होने जाने में असर्मथता व्‍यक्त कर दिया। पापा जी ने मुझे कहा मै भी असर्मथ ही था किन्तु जाने के लिये हामी भर दिया। गाड़ी और प्रतापगढ़ में मुझे काफी तेज नींद आ रही थी किन्तु मै सो पाने में सक्षम नही था। गॉंव पहुँचते 4 बज गये, और शाम 6 बजे पापा जी ने कहा कि आज रूका जाये कि चला जाये। मैने इलाहाबाद जाने के पक्ष में राय जाहिर की। क्योकि मै इतना थका हुआ था कि कुछ भी काम करने की स्थिति में नही था। 

हम लोग करीब 6.30 गॉंव से इलाहाबाद की ओर चले और 9 बजे घर पहुँच गये, मेरी थकावट और नींद चरम पर था किन्तु गॉंव से लौटने के बाद 56 प्रकार की चर्चा शुरू हो गई और सोते सोते बज गये 12 और फिर सुबह 5 बजे जग गया। .........


शेष फिर


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क्योकि भगवान बिजली पैदा नही करते



पिछले दो दिनों से बिजली कटौती चरम पर है, त्यौहार का मौसम होने के बाद भी अनियमित कटौतियों की तो मानो बाढ़ सी आ गई है। कल शाम को करीब 3 घन्टे की कटौती हुई और आज भी यह बदस्तूर जारी है। दुर्गापूजा और नवरात्रि का महत्वपूर्ण पर्व होने के बाद भी इस प्रकार की कटौती निश्चित रूप से आस्था पर कुठाराघात है। 1 और 2 अक्टूबर को ईद पड़ी थी उन दिनों लगातार 48 घन्टे विद्युत आपूर्ति की गई किन्तु आज जब हिन्दूओं का पर्व आया तो सरकार की बिजली देने में नानी मर रही है, ऐसा क्यो ?

ऐसा तो है नही कि ईद और मुहर्रम में खुदा बिजली पैदा करने की इकाई लगा देते है, और जहॉं दीपावली, होली और दशहरा आता है भगवान जी बिजली पैदा करने की ईकाई बंद हो जाती है। सरकर की इस सेक्यूलर छवि की हमें चिंता करनी चाहिये। आखिर हिन्दू पर्वो पर ही बिजली क्यो कटती है ? 

आज सरकार की यह दोहरी नीति हिन्‍दूओं को इस देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना रखा है, अमरनाथ में हिन्‍दूओं को अपने विश्राम की भूमि नही मिल सकती है, रामसेतु को सिर्फ इसलिये तोड़ने का प्रयास किया गया क्‍योकि यह हिन्‍दुओं के आराध्‍य श्रीराम का स्‍मृति चिन्‍ह है। आज हिन्‍दुओं को अपनी अस्तित्व की लड़ाई में चारों तरफ से सघर्ष करना पड़ रहा है।आखिर कब तक यह चलता रहेगा, कब तक हिन्दुओं के की अस्मिता को ललकारा जायेगा ?


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इलाहाबाद जनपद के औद्योगिक विकास की सम्भावनाऍं एवं समस्याऍं : एक आलोचनात्मक अध्ययन



इलाहाबाद जनपद प्रचीनतम भारतीय नगरों में प्रमुख स्‍थान रखता है। भारत के वे नगर ही ज्यादा उन्नति कर सके है जो किसी न किसी नदी के तट पर बसे है, उनमें से इलाहाबाद भी एक है। इलाहाबाद का अपना धार्मिक और सांस्‍कृतिक महत्व है, इस कारण यहाँ सभ्यताओं का विकास काफी तीव्र हुआ। इलाहाबाद का भौ‍गोलिक राजनैतिक विस्‍तार उत्तर में प्रतापगढ़ जौनपुर, पूर्व में संत रविदास नगर और मिर्जापुर, पश्चिम में कौशाम्‍बी, चित्रकूट तथा दक्षिण में मध्यप्रदेश की सीमा तक जाता है। इलाहाबाद का क्षेत्रफल 5425 वर्ग किलो मीटर है, तथा इसकी जनसंख्या 4936105 (जनगणना सन् 2001 के अनुसार) है, यह जनसंख्‍या इस जनपद को उत्तर प्रदेश का सर्वाधिक जनसंख्‍या वाला जनपद बनाता है। इलाहाबाद जनपद का महत्व यही खत्म नही हो जाता है, इस जनपद ने मदन मोहन मालवीय, राजर्षि टंडन, पंडि़त नेहरू तथा अनगिनत ऐसे महान-महान विभूतियों से देश को सुशोभित किया है जिन्‍होन देश की आजादी तथा देश के सर्वार्गीण विकास में अद्वितीय योगदान किया है। प्रदेश के इस जनपद ने कई प्रधानमंत्री तथा अनेकों केन्दीय मंत्री दिये है, जिससे इस जनपद की विशेष स्थित का अपने आप ही पता चलता है।
अपना विशेष स्‍थान होने के कारण इलाहाबाद जनपद मुगलों तथा अग्रेजो के भी आकर्षण का केन्‍द्र रहा है। अंग्रेजों ने इस जनपद की महत्‍ता को जानते हुये ही, इसे संयुक्त आगरा-अवध प्रान्‍त की राजधानी बनाया था। आज भी इस जनपद का महत्व समाप्‍त नही हुआ है। पूर्व का आक्सफोर्ड कहा जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय इसी जिले में स्थित है। एशिया का सबसे बड़ा उच्‍च न्‍यायालय, माध्‍यमिक शिक्षा परिषद, महालेखाकार कार्यालय,उत्तर मध्‍य रेलवे का मुख्‍यालय, पुलिस के कई प्रदेश स्‍तरीय उच्‍च अधिकारियों के दफ्तर तथा अन्‍य कई प्रमुख केन्‍द्रीय कार्यालयों के मुख्‍यालय इसी जनपद में स्थित है, जो कि आज भी इसके वर्तमान महत्व को दर्शाता है।
इलाहाबाद औ़द्यौगिक रूप से भी काफी समृद्ध रहा है, लघु उद्योगों का जाल प्रारम्‍भ काल में घरों घरों में फैला हुआ था। अंग्रेजों की दमनकारी औद्योगिक नीतियों ने लद्यु उद्योगों को काद्यी छति पहुँचाई है। इसका यह कारण हुआ कि भारत की आजादी के समय में इस समृद्ध और सम्‍पन्‍न जनपद को कमजोर औद्योगिक आधार विरासत में मिला। आजादी के साथ ही साथ इलाहाबाद में औद्योगिक विकास बहुत सीमित था और कुशल प्रबन्‍ध के अभाव में इसे ठीक से स्‍थापित करना भी कठिन था। कुशलता के अभाव में जनपद के उद्योग भी रूग्‍ण अवस्‍था में रहे और कुछ तो आज बंद होने के कगार पर भी आ चुके है।
जनपद के औद्योगिक सीमाओं का विस्‍तार भारतगंज, मेजा व मांडा से सीमेन्‍ट के पाउडर, ग्रेनाइड पत्‍थर के लधु उद्योगों से होती है, इसी क्षेत्र में शीशे की विशाल फैक्ट्री भी स्थित है। नैनी का क्षेत्र स्‍वदेशी काटन मिल तथा अन्‍य कारखानों के कारण औद्योगिक नगर के रूप में जाना जाता है, यही पर आई.टी.आई और जी.ई.सी आदि स्थिति है। शहर में शेरवानी इन्‍ड्रस्‍टी की काफी धाक रही है किन्तु वर्तमान समय में यह बंद हो चुका है, लूकरगंज मुहल्ले में एशिया की सबसे बड़ी आटा और दाल मिले स्थिति थी जो आज बंद हो चुकी है । जनपद की मऊआईमा तहसील में मऊआइमा सहकारी कताई मिल तथा इसी क्षेत्र में पटाखों तथा आतिशवाजी उद्योग की सम्‍भावनाऍं है। इफ्को फूलपुर मे यूरिया खाद का उत्‍पाद किया जा रहा है। यमुना नदी में बालू उत्खनन के क्षेत्र में इस उद्योग के विस्तार की काफी सम्‍भावनाऍं है। इसके साथ ही साथ आज के अत्‍याधुनकि आई.टी युग में सूचना प्रौद्योगिकी तथा साफ्टवेयर निर्माण उद्योग की काफी सम्‍भावनाऍं इस जनपद में है क्‍योकि आज IIIT, मोतीलाल नेहरू इंजीनियरिंग कालेज, एग्रीकल्चर डीम्‍ड युनीवर्सिटी तथा अन्‍य तकनीकी कालेज इस इस जनपद में स्थित है।
इलाहाबाद जनपद, अन्‍यक्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थित के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र में भी काफी चमत्‍कृत था। किन्तु सही संचालन के अभाव में कई उद्योग आज इतिहास बन गये है। आज ये उद्योग अपने अस्तित्‍व की बनाये रखने के लिये संघर्ष कर रहे है। विकास की इस दौड़ में इलाहाबाद जैसे विशाल जनसंख्‍या वाले जनपद को आज उद्योग की बहुत आवश्यकता है। आज इस जनपद की बढ़ती हुई जनसंख्‍या और बेरोजगारी के स्‍तर को, इन उद्योगों की रक्षा और नये उद्योगों के सृजन के बिना नही सम्‍भाला जा सकता है। आज जरूरत है कि जनपद के आर्थिक आधार स्‍वरूप इन उद्योगों को कुशल प्रबंन्‍धन, राज्‍य व केन्‍द्र सरकार सरकार के सहयोग द्वारा बचाया जाये। उद्योगों को आधारभू‍त सुविधायें उपलब्ध करवायी जायें जिससे नये उद्योगों की स्‍थापना हो सके और इसके औद्योगिक स्‍वरूप को बनाये रखा जा सके और विकसित किया जा सके।


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रामधारी सिंह ''दिनकर''



छायावादी कवियों में प्रमुख नामों में रामधारी सिंह दिनकर का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। 23 सितम्बर 1908 को बिहार के मुगेर जिले सिमरिया नामक कास्बे में हुआ था। पटना विश्वविद्यालय से इन्‍होने स्‍नातक बीए की डिग्री हासिल की और तत्पश्चात वे एक सामान्‍य से विद्यालय में अध्यापक नियुक्त हो गये। रामधारी सिंह दिनकर एक ओजस्वी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कवि के रूप में जाने जाते थे। उनकी कविताओं में छायावादी युग का प्रभाव होने के कारण श्रृंगार के भी प्रमाण मिलते है।
दिनकर जी को सरकार के विरोधी रूप के लिये भी जाना जाता है, भारत सरकार द्वारा उन्‍हे पद्मविभूषण से अंलकृत किया गया। इनकी गद्य की प्रसिद्ध पुस्‍तक संस्‍कृ‍त के चार अध्याय के लिये साहित्‍य अकादमी तथा उर्वसी के लिये ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया। 24 अप्रेल 1974 को उन्‍होने अपने आपको अपनी कवितों में हमारे बीच जीवित रखकर सदा सदा के लिये अमर हो गये।
दिनकर जी विभिन्‍न सकरकारी सेवाओं में होने के बावजूद उनके अंदर उग्र रूप प्रत्‍यक्ष देखा जा सकता था। शायद उस समय की व्‍यवस्‍था के नजदीक होने के कारण भारत की तत्कालीन दर्द को समक्ष रहे थे। तभी वे कहते है – 
सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;
दो राह,समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।

26 जनवरी,1950 ई. को लिखी गई ये पंक्तियॉं आजादी के बाद गणतंत्र बनने के दर्द को बताती है कि हम आजाद तो हो गये किन्‍तु व्‍यवस्‍था नही नही बदली। नेहरू की नीतियों के प्रखर विरोधी के रूप में भी इन्‍हे जाना जाता है तथा कर्इ मायनों में इनहोने गांधी जी से भी अपनी असहमति भी जातते दिखे है, परसुराम की प्रतीक्षा इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण है । यही कारण है कि आज देश में दिनकर का नाम एक कवि के रूप में नही बल्कि जनकवि के रूप में जाना जाता है।


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पंगेबाज जी महाशक्ति के शहर में



आज का दिन हमारे लिये काफी अच्‍छा रहा, हुआ यूँ कि अक्सर क्‍लास के समय मै अपने मोबाईल को या तो नही ही ले जाता हूँ या तो स्‍वीच्ड आफ कर देता हूँ, पर ऐसा कल मै नही कर सका। पौने सात बजे के आसपास मेंरे पास कॉल आती है, जिसमें बड़े बड़े अक्षरों में पंगेबाज लिखा हूँआ था, इस प्रकार की काल अकारण नही आती थी। काफी दिनों से न‍ेट पर दूरी के कारण उनसे मेरी बात नही हो सकी थी, अचानक फोन आ जाने से खुशी का ठिकाना नही था, मै क्‍या बोलूँ मुझे समझ नही आ रहा था। उन्होने कहा कि मै कल आपके शहर मे रहूंगा। यह जानकर और भी खुशी हुई। उन्‍होने कहा कि मैने तुम्‍हे ईमेल किया था किन्‍तु तुम्‍हारा कोई उत्तर नही आया मैने अपनी समस्‍या बता कर रात में दोबारा बात करने की अनुमति लेकर मैने वार्ता समाप्त किया।
 
रात्रि 9.30 बजे मैने बात किया और यात्रा का सम्‍पूर्ण विवरण लिया, पता लगा कि प्रात: 7.00 से 10.00 तक उनका कोई अपना कार्यक्रम नही था तो मैने उस समय को अपने लिये देने का अनुरोध किया, जैसा कि उन्‍होने बात की दौरान यह बताया था कि शायद पूरे दिन उनके पास समय नही रहेगा। उन्‍होने मेरे अनुरोध को सहर्ष स्‍वीकार कर लिया। उनके इतनी बात के बाद मुझे रात्रि में ठीक से नीद नही आयी और सोने में करीब 11.30 बज गये किन्‍तु रोज की बात प्रात: 4.30 पर जगना हो गया। प्रात: काल सबसे पहले उठ कर ईमेल चेक करने बैठ गया शायद कोई अपडेट हो किन्‍तु ऐसा नही था, फिर मैने अपने विश्वविद्यालय की साईट देखी तो खुशी का ठिकाना न रहा, क्‍योकि मै परास्‍नतक की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका था, इसे सज्जन के चरणो का इलाहाबाद में आने का प्रभाव कहा जा सकता था। 10 मिनट की देरी के साथ प्रयागराज राईट टाईम थी, और मै स्‍टेशन पर 6.45 पर पहुँच चुका था, सवा सात बजे तक हम लोग घर पहुँच चुके थे, थोडा चाय पानी के पश्चात मैने स्‍नान की बात कही, तो अरूण जी और उनके मित्र ने हामी भरी, स्‍नान के प्रति उत्‍साह को देखते हुये मैने स्‍नान के आगे गंगा शब्‍द और जोड़ दिया तो अरूण जी के मित्र का उत्‍साह देखते ही बन रहा था, इसी के साथ गंगा स्‍नान का कार्यक्रम थी बन गया।
 
8.30 बजे तक हम संगम पहुँच चुके थे, और 9.30 बजे तक स्‍नान हो गया, नाव के द्वारा गंगाजी और यमुना जी के धाराओ को एक होते देखा जो एक अद्भुत दृश्‍य था। 10.10 तक हम लोग घर पर आ गये, और ड्राईवर पापाजी को उच्व न्‍यायालय छोड़ कर आ चुका था, मैने कहा कि आपको आपके गन्‍तव्‍य तक छोड़ आयेगा, जब पुन: कहेगे तो तो वह आप को ले भी आयेगा किन्‍तु भोजन के बाद अरूण जी ने हमें अपने साथ हमें चलने को कहा तो मुझे काफी अच्‍छा लगा किन्‍तु मै और भइया उस समय तक भोजन नही किये थे, जल्‍दी जल्‍दी में भोजन किया और सामान्‍य घरेलू वेश मै और मेरे भइया, अरूण जी और उनके मित्र करीब 11 बजे चल दिये।
 
गन्‍तव्‍य पर पहुँच कर इतनी बड़ी बड़ी मशीनो को नजदीक से देखने का अच्‍छा अनुभव था, उक्‍त स्‍थान का निरीक्षण करते करते हमें 4.30 बज गये थे जबकि श्रीमान ज्ञान दत्त पाण्‍डेय जी ने मिलने का सर्वात्‍तम समय 3 से 5 बजे के मध्‍य था तो अचानक ही उनसे मिलने का कार्यक्रम बनाना पड़ा, समय और परिस्थिति के अनुसार हम जैसे थे वैसे ही वहॉं पहुँच गये। श्रीज्ञान जी के साथ मेरी दूसरी भेंट थी, उन्‍होने बड़ी गर्म जोशी के साथ हमारा स्वागत किया। श्रीज्ञान जी ने पूर्व ही तैयारी कर रखी थी, उनकी पत्नी जी ने श्री अरूण जी के स्‍वागत के लिये सेवई और ढोकला भेजा था, इससे तो हम जान ही सकते है श्रीमती जी भी प्रत्‍यक्ष और परोक्ष चिट्ठाकारी और चिट्ठाकारों में रूचि रखती है। निश्चित रूप से पाडेय जी से मिलना एक अच्‍छा अनुभव रहा। जिस समय हमने श्री ज्ञानजी से अनुमति ली, घड़ी 5.25 बजा रही थी, अर्थात उन्‍होने अपने बेस्‍ट समय से अतिरिक्‍त समय दिया, क्‍योकि 5.30 बजे पर उनकी नियमित मिटिग होती है। प्रणाम, हस्‍तमिलन व अलिंगन के साथ हमने पाड़ेय जी की चम्‍बल विहार से विदा लिये, तथा श्री अरूण जी ने श्री पाड़ेय जी को दिल्‍ली यात्रा के दौरान अपने यहॉं आने का निमंत्रण भी दिया।
 
जिस काम के लिये हम सुबह से निकल थे, उसे सम्‍पन करने के बाद हम घर की ओर प्रस्‍थान कर दिये, और इधर-उघर की करना प्रारम्‍भ कर दिया। करीब 6.50 पर हम घर पर थे, सर्वप्रथम मैने चाय के लिये पूछा अरूण जी ने मना कर दिया, किन्‍तु उनके मित्र ने पीने की इच्‍छा जाहिर की, फिर मैने अरूण जी की इच्‍छा की टोह ली तो उन्‍होने कम दूध की चाय की इच्‍छा जाहिर की। मैने डरते हुये ब्‍लैक टी के बारे में पूछा तो उन्होने कहा कि इससे अच्‍छा हो ही क्या सकता है।
 
वहॉं से लौटने के बाद से ही, अरूण जी मेरे घर से जल्दी प्रस्‍थान की इच्‍छा जाहिर कर रहे थे, जबकि मै उन्हे रात्रि 9 बजे भोजन के उपरान्‍त जाने को कह रहा था किन्‍तु उन्‍होने अपनी बात पर जोर देते हुये, प्रस्‍थान करने की बात मुझसे मनवा ही ली। 7.15 मिनट के आस-पास हमने घर छोड़ दिया, घर छोड़ने से पूर्व अरूण जी मेरे पिताजी से मिले और दिल्‍ली आने पर मिलने निमत्रण दिया। हमारे चलने के बाद अरूण जी ने स्‍टेशन पर ही रूकने और कुछ देर घूमने की बात कही। इस पर मैने कहा कि स्‍टेशन पर आपको घूमने के लिये कुछ नही मिलेगा सिवाय गंदगी के,और आप चाहे तो सिविल लाइंस छोड़ देता हूँ आप अपने आगे के 2 घन्‍टे काफी अच्छी तरीके से घूम सकते है। उन्‍हे भी यह बात जच गई और मैने उन्‍हे काफी हाऊस पर छोड़ कर प्रयाग में अन्तिम प्रणाम लेकर अपने गंत्वय पर चल पड़ा।
 
सिविल लाइन्‍स में उन्‍हे छोड़ने के बाद, मेरा भी वहॉं से जाने का मन नही कर रहा था, इसे पिछले 12 घन्टो के साथ-साथ रहने का प्रतिफल ही कहा जा सकता है। अत्‍मीयता अपने आप ही हो जाती है। काफी अधूरे मन से मै वहॉ से चल दिया। रात्रि करीब 9.25 पर मैने अरूण जी के पास फोन किया, कि आप स्‍टेशन पहुँच गये है कि नही ? उन्‍होने बताया कि मै स्‍टेशन पहुँच गया हूं और इस समय ट्रेन में विश्राम कर रहा हूँ। कुशलता के साथ स्टेशन पहुँचने की खबर पाकर मन अति प्रसन्न हुआ। रात्रि बीत गई पता ही नही चला, सुबह करीब 6.45 पर मैने हाल लेने की सोची किन्‍तु किसी कारण वश नही कर सका, करीब 9 बजे अरूण जी ने मुझे फोन कर बताया कि मै दिल्‍ली पहुँच गया हूँ।
 
इस दौरान जिन चिट्ठाकारों की चर्चा हुई उनके नाम निम्‍न है - श्री अनूप शुक्ल जी, श्री समीर लाल जी, श्री अफलतातून जी, श्री ज्ञान दत्त पांडेय जी, श्री संतोष कुमार पांडेय जी, श्री अभय जी, श्री रामचंन्‍द्र शुक्‍ल जी, श्री उन्मुक्त जी तथा बहुत से अन्य ब्‍लाग तथा सम्‍मानित ब्‍लागरों के बारे में चर्चा हुई। अरूण जी की इस यात्रा के सम्‍बन्‍ध में काफी कुछ और भी लिखा जा सकता है, जल्‍द ही फिर लिखूँगा।


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हमारे नेट कनेक्शन पर शनि की छाया



हमारे इन्टरनेट कनेक्शन पर लगता है कि शनि महाराज की छाया पड़ गई है। पिछली पोस्ट में मैने करीब 100 मीटर तार चोरी किये जाने की घटना का उल्लेख किया था। काफी जद्दोजहद के बाद लूकरगंज एक्सचेंज के एस.डी.ओ. ने उसे करीब हफ्ते में लगवाया, इसके लिये भी काफी दबाव डालना पड़ा। चूकिं उनका कहना था कि लाईन को अब मै नीचे जमीन से ले जाऊँगा, इसलिये मै ठेकेदार का इंतजार कर रहा हूं जिसे खुदाई करना है। मैने उनसे जोर देकर कहा कि महोदय करीब 7 दिन बीतने को है, किन्तु हमारी समस्या का समाधान नही हो रहा है। अब आपका ठेकेदार महीने भर न मिले तो हम बिल भरने को क्यों तैयार रहे। प्रतिदिन के हिसाब से 33 रूपये मै इन्‍टनेट का देता हूँ, आज सात दिन का करीब 230 रूपये के आसपास बिल होता है। उपभोक्ता यदि एक दिन भी बिल जमा करने के देरी कर दे तो तुरंत अधिभार ठोक दिया जाता है किन्तु यहॉं हमारे 230 रूपये की कोई कीमत नही है ? यह कहने पर उन्होने अगले दिन पुन: तार लगवा दिया।
 
अभी इन्टरनेट को चले 4 दिन भी नही हुये थे कि चोरो की कृपा हमारे तार पर फिर हो गई, इस बार हमारी लाइन ही नही करीब 1500 फोन लाईनों पर व्यापक दृष्टिपात किया गया। इस बार टेलीफोन बाक्स के नीचे आग लगाकर कापर के तार को चोरी करने का प्रयास किया गया। चोर तो कामयाब न हुये किन्तु 1500 फोनो का बंटाधर हो ही गया। मैने स्वयं उस बक्से को देखा तो करीब उसमें 5 किलो कॉपर के तार निकल सकते थे। जो कुछ भी हो 5 किलो तारे के लिये लगभग 1500 लोगों को लाखो रूपये नुकसान सहना पड़ रहा है। कल पुन: एस.डी. ओ से मिला तो उन्होने इसे ठीक करने में दो हफ्तें का समय लगेगा यह जानकारी दी। जैसा भी हो आज देश में बेकारी इतनी हो गई है कि लोगों के पास छोटी-छोटी घटनाऍं करना कोई बड़ी बात नही रह गई है। किन्तु यह छोटी छोटी घटनाएं किसी किसी पर बहुत भारी पड़ जाती है। जैसे हम पर ही, इस समय मोबाइल से नेट का उपयोग किया जा रहा है न स्पीड है न संतोष किन्तु जो पैसे लग रहे है अलग।


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गूगल एडसेंस - दो साल में अर्श से फर्श तक



हमने पहली बार अक्टूबर 2006 में एडसेंस लगाया था, जिसका पहला 169 डालर का भुगतान अप्रेल 2008 में निर्गत हुआ था, किन्तु हमें वो आज तक मिला ही नही। :( कमाई का सिलसिला यू ही जारी रहा और मई में फिर 103 डालर का भुगतान जारी हुआ, किन्तु यहाँ भी हमारा दुर्भाग्य हम पर हावी रहा और इसका भी पेमेंट हमें आज तक नही मिला। गूगल एडसेंस और हमारा दुर्भाग्य, दोनो मिल कर हम पर हावी है। पहले तो हमारा पिन ही नही आ रहा था, तीन रिक्वेस्ट किया तब जाकर पिन ने हमारे दरवाजे पर दस्तक दी। अब तो रही सही कसर गूगल वालों ने पूरी कर दिया और हमारे (लगभग सभी हिन्‍दी ब्लागों से) ब्‍लाग से विज्ञापन ही गायब कर दिया।
हमारे दो भुगतानों को न मिलने से हमें बहुत निराशा हुई, क्योकि यह अब पॉंच अंकों मे कमाई का का मामला हो चुका था। मई जून मिला कर पुन: हमने 183 डालर अर्जित कर लिया था, पिछले भुगतान हमें न प्राप्त होने पर हमने गूगल से सम्पर्क किया और अपने पूराने भुगतानों को न प्राप्‍त होने की बात कहीं, और पिछले भुगताने को कैसिंल कर नये भुगतान में जोड़ कर कोरियर सर्विस द्वारा भेजने को कहा, और हमें सकारात्मक उत्तर मिला। और उन्‍होने जून तक का भुगतान 455 डालर में से कोरियर का 25 डालर काट कर 430 डालर हमें 27 अगस्त को भेज दिया है। अभी तक मुझे यह राशि भी प्राप्त नही हुई है, चूकिं 25 डालर देने के बाद आशा करता हूँ कि यह मुझे मिल जायेगे।
इस समय सबसे बड़ी समस्या यह आ गई है कि जून तक का भुगतान लेने के बाद जुलाई के मध्य से विज्ञापन दिखना बंद हो गया, जब तक एडसेंस चल रहा था मैने 48 डालर अर्जित कर चुकें थे, 15 जुलाई से लेकर आज तक 48 से 53 डालर ही हो सका है, और सही गति रही हो 100 डालर की सीमा में पहूँचने में करीब एक-ढ़ेड़ साल लग जायेगे। मुझे दुख हो रहा है कि मैने अपने पैसे मगवाने में जल्दी कर दिया, काश एक माह रूक गया होता तो मेरा 53 डालर भी क्लीयर हो गया होते। वाह री किसमत, इसे ही कहेगे कि 3 महीने में मात्र 5 डाल ही मिले, जबकि हमने दो सालों में करीब आधा दर्जन बार हमने एक दिन में 5 डालर तक प्राप्त किये थे।
जो होता है अच्छा ही होता है, यही मान के चल रहा हूँ, कि बिज्ञापन फिर से शुरू होगे और 100 डालर तक जल्दी पहुँचेगा। अभी तो मेरी गूगल के फोकट के विज्ञापन दिखाने के कोई इच्‍छा नही है, वैसे भी जब गूगल ने हमारा ध्यान नही रखा तो हम क्यो उसके फोकट के विज्ञापन दिखाये। जब तक विज्ञापन नही दिखते है, तब तक के लिये मै गूगल एडसेंस को अलविदा कर रहा हूँ। चूकि इसका कारण भी है कि जहाँ ऐड लगा होता है वहाँ ऐड की अनुपलब्धता के कारण रिक्तता आ जाती है, जिससे ब्‍लाग की शोभा ही बिगड़ती है।
गूगल के विज्ञापन हटने के बाद थोड़ा लेखन से भी रूझान कम हुआ, किन्तु जब मै आया था तो पैसे की सोच कर लिखने नही आया था। लिखना मेरी रूचि और स्‍वाभाव था। मुझे उसे नही बदलना चाहिये। पैसे तो हम कमाते रहेगे, क्‍योकि कमाने के लिये तो पूरी जिन्दगी ही पड़ी है। मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मेरी लेखन में निरंतरता बनी रहे। मेरे कुछ नियमित पाठक मुझसे लगातार मुझे मेल करके राष्ट्रवादी विचार धारा के लेखों को मॉंग करते है। मै अपने पाठको को नाराज नही करना चाहूंगा, जिस चीज के लिये महाशक्ति जानी जाती थी, आने वाले कुछ दिनों में आपको महाशक्ति उसी रूप में मिलेगी।
खैर अब तक तो मै अपने दो सालो की ब्‍लाग अर्निंग 430 डालर (18770 रूपये) की आशा कर ही सकता हूँ जो मुझे एक हफ्ते में मिल ही सकते है, इलाहाबादी बन्धु पार्टी के लिये तैयार रहे।


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क्यों परेशां हो बदलने को धर्म दूसरों का?



पोप ने उड़ीसा में हुई हिंसा पर दुःख प्रकट किया और निंदा की. लेकिन यह दुःख और निंदा दोनों अपने ईसाई भाई-बहनों के लिए थी. हिंदू भाई-बहनों के लिए न उनके पास दिल है और न समय. जो ईसाई इस हिंसा में मरे उनके लिए पोप ने आंसू बहाए, पर स्वामीजी और उनके चार चेलों के लिए न उनके पास आंसू हैं और न कोई सहानुभूति का शब्द.
शुरुआत किसने की? स्वामीजी और उनके चार चेलों को क्यों मारा गया? क्या यह धर्म के नाम पर हिंसा नहीं है? इन लोगों को मार कर ईसाई क्या सोच रहे थे कि हिन्दुओं को दुःख नहीं होगा? क्या वह चुपचाप कभी मुस्लिम आतंकवादियों और कभी ईसाईयों द्वारा मारे जाते रहेंगे और कुछ नहीं कहेंगे? क्या हिन्दुओं को तकलीफ नहीं होती? क्या जब उनकी दुर्गा माता की नंगी तस्वीर बनाई जाती है तो उनका दिल नहीं दुखता? इन सवालों का जवाब क्या है और कौन यह जवाब देगा?
अब भी कभी किसी मुसलमान या ईसाई के साथ अन्याय होता है, सारे मुसलमान, सारे ईसाई और बहुत सारे हिंदू खूब चिल्लाते हैं. हिन्दुओं को गालियाँ देते हैं. उनके संगठनों पर पाबंदी लगाने की बात करते हैं. भारतीय प्रजातंत्र तक को गालियाँ दी जाने लगती हैं. पर जब हिन्दुओं के साथ अन्याय होता है तो यह सब चुप रहते हैं. कश्मीर से पंडित बाहर निकाल दिए गए, कौन बोला इन में से? जम्मू में आतंकवादियों ने कई हिन्दुओं को मार डाला, कौन बोला इन में से? मुझे लगता है कि मुसलमान और ईसाईयों से ऐसी उम्मीद करना सही नहीं है कि वह कभी किसी हिंदू पर अन्याय होने पर दुःख प्रकट करेंगे. शायद उनके धर्म में ही यह नहीं है. पर हिंदू तो हिन्दुओं को गाली देना बंद करें. जब हिंदू हिंदू को गाली देता है तो मुसलमान और ईसाईयों का हौसला बढ़ता है. मुझे यकीन है कि अगर हिंदू हिंदू को गाली देना बंद कर दे तो भारत में धरम के नाम पर दंगे कम हो जायेंगे. हिन्दुओं का एक होना जरूरी है, मुसलमानों और ईसाईयों के खिलाफ नहीं, बल्कि मुसलमानों और ईसाईयों को यह बताने के लिए कि भारत में हिन्दुओं के साथ मिल जुल कर रहो. इसी में सबकी भलाई है.

न हिंदू बुरा है,
न मुसलमान बुरा है,
करता है जो नफरत,
वो इंसान बुरा है.
और अब एक निवेदन पोप से:
क्यों परेशां हो?
बदलने को धर्म दूसरों का,
खुदा का कोई धर्म नहीं होता.


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मेरा नेट कई दिनों से ख़राब है ppp



मेरा नेट कई दिनों से ख़राब है, काफी दिनों से ठीक करवाने के लिए दौड़ रहा हूँ पर अभी तक ठीक नही हुआ! पता चला की तर चोरी हो गया है! जल्द ही मिलते है! वैसे मई नेट का उपयोग करने के लिए कैफे में नही जाता हूँ किंतु आज जरूरी काम था सो आना पड़ा, मुझे नही लगता है की आने वंले दिनों में ठीक हो पायेगा, तब तक मई बीएसएनएल को ३५ रु के हिसाब से रोज भुगतान करता ही रहूँगा। :) देखिये आपसे कब मुआकत होती है। आज देखा ते पाया की काफी कमेन्ट मोड्रेसशन में थी!
 
भगवान तार चोरो और बीएसएनएल के अधिकारियो का भला का बाला करे!


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पंगेबाज की कंडोलेंस डायरी - पेज नं 302



दीप जो जलता रहा

मुझे पंगेबाज की अन्तेष्ठी कार्यक्रम में डोम कार्य का दायित्‍व माननीय शुरेश जी के सानिध्‍य में सौपा गया था, उस कड़ी में जारी है पंगेबाज की कंडोलेंस डायरी का पेज नं 302

पंगेबाज बहुत अच्छे आदमी थे, मुझे तो उनके लेखो में आत्मीयता झलकती थी। उनके सारे लेखों पर मैने ''अच्छा, बहुत अच्छा और सार‍गर्भित की ही टिप्पणी की।अत्यंत दुख के साथ कहना पड़ना रहा है कि पंगेबाज के जाने से मेरे लिये टिप्पणी करने का एक ब्लाग कम हो गया। अब वो स्‍थान कैसे भरेगा ? पंगेबाज भगवान तुम्हारी आत्मा को शान्ति प्रदान करें।
आपको सदा याद करने वाला
तुम्हारा
समीर

''सही है'' जिसे आना है जायेगा, जिसे आना होगा आयेगा। हिन्दी ब्‍लागिंग में पंगेबाज बहुत महत्वपूर्ण स्‍थान रखते थे। ये बात भी सत्य है कि पंगेबाज के जाने के बाद पंगेबाजी खत्म होने वाली है। तुम्हारी रंगों में बह रहा खून, एक ब्‍लागर का खूर था, और पंगेबाजी तो हर ब्‍लागर के नस नस में रची बसी है। मुझे दुख है कि मेरे ब्‍लाग की एक टिप्‍पणी कम हो गई, मै अपने ब्लाग पर आये इस एक टिप्पणी के शुन्‍य को खोज रहा हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि उनके एकाध प्रतिस्पर्धी को भी अपने पास बुला ले ताकि पंगेबाज की आत्मा पंगेबाजी के लिये उद्वलित करे, तो स्वर्ग में सुविधा उपलब्ध हो जाये, उनकी आत्मा को धरती की ओर रूख न करना पडे़।
तुम्हारा
फुरसतिया

उड़ी बाबा, पोगेबाज चोला गया! , कोय को गया ? , ओब मी केसे लोड़ाई कोरबो ? ओब मेरी सोंड वाली फोस्टिंग के कोरेगा ? मेरे लिखे पर के खुरपैच निकोलेगा ? अब मेरे स्वादिष्ट पुस्तचिन्ह को कौन खोयेगा ? उड़ी भोगवान हम ओब क्‍या कोरेगा ? किसके ब्‍लोग पर एनिनोमिस टिप्‍पोनी कोरेबे ? हे भोगवान, तेरे ओगे किसी की नही चोलने का, जो हुआ ठीक हुआ, प्लीज गोड जी एक कोम कोरने का, एक नेट कोनेक्सन लोगवा लो, हम पंगेबोज से स्‍वर्ग से ही पोंगा कोरेगा।
तुम्‍हारा
(पोगेबाज होमको जोनता है, हम ओपना नाम नही लिखेगा।)


बड़ा अच्छा आदमिवा रहा ई पंगेबजवा। हम राजनेतवन का ई शब्दवा तो हम मरै वाले आदमी के बदै कहै कर पड़ता है, तबै तो हमरे पेशे का नेतागीरी कहा जात है। देखा हरकिशन के मरै पर हर नेता पहुँचा रहै कंडोलेंस करै, कि ई बहुत बड़ा और अच्छा नेतावा रहै।
अब पंगेबाजवा के मरै पर तो हमरै फर्ज रहै कि ई काम हमहु काम करी, कहै कि हर आदमी का अपने भविष्‍य के चिन्ता होत है। हे ईश्वरवा एक ठो ई आत्मा जात अहै एका शान्ति दिहो, काहे कि अब एकरे पहुँचे के बाद तोहका शान्ति न मिली।
तोहार परम मित्तर,
अफलातून

आप भी पंगेबाज को अपनी शोक सम्वेदन देना चाहते है तो pramendraps@gmail.com पर अपना संदेश और नाम ईमेल करें। आज हम बहुत दुखी है इसलिये स्माईली नही लगा रहे है।






द्वारा
प्रमेन्द्र प्रताप सिंह
क्रिया कर्म विशेषज्ञ पगेबाज,
क्रमश: जारी ...........


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जिम में हम



सोमवार को जिम जाना शुरू किया, महादेव जी का व्रत भी था। शाम को जिम से लौटा काफी अच्छा महसूस कर रहा था। जिम में व्यायाम का काफी अच्छा अनुभव रहा किन्तु सुबह उठते ही जिम की तरावट, थकावट में बदल चुकी थी। पूरी शरीर में दर्द हो रहा था। उठे उठा नही और बैठे बैठा नही जा रहा था।

सुबह ही सुबह बुखार भी हो गया था, करीब 102 फारेनहाइट बता रहा था। अब तो जिम की हवा ही निकल चुकी थी। चूकि हमारे जिम में जाने की खबर घर में किसी को नही थी, और यही कारण था कि सभी लोग आम बुखार समझ रहे थे। हम जान रहे थे कि हमारी क्या स्थिति उस समय रही होगी ? पर हम क्या कर ही सकते थे।



चित्र साभार
पुन: शाम होती है और जिम जाने का समय हो जाता है, हम अभी तक जो बेड पर आराम फरमा रहे थे, पूर्ण रूपेण जिम फार्म में आ चुके थे। आज जिम जाने का मन तो नही कर रहा था किन्तु हम कर ही क्या सकते थे। सभी दोस्‍तो ने कहा कि आज नही जाओगे तो और दर्द करेगा। हम भी मान गये किन्‍तु हमारा मन कह रहा था कि अगर आज मै नही जाऊँगा तो काफी हद तक तबियत ठीक हो जायेगी। पर दोस्‍तो की ही बात मान गया।

शाम को लौटने पर हालत और गम्‍भीर हो चुकी थी, अब अगले दिन जाने की इच्छा नही कर रही थी, और गया भी नही। मुझे लग रहा था कि आज न गया तो मै ठीक हो जाऊँगा। यही बात साथियों को बताया किन्‍तु नही माने पर मेरी बात के आगे उन्‍हे मानना ही पड़ा। एक दिन आराम किया काफी अच्‍छा महसूस होने लगा। फिर अगले दिन से सब कुछ नर्मल हो गया। और तो रोज जाते है। :)


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प्रयाग की एक और ब्‍लागर मीट



कल अचानक एक फोन आया, कि प्रमेन्‍द्र जी (अपना नाम लेकर) कहा कि मै बोल रहा हूँ। प्रारम्‍भ में मैने तो स्‍पष्‍ट रूप से पहचानने से इंकार कर दिया। किन्‍तु जब आवाज आई कि महाशक्ति जी मै बोल रहा हूँ तो दिमाग के सारे तार आपने आप खुल गये तो पता चला कि मेरा चुंतन ब्‍लाग के श्री संतोष कुमार पांडेय जी बोल रहे है। उन्‍होने कहाँ यदि आप चाहे तो ब्‍लागर मीट हो सकती है, अभी आपके मोहल्‍ले में ही विचरण कर रहा हूँ, हमने भी मिलने के लिये हाँ कर दिया। चूकिं वह लूकरगंज में अपने चार पहिये गाड़ी की सर्विसिग करवाने आये थे, गाड़ी सर्विस के लिये देने के पश्‍चात मुझे खुद उन्‍हे लेने जाना हुआ। घर ही हमारे भइया महाशक्ति समूह के श्री मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह भी उपलब्‍ध थे, जो इस मिलना को द्वियामी से त्रियामी बनाने के लिये उपलब्‍ध थे।
घर आकर हम लोगों ने काफी बात की, ब्‍लाग की वर्तमान दशा और दिशा पर भी हम लोगों ने चर्चा किया। उनका काफी दिनों से लेखन बंद है और मै भी काफी दिनों से कम लिख रहा था। इधर मैने उन्‍हे कुछ न कुछ लिखने के लिये कहा कि समय मिले तो जरूर लिखे और उन्‍होने जल्‍द ही सक्रिय होने की बात कहीं। उन्‍होने मेरी सक्रियता की कमी पर प्रश्‍न उठाया कि महाशक्ति की शान्ति का माहौल मजा नही दे रही है। :)
मैने स्‍पष्‍ट किया कि इधर अपनी प‍रीक्षाओं के कारण दूरी बनी रही, फिर सिर्फ लिखने के लिये लिखने की इच्‍छा नही करती है, का कारण बताया। सही बात भी है मैने इन दिनों अधिकत ब्‍लाग सिर्फ लिखने के लिये बिना उद्देश्‍य लिखा जा रहा है। इन दिनों इस तरह के लेखन से मेरा मन तो उब गया है। अन्‍त में फिर जल्‍दी मिलने के वायदे के साथ हमारी लघु चिट्ठाकार वार्ता सम्‍पन्‍न हो गई।

चित्र के लिये प्रतीक्षा करें। -


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आज का दिन जरा हट के



आज बहुत दिनों बाद सीधे ब्‍लागर एकाउन्‍ट पर कुछ लिख रहा हूँ, क्‍योकि अभी तक मै लेख आदि पोस्‍ट करने के लिये विन्‍डोज लाइव राइटर का उपयोग करता था। सीधे लिखने का अपना ही मजा होता है, और मजे के साथ लिखने का अपना विशेष मजा होता है। :)
 
काफी दिनों से ब्‍लाग की नजदीकियों से दूर था अपनी समस्‍याओं और समस्‍या के समाधान के निस्‍तारण के कारणों से, आज सूर्य ग्रहण भी दिखा, हमने आज वर्षा जी की महाशक्ति समूह पर आई पोस्‍ट के कारण हमने पूरे परिवार के साथ सूर्यग्रहण देखा, गोल्‍डेन रिंग का विहंगम दृश्‍य का भी अवलोक किया। चूँकि सूर्यग्रहण को धर्म से जोड़ कर देखा जाता है तो इस बीच में भक्ति भावना को भी कायम रखने का प्रयास किया गया। आज काफी दिनों बाद परिवार के सभी सदस्‍य एक साथ बैठे और राम चरित मानस के सस्‍वर पाठ का आनंद लिया।
 
सूर्य ग्रहण समाप्‍त हो गया है, अब नहाने जा रहा हूँ जल्‍द ही मिलूँगा, एक नई बात लेकर।


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अंतककियों का अगला निशाना भोपाल/शिमला तो नही



जयपुर, बंगलुरू और उसके बाद अहमदाबाद, जिस प्रकार भाजपा शासित राज्‍यों पर लगातार हमले हो रहे है, इससे यह जान पड़ता है कि आंतकियों का अगला निशाना अब भोपाल या शिमला हो सकता है। आंतकवाद भाजपा या कांग्रेस नही दे‍खता है किन्‍तु जो परिदृश्‍य दिख रहा है कि यह सुनियोजित तरीके से देश के ही तत्‍व यह कुकृत्‍य कर रहे है।

देश के भीतर पल रहे विषबीजों का काम है जो आने वाले चुनावों में भाजपा के शासन को कंलकित दिखाना चाहते है। जिस प्रकार की हरकत केन्‍द्र सरकार ने संसद में कि उससे तो यही लगता है कि सरकार सत्‍ता के लिये कुछ भी कर सकती है, अगर बम विस्‍फोट भी होते हे तो इसमें कोई शक नही कि खुफिया तंत्र की विफलता के पीछे सरकार का ही हाथ होता है। राजनीति का स्‍तर सत्‍ता की भूख के लिये इतना गिरना नही चाहिये।

भगवान दोनो जगह हुये विस्‍फोटों में शहीद हुये लोगों की आत्‍मा को शान्ति प्रदान करें।


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अन्तिम संस्‍कार Antim Sanskar



अन्तिम संस्‍कार
 भारतीय संस्‍कृति में सस्‍कारों की प्रधानता है। संस्‍कारों में अन्तिम संस्‍कार अन्‍तेष्टि संस्‍कार को कहा जाता है जिसे अन्तिम संस्‍कार भी कहा जाता है। अन्‍त्‍येष्टि संस्‍कार को हम परिभाषित करने के लिये अन्तिम इष्टि या कर्म भी कह सकते है। यह मनुष्‍य के जीवन का सबसे अन्तिम कर्म होता है इसके पश्‍चात कोई अन्‍य कर्म या कार्य मनुष्‍य के लिये शेष नही होता है। अन्तिम संस्‍कार का उद्देश्‍य शरीर की भौतिक सत्‍ता को परमात्‍मा में विलीन करने की होती है। हिन्‍दु धर्म में मनुष्‍य की यह अन्तिम क्रिया शरीर को जलाने से शुरू होती है। इस बात की पुष्टि करते हुये यजुर्वेद कहता है- मास्‍मातं शरीरम्।
 
वैदिक धर्म में मनुष्‍य की आयु 100 वर्ष निधारित की गई है- जीवेम शरद: शतम्। इस धर्म में पुर्नजन्‍म की धारणा मिलती है जिसके कारण हम यह देखते है कि मनुष्‍य अपने जीवन काल में सभी अच्‍छे कामों को करना चाहता है ताकि उसे अगले जन्‍म उच्‍च कोटि का का जन्‍म मिले अथवा परमात्‍मा उसें अपने में अंगीकृत कर ले। विद्वान बौधायन कहते है कि मनुष्‍य जन्‍म और मृत्‍यु के पश्चात हये समस्‍त संस्‍कारों से परलोक को जीतता है।
 
आत्‍मा अजर और अमर होती है। श्रीमद् भगवतगीता कहती है कि -
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि । 
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥
व्‍यक्ति अपने पुराने कपड़े त्‍याग कर नये कपड़े धारण करता है उसी प्रकार आत्‍मा भी अपने कर्मो के आधार पर अपने पुराने शरीर को त्‍यागकर नये शरीर(योनि) को धारण करता है। यह तभी सम्‍भव होता है कि जब मनुष्‍य के शरीर का उचित कियाओं द्वारा आत्‍मा की शान्ति के लिये संस्‍कार क्रिया प्रतिपादित किये जाते है। आत्‍मा का शरीर त्‍याग के बाद शवदाह, शवयात्रा, अस्थिचयन, प्रवाह, पिण्‍डदान श्राद्ध, बह्मभोज आदि शरीरान्‍त के पश्चात ऐसे किये जाने वाले अनिवार्य कर्म है, जिनकी पूर्ति के बिना आत्‍मा की शान्ति सम्‍भव नही है। इन सभी कर्मो को विधि विधान से किये जाने पर आत्‍मा प्रेतयोनि में नही भटकती है।

शरीर की इस अन्मित क्रिया के लिये मत्‍स पुराण में शव को जलाने, गाड़ने तथा प्रवाह देने की बात कहीं गई है- य: संस्थित: पुरूषो दह्यते वा निखन्‍यते वा‍Sपि निकृष्‍यते वा। सम्‍पूर्ण विश्‍व में शव को गाड़ने की प्रथा दिखती है किन्‍तु आज चीन समेत कई देश हिन्‍दू संस्‍कृति के दाह प्रथा को मान्‍यता दे रहे है। क्‍योकि यह शरीर की आन्तिम किया का सर्वश्रेष्‍ठ माध्‍यम है। चीन सरकार ने 14 मार्च 1985 के आदेश में कुछ जाति के लोगें को छोड़कर शेष धर्म जाति के लोगों में शव के गाड़ने पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्‍ध लगा दिया है तथा पुरानी कब्र को पुन: जोतने का आदेश दे दिया है।
 
हिन्‍दू पद्यति में मुत्‍यु के बाद संस्‍कारों के आयोजन का महत्‍व इसलिये भी बढ़ जाता है क्‍योकि हिन्‍दू र्ध्‍मा में सम्‍बन्धियों के मध्‍य प्रेम के कारण ही वह मृतक के वियोग को सहन नही कर सकता है किन्‍तु मृत्‍यु के पश्चात होने वाले कर्मकाण्‍डों के फल स्‍वरूप वह मृत आत्‍मा की शान्ति के लिये लग जाता है इस व्‍यस्‍तता के कारण वह इस दुखद वेला को भूल जाता है। अन्‍त्‍येष्टि संस्‍कार में यह शोकापनयन की सर्वश्रेष्‍ठ मनोवैज्ञानकि औ व्‍यवहारिक प्रक्रिया है।
अपनी प्रतिक्रिया अवश्‍य दे ताकि संस्‍कारों की अगली श्रृंखला में सुधार कर सकूँ।


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हँसों जम के हँसो



http://www.getentrepreneurial.com/images/laugh.gif

1
वैलेंनटाईन डे के दिन एक प्रेमी जोड़ा एक बाग में मिलता है, प्रेमी जोड़ा पेड़ के तले बैठ जाता है. प्रेमिका की तारीफ करते हुए प्रेमी बोलता है, तुम्हारी आँखें बहुत प्यारी हैं, इनमें डूबने को मन करता है, इन आँखों में मुझे सारी दुनिया नजर आती है।
इतने में पेड़ से आवाज आती है, रे भाई कल शाम से मेरा गधा गुम है, हो सके तो देख बताओ ना कहां है।


2
बॉस गुस्से में कर्मचारी से बोला, तुमने कभी उल्लू देखा है।
कर्मचारी ने सिर झुकाते हुए कहा, नहीं सर।
बॉस ने जोर से डांटा, नीचे क्या देख रहे हो, मेरी तरफ देखो।

3
बॉस गुस्से में कर्मचारी से बोला, तुमने कभी उल्लू देखा है।
कर्मचारी ने सिर झुकाते हुए कहा, नहीं सर।
बॉस ने जोर से डांटा, नीचे क्या देख रहे हो, मेरी तरफ देखो।

4
संता बुदबुदाते हुए समाजशास्त्र के प्रश्न पत्र को हल कर रहा था, भारत में हर तीन मिनट बाद एक औरत एक बच्चे को जन्म देती है। आने वाली भयावह स्थिति पर किस प्रकार नियंत्रण पाया जा सकता है?
बंता पीछे से कहता है, पहले उस औरत को तलाश करना चाहिए।

5
शिक्षक (छात्र से) - बताओ फोर्ड क्या है?
छात्र (शिक्षक से) - गाड़ी।
शिक्षक - वेरी गुड, अब बताओ आक्सफोर्ड क्या है?
छात्र - बैल गाड़ी।


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जो मजा विरोध भरी टिप्‍पणी में है वो और कहाँ ?



आज हमारी एमए की परीक्षा समाप्‍त हो गयी, मुझे पूर्ण विश्वास है कि अक्टूबर तक हम परास्‍नाकत डिग्री धारक हो जायेगे। फरवरी माह से ही परीक्षा दे दे कर थक गये थे। करीब दो माह तक अब कोई परीक्षा नही है, अगर आ गई तो परीक्षा की खैर नही, हमारी तैयारी जोरो से चल रही है। :)

इधर बहुत दिनों से कुछ गम्‍भीर लेखन नही हुआ, कुछ मजा नही आ रहा है। कहते है गर्म तावे पर पानी डालने पर जो आवाज निकलती है उसे सुन कर बड़ा मजा आता है। उसी गर्म तावे की भातिं मेरी भी स्थिति है, काफी दिनों से अन्‍दर ही अन्‍दर बहुत विषयों की का तावा बहुत गर्म हो गया है बस लिख कर पोस्‍ट करने की देर है, फिर देखिये आपके गर्मा गर्म टिप्‍पणी रूपी पानी क्‍या गुल खिलाता है। :)


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इन जयचन्‍द्रों का अंत कब होगा ?



पाकिस्‍तान के बलूचिस्‍तान प्रान्‍त के एक हिन्‍दू विधायक को वहाँ का मुलायम और लालू बनने का शौक चढ़ है। तभी उसे हिन्‍दुओं के 52 शक्ति पीठों में एक हिंगलाज मंदिर को समाप्‍त कर, बांध बनाने का पू‍री विधान सभी में अकेला सर्मथन कर रहा था। यह हिन्‍दुत्‍वों का और उस माता का दुर्भाग्‍य है कि उसके कैसे जयचंद्रो को जन्म दिया।

http://www.hinglajmatamandir.com/images/maa2.gif

बलूचिस्‍तान प्रान्‍त में हिन्‍दू के 52 शक्ति पीठों में से एक हिंगलात माता के मन्दिर का अस्तित्‍व खतरे में नज़र आ रहा है। पाकिस्‍तान की संघीय सरकार ने मंदिर पास बांध बनाने का प्रस्‍ताव रखा है जिसे बूलचिस्‍तान प्रदेश सरकार ने संघीय सरकार से अपनी परियो‍जना को बदलने का अनुरोध किया है।

इस मंदिर के महत्‍व में कहा जाता है कि यह हिंगलाज हिंदुओं के बावन शक्तिपीठों में से एक है। मंदिर काफ़ी दुर्गम स्थान पर स्थित है, पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव की पत्नि सती के पिता दक्ष ने जब शिवजी की आलोचना की तो सती सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने आदाह कर लिया। माता सती के शरीर के 52 टुकड़े गिरे जिसमें से सिर गिरा हिंगलाज में। हिंगोल यानी सिंदूर, उसी से नाम पड़ा हिंगलाज। हिंगलाज सेवा मंडली के वेरसीमल के देवानी ने बीबीसी को बताया कि चूंकि माता सती का सिर हिंगलाज में गिरा था इसीलिए हिंगलाज के मंदिर का महत्व बहुत अधिक है।

जब किसी पवित्र खजू़र के पेड़ को बचाये जाने के लिये सड़क को मोड़ा जा सकता था तो 52 शक्ति पीठों में से एक हिंगलात माता के मन्दिर को क्‍यो नही बचाया जा सकता है। प्रान्‍तीय सरकार के सभी सदस्‍य इस मंदिर को बचाये जाने के पक्ष में है किन्‍तु हर जगह लालू-मुलायम जैसे सेक्‍यूलर नेता पाये जाते है। ऐसा ही उस प्रान्‍त भी है हिंदू समुदाय से संबंध रखने वाले एक विधायक ने मंदिर के पास बाँध के निर्माण की हिमायत की। बलूचिस्तान प्रांतीय असेंबली के सदस्य बसंत लाल गुलशन ने ज़ोर दे कर कहा है कि `धर्म को सामाजिक-आर्थिक विकास की राह में अवरोध बनाए बगैर' सरकार को इस परियोजना पर काम जारी रखना चाहिए। 

हे भगवान इस धरा से इन जयचन्‍द्रों का अंत कब होगा ?



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फेडरर तुम हार गये पर दिल जीत लिया



 
फेडरर होने का मतलब शानदार खेल होता है, और फेडरर इसीलिये वर्षो से नम्‍बर एक नही है। फेडरर कई वर्षो से अपने कैरियर के चरम पर थे और चरम पर होने पर गिरवाट की 100 प्रतिशत सम्‍भवन होती है, इसी गिरावट का दौर फेडरर के साथ हो रहा है। पहले विम्‍बडन के पहने दो सेट तो नाडल ने हलुआ की तरह जीत लिया मानो वह किसी गैरवरीय के खिलाफ खेल रह‍े थे लगा कि लीन सेटों मेंखेल समाप्‍त हो जायेगा, किन्‍तु खेल अभी खत्‍म नही हुआ था अगले दो सेटों में फेडरर ने वापसी की जो मेरे हिसाब से असंम्‍भव थी क्‍योकि दो सेटो में फेडरर की 80 प्रतिशत नाव डूब चुकी थी किन्‍तु फेडरर ने अपने आपको बचाया और खेल को अपनी नाम के अनुसार पाँच दौर तक ले गये।
नडाल ने रविवार को विंबलडन के इतिहास के सबसे लंबे फाइनल में 6-4, 6-4, 6-7, 6-7, 9-7 से जीत दर्ज करके फेडरर का लगातार छठा विंबलडन खिताब जीतने का सपना भी तोड़ दिया। नडाल ने चार बार फ्रेंच ओपन का खिताब जीता है जबकि यह उनका पहला विंबलडन खिताब है। विंबलडन में सेंटर कोर्ट पर हुये इस ऐतिहासिक मैच को मै आधा ही देख सका, जब तक मेरा फेडरर हारता रहा। :) क्‍योकि वर्षा बाधित मैंच का यही दौर था। फेडरर की बादशाहत अभी खत्‍म नही हुई है अभी वह नाडल से 500 एटीपी प्‍वाइंट लेखकर 231वें हफ्ते दुनिया के नंबर एक बने रहेंगे जबकि नडाल भी लगातार 155वें हफ्ते दुनिया के दूसरे खिलाड़ी रहेंगे। 

राफएल नाडल, रोजर फेडरर के लिये कहते है कि मुझे पता है कि इस तरह का फाइनल हारना कितना मुश्किल होता है। वह महान चैंपियन हैं। वह हारे या जीते उनका दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक रहता है। हम करीबी मित्र नहीं हैं लेकिन मैं हमेशा उसका काफी सम्मान करता हूं। मैं अपने लिए काफी खुश हूं लेकिन उसके लिए दुखी भी हूं क्योंकि वह इस खिताब का भी हकदार था। हार से उनकी अहमियत कम नही होती है आल इंग्लैंड क्लब के बेताज बादशाह रहे रोजर फेडरर अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी हैं।
नाडाल को खिताबी जीत पर मेंरी ओर से खिताब की बहुत बहुत बधाई। पर बच कर रहना अबकी बार फ्रेंच ओपन का विजेता फेडरर होगा। क्‍योकि विंबलडन में मिथक टूटा है तो अगली बार रोला गैरोस पर फेडरर ही जीतेगे।


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फेडरर तुम हार गये पर दिल जीत लिया



 
फेडरर होने का मतलब शानदार खेल होता है, और फेडरर इसीलिये वर्षो से नम्‍बर एक नही है। फेडरर कई वर्षो से अपने कैरियर के चरम पर थे और चरम पर होने पर गिरवाट की 100 प्रतिशत सम्‍भवन होती है, इसी गिरावट का दौर फेडरर के साथ हो रहा है। पहले विम्‍बडन के पहने दो सेट तो नाडल ने हलुआ की तरह जीत लिया मानो वह किसी गैरवरीय के खिलाफ खेल रह‍े थे लगा कि लीन सेटों मेंखेल समाप्‍त हो जायेगा, किन्‍तु खेल अभी खत्‍म नही हुआ था अगले दो सेटों में फेडरर ने वापसी की जो मेरे हिसाब से असंम्‍भव थी क्‍योकि दो सेटो में फेडरर की 80 प्रतिशत नाव डूब चुकी थी किन्‍तु फेडरर ने अपने आपको बचाया और खेल को अपनी नाम के अनुसार पाँच दौर तक ले गये।
नडाल ने रविवार को विंबलडन के इतिहास के सबसे लंबे फाइनल में 6-4, 6-4, 6-7, 6-7, 9-7 से जीत दर्ज करके फेडरर का लगातार छठा विंबलडन खिताब जीतने का सपना भी तोड़ दिया। नडाल ने चार बार फ्रेंच ओपन का खिताब जीता है जबकि यह उनका पहला विंबलडन खिताब है। विंबलडन में सेंटर कोर्ट पर हुये इस ऐतिहासिक मैच को मै आधा ही देख सका, जब तक मेरा फेडरर हारता रहा। :) क्‍योकि वर्षा बाधित मैंच का यही दौर था। फेडरर की बादशाहत अभी खत्‍म नही हुई है अभी वह नाडल से 500 एटीपी प्‍वाइंट लेखकर 231वें हफ्ते दुनिया के नंबर एक बने रहेंगे जबकि नडाल भी लगातार 155वें हफ्ते दुनिया के दूसरे खिलाड़ी रहेंगे। 

राफएल नाडल, रोजर फेडरर के लिये कहते है कि मुझे पता है कि इस तरह का फाइनल हारना कितना मुश्किल होता है। वह महान चैंपियन हैं। वह हारे या जीते उनका दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक रहता है। हम करीबी मित्र नहीं हैं लेकिन मैं हमेशा उसका काफी सम्मान करता हूं। मैं अपने लिए काफी खुश हूं लेकिन उसके लिए दुखी भी हूं क्योंकि वह इस खिताब का भी हकदार था। हार से उनकी अहमियत कम नही होती है आल इंग्लैंड क्लब के बेताज बादशाह रहे रोजर फेडरर अब भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी हैं।
नाडाल को खिताबी जीत पर मेंरी ओर से खिताब की बहुत बहुत बधाई। पर बच कर रहना अबकी बार फ्रेंच ओपन का विजेता फेडरर होगा। क्‍योकि विंबलडन में मिथक टूटा है तो अगली बार रोला गैरोस पर फेडरर ही जीतेगे।


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बहस - भारत के प्रधानमंत्री पद के उम्‍मीदवार की न्‍यूनतम आयु कितनी है ?



भारत के प्रधानमंत्री की न्‍यूनतम आयु कितनी है ? इस  प्रश्‍न पर में और कुछ मित्रों में पिछले कई दिनों से चर्चा का विषय बना हुआ है और हम सभी विभिन्‍न प्रकार की सामान्‍य ज्ञान तथा सविंधान की पुस्‍तकों का गहन अध्‍ययन कर रहे है। आपके नज़र में प्रधान मंत्री पद की न्‍यूनतम आयु पर अपनी स्‍पष्‍ट राय रखें। साथ ही साथ दाई और मतदान बोर्ड पर अपना मत अंकित करें। मै अपनी बात अगली पोस्ट में रखूँगा। :)


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चिट्ठाकारी में महाशक्ति के दो साल



बीते माह की 30 तारीख को हमारे चिट्ठाकारी जीवन 2 साल पूरे हो गये, और देखिए, मै यहीं बात भूल गया कि 30 जून को मैने अपना ब्‍लाग बनाया था। खैर देर आये दुरूस्‍त आये की तर्ज पर हम दुरूस्‍त आ गये है, और अपने चिट्ठाकारी के तीसरे साल में पहुँच कर 2 साल पूरे करने की घोषणा करते है।

हुआ यो कि मै अपने पढ़ाई लिखाई, खेल कूद जैसे विषयों पर छुट्टी में ज्‍यादा व्‍यस्‍त था। और इन दिनों मुझे याद ही नही रहा कि मै कभी चिट्ठाकार भी हुआ करता था। :) आज अचानक गाहे बगाहे ही याद आ गया कि मेरे चिट्ठाकारी शुरू किये दो साल पूरे हो गये है। थोड़ा दुख भी हुआ कि उस दिन पोस्‍ट न डाल सका, क्‍योकि खास दिन की पोस्‍ट का कुछ खास ही महत्‍व होता है।

इधर चिट्ठाकारी और कम्‍प्‍यूटर से दूरी का मुझे सकारात्‍मक परिणाम देखने को भी मिला, 2006 के ग्रेजुएशन में मेरा अब तक का सबसे खराब शैक्षिक प्रदर्शन हुआ था, और मै मात्र 0.42 प्रतिशत अंक की कमी के कारण 50 प्रतिशत अंक भी नही पा पाया था, मुझे इसकी कसक आज तक  है। कई ऐसी परीक्षाये आयोजित होती है जिसमें 50 प्रतिशत की मॉंग होती है और मै अयोग्‍य हो जाता हूँ और दिल पर सिर्फ और सिर्फ खीझ और सिर्फ निराशा ही हाथ आती है।

चूकिं मेरी इच्‍छा विधि की पढ़ाई की थी और 2006 की असफलता के ग्रहण के कारण इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय में प्रवेश न हो सका था। इच्‍छा के विपरीत साल न खराब हो इस लिये राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से एम ए का फार्म भर दिया था और फिर इस बार मैने पक्‍का इरादा किया था कि परास्‍नातक में अच्‍छा प्रर्दशन करूँगा। और इसी विश्वास के कारण अर्थशास्त्र परास्‍नातक में प्रथम सेमेस्‍टर में 58, द्वितीय में 65 तथा हफ्ते भर पूर्व घोषित तृतीय सेमेस्‍टर में 76 प्रतिशत अंक लाये थे। यह मेरी अब तक की दी गई किसी भी परीक्षा का सर्वोत्‍तम अंक है। निश्चित रूप से आशा के अनुरूप सफलता पर खुशी मिलती है।
2007 के शुरू होते ही विधि की पढ़ाई की प्रबल इच्‍छा फिर जाग गई, और असमजस में था कि एमए के साथ विधि कैसे होगा, किन्‍तु कुछ मित्रों ने बताया कि मुक्त विश्वविद्यालय की पढ़ाई के साथ किसी और विश्वविद्यालय से डिग्री कोर्श कर सकते है, मुक्त विश्वविद्यालय के गुरूजनों से सम्‍पर्क किया तो उन्होने भी ऐसा ही उत्तर दिया। अक्‍टूबर माह में मैने विधि में प्रवेश ले लिया और कम समय में पर्याप्‍त तैयारी के बोझ के साथ लग गया। फरवरी में एमए तीसरे सेमेस्‍टर की परीक्षा के बाद ही 15 अप्रेल से विधि के पर्चे भी प्रारम्‍भ हो गये। मेरी बहुत अच्‍छी तैयारी नही थी, किन्‍तु जहां चाह तहाँ राह की धारण सत्‍य हुई 2 जुलाई को मेरा विधि का परिणाम हुआ, रिजल्‍ट आशा के‍ विवरीत हुआ, करीब 60 से 65 प्रतिशत की उम्‍मीद लगा कर बैठा था किन्‍तु 56 प्रतिशत पर आ कर रूक गया, तो भी परिणाम ठीक ही रहा। 7 और 9 जुलाई को मेरा एमए का अन्तिम सेमेस्‍टर होगा, और इस साल मेरे पास काफी समय होगा विधि के लिये और पूरी कोशिश करूँगा कि अगली परीक्षाऍं भी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करूँ।

पिछले तीस जून 2007  का लेख - चिट्ठाकारी में महाशक्ति के एक साल


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इश्क



वफाओं को हमने चाहा,
वफाओं का साथ मिला।
इश्‍क की गलियो में भटकते रहे,
घर आये तो बाबू जी का लात मिला।।

घर लातों को तो हम झेल गये,
क्‍योकि यें अन्‍दर की बात थी।
पर इश्‍क का इन्‍ताहँ तब हुई जब,
गर्डेन में उसके भाई का हाथ पड़ा।।

इश्‍क का भूत हमनें देखा है,
जब हमारे बाबू जी ने उतारा था।
फिछली द‍ीवाली में पर,
जूतों चप्‍पलों से हमारा भूत उतारा था।।

इश्‍क हमारी फितरत में है,
इश्‍क हमारी नस-नस में है।
बाबू की की ध‍मकियों से हम नही डरेगें,
हम तो खुल्‍लम खुल्‍ला प्‍यार करेगें।।

अब आये चाहे उसका भाई,
चाहे साथ लेकर चला आये भौजाई।
इश्‍क किया है कोई चोरी नही की,
तुम्हारे बाप के सिवा किसी से सीना जोरी नही की।।

कई अरसें से कोई कविता नही लिखी, मित्र शिव ने कहा कि कुछ लिख डालों कुछ भाव नही मिल नही रहे थे किन्‍तु एक शब्द ने पूरी रचना तैयार कर दी, मै इसे कविता नही मानता हूँ, क्‍योकि यह कविता कोटि में नही है, आप चाहे जो कुछ भी इसे नाम दे सकतें है, यह बस किसी के मन को रखने के लिये लिखा गया।


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ब्‍लागर/चिट्ठाकार पर निबन्‍ध



  1. यह मानव जाति में एक विशेष प्रकार का कुत्ता होता है जो भौकता ज्‍यादा है और कटता कम है।
  2. चिट्ठाकार के परिवार में कई सदस्‍य होते है।
  3. इसके पिता का नाम डेक्‍सटाप होता है क्‍योकि ज्‍यादातर समय उसे घूरता रहता है।
  4. माता का नाम सीप‍ीयू है, जो इसकी सभी कमियों को नज़र अंदाज करती है।
  5. इसकी प्रेमी/प्रेमिका माऊस होती है, जिसके बदन पर वह हमेशा हाथ फिराता रहता है।
  6. लेख/पोस्‍ट इसके पति/पत्नि होते है, क्‍योकि इनमें लड़ई झगड़ा, भड़ास प्रेम सभी का मेल मिलता है।
  7. गुमनाम टिप्‍पणी, भद्र टिप्‍पणी, अभद्र टिप्‍पणी इसने बच्‍चों का नाम है, क्‍योकि ये चुलबुले होते है, बच्‍चे कितने भी खराब क्‍यो न हो, अच्‍छे ही होते है।
  8. की‍बोर्ड इसका नौकर होता है, जिसे समय बेसमय-बेरहम होकर मारता है।
  9. इसे रह रहे कर पोस्टिग और टिप्‍पणी प्राप्‍त करने के दौरे पड़ते है।
  10. उपरोक्‍त बातों से कहा जाता सकता है कि आदमी की तरह दिखने वाला बिना सींग पूछ का यह प्राणी मनुष्‍य नही होता है।
यह निबन्‍ध जूनियर हाईस्‍कूल स्‍तर(कक्षा-8) का है इसलिये निदेशानुसार सिर्फ 10 लाईन लिखने को कहा गया है।


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मेरी लड़की फेल हो जायेगी, मुझे आउट हुआ पेपर दे दों



परसों इलाहाबाद विश्वविद्यालय का बीएससी-3 का का परिणाम निकल आया था। कुछ तो परसों ठीक अपना परिणाम जानने के लिये आ गये, किन्‍तु कल और भी रोमांचक स्थिति लेकर कई छात्र आ धमके की इस रोल नम्‍बर के आस पास कोई मैथ-कैमेस्ट्री हो तो बताओं मैने करीब 40 रोल नम्‍बर देखा तो उसमें एक ही मैथ-कैमेस्ट्री मिली, और लड़के संन्‍तुष्ट हो गये।
 
बाद में जब हम घर से बाहर निकले तो तो उक्त रोल नम्‍बर की वास्तविकता का पता चला। लड़को ने बताया कि यह अमुख लड़की का रोल नम्‍बर है। परीक्षा में हम लोगों ने इसकी खूब मदद की थी। इसका बाप भी ऐन पेपर के दिन बेटा-बाबू, लड़की है बेचारी का कैरियर खराब हो जायेगा कह कर आउट हुआ पेपर और इम्‍पटेन्‍टस ले जाता था। आज रिजल्‍ट निकलने के बाद जब हम लोगों ने रिजल्‍ट पता करने के लिये फोन किया तो बाप कहता है कि कौन हो तुम लोग ?? मेरी लड़की पास हो या फेल तुम जानकर क्या करोगें।
 
भाई लड़के है उनकी भी उत्सुक्ता थी कि आखिर जिसकी इतनी मदद किया, पता तो चले कि वह कौन से डिविजन में पास हुई है। और लड़के इन्‍टनेट के जरिये पता लगाने में सफल भी हो गये। मेरे मन में सिर्फ इतनी सी बात कौध रही है क्‍या आज शिक्षा का स्‍तर यही है कि बाप आउट हुआ पेपर खोजता फिरे, यही नैतिकता है?


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आजा हँसले - हँसले, मेरे यार तू हँस ले



माँ - अरे बेट चंदू, कहाँ जा रहे हो ?
चंदू - साधू महाराज का प्रवचन सुनने।
माँ - ना बादल, न बरसात फिर ये छाता क्‍यो ?
चंदू - महाराज वहाँ ज्ञान की वर्षा जो कर रहे है।
:-) :-) :-) :-) :-) :-) :-) :-)

सोनिया ने मनमोहन से कहा -  मन्‍नू मुझे किसी एक्‍पेन्सिव प्‍लेस पर ले चलो।
मनमोहन बोले - मैछम जी तैयार हो जाइये।
सोनिया ने पूछा - हम कहाँ जा रहे है ?
मनमोहन ने कहा - पेट्रोल पम्‍प।
:-) :-) :-) :-) :-) :-) :-) :-)

एक आदमी को एक लड़की ने सपने में जोर की चप्‍पल मारी।
वह सबसे पहले बैंक गया और अपने बैंक के खाते को बंद कर दिया।
बैंक कर्मी ने पूछा - सर आप ऐसा क्‍यो कर रहे है ?
आदमी ने कहा - आजपेपर में इस्‍तहार था कि '' हम आपके सपने को सच करेगे।


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प्रेरक प्रंसग - प्रकृति प्रेमी स्‍वामी रामतीर्थ



सैन फ्रांसिस्‍को के उपनगर शास्‍तस्प्रिंग में एक बार शास्‍ता पर्वत की चोटी पर पहुँचने की प्रतियोगिता हुई जिसमें बहुत से अमेरिकन युवक भाग लेने के लिये आये। इस प्रतियोगिता में एक भारतीय संयासी ने भी भाग लिया। इस दुबले पहले भारतीय संयासी को देखकर अमेरिकन युवक मुस्‍कराने लगे। प्रतियोगिता आरम्‍भ हुई सभी दर्शक तथा प्रतियोगी आश्चर्य से देखते रहे, सन्‍यासी सबसे बहने शास्‍ता पर्वत पर पहुँचकर खड़ा मुस्‍कारा रहा था।
उस प्रतियोगिता के विजेता का पुरस्‍कार उस सन्‍यासी को दिये जाने की घोषणा की गयी, लेकिन आश्चर्य! सन्यासी ने यह कहकर उस उपहार को अस्‍वीकार कर दिया कि मै शास्‍ता पर्वत की चोटी पर प्रकृति प्रेम के कारण उस चोटी की शोभा देखने गया था, उपहार हेतु नही। वह सन्‍यासी कोई और नही निर्भीक स्‍वामी रामतीर्थ थे।


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चैंलेज स्‍वीकार है?



कुछ दिनों पहले आरकुट के चिरकुटिया माहोल से दूर हो गया था किन्‍तु हाल में ही आरकुट पर काफी अच्‍छी अच्‍छी ज्ञानवर्धक आईटम चालू हुआ है उसमें मुझे Traveler IQ Challenge काफी अच्‍छा और मनोरंजक के के साथ-साथ ज्ञानवर्धक भी लगा। अभी दो चार दिन पहले ही खेलना चालू किया था 6ठें स्‍तर से ऊपर जा ही नही पा रहा था किन्‍तु आज सुबह सुबह गेम के 10वें स्‍तर को पार करने में सफल हो ही गया। काफी अच्‍छा गेम है समय‍ मिले तो एक बार जरूर चैलेंज स्‍वीकार जरूर कीजिएगा। फिर देखिये क्‍या आप का दिमाग भी पॉंचवीं पास से तेज है? 
 
इस गेम की यह खासियत है कि इसमें दिये गये देशो के नामों को विश्‍व मानचित्र पर सही स्‍थानों पर पर भरना होता है। और जितना अधिक सही आप करते है उतने अधिक अंक आपको मिलते है और खेल के अंत में IQ Point मिलता है।


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ठीक एक साल पहले की पोस्ट



एक साल पहले यह (तोड़ दिया सन्‍यास - विषय ग‍म्‍भीर था ) पोस्‍ट लिखी थी आज फिर लिख रहा हूँ, और अपने माता पिता की हार्दिक बधाई दे रहा हूँ। मै आज ज्‍यादा कुछ तो नही किया, और न ही हमारे यहॉं कोई विशेष कार्यक्रम आयोजन की परम्‍परा ही है। आज दोपहर में थोड़ा बहुत खाते पीने का आईटम ले आया था, वह सब खाने पीने के बाद यह लिख रहा हूँ।
 
पुन:श्‍च माता-पिता को विवाह की वर्षगाठ की हार्दिक बधाई।


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हिन्दू धर्म की विशेषता



यही तो हिन्दू धर्म की विशेषता है कि वह बाहर से आने वालों को अपना लेता है। हिन्दू धर्म एक महासागर है। जैसे सागर में सब नदियां मिल जाती हैं, वैसे हिन्दू धर्म में सब समा जाते हैं। हिन्दू धर्म का रहस्य जानना केवल हिन्दुओं का नहीं, सारे भारतीयों का काम है। हिन्दू धर्म अपनी बुनियाद में निहित इसी स्वदेशी की भावना के कारण स्थितिशील और परिणामत: अत्यंत शक्तिशाली बन गया है। चूंकि वह मतान्तरण की नीति में विश्वास नहीं करता इसलिए वह सबसे ज्यादा सहिष्णु है और आज भी वह अपना विस्तार करने में उतना ही समर्थ है, जितना भूतकाल में था। स्वदेशी भावना के कारण हिन्दू अपने धर्म का परिवर्तन करने से इनकार करता है। मैंने हिन्दुत्व के विषय में जो कुछ कहा है, वह मेरे विचार से संसार के सभी मत-पंथों पर लागू है। हां, हिन्दू धर्म के बारे में यह विशेष रूप से सही है।

-महात्मा गांधी (मद्रास में 'स्वदेशी' पर भाषण, 14 फरवरी 1916)


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अब हम न भए



अब हम न भए तो क्‍या हुआ दुनिया का चलना काम है। मेरे रूकने से दुनिया नही रूकेगी, मै अपना काम करूँगा और दुनिया अपना, यही प्रकृति के नियमानुसार कार्य होता रहेगा। आज मुझे कोई लेख लिखे करीब 15 दिन के आस पास हो रहा है, यह कम्‍प्‍यूटर के नजदीक होने के बाद भी इतना बड़ा गैप पहली बार हो रहा है।

किसी भी एग्रीगेटर पर गये भी करीब हफ्ते भर से ज्‍यादा समय हो रहा है, एक दो टिप्‍पणी अपने चहेते ब्‍लागों पर हुई वह एक अपवाद हो सकता है। पिछले कुछ महों से हिन्‍दी ब्‍लाग जगत में अभूतपूर्व बदलाव के माहोल देखने को मिला, कि आज के व्‍यक्ति को ओछी हरकत करने के लिये कोई भी जगह नही है, शायद यही कारण है कि आज हिन्‍दी ब्‍लाग में भी स्‍तरीय गिरवट देखने को मिल रहा है। 
 
जहॉं अच्‍छा माहोल व व्‍यवहार होता है वहॉं लिखने बैठने का मन करता है किन्‍तु मन कहता है कि हिन्‍दी ब्‍लागिंग में कि अब हम न भए। .... लिखने की इच्‍छा थी किन्‍तु आवाश्‍यक काम आ गया, समय मिला तो फिर लिखेगे :)


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Do you want to look sexy?



क्या आप सेक्सी दिखना चाहते हैं ?

आये दिन पुरूषों में सेक्‍सी दिखनेकी चाहत बलवती होती जा रही है। हर पुरूष अपने आकर्षण में विस्‍तार करना चाहता है। पिछले कुछ सालों में देखने में आया है कि पुरूष सौन्‍दर्य प्रसाधन की समग्रियों की बाजार में बाढ़ सी आ गई है। निश्चित रूप से यह पुरूषों की आकर्षक दिखने के रूझान के फली भूत दिखता है। पुरूषों की आकर्षक दिखने की इच्‍छा निश्चित रूप से बाजार को बलवती करती है। आज के दौर में सुन्‍दर और सेक्‍सी दिखना सिर्फ औरतों तक सीमित नही रह गया है, इस अश्‍लील प्रर्दशन के दौड़ में पुरूष कंधे से कन्‍धा मिला रहे है। कुछ ऐसे ही टिप्‍स आज बताते है जिससे पुरूष अपनी सेक्सियत में चार चॉंद लगा सकते है। :)


शरीर को तरोताजा रखें - सर्वप्रथम सेक्‍सी दिखने के लिये जरूर है कि आप का शरीर तरोताजा हो, इसके लिये जरूरी है कि दिन में दो बार स्‍नान हो। स्‍नान के जल में अगर कीटाणु रोधक सामग्री मिला ले तो यह शरीर के लिये लाभकारी होगा। शरीर को तरोताजा रखने के लिये आवाश्‍यक है कि सप्‍ताह में एक बार शरीर की उपटन तथा तेलों से शरीर की मालिश हो, इस मालिश से शरीर के बंद रोम छिद्र खुल जायेगें। शरीर को सुन्‍दर रखने के लिये जरूरी है कि कोशिश करे कि ज्यादा से ज्‍यादा आयुर्वेदिक समग्री का ही प्रयोग हो। स्‍नान के बाद सम्‍पूर्ण शरीर की धीरे धीरे तौलिये से मालिश करें।

मुँह पर रखे ध्‍यान -  मुँह सबसे खास स्‍थान है, और इस मुँह में सबसे खास दॉंत, इसलिये सबसे ज्‍यादा जरूरी होता है कि इस स्‍थान का विशेष ख्‍याल रखा जाये। दॉंतों की सफाई में सबसे महत्‍वपूर्ण साधन है ब्रश, इसलिये ब्रश को उच्‍चकोटि का होना चाहिए जो दाँतों की भरपूर देखभाल कर सके। दॉंतों की सफाई के बाद आवाश्‍यक है कि अच्‍छे माउथ वॉश से कुल्‍ला करें।

बाल - पुरूष का आकर्षण उनके बालों पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसलिये बालों के प्रति भी जागरूक होने की आवाश्‍यता है। बालों का आकर्षण बढ़ाने के लिये उन पर डाई किया जा सकता है किन्‍तु मेरा मानना है कि प्राकृतिक रंग ही सर्वश्रेष्‍ठ है। बालों को प्राय: शैम्‍पू या साबुन से धोने के बजाय कोई दिन निर्धारित कर लें। क्‍योकि ज्‍यादा शैम्‍पू बालों को नुकसान पहुँचा सकते है। शैम्‍पू के बाद को कंडीशनर करना न भूले।

सच्‍ची सुन्‍दरता - सच्‍ची सुन्‍दरता  तो मन की होती है इसलिये आपने आपको सेक्‍सी दिखने के लिये चाहिए कि आपका मन सदैव तरो ताजा हो।

सुगन्धित रहे - आपका आकर्षण और बढ़ जायेगा जब आपके अंदर से आ रही पसीने की दुर्गन्‍ध नही होगी, इसके लिये डियोडेन्‍ड और डियोटेक्‍ल का प्रयोग करना चाहिए। जब ज्‍यादा से ज्‍यादा व्‍यक्ति आपके पास होगे तो आपने आप आपके व्‍यक्तित्‍व में निखार आ जायेगा।

सुगठित रहे शरीर - सुगठित शरीर होना आपने आप में आपके सेक्‍सी दिखने की ओर दिखता है, भले ही आपकी लम्‍बाई कम हो या ज्‍यादा किन्‍तु आपका शरीर सुडोल है तो आपका आकर्षक दिखना स्‍वाभाविक है। शरीर को व्‍यवस्थित रखने के लिये चाहिए कि सुबह या शाम करीब 20 से 30 मिनट रोज का व्‍यायाम हो।

आप भी सेक्‍सी बन सकते है, बस आपने आपको व्‍यवस्थित रखिये, फिर देखिये आप भी रितिक रोशन और जॉन अबाहम जैसे सेक्‍सी दिख सकते है।
जल्‍दी फिर मिलते है नये टिप्‍स के साथ, तब तक लिये नमस्‍कार- जय श्रीराम


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दक्षिण में कमल खिला



कुमारस्‍वामी और कांग्रेस की मिली भगत को दरकिनार करते हुये कर्नाटक में बहुमत की ओर पहुँच रही है। कर्नाटक में खिलने का अर्थ है केन्‍द्र के प्रधानमंत्री आवास में भगवा रहराने के की ओर एक कदम आगे बढ़ रहे है।
ठन्‍ड़ा रहा पिछला हफ्ता
पिछले कई हफ्तो से प्रतिसप्‍ताह आराम से 8 से 15 डालर प्रति मिल जाते थे किन्‍तु जब से गूगलवालों ने पब्लिक सर्विस ऐड लगाया है, तब से कई दिनों से खाते खुलने का प्रतीक्षा कर रहा हूं। :)


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दो बातें



 

प्रेरक प्रसंग

कभी कभी अच्‍छा पढ़ने और सुनने का लाभ मिल ही जाता है। एक दिन दीदी मॉं साध्वी ऋताम्‍भरा का प्रवचन सुन रहा था तो उस प्रवचन में उन्‍होने एक प्रेरक प्रसंग सुनाया वह आपसे सामने प्रस्‍तुत करता हूँ-

एक बार एक सेठ पूरे एक वर्ष तक चारों धाम की यात्रा करके आया, और उसने पूरे गॉंव में अपनी एक वर्ष की उपलब्‍धी का बखान करने के लिये प्रीति भोज का आयोजन किया। सेठ की एक वर्ष की उपलब्‍धी थी कि वह अपने अंदर से क्रोध-अंहकार को अपने अंदर से बाहर चारों धाम में ही त्‍याग आये थे। सेठ का एक नौकर था वह बड़ा ही बुद्धिमान था, भोज के आयोजन से तो वह जान गया था कि सेठ अभी अंहकार से मुक्‍त नही हुआ है किन्‍तु अभी उसकी क्रोध की परीक्षा लेनी बाकी थी। उसने भरे समाज में सेठ से पूछा कि सेठ जी इस बार आपने क्‍या क्‍या छोड़ कर आये है ? सेठ जी ने बड़े उत्‍साह से कहा - क्रोध-अंहकार त्‍याग कर आया हूं। फिर कुछ देर बाद नौकर ने वही प्रश्‍न दोबारा किया और सेठ जी का उत्‍तर वही था अन्‍तोगत्‍वा एक बार प्रश्‍न पूछने पर सेठ को अपने आपे से बाहर हो गया और नौकर से बोला - दो टके का नौकर, मेरी दिया खाता है, और मेरा ही मजाक कर रहा है। बस इतनी ही देर थी कि नौकर ने भरे समाज में सेठ जी के क्रोध-अंहकार त्‍याग की पोल खोल कर रख दी। सेठ भरे समाज में अपनी लज्जित चेहरा लेकर रह गया। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि दिखावे से ज्‍यादा कर्त्तव्‍य बोध पर ध्‍यान देना चाहिए।

एक और बात

कल मैने एक प्रयोग किया आपने Time loss पर करीब 4 चार पोस्‍टों को पोस्‍ट किया और उनके प्रकाशन का सयम निर्धारित कर दिया। आज चारों पोस्‍ट अपने समय पर प्रकाशित हुई काफी अच्‍छी यह सुविधा लगी।



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लॉ के पेपर में राम और सीता का पुत्र शंकर के बीच आज का अपना क्रिकेट मैच



कल मेरी परीक्षा खत्म हो गई, जाते जाते विवाद हो हवा दे गई। आज सुबह पेपर देखा तो पता चला कि कानपुर में प्रश्‍नपत्र में आये एक प्रश्‍न के लिये काफी विवाद हुआ। प्रश्‍न ऐसा था भी जो विवाद को पैदा करना स्‍वाभाविक भी था। प्रश्‍न में राम व सीता के पुत्र के रूप में शंकर का उल्‍लेख था, जो कुछ परीक्षार्थी को ठीक नही लगा, मुझे भी ठीक नही लग रहा था। क्‍या प्रश्‍न पत्र निर्माताओं को करोड़ो नामों में उक्‍त ही नाम मिले थे। प्रश्‍न निम्‍न था- सीता एवं राम का विवाह जून 1988 को हुआ था। सीता की फेलोपियन ट्यूब बंद होने की वजह से वह गर्भवती नहीं हो सकी। डॉक्टरों ने कृत्रिम रूप से विकसित उसके स्वयं के भ्रूण को अन्य महिला के गर्भ में विकसित भ्रूण प्रत्यारोपित करके शिशु के जन्म का विकल्प दिया। 'सीता' ने अपनी माँ शीला से बात की। शीला ने अपनी बेटी के शिशु को 'सेरोगेटेड' माँ के रूप में जन्म देना स्वीकार किया। नियत समय पर उसने एक शिशु 'शंकर' को जन्म दिया। पर्चे में शिशु 'शंकर' एवं 'सीता' के मध्य क्या नातेदारी हुई इस बारे में सवाल करते हुए हिंदू विधि के प्रावधान के साथ इसकी व्याख्या करने को कहा गया था।

कल की बारिस के बाद आज किक्रेट खेलने के आनंद कुछ और ही था, मस्तिष्‍क से परीक्षा का बोझ हट गया था। इस करीब 20-30 मैचों के बाद आज इस सत्र का पहला चौका लगाने का अवसर मिला, चौका तो लगा ही साथ साथ आज बोनस में दो छक्‍के भी लगाया, काफी अच्‍छा लगा रहा था जमी हुई पारी खेलेने में, अन्‍तोंगत्वा आज आठ ओवरों के मैच में 42 रन की अविजित पारी खेलने का मौका मिला। आज अपने पूरे क्रिकेट कैरियर में दूसरी बार नॉट आउट आया हूँ। किसी भी काम में निश्चित रूप से आत्‍मविश्वास काफी मायने रखता है। आज मेरा ही दिन था, अच्‍छे दिन रोज रोज नही आते है। अगर रोज ही अच्‍छे दिन होते हो हर मैच में लारा 400 रन तथा युवराज 6 छक्के मारता होता है।

परीक्षा खत्‍म हो गई है अब लिखने का दौर सक्रिय हो जायेगा, फिर मिलेगे, आप सभी का दिन मंगलमय हो।


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हिन्दु जगे तो विश्व जगेगा मानव का विश्वास जगेगा






हिन्दु जगे तो विश्व जगेगा मानव का विश्वास जगेगा
भेद भावना तमस ह्टेगा समरसता अमर्त बरसेगा
हिन्दु जगेगा विश्व जगेगा
हिन्दु सदा से विश्व बन्धु है जड चेतन अपना माना है
मानव पशु तरु गीरी सरीता में एक ब्रम्ह को पहचाना है
जो चाहे जिस पथ से आये साधक केन्द्र बिंदु पहुचेगा ॥१॥
इसी सत्य को विविध पक्ष से वेदों में हमने गाया था
निकट बिठा कर इसी तत्व को उपनिषदो में समझाया था
मन्दिर मथ गुरुद्वारे जाकर यही ज्ञान सत्संग मिलेगा ॥२॥
हिन्दु धर्म वह सिंधु अटल है जिसमें सब धारा मिलती है
धर्म अर्थ ओर काम मोक्ष की किरणे लहर लहर खिलती है
इसी पुर्ण में पुर्ण जगत का जीवन मधु संपुर्ण फलेगा
इस पावन हिन्दुत्व सुधा की रक्षा प्राणों से करनी है
जग को आर्यशील की शिक्षा निज जीवन से सिखलानी है
द्वेष त्वेष भय सभी हटाने पान्चजन्य फिर से गूंजेगा ॥३॥


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इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय परिसर खाली करने के आदेश



सुबह से अराचक स्थिति के बाद न्‍यायालय ने मृतक परिवार के लिये काफी रहत की घोषणा की, न्‍यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मृतक के परिवार को 10 लाख रूपये तथा उसकी पूत्री की सम्‍पूर्ण खर्च सरकार वहन करेगी। किन्‍तु अधिवक्‍ता कौम भी अपने आपको गिराने से बाज नही आती है। उक्‍त राहत के बाद भी अधिवक्‍ताओं के एक वर्ग ने अपने रूख में परिवर्तन नही किया, तथा कुछ कुछ न्‍यायकक्षों में जमकर तोड़फोड़ की यहॉं तक कि कुछ न्‍यायाधीश पर हमले का प्रयास भी किया।

उक्‍त स्थिति को देखते हुऐ, माननीय मुख्‍यन्‍यायमूर्ति श्री लक्षमण गोखले ने न्‍यायायल परिसर को तुरंत खाली कराने के आदेश दे दिये, इस आदेश के बाद तुरंत ही जो अधिवक्‍ता अभी तक 20 पड़ने वाले अधिवकता, बैकफुट पर आ गये। 
 
न्‍यायालय के उक्‍त राहत के फैसले के बाद, अधिवक्‍ताओं का यह व्‍यवहार निन्‍दनीय था, क्‍योकि न्‍यायलय जो कुछ कर सकता था किया। कुछ अधिवक्‍ता जिनका कोई उद्देश्‍य और काम नहीहोता वही यह प्रवृत्ति पालते है। उक्‍त मृतक अधिवक्‍ता पिछले नवम्‍बर से जेल में बंद था किसी ने उसकी कुशल क्षेम नही पूछी किन्‍तु आज उसकी मौत पर खुद तांडव कर रहे है। 
 
आगे की खबर फिर दी जायेगी ......


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इलाहाबाद में अधिवक्‍ता की हिरासत में मौत के बाद प्रदेशव्‍यापी हड़ताल



इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के एक अधिवक्‍ता की पुलिस हिरासत मे मौत के कारण, शहर का माहोल काफी आगजनीमय हो गया था, काफी बसे और गाडि़यॉं को आग के हवाले कर दिया गया। इस घटना का अंजाम इतनी दूर तक जायेगा इसका अनुमान कल ही हो गया था। आज उत्‍तर प्रदेश के सभी न्‍यायालय के अधिवक्‍ता न्‍यायायिक कार्य से विरत रहे। कल अधिवक्‍ताओं ने एक प्रस्‍ताव इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायमूर्ति श्री बीएस चौहान के कोर्ट में न्‍यायायिक कार्य न करने का फैसला लिया, और उनके तबादले की अनुशंसा की। 
 
गौर ललब हो कि न्‍यायामूर्ति श्री चौहान के आदेश पर स्‍व. अधिवक्‍ता को न्‍यायालय की अवमानना पर जेल भेजा गया था। उच्‍च न्‍यायलय परिसर में आज अधिवक्‍ता न्‍याययिक कार्य से विरत रहने का फैसला कर चुके थे, किन्‍तु कुछ कोर्ट बैठी और कोर्ट में कुछ अधिवक्‍ताओं ने अभद्रता पूर्वक बातें की। वकीलो का रोष जायज था। क्‍योकि जिस प्रकार की अमानवीय कृत्‍य मृतक के साथ हुआ। वह सभ्‍य समाज में निन्‍दनीय है।


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ट्रक की टक्कर और ईश्‍वर की कृपा



कल दिन में एक फार्म के चक्‍कर में काफी घूमना हुआ, दोपहर की घूप कुछ ज्‍यादा की दुखदाई थी। करीब लौट कर आने में 2 बज गये थे। तबियत ठीक नही लग रही थी। लग रहा था कि काफी तेज बुखार है, और था भी। रात्रि में करीब 10.30 बजे सोता हूँ किन्‍तु कल 8 बजे ही सो गया था।
सुबह की क्रिकेट मंडली अपने समय पर आ गई थी और मै भी रोज की तरह सबसे पहले चाय पीकर तैयार था। इच्‍छा तो नही कर रही थी आज जाने को क्‍योकि तबीयत कुछ ठीक नही थी, किन्‍तु अगर एक दिन का गैप हो जाता है तो पूरा दिन शरीर दर्द करता है।
हमारा मैच करीब 6 बजे शुरू हो गया था। मेरी टीम की बालिंग थी, तीन ओवर हो चुके थे चौथे ओवर की 3 गेंद फेक की रहा था कि आचनक लव कुमार गुप्‍ता आ गया। वह काफी हडबड़ी में था, मैने पूछा क्‍या हुआ ? उनसे कहा कि पिता जी को ट्रक ने टक्‍कर मार दिया है। मेरे पैर से जमीन ही खिसक चुकी थी। उसने कहा कि तुरंत चलो, पिताजी को मदनानी से वात्‍सल्य ले जाना होगा। मैने जल्‍दबाजी में अपना ओवर पूरा करके वहॉं से निकल दिया।
मदानानी में लव के पिताजी को देखा तो वे काफी ठीक थे, जितनी बड़ी र्दुघटना थी, छति काफी कम थी, मुझे यहीं पर ईश्‍वर का न्‍याय समझ में आया, कि क्‍यो‍ लोग इस पत्‍थर वाले को पूजते है। पिताजी के दाये हाथ ओर पैर में भंयकर चोटें आई थी, सफेद हड्डी तक दिख रही थी। ईश्‍वर का प्रभाव था कि करीब 58 साल की उम्र में हड्डी आदि पर कोई प्रभाव नही पड़ा। लव के कहने पर मैने गाड़ी निकाली और तुरंत लव के पिताजी को बैठाकर वातसल्‍य की ओर निकल दिया। और उन्हे अस्पताल में भर्ती करवा दिया।
 
लव के पिताजी अपने दोनो पैरों पर चल रहे थे और काफी अच्‍छा महसूस कर रहे थे, किन्‍तु दर्द का एहसास तो था ही। उन्‍होने बताया कि घटना चौफटका के पुल के पास वाले पेट्रोल पम्‍प के पास की है। एक ट्रक वाला काफी तेजी से आ रहा था कि आचानक टक्‍कर पार दी। मै तो किसी तरह कूद गया किन्‍त साइकित वही दोना हो गई। ट्रक जा कर खम्‍बे से टकरा गई और खम्‍भा टूट गया। ट्रक वाला भाग गया। 
कुछ सुबह सुबह घटित हुआ बहुत ही दुखद: था किन्‍तु ईश्‍वर को धन्‍यवाद देता हूँ कि वह बहुत बड़ा रखवाला था।


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बारिस की पहली बूँद और हमारा क्रिकेट मैच



आज रात करीब 1 बजे सोया ओर 4 बजे जग गया। काफी अच्‍छा लग रहा था। कि सुबह 5.15 पर इलाहाबाद में बारिस की बूँदों ने दस्‍तक दे दिया। मौसम ठंड़ा और सुहावना होगा गया है। इस पानी का हमारे क्रिकेट मैच पर कोई असर नही पड़ेगा। हम बसते पानी में भी बहुत अच्‍छी क्रिकेट खेलते है। :) क्रिकेट ही नही अगर मैदान में ज्‍यादा पानी भर जाता है तो हम क्रिकेट की बाल से फुटबाल भी खेल लेते है। 
 
अब चलता हूँ परीक्षा बहुत हद तक समाप्‍त हो गई है, सम्‍पर्क में बना रहने की कोशिश रहेगी। कुछ हद तक इस लिये क्योंकि अन्तिम तिथि तो समाप्‍त होने की 12 थी किन्‍तु 5 को विधान परिषद के चुनाव के कारण पेपर स्‍थगित हो गया था, अब वह पेपर 22 को है।

शेष शुभ जय श्रीराम


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दूसरा राष्‍ट्रपति भवन कहाँ से आयेगा ?



आज खबर मिली की भारत के माननीय मुख्‍य न्‍यायधीश को महामहीम राष्‍ट्रपति जी की तरह विमान नही मिलेगा। क्यों याचिका खारिज कर दी गई, अच्‍छा ही हुआ नही तो कल को राष्‍ट्रपति भवन जैसे भवन की भी मॉंग होने लगती तो दूसरा राष्‍ट्रपति भवन कहॉं से लाया जाता ? :) 
एक बात तो स्‍पष्‍ट है कि इस तरह की फिजूल की याचिकाओं पर रोक लगनी चाहिये नही तो कोई न्‍यायधीश तो कोई किसी के नाम पर याचिका लेकर चला आता है। जब भारतीय संसद खुद इतनी मेहबान रहती है तो भारतीयों को किसी प्रकार की चिन्‍ता नही करनी चाहिये। सरकार को जितनी चिंता आम आदमी की नही होती है उतनी अधिक अधिकारियों की होती है, और समय समय पर वह नियमों को फेरबदल कर सुविधा लेते देते रहते है।

फिर मिलना होगा .....


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मुम्‍बई में 1800 ईसाईयों ने हिन्‍दु धर्म ग्रहण किया




मुम्‍बई में 1800 ईसाईयों ने हिन्‍दु धर्म ग्रहण किया

मुम्बई के उपनगर बोरीवली में 27 अप्रेल को एक परावर्तन कार्यक्रम में 1800 ईसाई वनवासियों ने हिन्दू धर्म को पुन: अंगीकार किया। इस कार्यक्रम में स्वामी नरेन्द्राचार्य विशेष रूप से उपस्थित थे।
स्वामी नरेन्द्राचार्य, जो नरेन्द्र महाराज के नाम से जाने जाते हैं, ने इस अवसर पर बताया कि उन्होंने अब तक महाराष्ट्र और गुजरात के 42,220 मतान्तरित लोगों की घर वापसी कराई है। अपने इस परावर्तन अभियान के संबंध में स्वामी जी ने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि हिन्दुओं का मतान्तरण किया जाता है और उन्हें अपने ही धर्म में वापस लौटाना पड़ता हैं। ईसाई मिशनरियां गरीब, वंचित हिन्दुओं को लालच देकर गुमराह करती हैं और फिर मतान्तरित करती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मत-पंथ में आस्था रखने वाले को कोई मतान्तरित न कर सके, इसके लिए एक देशव्यापी मतान्तरण विरोधी कानून होना चाहिए। चूंकि हिन्दुओं का कोई वोट बैंक नहीं है इसलिए उनके साथ भेदभाव किया जाता है। हमें एकजुट होकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए ताकि कोई हमारे हितों पर चोट न कर सके।
 उन्होंने आगे कहा कि मन्दिरों पर कब्जा करने की सेकुलर सरकार की नीति का तीखा विरोध होना चाहिए। स्वामी जी ने यह भी कहा कि आज हिन्दू श्रध्दा केन्द्रों का खुलेआम अपमान किया जाता है। रामसेतु क्यों तोड़ा जा रहा है? क्यों सेतु समुद्रम प्रकल्प पर सभी विरोधों को अनदेखा करते हुए काम जारी है? सरकार को इस बात का जवाब हिन्दू समाज को देना होगा।

निश्चित रूप से आज हिन्‍दुसमाज की आत्‍मा पर प्रहार करने वालों को छोड़ा नही जाना चाहिए।


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