भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (Mobile Number Portability) सुविधा



भारत मे मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सुविधा को 20 जनवरी 2011 से लागू किया गया। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) सुविधा उपयोगकर्ताओं को एक ही लाइसेंस सेवा क्षेत्र में अपने मौजूदा मोबाइल नंबर के साथ किसी नए मोबाइल सेवा प्रदाता का उपयोग करने की अनुमति प्रदान करती है। नई मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी एक नया सिम कार्ड प्रदान करेगी।
भारत में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (Mobile Number Portability) सुविधा
 
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की सुविधा ग्राहक एक अरसे से प्रतीक्षा कर रहे थे क्‍योकि वह अपनी मौ‍जूदा कम्‍पनी की सेवा से संतुष्‍ट न होकर भी वर्तमान नम्‍बर को बंद करके ही नई कम्‍पनी मे जा सकते थे किन्‍तु मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के कारण अब उपभोक्‍ताओ को नई कम्‍पनी मे जाने के लिये वर्तमान नम्‍बर को बदलने की जरूरत नही होगी और वर्तमान नम्‍बर को जारी रखते हुये नई नये सेवा प्रदाताओ की सेवा का उपयोग कर सकते है। पोर्टेबिलिटी संबंधी कार्य सात कार्य दिवसों के अंदर पूरा हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व सेवा क्षेत्रों में इस काम के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
 
मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी को लेकर आम जन मे कुछ धारणाऍं है जिसे निम्‍न प्रश्‍नो के अंतर्गत दूर किया जा सकता है।
 
एमएनपी सुविधा का लाभ कौन ले सकता है?
कोई भी मोबाइल फोन उपयोगकर्ता, जो प्री-पेड या पोस्ट-पेड (जीएसम/सीडीएमए) सेवा का उपयोग कर रहा है, किसी अन्य सेवा प्रदाता कंपनी का उपयोग कर सकता है।
  • पोर्टिंग के लिए आवेदन करने की तिथि से पहले किसी भी मामले में सामान्य बिलिंग चक्र के अनुसार उपयोगकर्ता का कोई भी बकाया बिल या बकाया राशि शेष नहीं रहनी चाहिए।
  • किसी भी पोर्टिंग के लिए अनुरोध एक नए कनेक्शन की सक्रियता की तारीख या अंतिम पोर्टिंग की समाप्ति के 90 दिनों के भीतर प्रभावी होगा।
  • मोबाइल नंबर के स्वामित्व में परिवर्तन के लिए कोई भी अनुरोध प्रक्रिया में नहीं होना चाहिए।
  • उपयोगकर्ता ने लाइसेंस सेवा क्षेत्र के भीतर पोर्टिंग के लिए आवेदन किया हो।
  • संबंधित मोबाइल नंबर के पोर्टिंग को न्यायालय के किसी भी कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं किया गया हो।
  • पोर्टिंग अनुरोध में वर्णित अद्वितीय पोर्टिंग कोड मोबाइल की मांग की संख्या के लिए दाता संचालक द्वारा आवंटित अद्वितीय पोर्टिंग कोड से मिलना चाहिए।
  • उपयोगकर्ता ने वर्तमान कनेक्शन से बाहर निकलने के लिए दिए गए नियमों का पालन किया है।

मैं कैसे एक नए मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के लिए पोर्ट कर सकता हूं?
प्रक्रिया के मुख्य चरण निम्न प्रकार हैं:-
  • उपयोगकर्ता को अपने मोबाइल नंबर की पोर्टिंग के लिए नएमोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी के सेवा केन्द्र या अधिकृत विक्रेता के पास जाना होगा। इसके पश्चात एक सेवा पंजीकरण फार्म भरें एवं प्रक्रिया के लिए पोर्टिंग शुल्क का भुगतान करें।
  • उपयोगकर्ता को अपने यूपीसी (अद्वितीय पोर्टिंग कोड) को प्राप्त करने के लिए अपने मोबाइल नंबर से, जिसे वह पोर्ट करवाना चाहता है, दाता संचालक को 1900 पर एक संदेश भेजना होगा।
  • एमएनपी सुविधा का लाभ लेने के लिए उपयोगकगर्ता को पोर्ट लिखकर संदेश अपने दस अंकों के मोबाइल नंबर के साथ 1900 पर भेजना होगा और इसके पश्चात उपयोगकर्ता संदेश के माध्यम से ही अपना यूपीसी पोर्टिंग कोड प्राप्त करेगा। (उदाहरण के लिए PORT 9999999999 लिखें और फिर इसे 1900 पर भेज दें)
  • संदेश प्राप्त होने पर दाता संचालक एक स्वचालित प्रणाली के माध्यम से उपयोगकर्ता का अद्वितीय पोर्टिंग कोड तुरंत संदेश के द्वारा उसे भेजेगा। उपयोगकर्ता को यह अद्वितीय पोर्टिंग कोड पोर्टिंग के लिए आवेदन करने समय आवेदन पत्र में भरना होगा।
  • किसी मामले में अगर उपभोक्ता का कॉलर लाइन पहचान (सीएलआई) दस अंकों के मोबाइल नंबर के साथ मेल नहीं खाता है, तो उसे अद्वितीय पोर्टिंग कोड आवंटित नहीं किया जा सकता लेकिन एक संदेश के माध्यम से उपयोगकर्ता को यह सूचित किया जाता है कि उसका कॉलर लाइन पहचान (सीएलआई) दस अंकों के मोबाइल नंबर के साथ मेल नहीं हो रहा है।
  • अद्वितीय पोर्टिंग कोड जो कि उपयोगकर्ता को आवंटित किया जाता है आवेदन की तिथि से पंद्रह दिनों तक या कई बार नंबर जो पोर्ट हो चुका है, जो भी पहले हो, तक मान्य होता है।
  • जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व के सेवा क्षेत्रों में अद्वितीय पोर्टिंग कोड की वैद्यता आवेदन की तिथि से तीस दिनों तक या कई बार नंबर जो पोर्ट हो चुका हो, जो भी पहले हो, तक होगी, चाहे अनुरोधों की संख्या उपयोगकर्ता के द्वारा बनाई गई हो।
  • नई सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा उपयोगकर्ता को एक नया सिम कार्ड जारी किया जायेगा।
  • पोर्टिंग अनुरोध के अनुमोदन के पश्चात नएमोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को सूचित किया जाएगा।
 
पोर्टिंग शुल्क
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के अनुसार एक नए नेटवर्क पर पलायन की लागत 19 रुपए है। बहरहाल, नए ऑपरेटरों के पास उपयोगकर्ताओं को फीस माफ करने या छूट देने का विकल्प मौजूद होगा। भारत संचार निगम लिमिटेड व एयरसेल ने संभावित ग्राहकों के लिए शुल्क माफ किया है।
 
नए मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी को पोर्ट करने में कितना समय लगता है?
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के अनुसार, किन्ही भी 7 कार्यदिवस के अंदर पोर्टिंग का कार्य पूरा हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर पूर्व सेवा क्षेत्रों में 15 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है।
 
बाधित सेवा अवधि क्या है?
यह 2 घंटे की वह अवधि है जब आपकी मोबाइल सेवाओं को बाधित किया जायेगा। वास्तविक समय आपको हमारे द्वारा संदेश के माध्यम से बताया जायेगा।
 
क्या मैं पोर्टिंग के लिए आवेदन करने के पश्चात अपने अनुरोध को रद्द कर सकता हूं? क्या मुझे भुगतान की गई राशि वापस मिलेगी?
हां, आप पोर्ट के लिए आवेदन करने के 24 घंटों के भीतर अपने नएमोबाइल सेवा प्रदाता के साथ अपना अनुरोध रद्द कर सकते हैं।
 
क्या मुझे नए मोबाइल सेवा प्रदाता के पास पोर्ट करने से पहले अपनी मौजूदा सेवाओं को बंद कराने की आवश्यकता है?
नहीं, आपको अपनी मौजूदा सेवाओं को रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अगर आप एक बार सफलता से नएमोबाइल सेवा प्रदाता के पास पोर्ट कर लेते हैं तो आपकी अपने मौजूदा मोबाइल सेवा प्रदाता की सेवाएं स्वत: ही समाप्त हो जाएंगी।
 
पोर्टिंग प्रक्रिया के दौरान क्या मैं वर्तमान सेवाओं का उपयोग कर सकता हूं?
हां, आप इस प्रक्रिया के दौरान आप अपनी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं, सिर्फ अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवा को छोड़कर, जो आपके पोर्टिंग अनुरोध के पश्चात आपके वर्तमान मोबाइल सेवा प्रदाता के द्वारा निलंबित कर दी जाती है।
 
मैं एमएनपी के लिए कहां आवेदन कर सकता हूं?
इसके लिए आपको मोबाइल सेवा प्रदाता के सेवा केंद्र अथवा प्राधिकृत डीलर के पास जाकर पोर्टिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सेवा पंजीकरण फॉर्म भरकर आगे की प्रक्रिया के लिए पोर्टिंग शुल्क का भुगतान करें।
 
एमएनपी के लिए मुझे कितना भुगतान करने की आवश्यकता होगी?
एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क पर अपना नंबर स्थानांतरित करने की लागत 19 रुपए है। हालांकि, नए ऑपरेटर के पास शुल्क माफ करने अथवा अन्य छूट देने का विकल्प होगा। भारतीय संचार निगम लिमिटेड ने अपने संभावित ग्राहकों के लिए यह शुल्क माफ किया है।
 
समय पर सेवा ना मिलने पर अपनी शिकायत कहां कर सकते हैं?
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
 
क्या मैं अपने नंबर को एक से अधिक बार पोर्ट कर सकता हूं?
आप एक से अधिक मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों को एक ही समय में पोर्टिंग का अनुरोध नहीं कर सकते। इसके अलावा आपको वर्तमान मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी की 90 दिनों की सदस्यता के साथ पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करना चाहिए।


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कांग्रेस नीत सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही



देश को आतंक के ऐसे खौफ़ नाक चेहरे से हमेशा रूबरू होना पड़ रहा है। हम मूक दर्शक होकर अपनो को मरने दे रहे है, इससे बड़ा राष्‍ट्रीय शर्म और क्‍या हो सकता है। अभी दिल्‍ली धमाको के सदमे से ऊबरी भी नही थी कि मीडिया हाऊसो को भेजे ईमेल के द्वारा भारत सरकार फिर से आंतकी हमलो की खुली चुनौ‍ती दी गई किन्‍तु अभी भी हम विचार मंथन से अतिरि‍क्त कुछ भी कदम उठा पाने के असक्षम है।
हम ऐसे आतंकियो को रोक पाने मे क्‍यो असक्षम है जबकि अमेरिका और इग्‍लैंड जैसे राष्‍ट्र 2001 और 2005 के प्रथम आतंकी हमलो के बाद कोई बड़ा हमला नही देखा किन्‍तु हमने संसद पर हमले के बाद 50 से अधिक आतंकी हमले झेले है और आज भी झेल रहे है। इसका क्‍या कारण है कि अमेरिका और इंग्‍लैण्‍ड ने फिर ऐसे दर्द नाक मंजर नही क्‍यो नही देखा क्‍योकि उनके देश मे आंतकियो को धर्म नही देखा जाता, आतंकियो को आन द स्‍पॉट उसके अंजाम पर पर पहुँचा दिया जाता है। परन्‍तु भारत की स्थिति भिन्‍न है भारत को सेक्‍युलर देश दिखाने के लिये आंतकियो को धर्म के नाम पर संगरक्षण दिया जाता है यही कारण है कि संसद पर हमले का मुख्‍य आरोपी अफ़जल गुरू और मुम्‍बई हमलो का एक मात्र जिन्‍दा अभियुक्त को कोर्ट से सजा-ए-मौत हो जाने के बाद भी हमारी सरकार ऐसे खतरनाक आतंकी को सिर्फ इसलिये संरक्षण दे रही है क्‍योकि वह मुस्लिम है और सरकार खुलकर हिन्‍दूवादी संगठनो को आंतकी घोषित करने पर तुली है। आतंकी का कोई धर्म नही होता है किन्‍तु इसे भी इग्‍नोर नही किया जा सकता है कि जितने भी आतंकी भारत तथा विश्‍व के अन्‍य देशो पर हमले किये है उनमे मुस्लिम ही निकलते है और तो और जहाँ भी मुस्लिम बहुल्य इलाके है वहाँ आंतकी गतिविधिया होती रहती है इससे चीन भी अछूता नही है।
कांग्रेस नीत सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही
आजादी के वक़्त और फिर उसके बाद आज तक कांग्रेस की 'मुसलमानों के प्रति तुष्‍टीकरण नीति' ने इस देश की खूब दुर्दशा कराई है... उपर से सच्‍चर जैसी कमेटी और सपोलो को दुग्‍धपान करने की नीति को पोषण देने की है। जिन लोको को हम आरक्षण के देकर तकनीकि शिक्षा दे रहे है वही तो ऐसी शिक्षा का उपयोग आतंकी गतिविधियो मे कर रहे है। आज भारत के समक्ष जितनी भी आतंकी गतिविधिया होती है हम चाह कर के भी उन पर लगाम इसलिये नही लगा पा रहे है क्‍योकि हमारी सरकार की सोच ही विभेद पूर्ण है वह आतंक को नही देखती वह आतंकी का धर्म देखती है। इन सब का श्रेय सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की 'मुस्लिम तुष्‍टीकरण' की राजनीति को जाता है... कांग्रेस की सत्‍ता लोलुप्‍ता नीति का ही परिणाम है कि हम आंतकी की खूनी चेहरा दशकों से देख रहे हैं और न जाने अभी और कब तक भोगते रहेंगे।
दिल्‍ली हाईकोर्ट मे बम विस्‍फोट मे सिर्फ 12 वकील और नागरिक मारे गये दिल्‍ली सरकार ने मौत की कीमत 4 लाख रूपये घोषित कर दी है यदि कल की तरीख़ मे ऐसा कोई हमला एक मात्र प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी अथवा राहुल गांधी पर हुआ होता तो भारत के लिये आज का दिन सामान्‍य न होता, इन किसी की मौत पर आज भारत मे आपातकाल जैसी स्थिति देखने को मिल सकती थी। क्‍योकि इनकी जान की कीमत है और जनता तो कीड़े माकौड़े की तरह सिर्फ वोट देने के लिये बनी हुई है। राहुल गांधी को अस्‍पाताल मे राजनीति खेलते हुये शर्म नही आई कि जो परिवार मौत के सदमे मे थे वहाँ राहुल गांधी वोट बटोरने गये थे। गांधी परिवार की निजता निजता है और हम जनता को राहुल कभी भी किसी भी हालत मे देखने जा सकते है चाहे मरीज नग्‍न अवस्था मे ही क्‍यो न हो और देश की सुपर पीएम को क्‍या रोग है यह जानने का अधिकार जनता को नही है।
ढाका से आये हमारे प्रधानमंत्री का यह बयान कि हम आतंकियो से नही हारेगे जैसे आतंकियो और सरकार के बीच शतरंज का खेल हो रहा हो और जनता प्‍यादो की भाति पिटने के लिये है। अब समय है कि हम शासन को अपने हाथ मे ले क्‍योकि यह सरकार कही से भी किसी भी स्‍तर पर जन भावना के लिये काम करने के लिये विफल रही है। हमें सच स्‍वीकार करना होगा कि कांग्रेस नीत सरकार के हाथो मे आतंकी तो सुरक्षित है किन्‍तु भारतीय नही।


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क्या आप कटती हुई गायों को बचाना चाहते है ?



प्रिय भारतवासियों,
उत्तर प्रदेश के बिजनेसमेन (व्यापारीगण) अब स्वचालित आधुनिक मशीन से युक्त कत्लखाने गायों को काटने के लिए बहुत जल्द बनाने जा रहे है ताकि गायों को तीव्र गति से काटा जा सके, उनके मांस को विदेशों में भेजा जा सके और उन्हें बहुत बड़ा लाभ प्राप्त हो सके | अगर ये लोग इसमें कामयाब हो जाते है तो फिर इन कत्लखानो की संख्या पूरे भारत में बहुत तेजी से बढ़ेगी | पूरे देश के लोग इन कत्लखानो को खोलने का पुरजोर विरोध कर रहे है और उत्तर प्रदेश की सरकार ने कहा है कि अगर एक करोड़ लोग भी कत्लखाने खोलने का विरोध करें और इस आन्दोलन की हिमायत करें तो स्वचालित आधुनिक मशीन से युक्त कत्लखाने खोलने की इजाजत व्यापारियों को नहीं दी जाएगी|
हम गायों की पूजा करते है | भारतीय होने के नाते और मानवता के नाते हम ऐसा होते हुवे हरगिज नहीं देख सकते ................ कृपया आप अपना समर्थन अवश्य दें |
अगर आपको लगता है कि इस तरह के कत्लखाने नहीं खुलने चाहिए तो आप कृपा करके 0522-3095743 पर एक मिस कोल जरूर करे| एक घंटी बजने के बाद कोल अपने आप डिस-कनेक्ट हो जाएगी |
जिस तरह से आपने अन्ना हजारे के जन लोकपाल बिल के आन्दोलन को सफल बनाया उसी तरह से आप अपना समर्थन दें | इसमें आपका कोई खर्चा नहीं है, बल्कि आपके इस एक मिस कोल से प्रतिदिन कटने वाली हजारों लाखों गायें बच जाएगी |कृपया आप अपने मोबाइल से मिस्कोल जरूर करें और इसे जितने लोगों तक पंहुचा सके पहुचाये |
मैने मिस कोल कर दिया है ........ अब आपकी बारी है क्‍योकि क्‍या आप अपनी माँओ को कटते देख सकते है ? अभी मिस कोल करे - नंबर है - 05223095743



तो वह कौन से गुण हैं जो देसी गाय को पावन बनाते हैं जबकि वो विदेशी नस्लों की गायों के मुकाबले कम दूध देती है?
विश्व हिन्दू परिषद की गोरक्षा समिति के हुकुमचंद कहते हैं, "हमारी देसी गाय जब बछड़े को जन्म देती है तब वो दूध देती है. विदेशी नस्ल की गाय के दूध देने के लिए बछड़ा होना ज़रूरी नहीं है. देसी गाय का दूध जल्दी पच जाता है जबकि भैंस और विदेशी नस्ल की गाय के दूध को पचने में ज़्यादा वक़्त लगता है."
देशी भारतीय गाय का घी के फायदे

देशी भारतीय गाय का घी के फायदे

गोरक्षा समिति के अनुसार देसी गाय का सिर्फ़ दूध ही नहीं, उसका गोबर भी गुणकारी होता है जिससे बीमारियां दूर होती हैं. वहीं विदेशी नस्ल की गायों के गोबर से बीमारियां पैदा होती हैं. करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु आनुवांशिक संसाधन ब्यूरो के एक शोध में देसी गाय के दूध की गुणवत्ता को भी विदेशी नस्ल की गायों से बेहतर बताया गया है. मगर भारत में अब देसी गायों के मुकाबले विदेशी नस्ल की गाय ज़्यादा लाभकारी साबित हो रही है क्योंकि वो ज़्यादा दूध देती है. इसी वजह से इन्हें पालने का चलन बढ़ रहा है.
 
देशी भारतीय गाय का घी के फायदे
देशी भारतीय गाय का घी के फायदे
  • गाय के घी को अमृत कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है। गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है।
  • दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है।
  • सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा।
  • नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तारो ताजा हो जाता है।
  • गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है, याददाश्त तेज होती है।
  • हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ढीक होता है।
  • 20-25 ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है।
  • फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।
  • गाय के घी की झाती पर मालिश करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है।
  • सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा।
  • अगर अधिक कमजोरी लगे, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें।
  • गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है।
  • जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है।
  • यह स्मरण रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन संतुलित होता है यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है।
  • गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है।
  • देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है।
  • गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है।
  • गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है।
  • गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ठीक हो जाता है।
  • गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है।
  • स्वस्थ व्यक्ति भी हर रोज नियमित रूप से सोने से पहले दोनों नशिकाओं में हल्का गर्म (गुनगुना ) देसी गाय का घी डालिए ,गहरी नींद आएगी, खराटे बंद होंगे और अनेको अनेक बीमारियों से छुटकारा भी मिलेगा।


अच्छा लगा हो तो आगे प्रसार दीजिए, फॉरवर्ड कीजिये, और भारतीय भाषाओं में अनुवादित कीजिये, अपने ब्लॉग पर डालिए, मेरा नाम हटाइए, अपना नाम /मोबाईल नंबर डालिए| मुझे कोई आपत्ति नहीं है| मतलब बस इतना है कि ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये|


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मैथली जी आप बधाई के पात्र है



ब्‍लागवाणी आज जनवाणी बन कर उभरा है, यही कारण है कि आज ब्‍लागवाणी के आगे अन्‍य एग्रीगेटरों 20 साबित हो रहा है। यही कारण है ब्‍लागवाणी कुछ लोगों की ऑंख की किरकिरी बना रहता है। अरूण जी का पिछला लेख पढ़ा अच्‍छा लगा और लेख से अच्‍छा एक बात और लगी श्री मैथली जी की टिप्‍पणी 
maithily said...
मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आप ब्लागवाणी को परिवार के साथ देख पांयेगे. जो आप नहीं देखना चाहते उसे आपको जबर्दस्ती नहीं दिखाया जायेगा।

मैथली जी की उपरोक्‍त बात से स्‍पष्‍ट है कि पर्दे की आड़ में ब्‍लागवाणी एक पारिवारिक पार्क बना रहेगा, साथ ही साथ पर्दा हटने पर सब कुछ खुला मिलेगा। यह जरूरी भी है जो कुछ भी बातें आज ब्‍लागजगत में आ रही है हम इसे मन की भड़ास कह सकते है किन्‍तु किसी के मन की भड़ास हर किसी को अच्छी नही लगती है, और जब भड़ास निकलती है तो वह लिहाज भूल जाती है, जैसे कि मोहल्‍ले के चौराहे पर चोखेरबालियों को देखकर आवारें सीटीयॉं मारते है। इन मोहल्‍ले के आवारों की सीटियों पर भी हस्तक्षेप करना होगा। क्‍योकि दिल के दौरे की तरह समय समय पर इन्‍हे अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के दौरे पड़ते रहते है। मनचाही अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता बिल्कुल वैसी ही होनी चाहिऐ जैसी की अरूण जी ने अपने पोस्‍ट पर की थी।

मैने जानना चाहा कि अ‍ाखिर क्‍या बात है कि विवादों में ब्‍लागवाणी को घसीटे जाने का कारण क्‍या है मैने किसी और के ब्‍लाग का परिक्षण करने के अपेक्षा अपने ब्‍लाग को ही टटोलने की कोशिश कि तो निम्‍न नजीते पर पहुँचा, कि ब्‍लावाणी के मायने क्‍या है? और क्‍यो ब्‍लागवाणी को कटघरे में खड़ा किया जाता है। यह नतीजे आपके सामने है।


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