गूगल एडसेंस - दो साल में अर्श से फर्श तक



हमने पहली बार अक्टूबर 2006 में एडसेंस लगाया था, जिसका पहला 169 डालर का भुगतान अप्रेल 2008 में निर्गत हुआ था, किन्तु हमें वो आज तक मिला ही नही। :( कमाई का सिलसिला यू ही जारी रहा और मई में फिर 103 डालर का भुगतान जारी हुआ, किन्तु यहाँ भी हमारा दुर्भाग्य हम पर हावी रहा और इसका भी पेमेंट हमें आज तक नही मिला। गूगल एडसेंस और हमारा दुर्भाग्य, दोनो मिल कर हम पर हावी है। पहले तो हमारा पिन ही नही आ रहा था, तीन रिक्वेस्ट किया तब जाकर पिन ने हमारे दरवाजे पर दस्तक दी। अब तो रही सही कसर गूगल वालों ने पूरी कर दिया और हमारे (लगभग सभी हिन्‍दी ब्लागों से) ब्‍लाग से विज्ञापन ही गायब कर दिया।
हमारे दो भुगतानों को न मिलने से हमें बहुत निराशा हुई, क्योकि यह अब पॉंच अंकों मे कमाई का का मामला हो चुका था। मई जून मिला कर पुन: हमने 183 डालर अर्जित कर लिया था, पिछले भुगतान हमें न प्राप्त होने पर हमने गूगल से सम्पर्क किया और अपने पूराने भुगतानों को न प्राप्‍त होने की बात कहीं, और पिछले भुगताने को कैसिंल कर नये भुगतान में जोड़ कर कोरियर सर्विस द्वारा भेजने को कहा, और हमें सकारात्मक उत्तर मिला। और उन्‍होने जून तक का भुगतान 455 डालर में से कोरियर का 25 डालर काट कर 430 डालर हमें 27 अगस्त को भेज दिया है। अभी तक मुझे यह राशि भी प्राप्त नही हुई है, चूकिं 25 डालर देने के बाद आशा करता हूँ कि यह मुझे मिल जायेगे।
इस समय सबसे बड़ी समस्या यह आ गई है कि जून तक का भुगतान लेने के बाद जुलाई के मध्य से विज्ञापन दिखना बंद हो गया, जब तक एडसेंस चल रहा था मैने 48 डालर अर्जित कर चुकें थे, 15 जुलाई से लेकर आज तक 48 से 53 डालर ही हो सका है, और सही गति रही हो 100 डालर की सीमा में पहूँचने में करीब एक-ढ़ेड़ साल लग जायेगे। मुझे दुख हो रहा है कि मैने अपने पैसे मगवाने में जल्दी कर दिया, काश एक माह रूक गया होता तो मेरा 53 डालर भी क्लीयर हो गया होते। वाह री किसमत, इसे ही कहेगे कि 3 महीने में मात्र 5 डाल ही मिले, जबकि हमने दो सालों में करीब आधा दर्जन बार हमने एक दिन में 5 डालर तक प्राप्त किये थे।
जो होता है अच्छा ही होता है, यही मान के चल रहा हूँ, कि बिज्ञापन फिर से शुरू होगे और 100 डालर तक जल्दी पहुँचेगा। अभी तो मेरी गूगल के फोकट के विज्ञापन दिखाने के कोई इच्‍छा नही है, वैसे भी जब गूगल ने हमारा ध्यान नही रखा तो हम क्यो उसके फोकट के विज्ञापन दिखाये। जब तक विज्ञापन नही दिखते है, तब तक के लिये मै गूगल एडसेंस को अलविदा कर रहा हूँ। चूकि इसका कारण भी है कि जहाँ ऐड लगा होता है वहाँ ऐड की अनुपलब्धता के कारण रिक्तता आ जाती है, जिससे ब्‍लाग की शोभा ही बिगड़ती है।
गूगल के विज्ञापन हटने के बाद थोड़ा लेखन से भी रूझान कम हुआ, किन्तु जब मै आया था तो पैसे की सोच कर लिखने नही आया था। लिखना मेरी रूचि और स्‍वाभाव था। मुझे उसे नही बदलना चाहिये। पैसे तो हम कमाते रहेगे, क्‍योकि कमाने के लिये तो पूरी जिन्दगी ही पड़ी है। मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मेरी लेखन में निरंतरता बनी रहे। मेरे कुछ नियमित पाठक मुझसे लगातार मुझे मेल करके राष्ट्रवादी विचार धारा के लेखों को मॉंग करते है। मै अपने पाठको को नाराज नही करना चाहूंगा, जिस चीज के लिये महाशक्ति जानी जाती थी, आने वाले कुछ दिनों में आपको महाशक्ति उसी रूप में मिलेगी।
खैर अब तक तो मै अपने दो सालो की ब्‍लाग अर्निंग 430 डालर (18770 रूपये) की आशा कर ही सकता हूँ जो मुझे एक हफ्ते में मिल ही सकते है, इलाहाबादी बन्धु पार्टी के लिये तैयार रहे।


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6 comments:

अभिषेक ओझा said...

yaar hamne to kabhi lagaaya hi nahin... badi kamai kar rahe ho. allahabad aana padega ab to party ke liye.

Manisha said...

प्रेमेंन्द्र जी,

मैं आपके ब्लाग को हमेशा पढ़ती हूं, ये जानकर खुशी हुई कि हिंदी ब्लॉग से कुछ कमाई तो हुई।

आपने अपने ब्लॉग के डिजायन में गणित की कापी का प्रारुप क्यों लिया है, पढ़ने में दिक्कत होती है, कृपया हिंदी की कापी का प्रारिप लें।

मनीषा
हिंदीबात.ब्लोगपोस्ट.कोम

masijeevi said...

अमॉं मित्र आप बीच बीच में याद दिला देते हो ..झांककर आता हूँ कि हमारे खाते में क्‍या है। वैसे एकठो चैक आ गया था पॉंच हजार रुपल्‍ली का। अब बहुत दिन से कोई आहट नहीं हुई।

Udan Tashtari said...

पार्टी-सिर्फ इलाहाबाद वालों को क्यूँ-हम नवम्बर में आयेंगे जी-तैयारी रखियेगा.

DREAM said...

parmender ji google adsense ke baare mein mein bahut suna hai, kya isse paisa kamaya ja sakta hai, kya aa mujhe iske baare mein poori jaankari de sakte hain. main site ya blog ke dwara adsense ka use karna chahta hun. agar aap poori jaankari bhej saken to bahut achcha. dhanyawad. yogesh swapn

Vinod Kumar said...

You writing skill is very good

Dear I hope , you will get it soon .

Thanks from Vinod Kumar