आचरण की सभ्यता और 15 अगस्त की स्वतंत्रता



आज सबसे बड़ी कमी यह है कि हमारे समाज का पूरा जोर इस बात बात पर होता है कि हम देश भक्ति दिखाने ज्यादा हैं पर उसे आत्मसात नहीं करते। दिखावे की नीव पर खड़ी इमारत कितनी मजबूत होगी और कितनी देशभक्ति इस पर हमें विचार करना होगा। हम हमेशा संविधान के भाग 3 में द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों की बात दलील देकर करते है कि हमारे संविधान में हमें यह अधिकार दिया है कि जब उसी संविधान में निर्देशित मौलिक कर्तव्य की बात आती है तो हम मौन हो जाते है। यही है देश भक्ति कि हमें हमारे अधिकार तो याद रहते है किन्तु देश के प्रति कर्तव्य नहीं याद रहता।
मित्रों, निश्चित रूप से भारत के सर्वशक्तिमान सविधान में आपको अधिकार दिया है कि आप अपने देश भक्ति का प्रदर्शन अपने मन मुताबिक करें किन्तु तनिक विचार करें कि जिस Whatsapp के प्रोफाइल पर आप तिरंगा लगाये हुए हो उसी Whatsapp क में तिरंगे कि आड़ में इनबॉक्स में गैरकानूनी अश्लील सामग्रियां रखते है और इलेक्ट्रॉनिक ढंग से प्रकाशित करने, किसी को भेजने या किसी और के जरिये प्रकाशित करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून लागू होता है और किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ अश्लील संदेश भेजते हैं तो आज जुर्म कर रहे होते है। आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 67 (ए) और आईपीसी की धारा 292, 293, 294, 500, 506 और 509 आप अपराध कर रहे होते है और जुर्म की गंभीरता के लिहाज से पहली गलती पर पांच साल तक की जेल और/या दस लाख रुपये तक जुर्माना और दूसरी बार गलती करने पर जेल की सजा सात साल हो जाती है। Whatsapp में तिरंगे कि आड़ में 7 साल तक जेल जाने वाला कृत्य करेंगे और कितना देशभक्ति से ओतप्रोत होने वाला कृत्य होगा की तिरंगा भी अपने आधुनिक रणबाकुरों से लहलहा उठेगा।
देशभक्ति सिर्फ बार्डर पर ही नहीं होती देश भक्ति आचरण से होती है।। जापान के लोग जो देश के प्रति सर्मपित है सन 2000 कि रिपोर्ट के अनुसार 1% कम बलात्कार प्रतिशत है जबकि भारत में इससाल में आकड़ों में 2% दर दर्ज हुई है। दोहरे मापदंडो पर देशभक्ति नहीं हो सकती, फेसबुक प्रोफाइल पर रेप और महिला उत्पीडन के नाम पर काला गोला होगा किंतु सड़क पर लडकियों पर नजरें गिद्ध सी होगी ये पैमाने जब तक रहेगा तब तक रेप होते ही रहेंगे और तिरंगा शर्मसार होता ही रहेगा। चाल, चरित्र और चेहरा जब तक एक सामान नहीं होता सच्ची देश भक्ति नहीं हो सकती।

15 अगस्त की स्वतंत्रता

झंडू और झंडे से देशभक्ति नहीं हो सकती, अन्ना आये आन्दोलन लाये, खूब झंडा लहराए जब खेल ख़त्म हुआ तो तिरंगा पैरों तले रौदा गया उस रैले में सब देश भक्त पहुंचे थे देश को बदलने पर कोई अपने आपको नहीं बदला नहीं। तिरंगे झंडे को फहराना बड़ी बात मानी जानी चाहिए हमारे हम में तिरंगे के प्रति सही सम्मान हो यह बड़ी बात होनी चाहिए और एक बात हम आपसे बड़े है तो जरूरी नहीं कि मेरी हर बात सही ही हो, जब तब आपकी सोच वहां तक नहीं जाएगी कि मेरे इस आचरण से देश, समाज और परिवार पर क्या असर जायेगा।

हम बदलेगे और हमारी सोच बदलेगी तो निश्चित रूप से हमारा देश और समाज भी बदलेगा, भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पुरुष प्रत्येक नारी में माँ, बहन बेटी के दर्शन करता था यहां तक स्वामी रामकृष्ण परमहंस स्वयं अपनी पत्नी में माँ के स्वरूप को देखते थे।पश्चिम के विचार में चाहे इस्लाम हो या ईसाइयत नारी कभी व्यक्ति माना ही नहीं गया इस्लाम में खुदा द्वारा दी गयी भोग सम्पदा तो ईसाइयत में सम्पति या इस्लाम से इतर नहीं।

मुझे कष्ट होता है कि जब बहुत से अपने आप को हिंदूवादी और तथाकथित राष्ट्रवादी कहने वाले लोग नारियों के प्रति पश्चात संस्कृति के प्रभाव में आकर कुत्सित विचार रखते है। एक व्यक्ति दो नाव पर एक साथ सवारी नहीं कर सकता अर्थात एक पश्चात आचरण के साथ भारतीय संस्कृति की रक्षा संभव ही नहीं है।


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छुहारा के फायदे व उसके औषधीय प्रयोग



छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन है, दोनों ही पाम जाति के एक ही पेड़ से प्राप्त होते हैं। इन दोनों की तासीर गर्म होती है और ये दोनों शरीर को स्वस्थ रखने, मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। खजूर के पेड़ रेगिस्तानी इलाकों में पाए जाते हैं। यह बहुत लम्बे होते है। इनका एक ही तना होता है जिस पर बढ़ कर पत्तियां निकलती हैं। खजूर के पेड़ में डालियाँ नहीं होती। पत्ते करीब हाथ भर लम्बे होते हैं। पत्तों की नोक कटीली होती है। पेड़ पर फल गुच्छों में लगते है। कच्चे फल हरे, पीले और पकने पर लाल होते हैं। खजूर का फल करीब ढाई से सात सेंटीमीटर लम्बा होता है। यह रंग में लाल कुछ कालापन लिए होते हैं इसके बीज लम्बे-पतले और भूरे से होते हैं। यह प्रसिद्ध मेवाओं में से एक है। छुहारे एक बार में चार से अधिक नहीं खाने चाहिए, वरना इससे गर्मी होती हैं। छुहारा खुश्क फलों में गिना जाता है, जिसके प्रयोग से शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है। शरीर को शक्ति देने के लिए मेवों के साथ छुहारे का प्रयोग खासतौर पर किया जाता है। छुहारा यानी सूखा हुआ खजूर आमाशय को बल प्रदान करता है। छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में इसका सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है। खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाता है। छुहारे व खजूर दिल को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शरीर में रक्त वृद्धि करते हैं। लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है। छुहारे को पानी में भिगो दें। गल जाने पर इन्हें हाथ से मसल दें। इस पानी का कुछ दिन प्रयोग करें, शारीरिक जलन दूर होगी।
छुहारा के फायदे व उसके औषधीय प्रयोग
  • रंग : छुहारा स्याही लिए हुए लाल रंग का होता है।
  • स्वाद : यह मीठा होता है।
  • स्वरूप : इसका पेड़ खजूर के पेड़ के समान होता है।
  • स्वभाव : छुहारे शीतल, रूखे और गर्म प्रकृति के होते हैं।
  • हानिकारक : इसका अधिक मात्रा में सेवन मलस्तंभकारक होता है।
  • दोषों को दूर करने वाला : दूध छुहारा के दोषों को दूर करता है।
  • तुलना : इसकी तुलना बादाम और मुनक्का से की जा सकती है।
  • गुण : छुहारा रुचिकारक, हृदय के लिए लाभकारी, तृप्तकारी, पुष्टकारक, वीर्य-बलवर्धक, क्षय रोग (टी.बी.), रक्त पित्त, वात ज्वर, अभिघात वमन, वात और कफ रोगों को दूर करता है। यह खून को शुद्ध करता है तथा शरीर को मोटा करता है।
छुहारे का अचार - अचार तो बहुत सी चीजों का बनता है, परन्तु छुहारे का अचार काफी गुणकारी अचार होता है।
बनाने की विधि : लगभग 1 किलो छुहारे लेकर पहले नींबू के रस में इन्हें 5 दिन तक भिगोकर रखें। बाद में जब छुहारे फूल जाए तो अन्दर के बीजों को निकालकर निम्न मिश्रण को भरते हैं। कालीमिर्च, पीपल, तज तीनों की 100 ग्राम मात्रा, सोंठ, जीरा, शाहजीरा तीनों की 50 ग्राम मात्रा कालानमक 300 ग्राम, चीनी 2 किलो सभी को कूटपीसकर मिश्रण को तैयार कर लेते हैं। छुहारे के उक्त मिश्रण को भरकर एक बर्नी में डाल देते हैं तथा ऊपर से नींबू का रस निचोड़ देते हैं। इस बर्तन को 45 दिन धूप में खुला रख देते हैं। बस अचार तैयार है। इस अचार को भोजन के समय या बाद में खा सकते हैं। यह अचार पाचक व रुचिवर्द्धक होता है तथा अपचन को दूर करता है।
छुहारा के फायदे व उसके औषधीय प्रयोग

छुहारा खाने का लाभ
  • खजूर में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। खजूर मिलता भी सर्दी में ही है। अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है। छुहारे का सेवन तो साल भर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में साल भर मिलता है। भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
  • घाव है तो छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर उसका लेप घाव पर लगाने, घाव तुरंत भर जाएगा।
  • अगर शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो तीन महीने तक छुहारे का सेवन आपको समस्या से मुक्ति दिला देगा। इसके लिए प्रात: खाली पेट दो छुहारे टोपी समेत दो सप्ताह तक खूब चबा-चबाकर खाएं। तीसरे सप्ताह में तीन छुहारे खाएं और चौथे सप्ताह से 12वें सप्ताह तक चार-चार छुहारे का रोज सेवन करें। इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी
  • साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है।
  • प्रदर रोग स्त्रियों की बड़ी बीमारी है। छुहारे की गुठलियों को कूट कर घी में तल कर, गोपी चन्दन के साथ खाने से प्रदर रोग दूर हो जाता है।
  • जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
  • दमा की शिकायत है तो दो-दो छुहारे सुबह-शाम चबा-चबा कर खाएं। इससे कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है।
  • खजूर में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। खजूर मिलता भी सर्दी में ही है। अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है। छुहारे का सेवन तो साल भर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में साल भर मिलता है।
  • छुहारा यानी सूखा हुआ खजूर आमाशय को बल प्रदान करता है।
  • छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में इसका सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है।
  • छुहारा शुष्क फलों में गिना जाता है, जिसके प्रयोग से शरीर हृष्ट पुष्ट बनता है। शरीर को शक्ति देने के लिए मेवों के साथ छुहारे का प्रयोग खासतौर पर किया जाता है।
  • छुहारे व खजूर दिल को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शरीर में रक्त वृद्धि करते हैं।
  • साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है।
  • खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाता है।
  • कवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है।
  • भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
  • प्रदर रोग स्त्रियों की बड़ी बीमारी है। छुहारे की गुठलियों को कूट कर घी में तलकर, गोपी चन्दन के साथ खाने से प्रदर रोग दूर हो जाता है।
  • छुहारे को पानी में भिगो दें। गल जाने पर उन्हें हाथ से मसल दें। इस पानी का कुछ दिन प्रयोग करें, शारीरिक जलन दूर होगी।
  • अगर आप पतले हैं और थोड़ा मोटा होना चाहते हैं तो छुहारा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन अगर मोटे हैं तो इसका सेवन सावधानीपूर्वक करें।
  • जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।
  • दमा की शिकायत है तो दोदो छुहारे सुबह शाम चबा चबा कर खाएं। इससे कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है।
  • घाव है तो छुहारे की गुठली को पानी के साथ पत्थर पर घिस कर उसका लेप घाव पर लगाएं, घाव तुरंत भर जाएगा।
  • अगर शीघ्रपतन की समस्या से परेशान हैं तो तीन महीने तक छुहारे का सेवन आपको समस्या से मुक्ति दिला देगा। इसके लिए प्रात: खाली पेट दो छुहारे टोपी समेत दो सप्ताह तक खूब चबाचबाकर खाएं। 2 छुहारे रोजाना खाने से शीघ्र पतन के रोग में लाभ मिलता है और जिन लोगों का वीर्य पतला निकलता है वह गाढ़ा हो जाता है।
  • बूढ़े आदमी बार-बार पेशाब जाते हो तो उन्हें रोजाना 2 छुहारे खिलाना चाहिए तथा रात को 2 छुहारे खिलाकर दूध पिलाना चाहिए।
  • सोते समय 1 छुहारा दूध में उबालकर खा लेते हैं और दूध को पी लेते हैं इसके सेवन के 2 घंटे बाद पानी न पिएं। ऐसा करने से आवाज साफ हो जाएगी।
  • सुबह शाम 3 छुहारे खाकर गर्म पानी पिएं। छुहारे सख्त होने से खाना सम्भव न हो तो दूध में उबालकर ले सकते हैं। छुहारे रोजाना खाते रहने से बवासीर, स्नायु की दुर्बलता तथा रक्त संचरण ठीक होता है। सुबह के समय 2 छुहारे पानी में भिगोकर रात को इन्हें चबा चबाकर खाएं। भोजन कम मात्रा में करें या रात को 2 छुहारे उबालकर भी ले सकते हैं। इससे कब्ज दूर हो जाती है।
  • छुहारे के बीज को पानी के साथ पीसकर गुहेरी पर दिन में 2 से 3 बार लेप करने से अंजनहारी में बहुत लाभ होता है।
  • एक छुहारा बिना गुठली का और 30 ग्राम जायफल खोपरा, 2 ग्राम सेंधा नमक को पीसकर और छानकर 3 खुराक बना लें। 3 दिन तक इस खुराक को 11 करके गर्म पानी के साथ सुबह लेने से गैस के रोग समाप्त हो जाते हैं।
  • 2 से 4 छुहारों को गाय के दूध में उबाल लें। उबल जाने पर छुहारे निकालकर खायें तथा बचे हुए दूध में मिश्री मिलाकर पीयें। रोजाना सुबह शाम इसका सेवन करने से मसूड़ों से खून व पीव का निकलना बंद हो जाता है।
  • छुहारे के पेड़ से प्राप्त गोंद को 3 ग्राम से लेकर 6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम चाटने से अतिसार (दस्त) में आराम मिलता है।
  • रोजाना रात को सोते समय छुहारों को दूध में उबालकर पीयें। इसको पीने के 2 घण्टे बाद तक पानी न पीयें। इसके रोजाना प्रयोग से तीखी, भोंड़ी, आवाज साफ हो जाती है।
  • दूध में भिगोकर छुहारा खाने से पक्षाघात, लकवा, फालिज, फेसियल परालिसिस के रोग में लाभ प्राप्त होता है। एक बार में 4 से अधिक छुहारे नहीं खाने चाहिए।
  • सोते समय पेशाब निकलना: एक छुहारे के 4 हिस्से करके उसको दो बार सुबह और शाम रोगी को देने से सोते समय पेशाब का निकलना बंद हो जाता है।
  • 24 छुहारे को दूध में डालकर ऊपर से मिश्री मिलाकर दूध को उबाल दें गुठली हटाकर खाने से और दूध को पी लेने से रक्त पित्त में लाभ होता है।
  • छुहारा बराबर रूप से दूध में उबालकर खाने से वीर्य बढ़ता है।
  • 2 छुहारा और मिश्री को दूध में डालकर उबालें और गर्म हो जाने पर उसकी गुठली को निकालकर छुहारे को हल्के गर्म दूध के साथ लेने से बुद्धि का विकास होता है।
  • छुहारे को जलाकर राख बनाकर मक्खन के साथ मिलाकर घाव पर लगाने से बहुत लाभ मिलता है।
  • 2 छुहारे 300 मिलीलीटर दूध में उबालकर, छुहारे खाकर दूध पीने से बार-बार पेशाब आने की तकलीफ दूर हो जाती है।
  • दूध में 2 छुहारे उबालकर, छुहारे खाकर दूध पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ने से दिल की कमजोरी दूर हो जाती है।
  • 2 या 3 छुहारे रोजाना दूध में उबालकर खाने और दूध पीने से वीर्य की कमी से होने वाला सिर का चकराना ठीक हो जाता है।
  • छुहारा खाने से खून साफ हो जाता है और त्वचा के रोग दूर हो जाते हैं।
  • 2 छुहारे रात को 300 मिलीलीटर दूध में उबालकर खाने और दूध पीने से निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) सामान्य हो जाता है।
  • सिर दर्द होने पर छुहारे की गुठली को पानी में घिसकर माथे पर लेप की तरह लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
 विभिन्न रोगों में छुहारे का उपयोग
गले के रोग
  •  छुहारा खाने से कंठ (गला) सूखना दूर हो जाता है।
  • भोजन करने के बाद रात को सोते समय दूध में उबाले हुए छुहारों को खाने से आवाज साफ हो जाती है। इसको खाने के बाद डेढ़ से 2 घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए।
  • गला सूखने पर छुहारे की गुठली मुंह में रखकर चूसना चाहिए।
बच्चों के विभिन्न रोगों में लाभकारी
  • अगर बालक को दस्त कराना हो तो रात को छुहारों को पानी में भिगो दें। सबेरे छुहारों को पानी में मसलकर निचोड़ लें और छुहारे को फेंक दें। उसके बाद वही पानी बच्चे को पिलायें। इससे दस्त साफ होगा। अथवा थोड़े से गुलाब के फूल और चीनी खिलाकर ऊपर से पानी पिला दें। इससे भी दस्त साफ होगा।
  • अगर बच्चा कमजोर हो तो उसे उम्र के अनुसार 6 ग्राम से 30 ग्राम तक छुहारे लेकर पानी में धोकर साफ कर लें और गुठली निकालकर दूध में भिगो दें। थोड़ी देर बाद छुहारों को निकालकर सिल पर पीस लें और कपड़े में रस निचोड़ लें। इस तरह दिन में तीन बार हर बार ताजा रस निकालकर बच्चे को पिलायें। बच्चे के शरीर में खूब ताकत आ जायेगी। 1 महीने से कम उम्र के बच्चे को यह रस नहीं पिलाना चाहिए।
कमरदर्द
  • छुहारे से गुठली निकालकर उसमें गुग्गुल भर दें। इसके बाद छुहारे को तवे पर सेंककर दूध के साथ सेवन करें। सुबह शाम 11 छुहारा खाने से कमर दर्द मिट जाता है।
  • सुबह शाम 2 छुहारे को खाने से कमर दर्द में लाभ होता है।
  • बिना बीज वाले छुहारे को पीसकर इसके साथ पिस्ता, बादाम, चिरौंजी और मिश्री मिलाकर, इसमें शुद्ध घी मिलाकर रख दें। 1 सप्ताह बाद इसे 2020 ग्राम तक की मात्रा में सेवन करने से कमजोरी दूर हो जाती है।
  • लगभग 25 छुहारे को स्टील या चीनी मिट्टी के बर्तन में रात भर पानी में भिगोए रखने के बाद सुबह गुठली अलग कर दें और छुहारे को दूध में पकाकर सेवन करें। इससे कमजोरी मिट जाती है।
  • 250 ग्राम गुठली रहित छुहारे, 250 ग्राम भुने चने, 250 ग्राम गेहूं का आटा, 6060 ग्राम चिलगोजा, बादाम की गिरी, 500 ग्राम गाय का घी, 500 ग्राम शक्कर और 2 लीटर गाय का दूध। दूध में छुहारे को कोमल होने तक उबालें, फिर निकालकर बारीक पीस लें और फिर उसी दूध में हल्की आग पर खोवा बनने तक तक पकाएं। अब घी को आग पर गर्म करके गेहूं का आटा डालकर गुलाबी होने तक धीमी आग में सेंक लें, इसके बाद उसमें चने का चूर्ण और खोया डालकर फिर धीमी आग पर गुलाबी होने तक भूने। जब सुगंध आने लगे तो उसमें शक्कर डालकर खूब अच्छी तरह मिलाएं। हलवा तैयार हो गया। इसमें और सारी चीजों को डालकर रखें। इसे 5060 मिलीलीटर की मात्रा में गाय के गर्म दूध के साथ रोजाना 1 बार सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है।
दमा या श्वास का रोग
  • रोजाना 2 से 4 छुहारा मिश्री मिले हुए दूध में उबालकर गुठली हटाकर छुहारा खाने के बाद वहीं दूध पीने से बहुत लाभ होता है। इससे शरीर में ताकत आती है तथा बलगम निकल जाता है जिससे श्वास रोग (दमा) में राहत मिलती है।
  • छुहारा गर्म होता है। यह फेफड़ों और सीने को बल देता है। कफ व सदी में इसका सेवन लाभकारी होता है।
  • पान में छुहारा और सोंठ रखकर कुछ दिनों तक चूसने से श्वास रोग (दमा) दूर हो जाता है।

नपुंसकता
  • छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और दूध पीने से नपुंसकता खत्म हो जाती है।
  • बराबर मात्रा में मिश्री मिले दूध में छुहारों को उबालकर गुठली हटाकर खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है और इससे वीर्य, बल, बुद्धि भी बढ़ती है।
  • रात को पानी में 2 छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे दूध के साथ खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
मोटापा
  • छुहारा शरीर में खून को बनाता है। शरीर को बलवान व मोटा बनाता है। दूध में 2 छुहारे उबालकर खाने से मांस, बल और वीर्य बढ़ता है। बच्चे के लिए छुहारा दूध में भिगो देते हैं। जब दूध में रखा छुहारा फूल जाता है तो इसे छानकर, पीसकर बच्चों को पिलाना चाहिए।
  • पथरी, लकवा, पीठ दर्द: पथरी, लकवा, पीठ दर्द में छुहारा सेवन करना लाभदायक होता है। यह मासिक धर्म को शुरू करता है। छुहारा अवरोधक अर्थात बाहर निकालने वाली चीजों को रोकता है। जैसे दस्त, आंसू, लार, वीर्य और पसीना आदि सभी को रोकता है। छुहारे में कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। कैल्शियम की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग जैसे हड्डियों की कमजोरी, दांतों का गलना आदि छुहारा खाने से ठीक हो जाते हैं।
बिस्तर में पेशाब होना
  • यदि बच्चे बिस्तर में पेशाब करते हो तो रोजाना रात को सोते समय 2 छुहारे खिलाने से लाभ होता है।
  • 250 मिलीलीटर दूध में 1 छुहारा डालकर उबाल लें। जब दूध अच्छी तरह से उबल जाये और उसके अन्दर का छुआरा फूल जाये तो इस दूध को ठंडा करके छुआरे को चबाकर खिलाने के बाद ऊपर से बच्चे को दूध पिला दें। ऐसा रोजाना करने से कुछ दिनों में ही बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है।
शरीर को ताकतवर व शक्तिशाली बनाना
  • लगभग 10 ग्राम छुहारे लेकर पीस लें। रोजाना कम से कम 2 ग्राम की मात्रा में इस छुहारे के चूर्ण को 250 मिलीलीटर हल्के गर्म दूध के साथ सोते समय लेने से शरीर मजबूत होता है। इसका सेवन केवल सर्दियों के दिनों में ही करना चाहिए।
  • छुहारा शरीर को मजबूत व शक्तिशाली बनाता है। दूध को गर्म करते समय यदि उसमें छुहारा या खजूर डाल दिया जाए और फिर उस दूध को पियें तो वह शरीर को बहुत ही शक्तिशाली बनाता है।
  • छुहारों को दूध में उबालकर खाने से खून बनता है और शरीर में ताकत बढ़ती है।
  • 4 या 5 छुहारे की गुठलियों को निकालकर इसमें लगभग 260 मिलीग्राम गुग्गुल भर दें और इन छुहारे को दूध में पकाएं। सुबह और शाम को रोजाना 1 छुहारा दूध के साथ खाने से वात रोग दूर हो जाते हैं और शरीर शक्तिशाली बनता है।
  • लगभग 500 मिलीलीटर की मात्रा में दूध लेकर उसमें 2 छुहारे डाल दें। अब दूध के आधा रह जाने तक गर्म करें, फिर इस दूध में 2 चम्मच मिश्री या चीनी लेकर मिलाकर पीयें और छुहारे को खा जायें। इसको खाने से शरीर में मांस बढ़ता है, शरीर की ताकत बढ़ती है और मनुष्य का वीर्य बल भी बढ़ता है। छुहारा खून बढ़ाता है। इसका प्रयोग केवल सर्दी के दिनों में ही करना चाहिए। इसका सेवन करने के 2 घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। एक बार में चार से ज्यादा छुहारों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • किसी मिट्टी या कांच के बर्तन में पानी लेकर उसमें 2 छुहारे शाम को भिगोकर रख दें। सुबह उठकर इन छुहारे की गुठली को निकालकर इन्हें लगभग 500 मिलीलीटर दूध में गर्म करें और 250 मिलीलीटर दूध रह जाने तक गर्म करें। अब बचे हुए दूध को पीने से शरीर की कमजोरी खत्म हो जाती है और शरीर को भरपूर मात्रा में ताकत मिलती है।


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