उत्तर प्रदेश है जहाँ समाजवाद की आड़ में एक और "यादव सिंह" पल रहा है



मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री Akhilesh Yadav​ को पिछले साल समाज कल्याण विभाग एक कर्मचारी के विरुद्ध अपने पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक करोड़ो की सम्पत्ति अर्जित करने और 3 सरकारी भूखंडो के कब्जे की शिकायत की थी. 


ऐसी ही शिकायते आवश्यक कार्यवाही हेतु आयुक्त समाज कल्याण उत्तर प्रदेश, मंडल आयुक्त इलाहाबाद, जिलाधिकारी प्रतापगढ़, उपनिदेशक समाज कल्याण इलाहाबाद मंडल को समय समय पर की.

इन शिकायतों के संबध में पिछले साल नवम्बर में ही जिला समाज कल्याण अधिकारी Praveen Singh​ मुझे फोन किया और पूछा कि आपने कोई हमारे विभाग के किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई शिकायत की है ?
इस पर मैंने कहा - हाँ, और मेरे पास आपके कर्मचारी के विरुद्ध भष्टाचार से अर्जित सम्पतियों और लाखो-करोड़ो  रूपये की सरकारी भूमि के कब्जे का पूरा प्रमाण है और कुछ प्रमाण मैंने अपनी शिकयतों के साथ संलग्न किया है और यदि आप जब मैं प्रस्तुत कर सकता हूँ. इस पर प्रतापगढ़ के समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह ने कहा कि मैं इस भ्रष्ट कर्मचारी पर अवश्य कार्यवाही करूँगा और आपको जो मदद होगी लूँगा.  मैंने भी उनको पूरा सर्पोर्ट करने का आश्वासन दिया.

2-3 माह बीत जाने के बाद भी प्रतापगढ़ के समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह ने मुझसे कोई संपर्क नही किया अपितु सूत्रों से पता चला कि भ्रष्टाचारी कर्मचारी के समक्ष नाम भी उजागिर कर दिया जो की गोपनीयता के सिद्धांत का उल्लघन भी है.

फिर मैंने एक दिन प्रतापगढ़ के समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह को फोन किया और  से मिलने का समय माँगा और जो समय उन्होंने दिया उस समय पर जब इलाहाबाद से  उनके ऑफिस में गया तो वे अपने कक्ष में उपस्थित नहीं थे. जब फोन किया तो उन्होंने बताया कि मैं डीएम साहब के साथ मीटिंग में हूँ मिल नही पाउँगा.

फिर अगले दिन उनके दफ्तर में मैंने अचानक पहुँच कर उनको पकड़ लिया और उनको विषय वस्तु से अवगत कराया कि मैं भष्टाचार के प्रकरण में बात करने के लिए आया हूँ..

मुझे बैठाकर फोन मिलाया और संबधित कर्मचारी को बनावटी लहजे में हडकाया और उसे बता दिए कि इलाहाबाद वाले वकील साहब आये जो तुम्हारे प्रकरण में शिकायत किये है और इसके 5 मिनट के अंदर ही भष्टाचारी कर्मचारी का पुत्र उनके ऑफिस में आ गया.

समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह ने मध्यस्ता कर अनैतिक तरीके से सुलह का प्रयास किया. जब मेरे द्वारा कहा गया कि मेरी शिकायत को व्यक्तिगत अपितु एक राज्य वेतन भोगी कर्मचारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार से अधिक धन अर्जन एवं 3 सरकारी भूमियों के कब्जे के संबध में है और उक्त कर्मचारी का आचरण राजद्रोह का है. इसके बाद भी समाज कल्याण अधिकारी ने शिकायत वापसी की भरपूर कोशिश की किन्तु मैंने इंकार कर वहां से चल दिया. इसके बाद मैंने प्रवीन सिंह के कृत्य की शिकायत मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav​ मंडलायुक्त इलाहाबाद और उप-निदेशक समाज कल्याण इलाहाबाद मंडल से की..

इसके बाद मैंने कई बार फोन पर समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह से कार्यवाही की स्थिति जाननी चाही किंतु उनका रवैया नकारात्मक ही मिला. अपितु मुझे यह भी सुनने को मिला कि उक्त कर्मचारी मुझे गाली दे कर जान से मारने की धमकी भी दे रहा था और कह रहा था कि मैंने 5 लाख रूपये फेक के समाज कल्याण अधिकारी को खरीद लिया है मेरे खिलाफ कोई भी शिकायत कर लो मेरा कोई कुछ बिगाड़ सकता है. मैंने पैसे पानी की तरह बहा कर जांच बंद करवा दी है.

5 लाख रूपये के प्रकरण की बात जब मेरे संज्ञान में आई तो मुझे एहसास हो गया है की समाज कल्याण विभाग की नसों में भ्रष्टाचार दौड़ रहा है और भ्रष्टाचार के जनक समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह है और उन्होंने जाँच कार्यवाही इसलिए रोक दी कि उनको भी कार्यवाही रोकने का पारिश्रमिक मिल चूका है.

इस प्रकरण के बाद मुझे एह्साह हो गया कि अखिलेश यादव से कमजोर मुख्यमंत्री और कोई नहीं हो सकता है. जिसके आदेश की क़द्र 5 लाख रूपये के लिए सेकेण्ड क्लास समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह जैसे लोग भी नही करते है. फिर मैंने 2 RTI समाज कल्याण ऑफिस प्रतापगढ़ भेजी जिसके सूचनाअधिकारी स्वयं भ्रष्टाचार की प्रतिमूर्ति समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह है जिन्होंने नियत समय बीत जाने के बाद भी कोई सूचना नही दी. इसके पश्चात मैंने अपील अधिकारी डॉ मंजू श्रीवास्तव उप-निदेशक समाज कल्याण के पास अपील की और अपील अधिकारी डॉ मंजू श्रीवास्तव उप-निदेशक समाज कल्याण ने समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह को निर्देशित किया कि नियत समय में सूचना उपलब्ध कराइ जाये किंतु भ्रष्टाचार की प्रतिमूर्ति समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह अपने अधिकारी के आदेश के बाद भी टस से मस नही हुए और नियत समय बीत जाने के बाद प्रवीन सिंह ने कोई सूचना उपलब्ध नहीं करवाई और न ही सूचना देने से इंकार किया. समाज कल्याण अधिकारी श्री प्रवीन सिंह के कृत्य से यह पता 5 लाख रूपये की रिश्वत का इतना असर होता है कि वो अपने अधिकारी के आदेश को भी मानने से इंकार कर देता है.

अब इस मामले में न्यायिक कार्यवाही के सिवाय अब कोई चारा नहीं बचा है और इसकी मैं पूरी तैयारी कर रहा हूँ क्योकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी काफी कमजोर साबित हुए जो अपने ही आदेश का अनुपालन अपने ही अधिकारी से नहीं करवा पाए और तो और उस अधिकारी से कोई जवाबदेही भी नहीं ले पाए. ऐसा अधिकारी जो रिश्वत के मद में अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का भी धज्जियां उड़ा रहा है. यह उत्तर प्रदेश है जहाँ समाजवादी शासन में  प्रवीन सिंह के रूप में एक और यादव सिंह पल रहा है..

(भ्रष्टाचार के विरुद्ध उठी आवाज का साथ दे और पोस्ट शेयर करें)


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1 comment:

MANOJ SHARMA said...

aap court main bhi chale jaaye kuch nahi hone wala...up anaaath hai,,,,5 ke 50 lakh dekar waha sab dabaa diya jaayegaa,,,,karodo ka maamla hai aakhir sabne milkar khayaa hoga,,,Har-Har Mahaadev.....magar baariki se dekhiyega esee ghamand aur bhrashthto ke ghar main sukh nahi hota......om namaha shivaya,,,,