विद्यार्थी परिषद् इलाहाबाद की राजनीति



इलाहाबाद छात्र संघ में रोहित शुक्ला जीत अद्भुत है किंतु जिस प्रकार यह बताया जा रहा है कि यह अध्यक्ष पद पर विद्यार्थी परिषद् की इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पहली जीत है..

अगर हम अपने आपको संघ, बीजेपी, विहिप या अनुसांगिक सगठनों के जुड़े कहते है तो हमें अपने सगठनों से संबधित इतिहास भी सही से जान लेना चाहिए..

जहाँ तक मुझे पता है कि इससे पहले विद्यार्थी परिषद् की ओर से छात्र संघ अध्यक्ष विजय कुमार जी, रामदीन सिंह जी और लक्ष्मी शंकर ओझा हुए थे या हम कहना चाहते है वो संघ या विद्यार्थी परिषद् से नहीं के नहीं थे ??

यह हम कहना चाहते है कि पीछे 70 वर्षों में संघ की विचारधारा का नाम लेना वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नहीं था, इतनी कमजोर थी संघ की पकड़ और विचारधारा?

अतिउत्साह में कही न कही हम अपने पुराने अस्तित्व और अपने पुराने स्तंभों पर पर ही प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दे रहे है..


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