महाशक्ति, ऐडसेंस और 163.83 डालर



अगरस्‍त 2007 में श्री रामचन्‍द्र मिश्र जी से मिलना हुआ था तो उन्‍होने मुझे बताया था कि उनके अब तक 70 से 75 डालर हो गये है। फिर उनके ही ब्‍लाग पर सू‍चना मिली की उनके 100 डालर अक्‍टूबर 2007 में पूरे हो गये थे और करीब 111 डालर का पहला चेक उन्‍हे प्राप्‍त हुआ था। इस बार होली पर श्री रामचन्‍द्र भाई साहब से पुन: मिलना हुआ तो जानकारी प्राप्‍त हुई कि उनके इसी माह पुन: शतक लगाने वालें है (सम्‍भवत: अब तक लग भी गया हो)

इस बाबत जब मै पहली बार राम चन्‍द्र भाई साहब से अगरस्‍त 2007 में पहली बार मिला था, तो उन्‍हे तो मैने उन्‍हे पहली बार बताया था कि नवम्‍बर 2006 से अगस्‍त 2007 तक 35 डालर जुटे है। उनसे फिर मुलाकात हुई और उन्‍होने अपनी प्रति बताई और मेरी प्रगति के बारे में पूछा। मैने उन्‍हे बताया कि मुझे फरवरी 2007 के पहले हफ्ते तक लगभग 86 डालर जुड चुकें है, और उसके बाद कि स्थिति मुझे ज्ञात नही है क्‍योकि यह एडसेंस एकाउन्‍ट में खाते से संचालित नही होता है यह मेरे बड़े भइया के खाते से चलता है, मेरा पहला खाता किन्‍्ही कारणों से बंद हो चुका है :)

रात्रि करीब 10.15 तक मै उनके घर से वापस आया और भइया से एडसेंस खाते के बारे में जानना चाहा। उन्‍होने कहा कि रात्रि काफी हो गई है कल देख लेना। पर मै कहाँ मानने वाला था और कम्‍प्‍युटर चालू कर दिया। भइया का खाता खुलते ही हमें गूगल की तरफ से होली का तौहफा मिल गया मै 86 डालर से सीधे 145 डालर पर पहुँच गया था। निश्चित रूप से होली पर इससे बड़ा उपहार क्‍या हो सकता था?

महीना खत्‍म होने के साथ-साथ (अभी 2 दिन बाकी है) 164 के आस पास पहुँच गया हूँ, सम्‍भव है कि अगले दो दिनों में 170 डालर तक पहुँच सकता है। किन्‍तु अभी तक यह कागजी खाना पूर्ति है क्‍योकि रामचन्‍द्र भाई साहब से पता चला कि 50 डालर के बाद अभी कोई पिन आना है वह अभी तक नही आया है। खैर देस सबेर आ जायेगा। :)

अभी इतना ही शेष फिर......


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अफजल के नाम पर समाज सेविका का असली चेहरा



भारत में डायनों की कमी नही है, जो समय समय पर अपना पिचासिनी रूप दिखाने के तत्‍पर रहती है। यह जानी मानी समाज सेविका मेधा पाटेकर है जो दिल्‍ली में अफजल के समर्थन में घरने पर बैठी है।

ये भारत के लिये पूतना से कम नही है जो कृष्‍ण को मारने के लिये सुन्‍दर स्‍त्री का रूप धरती है किन्‍तु सत्‍य के आये असली चेहरा आ ही जाता है। आज अफजल के मामले में मेधा की असली चेहरा सामने आ ही गया है। जो समाज सेविका के नाम पर आंतकवादियों के साथ दे रही है।  (यह चित्र अक्‍टूबर 2006 का है)




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और कांग्रेसी भड़क उठे...



 
गुजराज चुनाव के समय आरकुट की कांग्रेस कम्‍यूनिटी में बहुत उत्‍साह था, लोग कह रहे थे कि दिनिशॉं पटेल ये कर देगे वो कर देगे, और इसी पर मैने सच्‍चाई समाने रख दी कि ''दिनिशॉं भी जीत गये और काग्रेस भी जीत गये और अब चलों खुशी भी मना लो किन्‍तु चुनाव परिणाम के बाद सच्‍चाई सामने आ जायेगी, पता नही खुशी मनाने को मिले भी नही।
मेरा सिर्फ इतना ही कहना था कि कांग्रेसियों ने न जाने क्‍या क्‍या उपाधियॉं दे कर कांग्रेस की कम्‍यूनिटी से बाहर निकल दिया, आज फिर सोचा चलों। आरकुट पर कांग्रेस की खबर ले लूँ, पर पर मैसेज मिला कि मै बैन हूँ। :) मेरे पास हँसने के सिवाय कुछ नही था कि ये काग्रेसी इतने छुई मुई क्‍यो होते है? पता नही आज कल सब मेरे बैन के पीछे ही क्‍यो पढ़े है ?
संघ को इतना कोसते है किन्‍तु जब पर आती है तो मेंढ़क की तरह उछल पड़ते है।


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कन्नूर: कम्युनिस्ट पार्टी का रक्तरंजित इतिहास



उत्तर केरल के कन्नूर जिले में सी.पी.एम. के कार्यकर्ताओ द्वारा 05-03-2008 के बाद पुन: शुरु किये गये आक्रमणों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे पांच कार्यकर्ता मारे गये हैं तथा दर्जनों गम्भीर रुप से घायल हुये हैं। इस हिंसा में 40 से अधिक स्वयंसेवक के घर को नष्ट कर दिये गये हैं।
यह माना जाता है कि केरल की कम्युनिस्ट पार्टी का गठन कन्नूर जिले के पिनाराई नामक स्थान पर हुआ था और पार्टी इस जिले को अपना गढ़ मानती है। इस जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य 1943 में शुरु हुआ और 25 वर्ष से अधिक समय तक शान्तिपूर्ण ढँग से चला । इस दैरान सी.पी.एम. के कई कार्यकर्ता संघ के प्रति आकर्षित हुये और बडी़ संख्या में उसमें शामिल हुये। संघ की बढती हुई शक्ति को सी.पी.एम. सहन नहीं कर सकी और 1969 से हत्या की राजनीति पर उतर आई।
एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी श्री रामकृष्णन थलसैरी शाखा के मुख्य शिक्षक थे उसने कम्युनिस्टों के आतंक का हिम्म्त से मुकाबला किया और थलसैरी तथा आस-पास के क्षेत्र में कई शाखायें खडी़ कीं। वह कम्युनिस्टों का पहला शिकार बना और 1969 में उसकी निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी गयी। वर्तमान में सी.पी.एम. पार्टी के राज्य सचिव श्री पिनराई विजयन, जो इसी जिले के निवासी हैं, इस हत्या के मुख्या अभित्युक्तों में से एक हैं। वर्तमान गृहमंत्री कुडियेरी बालकृष्णन जो कन्नूर जिले के ही निवासी हैं के. सतीशन नामक, दूसरे स्वयंसेवक की हत्या में अभियुक्त थे।
अब तक अकेले इस जिले में 60 से अधिक स्वयंसेवक सी.पी.एम. के हाथों मारे गये हैं। यहाँ तक कि वृद्ध महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया। 22 मई 2002 को एक स्वयंसेवक श्री उत्त्मन जिसकी हत्या सी.पी.एम. ने पहले दिन की थी, उसकी अंत्येष्टि में भाग लेकर जीप से वापस आ रहीं श्रीमती अम्मू अम्मा (72 वर्ष ) की सी.पी.एम कार्यकर्ताओं द्वारा बम फेंककर हत्या कर दी गयी।  लेखक - श्री चंदन सिंह


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रोजर फेडरर कहीं ब्योर्न बोर्ग के पुर्नजन्‍म तो नहीं



दुनिया के नंबर एक टेनिस (Tennis) खिलाड़ी स्विट्ज़रलैंड के रोजर फ़ेडरर (Roger Federer) ने लगातार पाँचवीं बार विंबलडन का ख़िताब जीतकर महान ब्योर्न बोर्ग (Bjorn Borg) के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। अब इसे फेडरर की महानता की कहा जायेगा या ब्योर्न बोर्ग क्‍योकि दोनो अपने आप में महान है। नीचे कुछ चित्र है जो यह बताते है कि कि इस जन्‍म में भी अवतार हो सकता है। ब्योर्न बोर्ग आज फेडरर को देख निश्‍चित रूप से अपने पिछले दिन याद कर रहे होगा।

ब्योर्न बोर्ग के बारे कहा जाता है कि 1978, 79, 80 में बोर्ग पेरिस के 'क्ले कोर्ट' पर लगातार खिताब (फ्रेंच) जीतने में जुटे हुए थे, उन्हीं वर्षों में वे एक अलग सतह अर्थात लंदन के 'ग्रास कोर्ट' पर भी खिताब जीत रहे थे और वह भी लगातार। जी हाँ 1978, 79 व 80 में बोर्ग ने विम्बलडन खिताब भी जीतकर एक विशिष्ट कीर्तिमान बनाया था।

अपने विजय अभियान में बोर्ग ने यदि फ्रेंच ओपन में जी. विलास (78), वी. पेक्की (79) और जेरुलाइटिस (80) को हराया था तो इन्हीं तीन वर्षों में ग्रास कोर्ट के मास्टर माने जाने वाले जिमी कोनोर्स, रास्को टेनर एवं जॉन मेकनरो को विम्बलडन में हराया था।
दो विभिन्न सतहों पर खिताबी हैट्रिक बनाना आसान बात नहीं थी किंतु महान बोर्ग ने इसे संभव बनाया था। जब ग्रास कोर्ट के मास्टर पीट सैम्प्रास एक अदद 'फ्रेंच खिताब' के लिए तरसते रहे हों अथवा 'क्ले मास्टर' इवान लेंडल ' विम्बलडन' की आशा में ही मुरझा गए हों, वहाँ बोर्ग की दोनों में हैट्रिक उन्हें विशिष्ट खिलाड़ी ही बनाती है।

फेडरर के दिल में आज सिर्फ यही कसक होगी कि वह आप नही जीत पाये है तो सिर्फ फ्रेंच ओपन कहते है कि यह लाल मिट्टी हर किसी को नही सुहाती है, यही कारण है कि आज तक कई दिग्‍गजो को यह खिताब नही जीत पाने का मलाल है।

नीचे चित्रों में ब्योर्न बोर्ग और रोजर फेडरर को एक साथ देखिए।

 


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रोजर फेडरर कहीं ब्योर्न बोर्ग के पुर्नजन्‍म तो नहीं



दुनिया के नंबर एक टेनिस (Tennis) खिलाड़ी स्विट्ज़रलैंड के रोजर फ़ेडरर (Roger Federer) ने लगातार पाँचवीं बार विंबलडन का ख़िताब जीतकर महान ब्योर्न बोर्ग (Bjorn Borg) के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। अब इसे फेडरर की महानता की कहा जायेगा या ब्योर्न बोर्ग क्‍योकि दोनो अपने आप में महान है। नीचे कुछ चित्र है जो यह बताते है कि कि इस जन्‍म में भी अवतार हो सकता है। ब्योर्न बोर्ग आज फेडरर को देख निश्‍चित रूप से अपने पिछले दिन याद कर रहे होगा।

ब्योर्न बोर्ग के बारे कहा जाता है कि 1978, 79, 80 में बोर्ग पेरिस के 'क्ले कोर्ट' पर लगातार खिताब (फ्रेंच) जीतने में जुटे हुए थे, उन्हीं वर्षों में वे एक अलग सतह अर्थात लंदन के 'ग्रास कोर्ट' पर भी खिताब जीत रहे थे और वह भी लगातार। जी हाँ 1978, 79 व 80 में बोर्ग ने विम्बलडन खिताब भी जीतकर एक विशिष्ट कीर्तिमान बनाया था।

अपने विजय अभियान में बोर्ग ने यदि फ्रेंच ओपन में जी. विलास (78), वी. पेक्की (79) और जेरुलाइटिस (80) को हराया था तो इन्हीं तीन वर्षों में ग्रास कोर्ट के मास्टर माने जाने वाले जिमी कोनोर्स, रास्को टेनर एवं जॉन मेकनरो को विम्बलडन में हराया था।
दो विभिन्न सतहों पर खिताबी हैट्रिक बनाना आसान बात नहीं थी किंतु महान बोर्ग ने इसे संभव बनाया था। जब ग्रास कोर्ट के मास्टर पीट सैम्प्रास एक अदद 'फ्रेंच खिताब' के लिए तरसते रहे हों अथवा 'क्ले मास्टर' इवान लेंडल ' विम्बलडन' की आशा में ही मुरझा गए हों, वहाँ बोर्ग की दोनों में हैट्रिक उन्हें विशिष्ट खिलाड़ी ही बनाती है।

फेडरर के दिल में आज सिर्फ यही कसक होगी कि वह आप नही जीत पाये है तो सिर्फ फ्रेंच ओपन कहते है कि यह लाल मिट्टी हर किसी को नही सुहाती है, यही कारण है कि आज तक कई दिग्‍गजो को यह खिताब नही जीत पाने का मलाल है।

नीचे चित्रों में ब्योर्न बोर्ग और रोजर फेडरर को एक साथ देखिए।

 


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इस होली जा रहा हूँ श्रीमती जी खोजने



अभी कुछ देर पूर्व एक पोस्‍ट पढ़ी काफी अच्‍छा लगा किन्‍तु एक बात की झेप लग रही थी। कि अनूप जी ने भी अपनी श्रीमती जी को चित्र दिखाकर हँसा लिये और ज्ञान जी भी, किन्‍तु बचे तो हम। अब खुद ही सोचिऐ कि अपने उपर खुद ही हँसे तो क्‍या हँसे? या फिर कह सकते है कि देख निक्कमें को कि इसके साथ कोई हूँसने वाला भी नही है। काश हमारे पास भी एक श्रीमती होती तो वो भी हमारे चित्र को देख कर हँसी कि हम भी ब्‍लागगीरी में कितने ऊँचे स्‍थान पर पहुँच गये है। अब अपने कारनामें हम बताये तो किसे बताऐं और दिखकर हँसाये तो किसे हँसाऐं? खैर इस होली में एक श्रीमती खोजने जा रहा हूँ ताकि अगली बार होली में हँसने वाला साथ हो :)

चलते चलते ....

मै सच बोल रहा था,
यार मुझे नशे में समझ रहे थे।
वो भूल जाते है कि
सच्‍चाई ज्‍यादातर नशे में निकलती है।
नशे में होने पर,
आपनी बीवी भाभी जी और
यार की बीवी जी अपनी बीवी नज़र आती है।
मै सच बोल रहा था,
यार मुझे नशे में समझ थे।
आप सभी को होली की बहुत बहुत सुभकामानाऍं।

चित्र साभार तरकश डाट काम


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होली खेलनी हो तो केरल आईये



कल के चित्र लेख नीरज भाई कुछ सूत्रों की मॉंग की थी, उन्‍हे दे रहा हूँ, किन्‍तु कहा जा सकता है कि यह हिन्‍दूवादियों वेवसाईटों का काम है पर वास्‍तविकता यही है कि आज की सेक्‍यूलर मीडिया का इन घटनाओं से कोई सरोकार नही है। क्‍योकि वामपंथ का यह रूप आज से नही रहा है। आज से करीब 7 -8 वर्ष पहले त्रिपुरा में भी अनेको संघ के कार्यकर्ताओं को मार दिया गया, तब पर भी यह समाचार राष्‍ट्रीय स्‍तर तक नही पहुँच पाई और आज भी हिन्‍दुओं का नरसंहार अपने आपको राष्‍ट्रीय खबर के रूप में खोज रहा है। एक ईसाई पादरी की हत्‍या पर पूरा भारतीय मीडिया खुशी से झूम उठता है किन्‍तु हिन्‍दुओं का कत्‍लेआम खबर नही बन पाती है। यही कारण है कि ये लोगों को सच्‍चाई का पता नही चल पाता है।

हिन्‍दूओं का खून-खून नही होता है, इसी लिये आज भारत में बहुसंख्‍यक होने के बाद भी दोयम दर्जे का नगरिक है। और किसी भी देश में दोयदर्जे के नागरिकों की कोई कद्र नही होती है। हिन्‍दुओं के साथ खून की होली तब खेली जायेगी तब तक कि हिन्‍दु अपने आपको दोयम दर्जे से अलग नही हो जाते है।

List of murdered Hindu Leaders :
Late Sukhanand Shetty, (32) BJP leader, Manglur, Karnataka
Late Kumar Pandey, (38) Hindu Munnani, Tenkashi, Tamilnadu
Late Sunil Joshi, (45), RSS, Devas, Madhya Pradesh
Shri. Kumar Pandey, Hindu Munnani, Tamilnadu
Shri. Ravi, RSS, Thirur, Kerala
Advt. P. P. Valsraj Kurup, RSS, Kerala


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भारतीय कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर के विभिन्न चित्र Various Portraits of Indian Poet Rabindranath Tagore




Date Photographed : April 19, 1929


Date Photographed : 1920s

Date Photographed : 1920


This photograph was taken as he arrived the other day in Berlin, Germany, during his European trip.

Date Photographed : 1930s

Date Photographed : 1920



Date Photographed : March 30, 1929


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सुभाषित



दातव्‍यमिति यद्दानं दीयतेSनुपकारिणे।
देश काले च पात्रे च तद्दानं सात्विक स्‍मृतम्।।  श्री म.भ.गीता 17/20

भावार्थ -

दान देना ही कर्त्तव्‍य है, ऐसे भाव से जो दान देश तथा काल और पात्र के प्राप्‍त होने पर उपकार न करने वाले के प्रति दिया जाता है, वह दान सा‍त्विक कहा गया है।
शुभाषित, अमृत वचन


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सत्‍यानाश हो ब्‍लागवाणी का



हिन्‍दी चिट्ठाकारी की मठाधीशी अपने चरम पर है और आज नारद के बाद ब्‍लागवाणी को अपने चपेट में ले रहा है। आये दिन ब्‍लाग वाणी को लेकर विवाद किये जाते है, कि मैथली जी ये कर देना चाहिए, मैथिली जी वो कर देना चाहिऐ। जैसे मैथली जी के पास ब्‍लागवाणी की चौकीदारी के अलावा कोई काम नही है। मैथली जी के अपने कम है, ब्‍लावाणी ही बहुत कुछ है किन्‍तु सब कुछ नही है। किन्‍तु कुछ लोग आज ऐसे भी जो ब्‍लागवाणी के नाम पर अपने ब्‍लागों की बैतरणी पार कर रहे है। लिखते कुछ नही है ब्‍लागवाणी के नाम की मोहर लगा कर गोल गप्‍पा जैसा मुँह फुला कर चले आते है। तरह तरह की वाहियात बाते ब्‍लागवाणी के नाम के आड़ में होती है।

ऊपर जो कुछ भी मैने लिखा है वह वाहियात बातें है क्‍योकि अनर्थ का अर्थ भी आप लोग बना देते है। आज मै आपसे अपेक्षा करता हूँ कि ब्‍लागवाणी के नाम के जाल में दोबारा नही फँसेगे। :) रचना की रचनात्‍मकता पर जायेगे न कि ब्‍लागवाणी के नाम पर। क्‍योकि ब्‍लागवाणी के नाम पर पोस्‍ट हिट करना मात्र छलावा ही है। जो आज मैने किया है। :)

इसी के साथ मेरी महाशक्ति ब्‍लाग पर 200वीं पोस्‍ट भी सम्‍पन्न होती है, जिसे मै ब्‍लागवाणी तथा ब्‍लागवाणी नाम को पढ़कर पोस्‍ट क्लिक और पंसद करने वालों को सर्मपित करता हूँ। कुछ दिनों पूर्व महाशक्ति ब्‍लाग ने अपने 200 पोस्‍ट पूरी की थी। यह महाशक्ति ब्‍लाग की 212वी तथा मेंरी 200वीं पोस्‍ट है। अंत में एक निवेदन और करूँगा कि अगर आपने अभी तक इस लेख को ब्‍लागवाणी पर पंसद नही किया है तो तुंरत पंसद कर अपने जगरूकता का परिचय दे। :)

अन्‍तोगत्‍वा यह एक मजाक था, और इसे आप मेरी 1 अप्रेल की पोस्‍ट भी कह सकते है क्‍योकि मेरा पुन: अवकाश लेने का समय आ गया है, और शायद ही पहली अप्रेल की पोस्‍ट कर पाऊँ :) यह अवकाश अगली परीक्षा 15 अप्रेल से प्रारम्‍भ होने के कारण ले रहा हूँ, 6 मई अथवा गरमी की छुट्टी के बाद पुन: वापसी होगी। इस पुन: मेरे ब्‍लाग को भइया देखेगे और मै भी उपस्थित रहूँगा ताकि कभी हाथ में खुजली हो तो एकाथ पोस्‍ट दाग सकूँ।

अन्‍त में गंवैया लहजे में- सत्‍यानाश हो ब्‍लागवाणी का बुरा चाहने वालों के लिये -

ब्‍लागों में कीड़े पडें, सात पोस्‍टों टिप्‍पणी न नसीब हो, उनका कप्‍यूटर हैंग कर जाये, ब्‍लाग पर खूब बेनाम टिप्‍पणी आये, पोस्टिग का बटन न काम करें, पोस्टिंग करते समय बिजली चली जाये, उनके ब्‍लाग पर आने वालों को 404 का चस्‍पा नज़र आये..... और भी आशीष वचन है, कि पोस्‍ट खतम नही होगी। अगर आपके पास कुछ इस तरह के आर्शीवद हो तो जरूर दीजिएगा। :)

अस्वीकरण - मजाक में बहुत कुछ गलत कह गया हूँ अत: कृपया अन्यथ न लें :)


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संस्कार शिक्षा या सेक्स एजुकेशन



Sanskar Shiksha or Sex Education
पिछले सेक्‍स शिक्षा पर लेख पर श्री अरूण जी, श्री समीरलाल जी, श्री ज्ञानजी तथा श्री भुवनेश भाई की टिप्‍पणी मिली थी। जहाँ तक मै स्‍पष्‍ट कर दूँ कि सेक्‍स शिक्षा का विरोधी नही हूँ किन्‍तु सेक्‍स शिक्षा के नाम पर अवस्‍यको के प्रतिशिक्षा का विरोधी हूँ। अरूण जी का कहना ठीक है कि स्‍कूलों में सेक्‍स शिक्षा के नाम पर व्‍यापार केन्‍द्र खोलने का प्रयास किया जा रहा है। ज्ञान जी का कहना भी सही है कि यह एक व्‍यापक बहस का मुद्दा है और समीर लाल जी भी उनकी बात से सहमत है किन्‍तु भुव‍नेश भाई को नही लगता कि यह गलत कदम है।


उनका यह सोचना भी अपने जगह पर वाजिब है, उन्‍होने कई प्रश्‍न टिप्‍पणी में छोड़ रखे थे उन पर चर्चा करना जरूरी है मैने प‍िछले लेख में दो शब्‍दों का प्रयोग किया था हया और बेहया उस पर गौर किया जाना जरूरी था अगर उस पर गौर किया जाता तो यह तो काफी प्रश्नों के उत्‍तर मिल जाते किन्‍तु लगता है कि विश्लेषण करना जरूरी है। हम सभी उस दौर से गुजर चुके है मै भी शायद आप भी, किन्तु अपनी ज्ञान वृद्धि का कभी प्रदर्शन करने की सोच नही रखी कि जो पड़ा या देखा है उसका प्रयोगिक कार्य भी किया जाना चाहिऐ। इसी को शायद हया कहते है, कि हम अपने में विचार करने की क्षमता विकसित करते है। मस्‍तराम के किस्‍से तो मैने अपने प्रारम्भिक जीवन में तो अध्‍ययन नही किया क्‍योकि मुझे अपने विरासत में नही मिली हॉं यह जरूर है कि 9-12 तक की शिक्षा प्राप्‍त करने के दौरान काफी किस्‍से खाली पीरियड में सेक्‍स और अश्लील कहानी सुनने को मिलते थे। यहॉं मैने विरासत शब्‍द का प्रयोग किया है बताना चाहूँगा कि अ‍श्लील साहित्‍य का विकास हमारे अपने घर से होता है जो एक भ्रत से दूसरे भ्रत के भी चोरी छिपे या प्रत्‍यक्ष रूप से होता है। अर्थात आज हमें यह स्‍वीकार करने में नही हिचकना चाहिऐ कि हम कितना भी अस्‍वीकार करें किन्‍तु सेक्स शिक्षा के केन्‍द्र अपने हमारे घर है। जहॉं पर यह साहित्‍य कभी न कभी मिल जाते है। स्‍नातक से आप वयस्‍कता का भी आसय ले सकते है। इन साहित्‍यों का पढ़ना बुरा नही है किनतु गढ़ना बुला और अपने जीवन में अपनाना। मस्‍तराम की पहली कहना मुझे ब्‍लागिंग में प्रवेश करने पर ही किन्‍तु र्दुभाग्‍य कि मेरे आते ही मस्‍तराम की कहनियॉं समाप्‍त हो गई :)

जहॉं तक अपने स्‍वीकार किया है कि आपसी सहमति से गॉंव की हरयाली मे में क्‍या-क्‍या हो रहा है? अर्थात आज सेक्‍स शिक्षा वक्‍त के साथ गॉंव में भी पहुँच गई है, जिन गॉंवों में बिजली और टीवी और भी बहुत कुछ नही है। तो बच्‍चों के मध्‍य यह शिक्षा लाना कितना उचित है। आम सहमति से किया गया कृत्‍य निनदनीय नही मानता हूँ, किन्‍तु यहॉं विरोध असहमति के बाद हुऐ कृत्‍य के बाद हत्‍या तक की स्थिति की निन्‍दा करता हूँ।

क्‍स शिक्षा लाने की अपेक्षा संस्‍कार शिक्षा लाये जाने की जरूरत है जहॉं बचपन से सुआचरण की पद्वति को लाया जा सके, हमारे पुराने ऋषि पद्वति में 25 वर्षो युवकों की काम भवना दबी रहती थी आज क्‍या कारण आ गया कि 8 से 17 वर्ष की आयु में यह अपने चरम पर पहुँच कर अप्रकृतिक कृत्‍य तक पहुँच जाती है। आज के दौर में यह परिवर्तन हमारे परिवेश में संस्‍कारों की कमी को दर्शाता है। आज जरूरत है कि हम अपने पीढ़ी को संस्‍कार शिक्षा देने का प्रयास करे न कि सेक्‍स शिक्षा। हो सकता हो कि सेक्‍स शिक्षा आज की जरूरत हो किन्‍तु इसे स्‍कूलों में देने के बाजय वयस्‍क शिक्षा केन्‍द्र के जरिये दिये जानी च‍ाहिए ताकि अगर संवाद बात आये तो शिक्षार्थी खुल का प्रश्‍न भी कर सकें यह न हो कि कोई ऐसा प्रश्‍न आये कि मास्टर जी उत्‍तर देने में शर्म महसूस करें।

भुवनेश भाई ने ''दूध का धुला'' शब्‍द का प्रयोग किया है। दूध का दुले मै ही नही, हमारे राष्‍ट्रपिता महात्‍मागांधी से लेकर आज तक की कई पीढ़ी बहुत से लोग नही होगे। यहॉं बात फिर आचरण को लेकर आ जाती है कि आप अपने व्‍यक्तिगत जीवन में किसने भी खराब क्‍यो न हो किन्‍तु आप व्‍यवहारिक जीवन में उसका प्रयोग न करे तो आप खराब नही है। काम सबन्‍धी विषय निश्चित रूप से चर्चा होनी च‍ाहिऐ किन्‍तु यह जरूरी है कि चर्चा का स्‍थान और चर्चाकारों की स्थिति कैसी है। समाज विकृतियों से भरा है इस विकृति को सिर्फ और सिर्फ संस्‍कार शिक्षा द्वारा दूर किया जा सकता है। यह एक गम्‍भीर ममला तभी तक है जब तक कि यह स्‍कूल तक सीमित है इसे वयस्‍क शिक्षा का रूप दिया जाना चाहिऐ। मै अभी भी कहूँगा कि अगर संस्‍कार शिक्षा की बात पर हम जोर दे तो वयस्‍क शिक्षा की बात भी समाप्‍त हो जाती है। सेक्‍स शिक्षा का प्रवाह समय के साथ अपने आप हो जायेगा, क्‍योकि न मुझे और हॉं तक मेरा अनुमान है कि आपने या ज्‍यादातर लोगों ने सेक्‍स की औपचारिक शिक्षा पाई है।


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सेक्‍स शिक्षा - Sex Education



सेक्‍स शिक्षा - Sex Education कितना जरूरी ? 
सेक्‍स शिक्षा - Sex Education
आज के दौर में जिस प्रकार हमारा समाज पतन की ओर जा रहा है उससे तो यह पता चलता है कि अगर हम अपने परिवेश के अवाश्‍यक सुधार यह स्थिति और भी भयावह होती जायेगी। आज धीरे धीरे कुसंस्कृति को बचाने के लिये सेक्‍स शिक्षा जैसे षड़यंन्‍त्रों का आड़ लिया जा रहा है।
आज के पेपर में महिला दिवस की पूर्व संध्‍या पर एक चित्र प्रकाशित हुआ था जिसमें चलती बस में एक युवक अश्‍लील इशारे कर रहा था। क्‍या यही सेक्‍स शिक्षा का स्‍वरूप होगा? अगर संस्‍कृतिक पतन से समाज का उत्‍थान सम्‍भव है तो यह सोचना और समझना विचारकों को सबसे बड़ी भूल होगी।
स्‍कूली छात्रों में सेक्‍स शिक्षा पर जोर देना कोमल पौधों को गरम जल से सिंचित करने के समान होगा। क्‍योकि जो बालक और बालिकाऐं जिनके खेलने की दिन होने चाहिऐ हम उन्‍हे वासना की शिक्षा दे का प्रयास कर रहे है। कुछ दिनों पूर्व समाचार पत्र के एक खबर पढ़ा था कि कुछ 9 से 14 वर्ष के करीब आधा दर्जन बच्‍चों ने एक 12 वर्षीय बालिका के साथ बलात्कार किया। क्‍या आज के बालको में यौन शिक्षा इतनी जागृत हो गई है कि वह इस पर काबू नही रख पा रहे है या आज कल की फिल्‍में से इस वर्ग को इतनी सेक्‍स शिक्षा मिल जा रही है कि उन्‍हे इसके आगे कुछ सिखने की जरूरत नही है।
आज आत्‍याधुनिक पाश्‍चात सोच ही हमारे समाज के पतन का मुख्‍य कारण है, क्‍योकि आज के आधुनिक समाज में हमने हयाई छोड़कर बेहायाई अपना ली है और बेहया के लिया अच्‍छे और गलत में कोई अन्‍तर नही दिखता है। यही कारण है कि आज बहुत बड़ा वर्ग स्‍कूली शिक्षा प्रणाली में सेक्‍स शिक्षा का सर्मथन कर रहा है कि मै स्‍कूली शिक्षा प्रणाली में सेक्‍स शिक्षा का हिमायती नही हूँ, क्‍योकि मुझें नही लगता है कि इतना जरूरी है क्‍योकि यह वर्ग कुम्‍हार के कच्‍चे घड़े की भांति है जो अभी पानी डलाने योग्‍य नही है। जब कुम्‍हार र्निजीव घड़े को मौत के मुँह में नही जाने देता तो मानव कुछ वर्ग आज असमयिक इस शिक्षा के पक्ष में क्‍यों खड़ा है? इसके पीछे हो सकती है बहुत बड़ी साजिश हो रही है हमें इन साजिशों अपने बालमनों को बचाना होगा।
मै सेक्‍स शिक्षा का विरोधी नही हूँ किन्तु इतना जरूर चाहूँगा कि इस शिक्षा को स्‍नातक स्‍तर से पहले दिये जाने का विरोधी हूँ। अगर आज के दौर में यह शिक्षा स्‍कूली बच्‍चों में दी गई तो इसके भयंकर परिणाम होगें बाल वर्ग जो पढ़ेगा और देखता है उससे करने के प्रति जरूर उत्‍सुक होगा। यह एक सोचनीय प्रश्‍न है ?


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उत्‍तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपति



क्र. सं.
विश्वविद्यालय
कुलपति का नाम
फोन कार्यालय
फोन आवास
1
डा0 राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय, फैजाबाद
डा0 एस0 बी0 सिंह
246330 246223
245209
246224
2
डा0 भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, आगरा
डा00 एस0 कुक्ला डा0 भूमित्र देव
2520051
2352139
2357898
3
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ
प्रो0 राम प्रकाष सिंह
2740467
2740462
4
दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर
प्रो0 अरूण कुमार
2330767
2340458
5
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी
डा0 अशोक कुमार कालिया
2204089
2206617
2204213
6
आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, फैजाबाद
डा0 बसन्त राम
262032
262161
7
0प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद
प्रो0 केदार नाथ सिंह यादव
2422270
2611537
8
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी
श्री पी0 वी0 जगमोहन (आयुक्त)
2320497
2320046           2320762
9
सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ
डा0 एम0 पी0 यादव
0121.2572579
2573124
10
महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली
डा0 ओम प्रकाश
2527282
2427088
11
चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ
डा0 एस0 पी0 ओझा
2760554
2760576
12
0प्र0 पं0 दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान, मथुरा
डा0 एम0 एल0 मदन
 0565.2503499
0565.2502664 2504338
13
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी
डा0 एस0 एस0 कुशवाहा
2223160
2220714
14
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ
प्रो0 हरि गौतम
2257540 2257539
 
15
चन्द्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर
डा0 वी0 के0 सूरी
2294557
2294558
16
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर
प्रो0 एस0 एस0 कटियार
2570450
2570263
17
0प्र0 प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ
डा0 प्रेम व्रत
2361930 2732194
2731631          2732376
18
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुविज्ञान संस्थान,
लखनऊ
प्रो00 के0 महापात्र
2668700 2668800
2668900
19
भातखण्डे संगीत संस्थान डीम्ड विश्वविद्यालय,
लखनऊ
डा0(पं0) विद्याधर व्यास
2210248
2213539
20
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर
श्री एन0 आर0 गोकर्ण (आयुक्त)
252222
262294
252211



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