महाशक्ति चिट्ठकारी के पॉच साल, कारनामो भरा ब्‍लागर सम्‍मेलन



महाशक्ति चिट्ठकारी के पॉच साल, कारनामो भरा ब्‍लागर सम्‍मेलन
इलाहाबाद चिट्ठाकारी की दुनिया मे आपना नाम स्‍थापित कर चुका है, इलाहाबाद का यही नाम कई लोगो की ऑखो मे किरकिरी बना हुआ है। जहाँ तक मै समझता हूँ कि हर काम मे जहाँ किसी का सहयोग लिया जा सकता है लिया जाना चाहिये तथा जहाँ पर किसी को किसी हद तक सहयोग दिया ज सकता है दिया जाना चाहिये , हिन्‍दी के चिट्ठाकारी मे पिछले 5 सालो मे यह कमी मुझे बहुत देखने को मिली। हमेशा सिक्‍के के दो पहलू होते है अगर कुछ लोग खुरापाती टाईप के भी होते है तो कुछ इस दुनिया मे आत्‍मीय भी है। यही अत्‍मीयता हमेशा मिलने मिलने को प्रेरित करती है।
मैने अपनी पोस्‍ट इलाहाबाद मिलन का अंतिम सच मे आत्‍मीय लोगो के बारे मे लिखा था जिनसे एक बार नही बार बार मिलने को मन करता है। आज पुन: नीशू तिवारी और मिथलेश दूबे का आत्‍मीय साथ मिला, वकाई शाम के 4 बजे से रात्रि के 8.30 कब हो गये पता ही नही चला। इसी बीच अपनी बुद्धवासरीय अवकाश के कारण इलाहाबाद के पत्रकार हिमांशु पाण्‍डेय जी और उनके सुपुत्र चिरंजीव सोम का भी साथ मिला। जिस प्रकार 15 जून को जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन की प्रथम बैठक हुई उसी कि अगली मे एक और कड़ी जुड़ गई।
महाशक्ति चिट्ठकारी के पॉच साल, कारनामो भरा ब्‍लागर सम्‍मेलन
इसे मै इत्‍फाक ही कहूँ कि अत्‍मीयता आज के दिन ही मेरा हिन्‍दी ब्‍लाग की दुनिया मे पदार्पण हुआ था और मेरे साथ मेरे ब्‍लागिंग का 5वीं वर्षगांठ को मनाने के लिये ब्‍लागर मित्रो का साथ होना कितना सुखद एहसास दे रहा है। शायद ही किसी ब्‍लागर के ब्‍लाग पदार्पण की वर्षगांठ पर इत्‍फाकन ब्‍लागर मीट का आयोजन हुआ हो। इस कार्यक्रम से पूर्व इलाहाबाद मे सलाना अवतरित होने वाले अमेरी‍की ब्‍लागर रामचंद्र मिश्र अपने परिणय निमंत्रण देने के लिये आये। यह सब इतना जल्‍दी हुआ कि भाई वीनस केसरी और केएम मिश्र जी को भी अपने याद पल मे शामिल नही कर सका। निश्चित रूप से कार्यक्रम मे उनकी कमी खली। प्राईमरी के मास्‍टर जी से भी बात हुई तो जब मैने प्रतीक पांडेय जी को फोन मिलाया तो वे रिसीव न कर सके और जब उन्‍होंने काल की तो मै रिसीव न कर सका, और उनकी कॉल को रिसीव किया एक और ब्‍लागर मिथलेश जी ने, इत्‍फाको से भी ब्लागर मीट मजेदार रही और चिट्ठकारी के 5 वर्ष के कारनामो मे ये सब घटानये और चिट्ठकारी के इतिहास मे नया अध्‍याय जोड़ गई।
उन सभी पाठकों तथा ब्‍लागर मित्रों के सहयोग के लिये भी धन्‍यवाद जिनके सहयोग और मार्गदर्शन के कारण पॉच सालो के चिट्ठाकारी कि दुनिया में आज तक बना हुआ हूँ।


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ब्‍लावाणी को लेकर ''हम''



ब्‍लागवाणी का एका एक बंद होना हर किसी ब्‍लागर के लिये बहुत बड़ा झटका था, खासकर उन लोगो के लिये जो टिप्‍पणी के लिये लेखन करते थे/है। आज भले ही इंडली/चिट्ठा जगत/ अलावाणी और फलावाणी का नाम लिया जाये किन्‍तु ब्‍लागमानस मे जो स्‍थान ब्‍लागवाणी ने स्‍थापित किया है अगर कोई चिट्ठका संकलक इस मुकाम पर पहुँचता है तो यह निश्चित रूप से हिन्दी चिट्ठकारी को इससे लाभ पहुँचेगा।
 
मुझे यह कहने मे हिचक नही है कि ब्‍लागवाणी इस स्थिति मे कि इसकी निन्‍दा करने वाले भी आज इसे याद कर रहे है।आज जो कुछ भी है ब्‍लागवाणी कम से कम सभी ब्‍लागरों को याद आ रही है, आपनी गुणवत्ता के कारण, मै नही कहता कि चिट्ठाजगत अच्‍छा काम नही कर रहा है। चिट्ठाजगत की अपनी पहचान अधिकतम चिट्ठो के संकलन के कारण है।
मैने किसी पोस्‍ट मे कहा था कि न तो चिट्ठाकारी किसी एक व्‍यक्ति से है और न ही किसी एग्रीगेटर के कारण, चिट्ठकारी का अस्तित्‍व प्रत्‍येक चिट्ठकाकर के हर छोटी बड़ी पोस्‍ट के कारण है। आज ब्‍लागवाणी काम नही कर रही है इसका मतलब यह नही है कि चिट्ठाकारी का अंत हो गया अपितु यह कहना उचित होगा कि जिस प्रकार परिवार के अभिन्‍न सदस्‍य के चले जाने से एक शून्‍य स्‍थापित होता है, उ‍सी प्रकार चिट्ठकार परिवार से ब्‍लागवाणी की अनुपस्थिति उस शून्‍य का आभास करा रही है।
 
एक बात मै कड़े शब्‍दो में कहना चाहूँगा कि अक्‍सर छोटी मोटी बातो को लेकर लोग अपनी शक्ति प्रदर्शन आपने ब्‍लागो पर करते थे कि ब्‍लागवाणी ऐसी कि ब्‍लागवाणी वैसी, ब्‍लागवाणी ने ये ठीक नही किया कि ब्‍लागवाणी ने वो ठीक नही किया। आखिर इसका मतलब क्‍या है ? आखिर ब्‍लागवाणी ने शुरू मे ही अपनी नीतियों पर काम करने का फैसला लिया था, और मै इसका शुरूवाती से हिमायती रहा हूँ। आज भी अपेक्षा करता हूँ कि ब्‍लागवाणी अपनी नीतियों पर काम करें, किसी की चिल्‍ल-पो सुनने की जरूरत नही है। मै अपने लिये भी कह चुका हूँ कि अगर ब्‍लागवाणी की नीतियों पर मेरा ब्‍लाग भी न हो तो उसे हटा दिया जाये मुझे कोई अपत्ति नही होगी क्‍योकि हमने ब्‍लागवाणी और उनके संचालको को दिया ही क्‍या है जो अपेक्षा करते है कि हम कुछ पाने की अपेक्षा करें। कुछ बाते बोलनी बहुत आसान होती है किन्‍तु करना उतना ही कठिन, मैने इसका अनुभव किया है। आज हम ब्‍लागवाणी से कुछ आशा करते है तो वह अनायास ही नही है।
 
श्री मैथली जी, श्री अरूण जी हो, या सिरिल भाई या स्‍वयं मै हमारे लिये ब्‍लाग हो या ब्‍लागवाणी वह अपनो से बढ़कर नही है, मुझे यह कहने मे हिचक नही है कि हम सब के लिये ब्‍लाग साधन है साध्‍य नही है। अरूण जी ने भी ब्‍लाग त्‍याग मे पीछे नही रहे, मैने भी पोस्‍टिंग कम कर दिया किन्‍तु अभी मोह छोड़ नही पा रहा हूँ, मैथली परिवार भी ब्‍लागवाणी से मची नूराकुश्‍ती से अजी़ज आ कर ब्‍लागवाणी को बंद कर दिया। क्‍योकि हमारे व्‍यक्तिगत ब्‍लाग हमसे है न कि हम अपने ब्‍लागो से, यही सत्‍य है। मुझे इस बात की खुशी है कि जो लोग ब्‍लागवाणी को लेकर मूड़ पीटते थे ब्लागवाणी के निलम्‍बित होने से अब उलूल जूलल हरकते और बयानबाजी कर रहे है। आखिर मे ऐसे लोगो को पता चल गया कि ब्‍लागवाणी का महत्‍व उनकी चिट्ठाकारी के लिये क्‍या था, आखिर कुछ लोगो के ब्‍लागो की दुकान सिर्फ और सिर्फ ब्‍लागवाणी के बल पर ही चलती थी, ऐसे लोगो को ब्‍लागवाणी के जाने से जरूर अघात पहुँचा होगा। ब्‍लागवाणी के बंद होने से मेरे ब्‍लाग के पोस्टिंग वाले दिनों मे पाठको पर प्रभाव जरूर पड़ा है किन्‍तु यह वह प्रभाव नही है आज भी नियमित पाठको की आवाजाही होती है। मै आशा करता हूँ कि ब्‍लागवाणी पुन: हम ब्‍लागरों के बीच होगी, ऐसे लोगो की ब्‍लाग दुकान नही बंद होने देगी जो सिर्फ ब्‍लागवाणी के दम पर ही अपनी दुकान चलते थे।


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सूर्य नमस्कार का महत्त्व, विधि और मंत्र Workout with Surya Namaskar



आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने।
जन्मान्तरसहस्रेषु दारिद्र्यं नोपजायते ।।  
अर्थ : जो लोग सूर्यको प्रतिदिन नमस्कार करते हैं, उन्हें सहस्रों जन्म दरिद्रता प्राप्त नहीं होती।
सूर्य-नमस्कार को सर्वांग व्‍यायाम भी कहा जाता है, समस्त यौगिक क्रियाऒं की भाँति सूर्य-नमस्कार के लिये भी प्रातः काल सूर्योदय का समय सर्वोत्तम माना गया है। सूर्यनमस्कार सदैव खुली हवादार जगह पर कम्बल का आसन बिछा खाली पेट अभ्यास करना चाहिये।इससे मन शान्त और प्रसन्न हो तो ही योग का सम्पूर्ण प्रभाव मिलता है।

सूर्य नमस्कार पद्धति में आवश्यक नियम एवं सावधानियाँ
सूर्य नमस्कार पद्धति में स्थान, काल, परिधान, आयु संबंधी आवश्यक नियमों का वर्णन किया जा रहा है।
  • अष्टांग योग में वर्णित 5 प्रकार के यम ( अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह ) का पालन करना चाहिए।
  • 5 प्रकार के नियमों ( शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान ) का पालन करना चाहिए।
  • प्रातः शौच के पश्चात् स्नानोपरान्त सूर्य नमस्कार करना चाहिये।
  • सूर्य नमस्कार के समय ढी़ले कपड़े पहनने चाहिए।
  • चाय, कॅाफी, तम्बाकू, शराबादि, मादक द्रव्य एवं माँसाहार तथ तामसिक आहार सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार खाली पेट करना चाहिए।
  • खुले स्थान पर शुद्ध सात्त्विक, निर्मल स्थान पर, प्राकृतिक वातावरण में (शुद्ध जलवायु) सूर्य नमस्कार करना चाहिए।
  • ज्वर, तीव्र रोग या ऑपरेशन के बाद 4-5 दिन तक सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार सदैव सूर्य की ओर मुँह करके करना चाहिए।
  • जहां तक संभव हो सूर्य नमस्कार प्रातःकाल 6-7 बजे के बीच करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार विद्युत का कुचालक चटाई, कम्बल या दरी पर करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार प्रतिदिन नियमपूर्वक मंत्रोच्चारण सहित करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार के समय मन चंचल नहीं हो, उसे एकाग्र करना चाहिए।
  • अधिक उच्च रक्तचाप, हृदयरोगी तथा ज्वर की अवस्था में सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार के समय शरीर पर पुरूष लंगोट, जांघिया अथवा ढ़ीले वस्त्र पहनकर करना चाहिए।
  • 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सूर्य नमस्कार नहीं करें।
  • भोजन सात्त्विक, हल्का-सुपाच्य करना चाहिए।
  • अव्यवस्थित दिनचर्या, मिथ्या आहार-विहार का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार खाली पेट प्रातः एवं सायं करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार में श्वास हमेशा नासिका से ही लेना चाहिए।
  • प्रदूषण स्थान पर सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।
  • सूर्य नमस्कार निश्चित समय पर, नियमित रूप से, भूखे पेट ही करना चाहिए।
  • स्त्रियों में मासिक धर्म में 6 दिन तक, 4 माह का गर्भ होने पर व्यायाम बंद करें एवं प्रसव के 4 माह बद पुनः शुरू कर सकते हैं।

सूर्य नमस्कार मंत्र (Surya Namaskar Mantra) का अर्थ एवं भाव
सूर्य नमस्‍कार तेरह बार करना चाहिये और प्रत्‍येक बार सूर्य मंत्रो के उच्‍चारण से विशेष लाभ होता है, वे सूर्य मंत्र निम्‍न है-
1. ॐ मित्राय नमः, 2. ॐ रवये नमः, 3. ॐ सूर्याय नमः, 4.ॐ भानवे नमः, 5.ॐ खगाय नमः, 6. ॐ पूष्णे नमः,7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः, 8. ॐ मरीचये नमः, 9. ॐ आदित्याय नमः, 10.ॐ सवित्रे नमः, 11. ॐ अर्काय नमः, 12. ॐ भास्कराय नमः, 13. ॐ सवितृ सूर्यनारायणाय नमः
  1. ॐ मित्राय नमः ( सबके मित्र को प्रणाम ) 
    नमस्कारासन ( प्रणामासन) स्थिति में समस्त जीवन के स्त्रोत को नमन किया जाता है। सूर्य समस्त ब्रह्माण्ड का मित्र है, क्योंकि इससे पृथ्वी समत सभी ग्रहों के अस्तित्त्व के लिए आवश्यक असीम प्रकाश, ताप तथा ऊर्जा प्राप्त होती है। पौराणिक ग्रन्थों में मित्र कर्मों के प्रेरक, धरा-आकाश के पोषक तथा निष्पक्ष व्यक्ति के रूप में चित्रित किया है। प्रातःकालीन सूर्य भी दिवस के कार्यकलापों को प्रारम्भ करने का आह्वान करता है तथा सभी जीव-जन्तुओं को अपना प्रकाश प्रदान करता है।
  2. 2. ॐ रवये नमः ( प्रकाशवान को प्रणाम ) 
    “रवये“ का तात्पर्य है जो स्वयं प्रकाशवान है तथा सम्पूर्ण जीवधारियों को दिव्य आशीष प्रदान करता है। तृतीय स्थिति हस्तउत्तानासन में इन्हीें दिव्य आशीषों को ग्रहण करने के उद्देश्य से शरीर को प्रकाश के स्त्रोत की ओर ताना जाता है। 
  3. ॐ सूर्याय नमः ( क्रियाओं के प्रेरक को प्रणाम ) 
    यहाँ सूर्य को ईश्वर के रूप में अत्यन्त सक्रिय माना गया है। प्राचीन वैदिक ग्रंथों में सात घोड़ों के जुते रथ पर सवार होकर सूर्य के आकाश गमन की कल्पना की गई है। ये सात घोड़े परम चेतना से निकलने वाल सप्त किरणों के प्रतीक है। जिनका प्रकटीकरण चेतना के सात स्तरों में होता है - भू (भौतिक), - भुवः (मध्यवर्ती, सूक्ष्म ( नक्षत्रीय), स्वः ( सूक्ष्म, आकाशीय), मः ( देव आवास), जनः (उन दिव्य आत्माओं का आवास जो अहं से मुक्त है), तपः (आत्मज्ञान, प्राप्त सिद्धों का आवास) और सप्तम् (परम सत्य)। सूर्य स्वयं सर्वोच्च चेतना का प्रतीक है तथा चेतना के सभी सात स्वरों को नियंत्रित करता है। देवताओं में सूर्य का स्थान महत्वपूर्ण है। वेदों में वर्णित सूर्य देवता का आवास आकाश में है उसका प्रतिनिधित्त्व करने वाली अग्नि का आवास भूमि पर है।
  4. ॐ भानवे नमः ( प्रदीप्त होने वाले को प्रणाम )
    सूर्य भौतिक स्तर पर गुरू का प्रतीक है। इसका सूक्ष्म तात्पर्य है कि गुरू हमारी भ्रांतियों के अंधकार को दूर करता है - उसी प्रकार जैसे प्रातः वेला में रात्रि का अंधकार दूर हो जाता है। अश्व संचालनासन की स्थिति में हम उस प्रकाश की ओर मुँह करके अपने अज्ञान रूपी अंधकार की समाप्ति हेतु प्रार्थना करते हैं।
  5. ॐ खगाय नमः ( आकाशगामी को प्रणाम ) 
    समय का ज्ञान प्राप्त करने हेतु प्राचीन काल से सूर्य यंत्रों (डायलों ) के प्रयोग से लेकर वर्तमान कालीन जटिल यंत्रों के प्रयोग तक के लंबे काल में समय का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आकाश में सूर्य की गति को ही आधार माना गया है। हम इस शक्ति के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं जो समय का ज्ञान प्रदान करती है तथा उससे जीवन को उन्नत बनाने की प्रार्थना करते हैं।
  6. ॐ पूष्णे नमः ( पोषक को प्रणाम ) 
    सूर्य सभी शक्तियों का स्त्रोत है। एक पिता की भाँति वह हमें शक्ति, प्रकाश तथा जीवन देकर हमारा पोषण करता है। साष्टांग नमस्कार की स्थिति में हमे शरीर के सभी आठ केन्द्रों को भूमि से स्पर्श करते हुए उस पालनहार को अष्टांग प्रणाम करते हैं। तत्त्वतः हम उसे अपने सम्पूर्ण अस्तित्व को समर्पित करते है तथा आशा करते हैं कि वह हमें शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करें।
  7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः ( स्वर्णिम् विश्वात्मा को प्रणाम ) 
    हिरण्यगर्भ, स्वर्ण के अण्डे के समान सूर्य की तरह देदीप्यमान, ऐसी संरचना है जिससे सृष्टिकर्ता ब्रह्म की उत्पत्ति हुई है। हिरण्यगर्भ प्रत्येक कार्य का परम कारण है। सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड, प्रकटीकरण के पूर्व अन्तर्निहित अवस्था में हिरण्यगर्भ के अन्दर निहित रहता है। इसी प्रकार समस्त जीवन सूर्य (जो महत् विश्व सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करता है ) में अन्तर्निहित है। भुजंगासन में हम सूर्य के प्रति सम्मान प्रकट करते है तथा यह प्रार्थना करते है कि हममें रचनात्मकता का उदय हो। 
  8. ॐ मरीचये नमः ( सूर्य रश्मियों को प्रणाम ) 
    मरीच ब्रह्मपुत्रों में से एक है। परन्तु इसका अर्थ मृग मरीचिका भी होता है। हम जीवन भर सत्य की खोज में उसी प्रकार भटकते रहते हैं जिस प्रकार एक प्यासा व्यक्ति मरूस्थल में ( सूर्य रश्मियों से निर्मित ) मरीचिकाओं के जाल में फँसकर जल के लिए मूर्ख की भाँति इधर-उधर दौड़ता रहता है। पर्वतासन की स्थिति में हम सच्चे ज्ञान तथा विवके को प्राप्त करने के लिए नतमस्तक होकर प्रार्थना करते हैं जिससे हम सत् अथवा असत् के अन्तर को समझ सकें।
  9. ॐ आदित्याय नमः ( अदिति-सुत को प्रणाम) 
    विश्व जननी ( महाशक्ति ) के अनन्त नामों में एक नाम अदिति भी है। वहीं समस्त देवों की जननी, अनन्त तथा सीमारहित है। वह आदि रचनात्मक शक्ति है जिससे सभी शक्तियाँ निःसृत हुई हैं। अश्व संचलानासन में हम उस अनन्त विश्व-जननी को प्रणाम करते हैं। 
  10. ॐ सवित्रे नमः ( सूर्य की उद्दीपन शक्ति को प्रणाम ) 
    सवित्र उद्दीपक अथवा जागृत करने वाला देव है। इसका संबंध सूर्य देव से स्थापित किया जाता है। सवित्री उगते सूर्य का प्रतिनिधि है जो मनुष्य को जागृत करता है और क्रियाशील बनाता है। “सूर्य“ पूर्ण रूप से उदित सूरज का प्रतिनिधित्त्व करता है। जिसके प्रकाश में सारे कार्यकलाप होते है। सूर्य नमस्कार की हस्तपादासन स्थिति में सूर्य की जीवनदायनी शक्ति की प्राप्ति हेतु सवित्र को प्रणाम किया जाता है।
  11. ॐ अर्काय नमः ( प्रशंसनीय को प्रणाम ) 
    अर्क का तात्पर्य है - उर्जा । सूर्य विश्व की शक्तियों का प्रमुख स्त्रोत है। हस्तउत्तानासन में हम जीवन तथा उर्जा के इस स्त्रोत के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते है।
  12. ॐ भास्कराय नमः ( आत्मज्ञान-प्रेरक को प्रणाम ) 
    सूर्य नमस्कार की अंतिम स्थिति प्रणामासन (नमस्कारासन) में अनुभवातीत तथा आघ्यात्मिक सत्यों के महान प्रकाशक के रूप में सूर्य को अपनी श्रद्वा समर्पित की जाती है। सूर्य हमारे चरम लक्ष्य-जीवनमुक्ति के मार्ग को प्रकाशित करता है। प्रणामासन में हम यह प्रार्थना करते हैं कि वह हमें यह मार्ग दिखायें। इस प्रकार सूर्य नमस्कार पद्धति में बारह मंत्रों का अर्थ सहित भावों का समावेश किया जा रहा है।
सूर्य नमस्कार कैसे करे (How to do Surya Namaskar)
सूर्य नमस्कार को उनके विभिन्न स्थितियों के माध्यम से समझ और जान सकते है

प्रथम स्थिति- स्थितप्रार्थनासन
सूर्य-नमस्कार की प्रथम स्थिति स्थितप्रार्थनासन की है।सावधान की मुद्रा में खडे हो जायें।अब दोनों हथेलियों को परस्पर जोडकर प्रणाम की मुद्रा में हृदय पर रख लें।दोनों हाथों की अँगुलियाँ परस्पर सटी हों और अँगूठा छाती से चिपका हुआ हो। इस स्थिति में आपकी केहुनियाँ सामने की ऒर बाहर निकल आएँगी।अब आँखें बन्द कर दोनों हथेलियों का पारस्परिक दबाव बढाएँ । श्वास-प्रक्रिया निर्बाध चलने दें।
द्वितीय स्थिति - हस्तोत्तानासन या अर्द्धचन्द्रासन
प्रथम स्थिति में जुडी हुई हथेलियों को खोलते हुए ऊपर की ऒर तानें तथा साँस भरते हुए कमर को पीछे की ऒर मोडें।गर्दन तथा रीढ की हड्डियों पर पडने वाले तनाव को महसूस करें।अपनी क्षमता के अनुसार ही पीछे झुकें और यथासाध्य ही कुम्भक करते हुए झुके रहें।
तृतीय स्थिति - हस्तपादासन या पादहस्तास
दूसरी स्थिति से सीधे होते हुए रेचक (निःश्वास) करें तथा उसी प्रवाह में सामने की ऒर झुकते चले जाएँ । दोनों हथेलियों को दोनों पँजों के पास जमीन पर जमा दें। घुटने सीधे रखें तथा मस्तक को घुटनों से चिपका दें यथाशक्ति बाह्य-कुम्भक करें। नव प्रशिक्षु धीरे-धीरे इस अभ्यास को करें और प्रारम्भ में केवल हथेलियों को जमीन से स्पर्श कराने की ही कोशिश करें।
चतुर्थ स्थिति- एकपादप्रसारणासन
तीसरी स्थिति से भूमि पर दोनों हथेलियाँ जमाये हुए अपना दायाँ पाँव पीछे की ऒर फेंके।इसप्रयास में आपका बायाँ पाँव आपकी छाती केनीचे घुटनों से मुड जाएगा,जिसे अपनी छाती से दबाते हुए गर्दनपीछे की ऒर मोडकर ऊपर आसमान कीऒर देखें।दायाँ घुटना जमीन पर सटा हुआ तथा पँजा अँगुलियों पर खडा होगा। ध्यान रखें, हथेलियाँ जमीन से उठने न पायें।श्वास-प्रक्रिया सामान्य रूप से चलती रहे।
पंचम स्थिति- भूधरासन या दण्डासन
एकपादप्रसारणासन की दशा से अपने बाएँ पैर को भी पीछे ले जाएँ और दाएँ पैर के साथ मिला लें ।हाथों को कन्धोंतक सीधा रखें । इस स्थिति में आपका शरीर भूमि पर त्रिभुज बनाता है , जिसमें आपके हाथ लम्बवत् और शरीर कर्णवत् होते हैं।पूरा भार हथेलियों और पँजों पर होता है। श्वास-प्रक्रिया सामान्य रहनी चाहिये अथवा केहुनियों को मोडकर पूरे शरीर को भूमि पर समानान्तर रखना चाहिये। यह दण्डासन है।
षष्ठ स्थिति - साष्टाङ्ग प्रणिपात
पंचम अवस्था यानि भूधरासन से साँस छोडते हुए अपने शरीर को शनैःशनैः नीचे झुकायें। केहुनियाँ मुडकर बगलों में चिपक जानी चाहिये। दोनों पँजे, घुटने, छाती, हथेलियाँ तथा ठोढी जमीन पर एवं कमर तथा नितम्ब उपर उठा होना चाहिये । इस समय 'ॐ पूष्णे नमः ' इस मन्त्र का जप करना चाहिये । कुछ योगी मस्तक को भी भूमि पर टिका देने को कहते हैं।
सप्तम स्थिति - सर्पासन या भुजङ्गासन
छठी स्थिति में थॊडा सा परिवर्तन करते हुए नाभि से नीचे के भाग को भूमि पर लिटा कर तान दें। अब हाथों को सीधा करते हुए नाभि से उपरी हिस्से को ऊपर उठाएँ। श्वास भरते हुए सामने देखें या गरदन पीछे मोडकर ऊपर आसमान की ऒर देखने की चेष्टा करें । ध्यान रखें, आपके हाथ पूरी तरह सीधे हों या यदि केहुनी से मुडे हों तो केहुनियाँ आपकी बगलों से चिपकी हों।
अष्टम स्थिति- पर्वतासन
सप्तम स्थिति से अपनी कमर और पीठ को ऊपर उठाएँ, दोनों पँजों और हथेलियों पर पूरा वजन डालकर नितम्बों को पर्वतशृङ्ग की भाँति ऊपर उठा दें तथा गरदन को नीचे झुकाते हुए अपनी नाभि को देखें।
नवम स्थिति - एकपादप्रसारणासन (चतुर्थ स्थिति)
आठवीं स्थिति से निकलते हुए अपना दायाँ पैर दोनों हाथों के बीच दाहिनी हथेली के पास लाकर जमा दें। कमर को नीचे दबाते हुए गरदन पीछे की ऒर मोडकर आसमान की ऒर देखें ।बायाँ घुटना जमीन पर टिका होगा।
दशम स्थिति – हस्तपादासन
नवम स्थिति के बाद अपने बाएँ पैर को भी आगे दाहिने पैर के पास ले आएँ । हथेलियाँ जमीन पर टिकी रहने दें । साँस बाहर निकालकर अपने मस्तक को घुटनों से सटा दें । ध्यान रखें, घुटने मुडें नहीं, भले ही आपका मस्तक उन्हें स्पर्श न करता हो।
एकादश स्थिति - ( हस्तोत्तानासन या अर्धचन्द्रासन )
दशम स्थिति से श्वास भरते हुए सीधे खडे हों। दोनों हाथों की खुली हथेलियों को सिर के ऊपर ले जाते हुए पीछे की ऒर तान दें ।यथासम्भव कमर को भी पीछे की ऒर मोडें
द्वादश स्थिति -स्थित प्रार्थनासन ( प्रथम स्थिति )
ग्यारहवीं स्थिति से हाथों को आगे लाते हुए सीधे हो जाएँ । दोनों हाथों को नमस्कार की मुद्रा में वक्षःस्थल पर जोड लें । सभी उँगलियाँ परस्पर जुडी हुईं तथा अँगूठा छाती से सटा हुआ । कोहुनियों को बाहर की तरफ निकालते हुए दोनों हथेलियों पर पारस्परिक दबाव दें
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सूर्यनमस्कार के लाभ Benefits of Sun Salutation (Surya Namaskar)


"आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
आयुः प्रज्ञाबलंवीर्यं तेजस्तेषां च जायते।।
अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्।
सूर्यपादोदकं तीर्थं जठरे धारयाम्यहम्।।"

अर्थात् जो प्रतिदिन सूर्य नमस्कार करते हैं उनकी आयु, बुद्धि, बल, वीर्य एवं तेज (ओज) बढ़ता है। अकाल मृत्यु नहीं होती है तथा सभी प्रकार की व्याधियों का नाश होता है। सूर्य नमस्कार एक सम्पूर्ण व्यायाम है।


  • सूर्य नमस्कार शरीर के समस्त अंग-प्रत्यंग बलिष्ट एवं निरोग होते हैं।
  • सूर्य नमस्कार से मेरूदण्ड एवं कमर लचीली बनती है। उदर, आन्त्र, आमाशय, अग्नाशय, हृदय, फुफ्फुससहित सम्पूर्ण शरीर को स्वस्थ बनाता है।
  • हाथ-पैर-भुजा, जंघा-कंधा आदि सभी अंगो की मांसपेशियाँ पुष्ट एवं सुन्दर होती है।
  • मानसिक शांति एवं बल, ओज एवं तेज की वृद्धि करता है।
  • मधुमेह, मोटापा, थायराइड आदि रोगों में विशेष लाभदायक है।
  • आत्म विश्वास में वृद्धि, व्यक्तित्व विकास में सहायक है।
  • चेहरा तेजस्वी, वाणी सुमधुर एवं ओजस्वी होती है।
  • गले के रोग मिटते है एवं स्वर अच्छा रहता है।
  • शरीर एवं मन दोनों स्वस्थ बनते हैं।
  • मोटी कमर को पतली एवं लचीली बनाता है।
  • धातुक्षीणता में लाभदायक है।
  • रज-वीर्य, दोषों को मिटाता है, महिलाओं में मासिक धर्म को नियमित करता है।
  • रक्त परिभ्रमण सम्यक् होता है, जिससे मुँह की कांति एवं शोभा बढ़ती है।
  • शरीर की अनावश्यक मेद (चर्बी) कम होती है।
  • फुफ्फुसों की कार्य क्षमता बढ़ती है।
  • हृदय की मांसपेशियाँ एवं रक्तवाहिनियाँ स्वस्थ होती हैं।
  • रक्त संचार की गति तेज होने से विजातीय तत्त्व शरीर से बाहर निकलते हैं।
  • शरीर के सभी अंगों को पोषण प्राप्त होता है।
  • नलिकाविहीन ग्रंथियों की क्रियाशीलता सामान्य एवं संतुलित रहती है।
  • स्मरण शक्ति तेज होती है।
  • कार्य करने में कुशलता एवं रूचि बढ़ती है।
  • सामाजिक कार्यों में रूचि बढ़ती है, मनोऽवसाद दूर होकर उमंग एवं उत्साह बढ़ता है।
  • सभी महत्त्वपूर्ण अवयवोंमें रक्तसंचार बढता है।
  • सूर्य नमस्का‍र से विटामिन-डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • आँखों की रोशनी बढती है।
  • शरीर में खून का प्रवाह तेज होता है जिससे ब्लड प्रेशर की बीमारी में आराम मिलता है।
  • सूर्य नमस्कार का असर दिमाग पर पडता है और दिमाग ठंडा रहता है।
  • पेटके पासकी वसा (चरबी) घटकर भार मात्रा (वजन) कम होती है जिससे मोटे लोगों के वजन को कम करने में यह बहुत ही मददगार होता है।
  • बालों को सफेद होने झड़ने व रूसी से बचाता है।
  • क्रोध पर काबू रखने में मददगार होता है।
  • कमर लचीली होती है और रीढ की हडडी मजबूत होती है।
  • त्वचा रोग होने की संभावना समाप्त हो जाती है।
  • हृदय व फेफडोंकी कार्यक्षमता बढती है।
  • बाहें व कमरके स्नायु बलवान हो जाते हैं।
  • कशेरुक व कमर लचीली बनती है।
  • पचनक्रियामें सुधार होता है।
  • मनकी एकाग्रता बढती है।
  • यह शरीर के सभी अंगों, मांसपेशियों व नसों को क्रियाशील करता है।
  • इसके अभ्यास से शरीर की लोच शक्ति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है। प्रौढ़ तथा बूढे़ लोग भी इसका नियमित अभ्यास करते हैं तो उनके शरीर की लोच बच्चों जैसी हो जाती है।
  • शरीर की सभी महत्वपूर्ण ग्रंथियों, जैसे पिट्यूटरी, थायरॉइड, पैराथायरॉइड, एड्रिनल, लीवर, पैंक्रियाज, ओवरी आदि ग्रंथियों के स्रव को संतुलित करने में मदद करता है।
  • शरीर के सभी संस्थान, रक्त संचरण, श्वास, पाचन, उत्सर्जन, नाड़ी तथा ग्रंथियों को क्रियाशील एवं सशक्त करता है।
  • पाचन सम्बन्धी समस्याओं, अपच, कब्ज, बदहजमी, गैस, अफारे तथा भूख न लगने जैसी समस्याओं के समाधान में बहुत ही उपयोगी भूमिका निभाता है।
  • वात, पित्त तथा कफ को संतुलित करने में मदद करता है। त्रिदोष निवारण में मदद करता है।
  • इसके अभ्यास से रक्त संचालन तीव्र होता है तथा चयापचय की गति बढ़ जाती है, जिससे शरीर के सभी अंग सशक्त तथा क्रियाशील होते हैं।
  • इसके नियमित अभ्यास से मोटापे को दूर किया जा सकता है और इससे दूर रहा भी जा सकता है।
  • इसका नियमित अभ्यास करने वाले व्यक्ति को हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, निम्न रक्तचाप, मधुमेह, गठिया, कब्ज जैसी समस्याओं के होने की आशंका बेहद कम हो जाती है।
  • मानसिक तनाव, अवसाद, एंग्जायटी आदि के निदान के साथ क्रोध, चिड़चिड़ापन तथा भय का भी निवारण करता है।
  • रीढ़ की सभी वर्टिब्रा को लचीला, स्वस्थ एवं पुष्ट करता है।
  • पैरों एवं भुजाओं की मांसपेशियों को सशक्त करता है। सीने को विकसित करता है।
  • शरीर की अतिरिक्त चर्बी को घटाता है।
  • स्मरणशक्ति तथा आत्मशक्ति में वृद्धि करता है।
अतः सूर्य नमस्कार सम्पूर्ण शरीर का पूर्ण व्यायाम है। इन क्रियाओं को करने के पश्चात् अन्य आसनों को करने की आवश्यकता नहीं रह जाती क्योंकि इन क्रियाओं में सभी आसनों का सार मिला हुआ है। इसलिए शारीरिक एवं मानसिक आरोग्य के लिए सूर्यनमस्कार श्रेयस्कर है।

कैसा हो क्रम
सूर्य नमस्कार गतिशील आसन माना जाता है। इसका अभ्यास आसनों के अभ्यास के पूर्व करना चाहिए। इससे शरीर सक्रिय हो जाता है, नींद, आलस्य व थकावट दूर हो जाती है।

सावधानी भी है जरूरी
क्षमता से अधिक चक्रों का अभ्यास या शरीर पर अनावश्यक जोर डालने का प्रयास बिल्कुल न करें। रोग से ग्रस्त लोग योग्य मार्गदर्शन में प्रयास करें।

एकाग्रता का ध्यान रखें
श्वास-प्रश्वास एवं शरीर के दबाव बिन्दु पर एकाग्रता बनाए रखें।

सीमाएं भी जानें
  • इसका अभ्यास सभी आयु वर्ग के लोग अपनी क्षमता का ध्यान रखते हुए कर सकते हैं। पाद हस्तासन का अभ्यास सायटिका, स्लिप डिस्क तथा स्पॉन्डिलाइटिस के रोगी कदापि न करें।
  • फ्रोजन शोल्डर की समस्या से ग्रस्त लोग पर्वतासन, अष्टांग नमस्कार तथा भुजंगासन का अभ्यास न करें।
  • महिलाएं मासिक धर्म एवं गर्भाधारण के दिनों में इसका अभ्यास न करें।
  • उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोगी इसका अभ्यास योग्य मार्गदर्शन में करें।
  • बच्चों को इसका अभ्यास उचित मार्गदर्शन में कराएं ताकि कोई नुकसान न हो।
  • इसके अभ्यास के लिए सुबह का समय चुनें ताकि खाली पेट कर पाएं और अभ्यास करने के आधे घंटे बाद ही खाएं।


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राजीव शुक्‍ला की नैतिकता



राजीव शुक्‍ला बहुत बड़े पत्रकार है, इतने बड़े ही जो वो कहते है ब्रह्मवाक्‍य की तरह होता है। कल ही हिन्‍दी दैनिक जागरण मे उनका लेख पढ़ा जिस पर उन्‍होने वरिष्‍ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी पर कटु शब्‍दो के तीखे बाण छोड़े थे। राम जेठमलानी दलगत से लेकर अदलगत के सारे पाठ मिस्‍टर मलानी को को पाठ पढ़ा गये। कि राम जेठमालानी की कोई राजनीति नही है कल भाजपा मे थे फिर कांग्रेस मे आये फिर भाजपा के टिकट से राज्‍यसभा मे जा रहे है। राजीव शुक्‍ला दूसरों को राजनीति का पाठ पढ़ाने मे बहुत माहिर है किन्‍तु जब नैतिकता के पालन के बात खुद पर आती है तो वे सारी नैतिकता की रेढ़ मार देते है।
ये वही राजीव शुक्‍ला है जो कभी मूछ वाले हुआ करते थे आज नैतिकता की दुहाई मे मूँछ को भी खा गये। राजीव शुक्‍ला जी अगर अपना इतिहास देखे तो ये उसी भाजपा को गाली देते नज़र आते है, जिसकी मदद से लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी के टिकट वो पहली बार राज्‍यसभा से पहुँचे थे और बाद कांग्रेस मे शामिल हो गये। आखिर जिस चीज के लिये शुक्‍ला जी जेठमलानी पर अरोप लगा रहे है वही करके तो वो भी राज्‍यसभा मे पहुँचे थे। दूसरो को नसी‍हत और नैतिकता का पाठ पढ़ना बहुत अच्‍छा लगता है किन्‍तु अपने पर आने पर सारी नैतिकता घोर का पी जाते है ऐसे लोग।
मैने कहीं पढा था कि आजकल के पत्रकार पत्रकारिता कम और दलाली ज्यादा करते है. राजीव शुक्ल उसकी मिसाल हैं। कानपुर से पत्रकारिता का सफर शुरू हुआ और कुछ ही सालों में करोड़ों का न्यूज चैनल लांच कर देना एक पत्रकार के बूते की बात नहीं। सत्तासीनों से करीबियों की वजह से किसी की गिरेबान में हाथ डालने की हिम्मत भी नहीं। डीएनए और भास्कर की यह खबर वाकई काबिलेतारीफ है, लेकिन शुक्ला जी का कोई बाल भी नहीं टेढ़ा होगा, यह भी मैं कहे देता हूं। बीसीसीआई में हैं तो क्या हुआ सोनिया जी के किचेन कैबिनेट के वे मेंबर भी तो हैं। मै महोदय की बात से बिल्‍कुल सहमत हूं । राजीव शुक्‍ला जैसे लोग नाम और दाम के लिये किसी हद तक जा सकते है और उसी की मिशाल है गांधी परिवार के तलवे चाटते राजीव शुक्‍ला, जो एंडरसन मामले मे राजीव गांधी और कांग्रेस का का बचाव करते आते है।
आखिर मजरा यही है कि लोग नैतिकता को बेच कर राजनीतिक रोटिया खा रहे है। ऐसे लोगो ने दलगत राजनीति मे घुस कर अपनी भद्द तो करवाते है साथ ही साथ अपने पेशे को भी नही छोड़ते है। कम से कम राजनैतिक लाभ के लिये अपने पेशे से विश्वासघात करना ठीक नही है।


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मदद - टेम्‍पलेट के लिये ppp



मुझे अपने फोटो ब्‍लाग Aditi-Mahashakti Ka Photo Blog के लिये बढि़या फोटो टेम्‍पलेट चाहता हूँ, जिसमे फोटो के आकार बड़ा द‍िखे। अगर किसी को ऐसे टेम्‍पलेट के सम्‍बन्‍ध मे जानकारी हो तो देने का कष्‍ट करे। मुझे अभी तक मन का टेम्‍पलेट नही मिल रहा है इसी कारण फोटो की पोस्टिंग नही कर पा रहा हूँ, यदि कोई अच्‍छा टेम्‍पलेट मिलता है तो अच्‍छा रहेगा। धन्‍यवाद


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इलाहाबाद मिलन का अंतिम सच



तुम लोग अभी नही हो लेकिन मै तुम्‍हे बहुत मिस कर रहा हूँ, तुम सब बहुत याद आ रहे हो, किसी के लिये अतिश्‍योक्ति होगी कि कि वाणी कट्टरता वाला व्‍यक्ति इतना भावुक हो सकता है, पिछले 36 घंटे मे मै जितनी देर तुम लोगो के साथ रहा और अभी कुछ मिनट पूर्व नीशू और मिथलेश के जाने पर वो 36 घंटो का साथ अब अखर रहा है, वो उन 36 घन्‍टे का परिणाम है कि दोस्‍त तुम्‍हारे लिये ऑखे नम है, तुम सब जा रहे थे पर दिल कहता था कि कह दूँ एक दिन और रूक जाओ, मुझे पता है कि तुम लोग बस अड़्डे पर होगे ..... व्‍यक्ति को इतना लगाववादी नही होना चाहिये।


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जूनियर ब्‍लॉगर एसोसिएशन की बैठक के पहले और बाद के आनंद‍ित क्षण



आखिर मे वो बहुत प्रतिक्षित समय आ गया जब जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन के द्वारा नामी जूनियर चिट्ठाकारों का मिलन कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। कार्यक्रम का अपना रोमांच और उत्‍साह था, इसी उत्साह के बल पर हमीरपुर से संतोष कुमार और उनके अग्रज प्रेम कुमार जी दिनॉक 15-06 की सुबह 8 बजे इलाहाबाद मे मेरे आवास पर पहुँचे।
जूनियर ब्‍लॉगर एसोसिएशन की ब्‍लागरीय उड़ान
भ्राता द्वय को जल-पान ग्रहण करने के पश्‍चात उनसे कई विषयों पर महत्‍पूर्ण चर्चा थी। उन्‍होने भी अपनी चिट्ठकारी की कई खट्टे-पलो को बांटे। काफी देर बाद घर से सूचना आयी कि कुछ खाने के लिये मंडी से सब्जियाँ ले आओ तो सभी लोग टहलते घूमते मंडी की ओर निकल गये। अचानक पंसारी की दुकान पर पहुँचा तो मेरे मुँह यह श ब्‍द निकल आया कि फला चीज का क्‍या हाल चाल है ? :) इस पर सभी उपस्थित लोग हँस पड़े। कि भाव की जगह हाल चाल क्‍यो पूछ रहा है क्‍योकि मै उस टाईम फोन पर था और .......... :)
जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन की निर्माणाधीन इमारत का विभागीय निरीक्षण

करीब दोपहर 12 बजे नीशू तिवारी और मिथलेश दूबे भी हमारे द्वार पर दस्‍तक देकर फोन कर रहे थे। उन्‍होने बताया कि सलीम खान अपना रिजर्वेशन करवाने के बाद भी कार्यक्रम नही पहुँच पा रहे है और लखनऊ रेलवे स्‍टेशन पर पहुँच कर मिथलेश दूबे का लखनऊ से इलाहाबाद के लिये करवाया रिर्जवेशन टिकट मिथलेश को सौपा, इस कार्यक्रम मे सलीम खान जी उपस्थिति से मै भी उत्‍साहित था। ईश्‍वर की अनुकम्‍पा होगी तो उनसे शीघ्र ही मिलने का कोई कार्यक्रम अवश्‍य बनेगा। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर हम लोगो विभिन्‍न कार्यो मे एक दूसरे का परस्‍पर सहयोग किया, मुझे सहयोग की भावना इस प्रकार थी कि कभी लगा ही नही कि ये अतिथि है और ब्‍लागर मिलन के लिये पधारे है। निश्‍चित रूप दोनो का सहयोग पाकर बहुत अच्‍छा लगा।
कहा ''अदिति'' ने ''अतिथि'' तुम फिर कब आओगे

जिन लोगो की कार्यक्रम मे सहभागिता हो सकती थी, दूरभाष के द्वारा सम्‍पर्क किया गया और उनकी स्थिति को जाना गया है। कार्यक्रम मे वीनस केसरी जी समय से पूर्व उपस्थित होकर हमारे मध्‍य उत्‍साह को दोगुना करने का काम किया, यह हमारे लिये हर्ष का विषय है कि जो भी आया समय की महत्‍व देते हुये आया। घर में ही दो चिट्ठाकार होने के बाद भी कामो की वजह से वो भाग नही ले सकें किन्‍तु उसका मुझे लाभ मिला और मै पूर्ण समय कार्यक्रम मे बना रहा।
ऐतिहासिक आकाशीय क्षण

कार्यक्रम 2 बजे प्रारम्‍भ होना था कि यात्रा के कारण थकावट सवार थी मिथलेश जी और नीशू जी मे, इस कारण भोजन प्रारम्‍भ करने मे विलम्‍ब हुआ, हमारे द्वारा लघु सहभोज आयोजित किया गया, जिसका सभी लोगो गर्म जोशी और आनंद के साथ भोजन ग्रहण किया, भोजन के पश्‍चात ठीक 3 बजे हमारा कार्यक्रम प्रारम्‍भ हुआ और यह करीब 5.30 बजे इसके बाद, शहर के विभिन्‍न इलाकों का भ्रमण का लुफ्त उठाया गया।
रात्रि दो बजे विशेष रणनीति होने के बाद निश्चिंत मुद्रा मे
हमारे द्वारा कार्यक्रम का पूर्ण आनंद लिया गया, 24 घंटे इन्‍टरनेट सेवा होने के बाद भी हम लोगो ने कार्यक्रम को इंज्‍वाय करना ज्यादा महत्‍वपूर्ण समझा इसीलिये कार्यक्रम के बाद किसी पोस्‍ट को छापने और इन्‍टरनेट पर समय व्‍यर्थ के बजाय एक दूसरे के समझने का बेहतर प्रयास किया। कार्यक्रम आधारित पोस्‍टें शीघ्र ही प्रस्‍तुत होगी, जिसकी सार्थकता को आप स्‍वयं सिद्ध करेगे।
 
शीघ्र ही फिर मिलना होगा,

जय श्रीराम- भारत माता की जय


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अनमोल वचन



  1. त्योहार साल की गति के पड़ाव हैं, जहाँ भिन्न-भिन्न मनोरंजन हैं, भिन्न-भिन्न आनंद हैं, भिन्न-भिन्न क्रीडास्थल हैं - बरुआ
  2. दुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी कम प्यारे नहीं होते- प्रेमचंद
  3. अधिक हर्ष और अधिक उन्नति के बाद ही अधिक दुख और पतन की बारी आती है।-जयशंकर प्रसाद
  4. अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींच कर महाप्राण शक्तियाँ बनाते हैं।- महर्षि अरविंद
  5. जंज़ीरें, जंज़ीरें ही हैं, चाहे वे लोहे की हों या सोने की, वे समान रूप से तुम्हें गुलाम बनाती हैं।- स्वामी रामतीर्थ
  6. जैसे अंधे के लिए जगत अंधकारमय है और आँखों वाले के लिए प्रकाशमय है वैसे ही अज्ञानी के लिए जगत दुखदायक है और ज्ञानी के लिए आनंदमय।- संपूर्णानंद
  7. नम्रता और मीठे वचन ही मनुष्य के आभूषण होते हैं। शेष सब नाममात्र के भूषण हैं।- संत तिरुवल्लुर
  8. वही उन्नति करता है जो स्वयं अपने को उपदेश देता है।- स्वामी रामतीर्थ
  9. अपने विषय में कुछ कहना प्राय: बहुत कठिन हो जाता है क्योंकि अपने दोष देखना आपको अप्रिय लगता है और उनको अनदेखा करना औरों को।- महादेवी वर्मा
  10. करुणा में शीतल अग्नि होती है जो क्रूर से क्रूर व्यक्ति का हृदय भी आर्द्र कर देती है।- सुदर्शन
  11. हताश न होना ही सफलता का मूल है और यही परम सुख है।- वाल्मीकि
  12. मित्रों का उपहास करना उनके पावन प्रेम को खंडित करना है।- राम प्रताप त्रिपाठी
  13. नेकी से विमुख हो जाना और बदी करना नि:संदेह बुरा है, मगर सामने हँस कर बोलना और पीछे चुगलखोरी करना उससे भी बुरा है।- संत तिरुवल्लुवर
  14. कवि और चित्रकार में भेद है। कवि अपने स्वर में और चित्रकार अपनी रेखा में जीवन के तत्व और सौंदर्य का रंग भरता है।- डॉ. रामकुमार वर्मा
  15. तलवार ही सब कुछ है, उसके बिना न मनुष्य अपनी रक्षा कर सकता है और न निर्बल की।- गुरु गोविंद सिंह
  16. मनुष्य क्रोध को प्रेम से, पाप को सदाचार से लोभ को दान से और झूठ को सत्य से जीत सकता है।- गौतम बुद्ध
  17. स्वतंत्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है!- लोकमान्य तिलक
  18. सच्चे साहित्य का निर्माण एकांत चिंतन और एकांत साधना में होता है।- अनंत गोपाल शेवडे
  19. कुटिल लोगों के प्रति सरल व्यवहार अच्छी नीति नहीं।- श्री हर्ष
  20. अनुभव, ज्ञान उन्मेष और वयस् मनुष्य के विचारों को बदलते हैं।- हरिऔध
  21. जो अपने ऊपर विजय प्राप्त करता है वही सबसे बड़ा विजयी हैं।- गौतम बुद्ध
  22. अधिक अनुभव, अधिक सहनशीलता और अधिक अध्ययन यही विद्वत्ता के तीन महास्तंभ हैं।- अज्ञात
  23. जो दीपक को अपने पीछे रखते हैं वे अपने मार्ग में अपनी ही छाया डालते हैं।- रवींद्र
  24. जहाँ प्रकाश रहता है वहाँ अंधकार कभी नहीं रह सकता।- माघ्र
  25. मनुष्य का जीवन एक महानदी की भाँति है जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओं में राह बना लेती है।- रवींद्रनाथ ठाकुर
  26. प्रत्येक बालक यह संदेश लेकर आता है कि ईश्वर अभी मनुष्यों से निराश नहीं हुआ है।- रवींद्रनाथ ठाकुर
  27. कविता का बाना पहन कर सत्य और भी चमक उठता है।- अज्ञात
  28. हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में प्रेरित करता है और उत्साह ही कर्म को सफल बनता है।- वाल्मीकि
  29. अनुराग, यौवन, रूप या धन से उत्पन्न नहीं होता। अनुराग, अनुराग से उत्पन्न होता है।- प्रेमचंद
  30. जैसे जल द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है वैसे ही ज्ञान के द्वारा मन को शांत रखना चाहिए।- वेदव्यास

अन्य अनमोल वचन


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ब्‍लागिंग वाले गुंड़ो मै "महाशक्ति" चुनौती स्‍वीकार करता हूँ



कानपुर से लौटा जाने से पूर्व एक पोस्‍ट की थी, लौट कर देखा नेट खराब था नेट ठीक हुआ तो देखा कि उस पोस्‍ट पर तो किसी दादा जी द्वारा बहुत अभद्र शब्‍दो प्रयोग था जिसे हटाया जाना ही ठीक था। इस प्रकार के शब्‍दो का प्रयोग कतई उचित नही है। अत: उसे आते ही हटाना उचित समझा। क्‍योकि यह सर्वथा उचित नही है।
कुछ लोग चिट्टाकारी की मार्यादाओ की सीमा को लांग रहे है, जब ऐसा करने वाले लोग 40-45 साल उम्र की सीमा पार करने वाले लोग करते है बहुत झोभ होता है। हाल मैने दो सज्‍जनों के ब्‍लाग पर अपने नाम को देखा है, अकारण प्रत्‍यक्ष नामोल्‍लेख करके लिखना बहुत खेद जनक है। मै खुद इस बात से हत प्रभ हूँ कि अपने आपको खुद वरिष्‍ठ कहने वाले लोग मर्यादा भंग करते है। कहावत है कि नंगो से खुद भी डरता है मै तो इंसान हूँ यही सोच कर अभी तक इग्‍नोर कर रहा था किन्‍तु अब सिर से पानी ऊपर हो गया है बात खुदा से श्रीकृष्‍ण तक जा पहुँची है, ऐसे नंगो की #@*^%& ढ़कने की पूरी तैयारी जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन खुद करेगा।
जहाँ तक मुझे याद है कि मेरे द्वारा किसी के नाम का उल्‍लेख करते हुये कोई भूत मे लेख लिखा किन्‍तु जिस प्रकार उनके द्वारा प्रत्‍यक्ष रूप से मेरे नाम का उल्‍लेख किया, वह मर्यादा विरूद्ध है, किसी पाठक ने कुछ समय पूर्व टिप्‍प्‍णी मे सही कहा था कि जब बुर्जुग मार्यादा को खूँटी पर टॉंग दें तो इससे बुरा और क्‍या हो सकता है?
मुझे हंसी आती है उन महान पाठको और टिप्‍पणीकारो पर जिनको आदर्श मानता हूँ वे ऐसे भद्दे, फूहड़ तथा व्‍यक्तिगत अक्षेपो से व्‍यंगो को बिना पढ़ कर लोग सर्वोत्‍तम व्‍यंग का दर्जा देने वाले ब्‍लागर समूह को चाहिये कि नाम पर टिप्‍पणी करने के बजाय उनके काम और लेखन पर टिप्‍पणी करें तो अपने आप नीर-क्षीर अलग हो जायेगा। किन्‍तु ब्‍लागरों की आदत ही है बिना पढ़े टिप्‍पणी करने की और व्‍यंग का लेबल देख कर ठेल दी महान व्‍यंग की उपाधि देती हुई टिप्‍पणी, चाहे वाह करने वाली की माँ-बहन की ही #@*^%& कर दी गई हो, ब्‍लागरों की आदत ही हो गई है वाह कोठे पर बैठकर वाह वाह करने वालो की तरह, जैसे वहाँ बैठ कर वाह-वाह करते है वैसे ही यहाँ भी टिप्‍पणी कर बधाई देते नज़र आते है।
उस तथाकथित पोस्‍ट पर मात्र रचना जी ने ही सार्थक टिप्‍पणी की जो वास्‍तव मे पोस्‍ट को पढ़ा, अन्‍यथा एक दिन मे सर्वाधिक टिप्‍पणी करने का रिकार्ड दर्ज करने वाले तथा सदी के महान ब्लागर भी उस पोस्‍ट को साधुवाद देते नज़र आये, राक्षसी पोस्‍ट पर उम्‍दा नामक टिप्‍प्‍णी अमेरिकाए जर्मनी, इग्‍लैंड, लखनऊ तथा पता नही कहाँ से आयी पर बिना पोस्‍ट पढ़े टिप्‍पणी करने की आदत न बदल पायी।
महान परसाई की प्रशिद्ध दत्तक औलाद के शब्‍दो मे महाशक्ति के बारे दो लाईन - वो ‘महाशक्ति'…हाँ!…वही जिसे अपनी शक्ति पे बड़ा नाज़ है…असल में तो उसे खुद नहीं पता कि उसकी शक्ति का ह्रास हुए तो मुद्दतें बीत चुकी हैं मुझे उनके शब्‍दो से अपने बारे जानकर अच्‍छा लगा कि महाशक्ति के शक्ति ह्रास के बारे जानकारी रखते है, मतलब महाशक्ति के दम के बारे मे पूरी जानकारी है, और जानकारी नही रही होगी तो अपने पुरखो से पता कर ली होगी।
लगातार मेरे नाम महाशक्ति/प्रमेन्‍द्र को लेकर, इलाहाबाद को लेकर तथा जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन के बारे भिन्‍न लोगों ने लगातार पोस्‍टे ठेले जा रहे है, जैसे जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन को लेकर उनकी #@*^%& मे किसी ने मिर्ची ठूस दी हो और दर्द के मारे भद्दी पोस्‍टों की दस्‍त कर रहे है। 
जहाँ तक महाशक्ति की शक्ति ह्रास की बात है तो कुछ पारस्‍परिक मित्रों के कहने पर मैने लगातार विवादो की जंग में मंदक की भूमिका निभाई और जो कुछ भी मैने इस मसले पर चुप रह कर किया, उसी का पर‍िणाम था कि प्रतिनिधि मंडल मेरठ गया और प्रस्‍तुत मसले का कुछ हल निकल सका। मैने पूरे संयम के साथ मामले पर नियंत्रित करने का किया, पर कुछ पिचालियों को सुअरों की भातिं गंदगी मे लोटने मे आनंद मिलता है। जहाँ उस विवाद मे मैने विवाद को निपटाने का जिन मित्रों से वादा किया था वो मैने निभाया किन्‍तु वर्तमान मे जो लोग अब गलत दिशा मे बात ले जा रहे है, अगर कुछ लोगों को इसी मे मजा आता है तो मै अब स्‍वयं चुनौती लेने का तैयार हूँ। मै इस मामले मे कोई हस्‍तक्षेप नही करूँगा और जरूरत पड़ी तो ही सामने आऊँगा। जो मित्रगण मठाधीशी की ध्‍वस्‍त करने मे लगे है वही आप लोगो के लिये काफी है, मुझे नही लगता कि मेरी इस प्रकरण मे जरूरत है, अब कोई भी व्‍यक्ति मेरे से सम्‍पर्क करने की कोशिश न करे, क्‍योकि जहां तक मेरा काम था मै कर चुका हूँ। अगर अब वो गलत भी करते है तो मै पूर्ण रूप से उनके साथ हूँ।
अब जो लोग भी "जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन तथा उससे जुडे किसी भी व्‍यक्ति का नाम करते हुये अभद्र पोस्‍ट लिखेगा तो अपनी भद्द करवाने का खुद जिम्‍मेदार होगा", जूनियर ब्लॉगर एसोसिएशन का प्रत्‍येक सदस्‍य अपना विरोध ऐसे वाहियात पोस्‍टो पर साम-दाम-दण्‍ड-भेद के साथ दर्ज करने के लिये स्‍वतंत्र है।


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आज कानपुर में ppp



आज रात्रि 7 जून तथा कल 8 जून को मै कानपुर मे रहूँगा, कल 10 बजे से अपने कार्य समाप्ति तक व्‍यस्‍तता रहेगी। 10 बजे से पूर्व तथा इलाहाबाद के लिये ट्रेन पकड़ने से पहले समय मिला तो परिचित अपरचित ब्‍लारगों तथा मित्रों से मिलने की कोशिश रहेगी।


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महापुरूषों के प्रेरक-वचन एवं कहावतें



महापुरूषों के प्रेरक-वचन एवं कहावतें
  • सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनो को प्यार करता है। यही हमारी प्रकृति की पहली दुरूह ग्रंथि और विरोधाभास है।- श्री अरविंद
  • सत्याग्रह की लड़ाई हमेशा दो प्रकार की होती है। एक जुल्मों के खिलाफ़ और दूसरी स्वयं की दुर्बलता के विरुद्ध।- सरदार पटेल
  • कष्ट ही तो वह प्रेरक शक्ति है जो मनुष्य को कसौटी पर परखती है और आगे बढ़ाती है।- सावरकर
  • तप ही परम कल्याण का साधन है। दूसरे सारे सुख तो अज्ञान मात्र हैं।- वाल्मीकि
  • संयम संस्कृति का मूल है। विलासिता निर्बलता और चाटुकारिता के वातावरण में न तो संस्कृति का उद्भव होता है और न विकास।- काका कालेलकर
  • जो सत्य विषय हैं वे तो सबमें एक से हैं झगड़ा झूठे विषयों में होता है।-सत्यार्थप्रकाश
  • जिस तरह एक दीपक पूरे घर का अंधेरा दूर कर देता है उसी तरह एक योग्य पुत्र सारे कुल का दरिद्र दूर कर देता है- कहावत
  • सही स्थान पर बोया गया सुकर्म का बीज ही महान फल देता है।- कथा सरित्सागर
  • चाहे गुरु पर हो या ईश्वर पर, श्रद्धा अवश्य रखनी चाहिए। क्योंकि बिना श्रद्धा के सब बातें व्यर्थ होती हैं।- समर्थ रामदास
  • असंतोष की भावना को लगन व धैर्य से रचनात्मक शक्ति में न बदला जाए तो वह ख़तरनाक भी हो सकती है।- इंदिरा गांधी
  • प्रजा के सुख में ही राजा का सुख और प्रजाओं के हित में ही राजा को अपना हित समझना चाहिए। आत्मप्रियता में राजा का हित नहीं है, प्रजाओं की प्रियता में ही राजा का हित है।- चाणक्य
  • द्वेष बुद्धि को हम द्वेष से नहीं मिटा सकते, प्रेम की शक्ति ही उसे मिटा सकती है।- विनोबा
  • साहित्य का कर्तव्य केवल ज्ञान देना नहीं है परंतु एक नया वातावरण देना भी है।- डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
  • लोकतंत्र के पौधे का, चाहे वह किसी भी किस्म का क्यों न हो तानाशाही में पनपना संदेहास्पद है। -जयप्रकाश नारायण
  • बाधाएँ व्यक्ति की परीक्षा होती हैं। उनसे उत्साह बढ़ना चाहिए, मंद नहीं पड़ना चाहिए।- यशपाल
  • सहिष्णुता और समझदारी संसदीय लोकतंत्र के लिए उतने ही आवश्यक है जितने संतुलन और मर्यादित चेतना।- डॉ. शंकर दयाल शर्मा
  • जिस प्रकार रात्रि का अंधकार केवल सूर्य दूर कर सकता है, उसी प्रकार मनुष्य की विपत्ति को केवल ज्ञान दूर कर सकता है।- नारदभक्ति
  • धर्म करते हुए मर जाना अच्छा है पर पाप करते हुए विजय प्राप्त करना अच्छा नहीं।- महाभारत
  • दंड द्वारा प्रजा की रक्षा करनी चाहिए लेकिन बिना कारण किसी को दंड नहीं देना चाहिए।- रामायण
  • शाश्वत शांति की प्राप्ति के लिए शांति की इच्छा नहीं बल्कि आवश्यक है इच्छाओं की शांति।- स्वामी ज्ञानानंद
  • धर्म का अर्थ तोड़ना नहीं बल्कि जोड़ना है। धर्म एक संयोजक तत्व है। धर्म लोगों को जोड़ता है।- डॉ. शंकरदयाल शर्मा


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इलाहाबाद कुत्ता ब्‍लागर मीट कांड - ब्‍लागर पहुँचेगे मीरगंज



जूनियर ब्लॉग एसोसिएशन की प्रस्‍तावित इलाहाबाद की बैठक की खबर से कुछ लोगो को अखर रही है, उनके मन में है कि कल के छोरे चले हिन्‍दी चिट्ठाकारी को स्‍वर्णकाल मे ले जाने का ख्‍वाब दिखाने चले है, जो हमने अब तक होने नही दिया उसको पूरा करने चले है। हम नर-पिचाशों के होते हुये ये अपने मंशूबे मे कामयाब हो जाये तो हमारे द्वारा अर्जित पुर्ण्‍य का तो ये मटिया मेट कर देंगे।
अचानक महाशय की सोच से दिल्‍ली से रायपुर एक हो जाता है, और षड़यंत्र की व्‍यूह रचना कि जाने लगती है। भाई साहब सुन रहे हो लौन्‍ड़ो ने 15 जून को मिलकर इलाहाबाद में जूनियर ब्लॉग एसोसिएशन की बैठक कर रहे है, सुना है भाई साहब वो लोग कह रहे थे कि सड़क पर ही मीट कर लेगे। इनकी सड़क पर मीट करेगे औकात भी है, पर आप चिन्‍ता मत करों मै अपने कुत्‍तो को और आप अपनी चमर पिलई को भी तैयार करो मै रेलवे वाले ब्‍लागर चाचा से बात करता हूँ कि हमारे कुत्‍तो के लिये कुछ रियायती दरों पर टिकट बुक करवा दे। पर भाई ये बताओ कुत्तो इलाहाबाद में भेजने से क्‍या होगा ? अरे भाई आप भी लगता है कि धूप मे ही बाल सफेद किये है, आपको बाल सफेद करने से कोई वरिष्‍ठ थोड़े ही मान लेगा वरिष्‍ठ बनने के लिये पिचाल खेलना आना भी चाहिये। अब जिस खुराफात की आप कल्‍पना भी नही कर सकते हो उनको तो मै सपने मे ही क्रियांन्‍वित कर देता हूँ।
भाई साहब आपने तो बताया ही नही कि आपके कुकुरवा के संग हमरी चमर पिलई को भेजने से क्‍या होगा ? अरे चूतिया नंदन, आप जैसे को हम ढ़ो रहे है तभी तो हमारी बैन्‍ड़ ही बजी, अब जबकि हर बात को आपको संदर्भ सहित व्‍याख्‍या न की जाये आपको कुछ समझ ही नही आता है। तो आपके लिये करनी ही पड़ेगी सन्‍दर्भ सहित व्‍याख्‍या करनी ही पड़ेगी, तो लीजिऐ सुनिये, हम हम लोग मिल कर अगर अपने सभी कुत्तो-कुतियों को इलाहबाद भेज देगे तो इनकी सुबह-दोपहर-शाम-रात की गंदगी से इलाहाबाद की सड़को को गंधवा देगे जैसे हम सबने मिलकर चिट्ठकारी को गंधवा दिये है। देखते है कि लौन्‍ड़े कैसे गंद्दी सड़को पर मिटियाते है, चले थे सादा जीवन उच्‍च विचार का नारा देने, जो काम हम दसियों हजार खर्च कर नही कर पाते है ये सब फ्रीफंड मे करना चहते है, करे मैले पर मीट, यही कबिल है लोग। मान गये गुरू आपकी तिकड़मी बुद्धि को, क्‍या सोच लेते हो।
दिल्‍ली से दुरंतो से सवार कुत्‍तो की टीम इलाहाबद मे करीब 6 बजे पहुँचती है, और सारनाथ एक्‍सप्रेस से करीब 1 बजे रायपुर के कुत्ते आ जाते है। कुत्ते आ तो गये इलाहाबाद की गलियों, कुत्ते आखिर कुत्ते ही ठहरे जा‍त ही जो ठहरी कुत्तो की ही, आये तो थे मालिक का आदेश लेकर ब्‍लागर संगठन बनाने, इलाहाबाद की सिविल लाईस, अशोक नगर और लूकरगंज की गलियो को गंदा करने पर जस पशु तस पगहा जस मालिक तस पशु, जैसे मालिको की ब्‍लागर मीट मे आते तो हर‍ि भजन पर ओटन लगते है कपास उसी प्रकार, कुत्‍तो ने भी अपने लिये लाल बत्ती एरिया मीरगंज को ही आखिर चुन ही लिया और कुत्तो की मीट आयोजन मिला। अचानक इनती बड़ी ब्‍लागर कुत्तो की फौज की शिकायत जूनियर ब्लॉग एसोसिएशन ने पहला ही निशाना सटीक मारते हुये डीआईजी से अश्‍लील हरकत रोकने लिये धरना प्रदर्शन कर दिया, प्रशासन के निर्देश पर लाल बत्ती एरिया मीरगंज के चौकी इंचार्ज ने मीर गंज मे रेड मार दी और सारे कुत्तो को सुधार गृह भेज बिचारी फ‍जीहत तो हुई चमर पिलई, आगे नाथ न प‍ीछे पगहा, ब्‍लागर कुतिया अब न तो घर की रही न घाट की, इज्जत पर लांक्षन लगो सो अलग।
इधर कुत्तो की गिरफ्तारी से मठाधीशो मे हड़कम्‍प मच गया, मठाधीशों से एक बोला जो भी काम हम करते है सारे पासे उलटे पड़ते है, कभी कुछ ठीक होता ही नही है, दूसरा मठाधीश बोलता है पता नही किस नक्षत्र मे ब्‍लागिंग शुरू की थी, ज्‍योतिष वाली ब्‍लागर से पूछ कर ब्‍लागिंग करना था, तीसरा मठाधीश बोलता है कि पता नही किस कलमुये का मुँह देखा था तभी तपाक से बकलोल ब्‍लागर बोल उठता है कि मॉर्निग मे कैम पर मुझे ही देखा था। मेठ मठाधीश बोलता है कि जहाँ तुम रहोगे वहाँ सत्‍यानाश तो करोगे ही तय है इसमे दो राय नही है। एक मठाधीश ब्‍लागर तपाक से बोलता है कि अपने फला ब्‍लागर इलाहाबाद मे प्रशासनिक अधिकारी है फोन करो कि सम्‍मन रूकवाये, भई मेठ मठाधीस फोन करते है भाई साहब, कैसे है ? भाई साहब मै तो ठीक हूँ आपनी सुनओ है ? "glkdsjg lkdjgkl sdjgk ldajg kldjgkdl sajgkld jgbsdfklj gklsd fgbmnb jgidsfg." मेठ मठाधीश अपनी पूरी बात सुना देते है। भाई साहब इतनी गन्‍दी हरकत करवाने से पहले सोचना था, आप खुद करते थे तो ठीक था पर अब आप कुत्‍तो को भी लगवा दिया ये ठीक नही, वैसे भी अब मै मीट वीट से चक्कर मे नही पडूँगा मीट के अनुभव मेरे भी बहुत अच्‍छे नही है, कोई अच्‍छा काम करता है तो करने दो आप क्‍यो पिचाल खेलते हो ? कहते हुये फोन काट दिया।
अन्‍तोगत्‍वा इलाहाबाद के जिलाधीश ने सभी कुत्तो के ब्‍लागर मालिको के नाम की सूची मीरगंज चौकी पर चस्‍पा कर दिया गया और सम्‍मन भेजने की तैयारी चल रही है। आज तक ब्‍लागरो को लेखन सम्‍मन भेजा गया कि नही किन्‍तु इलाहाबाद मे कुत्तो को आवारागर्दी के लिये भेजने के लिये ब्लागरो को सम्मन भेजा जा रहा है, जिन जिन ब्‍लागरों ने अपने कुत्‍ते इलाहाबाद के मीरगंज मे भेजे हो सावधान रहे, खुद मीरगंज चौकी के चक्कर लगाने को तैयार रहे। :)
"अन्‍तोगत्वा दिल पर मत लो यार"


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जूनियर ब्लागर एसोशिएशन : हिन्‍दी चिट्ठाकारी के स्‍वर्णकाल का स्‍वप्‍न



जो भी काम अपनी सार्थकता को लेकर शुरू वह दूरगामी परिणाम देता है किन्‍तु जो काम भटकाव को लेकर प्रारम्‍भ होता है वह क्षणिक आनंदानुभूति देने वाले पानी के बुलबुले की भातिं होता है। जूनियर ब्लागर एसोशिएशन का उद्देश्य भी दूरगामी परिणाम देने वाला होगा, ताकि चिट्ठाकारी मे जारी विसंगतियों दूर किया जा सकें। नये ब्‍लागरों को प्रोत्‍साहन और सहयोग देने यथा प्रयास होगा तो अनुभव‍ी चिट्ठकारों के मार्गदर्शन मे चिट्ठकारी कारी को नये आयामो की ओर ले जाने का होगा। जूनियर ब्लागर एसोशिएशन न कभी निरकुंश होगा, वह मुक्त विचारधारा के साथ काम करेगा। आज चिट्ठाकारी मे मठाधीशी और गुटबंदी चरम पर है, इसी निरकुंशता और मठाधीशी पर नियंत्रण करना मुख्‍य लक्ष्‍य होगा। किसी भी चिट्ठाकार की बेज्‍जती का पूरा प्रतिकार किया जायेगा और तब तक इसका प्रतिकार होगा जबकि गलत व्‍यक्ति सार्वजनिक माफी नही मॉगता है।
जूनियर ब्लागर एसोशिएशन सार्थकता को लेकर काम करेगा, यदि किसी को लगता है कि वो हमसे बेहतर हिन्‍दी चिट्ठाकारी को प्रगति दे सकता है तो उसका स्‍वागत है। जूनियर ब्लागर एसोशिएशन कोई मठ है न ही इसमे कोई मठाधीश, चिट्ठाकारी मे मठ तो रहेगे किन्‍तु उन मठो मे मठाधीशो को सीमित कर दिया जायेगा। न ही चिट्ठकारी मे न ही चिट्ठाकारों के मध्‍य मठाधीशो को पिचाल खेलने दिया जायेगा। हमारा पूरा प्रयास होगा कि आने वाला वक्त जूनियर ब्लागर एसोशिएशन के नेतृत्‍व मे हिन्‍दी चिट्ठाकारी का स्‍वर्णकाल शिद्ध हो।
शेष फिर ......
भारत माता की जय


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जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन के सम्‍बन्‍ध में



बहुत दुख होता है जब कोई हराम की रोटी पर मुँह मारने चले आते है, अब यह फितरत कही जाये अथवा आदत से मजबूर, अब एक बन्‍धु जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन के सम्‍बन्‍ध अपना राग अलाप रहे है। हम जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन का गठन उद्देश्‍यो को लेकर कर रहे है और हम अपने उद्देश्‍यो से नही भटकेगे और न ही भटकने देगे। किसी के द्वारा यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन टॉप-40 ब्‍लागरों के खिलाफ मोर्चा है तो यह मुगालते मे है, यह उनकी अपनी गल्‍प सोच है। 
हम किसी भी चाहे वह बड़ा हो या छोटा, नया हो या पुराना किसी से भी हमारा बैर नही है अपितु जो भी किसी भी ब्‍लागर के साथ अन्‍याय करेगा, उसके खिलाफ हम हर स्‍तर पर विरोध करे। कोई भी ब्‍लागर हो वह कम कम मेरे लिये अथवा किसी के लिये भी उतना ही आत्‍मीय है जितना की पर‍िवार का सदस्‍य। हम अन्‍याय के लिये खड़े हुये है न कि अन्‍याय करने के लिये, और मै इस बात की पूरी दमदारी से कहता हूँ हममें से भी कोई गलत काम करेगा तो उसको भी नही छोड़ा जायेगा। 
वरिष्‍ठो (उम्र और चिट्ठाकारी दोनो में) से ही तो हम है और उनके मार्गदर्शन मे हम बहुत कुछ सीखते आये है, यहॉं हम उन तथाकथित वरिष्‍ठो के मानमर्दन की बात की जा रहे है जो चिट्ठकारी के नाम पर ब्‍लागरों को परेशान करते है और चिट्ठाकारी को गलत दिशा मे ले जा रहे है। हमारा उद्देश्‍य नाम के वरिष्‍ठो से जो हिन्‍दी चिट्ठाकारी का नाश करने पर उतारू है, कोई भी ब्‍लागर चाहे वह टॉप 40 का हो या हिन्‍दी चिट्ठाकारी का अन्तिमवा सदस्‍य सभी हमारे लिये सम्‍माननीय है। 
नोट - जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन के सम्‍बन्‍ध मे किसी प्रकार की आधिकारिक धोषणा सिर्फ महाशक्ति(स्‍वयं), नीशू जी और मिथलेश जी द्वारा ही उनके अपने ब्‍लाग पर जारी की जायेगी, यह इसलिये कि अनावश्‍यक लोग की अफवाह से बचा जा सके। जूनियर ब्‍लागर एसोशिएशन के गठन, भूमिका और नीति निर्माण के सम्‍बन्‍ध नीशू जी 15 को इलाहाबाद मे आ रहे है, जहाँ इस विषय पर विशेष चर्चा होगी।

जय हिन्‍द
शेष फिर ....


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