हम केशव के अनुयायी हैं



हम केशव के अनुयायी हैं
हम केशव के अनुयायी हैं,
हमने तो बढ़ना सीखा है।
लक्ष्य दूर है पथ दुर्गम है,
किन्तु पहुँच कर ही दम लेंगे।
बाधाओं के गिरि शिखिरों पर,
हमने तो चढ़ना सीखा है॥1॥
 
ख्याति प्रतिष्ठा हमें न भाती,
केवल माँ की कीर्ति सुहाती।
माता के हित प्रतिपल जीवन,
हमने तो जीना सीखा है।
अंधकार में बन्धु भटकते,
पंथ बिना व्याकुल दुख सहते।
पथ दर्शन दीपक बन,
तिल-तिल हमने तो जलना सीखा है।।2।।
 
तृषित जनों को जीवन देंगे,
शस्य-श्यामला भूमि करेंगे।
सुरसरि देने हिमगिरि के सम,
हमने तो गलना सीखा है।
धरती को सुरभित कर देंगे,
हे माँ हम मधुऋतु लायेंगे।
शूलों में भी सुमनों के सम,
हमने तो खिलना सीखा है॥3॥


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देव दुर्लभ वीर व्रत ले, संगठित हो हिंदू सारा





देव दुर्लभ वीर व्रत ले, संगठित हो हिंदू सारा
विश्व व्यापी ध्येय पथपर धर्म विजयी हो हमारा ॥

सत्य पथ अपना सनातन, नित्य नूतन चिर पुरातन
व्यष्टि से परमेष्ठी तक है,चेतना का एक स्पंदन
वेद वाणी के स्वरों में, गुंजति संस्कार धारा ॥1॥

सब सुखी हो सब निरामय, इस धराका मूल चिंतन
विश्व को मांगल्य देने, कर दिया सर्वस्व अर्पण
गरल पीकर शिव बने हम शक्ति का यह रूप न्यारा ॥2॥

जननी है वसुधा हमारी, मातृमन का भाव जागे
एकताका मंत्र दे कर,जगति मे एकात्म साधे
विश्व गुरु के परम पद पर, हो प्रतिष्ठित धर्म प्यारा ॥3॥

टैग - संघ गीत


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