भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 का दर्द



भारत के अतिरिक्त संसार में ऐसा कोई देश नहीं है, जहां अलग-अलग सम्प्रदायों व वर्गों के लिए अलग-अलग कानून विद्यमान हों। अमरीका व अन्य पश्चिमी देशों में पूर्णतया समान नागरिक संहिता लागू है, जहां बड़ी संख्या में मुसलमान व अन्य अल्पसंख्यक वर्गों के लोग रहते हैं। अनेक प्रगतिशील मुस्लिम देशों यथा मिस्र, सीरिया, तुर्की, मोरक्को, इंडोनेशिया व मलेशिया, यहां तक कि पाकिस्तान में भी बहुपत्नीवाद, मौखिक तलाक तथा पुरुष-प्रधान उत्तराधिकार आदि के मामलों में भेदभावपूर्ण व दमनकारी कानून बदल दिए गए हैं और उनको उदार व मानवीय बनाया गया है।
पाकिस्तान जैसे कट्टर इस्लामिक देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 20 दिसम्बर, 2003 के महत्वपूर्ण निर्णय में मुस्लिम लड़कियों को अपनी मर्जी से विवाह करने की स्वतंत्रता प्रदान की है किन्तु हमारे देश में अल्पसंख्यकों के संरक्षण के नाम पर आज भी महिलाओं को अन्याय, दमन व पीड़ा सहनी पड़ रही है। और संविधान के अनुच्छेद 44 का प्रावधान कि सभी के लिए निजी कानून एक जैसे होंगे। अपने अपने अमलीजमा पहनाये जाने का इंतजार कर रहा है..


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वीरेन्द्र कुमार सिंह चौधरी "दद्दा" के साथ



आज से मैंने वीरेन्द्र कुमार सिंह चौधरी को ज्वाइन किया है, इलाहाबाद के अधिवक्ताओ में वे किसी परिचय के मोहताज नहीं है, ९७ वर्षीय श्री चौधरी जिसने हम सब प्यार और सम्मान से दद्दा बोलते है. उच्च न्यायलय में वरिष्ठ अधिवक्ता है और उत्तर प्रदेश में भाजपा की पहली पूर्ण बहुमत की कल्याण सरकार में महाधिवक्ता रहे है और उनके पुत्र श्री यतीन्द्र सिंह छतीसगढ़ उच्च न्यायलय में मुख्य न्यायमूर्ति है...

आज अपने आपने एक विशेष दिन था, जिसके सानिध्य में मैं था उनके बारे में यह बोलना उचित होगा कि जितनी तो मेरे पिताजी की उम्र नहीं है उससे ज्यादा दद्दा की वकालत  है, मैं सौभाग्यशाली हूँ की ये अवसर मुझे मिल रहा है..


दद्दा "सविधान और व्यक्तिगत विधि" पर एक लेख लिख रहे है और इसके लिए उन्होंने मुझे माध्यम चुना है.. आज उनके साथ रहकर काफी ज्ञानार्जन हुआ और आगे भी यह जारी रहेगा, लेख बोलने से पहले उन्होंने मुझे निर्देश दिया कि छोटा-छोटा लिखना पन्ने कम लगे जिससे वास्तव में आज के लोगो को पन्ने की कीमत क्या पता होगी.  मेरे घर पहुचने पर पिताजी ने मुझे बताया की दद्दा फ़ोन करके बोल रहे थे कि बी. एन. सिंह, प्रमेन्द्र ने आज बहुत अच्छा काम किया..  :)

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नोट - इस दौरान अगले कुछ दिनों तक शाम ५ बजे से रात्रि ८ बजे तक मैं  फ़ोन पर उपलब्ध नहीं रहूँगा.


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कुछ बात मुसलमानों के प्रति



मुस्लिम कत्तई बुरे नहीं है.. मेरे भी कुछ अच्छे दोस्त है.. कही न कही कोई कमी रही उसे हमें विचार करना चाहिए.. मगर के प्रश्न ये की मुस्लिमो के अन्दर इतना ही प्यार था तो भारत विभाजन की नीव क्यों रखी गयी... ? 
मुस्लिम इतने ही प्रेमी जीव है तो भारत, पाकिस्तान और बाग्लादेश में सामान अनुपात में हिन्दू और मुस्लिम रहते थे, आज ये अनुपात पाकिस्तान और बाग्लादेश में क्यों नहीं बचा रहा जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक है? 
रेल को रफ़्तार में चलने के लिए दोनों पटरी को मजबूत होना जरूरी है और यही भारत में है जो मुस्लिम फल-फूल रहे है वरन ये जीव प्रेमी कौम जिस देश में बहुत संख्यक हुई है वहां इसने अल्पसंख्को का भक्षण किया है.. 
http://fellowshipofminds.files.wordpress.com/2011/12/peaceful_islam.jpg
इसका मूल कारण है मदरसे की शिक्षा जहाँ यही पढाया जाता है कि इसे मारो तो ख़ुदा जन्नत देगा, जन्नत में मजे के लिए 72 हूर मिलेगी, और भारत के नेता वोट के लिए 72 हूरो के पास जाने वाले पढाई पर रोक लगा ही नहीं सकते वास्तव में दक्षिण एशिया के मुस्लिम दोयम दर्जे के मुस्लिम है जो आज तक दकियानूसी में जी रहे है.. 
वास्तव में जिन्ह मुस्लिमो में उच्च शिक्षा पायी है वो देशहित की भावना के साथ रह रहे है, मेरे फेसबुक अकाउंट और मेरे रियल लाइफ में ऐसे उच्च विचारो वाले मुस्लिम है, मुझे उनका मित्र होने का गर्व भी है.. जो एक सच्चे मुस्लिम होने के साथ साथ सच्चे भारतीय भी है..


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समाजवादी सरकार की धर्मनिरपेक्षता के नए आयाम, मंदिर गिराया गया



नोयडा के निलौनी गाव में निजी जमीन पर बने के मंदिर और गौशाला को नगर विकास मंत्री आज़म खान के शह पर ३०-६-२०१३ को बिना कारण बताओ नोटिस दिए गिरा दिया.. मेरे पास हार्ड कॉपी फोटोग्राफ है जो मैंने अपलोड नहीं कर पा रहा हूँ.. 
आख़िर मदिरों को क्यों गिराया जाता है? क्योकि मंदिरों में ख़ुदा नहीं रहते ? या हिन्दू मुस्लिमो कि तरह बावली नहीं है? या सत्ता के समाजवादी दलालों के लिए हिन्दू कोई वोट बैंक नहीं है?


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