अनमोल वचन



  1. त्योहार साल की गति के पड़ाव हैं, जहाँ भिन्न-भिन्न मनोरंजन हैं, भिन्न-भिन्न आनंद हैं, भिन्न-भिन्न क्रीडास्थल हैं - बरुआ
  2. दुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी कम प्यारे नहीं होते- प्रेमचंद
  3. अधिक हर्ष और अधिक उन्नति के बाद ही अधिक दुख और पतन की बारी आती है।-जयशंकर प्रसाद
  4. अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींच कर महाप्राण शक्तियाँ बनाते हैं।- महर्षि अरविंद
  5. जंज़ीरें, जंज़ीरें ही हैं, चाहे वे लोहे की हों या सोने की, वे समान रूप से तुम्हें गुलाम बनाती हैं।- स्वामी रामतीर्थ
  6. जैसे अंधे के लिए जगत अंधकारमय है और आँखों वाले के लिए प्रकाशमय है वैसे ही अज्ञानी के लिए जगत दुखदायक है और ज्ञानी के लिए आनंदमय।- संपूर्णानंद
  7. नम्रता और मीठे वचन ही मनुष्य के आभूषण होते हैं। शेष सब नाममात्र के भूषण हैं।- संत तिरुवल्लुर
  8. वही उन्नति करता है जो स्वयं अपने को उपदेश देता है।- स्वामी रामतीर्थ
  9. अपने विषय में कुछ कहना प्राय: बहुत कठिन हो जाता है क्योंकि अपने दोष देखना आपको अप्रिय लगता है और उनको अनदेखा करना औरों को।- महादेवी वर्मा
  10. करुणा में शीतल अग्नि होती है जो क्रूर से क्रूर व्यक्ति का हृदय भी आर्द्र कर देती है।- सुदर्शन
  11. हताश न होना ही सफलता का मूल है और यही परम सुख है।- वाल्मीकि
  12. मित्रों का उपहास करना उनके पावन प्रेम को खंडित करना है।- राम प्रताप त्रिपाठी
  13. नेकी से विमुख हो जाना और बदी करना नि:संदेह बुरा है, मगर सामने हँस कर बोलना और पीछे चुगलखोरी करना उससे भी बुरा है।- संत तिरुवल्लुवर
  14. कवि और चित्रकार में भेद है। कवि अपने स्वर में और चित्रकार अपनी रेखा में जीवन के तत्व और सौंदर्य का रंग भरता है।- डॉ. रामकुमार वर्मा
  15. तलवार ही सब कुछ है, उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की।- गुरु गोविंद सिंह
  16. मनुष्य क्रोध को प्रेम से, पाप को सदाचार से लोभ को दान से और झूठ को सत्य से जीत सकता है।- गौतम बुद्ध
  17. स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है!- लोकमान्य तिलक
  18. सच्चे साहित्य का निर्माण एकांत चिंतन और एकांत साधना में होता है।- अनंत गोपाल शेवडे
  19. कुटिल लोगों के प्रति सरल व्यवहार अच्छी नीति नहीं।- श्री हर्ष
  20. अनुभव, ज्ञान उन्मेष और वयस् मनुष्य के विचारों को बदलते हैं।- हरिऔध
  21. जो अपने ऊपर विजय प्राप्त करता है वही सबसे बड़ा विजयी हैं।- गौतम बुद्ध
  22. अधिक अनुभव, अधिक सहनशीलता और अधिक अध्ययन यही विद्वत्ता के तीन महास्तंभ हैं।- अज्ञात
  23. जो दीपक को अपने पीछे रखते हैं वे अपने मार्ग में अपनी ही छाया डालते हैं।- रवींद्र
  24. जहाँ प्रकाश रहता है वहाँ अंधकार कभी नहीं रह सकता।- माघ्र
  25. मनुष्य का जीवन एक महानदी की भाँति है जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओं में राह बना लेती है।- रवींद्रनाथ ठाकुर
  26. प्रत्येक बालक यह संदेश लेकर आता है कि ईश्वर अभी मनुष्यों से निराश नहीं हुआ है।- रवींद्रनाथ ठाकुर
  27. कविता का बाना पहन कर सत्य और भी चमक उठता है।- अज्ञात
  28. हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में प्रेरित करता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनता है।- वाल्मीकि
  29. अनुराग, यौवन, रूप या धन से उत्पन्न नहीं होता। अनुराग, अनुराग से उत्पन्न होता है।- प्रेमचंद
  30. जैसे जल द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है वैसे ही ज्ञान के द्वारा मन को शांत रखना चाहिए।- वेदव्यास

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7 comments:

कविता रावत said...

Sach mein anmol vachan anmol hote hai jo jeene kee raah aasan karte hai...
Prastuti ke liye bahut dhanyavaad

kshama said...

Jinhon ne jeevan ko qareeb se jiya ho,wahi log aise vichar rakh sakte hain!
Bahut badhiya sankalan!

K M Mishra said...

अनमोल रत्नों का आपने तो पिटारा ही खोल कर रख दिया ।

ashu said...

great mens great words aise shabad mujhe sari muskilo se nikalne mai maddad karate hai...

Ankit said...

anmol vachan is very beautiful.it is wonderful website.

Pius said...

धरती पर मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो अपने और पृथ्वी के अन्य प्राणियों का वजूद सुरक्षित रख सकता है, अतःएव मनुष्यों को पृथ्वी के समस्त प्राणियों से प्रेम करना चाहिए.
पुष्कर चौहान

DASHRATH SAI said...

बहुत अच्छा प्रयास है ज्ञान के ज्योति जलाने का