अदिति ने क्‍यो मारा ?



आज करीब साढ़े 3 साल की अदिति अपनी 6 महीने की की छोटी बहन को तीन-चार झापड़ मार दिया। मुझे कारण नही पता था किन्‍तु मै देख रहा था, और अदिति को ड़ाट दिया, मारा बिल्‍कुल भी नही। मेरी शिकायत अम्‍मा जी के पास तक पहुँच गई। छोटे चाचा हमाको मारे है, दूसर चाचा मगओं। अदिति के रोने गाने के साथ बात खत्‍म हो गई।
 
अभी कुछ देर पहले सभी लोग चाय पी रहे थे और सुबह की घटना की चर्चा हुई। पता चला कि अदिति ने छोटी बिट्टी को क्‍येा मारा। कारण यह था कि छोटी बिट्टी ने बेड गंदा कर दिया था। अदिति ने अम्‍मा जी से ये शिकयत की थी कि मै उसकी बड़ी बहन हूँ उसको सहूर सिखा रही थी। ये पे हमका छोटे चाचा मारे है।


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राष्ट्रहित एवं स्‍थाई सरकार के लिये घर से निकले पपप



आप सभी प्रबुद्ध वर्ग के लोगों से निवेदन है कि राष्‍ट्रहित व स्‍थाई सरकार के गठन के लिये घर से निकल कर मतदान में भाग ले। साथ ही साथ अपने मित्रों व परिजनो को प्रोत्‍साहित करें। आज के दौर केवल केन्द्रीय पार्टी ही स्‍थाई सरकार दे सकती है उसमें भारतीय जनता पार्टी सर्वश्रेष्ट विकल्प है।


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जबलपुर में दूसरा दिन - महेन्‍द्र, सलिल व ब्‍लागर मीट



यह लेख पूरा लिख चुका था किन्‍तु सेव न कर पाने के कारण फिर लिखना पड़ा, उतना अच्‍छा फिर नही लिख पाऊँगा जितना लिखा था। जैसा कि यह जबलपुर में मेरा दूसरा दिन था, हम घर से निकल कर ताराचंद्र के ऑफिस हरिभूमि कार्यालय पर पहुँचे। मै पहले विवेक रंजन और संजीव सलिल जी से फोन पर बात कर चुका था, बात के अनुसार सलिल जी के घर पर जाना हुआ। काव्‍य की विभिन्‍न विधाओं के विषय पर उनसे चर्चा हुई। हिन्‍दी चिट्ठकारी के वर्तमान पर‍िदृष्‍य पर भी उनसे चर्चा की गई। लगभग 1 घन्‍टे की मीट के बात हम सलिल जी से अनुमति लेकर पुन: अपने घर पहुँचे। तभी श्री महेन्‍द्र मिश्र जी से बात हुई उन्‍होने भी कहा कि आज हम खाली है मिला जा सकता है। पुन: मित्र ताराचंद्र जी ने मुझे महेन्‍द्र जी के घर पर पहुँचा कर अपने पत्रकारिता के काम में लग गये। मै और महेन्‍द्र जी करीब 2 घन्‍टे तक साथ रहे और हिन्‍दी चिट्ठाकारी के वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा की। मैने उनके ब्‍लाग का अवलोकन किया, और भी बहुत सी बाते उनसे सीखने को मिली और जो कुछ मेरा अधकचरा ज्ञान था उसे बॉटने का सौभाग्‍य मिला। उनके परिवार से भी रूबरू हुआ। उनके परिवार में सबसे बड़े पुत्र मयूर मिश्र जी से भी मित्रता हुई, वे शिक्षा में एमसीए के छात्र है। उन्‍हे भी मैने चिट्ठकारी में हाथ अजमाने का अनुरोध किया, जिसे उन्‍होने सहर्ष स्‍वीकार कर लिया। मुझे प्रतीक्षा है कि वे चिट्ठाकारी मे आयेगे। 
 
करीब दो बजे हम फिर अपने घर को चल दिये और कुछ देर आराम किया, फिर मैने श्री गिरीश जी को फोन किया तो पता चला कि वे अपने कुछ कार्यो में व्‍यस्‍त है। जो महत्‍वपूर्ण थे, फिर क्‍या था मै अपने पैदल चलो अभियान पर चल दिया और जबलपुर के कई मुहल्‍लो का अवलोकन किया जिसमें मुझे जवारा के दर्शन हुये। पिछली पोस्‍ट में जवरे के विषय में ज्ञान जी ने पूछा था कि यह क्‍या है ? तो वरिष्‍ठ जन श्री विजय तिवारी किसलय जी ने जैसा मुझे इसके बारे में बताया था उनता अच्‍छा तो मै नही बता पाऊँगा किन्‍तु जितना कह सकता हूँ जरूर कहना चाहूँगा। जवारे का यात्रा नवरात्रि के उत्‍सव के रूप में की जाती है, जिसमें देवी के पीठो से यह यात्रा निकाल कर 2-3 किमी दूर पैदल नंगे पैर जा कर विर्सजित की जाती है। मान्‍यता यह है कि यह वह समय होता है जब फसले पकती है, और काटी जाती है। बीजो का निरीक्षण करने के लिये की वह ठीक है या नही उन्‍हे बोया जाता है, जब यह भली भतिं प्रकार से उग जाते है तो पता चलता है कि यह बीज उन्‍नत किस्‍म के है और इन्‍हे खाने के रूप में उपयोग किया जाता है। देवी की भक्ति का यह असर होता है कि लोग अपने शरीर पर अस्‍त्र शस्‍त्र चुभोये रहते है, किन्‍तु देवी कृपा के कारण इन्‍हे पीड़ा नही होती है। देवी के प्रति आस्‍था प्रकट करने के लिये लोग अपने शरीर पर नौ दिनों तक जवरे को बोते है। इस पर्व में बलि जैसी कुप्रथा भी है किन्‍तु वर्तमान समय में पशु बलि की जगह कद्दू की बलि भी दिख जाती है। नौ दिनों तक चलने वाला इस पर्व से पूरा शहर का वातावरण भक्तिमय लगता है। श्री किसलय जी से अनुरोध करूँगा कि वे जवारे में बारे मे एक अच्‍छी पोस्‍ट लिखे।
 
शाम साढ़े सात बजे तक घर लौट आता हूँ,और शाम की ब्‍लागर मीट के लिये तैयार होता हूँ। साढ़े आठ बजे मै कार्यक्रम स्‍थल पर पहुँच गया था। ब्‍लागर मिलना गोष्‍ठी बहुत ही सफल रही, करीब एक दर्जन ब्‍लागरों को इसमें आना हुआ। कार्यक्रम में आचार्य संजीव सलिल, तारा चन्द्र, डूबे जी कार्टूनिस्ट,गिरिश बिल्लोरे जी, संजय तिवारी संजू, बवाल, विवेक रंजन श्रीवास्तव,आनन्द कृष्ण, महेन्द्र मिश्रा सहित गणमान्‍य ब्‍लागर उपस्थित थे, क्षमा करे यदि किसी का नाम छूट रहा हो। इसी कार्यक्रम में समीर लाल जी की काव्‍य पुस्‍तक बिखरे मोती का पूर्व विमोचन किया गया। कार्यक्रम में समीर लाल जी 2006 के साल को याद करते हुये कहा कि उड़नतश्‍तरी और महाशक्ति दोनो ब्‍लागर उस समय के जब हम 150 से कम चिट्ठाकार हुआ करते थे आज नियमित और अनियमित ब्‍लागरों की संख्‍या करीब 6000 के आस पास है। समीर लाल जी के द्वारा अपने साथ मेरे नाम को जोड़ना, चिट्ठाकारी में मेरे लिये अब तक का सबसे बड़ा सम्‍मान है। मैने और समीर लाल जी अपने और चिट्ठाकारी के प्रथम साल की कुछ खट्टी मीठी यादों को ताजा किया, जिनका चर्चा किया जाना मेरी जान में उचित नही होगा। विवेक रंजन जी ने कहा कि इस ब्‍लागर मीट में शामिल सभी लोग अपने ब्‍लाग पर एक दूसरे का लिंक लगाये, मैने उसका सहर्ष अनुमोदन किया। आज जबलपुर के ज्‍यादातर ब्‍लागर के लिंक मेरे ब्‍लाग महाशक्ति पर उपलब्‍ध है, यह देखना है किन किन के ब्‍लागों पर अन्‍य सभी के लिंक आ गये है ? :)

रात्रि लगभग 12 बजे हमारी मीट बवाल जी के दिव्‍य काव्‍यपाठ के साथ ही समाप्‍त हो गई।

चलते-चलते 
समीरलाल जी की पुस्‍तक विखरे मोती को इलाहाबाद के वरिष्‍ठ चिट्ठाकार श्री सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी को भेंट करने का निर्देष हुआ था, कल प्रात: उनसे मुलाकत हुई। चिट्ठाकारी के विभिन्‍न पहलुओं पर चर्चा हुई। हम पहली बार मिले और 25 मिनट की लघु वार्ता में एक दूसरे को जानने का मौका मिला, इलाहाबाद में एक ब्‍लागर सेमिनार के आयोजन की योजना है। जिसकी सूचना आपको जल्‍द दी जायेगी। मेरे साथ महाशक्ति समूह मुख्य तकनीकि प्रबन्‍धक मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह भी थे। दिनॉंक 15 अप्रेल को मै आवाश्‍यक कार्य से वाराणसी और जौनपुर की यात्रा पर रहूँगा, शायद ही ब्‍लागर मीट हो पाये। :) 
 


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जबलपुर की यात्रा - प्रथम दिन



जबलपुर में मै 4 अप्रेल सायं 6 बजे तक पहुँच गया था। मेरे मित्र ताराचंद्र मुझे स्‍टेशन पर लेने पहुँच गये थे। स्‍टेशन पर एक लड़का जो इलाहाबाद से मेरे साथ था, उसे हमारा साथ बिछ़डने का गम था। जब उसे पता चला कि मै पहली बार अलेके यात्रा कर रहा हूँ तो वह और भी चिंतित हो गया। मैने उसे भरोसा दिलाया कि मै जबलपुर पहली बार जरूर जा रहा हूँ पर यहाँ मुझे एक दर्जन से ज्‍यादा लोग जानते है। उसकी कुछ चिंता कम होती है। जाते जाते मैने उसका नम्‍बर लिया और सम्‍पर्क बनाऍं रखने की बात की। 4 अप्रेल के बाद से मैने उसे दो बार बात कर चुका हूँ, वह भी मुम्‍बई पहुँच गया था।
जब मै ताराचंद्र के साथ चल तो जबलपुर की रौनक देखते ही बनती थी। मेरे मन में जो जबलपुर के प्रति धारण थी वह बदल रही थी। कुछ देर में मै अपने गन्‍तव्‍य स्‍थान पर पहुँच गया। ताराचंद्र को भी अपने काम पर जाना था मै भी जबलपुर को स्थि‍र तौर पर देखना चाहता था। मै भी पैदल निकल पड़ा, करीब 8 से 12 किमी पैदल चल कर जबलपुर शहर को देखा और रात्रि 10 बजे वापस पहुँचा। जहाँ मै रूका था अगर उसका जिक्र न करूँ तो प्रथम दिन चर्चा अधूरी रह जायेगी। मै उस परिवार के प्रति आभार प्रकट करता हूँ। सहृदय धन्‍यवाद देता हूँ, जहाँ मुझे परिवार जैसा वतावरण मिला। 
शहर का पूरा माहौल भक्तिमय था, जवारा की यात्रा देखना सुखद था। करीब 2 दर्जन मन्दिरों में माथा टेक प्रसाद ग्रहण किया। जबलपुर को संस्‍कारधानी ऐसे ही नही कहा गया। प्रथम दिन कई जबलपुर के ब्‍लागरों को अपने पहुँचने की सूचना दिया और अगले दिन का कार्यक्रम तय किया। रात्रि के 10 बजे के बाद सोने का टाईम हो गया था, और फिर मै सो गया।


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मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं के फैसले के खिलाफ अपील पर निर्णय




इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायायल के न्‍यायमूर्ति श्री शंभूनाथ श्रीवास्‍तव के ऐतिहासिक फैसले कि आबादी व ताकत के हिसाब से मुस्लिम अल्पसंख्यक उत्‍तर प्रदेश में अल्‍पसंख्‍यक नही फैसले के खिलाफ राज्य सरकार व अन्य की अपीलों पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। न्यायालय के समक्ष बहस की गयी कि याचिका में अल्पसंख्यक विद्यालय की मान्यता व धांधली बरतने की शिकायत की। इसमें जांच की मांग की गयी थी लेकिन न्यायालय ने याचिका के मुद्दे से हटकर मुस्लिम के अल्पसंख्यक होने या न होने के मुद्दे पर फैसला दिया है। इस तकनीकी बहस के अलावा निर्णय के पक्ष में कोई तर्क नहीं दिया गया। हालांकि उ. प्र. अधिवक्ता समन्वय समिति की तरफ से अधिवक्ता भूपेन्‍द्र नाथ सिंह ने अर्जी दाखिल कर प्रकरण की गम्भीरता को देखते हुए वृहद पीठ के हवाले करने की मांग की है। इस अर्जी की सुनवाई 6 अप्रैल को होगी। श्री बी.एन. सिंह का कहना है कि उन्हें भी सुनने का अवसर दिया जाय।

उ. प्र. सरकार, अल्पसंख्यक आयोग, अंजुमन मदरसा नुरूल इस्लाम दोहरा कलां सहित दर्जनों विशेष अपीलों की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस.आर. आलम तथा न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल की खण्डपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति एस.एन. श्रीवास्तव ने अपने फैसले में कहा है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी व ताकत के हिसाब से अल्पसंख्यक नहीं माने जा सकते। साथ ही संविधान सभा ने 5 फीसदी आबादी वाले ग्रुप को ही अल्पसंख्य घोषित करने की सहमति दी थी। उ. प्र. में मुस्लिमों की आबादी एक चौथाई है। जिसमें 2001 की जनगणना को देखा जाय तो तीन फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि हिन्दुओं की आबादी 9 फीसदी घटी है। कई ऐसे जिले है जहां मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से अधिक है। संसद व विधान सभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। एकलपीठ के निर्णय में कहा गया है कि हिन्दुओं के 100 सम्प्रदायों को अलग करके देखा जाय तो मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। एकल पीठ ने भारत सरकार को कानून में संशोधन का निर्देश दिया था। अपील में निर्णय पर रोक लगी हुई है अब फैसला सुरक्षित हो गया है।

चुनावी माहौल में अनचाहे समय में आये इस फैसले की भनक मीडिया को नही लग सकी, अन्‍यथा मीडिया के भइयो और खास़ कर उनकी कुछ बहनो के दिलो पर सॉंप लोट गया होता। (जैसा पिछली बार हुआ था, जानने के लिये नीचे के सम्‍बन्धित आलेख देखिए) कुछ फैसले के विरोध में कुछ पत्रकार ऐसे कोमा में चले गये कि दोबारा टीवी पर नज़र ही नही आये। वैसे ही चिट्ठाकारी से सम्‍बन्धित ज्‍यादातर पत्रकार टीवी ही क्‍या समाचार पत्रों पर भी नही ही आते होगे :) । चुनावी महौल को देखते हुये, आने वाले 6 अप्रेल को चुनाव के साथ-साथ अब मीडिया के नुमाइंदो की निगॉंहे अब इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय के भावी फैसले पर होगी। डिवी‍जन बेंच के स्‍वरूप को देखते हुये शायद ही अब मीडिया न्‍यायालय और न्‍यायमूर्तियों पर कोई अक्षेप होगा। जैसा कि पिछली बार सेक्‍यूलर मीडिया के चटुकार पत्रकारों ने किया था।

इस लेख पर सम्‍बन्धित के पूर्व आलेख -


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धन्‍यवाद भगवान - नुकसान तो किया, पर बहुत बड़े नुकसान से बचा लिया



कल समीरलाल जी से सपत्निक इलाहाबाद जक्‍शन पर मुलाकात हुई और कल ही भइया ने एक इलेक्‍ट्रनिक बाईक को मुझे खरीद कर दिया। करीब 3 साल से समीर लाल जी और मुझमें अनेको संवाद हुये किन्‍तु मिलने का अवसन अवसर आज ही मिला। पिछली बार समीर लाल जी सेन मिल पाने का कारण भी विश्‍वस्‍त सूत्रो से पता चला कि ट्रेन को ज्ञान जी ने ट्रेन को ऐसा राईट टाईम किया कि ट्रेन जबलपुर भी राईट टाईम ही पहुँची। पिछली बार की बात मैने इस पोस्‍ट पर लिखा था। इस बार मै बिल्‍कुल सही समय से 10 मिनट पहले पहुँच गया था। और उसका परिणाम यह हुआ कि समीर लाल जी से मिलना हो गया। उन्‍होने पूछा आज कल कम लिख रहे हो तो मैने अपनी मजबूरी बताई और कहा कि मैने अपने लिये इस साल से 4 पोस्‍ट मासिक तय कर ली है। इस कारण से अब तक हर माह में सिर्फ 4 ही पोस्‍ट लिख रहा हूँ।
इलाहाबाद स्‍टेशन पर एक सज्‍जन भी समीर लाल जी के परिचित मिल गये जो कोलकाता से उनके साथ ही ट्रेन पर थे किन्‍तु साथ साथ थे ये न उनके पता था समीर लाल जी को, फिर उनके बीच भी काफी बातचीत हुई। समीर लाल जी को इलाहबादी अमरूद खाने की इच्‍छा थी किन्‍तु मौसम में अमरूद उपलब्‍ध नही थे। बहुत कुछ बात करने की इच्‍छा था किन्‍तु बात कम समय में बहुत बात कर पाना कठिन था। अन्‍तोगत्‍वा अन्तिम घड़ी भी आ गई जब ट्रेन को जाना था। समीर ने जबलपुर में ब्‍लागरमीट के लिये भी बुलाया आज हमारी जबलपुर की यात्रा भी फिक्‍स हो गई। मेरी बहुत इच्‍छा कि मै एक बार जबलपुर की यात्रा करूँ क्‍योकि मेरे साथ कक्षा 11 से परास्‍नातक के साथी ताराचंद्र ने मुझे कई बार जबलपुर के लिये आमंत्रित किया था, उनके बाद श्री गिरीश बिल्‍लोरे जी ने भी यात्रा के कई बार कह चुके थे। मेरी तो तैयारी थी ही किन्‍तु घर से अनुमति मिल पाना कठिन हो रहा था। जो आज मिल गई।
अभी अनुमति मिली ही थी कि मेरी टिकट के लिये तैयारी करने लगा, और गाड़ी में चाभी लगा कर भूल गया। तभी अदिति‍ पता नही कैसे गाड़ी के पास पहुँची और आटोमैटिक होने के कारण वह स्‍टार्ट हो कर गिर पड़ी। काफी कुछ टूट-फूट हुआ, कल आई हुई गाड़ी में कई जगह ऐब आ चुके थे। मुझे बहुत तेज गुस्‍सा आ रहा था। करीब 1500-2000 तक का नुकसान हो चुका था। एक तरफ अदिति रो रही थी। उसे चोट नही लगी थी किन्‍तु उसे भी दुख था कि नई गाड़ी टूट गई। जो कुछ भी हुआ अच्‍छा ही हुआ, अदिति को चोट नही लगी। यदि 16 किलो की अदिति पर 88 किलो की गाड़ी गिरी होती तो अदिति की जो स्थिति होती, उसे मै सोच भी नही सकता। ईश्‍वर नुकसान तो किया किन्‍तु पुरे पर‍िवार को बड़े नुकसान से बचा लिया। गाड़ी है 2500-3000 लगा कर पहले जैसी करा लूँगा किन्‍तु अदिति को कुछ होता तो अमूल्‍य निधि लगा कर भी, पहले जैसी न करवा पाता। इस बस होने के बाद मै और अदिति उसी गाडी से हनुमान मन्दिर, अष्‍टभुजी माता के मन्दिर और साई बाबा के म‍ंदिर गया और हम दोनो ने अपना सभी के दरबार अपना माथा टेका और धन्‍यवाद दिया।

अदिति


साभार ( लिखना पड़ता है, कल को जबलपुर पहुँचने पर हमारे उपर चड़ बैठे तो लेने के देने पड़ जायेगे, जिसकी कल्‍पना मैने अदिति पर बाईक गिरने की की थी)
हमारी बात समीर जी की कीबोर्ड से - http://udantashtari.blogspot.com/2009/04/blog-post.html


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