भाजपा, आरके सिंह और नैतिकता



अख़बार से पता चला कि पूर्व गृहसचिव और भाजपा सांसद आरके सिंह ने भाजपा नेतृत्व पर आरोप लगाया है कि बिहार में पैसे लेकर अपराधियों को टिकट दिया जा रहा है..
 
भाजपा की ओर से भी इस पर सफाई दिया जा रहा है और बचाव में अपनी तरह से बातें प्रस्तुत की जा रही है..

यहाँ गौरतलब यह है कि यदि आरके सिंह सच बोल रहे है तो बीजेपी परिवार को इस विषय में सोचना चाहिए कि सत्ता कुछ भी किया जाना उचित है ? जो भाजपा विचार और सिधान्तों की पार्टी नहीं परिवार कहा जाती है वह आज सत्ता और पैसे के लिए सौदा करने को तैयार हो रही है? पूर्व में इलाहबाद विश्वविद्यालय में भी विद्यार्थी परिषद् के टिकट भी बिकने की बात सामने आई थी. क्या विचारधारा परिवार इतना कमजोर और कामचोर हो रहा है कि वह जनता के बीच चुनाव फेस नहीं कर पा रहा है ?


और यदि आरके सिंह झूठ बोल रहे है तो भाजपा को यह सोचना चाहिए कि ऐसे भाड़े के लोगो को बुला बुला कर बीजेपी ज्वाइन करा कर टिकट देना कितना उचित होगा जो बीजेपी के लिए विषबीज हो रहे है..अक्सर बीजेपी के सत्तासीन होने पर बीजेपी और संघ से कई पीढ़ियों से जुड़े होने के नाम पर बीजेपी से नजदीकियां दिखाने की कोशिश की जाती है जबकि यही लोग बीजेपी के बुरे वक्त में दूर दूर तक नजर नहीं आते है और अन्य दलों में अपने हित लाभ खोजते है जैसे आज वह भाजपा और संघ में खोज रहे होते है..

मैं पहले भी कहता आया हूँ कि जमीनी स्तर के लोगो को नजरअंदाज भाड़े के लोगो पर भरोसा करके भाजपा बहुत दिनों तक सफल नहीं हो सकेगी. दिल्ली चुनाव में किरण बेदी के रूप में परिणामदेखा भी जा चूका है. कि किस प्रकार मूल कार्यकर्त्ता की अनदेखी करके बाहरी को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करना खुद दिल्ली में बीजेपी को 4 सीट समेट दिया.

कुछ भी हो इस प्रकरण में या तो आरके सिंह नंगे होगे या वो बीजेपी के अन्दर का सच उजागिर करेगे..

डर यो यह है कि कहीं मिस्टर सिंह यह न कह दे मैंने भी पैसा लोक सभा का देकर टिकट खरीदा थ


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