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  • इस बार भी खिताब जीतेगी टीम इंडिया: सचिन हाय दईया काहे हम न भये
  • पीटरसन ने माना वह टी-20 में माहिर नहीं भारतीय हर जगह माहिर द्रविड़ को देख लो
  • इतिहास बदलना है विटोरी का लक्ष्य -पिछली बार से ज्‍यादा बुरी हार हारेगे।
  • टी 20 विश्व कप जौहर दिखाने को बेताब प्रज्ञान - पहलें 11 में तो स्‍थान बना कर दिखाओं
  • धौनी को खिताब बरकरार रखने की उम्मीद - उम्‍मीद पर ही दुनिया कायम है।
  • फिर 15 हजारी हुआ सोना सोना किना सोणा है।
  • अब 10 पैसे प्रति मिनट होगी बात! बात करने पर भुगतान कब किया जायेगा।
  • प्रति व्यक्ति आय 3,000 के पार पर 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय की आय 3000 रूपये मासिक से कम
  • तेल 65 डालर से नीचे आया पर भारत में तेल के दाम अगले 5 साल तक कम नही होगें।
  • प्रचंड ने कहा, भारत कर रहा साजिश भारतीयों को खुराफात में ही तो मजा आता है।
  • वियाना में सिखों के दो गुटों में झड़प, 11 घायल सिंह इज किंग, सिंह इज किंग, सिंह इज किंग
  • पाक में 10 आतंकी ढेर भारतमें आतंकी को संरक्षण
  • दाढ़ी व बाल कटवाए तो आरक्षित नहीं :हाईकोर्ट नाई के पेट पर पड़ी कोर्ट की लात
  • मीरा कुमार होंगी लोकसभा अध्यक्ष महिला होगा545 सांसदो की बॉस


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अडवाणी का चुंबन और थप्‍पड़



मुशर्रफ, अडवाणी जी , ऐश्वर्या राय और सोनिया एक ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं। ट्रेन एक सुरंग से निकलती है ट्रेन में अंधेरा हो जाता है। अचानक वहां एक चुंबन ध्वनि और फिर एक थप्पड़ की आवाज आती है। ट्रेन सुरंग से बाहर आती है।सभी चुपचाप बैठे रहते हैं कोई कुछ नहीं बोलता बस कूटनीति से सब मुशर्रफ का चेहरा देखते हैं क्योंकि उसका गाल लाल है।
सोनिया सोच रही है: ये सभी पाकिस्तानी ऐश्वर्य के पीछे पागल हो रहे हैं। मुशर्रफ ने ही सुरंग में उसे चूमने की कोशिश की गई होगी, उसने अच्‍छा किया जो थप्पड़ मार दिया।
ऐश्वर्या सोच रही है: मुझे चूमने की कोशिश की होगी, लेकिन सोनिया को चूमा और बदले में सोनिया ने थप्पड़ मारा होगा।
मुशर्रफ सोचते है: धिक्कार है, अडवाणी जी ने ऐश्वर्या चूमने की कोशिश की होगी और उसने मुझे थप्पड़ मार दिया।
अडवाणी जी सोचते हैं: काश ट्रेन एक और बार सुरंग से गुजर जाये है तो मैं फिर से चुंबन की आवाज निकाल कर मुशर्रफ को एक और चांटा मारू।

  
 
  
चित्र व रचना साभार


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स्‍वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर




महाराष्‍ट्र के नासिक जिलें में मगूर नामक गाँव में दामोदर सावरकर एवं राधा वाई के यहॉं 28 मई 1883 को विनायक का जन्‍म हुआ।बचपन में माता पिता महाभारत, रामायण, शिवाजी और राणाप्रताप केविषय में बताते रहते थे। उन्‍होने मित्रमेला नाम की संस्‍था बचपन में ही बनाई थी और इसके द्वारा क्रान्तिकारी गतिविधियों का प्रचार करते थे। कक्षा 10 उत्‍तीर्ण करने के पश्‍चात कविताएँ लिखने लगे। तिलक जी से परिचय होने के पश्चात सन् 1905 में विदेशी वस्‍त्रो की होली जलाई। बी0ए0 में अध्‍ययन के पश्चात सशस्‍त्र क्रान्ति के लिये अभिनव भारत नाम की संस्‍था बनाई।
 
6 जून 1906 को कानून की पढ़ाई के लिये लंदन गये , वहाँ इण्डिया सोसाइटी बनाई। मेजिनी का जीवन चरित्र और सिखों का स्‍फूर्तिदायक इतिहास नामक ग्रंथ लिखा। 1908 में मराठी भाषा में 1857 का स्‍वातंत्र्य समर लिखा और यह जब्‍त कर ली गई। इन्‍ही की प्रेरणासे मदन लाल धींगरा ने कर्जन वायली की हत्‍या कर दी गई। सन् 1906 में ही राजेश दामोदर सावरकर को लेल भेजा गया और सावरकर बन्‍धुओं की सारी सम्‍पत्ति जब्‍त कर ली गई। कुछ दिनो बाद इग्‍लैंड से पेरिस गये और वहाँ से पुन: लंदन पहुँचने पर अपनी भाभी मृत्‍युपत्र नामक मराठी काव्‍य लिखा।
 
सावरकर जी को जलयान द्वारा भारत लाये जाते समय फ्रांस के निकट जहाज के आते ही शौचालय से छेकर समुद्र में कूद पड़े परन्‍तु पुन: पकडे पकड़े गये । बम्‍बई की विशेष अदालत ने आजन्‍म कारावास की सजा दी और काले पानी के लिये आंडमान भेज दिया गया। इसी जेल में उनके बड़़े भाई भी बंद थे। जेल में रह कर कमला गोमान्‍तक और रिहोच्‍छ्वास काव्य लिखा।
 
10 वर्ष बाद 1921 में अण्‍डमान जेल से लाकर रत्‍नागिरि जेल में उन्‍हे बंद कर दिया गया। यहाँ हिन्‍दुत्‍व, हिन्‍दूपदपादशाही, उ:श्राप, उत्‍तरक्रियासठयस्‍त्र, संयस्‍त खड्ग आदि ग्रंथ लिखे। हिन्‍दू महासभा की स्‍थापना कर शुद्धि का बिगुल फूका और हिन्‍दी भाषा का प्रचार किया। 10 मई 1934 को यहाँ से वे मुक्त हुये।
 
महात्‍मा गांधी की हत्‍या होने पर उन्‍हे पुन: बंदी बनाया गया। फरवरी 1949 को ससम्‍मान मुक्त हुये। 20 फरवरी 1966 को वह देशभक्त बीर संसार से विदा हो गया।
 
स्‍वातंत्र्य वीर विनायक दामोदर सावरकर के जीवन की प्रमुख घटनाएँ
  • पढाई के दौरान के विनायक ने स्थानीय नवयुवकों को संगठित करके "मित्र मेलों" का आयोजन करना शुरू कर नवयुवकों में राष्ट्रीयता की भावना के साथ क्रान्ति की ज्वाला जगाना प्रारंभ कर दिया था।
  • 1904 में उन्हॊंने अभिनव भारत नामक एक क्रान्तिकारी संगठन की स्थापना की।
  • 1905 में बंगाल के विभाजन के बाद उन्होने पुणे में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई।
  • फर्ग्युसन कॉलेज, पुणे में वे राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत ओजस्वी भाषण देकर युवाओ को क्रांति के लिए प्रेरित करते थे ।
  • बाल गंगाधर तिलक के अनुमोदन पर 1906 में उन्हें श्यामजी कृष्ण वर्मा छात्रवृत्ति मिली ।
  • इंडियन सोशियोलाजिस्ट और तलवार नामक पत्रिकाओं में उनके अनेक लेख प्रकाशित हुये, जो बाद में कलकत्ता के युगान्तर पत्र में भी छपे ।
  • 10 मई, 1907 को इन्होंने इंडिया हाउस, लन्दन में प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्वर्ण जयन्ती मनाई । इस अवसर पर विनायक सावरकर ने अपने ओजस्वी भाषण में प्रमाणों सहित 1847 के संग्राम को गदर नहीं, अपितु भारत के स्वातन्त्र्य का प्रथम संग्राम सिद्ध किया ।
  • 1908 में इनकी पुस्तक 'The Indian war of Independence - 1947" तैयार हो गयी |
  • मई 1909 में इन्होंने लन्दन से बार एक्ट ला (वकालत) की परीक्षा उत्तीर्ण की, परन्तु उन्हें वहाँ वकालत करने की अनुमति नहीं मिली ।
  • लन्दन में रहते हुये उनकी मुलाकात लाला हरदयाल से हुई जो उन दिनों इण्डिया हाऊस की देखरेख करते थे ।
  • 1 जुलाई, 1909 को मदनलाल ढींगरा द्वारा विलियम हट कर्जन वायली को गोली मार दिये जाने के बाद उन्होंने लन्दन टाइम्स में एक लेख भी लिखा था ।
  • 13 मई, 1910 को पैरिस से लन्दन पहुँचने पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया |
  • 8 जुलाई, 1910 को एस०एस० मोरिया नामक जहाज से भारत ले जाते हुए सीवर होल के रास्ते ये भाग निकले ।
  • 24 दिसंबर, 1910 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गयी ।
  • 31 जनवरी, 1911 को इन्हें दोबारा आजीवन कारावास दिया गया ।
  • नासिक जिले के कलेक्टर जैकसन की हत्या के लिए नासिक षडयंत्र काण्ड के अंतर्गत इन्हें 7 अप्रैल, 1911 को काला पानी की सजा पर सेलुलर जेल भेजा गया ।
  • 4 जुलाई, 1911 से 21 मई, 1921 तक पोर्ट ब्लेयर की जेल में रहे ।
  • 1921 में मुक्त होने पर वे स्वदेश लौटे और फिर 3 साल जेल भोगी । जेल में उन्होंने हिंदुत्व पर शोध ग्रन्थ लिखा ।
  • मार्च, 1925 में उनकी भॆंट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक, डॉ० हेडगेवार से हुई ।
  • फरवरी, 1931 में इनके प्रयासों से बम्बई में पतित पावन मन्दिर की स्थापना हुई, जो सभी हिन्दुओं के लिए समान रूप से खुला था।
  • 25 फरवरी, 1931 को सावरकर ने बम्बई प्रेसीडेंसी में हुए अस्पृश्यता उन्मूलन सम्मेलन की अध्यक्षता की ।
  • 1937 में वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के कर्णावती (अहमदाबाद) में हुए 19वें सत्र के अध्यक्ष चुने गये, जिसके बाद वे पुनः सात वर्षों के लिये अध्यक्ष चुने गये ।
  • 15 अप्रैल, 1938 को उन्हें मराठी साहित्य सम्मेलन का अध्यक्ष चुना गया ।
  • 13 दिसम्बर, 1937 को नागपुर की एक जन-सभा में उन्होंने अलग पाकिस्तान के लिये चल रहे प्रयासों को असफल करने की प्रेरणा दी थी ।
  • 22 जून, 1941 को उनकी भेंट नेताजी सुभाष चंद्र बोस से हुई ।
  • 9 अक्तूबर, 1942 को भारत की स्वतन्त्रता के निवेदन सहित उन्होंने चर्चिल को तार भेज कर सूचित किया । सावरकर जीवन भर अखण्ड भारत के पक्ष में रहे । स्वतन्त्रता प्राप्ति के माध्यमों के बारे में गान्धी और सावरकर का एकदम अलग दृष्टिकोण था ।
  • 1943 के बाद दादर, बम्बई में रहे ।
  • 19 अप्रैल, 1945 को उन्होंने अखिल भारतीय रजवाड़ा हिन्दू सभा सम्मेलन की अध्यक्षता की ।
  • अप्रैल 1946 में बम्बई सरकार ने सावरकर के लिखे साहित्य पर से प्रतिबन्ध हटा लिया ।
  • 1947 में इन्होने भारत विभाजन का विरोध किया। महात्मा रामचन्द्र वीर नामक (हिन्दू महासभा के नेता एवं सन्त) ने उनका समर्थन किया ।
  • 15 अगस्त, 1945 को उन्होंने सावरकर सदान्तो में भारतीय तिरंगा एवं भगवा, दो-दो ध्वजारोहण किये। इस अवसर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुझे स्वराज्य प्राप्ति की खुशी है, परन्तु वह खण्डित है, इसका दु:ख है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की सीमायें नदी तथा पहाड़ों या सन्धि-पत्रों से निर्धारित नहीं होतीं, वे देश के नवयुवकों के शौर्य, धैर्य, त्याग एवं पराक्रम से निर्धारित होती हैं ।
  • 5 फरवरी, 1948 को गान्धी-वध के उपरान्त उन्हें प्रिवेन्टिव डिटेन्शन एक्ट धारा के अन्तर्गत गिरफ्तार कर लिया गया ।
  • 4 अप्रैल, 1950 को पाकिस्तानी प्रधान मंत्री लियाक़त अली ख़ान के दिल्ली आगमन की पूर्व संध्या पर उन्हें सावधानीवश बेलगाम जेल में रोक कर रखा गया ।
  • मई, 1952 में पुणे की एक विशाल सभा में अभिनव भारत संगठन को उसके उद्देश्य (भारतीय स्वतन्त्रता प्राप्ति) पूर्ण होने पर भंग किया गया ।
  • 10 नवम्बर, 1957 को नई दिल्ली में आयोजित हुए 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के शाताब्दी समारोह में वे मुख्य वक्ता रहे ।
  • 8 अक्तूबर, 1959 को उन्हें पुणे विश्वविद्यालय ने डी०.लिट० की मानद उपाधि से अलंकृत किया।
  • सितम्बर, 1966 से उन्हें तेज ज्वर ने आ घेरा, जिसके बाद इनका स्वास्थ्य गिरने लगा ।
  • 1 फरवरी, 1966 को उन्होंने मृत्युपर्यन्त उपवास करने का निर्णय लिया ।
  • 26 फरवरी, 1966 को बम्बई में भारतीय समयानुसार प्रातः १० बजे उन्होंने पार्थिव शरीर छोड़कर परमधाम को प्रस्थान किया ।

सावरकर को ब्रिटिश सरकार ने क्रान्ति कार्यों के लिए दो-दो आजन्म कारावास की सजा दी थी जो विश्व के इतिहास की पहली एवं अनोखी सजा थी। सावरकर के अनुसार -"मातृभूमि ! तेरे चरणों में पहले ही मैं अपना मन अर्पित कर चुका हूँ। देश-सेवा ही ईश्वर-सेवा है, यह मानकर मैंने तेरी सेवा के माध्यम से भगवान की सेवा की है|"

जन्‍मदिवस पर वि‍शेष


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गांधी का ब्रह्मचर्य और स्‍त्री प्रसंग



नेहरू के विभिन्‍न स्‍त्रियों से सम्‍बन्‍धो की चर्चा तो हमेशा होती ही रही है किन्‍तु अभी गांधी जी के स्‍त्रियों के के सम्‍बन्‍ध पर मौन प्रश्‍न विद्यमान है। गांधी जी ने अपनी पुस्‍तक सत्‍य के प्रयोग में अपने बारे में जो कुछ लिखा है उसमें कितना सही है, यह गांधी से अच्‍छा कौन जान सकता है? गांधी जी के जीवन के सम्‍बन्‍ध में अभी तक इतना ही जाना जा सका है जितना कि नवजीवन प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। आज गांधी की वास्‍तविक स्थिति हम अनभिज्ञ है, बहुत से बातों में गांधी को समझ पाना कठिन है। गांधी की नज़रों में गीता माता है, पर वे गीता के हर श्‍लोक से बंधे नही थे, वह हिन्‍दू धर्म को तो मानते थे किन्‍तु मंदिर जाना अपने लिये गलत मानते थे, वे निहायत आस्तिक थे किन्‍तु भगवान सत्‍य से बड़ा या भिन्‍न हो सकता है उन्‍हे इसका सदेह था ठीक इसी प्रकार ब्रह्मचर्य उनका आदर्श रहा, लेकिन औरत के साथ सोना और उलंग होकर सोना उनके लिये स्‍वाभाविक बन गया था।

गांधी के सत्‍य के प्रयोगों में ब्रह्मचर्य भी प्रयोग जैसा ही था, विद्वानों का कथन है कि गांधी जी अपने इस प्रयोग को लेकर अपने कई सहयोगियों से चर्चा और पत्रचार द्वारा बहस भी की। एक पुस्‍तक में एक घटना का उल्‍लेख किया जाता है - पद्मजा नायडू (सरोजनी नाडयू की पुत्री) ने लिखा है कि गांधी जी उन्‍हे अकसर चिट्ठी लिखा करते थे ( पता नही गांधी जी और कितनी औरतो को चिट्ठी लिखा करते थे :-) ), एक हफ्ते में पद्मजा के पास गांधी जी की दो तीन चिट्ठियाँ आती है, पद्मजा की बहन लीला मणि कहती है कि बुड्डा (माफ करे, गांधी के लिये यही शब्‍द वहाँ लिखा था, एक बार मैने बुड्डे के लिये बुड्डा शब्‍द प्रयोग किया था तो कुछ लोग भड़क गये थे, बुड्डे को बुड्डा क्‍यो बोला) जरूर तुमसे प्‍यार करता होगा, नही तो ऐसी व्‍यस्‍ता में तुमको चिट्ठी लिखने का समय कैसे निकल लेता है ?

लीला मंणि की कही गई बातो को पद्मजा गांधी जी को लिख भेजती है, कि लीलामणि ऐसा कहती है। गांधी जी का उत्‍तर आता है। '' लीलामणि सही ही कहती है, मै तुमसे प्रेम करता हूँ। लीलामणि को प्रेम का अनुभव नही, जो प्रेम करता है उसे समय मिल ही जाता है।'' पद्मजा नायडू की बात से पता चलता है कि गांधी जी की औरतो के प्रति तीव्र आसक्ति थी, यौन सम्‍बन्‍धो के बारे में वे ज्‍यादा सचेत थे, अपनी आसक्ति के अनुभव के कारण उन्हे पाप समझने लगे। पाप की चेतना से ब्रह्मचर्य के प्रयो तक उनमें एक उर्ध्‍वमुखी विकास है । इस सारे प्रयोगो के दौरान वे औरत से युक्‍त रहे मुक्‍त नही। गांधी का पुरूषत्‍व अपरिमेय था, वे स्‍वयं औरत, हिजड़ा और माँ बनने को तैयार थे, यह उनकी तीवता का ही लक्षण था। इसी तीव्रता के कारण गांधी अपने यौन सम्‍बन्‍धो बहुतआयामी बनाने की सृजनशीलता गांधी में थी। वो मनु गांधी की माँ भी बने और उसके साथ सोये भी।

गांधी सत्‍य के प्रयोग के लिये जाने जाते है। उनके प्रयोग के परिणाम आये भी आये होगा और बुरे भी। हमेशा प्रयोगों के लिये कामजोरो का ही शोषण होता है- इसी क्रम में चूहा, मेढ़क आदि मारे जाते है। गांधी ने अपने ब्रह्मचर्य के प्रयोग जो अन्‍यों पर किये होगे वे कौन है और उन पर क्‍या बीती होगी, यह प्रश्‍न आज भी अनुत्‍तरित है। गांधी की दया सिर्फ स्‍वयं तक सीमित रही, वह भिखरियों से नफरत करके है, उनके प्रति उनकी तनिक भी सहनुभूति नही दिखती है ये बो गांधी जिसे भारत के तत्‍कालीन परिस्थित से अच्‍छा ज्ञान रहा होगा। गांधी के इस रूप से गांधी से क्रर इस दुनिया में कौन हो सकता है, जो पुरूष हो कर माँ बनना चाहता है।

इस लेख के सम्‍पूर्ण तथ्‍य राज कमल प्रकाशन से प्रकाशित किशन पटनायक की पुस्‍तक विकल्‍पहीन नही है दुनिया के पृष्‍ठ संख्‍या 101 में गांधी और स्‍त्री शीर्षक के लेख से लिये गये है।


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जन्‍मदिवस पर पंगेबाज को मिला मंत्रीपद, पाला बदलने से महत्‍वपूर्ण औहदो से नवाजे गये भगवा ब्‍लागर



आज प्रधानमंत्री मन मोहन सिंह की ओर से उनके निजी सचिव ने भारत के नम्‍बर एक चिट्ठाकार पंगेबाज को उनके 44 वें जन्‍मदिवस पर स्थिर सरकार का तौफहा भेजा। पंगेबाज के जन्‍मदिवस पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अब हमें मजबूत सरकार के लिये आपका सर्मथन चाहिये। देश विनाश के लिये कांग्रेस में लोगो की बहुत कमी पड़ रही है, जब जाट शिरोमणि अजित सिंह को भी कांग्रेस में शामिल होने को कहा जा रहा है तो अब आप से वैर कैसे किया जा सकता है, हम आपको भी निमंत्रित कर रहे है। उन्‍होने कहा कि आपको कांग्रेस पर आने पर केवल सोनिया मैडम और राहुल जी की ही जय बोलना पड़ेगा हमारी नही भी करेगे तो भी कोई बात नही क्‍योकि और कोई भी नही करता है। जबकि भाजपा में अटल-अडवानी-जोशी-जसवंत-यशवंत-जेटली पता नही किसकी किसकी बोलना पड़ता जिसकी न बोलो वो नाराज और कट गया आपका टिकट। जबकि हमारी कांग्रेस पार्टी में मेरी भी क्‍या औकात कि किसी का टिकट काट दूँ ? और तो और राहुल बाबा और मैडम के अलावां किसी और कि तूती बोलती भी नही है।
 
राहुल गांधी ने वर्तमान चुनाव में चिट्ठाकारी के प्रभाव से बहुत प्रभावित हुये। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को आदेश देते हुये कहा कि पंगेबाज के जन्‍मदिवस पर मौके की नजाकत को देखते हुये उन्‍हे बधाई दीजिए और आपने मंत्रालय में एक चिट्ठाकारी मंत्रालय की स्‍थापना कर उन्‍हे कै‍बीनेट स्‍तर के मंत्री के रूप में मंत्रीमंडल जगह दीजिए। राहुल गांधी का यह सोचना भी गलत नही है, क्‍योकि वर्तमान समय में हिन्‍दी चिट्ठकारी में करीब 10 हजार (करीब 5000प्रतिशत की बृद्धि )चिट्ठाकार हो चुके है जबकि 2006 तक से केवल 200 तक ही थे , और 2014 के आम चुनाव तक करीब 5 करोड़ हिन्‍दी ब्‍लागर हो जायेगे। जिनकी उपयोगिता के लिहाज से अंदेखा करना ठीक न होगा। पंगेबाज के निजी सचिव ने बताया कि पंगेबाज मंत्रीपद की शपथ लेने के लिये शपथ ग्रहण समारोह स्‍थल पर रवाना हो चुके है।
 
ममता, अजित, लालू, मुलायम, माया, पासवान, नीतीश,पवार, करूणानिधि जैसे विरोधियों को अपनी ओर करने से उत्‍साहित राहुल की नज़र अब भगवा ब्‍लागरों पर है। इसी को देखते हुये राहुल गांधी ने भगवा फायरब्राड़ ब्‍लागर सुरेश चिप्‍लूकर और प्रमेन्‍द्र प्रताप सिंह को भी मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग की तर्ज पर चिट्टाकारी आयोग की स्‍थापना कर, क्रमश: अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष बना कर लाल बत्‍ती से नवाजने की की पेशकस कर काग्रेस से जोड़ने की कोशिश। सुरेश चिप्‍लूकर जी ने अपने ब्‍लाग पर लिखे, काग्रेस बिरोधी लेख न मिटने की शर्त रखने पर ही अध्‍यक्ष पद तो स्‍वीकार करने की बात कही, राहुल गांधी ने सुरेश जी से निवेदन करते हुये कहा कि आप सही है कि ब्‍लागरों के लेख उनकी अमूल्‍य निधि होते है वो उसे कैसे डिलीट कर कर सकते है, मै आपकी भावनाओं को समझ सकता हूँ, पर आपसे निवेदन है कि साईड बार में जो काग्रेस विरोधी लेखों के लिंक दौड़ रहे है उन्‍हे आप हटा दीजिए। सुरेश जी ने कहा कि इतना तो किया ही जा सकता है, लेख तो ब्‍लागरों के बेटे होते है उन्‍हे डिलीट करना बेटो का वध करना होगा, लिंक तो हटा ही सकते है, क्‍या हम अपने बेटो के बाल ओर नाखून आदि नही काटते ? 
 
महाशक्ति के प्रमेन्द्र उपाध्‍यक्ष पद पाने से खुश हो ही रहे थे कि चिट्ठाकारों विधि सलाहकार दिनेश राय द्विवेदी ने कहा कि प्रमेन्‍द्र आप तो विधि के छात्र हो आपको तो पता होना चाहिये कि किसी भी संवैधिनिक पद की पद को धारण करने की उम्र की सीमा 25 वर्ष की होती है, और अभी तुम 22 वर्ष के ही हो, अत: तुम अभी इस पद के लिये अयोग्य हो। न्याय विद् द्विवेदी ली की बात से प्रमेन्‍द्र तो कम राहुल बाबा बहुत दुखी हुये। उनका मानना था कि घोषणा के बाद युवा का नाम काटा जाना ठीक न होगा वोट पर बिपरीत प्रभाव पडेगा, अभी महाराष्‍ट्र के चुनाव भी होने वाले है, ऐसा खतरा लेना ठीक नही। उन्‍होने समाधान निकालते हुये प्रमेन्‍द्र को अखिल भारतीय चिट्ठकार कांग्रेस कमेटी का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बना दिया। 
 
अभी खबर लिखे जाने तक पंगेबाज अपने 44 जन्‍मदिवस पर चिट्ठाकार मंत्री की शपथ ले चुके थे, चिट्ठाकार आयोग के प्रथम अध्‍यक्ष सुरेश जी भी अपने नये दफ्तर में बैठ झक्‍कास पोस्‍ट लिखने की तैयारी कर रहे थे उपध्‍यक्ष का पद हिन्‍दू चेतना के चंदन चौहान को देने की बात तय हुई, राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनने पर प्रमेन्‍द्र के महाशक्ति ब्‍लाग पर युवाओं का रैला टूट पड़ा। चिट्ठकारों में इस खबर से कांति के रूप में देखा जा रहा है। मंत्री व अध्‍यक्षों ने एक दूसरे को बधाई दी, ब्‍लागरों में भी पंगेबाज को जन्‍मदिवस व मंत्रीपद पाने पर बधाई देने की होड़ लगी थी। काफी वरिष्‍ठ ब्‍लागर अपने पुराने सम्‍बन्‍धों का हवाला देते हुये पिछले सम्‍बन्‍धो को हवाला देते हुये पिछले गेट से घुसकर बधाई देने की होड़ लगी थी। तथाकथित सेक्‍यूलर ब्‍लागर बदले मौहोल से हतप्रभ थे उन्‍होने भी स्‍वीकार किया कि हम संप्रदायिक भगवा ब्‍लागर क्‍यो न थे ?
 
इस पूरी खबर को कबर किया इलाहाबाद के पत्रकार और नये ब्‍लागर हिमांशु पान्‍डेय ने जो कल ही अपना ब्‍लाग मेरी आवाज सुनो के साथ चिट्ठाकारी में आये है, इनका भी टिप्‍पणी से स्वागत किया जाये। मीडिया की अलग अलग खबरों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस की सर्वेसर्वा मैडम सोनिया ने प्रधानमंत्री पद का आफर किया था, पर पंगेबाज ने इंकार कर दिया है। चूकिं यह मीडिया है, खबरों के भिन्‍नता न हो तो मीडिया का मतलब ही नही पता चलेगा। :)


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What An Idea एडसेंस प्रकाशकों के लिये गुड न्‍यूज़ बचेगे हजारो रूपये



आज Google Adsense (गूगल एडसेंस) के आधिकारिक ब्‍लाग पर जाना हुआ। वहाँ पर गूगल ने भारत में अपने मुद्रा भुगतान के सम्‍बन्‍ध में अपनी प्रवृष्टि जारी किया है। जैसा कि आपको पता होगा कि Google Adsense भारत में भुगतान साधारण वितरण व Standard Delivery पद्धति से करता था। जहाँ साधारण वितरण के लिये कोई शुल्‍क नही लिया जाता था वही Standard Delivery के लिये DHL Courier का प्रयोग करता था जिसके लिये 25 डालर पहले से काट लेता था।
 
वर्तमान समय में गूगल ने अपनी सुविधाओं में वृद्धि करते हुये, Blue Dart courier के द्वारा बिना एक भी पैसा लिये आपके चेको का भुगतान किया जायेगा। निश्चित रूप से भारत में Google Adsense के द्वारा उठाया जाने वाला एक बेहतर कदम है। भारत के सम्‍बन्‍ध में गूगल के इस कदम से Google Adsense कमाई करने वालो के 25 डालर तो बचेगे। अब तो कमाई करने वालो के मन में इस बात को भी प्रोत्‍साहन मिलेगा कि गूगल जल्‍द ही भारत के इन्‍टर नेट की भूमिका को नजर आदंज नही करेगा। जैसा कि पूर्व में भारत से पहले इंडोनेशिया छोटे देश में Electronic Clearing Service (ECS) शुरू करने पर भारतीय ब्‍लागरों ने रोष व्‍यक्‍त किया था। अब भारतीय ब्‍लागर भी आने वाले कुछ महीनो मे Electronic Clearing Service (ECS) के द्वारा सीधे भुगतान प्राप्‍त करने का स्‍वप्‍न देख सकते है और जल्‍द ही यह स्‍वप्‍न साकार भी होगा।
 
चलते चलते - चुनावी महासमर समाप्‍त हो चुका है। मतगणना की समाप्‍ति के साथ ही मेरी परीक्षा की तिथियाँ भी शुरू हो रही है। एक महान सेक्‍यूलर ब्‍लागर फिर सनक गया है, सनक उनकी आदतो में सुमार है, उसे सिर्फ ''मै'' का भ्रम है, उसके इस ''मै'' के भ्रम को कई बार तोड़ा था और फिर तोड़ूँगा, मै सलाह दूँगा धमंड और शक्ति का बेअर्थ प्रदर्शन ठीक नही। वो बार बार अपनी शक्ति के प्रदर्शन के पागलपन में मधुमक्‍खी के छत्‍ते पर ईट मार रहा है, अभी मधुमक्‍खी व्‍यस्‍त है , मामला बाद मे देखा जायेगा।


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साईकिल कमल संवाद



हमारे एक बहुत ही अच्‍छे मित्र(अभी नाम नही लूँगा) है, बहुत मुद्दो पर हम मतैक्‍य है सिवाय पार्टियों की के , इसके सिवाय लगभग हम बहुत बातों पर सहमत रहते है। यह हमारे मित्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के सिरमौर है। इनमे वह क्षमता है जो अभी से ही दिखती है, अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व के साथ जलपान आदि कर चुके है। इनका भविष्‍य बहुत उज्‍जवल है, और मै इस भविष्‍य को और भी उज्‍जव होने की सदा कामना करता हूँ। ता‍कि कोई भी शीर्ष पर पहुँचे, मगर वक्‍त ऐसा आये कि हमारी सार्थक विचार धारा प्रभावी हो। हम अक्‍सर कुछ मुद्दो पर बात करते है आज ही अचानक आर्कुट पर उनसे बात हुई, मुझे लगा कि इसे शेयर किया जा सकता है। तो मै उसे प्रस्‍तुत कर रहा हूँ -
साईकिल का सारथी: namaskar..
भाजपा को वोट दे: नमस्‍कार मित्र केसे हे
साईकिल का सारथी: सब बढ़िया है...आपको ने बहुत वोट माँगा...
भाजपा को वोट दे: अभी भी मांग रहे है। और बताइये क्‍या चल रहा है।
साईकिल का सारथी: main bhi mang raha hun...bhai bs party ka anter hai....haaa haaaa
भाजपा को वोट दे: आप किंग मेकर हो सकते है, किंग नही किंग तो हम है हम। हा हा हा
साईकिल का सारथी: क्योंकि हम गरीबों ,नौजवानों,किसानो,बेरोजगारों,बुनकरों,मजदूरों की बात करतें हैं इसीलिए .....और आप लोग तो राजा हो ही...
भाजपा को वोट दे: सिर्फ बात ही करते है, काज के नाम पर अकाज करते है। काम तो हम करते है, गुजरात को देखिये, कम ही काम हुआ है, अब यही काम भारत में भी होगा।
साईकिल का सारथी: माँ के दो बेटों में खाने से लेकर रहने तक की लडाई लगा दी...विकास की बात करतें हैं...मौका मिले तो देश बाँट दें...
भाजपा को वोट दे: एक बार मौका मिला तो 45 साल के कांग्रेस के कंलक को धोया, पर आप जैसी कुछ पार्टियों ने हमारे 6-7 सीट ज्‍यादा काग्रेस को फिर से सत्‍ता में लाकर भारत माता के माथे पर कंलक लगाने के काबिल बना दिया। अगर 2004 मे कांग्रेस की सरकार न होती तो 2009 में अपनी अन्तिम सांसे गिन रही होती, और सत्‍ता का मुकाबला मेरे और आपमे होता, आपने ही मौका गवां दिया।
साईकिल का सारथी: जी यहाँ मैं मैं आपसे सहमत हूँ...पर मुझे लगता है की भारतमाता का सम्मान सभी को करना चाहिए...आप की पार्टी के बहुत सारे लोग दो भैएयों में वैमनष्यता का बीज बोते है...ये ठीक नहीं....यह भी तो कलंक है...
भाजपा को वोट दे:
कौने से भाई मित्र ? वह भाई जिसने अपनी चाचा की मृत्‍यु के बाद अपने अपनी चाची और भाई को बेदखल कर पूरे सम्‍पत्ति अपनी मॉं के साथ मालिक बन गया ? जिसने कभी सुध नही ली। उस वेवा की व्यथा को आप क्‍यो भूल जाते जिसके कारण उसे अपने जेठ के खिलाफ चुनाव लड़ना पड़ता है। उस पर परिवार ने कभी इन माँ बेटो को अपना माना ही नही।
भाजपा को वोट दे: (काफी देर तक अन्‍य बात नही आती है) अब मुझे जाना होगा, कुछ निमंत्रणों में जाना है। फिर मिलते है, जय श्रीराम
साईकिल का सारथी: same here..


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भेड़ाघाट और दुर्घटना के लिये याद रहेगा जबलपुर का तीसरा दिन



जबलपुर की यात्रा के दो सस्‍मरणों (जबलपुर की यात्रा - प्रथम दिनजबलपुर में दूसरा दिन - महेन्‍द्र, सलिल व ब्‍लागर मीट)को तो आपने पढ़ा ही होगा। आज मै भेड़ाघाट जा रहा हूँ , मेरी तनिक भी इच्‍छा नही है किन्‍तु सुपारी दी थी तो जाना पड़ेगा ही। जबलपुर की मीट में ही श्री गिरीश बिल्‍लोरे जी ने मुझे भेड़ाघाट घुमाने की सुपारी ले ली थी और उन्‍होने इसे अगले दिन पूरा करने के लिये एक अपरण कर्ता को मय कार के साथ भेज दिया। उसने बताया कि आपको खुफिया जगह ले जाया जा रहा है। मैने पूछा आपके सरगना (गिरीश जी)वहाँ होगे कि नही ? उत्‍तर मिला नही। फिर क्‍या था फोन मिलाया और शिकायत दर्ज की, तो अपनी व्‍यस्‍तता को बताई जो जायज थी।





मुझे और ताराचंद्र को उस गाड़ी चालक ने पूरी सहुलियत के साथ घुमाया, बहुत कम पैदल चलवाया। बहुत कम समय में बहुत ही यादगार स्‍मृति मेरे मन में बन गई। कुछ देन में कुछ खरीददारी भी किया किया। चलते वक्‍त नजदीक के एक होटल मे जलपान भी किया। कुछ देर में वाहन चालक ने हमें अपने गन्‍तव्‍य स्‍थान हरिभूमि पर पहुँचा दिया। कुछ देर में मित्र तारा अपने आफिस का काम देख कर मुझे आराम करने के लिये घर छोड आये। शाम 4-5 बजे तक वो फिर आते है और मुझे अपने साथ हरिभूमि के दफ्तर में अपनी कुछ मित्रों से मिलवाया। काफी देर तक मुलाकात बातचीत का दौर चला । मुझे लगा कि मै आफिस के काम में बाधा पहुँच रहा हूँ तो सभी से अनुमति घूमने निकल पडा।


शाम का समय था कहाँ कहाँ घूमा मुझे पता नही था, तीन दिनो बाद पहली बार जबलपुर में सायबर कैफे दिखा। जैसे ही मै बैठा वैसे ही श्री गिरीश जी का फोन आया, कि मै हरिभूमि पर आपका इंतजार कर रहा हूँ। मुश्लिक से 5 मिनट भी न हुये थे, दाम पूछा तो 10 रूपये बताया देकर चलता बना। 5 मिनट में हरिभूमि पहुँच गया, श्री गिरीश जी के साथ चौराहे की चाय की चुस्‍की हुयी और और खबर सुनाई दी कि कही हेलीकाप्‍टर गिर पड़ा है। हरिभूमि से ज्‍यादा तेज गिरीश जी का नेटवर्क था जो इस खबर की पुष्टि की । इसी चर्चा के बीच बहुत तेज आंधी पानी भी आ गया, और हम जल्‍दी से गाड़ी में बैठकर श्री गिरीश जी के आवास पहुँच गये।

जलपान के साथ विभिन्‍न मुद्दे पर गरम चर्चा भी हुई, 2006 से लेकर वर्तमान चिट्ठाकारी पर चर्चा भी की गई, और भविष्‍य की संकल्‍पनाओं की आधारशिला भी रखा गया। कुछ बातो पर मुझे जबलपुर के उन ब्‍लागरो से कभी कुछ कहना चाहूँगा, जो मुझे अत्‍मीय मान देते है, समय अपने पर वह मै करूँगा। करीब रात्रि 10.30 भोजन के बाद हम सभी परिवार जनो से आ‍शीर्वाद ले विदा हुये। श्री गिरीश जी व परिवार से जो प्‍यार मिल उसके लिये धन्‍यवाद या आभार व्‍यक्‍त करना, उस स्‍वर्णिम पल का अपमान करना ही होगा, इन तीन दिनो में मुझे अपने परिवार की स्‍मृति तो थी किन्‍तु सभी की छवि जबलपुर के ब्‍लागरों मे दिख रही थी।

रात्रि के समय में जबलपुर की तुलना किसी दुल्‍हन से करना गलत न होगा। मै जबलपुर की छटा पर से निगाह हटा नही पा रहा था, मै उसे देख ही रहा था चौरारे पर एक तीव्र गति सी आती हुई फोरविलर के कारण कि गाड़ी असन्‍तुलित हो गई और हम गिर पड़े। जबलपुर के लोगो का प्‍यार और भगवान हमारे साथ थे इस कारण ज्‍यादा कुछ नही हुआ, हमारे मित्र ताराचंद्र आगाह थे इसलिये बिल्‍कुल सुरक्षित थे, थोड़ा गाड़ी डैमेज हो गई थी, मै शहर के नजरे लेने में व्‍यस्‍त और इसका खामियाजा मुझे भुगतना पड़ा, इस कारण मुझे सड़क पर ही घुटना टेकना पड़ा और नतीजा यह हुआ कि पैट भी फट गई और घुटना भी छिल गया (दर्जी की दया से पैंट रफू और डाक्‍टर की दया चोट दोनो जल्‍दी ही बिदा हो गये, पर पैंट मे भी दाग है और पैर में भी जो जबलपुर की याद दिलाता रहेगा ) । ताराचंद्र ने पूछा चोट तो नही लगी, मैने कहा नही, थोड़ा गाड़ी धीरे चलाया करो, दुर्घटना सिर्फ हमारी गलती से ही नही होती है। हम चल दिये मुझे घर पहुँच तारा चन्‍द्र जी अपने ऑफिस चले गये।

सुबह जब तारा चन्‍द्र उठे मेरी पैंट और चोट देखी जो उन्‍हे फील हुया, कुछ गलती जरूर हुई थी। यही फील करवाना मेरा मकसद भी था, क्‍योकि मेरा मानना है कि दुर्घटना अपनी गलती से नही होती है पर अपनी सावधानी से टाली जा सकती है। आगे की चर्चा अगले पोस्‍ट में ये यादगार अन्तिम दिन था क्‍योकि मुझे इस दिन एक नया परिवार मिला।


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मदद के लिये आभार, आखिर हल मिल ही गया



पिछले कुछ दिनो से मेरा ब्‍लाग एक अजीब सी समस्‍या से जूझ रहा था, उस समस्‍या के निजाद के लिये ब्‍लाग समूह से मदद मॉंगी थी। पोस्‍ट लिखता था पोस्‍ट मेन पेज पर तो दिखती थी किन्‍तु पोस्‍ट के रूप में नही दिख रही थी। परसो मै और जीतू भाई काफी देर तक इस समस्‍या पर विचार करते रहे किन्‍तु समास्‍या का समाधान हो ही नही रहा था,जीतू भाई भी अपना अमूल्‍य समय निकाल कर मेरी सहाया करने में लगे थे।
 
मेरा ब्‍लाग दो जगहो पर रिडाईरेक्‍ट हो रहा था, जो एक तकनीकि कमी थी, अन्‍तोगत्‍वा जीतू भाई के अनुसार मैने अगले दिन फिर से काम प्रारम्‍भ किया। काम मे लगा ही था कि श्री विजय तिवारी किसलय जी से सुखद बात हुई उनके बात करने के बाद तो मन प्रसन्‍न हो हो गया। उनसे बात समाप्‍त हुई ही और जैसे फिर ब्‍लाग में हाथ लगाया अपने आप समस्‍या समाप्‍त हो गई।
मुझे एहसास हुआ कि किसी काम की सफलता के पीछे मेहनत के साथ-साथ सही समय का हो भी आवाश्‍यक होता है।


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