गुर्दे की पथरी का औषधीय चिकित्सा (Pharmacological Therapy of Kidney Stones)



पथरी रोग आधुनिक जीवन-शैली और खानपान की देन है यह रोग स्त्रियों की अपेक्षा पुरूषो में अधिक पाया जाता है। बच्चे और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा होती है, जबकि वयस्कों में अधिकतर गुर्दो और मूत्रनली में पथरी बनजाती है, गुर्दे की पथरी अत्यधिक पीड़ादायक होती है, यदि समय पर इसका इलाज नहीं हुआ तो यह गुर्दे को क्षतिग्रस्त कर देती है जिससे जिंदगी खतरे में पड़ जाती है।
Urinary calculi/ kidney stone and its Ayurveda management
गुर्दे की पथरी पीडि़त रोगी को चाहिए कि वह प्रतिदिन 2-3 लीटर पानी पीएं जिससे मूत्र खुलकर आता रहे। गुर्दे की पथरी का एक मुख्य कारण ऑक्जेलेट है। इसलिए यदि आपको कभी गुर्दे में पथरी की समस्या रही हो तो कम ऑक्जेलेट युक्त खाद्य लेना चाहिए क्योंकि जो व्यक्ति गुर्दे में पथरी काली या गहरी भूरी, खुरदरी, कठोर, कांटेदार तथा वेदनायुक्त होती है। कैल्शियम ऑक्जेलेट तथा कैल्शियम फास्फेट की मिश्रित पथरी भी होती है। सरसो का साग, करी पत्ता, सहजन की पत्तियां बथुआ, गोगू (पिटवा या अंबाड़ी), कमल नाल, काजू, आवला, बादाम, फालसा, स्ट्राबेरी, प्लम, खेंदचीनी, लालमिर्च, चाकलेट, चाय, कोको, पालक, चैराई में ऑक्जेलेट की अधिक मात्रा पाई जाती है। इसलिए भोजन में इससे परहेज करना चाहिए।
My brother once caught up with the pain of Kidney due to kidney stone. It was the first time I saw my elder brother screaming in the pain.
गुर्दे की पथरी के लिए कुछ उपयोगी आयुवेदिक नुस्खे निम्न प्रकार है जो अत्यन्त लाभकारी है:-
  1. कुलत्थ क्वाथ: 25 ग्राम क्वाथ में सेंधा नमक मिलाकर दिन में एक बार पिलाएं।
  2. शुठादि क्वाथ: शुठादि क्वाथ 25 ग्राम में यवक्षार, सेंधा नमक मिलकार दो रत्ती हींग के साथ देने से लाभ होता है।
  3. पाषाणभेदादि क्वाथ: 25 ग्राम क्वाथ में गुड़ डालकर उसे शिलाजीत 3-4 रत्ती के साथ पिलाएं।
  4. गोखरू चूर्ण: गोखरू के चूर्ण को स्वल्प स्वर्णमाक्षिक भस्म के साथ, 3 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रतिदिन दें, अथवा गोक्षुर चूर्ण और यवक्षार मिलाकर जल से दें।
  5. शिलाजतु योग: शिलाजीत 4 से 6 रत्ती की मात्रा में शहद के साथ मिलकार चटाएं या दूध के साथ दें।
  6. हरिद्रा योगः हल्दी चूर्ण 3 ग्राम तथा गुड़ 10 ग्राम एक साथ मिलकार रोगी को खिलाएं।
  7. तिलादिक्षारः तिलनाल के क्षार या तिलनाल, अपामार्ग, पलाशकाष्ठ, यवकाण्ड और कदलीपत्र में से 2-4 द्रव्यों के क्षार को दूध के साथ दें, मात्रां 1 ग्राम, दिन में दो बार अथवा तिलनाल, अपामार्ग, करेले की बेल, जौ के डंठल आदि की भस्म को कपडे से छान कर रख लें, इसे 1 से 2 ग्राम की मात्रा में सात दिन तक दूध के साथ दें।
  8. कुलत्थादि घृतः इसे 10 ग्राम की मात्रा में दिन में एक साथ दें।
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