बोध कथा - ये तो मै भी कर लेता



बहुत पुराने समय की बात है, तब कबूतर झाडि़यों में अंडा देते थे और लोमड़ी आकर खा जाती थी। कोई रखवाली की व्‍यवस्‍था न होने पर कबूतर ने चिडि़यों से पूछा कि क्‍या किया जाए ? तब चिडि़यों के सरदार ने कहा कि-"पेड़ पर ही घोंसला बनाना होगा"। कबूतर ने घोंसला बनाया परन्‍तु ठीक से नही बन पाया। उसने चिडियों को मदद के लिये बुलाया। सभी ने मिलकर उसे व्‍यवस्‍थ‍ित घोंसला बनाना सिखा ही रही थी तभी कबूतर ने कहा कि "ऐसा बनाना तो हमें भी आता है, हम बना लेंगे"। चिडियाँ यह सुनकर चली गई। कबूतर ने फिर कोशिश की किन्‍तु नही बना फिर कबूतर ने चिडि़यों के पास गया और चिडि़यो से अनुनय-विनय किया तो फिर चिडिया आई और तिनका लगाने बता ही रही थी और आधा काम पूरा हुआ भी नही था कि कबूतर फिर उछल कर बोला कि "ऐसा तो हम भी जानते है"। यह सुनकर चिडिया फिर चली गई। फिर कबूतरों बनाना शुरू की किन्‍तु फिर घोंसला नही बना तब वह फिर चिडि़यों के पास गये तो चिडि़यो ने कहा कि-"कबूतर जी आप जानते हो कि जो कुछ नही जानता वह यह मानता है कि मै सब जानता हूँ, ऐसे मूर्खो को कुछ सिखाया नही जा सकता", ऐसा कह कर अब चिडि़यों ने उसके साथ जाने को मना कर दिया। जब से आज तक कबूतर ऐसे ही अव्‍यवस्थित घोंसले बनाते है।
यही कबूतरों वाली कुछ पद्धति इंसानो मे भी है जो कुछ सीखने के बजाय आपनी बुद्धिमानी दिखाने मे ज्‍यादा भरोसा करतें है ऐसे लोग "मैं" से ग्रस्‍त करते है और और कभी व्‍यवस्थित जीवन नही जी पाते है।
आज भारतीय आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्‍मदिन है, इस हम उनके सपनो को साकर करने का प्रण ले।
 


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4 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

नेताजी को प्रणाम।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

्नमन श्रद्धेय को..

महेन्द्र मिश्र said...

नेताजी को प्रणाम...

Lies Destroyer said...

शानदार प्रस्तुति