इलाहाबाद मिलन का अंतिम सच



तुम लोग अभी नही हो लेकिन मै तुम्‍हे बहुत मिस कर रहा हूँ, तुम सब बहुत याद आ रहे हो, किसी के लिये अतिश्‍योक्ति होगी कि कि वाणी कट्टरता वाला व्‍यक्ति इतना भावुक हो सकता है, पिछले 36 घंटे मे मै जितनी देर तुम लोगो के साथ रहा और अभी कुछ मिनट पूर्व नीशू और मिथलेश के जाने पर वो 36 घंटो का साथ अब अखर रहा है, वो उन 36 घन्‍टे का परिणाम है कि दोस्‍त तुम्‍हारे लिये ऑखे नम है, तुम सब जा रहे थे पर दिल कहता था कि कह दूँ एक दिन और रूक जाओ, मुझे पता है कि तुम लोग बस अड़्डे पर होगे ..... व्‍यक्ति को इतना लगाववादी नही होना चाहिये।


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8 comments:

राजकुमार सोनी said...

आओ हम सब मिलकर गाएं
ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे
छोडेंगे दम मगर तेरा साथ न छोडेंगे

ऐसा होता है नीशू भाई। वैसे आप लोगों ने एक सफल कार्यक्रम किया इसके लिए बधाई।

pankaj mishra said...

good good good.

sanu shukla said...

bahut shubhkamnaye...

दिवाकर मणि said...

ऐसा ही होता है, जब सज्जन से सज्जन व्यक्ति बिछड़ते हैं तो....

दीपक 'मशाल' said...

संगम किनारे वाले भावुक तो होते ही हैं.. नहीं मानते तो 'पूरब और पश्चिम' देख लो भाई.. :)

गिरीश बिल्लोरे said...

हार्दिक शुभ कामनाएं

राजीव तनेजा said...

जीवन के सफर में राही ...
मिलते हैं बिछुड़ जाने को...
और दे जाते हैं यादें...
तन्हाई में तड़पाने को ...

ब्लॉग्गिंग चीज़ ही ऐसी है मेरे भाई...दोस्त बहुत याद आते हैं...

Maria Mcclain said...

nice post, i think u must try this website to increase traffic. have a nice day !!!