Flipkart को लीगल नोटिस



सेवा में, 
श्री कल्याण कृष्‍णमूर्ति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, फिल्‍पकार्ट 

नमस्कार,
मेरे ईमेल पत्र (दिनांक 21 Aug 2018, विषयक Infinix HOT 6 Pro, आर्डर नम्बर OD113024765145867000 के अर्न्‍तगत आपके द्वारा की जा रही धोखाधड़ी के सम्बन्ध में) में मुझे मेरी की गयी आपत्तियों पर आपकी ओर से कोई लिखित उत्तर अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। जिसके लिये मैंने आपको ईमेल प्राप्ति के 24 घंटे के अन्दर उत्तर देने की अपेक्षा की थी। इस सम्बन्ध में दिनांक 23 अगस्त 2018 को शाम 8 बजकर 50 मिनट पर मोबाइल नम्बर 8067987970 कॉल प्राप्त हुई, जिस पर आपके ऐजेंट काफी गलत तरीके से बात कर रहे थे। इस अभद्र वार्तालाप के बाद मुझे यह लीगल नोटिस आपको भेजने के लिये बाध्य होना पड़ रहा है और इस प्रकरण में मेरा निम्न कथन है-
  1. यह कि मैंने आपके ऐजेंट की पूरी बात सुनी और अपनी बात कही और यह भी बताया कि जो भी इंजीनियर विजिट हुआ। उस इंजीनियर ने स्वीकार किया है कि फोन में विज्ञापन के एप एक्टिव है और उसके द्वारा हटाये जाने पर भी हट नहीं रहे है। इस पर उसने अपने सीनियर किसी प्रेम सर से भी बात की और मेरी भी बात करवाई। इस पर आपके सर्विस केन्द्र के सीनियर ने मुझे कहा कि यदि फोन अपडेट करने पर विज्ञापन आ रहा है तो फोन आप अपडेट क्यों कर रहे है जैसे तर्क दिये है। अगर ऐसी सलाह देने वाले सर्विस इंजीनियर आपके पास है तो यह समझा जा सकता है कि सर्विस के लिये किस स्‍तर के लोगों को हायर किया है।
  2. यह कि मेरी इस बात पर आपके ऐजेंट का कथन किया कि फोन में जो भी विज्ञापन आ रहे है वह मेरे ईमेल आईडी की सेंटिग के कारण है और यह कोई मैन्‍यूफैक्‍चरिंग डिफेक्‍ट नही है।
  3. यह कि उनकी इस बात पर मैने उनको पुन: बताया कि मेरी ईमेल सेटिंग मे कोई दिक्कत नही है। फिल्‍पकार्ट पर रजिस्‍टर्ड ईमेल ही मेरा एक मात्र अधिकृत ईमेल है। यह मै अपने अन्‍य फोन कम्‍पनी 10 ऑर और इ‍नफिनिक्‍स के मोवाईल पर एक साथ उपयोग कर रहा हूं। अगर मेरे ईमेल की सेंटिग मे कोई दिक्कत है तो जो आपके पास से खरीदे इनफिनिक्‍स फोन पर आ रही है वह मेरे 10 ऑर कम्‍पनी के फोन पर भी आनी चाहिये।
  4. यह कि मैने आपके ऐजेंट को यह भी बताया कि मैने आपके सर्विस ऐजेंट के सामने अपने दोनो फोन पर एक्सिस बैंक सर्च कर दिखाया तो मेरे 10ऑर के फोन पर एक्सिस बैंक की अधिकृत साईट का रिजल्‍ट पहले आया जबकि आपके इन्‍फिनिक्‍स मोबाइल मे 5-6 विज्ञापनों के बाद एक्सिस बैंक की अधिकृत साईट दिखाई दी। जिससे यह स्‍पष्‍ट है कि आपके द्वारा बेचा जा रहा फोन एडवेयर इंबिल्‍ट डिफेटिव फोन है और यह प्राईवेसी और सुरक्षा के लिहास से बिल्‍कुल सुरक्षित फोन नही है।
  5. यह कि आपके फोन एजेंट ने फोन मे आ रहे विज्ञापन के लिये मुझे और मेरे ईमेल एकाउंट की सेंटिग के लिये दोषी ठहरा रहे थे। इस पर मेरे द्वारा उनसे अनुरोध किया गया कि न मै फोन मामलों का बहुत बड़ा विशेषज्ञ हूँ और न ही आप ही इसलिये इलाहाबाद मे आपकी कम्‍पनी और सर्विस सेंटर का सबसे बड़ा और जानकार अधिकारी हो उससे मेरी मुलाकात फिक्‍स करवा दीजिये और यदि मेरे वह मेरे ईमेल एकाउंट की सेंटिस मे परिवर्तन कर मोबाइल मे आ रहे अन्‍वछित विज्ञापनों को बंद कर दे। फिर मुझे इस फोन को स्‍वीकार करने मे कोई दिक्‍कत नही है किन्‍तु आपके ऐजेंट द्वारा इधर उधर की बातें की गई और अंत मे मेरा बहुमूल्‍य समय लेने के बाद बडे़ ही गंदे तरीके से फोन को काट दिया और मै हैलो हैलो ही करता रह गया।
  6. यह कि मेरे द्वारा फोन लेने के बाद से अब तक बेहद ही शालीन व्‍यवहार किया गया, जो भी दिशा निर्देश आपकी ओर से दिये गये उसका पालन किया गया। आपके कहने पर पहली रिटर्न/रिफंट रिक्‍वेस्‍ट को कैसिंल करवा कर आपके बताये तरीके से विज्ञापन बंद करने की कोशिश भी किन्‍तु सफलता न मिलने पर पुन: शाम को रिटर्न/रिफंट मेरे ईमेल पर आपके द्वारा ही जेनेरेट किया गया और इंजीनियर विजिट 18 अगस्‍त को फिक्‍स की गई।
  7. यह कि आपकी ओर से मुझे दिनांक 18, 19 और 20 अगस्‍त को इंजीनियर विजिट का टाईम दिया गया किन्‍तु आपकी ओर से कोई इंजीनियर घर पर नही आया तब मैने आपके द्वारा दिये गये इंजीनियर मनोहर को मैने फोन कर इंजीनियर विजिट की जानकारी पुख्‍ता की और घर आने का सही टाईम पूछा।
  8. यह कि मेरे द्वारा आपके प्रति भरसक सहयोग करने के बाद भी आपने मेरे साथ हर कदम पर छल-कपट किया और धोखा देकर फोन पहनाने की कोशिश करते रहे और अभी भी कर रहे है।
  9. यह कि इस फोन की सबसे बड़ी कमी यह है कि इनफिनिक्‍स यह तथ्य फिल्‍पकार्ट और जनता दोनों से छिपा रहा है कि इस फोन का लौंचर विज्ञापन इंबिल्‍ट है अथवा आपको भी इस बात का संज्ञान है और इफिनिक्‍स के अधिकृत विक्रेता होने के नाते अच्‍छा लाभांश प्राप्त कर रहे है।
  10. यह कि फोन जैसा कि नवीन अवस्था में बिक रहा है और इसे बेचे जाने के बाद भी वह उसी अवस्था मे होना चाहिये जैसा कि बेचे जाते समय था किन्‍तु फोन अपडेट करने पर विज्ञापन और एडवेयर एप्‍प इंस्‍टाल करने को कहने लग रहा है और मोबाइल मे जितने भी फोल्‍डर है सबमे यह एडवेयर आ रहे है और सर्च करने पर भी विज्ञापन आ रहा है।
  11. यह कि मेरी आपत्तियों के बाद आपका नैतिक दायित्व बनता था कि आप निर्माता कम्‍पनी से इस बारे मे बात करते कि ऐसा क्‍यो हो रहा है और ग्राहक ऐसे विज्ञापनों और एडवेयर एप्‍प इंटाल करने का विरोध कर रहा है किन्‍तु आपके द्वारा कम्‍पनी से ऐसा कुछ नहीं कहा गया बल्कि लगातार विज्ञापन और एडवेयर एप्‍प युक्त मोबाइल बेंच कर करोड़ो अरबों का व्यापार कर लाभ कमाया जा रहा है।
  12. य‍ह कि भारत सरकार ने किसी भी प्रकार की डाटा चोरी और अं‍वछित गतिविधियों पर लिप्‍त रहने की स्थिति में 15 करोड़ के जुर्माने और आपराधिक वाद दायर करने पर स्वीकृति प्रदान की है।
  13. यह कि मेरे द्वारा अनवरत प्रयास के बावजूद आपने न ही फोन बदला और न ही फोन वापस लेकर पैसे वापस किये अपितु सर्विस सेंटर के साथ मिल कर मुझे ही झूठा साबित करने की कोशिश की। मेरी सजगता रही कि मेरे पास सर्विस ऐजेंट का विडियों है जिसमें उसने समस्या का होना और उसें दूर न किया जाना तथा रिपोर्ट मे यह कहना स्वीकार किया है कि फोन में सॉफ्टवेयर इ्यूशू है और यह उससे दूर नही हो रही है। आपको इस विडियों का यूट्यूब लिंक पूर्व में भेज चुका हूँ।
  14. यह कि आपसे ₹7,599 मे यह फोन खरीदना और आपकी कम्‍पनी फिल्‍पकार्ट पर विश्वास करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल रही है। आपकी कम्‍पनी ने कहावत को चरितार्थ किया कि पैसे देकर आफत मोल लेना।
  15. यह कि पेशे से अधिवक्‍ता हूँ और मेरा काफी व्यस्तता रहती है। आपसे फोन खरीदने के बाद से मेरा काफी समय, पैसे और ऊर्जा आपसे सम्‍वाद करने में खर्च हुये है और मुझे मानसिक और आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
  16. यह कि पूर्व शिकायतों के बाद भी आपने अपनी ओर से कोई सार्थक कदम नही उठाया और सर्विस इंजीनियर की रिपोर्ट को बदल कर मुझे लगातार धोखा दे रहे है। जिससे यह प्रतीत होता है कि आपकी नीयत में खोट है और आप ग्राहक के हितों और उसकी निजता के प्रति जरा भी जागरूक नही है।
  17. यह कि इफिनिक्‍स के भारत में अधिकृत और एक विक्रेता आप है अतः एक विक्रेता के रूप में आपकी लाईबिलिटी सबसे अधिक है कि बिना जांच पड़ताल किये आप ऐसे तुटि पूर्ण सामान की बिक्री कर रहे है जो ग्राहकों के निजी और अन्य हितों के लिये हानिकारक है।
  18. यह कि उपरोक्त बिन्दुओं के आधार पर आपके विरूद्ध सेवा की कमी, ग्राहक के साथ धोखाघड़ी का प्रथम दृष्टा मामला बनता है और प्रार्थी की अनकें शिकायतों के बाद भी आपने उस पर कोई कार्यवाही नहीं की। इस प्रकार प्रार्थी से फोन वापस ले  मूल ₹7,599/- तथा सेवा की कमी और मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना के रूप में रुपये 15 लाख की मांग करता है। जो 7 कार्य‍ दिवस में प्रार्थी को उपलब्ध करवा दें अथवा समुचित जवाब दे।
अत: आपसे अनुरोध है कि इस पत्र की प्राप्ति के 7 कार्य दिवस के अंदर प्रस्‍तर 18 के अन्‍तर्गत की गई मांग पूरी नहीं करते है तो आपके विरूद्ध सिविल और आपराधिक वाद लाने के लिये विवश होना पड़ेगा। हाल मे ही भारत सरकार द्वारा डाटा चोरी के सम्बन्ध में की गई अनुशंसा के आधार पर जुर्माना के रूप में 1 करोड़ से 15 करोड़ के दावे का भी अधिकारी होगा। जिसके सम्पूर्ण हर्जे और खर्चे की जिम्मेदारी आपकी होगी।

धन्‍यवाद सहित


प्रार्थी

प्रमेन्द्र प्रताप सिंह


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मुंशी प्रेमचंद के जीवनोपयोगी अनमोल विचार व कथन



मुंशी प्रेमचंद के जीवनोपयोगी अनमोल विचार व कथन
Life-useful thoughts and statements of Munshi Premchand
प्रेमचंद जमीन से जुड़े हुए कथाकार और उपन्यासकार थे और उनका बचपन काफी संघर्षों भरा था, जो उनकी रचनाओं में भी दिखता है। उन्हें ग्राम्य जीवन की बहुत अनोखी परख थी। उनका सम्‍पूर्ण साहित्य दलित, दमित, स्त्री, किसान और समाज में हाशिये पर जी रहे लोगों की लड़ाई का साहित्य है, जिसमें समता, न्याय, चेतना और सामाजिक परिवर्तन की घोषणा है। आम जन की आसान और प्रचलित भाषा उनके लेखन की सबसे बड़ी खासियत थी, इसलिए तो इन्हें कलम का सिपाही भी कहा जाता है। प्रस्तुत हैं उनके साहित्य से लिये गये कुछ अनमोल विचार-

मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार व कथन
मुंशी प्रेमचंद के अनमोल विचार व कथन
  • अगर मूर्ख, लोभ और मोह के पंजे में फंस जाएं तो वे क्षम्य हैं, परंतु विद्या और सभ्यता के उपासकों की स्वार्थांधता अत्यंत लज्जाजनक है।
  • अच्छे कामों की सिद्धि में बड़ी देर लगती है, पर बुरे कामों की सिद्धि में यह बात नहीं।
  • अज्ञान की भांति ज्ञान भी सरल, निष्कपट और सुनहले स्वप्न देखने वाला होता है। मानवता में उनका विश्वास इतना दृढ़,इतना सजीव होता है कि वह इसके विरुद्ध व्यवहार को अमानुषीय समझने लगता है। यह वह भूल जाता है की भेड़ियों ने भेडो को निरीहता का जवाब सदैव पंजों और दांतों से दिया है। वह अपना एक आदर्श संसार बनाकर आदर्श मानवता से अवसाद करता है और उसी में मग्न रहता है।
  • अज्ञान में सफाई है और हिम्मत है, उसके दिल और जुबान में पर्दा नहीं होता, ना कथनी और करनी में। क्या यह अफसोस की बात नहीं, ज्ञान अज्ञान के आगे सिर झुकाए?
  • अतीत चाहे जैसे भी हो उनकी स्मृतियाँ प्राय: सुखद होती हैं।
  • अधिकार में स्वयं एक आनंद है, जो उपयोगिता की परवाह नहीं करता।
  • अनाथ बच्चों का हृदय उस चित्र की भांति होता है जिस पर एक बहुत ही साधारण पर्दा पड़ा हुआ हो। पवन का साधारण झकोरा भी उसे हटा देता है।
  • अनाथों का क्रोध पटाखे की आवाज है, जिससे बच्चे डर जाते हैं और असर कुछ नहीं होता।
  • अनुराग, यौवन, रूप या धन से उत्पन्न नहीं होता। अनुराग, अनुराग से उत्पन्न होता है।
  • अन्याय को बढ़ाने वाले कम अन्यायी नहीं।
  • अन्याय में सहयोग देना, अन्याय करने के ही समान है।
  • अपनी भूल अपने ही हाथ सुधर जाए तो,यह उससे कहीं अच्छा है कि दूसरा उसे सुधारे।
  • अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए, तो यह उससे कहीं अच्छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे।
  • अपने उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा हमारे संकुचित व्यवहारों का सुधारक होता है।
  • अपमान का भय कानून के भय से किसी तरह कम क्रियाशील नहीं होता।
  • आकाश में उड़ने वाले पंछी को भी अपने घर की याद आती है।
  • आत्मसम्मान की रक्षा, हमारा सबसे पहला धर्म है।
  • आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन गुरूर है।
  • आलस्य वह राजयोग है जिसका रोगी कभी संभल नहीं पाता।
  • आलोचना और दूसरों की बुराइयां करने में बहुत फर्क है। आलोचना क़रीब लाती है और बुराई दूर करती है।
  • आशा उत्साह की जननी है। आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही संसार की संचालक शक्ति है।
Munshi Premchand Quotes Thoughts In Hindi
Munshi Premchand Quotes Thoughts In Hindi
  • इंसान का कोई मूल्य नहीं, केवल दहेज का मूल्य है।
  • इंसान सब हैं पर इंसानियत विरलों में मिलती है।
  • इतना पुराना मित्रता रुपी वृक्ष सत्य का एक झोंका भी न सह सका। सचमुच वह बालू की ही जमीन पर खड़ा था।
  • उपहास और विरोध तो किसी भी सुधारक के लिए पुरस्कार जैसे हैं।
  • ऐश की भूख रोटियों से कभी नहीं मिटती। उसके लिए दुनिया के एक से एक उम्दा पदार्थ चाहिए।
Munshi Premchand Sayings - Anmol Vachan
Munshi Premchand Sayings - Anmol Vachan
  • कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है, जिन्हें हम अभिमान वश अज्ञानी समझते हैं।
  • कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता, कर्तव्य पालन में ही चित्त की शांति है।
  • कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता। कर्तव्य~पालन में ही चित्त की शांति है।
  • कर्तव्य-पालन में ही चित्त की शांति है।
  • कायरता की तरह, बहादुरी भी संक्रामक है।
  • कायरता की भांति वीरता भी संक्रामक होती है।
  • कार्यकुशलता की व्यक्ति को हर जगह जरूरत पड़ती है।
  • किसी कश्ती पर अगर फर्ज का मल्लाह न हो तो फिर उसके लिए दरिया में डूब जाने के सिवाय और कोई चारा नहीं।
  • कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सद्व्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुआब दिखाने से नहीं।
  • केवल बुद्धि के द्वारा ही मानव का मनुष्यत्व प्रकट होता है।
  • कोई वाद जब विवाद का रूप धारण कर लेता है तो वह अपने लक्ष्य से दूर हो जाता है।
  • क्रांति बैठे-ठालों का खेल नहीं है। वह नई सभ्यता को जन्म देती है।
  • क्रोध और ग्लानि से सद्भावनाएं विकृत हो जाती हैं। जैसे कोई मैली वस्तु निर्मल वस्तु को दूषित कर देती है।
  • क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात नहीं कहता, वह केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है।
  • क्रोध में व्यक्ति अपने मन की बात नहीं कहता, वह तो केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है।
प्रेमचंद की सूक्तियां
प्रेमचंद की सूक्तियां
  • ख़तरा हमारी छिपी हुई हिम्मतों की कुंजी है। खतरे में पड़कर हम भय की सीमाओं से आगे बढ़ जाते हैं।
  • खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है, आगे बढ़ते रहने की लगन का।
  • ख्याति-प्रेम वह प्यास है जो कभी नहीं बुझती। वह अगस्त ऋषि की भांति सागर को पीकर भी शांत नहीं होती।
  • गरज वाले आदमी के साथ कठोरता करने में लाभ है लेकिन बेगरज वाले को दाव पर पाना जरा कठिन है।
  • गलती करना उतना ग़लत नहीं जितना उन्हें दोहराना है।
  • घर सेवा की सीढ़ी का पहला डंडा है। इसे छोड़कर तुम ऊपर नहीं जा सकते।
  • चापलूसी का ज़हरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुंचा सकता, जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझकर पी न जाएं।
  • चिंता एक काली दीवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है, जिसमें से निकलने की फिर कोई गली नहीं सूझती।
  • चिंता रोग का मूल है।
  • चोर केवल दंड से नहीं बचना चाहता, वह अपमान से भी बचना चाहता है। वह दंड से उतना नहीं डरता है, जितना कि अपमान से।
प्रेमचंद सुभाषित और सूक्तियां
Premchand Subhashits and Sayings

प्रेमचंद सुभाषित और सूक्तियां
  • जब दूसरों के पांवों तले अपनी गर्दन दबी हुई हो, तो उन पांवों को सहलाने में ही कुशल है।
  • जब हम अपनी भूल पर लज्जित होते हैं, तो यथार्थ बात अपने आप ही मुंह से निकल पड़ती है।
  • जवानी जोश है, बल है, साहस है, दया है, आत्मविश्वास है, गौरव है और वह सब कुछ है जो जीवन को पवित्र, उज्ज्वल और पूर्ण बना देता है।
  • जिस तरह सुखी लकड़ी जल्दी से जल उठती है, उसी तरह भूख से बावला मनुष्य जरा-जरा सी बात पर तिनक जाता है।
  • जिस प्रकार नेत्रहीन के लिए दर्पण बेकार है उसी प्रकार बुद्धिहीन के लिए विद्या बेकार है।
  • जिस बंदे को पेट भर रोटी नहीं मिलती, उसके लिए मर्यादा और इज्जत ढोंग है।
  • जिस साहित्य से हमारी सुरुचि न जागे, आध्यात्मिक और मानसिक तृप्ति न मिले, हममें गति और शक्ति न पैदा हो, हमारा सौंदर्य प्रेम न जागृत हो, जो हममें संकल्प और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने की सच्ची दृढ़ता न उत्पन्न करें, वह हमारे लिए बेकार है वह साहित्य कहलाने का अधिकारी नहीं है।
  • जिसके पास जितनी ही बड़ी डिग्री है, उसका स्वार्थ भी उतना ही बड़ा हुआ है मानो लोभ और स्वार्थ ही विद्वता के लक्षण हैं।
  • जीवन एक दीर्घ पश्चाताप के सिवा और क्या है?
  • जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में है, उनका सुख लूटने में नहीं।
  • जीवन का सुख दूसरों को सुखी करने में है, उनको लूटने में नहीं।
  • जीवन की दुर्घटनाओं में अक्‍सर बड़े महत्‍व के नैतिक पहलू छिपे हुए होते हैं।
  • जीवन में सफल होने के लिए आपको शिक्षा की ज़रूरत है न की साक्षरता और डिग्री की।
  • जो प्रेम असहिष्णु हो, जो दूसरों के मनोभावों का तनिक भी विचार न करे, जो मिथ्या कलंक आरोपण करने में संकोच न करे, वह उन्माद है, प्रेम नहीं।
  • जो शिक्षा हमें निर्बलों को सताने के लिए तैयार करे, जो हमें धरती और धन का ग़ुलाम बनाए, जो हमें भोग-विलास में डुबाए, जो हमें दूसरों का ख़ून पीकर मोटा होने का इच्छुक बनाए, वह शिक्षा नहीं भ्रष्टता है।
प्रेमचंद कोट्स
प्रेमचंद कोट्स
  • डरपोक प्राणियों में सत्य भी गूंगा हो जाता है।
  • दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है।।
  • दुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी कम प्यारे नहीं होते।
  • दुनिया में विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई भी विद्यालय आज तक नहीं खुला है।
  • देश का उद्धार विलासियों द्वारा नहीं हो सकता। उसके लिए सच्चा त्यागी होना आवश्यक है।
  • दोस्ती के लिए कोई अपना ईमान नहीं बेचता।
  • दौलत से आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्‍मान है।
  • द्वेष का मायाजाल बड़ी-बड़ी मछलियों को ही फसाता है। छोटी मछलियां या तो उसमें फंसती ही नहीं या तुरंत निकल जाती हैं। उनके लिए वह घातक जाल क्रीडा की वस्तु है, भय का नहीं।
  • धन खोकर अगर हम अपनी आत्मा को पा सकें तो यह कोई महंगा सौदा नहीं।
  • धर्म सेवा का नाम है, लूट और कत्ल का नहीं।
मुंशी प्रेमचंद के अनमोल वचन
Priceless words of Munshi Premchandमुंशी प्रेमचंद के अनमोल वचन
  • नमस्कार करने वाला व्यक्ति विनम्रता को ग्रहण करता है और समाज में सभी के प्रेम का पात्र बन जाता है।
  • नाटक उस वक्त पसंद होता है, जब रसिक समाज उसे पसंद कर लेता है। बारात का नाटक उस वक्त पास होता है, जब राह चलते आदमी उसे पसंद कर लेते हैं।
  • नारी और सब कुछ बर्दाश्त कर लेगी, पर अपने मायके की बुराई कभी नहीं।
  • निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है।
  • नीति चतुर प्राणी अवसर के अनुकूल काम करता है, जहाँ दबना चाहिए वहां दब जाता है, जहाँ गरम होना चाहिए वहां गरम होता है, उसे मान अपमान का, हर्ष या दुःख नहीं होता उसकी दृष्टि निरंतर अपने लक्ष्य पर रहती है।
  • नीतिज्ञ के लिए अपना लक्ष्य ही सब कुछ है। आत्मा का उसके सामने कुछ मूल्य नहीं। गौरव सम्‍पन्‍न प्राणियों के लिए चरित्र बल ही सर्वप्रधान है।
  • नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत दो, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए।
  • न्याय और नीति लक्ष्मी के खिलौने हैं, वह जैसे चाहती है नचाती है।
  • पंच के दिल में खुदा बसता है।
  • पहाड़ों की कंदराओं में बैठकर तप कर लेना सहज है, किन्तु परिवार में रहकर धीरज बनाये रखना सबके वश की बात नहीं।
  • प्रेम एक बीज है, जो एक बार जमकर फिर बड़ी मुश्किल से उखड़ता है।
  • बल की शिकायतें सब सुनते हैं, निर्बल की फरियाद कोई नहीं सुनता।
  • बल की शिकायतें सब सुनते हैं, निर्बल की फरियाद कोई नहीं सुनता।
  • बालकों पर प्रेम की भांति द्वेष का असर भी अधिक होता है।
  • बुढ़ापा तृष्णा रोग का अंतिम समय है, जब संपूर्ण इच्छाएं एक ही केंद्र पर आ लगती है।
  • बूढ़ों के लिए अतीत में सुखो और वर्तमान के दुःखों और भविष्य के सर्वनाश से ज्यादा मनोरंजक और कोई प्रसंग नहीं होता।
  • भरोसा प्यार करने के लिए पहला कदम है।
  • भाग्य पर वह भरोसा करता है जिसमें पौरुष नहीं होता।
मुंशी प्रेमचंद के प्रेरणादायक सुविचार
Munshi Premchand Thoughts and Quotes
मुंशी प्रेमचन्द्र के प्रेरणादायक सुविचार  Munshi Premchand Thoughts and Quotes
  • मन एक भीरु शत्रु है जो सदैव पीठ के पीछे से वार करता है।
  • मनुष्य का उद्धार पुत्र से नहीं, अपने कर्मों से होता है। यश और कीर्ति भी कर्मों से प्राप्त होती है। संतान वह सबसे कठिन परीक्षा है, जो ईश्वर ने मनुष्य को परखने के लिए दी है। बड़ी~बड़ी आत्माएं, जो सभी परीक्षाओं में सफल हो जाती हैं, यहाँ ठोकर खाकर गिर पड़ती है।
  • मनुष्य का मन और मस्तिष्क पर भय का जितना प्रभाव होता है, उतना और किसी शक्ति का नहीं। प्रेम, चिंता, हानि यह सब मन को अवश्य दुखित करते हैं, पर यह हवा के हल्के झोंके हैं और भय प्रचंड आधी है।
  • मनुष्य कितना ही हृदयहीन हो, उसके हृदय के किसी न किसी कोने में पराग की भांति रस छिपा रहता है। जिस तरह पत्थर में आग छिपी रहती है, उसी तरह मनुष्य के हृदय में भी चाहे वह कितना ही क्रूर क्यों न हो, उत्कृष्ट और कोमल भाव छिपे रहते हैं।
  • मनुष्य को देखो, उसकी आवश्यकता को देखो तथा अवसर को देखो उसके उपरांत जो उचित समझा, करो।
  • मनुष्य बराबर वालों की हंसी नहीं सह सकता, क्योंकि उनकी हंसी में ईर्ष्या, व्यंग्य और जलन होती है।
  • मनुष्य बिगड़ता है या तो परिस्थितियों से अथवा पूर्व संस्कारों से। परिस्थितियों से गिरने वाला मनुष्य उन परिस्थितियों का त्याग करने से ही बच सकता है।
  • महान व्यक्ति महत्वाकांक्षा के प्रेम से बहुत अधिक आकर्षित होते हैं।
  • महिला सहानुभूति से हार को भी जीत बना सकती है।
  • माँ के बलिदानों का ऋण कोई बेटा नहीं चुका सकता, चाहे वह भूमंडल का स्वामी ही क्यों न हो।
  • मासिक वेतन पूर्णमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है।
  • मोहब्बत रूह की खुराक है। यह वह अमृत की बूंद है जो मरे हुए भावों को जिंदा कर देती है। मुहब्बत आत्मिक वरदान है। यह जिंदगी की सबसे पाक, सबसे ऊंची, सबसे मुबारक बरकत है।
  • मेरी ज़िन्दगी सादी व कठोर है।
  • मैं एक मजदूर हूँ, जिस दिन कुछ लिख न लूँ, उस दिन मुझे रोटी खाने का कोई हक नहीं।
  • मैं एक मजदूर हूँ। जिस दिन कुछ लिख न लूँ, उस दिन मुझे रोटी खाने का कोई हक नहीं।
प्रेमचंद कुछ विचार
Premchand some thoughts
''मुशी प्रेमचंद'' के 10 अनमोल विचार
  • यदि झूठ बोलने से किसी की जान बचती हो तो, झूठ पाप नहीं पुण्य है।
  • यश त्याग से मिलता है, धोखाधड़ी से नहीं।
  • युवावस्था आवेश मय होती है, वह क्रोध से आग हो जाती है तो करुणा से पानी भी।
  • लगन को काँटों की परवाह नहीं होती।
  • लिखते तो वह लोग हैं, जिनके अंदर कुछ दर्द है, अनुराग है, लगन है, विचार है। जिन्होंने धन और भोग विलास को जीवन का लक्ष्य बना लिया, वो क्या लिखेंगे?
  • लोक निंदा का भय इसलिए है कि वह हमें बुरे कामों से बचाती है। अगर वह कर्तव्य मार्ग में बाधक हो तो उससे डरना कायरता है।
  • वर्तमान ही सब कुछ है। भविष्य की चिंता हमें कायर बना देती है और भूत का भार हमारी कमर तोड़ देता है।
  • वही तलवार, जो केले को नहीं काट सकती। शान पर चढ़कर लोहे को काट देती है। मानव जीवन में आग बड़े महत्व की चीज है। जिसमें आग है वह बूढ़ा भी तो जवान है। जिसमे आग नहीं है, गैरत नहीं, वह भी मृतक है।
  • विचार और व्यवहार में सामंजस्य न होना ही धूर्तता है, मक्कारी है।
  • विजयी व्यक्ति स्वभाव से, बहिर्मुखी होता है। पराजय व्यक्ति को अन्तर्मुखी बनाती है।
  • विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला।
  • विलास सच्चे सुख की छाया मात्र है।
  • विषय-भोग से धन का ही सर्वनाश नहीं होता, इससे कहीं अधिक बुद्धि और बल का भी नाश होता है।
  • वीरात्माएं सत्कार्य में विरोध की परवाह नहीं करतीं और अंत में उस पर विजय ही पाती हैं।
  • व्यंग्य शाब्दिक कलह की चरम सीमा है उसका प्रतिकार मुंह से नहीं हाथ से होता है।
''मुंशी प्रेमचंद'' के 10 अनमोल विचार
10 priceless thoughts of "Munshi Premchand"मुंशी प्रेमचंद के जीवनोपयोगी अनमोल विचार व कथन
  • शत्रु का अंत शत्रु के जीवन के साथ ही हो जाता है।
  • संतान वह सबसे कठिन परीक्षा है जो ईश्वर ने मनुष्य को परखने के लिए गढ़ी है।
  • संसार के सारे नाते स्नेह के नाते हैं, जहां स्नेह नहीं वहां कुछ नहीं है।
  • संसार में गऊ बनने से काम नहीं चलता, जितना दबो, उतना ही दबाते हैं।
  • सफलता दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है।
  • सफलता में अनंत सजीवता होती है, विफलता में असह्य अशक्ति।
  • सफलता में दोषों को मिटाने की अनोखी शक्ति है।
  • सफलता में दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है।
  • समानता की बात तो बहुत से लोग करते हैं, लेकिन जब उसका अवसर आता है तो खामोश रह जाते हैं।
  • साक्षरता अच्छी चीज है और उससे जीवन की कुछ समस्याएं हल हो जाती है, लेकिन यह समझना कि किसान निरा मूर्ख है, उसके साथ अन्याय करना है।
  • सोई हुई आत्मा को जगाने के लिए भूलें एक प्रकार की दैविक यंत्रणाएं जो हमें सदा के लिए सतर्क कर देती हैं।
  • सौंदर्य को गहने की जरूरत नहीं है। मृदुता गहनों का वजन सहन नहीं कर सकता।
  • सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं।
  • स्त्री गालियां सह लेती है, मार भी सह लेती है, पर मायके की निंदा उससे नहीं सही जाती।
  • स्वार्थ में मनुष्य बावला हो जाता है।
  • हम जिनके लिए त्याग करते हैं, उनसे किसी बदले की आशा न रखकर भी उनके मन पर शासन करना चाहते हैं। चाहे वह शासन उन्हीं के हित के लिए हो। त्याग की मात्रा जितनी ज्यादा होती है, यह शासन भावना उतनी ही प्रबल होती है।
  • हिम्मत और हौसला मुश्किल को आसान कर सकते हैं, आंधी और तूफ़ान से बचा सकते हैं, मगर चेहरे को खिला सकना उनके सामर्थ्य से बाहर है।


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कक्षा एक में प्रवेश के लिए इंटरव्यू में किया फेल, कोर्ट ने कहा, 'मनमानी नहीं चलेगी'



अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय मे हमेंशा से जो मुस्लिम शब्‍द है वह हावी रहा है। यह मुस्लिम शब्‍द कक्षा 1 के छात्र के साथ भी पक्षपात करने मे बाज नही आया और अनिवार्य शिक्षा के कानून के बाद भी इंटरव्‍यू के आधार पर प्रवेश से वंचित कर दिया जबकि छात्र ने अच्‍छे नम्‍बर से लिखित परीक्षा उत्तीण की थी। उच्‍च न्‍यायालय ने अपने आदेश मे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि साक्षात्कार लिखित परीक्षा के अंक से 15 फीसदी से नहीं होगा और साक्षात्कार में 33 फीसदी अंक देना अनिवार्य है। विश्वविद्यालय ने इस आदेश का खुला उल्लंघन किया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रवैये पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ऐसी मनमानी की अनुमति नहीं दी जा सकती। मा. उच्‍च न्‍यायालय मे इस विभेद को छात्र के अभिवावक ने चुनौती दी और हाई कोर्ट ने रिट याचिका को स्‍वीकार करते हुये इसे जनहित याचिका मे तब्‍दील कर दिया है।
हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से वित्तपोषित एबीके हाईस्कूल में कक्षा एक में प्रवेश परीक्षा में सफल छात्र को छह सदस्यों की टीम के समक्ष साक्षात्कार के बाद मनमाने ढंग से फेल करने के खिलाफ याचिका को जनहित याचिका में तब्दील कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एक छोटे बच्चे को कक्षा एक में प्रवेश देने के लिए शैक्षिक योग्यता की परीक्षा लेने व साक्षात्कार में 40 फीसदी अंक की अनिवार्यता सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे ऐसे मामले की सुनवाई कर मनमानी पर अंकुश लगाने का क्षेत्रधिकार नहीं है, इसलिए कोर्ट स्वत: याचिका को जनहित याचिका में बदलते हुए जनहित याचिका की सुनवाई करने वाली पीठ के समक्ष दो हफ्ते में पेश करने का आदेश दे रही है। यह आदेश न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा ने छात्र प्रिंस के पिता विजय सिंह की याचिका पर दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता बीएन सिंह व प्रमेंद्र प्रताप सिंह ने बहस की। याची का कहना है कि उसके पुत्र ने कक्षा एक में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उसे छह अध्यापकों के पैनल के समक्ष साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। हर सदस्य ने एक सवाल पूछा। उसने सही जवाब दिया, किंतु जब परिणाम घोषित हुआ तो उसे फेल दिखाया गया। साक्षात्कार में केवल आठ अंक दिए गए। नियम यह है कि 100 अंक की लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थी को 25 अंक के साक्षात्कार का 40 फीसदी अंक पाना अनिवार्य है। मनमाने तौर पर कम अंक देकर फेल कर दिया गया। आरटीआइ में कारण पूछा गया तो कोई जवाब नहीं आया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि साक्षात्कार लिखित परीक्षा के अंक से 15 फीसदी से नहीं होगा और साक्षात्कार में 33 फीसदी अंक देना अनिवार्य है। विश्वविद्यालय ने इस आदेश का खुला उल्लंघन किया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रवैये पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ऐसी मनमानी की अनुमति नहीं दी जा सकती।


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