अपने बेटे और बेटियों का मांस खाओगे: गौड



क्या आप किसी ऐसे पुरुष की कल्पना कर सकते हैं जो छोटे छोटे बच्चों को उनके पाँव से पकड़ कर दीवार पर दे मारे जिस से कि उनकी मृत्यु हो जाए?
यदि आप का उत्तर नकारात्मक है तो आप इसाई मत की पुस्तक बाइबल से अनभिज्ञ हैं क्योंकि इसमें इस प्रकार का दृश्य अनेक स्थानों पर वर्णित है. स्वभावतः यदि आप हिन्दू धर्म और संस्कृति में पले बढे हैं तो आप का विचार होगा कि ये किसी दुष्ट मानव का कृत्य है और बाइबल का गौड इस दुष्ट को दंड देगा. रामायण और महाभारत में भी तो दुष्टों के वर्णन आते हैं, वो कंस हो अथवा रावण.
यदि आप के विचारों का प्रवाह इस वर्णन से मेल खाता है तो इसका अर्थ है कि आप को पूर्ण रूप से मूर्ख बना दिया गया है. मेरे इस वाक्य से आप को क्रोध आ सकता है, जो कि स्वाभाविक है किन्तु क्रोध से सत्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. जब से हमें सन १९४७ की तथाकथित स्वतंत्रता मिली है, हर दिशा से हमें कहा जा रहा है कि सभी धर्म एक सा उपदेश देते हैं. यहाँ तक कि २०१० में अपनी भारत यात्रा पर बराक हुसेन ओबामा ने भी यही कहा है और हमारे सेक्युलर मीडिया ने भी आप को यही पाठ पढ़ाया है. फ़िल्में भी बनी हैं तो 'अमर अकबर एंथोनी' और गाने हैं तो 'मज़हब नहीं सिखाता'.
ये सब क्यों हो रहा है, इसका उत्तर आपको अवश्य मिलेगा किन्तु सर्वप्रथम अपने आप को उत्तर दीजिये कि क्या आपने कभी बाइबल अथवा कुरान को पढ़ा है. संभवतः नहीं. अर्थात आपने सब ओर से कहे जाने पर माँ लिया कि सब सम्प्रदाय और उनके ग्रन्थ एक से ही हैं केवल नाम का अंतर है. बिना किसी घोषणा की सत्यता को परखे उस पर विश्वास करना मूर्खता नहीं है तो और क्या है?
जीसस क्राइस्ट के सम्प्रदाय को हिन्दुओं ने इसाई नाम क्यों दिया है जबकि वो अपने आप को क्रिस्चियन कहते हैं?
इसाई मत के अनुसार जीसस क्राइस्ट गौड का एकमात्र बेटा है जो एक कुंवारी के गर्भ से जन्मा था और इस विलक्षण घटना की भविष्यवाणी हो चुकी थी.
यदि आप इस अकेले वाक्य का ही विश्लेषण करेंगे तो पायेंगे कि ये विचारधारा कितनी खोखली और तर्कहीन है. आइये विश्लेषण करते हैं. जीसस क्राइस्ट गौड का एकमात्र बेटा है: इसका विश्लेषण गाँधी ने किया था और उसने मिशनरियों को इसका उत्तर भी दिया था. गाँधी के अनुसार:
हम सभी इश्वर की संतान हैं इसलिए मैं क्राइस्ट के 'एकमात्र बेटा' होने से इनकार करता हूँ. मेरे लिए चैतन्य इश्वर के 'एकमात्र पुत्र' हो सकते हैं.
हरिजन, जून ३, १९३७

इस विलक्षण घटना की भविष्यवाणी हो चुकी थी: इसाई मत के अनुसार आज से लगभग २८ शताब्दियाँ पूर्व अर्थात ईसा पूर्व ८०० में इसाइआह नामक एक पैगम्बर था जिसने क्राइस्ट के जन्म की भविष्यवाणी की थी. इसी पैगम्बर के नाम पर हिन्दू इस सम्प्रदाय को इसाई कह कर पुकारते हैं. इसकी सत्यता को जांचते हैं तो पता लगता है कि यहीं से गोल माल की नदी निकलती है. इसाइआह ने अपनी पुस्तक में लिखा है:
 देखो, एक युवा महिला के यहाँ पुत्र का जन्म होगा जिस का नाम इमैनुअल होगा.
मूल पुस्तक हिब्रू में लिखी गयी थी और जिस शब्द का प्रयोग इसाइआह ने किया था वो है अल्मा - अर्थात 'युवा महिला.' इसका अनुवाद पहले उनानी भाषा में हुआ और फिर अंग्रेजी में. इस अनुवाद में 'युवा महिला' को कुंवारी बना दिया गया. ये अनुवाद जो हमें वर्तमान प्रचलित पुस्तकों में मिलता है, वो हो गया है:
 देखो, एक कुंवारी गर्भवती होगी, उसके पुत्र होगा, जिसका नाम होगा इमैनुअल.
दूसरी विसंगति है कि इस वाक्य के अनुसार नाम इमैनुअल होना चाहिए जबकि नाम जीसस क्राइस्ट है. यदि आप ने किसी मिशनरी से ये कहा तो वो आप से रुष्ट हो जाएगा और कहेगा कि आप तो बाल की खाल निकालने वाले नास्तिक हैं. आप के हिन्दू इश्वर जैसे कृष्ण अथवा राम तो काल्पनिक चरित्र हैं जबकि क्राइस्ट की ऐतिहासिकता प्रमाणित है,  कुंवारी मेरी से जन्म होना क्राइस्ट के गौड होने का प्रमाण है और बाइबल गौड की वाणी है.
क्या चक्करदार तर्क है! यही तर्क यदि आप रामायण अथवा महाभारत के लिए देंगे तो आप सेक्युलर नहीं होंगे, आप संकीर्ण विचारों वाले हिन्दू आतंकवादी होंगे. चलिए, इसकी भी जांच कर लेते हैं. 
क्राइस्ट का गौड होना इस तथ्य पर आधारित है कि वो एक कुंवारी के गर्भ से जन्मा है. ये इतनी विलक्षण घटना है और इस पर क्राइस्ट का गौड होना टिका है तो आइये देखें कि इस सन्दर्भ में गौड की वाणी अर्थात बाइबल क्या कहती है. जो पाठक अनजान हैं, उन की जानकारी के लिए क्राइस्ट के पश्चात लिखे गए बाइबल के भाग को 'न्यू टेस्टामेंट' अथवा 'नया नियम' कहते हैं. इसके चार भाग हैं जो क्राइस्ट के चार शिष्यों मार्क, जॉन, ल्यूक तथा मैथ्यू ने लिखे हैं. 
मार्क और जॉन ने तो इस विलक्षण घटना का उल्लेख ही नहीं किया है. ल्यूक और मैथ्यू में जो वर्णन है वो इतना विरोधाभासी है कि कोई सम्मानित व्यक्ति इसे उचित ठहराने से पहले चुल्लू भर पानी में डूब मरना पसंद करेगा. किन्तु मिशनरी इस श्रेणी में नहीं आते. ल्यूक के वर्णन के अनुसार एक देवदूत ने मेरी को आ कर बताया कि गौड ने अपने 'एकमात्र पुत्र' को धरती पर जन्म लेने के लिए तुम्हें गर्भवती किया है. वहीं मैथ्यू में देवदूत मेरी के मंगेतर जोसेफ को संदेश देता है कि मेरी के गर्भ धारण का कारण गौड है इसलिए जोसेफ को मेरी पर शंका नहीं करनी है. इतने तीव्र विरोधाभासों के चलते भी हमें स्वीकार कर लेना चाहिए कि बाइबल गौड की वाणी है. संभवतः गौड के यहाँ 'प्रिंटिंग मिस्टेक्स' हो जाती हैं.
मैथ्यू के अनुसार, जोसेफ जब परेशान होता है कि उसकी मंगेतर गर्भवती है तो देवदूत उसे बताता है कि गौड ने ये इसलिए किया है कि भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हो सके. 
मैथ्यू : १-१८ से १-२३

यदि आप मिशनरियों की इन कथाओं पर विश्वास करते हैं तो उनके महान संदेशवाहक इसाइआह की पुस्तक भी आप को रुचिकर लगेगी. इस पुस्तक में वो यहूदियों को अपने गौड याह्वेह की शरण में आने को कहता है और ऐसा न करने पर चेतावनी देता है कि गौड क्रोधित हो जाएगा और उनका विनाश कर देगा. परिणाम स्वरुप, उसकी पुस्तक का एक विशाल भाग गौड के क्रोध का वर्णन करता है. इसके तेरहवें अध्याय का विषय है बेबीलोन नामक नगर जहां के लोग गौड के अनुसार आचरण नहीं कर रहे हैं. उनके लिए जो यातनाएं वर्णित हैं, उनका उल्लेख विषय के अनुरूप करूंगा किन्तु यहाँ इस अध्याय का सोलहवां वाक्य प्रस्तुत है:
उनके बच्चों को पटक कर उनके टुकड़े टुकड़े कर दिए जायेंगे, उनके घर लूट लिए जायेगे और उनकी पत्नियों का बलात्कार किया जाएगा.
ये दंड उन लोगों के लिए है जो गौड के अनुसार व्यवहार नहीं करते और जो दंड देने वाले हैं, वो गौड के भेजे हुए लोग हैं. इन दंड देने वालों को गौड के बलवान (God's mighty ones) कहा जाता है. अर्थात गौड के चुने हुए लोग बच्चों के टुकड़े करेंगे और बलात्कार करेंगे. ये ईसाईयों की पवित्र पुस्तक है.
एक रोचक तथ्य यह है कि न केवल यहूदी इस पुस्तक को अपना ग्रन्थ मानते हैं बल्कि इसाई और मुसलमान इसाइआह को अपना एक पैगम्बर मानते हैं. इसाई ऐसा क्यों मानते हैं, ये तो आप पढ़ ही चुके हैं, मुसलामानों के अनुसार इसाइआह ने मोहम्मद के जन्म की भविष्यवाणी की थी. 

एक साधारण प्रतिक्रिया होती है कि सैंकड़ों वर्ष पहले लिखी पुस्तक से हमें क्या अंतर पड़ता है. इसे समझने के लिए पंद्रहवीं सदी के यूरोप में जाना पड़ेगा जब इसी प्रकार बच्चों को मारा गया था और महिलाओं से बलात्कार किया गया था. अर्थात पुस्तक के लिखे जाने और उसके अनुसार व्यवहार में लगभग २३०० वर्ष का अंतर है. और ये तो केवल एक घटना है. 
ये घटना है सन १५०६ की. स्थान है पुर्तगाल का नगर लिस्बन. प्रस्तुत अंश प्रसिद्द इतिहासकार अलाक्सांद्रे हर्क्युलिअनो की पुस्तक 'द हिस्टरी ऑफ ओरिजिन एंड एस्तैब्लिश्मेंट ऑफ इन्कुइसिशन इन पुर्तगाल' पर आधारित है. वो उन्नीसवीं सदी में 'रोयल अकैडमी ऑफ साइंस' का निर्देशक था और ये पुस्तक उसने आधिकारिक प्रलेखों के आधार पर लिखी थी.
गत दो वर्ष से यहाँ अकाल जैसी स्थिति थी और परिणामस्वरूप हैजा एक महामारी का रूप ले रहा था. प्रतिदिन १०० से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो रही थी. ऐसे में किसी ने कहा कि एक विशेष चर्च में जीसस की प्रतिमा के निकट के प्रकाश दिखाई देता है. कई दिन तक कोई न कोई कह देता कि उसने उस दिव्य रौशनी को देखा है किन्तु अधिकतम लोगों की राय थी कि ये एक भ्रम है. एक रविवार के दिन जब चर्च में लोग एकत्रित थे तो एक युवक जो यहूदी से इसाई बना था, इस तथाकथित चमत्कार के प्रति अविश्वास जताया. ये बात चर्च में फ़ैल गयी और भीड़ ने उसे मार कर उसके शव को जला दिया. धीरे धीरे भीड़ बढ़ने लगी. एक फादर ने भीड़ को उकसाना आरम्भ कर दिया. दो अन्य फादर, जिनमें से एक के हाथ में क्रॉस था और दूसरे के हाथ में क्रूसीफिक्स था, ने चिल्लाना आरम्भ कर दिया - हिअरसी हिअरसी (हिअरसी का अर्थ है वो आचरण जो चर्च के विचारों के विरुद्ध होता है). ये सुनते ही पूरे नगर में दंगे भड़क उठे जिनमें बंदरगाह पर खड़े पोतों के नाविक भी सम्मिलित हो गए. राह चलते नए ईसाईयों (यहूदी से बने इसाई) को पकड़ कर उनकी हत्या कर दी गयी अथवा घायल कर दिया गया. इन अधमरे नए ईसाईयों को आग में डाल कर जला दिया गया. 
दोनों फादर, जिनमें से एक जोआओ मोचो नामक पुर्तगाली फादर था और दूसरा ऐरागौन का बर्नार्डो नामक फादर था, दंगा करने वालों को भड़का रहे थे और दंगे करने के लिए 'जला दो! जला दो' कह कर उकसा रहे थे. हर नए इसाई को घसीट कर आग में फेंका जा रहा था. दो स्थानों पर भीषण आग लगा दी गयी थी, जिन में एक ही समय में १५-२० यहूदी जलाए जा रहे थे. एक ही चौराहे पर ३०० पुरुषों को जला दिया गया था. इस रविवार को ५०० लोगों को जला दिया गया था. अगले दिन इस क्रम ने अधिक भयंकर रूप धारण कर लिया. फादरों के भड़काने से इस दिन की गतिविधियाँ अधिक हिंसक हो गयी थीं. इसमें कुछ पुराने ईसाईयों को भी मार दिया गया था. कुछ को अपनी जान बचाने के लिए सार्वजनिक रूप से ये दिखाना पड़ा कि उनका खतना नहीं हुआ है. (यहूदी खतना करवाते हैं, इसाई नहीं करवाते). इसाई बलपूर्वक नए ईसाईयों के घरों में घुस गए. महिलाओं, पुरुषों और वृद्धों को मार दिया गया. बच्चों को उनकी माताओं के वक्ष से खींच कर, पांवों से पकड़ कर उनके सर कमरों की दीवारों पर पटक दिए गए. यहाँ वहाँ ४०-५० शवों के ढेर देखे जा सकते थे, जिन्हें जलाया जाना था. जो जीवन बचाने के लिए चर्चों में छिप गए थे, उन्हें भी नहीं छोड़ा गया. विवाहित और अविवाहित महिलाओं को बाहर निकाल कर उनसे बलात्कार किये गए और फिर उन्हें लपटों में फेंक दिया गया. इस दरिंदगी में नाविकों के साथ, छोटी जाती के भी लगभग १००० पुरुष सम्मिलित थे. जब रात हुई तो ये बर्बर दृश्य छिप गए किन्तु अगले दिन यही क्रम चल पड़ा. अब बर्बर दृश्य कम थे क्योंकि शिकार करने के लिए कम लोग रह गए थे. कुछ पुराने ईसाईयों ने, जो अभी भी मानवीयता में विश्वास करते थे, बहुत से लोगों को छिपा दिया था अथवा उन्हें भागने में सहायता की थी. भागने वाले अधिक भाग्यशाली नहीं रहे क्योंकि उन्हें आस पास के गाँवों में ढूंढ कर मार दिया गए. जब बलात्कार के लिए और महिलायें नहीं बची और मारने के लिए पुरुष नहीं बचे तो सब शांत हो गया और सेंट डोमिनिक के फादर विश्राम करने लगे.
 उक्त घटनाक्रम में दंगा करने वालों ने और करवाने वाले फादर वही कर रहे थे जो उन्होंने अपने सम्प्रदाय की पुस्तक में पढ़ा था और ऐसा करते हुए वो 'गौड के बलवानों' की भांति व्यवहार कर रहे थे. अर्थात वो इन जघन्य अपराधों को गौड का आदेश बता कर उचित ठहराने की चेष्टा कर सकते हैं. जो कार्य गौड का कार्य है, वो अपराध कैसे हो सकता है? उनका व्यवहार तो अक्षरशः इसाइआह की पुस्तक से मेल खाता है जो कि बाइबल का भाग है. इस पुस्तक के आरंभिक ३९ अध्याय उन सभी राष्ट्रों के विनाश का उल्लेख करते हैं जो गौड के विरुद्ध आचरण करते हैं. इस परिभाषा के अनुसार भारत सहित सभी वो राष्ट्र जो इसाई नहीं हैं, उनका यही अंत होगा.
ये उल्लेख केवल एक ही स्थान पर हो, ऐसा नहीं है. बाइबल का एक भाग है साल्म्स (Psalms), जिसे भारत में 'भजन संकलन' के नाम से प्रसारित किया जा रहा है. इन में से भजन संख्या १३७ की नवीं पंक्ति भी कुछ ऐसा ही संदेश देती है:
Happy is the one who takes your babies and smashes them against the rocks!
इसका अनुवाद है:
वो प्रसन्न होगा जो तुम्हारे बच्चों को चट्टानों पर पटक देगा!
इस भजन में बेबिलौन राज्य की राजकुमारी के बच्चों का उल्लेख है. अब तनिक इस भजन की तुलना किसी हिन्दू भजन से कर के देखें तो 'सर्व धर्म समभाव' जैसे नारों की मूर्खता आप को समझ आ जायेगी.

अभी तक हमने गौड के कुछ लक्षण तो देख ही लिए हैं; वो अपने विशेष पुरुषों द्वारा, बच्चों की हत्या करवाता है और महिलाओं का बलात्कार भी करवाता है. जो ऐसे जघन्य अपराध करते हैं, गौड उन्हें प्रसन्न करता है. एक और विशेष लक्षण भी है; गौड आज्ञा न मानने वालों की इतनी दुर्दशा कर देता है कि वो अपने बच्चों का मांस खाते हैं. इसके लिए हम बाइबल के उस भाग को देखते हैं जिसे प्रसिद्द पैगम्बर मूसा (Moses) ने लिखा है. इसका नाम है दयुतेरोनोमी. इसके अध्याय २८ में वर्णन है कि गौड की आज्ञा न मानने वालों को शत्रु घेर लेंगे जिस से कि उन पर विभिन्न आपत्तियां आ जायेंगी. इन में एक है भोजन की कमी. इसी का वर्णन है:

शत्रु तुम्हें घेर लेगा और तुम्हें विभिन्न प्रकार के कष्ट देगा. और तुम अपने शरीर का भाग अर्थात अपने बेटे और बेटियों का मांस खाओगे, जो तुम्हें तुम्हारे लोर्ड गौड ने दिए हैं.
जो पुरुष तुम में संवेदनशील भी हैं, वो भी अपने भाई, अपनी पत्नी और उनके बच्चों पर बुरी दृष्टि रखेंगे.
इसलिए जब वो अपने बच्चों का मांस खा रहा होगा तो वो उन्हें (अपने भाई, पत्नी और शेष बच्चों को) मांस बाँट कर नहीं खाएगा क्योंकि इस घेराव और संकट के समय उसके पास कुछ नहीं होगा तथा शत्रु सब दिशाओं से कष्ट दे रहा होगा.
वो कोमल महिलायें, जिन्होंने अपनी कोमलता के चलते कभी भूमि पर नंगे पाँव नहीं रखे, वो भी अपने बेटे, बेटी तथा पति को दुष्ट दृष्टि से देखेंगी.
और अपने उन नन्हें मुन्नों की ओर भी जो उसके पांवों के मध्य में से निकले हैं, वो संतान जिसे उसने जन्म दिया है: क्योंकि इस कमी के समय में वो उन्हें खा जायेगी जब शत्रु सब दिशाओं से त्रस्त कर रहा होगा.
 दयुतेरोनोमी : २८ - ५३-५७


Share:

No comments: