भाजपा के प्रदेश दफ्तर मे अमर उजाला का चाटुकार पत्रकार



लखनऊ यात्रा के दौरान एक दिन भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर जाना हुआ। साथ मे एक सम्‍मान‍ित पत्रकार थे जिन्‍होने कही कि चल कर कुछ मित्र नेताओ की फोटो ले लिया जाये। मैने भी हॉमी भर दी, जब वहाँ पहुँचे तो भाजपा के बडे नेता ने उन पत्रकार महोदय ये पूछा कि महोदय यह क्या करवा रहे है? (मजाकिये लहजें) उन पत्रकार महोदय ने कोई उत्तर न दिया मेरे मुँह से निकल आया कि सर अपने मोस्‍ट वान्‍टेड के चित्र संग्रह कर रहे है। हल्‍की सी मुस्‍कान के साथ बात खत्म हो रही थी किन्‍तु वहाँ उन नेताजी के साथ घूम रहे एक अमर उजाला के पत्रकार उम्र करीब 30 की रही होगी, मेरी बात उनको बहुत खराब लग गई।
नेताजी के सामने अपना कद और मै नेताजी का हितैही हूँ साबित करने के लिये तपाक से मेरे से बोले कि तमीज से बात करों, जान नही रहे हो कि किससे बात कर रहे हो।
मैने भी उनकी तमीज उनके मुँह पर दे मारी और बोला कि अपनी लमीज अपने पास रखों और ये देखो की बात का माहौल किस ल‍हजे का है।
फिर उनको अपनी चटुकारिका की पत्रकारिता का दम्‍भ दिखा और बोले कि फोटोग्राफर हो, फोटोग्राफर की तरह रहो।
मैने भी बोल दिया कि जिस हद(चाटुकारिता) की पत्रकारिता कर सकते तो तुम वही कर रहे हो, और जब किसी को फोटोग्राफर कभी लेकर टहल सकना तो किसी को फोटोग्राफर कहना।
उसने कहा कि तुम हो कौन ?
इसी बीच मामला गम्‍भीर होता जा रहा था, हमारे साथ के वरिष्‍ठ पत्रकार ने हस्‍तक्षेप करते हुये, मेरा परिचय दिया कि फला मेरे मित्र है और इलाहाबाद से आये और अधिवक्ता है मेरे आग्रह पर कुछ चित्र लेने चले आये।
यह बात सुन कर अमर उजाला के चाटुकार का चेहरा मुझे घूरे जा रहा था पता नही क्‍यो ? और हम वहाँ से मंद मंद मुस्‍कारा दिये और अपने काम को सम्पन्‍न कर वहाँ से चल दिये पर वो अभी तक मुझे देख रहा था।
मेरे मन ने मन ही मन मे कहा कि वाह पत्रकारिता (चाटुकारिता)


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5 comments:

GirishMukul said...

इनकी भरमार है प्रमेंद्र
हमारे कारण ही

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

उस बंदे को आपका टाइटल लाइन नहीं मालुम थी - जो हमसे टकरायेगा चूर-चूर हो जायेगा

राज भाटिय़ा said...

अरे उस का नाम भी लिख देते, मुफ़त मे प्रसिद्धि मिल जाती बंदे को :)

दीर्घतमा said...

पत्रकारिता अब लोकतंत्र का चौथा खम्भा नहीं नहीं रह गयी ये चाटुकारों तथा दलालों की टोली हो गयी है.

Ravindra Nath said...

भाजपा के कार्यालयों मे ऐसे लोगों के जमावाडे के कारण ही उ.प्र. मे भाजपा की दुर्दशा है।