मुख्यमंत्री घूस निधि



उत्तर प्रदेश सरकार के किसी भी विभाग के दफ्तर में, अधिकारी और बाबू के दस्तखत करने के रेट निरधारित है, बिजली विभाग में बहुत जगह अपने प्रभाव से बिना "अधिकारी निधि" का भुगतान किये काम करवा लिए, अन्तोगत्वा चालन जमा करने एक 500 रु. का फॉर्म भरने के को कहा गया और यह पूछने पर कि फॉर्म कहाँ मिलेगा अमुख ठेकेदार के पास की सूचना मिली.
 ठेकेदार के पास पहुचने पर फॉर्म का मूल्य 1000 रु. हो चूका था जिसकी कोई रसीद मांगे जाने पर भी उपलब्ध नहीं थी, घूस देना और लेना दोनों कानूनन जुर्म है किन्तु अप्रत्यक्ष रूप से लिए जाने वाले घूस का क्या इलाज़ है? वास्तव में प्रदेश में किसी भी विभाग में बिना घूस के कोई काम संभव ही नहीं है.. 
मुख्यमंत्री घूस निधि
एक सुझाव है कि प्रदेश में घूस प्रथा को कानूनन मान्यता दे देनी चाहिए. "मुख्यमंत्री घूस निधि" नाम से विभाग बने जहाँ पर निधारित कम के लिए घूस देकर रसीद जनता रसीद कटवा ले ताकि जनता को प्रत्येक पटल पर फुटकर में घूस देने बचना पड़े और घूस देना और लेना दोनों कानूनन जुर्म है के अपराध और अपराधी दोनों बचे रहे. एक माह में मुख्यमंत्री घूस निधि विभाग द्वारा एकत्र राशि को मंत्री, विधायक, अधिकारी और कर्मचारियों में औकतानुसार वितरित कर दिया जाये.


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गाँधी और सुभाष



गाँधी और सुभाष
गाँधी जी सुभाष बाबू की गतिविधियों सको लेकर बहुत चिंतित थे. एक ख़ुफ़िया ब्रिटिश रिपोर्ट के अनुसार बम्बई में एक निजी बैठक में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा- "मैं जनता हूँ कि देश में 'फारवर्ड ब्लॉक' एक जबरदस्त संगठन है. सुभाष बाबू ने हमारे लिए बहुत जोखिम उठाया है लिन्तु वे भारत में अपनी सरकार स्थापित करना चाहते है तो उन्हें रोकना पड़ेगा"
(ट्रांसफ़र ऑफ़ पॉवर-II क्र.  90.  26 मई 1942 को ख़ुफ़ियाविभाग की रिपोर्ट पृष्ट 35 )


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गलत काम सरकार करे और महाधिवक्ता ठीक पैरवी नहीं कर रहे है



कुछ समाजवादी ऐसी करते है जैसे इन्कोउन्टर सिर्फ गुजरात में ही होते है... वास्तव में उत्तर प्रदेश तो तो आतंकियों को ही पुलिस, सेना और जनता का इन्कोउन्टर की पूरी छूट अखिलेश सरकार ने दिया हुआ है.. 
 
अखिलेश यादव सरकार ने 29 मामलों में 15 आरोपियों से मुकदमे वापस लेने की घोषणा की। जिन आरोपियो का मुकदमा वापस लेने की पहल की गयी उसमे 23 नवम्बर 2007 में फैजाबाद, वाराणसी और लखनऊ में हुए विस्फोटों के आरोपी तारिक काजमी, 2008 में रामपुर में सीआरपीएफ कैंप में हुए हमले के आरोपी जावेद उर्फ गुड्डू, ताज मोहम्मद और मकसूद शामिल हैं। इनके अलावा देश विरोधी गतिविधियों के आरोपी बिजनौर का रहने वाला नौशाद, याकूब और नासिर हुसैन शामिल है। इनके साथ ही अहमद हसन, शमीम, मो. कलीम अख्तर, अब्दुल मोईन, अरशद, सितारा बेगम और इम्तियाज अली के मुकदमों की वापसी विचाराधीन है।
 
इस मामले लखनऊ हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एसपी सरकार से पूछा है आतंकी मामलों में बंद आरोपियों से मुकदमे वापस लेने के पीछे कौन है? कोर्ट ने सरकार से वे दस्तावेज तलब किए हैं जिनमें मुकदमे वापसी की कार्यवाही शुरू करने संबंधी नोटिंग की गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार से विशेष तौर पर वह दस्तावेज तलब किया है जिसमें पहली बार आदेश किया गया कि आतंकवाद के आरोपियों से मुकदमे वापस लेने की कार्यवाही शुरू की जाए। हाईकोर्ट के बार-बार आदेश के बावजूद सरकार द्वारा मुकदमे वापसी से संबंधित मूल दस्तावेज अदालत में पेश न किए जाने पर 3 जजों की बेंच ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। जस्टिस डीपी सिंह, जस्टिस अजय लाम्बा व जस्टिस अशोक पाल सिंह की बेंच ने सरकार से अगली तारीख तक विभिन्न जिलों में सरकार की ओर से लगाई गई अर्जियां व अन्य दस्तावेज पेश करने का आदेश देना पड़ा। इसके बाद अखिलेश सरकार को कड़ी फटकार लगते हुए 2 जजों की बेंच ने आतंकवाद के 19 आरोपितों से मुकदमे वापस लेने पर अंतरिम रोक लगा दी थी। ये है अखिलेश सरकार के कृत्य कि जबतक घोड़ी पर चाबुक इस्तेमाल न किया जाये वो काबू में नहीं आती है..
 गलत काम सरकार करे और महाधिवक्ता ठीक पैरवी नहीं कर रहे है
कोर्ट में सरकार के कुकृत्यो से अजीज आकर प्रदेश के महाधिवक्ता एसपी गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया, आखिर बेज्जती से लाल बत्ती बड़ी नहीं होती है और समाजवादी पार्टी के लोग बोल रहे है की श्री गुप्ता सरकार की ठीक पैरवी नहीं कर रहे थे ये बताइए हत्या, बलात्कार और दंगे और गलत काम सरकार करे और महाधिवक्ता ठीक पैरवी नहीं कर रहे है, सरकार गलत काम बंद करे पैरवी भी ठीक हो गाएगी..


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यह कैसा ख़ूनी जलसा है जहाँ बिना संवेदनाओ के मुबारकबाद है ?



 यह कैसा ख़ूनी जलसा है जहाँ बिना संवेदनाओ के मुबारकबाद है ?
अभी कुछ मित्रो से करेली (इलाहाबाद का मुस्लिम बाहुल्य इलाका) में मिल कर आ रहा हूँ, वहां एक नाला बहता है जो खून से काफी कुछ लाल हो चुका था और शाम तक पूरी तरह से खून से लाल हो जायेगा. जो आगे जाकर बिना साफ़ सफाई के यमुना नदी में मिल जाता है..
 रास्ते में १५-२० पड़वा (भैस के बच्चे) अटला कसाई खाने की ओर हाके लिए जा रहे थे , पेट पर कुछ खास चिन्ह थे जो काटे जाने की ओर इशारे करते है... और ये जानवर अपनी मौत से अनजान ख़ुशी से आगे बढ़े चले जा रहे थे..
 यह कैसा ख़ूनी जलसा है जहाँ बिना संवेदनाओ के मुबारक बाद है ?


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सरदार पटेल का गाँधी को उनके ब्रह्मचर्य के प्रयोगों पर खत



सरदार पटेल का गाँधी को उनके ब्रह्मचर्य के प्रयोगों पर खत

25 जनवरी, 1947 लड़कियों के साथ गांधी के ब्रह्मचर्य के प्रयोगों पर सरदार पटेल के क्रोध की कोई सीमा नहीं थी. गांधी जब मरियम-हीरापुर में थे तब पटेल ने लिखा था, ‘‘किशोर लाल मशरूवाला, मथुरादास और राजकुमारी अमृत कौर के नाम आपके पत्र पढ़े. आपने हमें पीड़ा के अग्निकुंड में धकेल दिया है. मैं समझ नहीं सकता कि आपने यह प्रयोग दोबारा शुरू करने का विचार क्यों किया? पिछली बार आपसे बात करने के बाद हमें लगा था कि यह अध्याय खत्म हो चुका है. आपको हमारी भावनाओं की परवाह नहीं है. हम नितांत असहाय महसूस कर रहे हैं. देवदास की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है. हम सब की पीड़ा की कोई सीमा नहीं है. अगली चर्चा तक आप यह सब रोक दें...’’
16 फरवरी, 1947 पटेल के पत्र से पहले गांधी ने नवजीवन प्रकाशन के जीवन देसाई को पत्र लिखकर कहा था कि वे उनके ब्रह्मचर्य के प्रयोगों का विवरण हरिजन सहित नवजीवन के प्रकाशनों में छापें. पटेल ने लिखा: ‘‘...इनके प्रचार से दुनिया को कोई लाभ नहीं होगा. आप कहते हैं कि दूसरों को आपके ब्रह्मचर्य के प्रयोगों का अनुकरण नहीं करना चाहिए. आपके इस कथन का कोई अर्थ नहीं. लोग बड़ों के दिखाए रास्ते पर चलते हैं. न जाने क्यों आप लोगों को धर्म की बजाए अधर्म के रास्ते पर धकेलने पर तुले हैं...लाचारी की इस हालत में नवजीवन के ट्रस्टी इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि चाहे जो हो जाए, वे इस प्रयोग के बारे में कुछ नहीं छाप सकते.’’
सरदार पटेल का गाँधी को उनके ब्रह्मचर्य के प्रयोगों पर खत


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टोपी वालो आतंक मचाओ सपा आपके साथ है..



साबरमती एक्सप्रेस की बोगी नंबर एस 6 को लगभग 1500 शांतिप्रिय समुदाय के लोगो ने घेर पर उसमें आग लगा दी. इस अग्निकांड में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिसमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे थे. कोच को आग के हवाले करने वाले लोग इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि कोच एस 6 में कारसेवक और उनके परिवार वाले यात्रा कर रहे है. कोई हिंदू यात्री बोगी से बाहर ना निकल पाए इसीलिए योजना के अनुसार उन पर पत्थर भी बरसाए जाने लगे. इसीलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि इस घटना को एक सोची-समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया. गुजरात पुलिस ने भी अपनी जांच में ट्रेन जलाने की इस वारदात को आईएसआई की साजिश ही करार दिया था, जिसका मकसद हिन्दू कारसेवकों की हत्या कर राज्य में साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना था.
हिन्दू कारसेवकों की हत्या कर राज्य में साम्प्रदायिक

हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती ही है. गुजरात के कई शहरों में भड़के साम्प्रादायिक दंगे गोधरा की प्रतिक्रिया के रूप में सामने आए. इन दंगों का कारण कुछ और नहीं बल्कि साबरमती एक्सप्रेस में जिंदा जलाए गए कारसेवकों की मौत का बदला लेना था. विदेशी चरित्र वाली मीडिया तथा वोट की राजनीति करने वालों ने गोधरा कांड की प्रतिक्रिया के रूप में उभरे गुजरात दंगों के बाद हिंदुओं को पूरे विश्व में दंगाइयों के रूप में प्रस्तुत कर दिया. और उस पर तुर्रा ये कि दंगों की बात करते समय कहीं भी ये नहीं कहा गया कि इसके पीछे गोधरा का भीषण नरसंहार जिम्मेदार था.
साबरमती एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे निर्दोष और मासूम कारसेवक व उनके परिवार जिसमें छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे, को निर्मम तरीके से आग के हवाले करने वाले दंगाई मुसलमान ही थे. गोधरा नरसंहार पर किसी मिडिया या किसी राजनैतिक पार्टी ने मुस्लिमो पर निशाना नहीं साधा, लेकिन जब गोधरा नरसंहार की प्रतिक्रिया हुई तो मिडिया और सेक्युलर पार्टियों द्वारा प्रचारित किया गया कि गुजरात में हिंदुओं ने मुसलमान आबादी को अपना निशाना बनाया तो वैश्विक स्तर पर हिंदू धर्म के लोगों को एक कट्टर और क्रूर धर्म के रूप में प्रचारित किया गया.
टोपी वालो आतंक मचाओ सपा आपके साथ है..
पहले कहा जाता था कि आतकवाद का कोई धर्म नहीं होता और आज मुज्जफरनगर दंगो के के बाद कहा जा रहा है कि दंगो का कोई धर्म नहीं होता है, ये बाते वही लोग कह रहे है जो भगवा आतकवाद की बात करते है और गुजरात दंगो को हिंदु दंगा कहा गया था, आखिर आज पैमाने क्यों बदल रहे है क्योकि आज उत्तर प्रदेश में टोपी वालो की सरकार है? पंथ/धर्म निर्पेक्षता यह कहती है सभी वर्गों के लिए सामान व्यवहार हो किन्तु वोट की राजनीति सारे आकडे और पैमाने बदल रही है.
आज गोधरा पर बात करने की जरूरत मुझे आज इसलिए पड़ी क्योकि आज समय है की इन छद्म वोट लोभियों उनकी करतूतों का बात जनता के बीच ले जाया जा सके. क्योकि गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कहती है कि अखिलेश सरकार के गठन के बाद सांप्रदायिक दंगो/झडपो का शतक लग चुका है और मुज्जफरनगर में चल रहे दंगो में सैकड़ो लोग जान-माल से हाथ धो चुके है. किन्तु आज न तो मिडिया और न ही सेक्युलर रुदालियो के आखो में आंसू है क्योकि ये दंगा शांतिप्रिय लोगो के नेतृत्व में सपा सरकार द्वारा प्रायोजित है. हज की रवानगी के साथ अखिलेश यादव की टोपी यही सन्देश देती है कि टोपी वालो आतंक मचाओ सपा आपके साथ है..


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मुजफ्फरनगर दंगा: अब तक 41 मरे



  • सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहे मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाके को तीसरे दिन भी राहत नहीं मिली। सोमवार को हुई हिंसा में 13 लोगों की जान चली गई। अब तक मरने वालों की कुल संख्या 41 तक पहुंच चुकी है।
  • अलग-अलग स्थानों में धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने के अलावा कई घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया। देर शाम रतनपुरी क्षेत्र में दो भाइयों की हत्या कर दी गई।
  • मीरापुर के पड़ाव चौक पर उन्मादी युवकों ने मेरठ के सनोटा और परीक्षितगढ़ के एक-एक व्यक्ति का गला रेत डाला। इनमें से एक की मौत हो गई, जबकि दूसरे का उप
    चार चल रहा है।
  • तितावी क्षेत्र के मुकंदपुर में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई जबकि उसका भतीजा गंभीर रूप से घायल हो गया। तितावी क्षेत्र के धौलरा में भी एक युवक को चाकुओं से गोदकर फेंक दिया गया। बुढ़ाना के जौला नहर से एक लाश बरामद हुई है। इन दोनों की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है।
  • मंसूरपुर थाना क्षेत्र के जौहरा गांव में एक व्यक्ति की गर्दन काटकर हत्या की गई है। शाहपुर के कुटबा-कुटबी में एक लाश बरामद हुई है। प्रशासन ने यहां से अब तक 104 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है।
  • उधर, शामली जिले में बाबरी गांव के कुरमाली गांव में एक धर्मगुरु की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बागपत में सोमवार को अलग-अलग स्थानों पर लाशें मिलने से सनसनी फैल गई।
  • काठा गांव में युवक की हत्या कर चेहरा बुरी तरह जला दिया गया, उसकी भी शिनाख्त नहीं हो पाई। बड़ौत के पास नहर में अज्ञात शव मिला है। इसके अलावा एक महिला का भी शव मिला है
  • इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी स्थिति सामान्य होने के बाद घटना की जांच करने की बात कही है। सोमवार को दंगाइयों ने मुजफ्फरनगर में आठ, शामली में एक और बागपत में चार लोगों की हत्या कर दी।
  • अलग-अलग स्थानों में धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने के अलावा कई घरों को भी आग के हवाले कर दिया गया। देर शाम रतनपुरी क्षेत्र में दो भाइयों की हत्या कर दी गई।


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Muzaffarnagar riots News and Photos



Muzaffarnagar riots News and Photos
 मुज्जफरनगर दंगे की अखबारों में कहानी
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 का दर्द



भारत के अतिरिक्त संसार में ऐसा कोई देश नहीं है, जहां अलग-अलग सम्प्रदायों व वर्गों के लिए अलग-अलग कानून विद्यमान हों। अमरीका व अन्य पश्चिमी देशों में पूर्णतया समान नागरिक संहिता लागू है, जहां बड़ी संख्या में मुसलमान व अन्य अल्पसंख्यक वर्गों के लोग रहते हैं। अनेक प्रगतिशील मुस्लिम देशों यथा मिस्र, सीरिया, तुर्की, मोरक्को, इंडोनेशिया व मलेशिया, यहां तक कि पाकिस्तान में भी बहुपत्नीवाद, मौखिक तलाक तथा पुरुष-प्रधान उत्तराधिकार आदि के मामलों में भेदभावपूर्ण व दमनकारी कानून बदल दिए गए हैं और उनको उदार व मानवीय बनाया गया है।
पाकिस्तान जैसे कट्टर इस्लामिक देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 20 दिसम्बर, 2003 के महत्वपूर्ण निर्णय में मुस्लिम लड़कियों को अपनी मर्जी से विवाह करने की स्वतंत्रता प्रदान की है किन्तु हमारे देश में अल्पसंख्यकों के संरक्षण के नाम पर आज भी महिलाओं को अन्याय, दमन व पीड़ा सहनी पड़ रही है। और संविधान के अनुच्छेद 44 का प्रावधान कि सभी के लिए निजी कानून एक जैसे होंगे। अपने अपने अमलीजमा पहनाये जाने का इंतजार कर रहा है..


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वीरेन्द्र कुमार सिंह चौधरी "दद्दा" के साथ



आज से मैंने वीरेन्द्र कुमार सिंह चौधरी को ज्वाइन किया है, इलाहाबाद के अधिवक्ताओ में वे किसी परिचय के मोहताज नहीं है, ९७ वर्षीय श्री चौधरी जिसने हम सब प्यार और सम्मान से दद्दा बोलते है. उच्च न्यायलय में वरिष्ठ अधिवक्ता है और उत्तर प्रदेश में भाजपा की पहली पूर्ण बहुमत की कल्याण सरकार में महाधिवक्ता रहे है और उनके पुत्र श्री यतीन्द्र सिंह छतीसगढ़ उच्च न्यायलय में मुख्य न्यायमूर्ति है...

आज अपने आपने एक विशेष दिन था, जिसके सानिध्य में मैं था उनके बारे में यह बोलना उचित होगा कि जितनी तो मेरे पिताजी की उम्र नहीं है उससे ज्यादा दद्दा की वकालत  है, मैं सौभाग्यशाली हूँ की ये अवसर मुझे मिल रहा है..


दद्दा "सविधान और व्यक्तिगत विधि" पर एक लेख लिख रहे है और इसके लिए उन्होंने मुझे माध्यम चुना है.. आज उनके साथ रहकर काफी ज्ञानार्जन हुआ और आगे भी यह जारी रहेगा, लेख बोलने से पहले उन्होंने मुझे निर्देश दिया कि छोटा-छोटा लिखना पन्ने कम लगे जिससे वास्तव में आज के लोगो को पन्ने की कीमत क्या पता होगी.  मेरे घर पहुचने पर पिताजी ने मुझे बताया की दद्दा फ़ोन करके बोल रहे थे कि बी. एन. सिंह, प्रमेन्द्र ने आज बहुत अच्छा काम किया..  :)

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नोट - इस दौरान अगले कुछ दिनों तक शाम ५ बजे से रात्रि ८ बजे तक मैं  फ़ोन पर उपलब्ध नहीं रहूँगा.


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कुछ बात मुसलमानों के प्रति



मुस्लिम कत्तई बुरे नहीं है.. मेरे भी कुछ अच्छे दोस्त है.. कही न कही कोई कमी रही उसे हमें विचार करना चाहिए.. मगर के प्रश्न ये की मुस्लिमो के अन्दर इतना ही प्यार था तो भारत विभाजन की नीव क्यों रखी गयी... ? 
मुस्लिम इतने ही प्रेमी जीव है तो भारत, पाकिस्तान और बाग्लादेश में सामान अनुपात में हिन्दू और मुस्लिम रहते थे, आज ये अनुपात पाकिस्तान और बाग्लादेश में क्यों नहीं बचा रहा जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक है? 
रेल को रफ़्तार में चलने के लिए दोनों पटरी को मजबूत होना जरूरी है और यही भारत में है जो मुस्लिम फल-फूल रहे है वरन ये जीव प्रेमी कौम जिस देश में बहुत संख्यक हुई है वहां इसने अल्पसंख्को का भक्षण किया है.. 
http://fellowshipofminds.files.wordpress.com/2011/12/peaceful_islam.jpg
इसका मूल कारण है मदरसे की शिक्षा जहाँ यही पढाया जाता है कि इसे मारो तो ख़ुदा जन्नत देगा, जन्नत में मजे के लिए 72 हूर मिलेगी, और भारत के नेता वोट के लिए 72 हूरो के पास जाने वाले पढाई पर रोक लगा ही नहीं सकते वास्तव में दक्षिण एशिया के मुस्लिम दोयम दर्जे के मुस्लिम है जो आज तक दकियानूसी में जी रहे है.. 
वास्तव में जिन्ह मुस्लिमो में उच्च शिक्षा पायी है वो देशहित की भावना के साथ रह रहे है, मेरे फेसबुक अकाउंट और मेरे रियल लाइफ में ऐसे उच्च विचारो वाले मुस्लिम है, मुझे उनका मित्र होने का गर्व भी है.. जो एक सच्चे मुस्लिम होने के साथ साथ सच्चे भारतीय भी है..


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समाजवादी सरकार की धर्मनिरपेक्षता के नए आयाम, मंदिर गिराया गया



नोयडा के निलौनी गाव में निजी जमीन पर बने के मंदिर और गौशाला को नगर विकास मंत्री आज़म खान के शह पर ३०-६-२०१३ को बिना कारण बताओ नोटिस दिए गिरा दिया.. मेरे पास हार्ड कॉपी फोटोग्राफ है जो मैंने अपलोड नहीं कर पा रहा हूँ.. 
आख़िर मदिरों को क्यों गिराया जाता है? क्योकि मंदिरों में ख़ुदा नहीं रहते ? या हिन्दू मुस्लिमो कि तरह बावली नहीं है? या सत्ता के समाजवादी दलालों के लिए हिन्दू कोई वोट बैंक नहीं है?


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उच्च रक्तचाप : सुझाव



२ चम्मच प्याज का रस, २ चम्मच शहद मिलकर सुबह और शाम खाली पेट लें. भोजन में कच्ची प्याज नित्य खाना चाहिए.
उच्च रक्तचाप की शिकयत वले बुद्धिजीवी वर्ग वालो को प्रतिदिन २-३ घंटे ससंकल्प मौन व्रत के साथ ही साथ सप्ताह में एक बार ६ घंटे से लेकर १८ घंटे तक मौन व्रत अवश्य करना चहिये. मौन साधना की अवधि में अनुष्ठानो के अतिरिक्त ऐसी प्रवित्तियो से बचना चाहिए, जिनसे किसी प्रकार की उत्तेजना पैदा होने की जरा भी सम्भावना हो.
यदि अच्छी तरह १५ मिनट श्वास का ध्यान किय जाये तो मानसिक तनाव दूर होगा, शांति मिलेगा, बढ़ा हुआ रक्तचाप दूर होगा.


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फेसबुक ब्लॉग की जगह नहीं ले सकता



२००१० में विधि स्नातक होने और फेसबुक पर आने के बाद ब्लॉगर की दुनिया में मेरी दस्तक थोड़ी कम हुई. जिस तरह शादी के बाद लड़का काफी समय तक अपने एक नये जीवन में मस्त हो जाता है, दोस्त क्या कर रहे है कौन दोस्त कहाँ है इस दुनिया से बहुत दूर अपनी एक नयी ज़िन्दगी में व्यक्ति होता है. व्यक्ति की जीवन में नयी नयी पत्तियां कितनी भी प्रभावी क्यों न हो जाये किन्तु उसकी जड़े जितनी ही पुरानी होती है उसको उतनी ही मजबूती देती है.
मैंने पिछले 3 वर्षो में ब्लॉग लिखना बंद तो नहीं किया किन्तु जो नियमितता थी वो जरूर कम हुई, फेसबुक तो सिर्फ टाइम पास का माध्यम है क्योकि हम जो वहा करते है, २४ घंटे बाद वो ऐसा इतिहास हो जाता है जो किसी को भी याद नहीं होता है. सोशल नेटवर्किंग एक संपर्क माध्यम हो सकता है किन्तु व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के प्रचार का माध्यम कभी नहीं.फेसबुक की अपनी एक अलग दुनिया और ब्लॉग की अपनी अलग और फेसबुक कभी भी ब्लॉग की जगह नहीं ले सकता. मैंने कभी लिखना छोड़ा नहीं किन्तु कम जरूर हुआ इसलिए वापसी करने जैसा कोई प्रश्न नहीं है,कोशिश होगी की कम से कम अच्छा और प्रभावी लेखन हो. बाकि राम जी मालिक है.


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Real Thakur Raghuraj Pratap Singh Raja Bhaiya



Real Thakur Raghuraj Pratap Singh Raja Bhaiya
परवीन ने गाँव का नाम बदलवाने की शर्त क्यों रखी मुझे समझ नहीं आया... ऐसा क्या कर दिया ज़िया साहब ने उस गाँव के लिए जो उसका नाम उनके नाम पर रखा जाए? मरने की जगह का नाम मरने वाले पुलिस अफसर के नाम पर रखा जाने लगा तो हर घंटे किसी न किसी शहर या गाँव का नाम बदल जायेगा... फिर क्या होगा? चिट्ठी पोस्ट करने से पहले लोग अखिलेश यादव को फ़ोन करके गाँव का ताज़ा नाम कन्फर्म किया करेंगे... और यदि एक ही जगह पर एक से अधिक लोग मुठभेड़ में मारे गए तो एकता कपूर के सीरियल की तर्ज पर उनकी बेवाओं के बीच जंग होगी कि किसके पति के नाम पर गाँव का नाम रखा जाए.... उफ़! मुझे तो सोचकर ही डर लग रहा है..
Real Thakur Raghuraj Pratap Singh Raja Bhaiya



Real Thakur Raghuraj Pratap Singh Raja Bhaiya

Real Thakur Raghuraj Pratap Singh Raja Bhaiya

Real Thakur Raghuraj Pratap Singh Raja Bhaiya


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आपसी प्रेम और भाईचारा प्रेरक प्रसंग



बहुत पुरानी कथा है। किसी गांव में दो भाई रहते थे।बडे की शादी हो गई थी। उसके दो बच्चे भी थे। लेकिन छोटा भाई अभी कुंवारा था। दोनों साझा खेती करते थे।
एक बार उनके खेत में गेहूं की फसल पककर तैयार हो गई। दोनों ने मिलकर फसल काटी और गेहूं तैयार किया।
इसके बाद दोनों ने आधा-आधा गेहूं बांट लिया। अब उन्हें ढोकर घर ले जाना बचा था । रात हो गई थी, इसलिए यह काम अगले दिन ही हो पाता। रात में दोनों को फसल की रखवाली के लिए खलिहान पर ही रुकना था। दोनों को भूख भी लगी थी।
दोनों ने बारी-बारी से खाने की सोची। पहले बड़ा भाई खाना खाने घर चला गया। छोटा भाई खलिहान पर ही रुक गया। वह सोचने लगा- भैया की शादी हो गई है, उनका परिवार है, इसलिए उन्हें ज्यादा अनाज की जरूरत होगी।
यह सोचकर उसने अपने ढेर से कई टोकरी गेहूं निकालकर बड़े भाई वाले ढेर में मिला दिया। बड़ा भाई थोड़ी देर में खाना खाकर लौटा। उसके बाद छोटा भाई खाना खाने घरचला गया। बड़ा भाई सोचने लगा - मेरा तो परिवार है, बच्चे हैं, वे मेरा ध्यान रख सकते हैं,लेकिन मेरा छोटा भाई तो एकदम अकेला है, इसे देखने वाला कोई नहीं है। इसे मुझसे ज्यादा गेहूं की जरूरत है। उसने अपने ढेर से उठाकर कई टोकरी गेहूं छोटे भाई वाले गेहूं के ढेर में मिला दिया।
इस तरह दोनों के गेहूं की कुल मात्रा में कोई कमी नहीं आई। हां, दोनों के आपसी प्रेम और भाईचारे में थोड़ी और वृद्धि जरूर हो गई।


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सूक्ति महाभारत से



कुर्वतो नार्थसिद्धिर्मे भवतीति ह भारत।
निर्वेदो नात्र कर्तव्यो द्वावन्यौ ह्रत्र कारणम्।। - वेदव्यास (महाभारत,वनपर्व, 32/50)

हे भारत! पुरुषार्थ करने पर भी यदि सिद्धि न प्राप्त हो तो खिन्न नहीं होना चाहिए, क्योंकि फल-सिद्धि में पुरुषार्थ के अतिरिक्त भी प्रारब्ध तथा ईश्वर कृपा दो अन्य कारण हैं।


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महाकुंभ भगदड़ - मृतकों व घायलों की सूची



इलाहाबाद जंक्शन और कुम्भ मेले में भगदड़ निश्चित रूप से प्रदेश और केंद्र सरकार की विफलता को दर्शाता है, स्टेशन पर 6.50 पर घटना हुई किन्तु SRN अस्पताल में पहला शव/घायल रात 11.15 पर पंहुचा.. बेहद विचलित कर देने वाली SRN अस्पताल ये तस्वीरे है जहाँ संघ के स्वयंसेवकों ने प्रथम राहत कार्य किया, संघ के स्वयंसेवकों ने विभिन्न शहर के अस्पतालों व घटना स्थल पर रहत कार्य में सवेदना के साथ राहत कार्य में सहयोग किया.. विभाग प्रचारक मनोज जी, जिला प्रचारक आलोक जी, देवेन्द्र प्रताप सिंह , चिंतामणि जी, नागेन्द्र जी और अनेको स्वयंसेवकों सहित मैं SRN में थे, बेली और रेलवे अस्पताल में भी अपनी स्वयंसेवकों की टीम अन्य अधिकारियो के साथ काम कर रही थी

अगर आपके परिजन इलाहाबाद में है और उनका फ़ोन नहीं लग रहा हो तो घबराने की जरूरत नहीं है, यहाँ भारी जनसमुदाय होने के कारण संचार प्रणाली टीक काम नहीं कर रही है..

मृतक :-
1. उर्मिला देवी (70), पत्‍‌नी छोटे लाल, रामबाग, बक्सर 
2. बिपताबाई (60), पत्‍‌नी देवप्रसाद मझौली, जबलपुर
3. नत्थूलाल द्विवेदी (72), पिता दिवंगत श्रीराम द्विवेदी, आशा नगर, हरदोई 
4. संध्या शुक्ला (46), पत्‍‌नी राजेश कुमार, चकेरी, कानपुर
5. कामताबाई (65), पत्‍‌नी गोपीनाथ, औरंगाबाद, महाराष्ट्र
6. रामकला श्रीवास्तव, पुत्र गंगा प्रसाद, मेहंदीनगर, प्रतापगढ़
7. रामसुती, भिंड, मध्य प्रदेश 
8. शिवकुमारी, आरा, बिहार
9. आशा देवी, आरा, बिहार 
10. चौथी लाल मीणा (46), पुत्र सुखराम
11. बबिता (35)
12. शिवकुमार देवी (45), पत्‍‌नी रमेशचंद्र, कृष्णगढ़, आरा, बिहार
13. इंद्रा सना देवी पत्नी गुप्तेश्वर राय, चंदवा बिहार
 
 घायल :-
1. प्रवीण (25), सोनीपत, हरियाणा
2. राम निवास (45), सोनीपत, हरियाणा
3. पार्वर्ती (45), धनबाद, झारखंड
4. शेष बहादुर (32), सोन बिहार, दिल्ली
5. सुमित्रा (60), बिगर, कर्नाटक
6. छोटे लाल यादव (60), बक्सर, बिहार
7. मुनीश देवी (40), मॉडल टाउन, दिल्ली
8. राजेश गुप्ता (22), दिल्ली
9. शगुनबाई (35), बड़गांव
10. ज्योति (18), बड़गांव
11. देवकी यादव (55), झारखंड
12. बिल्लो (35), जौनपुर, उप्र
13. कृष्णादेवी (40), बक्सर, बिहार
14. कमलेश मिश्रा (40), नवादा, बिहार
15. शकुंतला (35)
16. सत्यम भावना (30)
17. शेष बहादुर (55)
18. शाहबहादुर (45), इटावा, उप्र
19. लक्ष्मी अवस्थी (35), फतेहपुर, उप्र
20. बिट्टन (55) सतना, मध्य प्रदेश
21. प्रवीण कुमार (40), सोनीपत, हरियाणा
22. सरस्वती (30), छिंदवाड़ा, छत्तीसगढ़
23. राजीव गुप्ता (50), फरीदाबाद, हरियाणा
24. राधिका देवी (40), मेहरौली, दिल्ली
25. शाकराबाई (40)
26. सनंत कुमार, मिश्र पुत्र राजकुमार मिश्र, विध्ववासिनी अकबरपुर बांदा, उप्र
27. लक्ष्मीकांत विमल (36), पुत्र कृष्णकांत विमल, लोहना मधुबनी, बिहार
28. रंजना झा (35), पत्‍‌नी नागेंद्र झा, कटवरिया, दिल्ली
29. सविता झा (42), पत्‍‌नी मणेश्वर झा, दिल्ली
30. बिट्ट (55), पत्‍‌नी सालिगराम सिविल लाइंस, सतना, मध्य प्रदेश
31. शुकनबाई (35), पत्‍‌नी मुनीश बड़ागांव रीठी, कटनी, मध्य प्रदेश
32. ज्योति (12), पुत्री मुनीश बड़ागांव रीठी कटनी, मध्य प्रदेश


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भाग्य और कर्मफल - बोधकथा



एक गरीब किसान था। एक साल तक उसके खेतों में अच्छी फसल नहीं हुई, तो वह अपने बूढ़े माता-पिता के साथ जंगल चला गया। जंगल में इन तीनों को प्यास लगी। और ये लोग एक साधू की कुटिया में पहुंचे। वहां इन लोगों ने पानी पीने के बाद अपनी आपबीती भी उस फकीर को सुनायी। इसके बाद फकीर ने इन लोगों के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। किन्तु ईश्वर ने साधू से कहा इन लोगों के भाग्य में ही कष्ट है। परन्तु साधू काफी दयालु था, उसने फिर ईश्वर से प्रार्थना की। इसके बाद ईश्वर ने कहा, ठीक है तुम नहीं मानते हो, तो इन तीनों की एक-एक इच्छा पूरी की जाएगी। फकीर से यह बात पता चलते ही ये तीनों घर वापस जाने लगे। रास्ते में बूढ़ी को शंका हुई कि कहीं यह साधू हम तीनों को मूर्ख तो नहीं बना रहा है। अत: उसने ईश्वर से मांग की कि "मुझे इतिहास प्रसिद्ध सुन्दरी जुलेखा जैसी बना दो।' उसकी मांग पूरी हुई और वह एक सुन्दर युवती बन गई। उसी समय वहां एक राजकुमार आया। उस युवती ने राजकुमार से कहा, "मुझे इन दोनों से बचा लो। ये लोग मुझे जबर्दस्ती ले जा रहे हैं।' राजकुमार यह चाहता भी था। अत: उसने तुरन्त उसे अपने घोड़े पर बैठा लिया और वहां से चल दिया। बूढ़े को युवती (पूर्व में बुढ़िया) की इस झूठी बात पर गुस्सा आया। अत: उसने भी ईश्वर से मांग की कि "भगवान! उस युवती को शूकरी बना दो।' उसकी मांग भी पूरी हुई और युवती शूकरी बन गई। शूकरी बनते ही राजकुमार ने उसे रास्ते में गिरा दिया। फिर वह अपने पति और बेटे के पास लौट आयी। काफी विनती करने पर उसके बेटे ने ईश्वर से प्रार्थना की कि "इसे मेरी मां की तरह बना दो।' इस तरह वह शूकरी फिर बुढ़िया ही बन गई।


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कौमार्य की शुद्धता खो रहे हैं भारतीय



विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार अशोक सिंघल ने कहा कि भारत में कौमार्य संरक्षित रखा जाता था। लेकिन अब तो इसकी शुद्धता भंग हो गयी है और हम इसे खो रहे हैं। ‘भारत’ नहीं ‘इंडिया’ में बलात्कार की घटनाएं होने संबंधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के एक दिन बाद शनिवार को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने बलात्कार और महिलाओं से छेड़छाड़ की वारदात में इजाफे के लिए ‘पश्चिमी मॉडल’ को जिम्मेदार करार दिया और कहा कि शहरों के नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार अशोक सिंघल ने रहन-सहन के पश्चिमी तरीके को ‘‘खतरनाक’’ करार दिया और कहा कि यह संस्कृति अमेरिका से इस देश में आयी है। पश्चिमी मॉडल खतरनाक देश में बलात्कार की घटनाओं में हो रही बढ़ोत्तरी के बारे में कहा कि यह पश्चिमी मॉडल खतरनाक है। दरअसल हो यह रहा है कि हम अमेरिका की नकल कर रहे हैं। हमने अपने शहरों के मूल्यों को खो दिया है।

VHP supremo Ashok Singhal

लिव-इन रिश्तों की जीवनशैली को गलत करार देते हुए सिंघल ने कहा कि यह न केवल हमारी संस्कृति के खिलाफ है बल्कि यह कभी हमारी संस्कृति का हिस्सा भी नहीं रही है। कौमार्य की ‘शुद्धता’ भंग सिंघल ने दावा किया कि अंग्रेजों के आने से पहले भारतवासी एक ‘शुद्ध’ जीवन जीते थे। उन्होंने कौमार्य की ‘शुद्धता’ को ‘ब्रह्मचर्यम’ करार दिया और कहा कि यह अपवित्र हुई है। उन्होंने कहा कि कौमार्य संरक्षित रखा जाता था। लेकिन अब तो इसकी शुद्धता भंग हो गयी है. हम इसे खो रहे है।


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