वोट कैसे दें भारतीय आम चुनाव, Lok Sabha Elections 2019



आप वोट तभी दे सकते हैं, जब आपका नाम मतदाता सूची (इसे निर्वाचन सूची भी कहा जाता है) में शामिल हो. मतदाता मतदान केंद्रों, चुनाव के उम्मीदवारों, चुनाव की तारीखों और समय, पहचान पत्रों, और ईवीएम के बारे में भी जानकारी पा सकते हैं

मतदान केंद्र पर वोट देने की प्रक्रिया

  • सबसे पहले मतदान अधिकारी आपका नाम मतदाता सूची में देखेंगे और आपके आईडी प्रूफ़ की जाँच करेंगे
  • दूसरे मतदान अधिकारी आपकी उंगली पर स्याही लगाएंगे, आपको एक पर्ची देंगे, और एक रजिस्टर पर आपके हस्ताक्षर लेंगे (फ़ॉर्म 17 ए)
  • आपको पर्ची तीसरे मतदान अधिकारी के पास जमा करानी होगी और स्याही लगी अपनी उंगली दिखानी होगी. उसके बाद, मतदान केंद्र की ओर बढ़ना होगा
  • इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के चिह्न के सामने बटन दबाकर अपना वोट रिकॉर्ड करें; ऐसा करने पर आपको बीप की आवाज़ सुनाई देगी
  • वीवीपीएटी मशीन की पारदर्शी विंडो में दिखाई देने वाली पर्ची की जाँच करें. सीलबंद वीवीपीएटी बॉक्स में गिरने से पहले, उम्मीदवार के सीरियल नंबर, नाम, और चिह्न वाली पर्ची सात सेकंड तक दिखाई देगी
  • अगर आप किसी भी उम्मीदवार को पसंद नहीं करते हैं, तो आप नोटा, 'उपर दिए गए में से कोई नहीं' बटन दबा सकते हैं; यह EVM पर आखिरी बटन होता है
  • ज़्यादा जानकारी के लिए, http://ecisveep.nic.in/पर दी गई मतदाता गाइड देखें.
  • मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल फ़ोन, कैमरा या कोई अन्य गैजेट ले जाने की इजाज़त नहीं है
मतदाता सूची/निर्वाचन सूची में नाम
 आप वोट तभी दे सकते हैं, जब आपका नाम मतदाता सूची (इसे निर्वाचन सूची भी कहा जाता है) में शामिल हो. मतदाता सूची में इनमें से किसी एक के ज़रिए अपने नाम की पुष्टि करें:
  • electoralsearch.in में लॉग इन करें
  • वोटर हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें (कृपया डायल करने से पहले अपना एसटीडी कोड जोड़ें)
  • <ECI> स्पेस <EPIC No> टाइप करें और 1950 पर मैसेज (एसएमएस) भेजें (EPIC का मतलब इलेक्टर्स फ़ोटो आइडेंटिटी कार्ड है, जिसे आम तौर पर वोटर आईडी कार्ड भी कहते हैं). उदाहरण के लिए, अगर आपका EPIC नंबर 12345678 है, तो ECI 12345678 मैसेज (एसएमएस) 1950 पर भेजें
  • मतदाता हेल्पलाइन ऐप्लिकेशन डाउनलोड करें
उम्मीदवारों के नाम
जिन उम्मीदवारों ने अपने नामांकन पत्र भरे हैं, उनकी सूची देखने के लिए मतदाता, उम्मीदवार आर्काइव (यहां क्लिक करें) या मतदाता हेल्पलाइन एप (यहां क्लिक करें) पर जा सकते हैं. कृपया ध्यान दें कि उम्मीदवारों के नामांकन भरने के बाद इस जानकारी को अपडेट किया जाता है

मतदान केंद्र खोजें (वोट कहां दें)

  • अपना मतदान केंद्र खोजने के लिए, मतदाता electoralsearch.in पर जा सकते हैं
  • मतदाता वोटर हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं, जिसका नंबर 1950 है (कृपया डायल करने से पहले अपना एसटीडी कोड जोड़ें)
  • मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल फ़ोन, कैमरा या कोई अन्य गैजेट ले जाने की इजाज़त नहीं है
ईवीएम (वीवीपीएटी) का इस्तेमाल कैसे करें


पहचान कार्ड
मतदान करने के लिए मतदाता कोई भी मान्य आईडी कार्ड ले जा सकते हैं. फोटो मतदाता पर्ची को मतदान के लिए अकेले पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
  • ईपीआईसी (वोटर आईडी कार्ड)
  • पासपोर्ट
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • फ़ोटो के साथ सेवा पहचान कार्ड (केंद्र या राज्य सरकार का जारी किया गया)
    बैंक या डाक घर की पासबुक
  • पैन कार्ड
  • एनपीआर के तहत, भारत के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी स्मार्ट कार्ड
  • मनरेगा जॉब कार्ड (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी)
  • श्रम मंत्रालय का स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड
  • फ़ोटो के साथ पेंशन के दस्तावेज़
  • सांसदों / विधायकों / एमएलसी को जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र
  • आधार कार्ड
चुनाव / मतदान की तारीख
लोकसभा चुनाव 11 अप्रैल - 23 मई, 2019 से निर्धारित हैं| कृपया अपनी खुद की मतदान तिथि जानने के लिए electoralsearch.in पर जाएँ।
  1. चरण 1 - 11 अप्रैल
  2. चरण 2 - 18 अप्रैल
  3. चरण 3 - 23 अप्रैल
  4. चरण 4 - 29 अप्रैल
  5. चरण 5 - 6 मई
  6. चरण 6 - 12 मई
  7. चरण 7 - 19 मई
चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे। कृपया ध्यान दें कि आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, उड़ीसा और सिक्किम विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के समानांतर होंगे| कृपया अधिक जानकारी के लिए eci.gov.in देखें।


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आयुर्वेद की अमृताबूटी अमृता अर्थात गिलोय



प्राचीन काल से, आयुर्वेद में गिलोय का इस्तेमाल शरीर की तीनों ऊर्जा (वट्टा, पिटा और कफ) को शांत करने के लिए किया गया है।  यह टिनोस्पोरा कॉर्डिफ़ोलिया, जिसे सामान्यतः अमृता, गुदुची और गिलोय के रूप में जाना जाता है, भारत, म्यांमार और श्रीलंका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में स्वदेशी, मेनिसपर्मासेई परिवार की एक बेल है। इसकी पत्तियाँ दिल के आकार की होती है। यह अद्भुत औषधीय उपयोग और स्वास्थ्य लाभ वाली एक अद्भुत जड़ी बूटी है। इसमें मधुमेह विरोधी, कैंसर विरोधी, एचआईवी विरोधी, उद्वेष्टरोधक, गठिया विरोधी, एंटी-इन्फ्लोमैटेंट, एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-माइक्रोबियल, एंटी विषाक्त, एंटी एलर्जी, एंटी पैरेथिक, एंटी मलेरिया, एंटी ट्यूमर और जिगर की सुरक्षात्मक गुण हैं।
आयुर्वेद की अमृता यानी गिलोय

 गिलोय के फायदे, स्वास्थ्य लाभ और औषधीय गुण
गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। गिलोय की एक बहुवर्षिय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। आयुर्वेद साहित्य में इसे ज्वर की महान औषधि माना गया है एवं जीवन्तिका नाम दिया गया है। गिलोय की लता जंगलों, खेतों की मेड़ों, पहाड़ों की चट्टानों आदि स्थानों पर सामान्यतः कुण्डलाकार चढ़ती पाई जाती है। नीम और आम के पेड़ के आस-पास भी यह मिलती है। जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं। इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अंगूठे जितना मोटा होता है। बहुत पुरानी गिलोय में यह बाहु जैसा मोटा भी हो सकता है। इसमें से स्थान-स्थान पर जड़ें निकलकर नीचे की ओर झूलती रहती हैं। चट्टानों अथवा खेतों की मेड़ों पर जड़ें जमीन में घुसकर अन्य लताओं को जन्म देती हैं।

डायबिटीज में रामबाण गिलोय

गिलोय की पत्तियों और तनों से सत्व निकालकर इस्तेमाल में लाया जाता है। गिलोय को आयुर्वेद में गर्म तासीर का माना जाता है। यह तैलीय होने के साथ साथ स्वाद में कडवा और हल्की झनझनाहट लाने वाला होता है। गिलोय का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता है। इसके अलावा ये एक बेहतरीन पावर ड्रिंक भी है। ये इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है, जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। हो सकता है आपने गिलोय की बेल देखी हो लेकिन जानकारी अभाव में उसे पहचान नहीं पाए हों। गिलोय बेल के रूप में बढ़ती है और इसकी पत्त‍ियां पान के पत्ते की तरह होती हैं। गिलोय की पत्त‍ियों में कैल्शि‍यम, प्रोटीन, फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसके तनों में स्टार्च की भी अच्छी मात्रा होती है। गिलोय का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों में किया जाता है। ये एक बेहतरीन पावर ड्रिंक भी है। ये इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है, जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।


गिलोय एक ऐसा चमत्कारी पौधा है, जो सभी तरह के मर्ज की दवा साबित होता है। गिलोय किस तरह से मानव जीवन को हर तरह के रोगों से छुटकारा दिलाकर रोगमुक्त करती है। गिलोय एक ऐसी औषधि है, जिसे अमृत तुल्य वनस्पति माना जाता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से रोगों को दूर करने में सबसे उत्तम औषधि के रूप में गिनी जाती है। यह मनुष्य को किसी भी प्रकार के रोगों से लड़ने कि ताकत प्रदान करती है। गिलोय की एक सबसे अच्छी खासियत ये है कि यह जिस भी पेड़ पर चढ़ जाती है, उसके गुण को अपने भीतर चढ़ा लेती है। नीम पर चढ़ी हुई गिलोय सबसे उत्तम मानी जाती है। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्‍फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्तनाशक होती है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही इसमें एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्‍व भी होते है।

गिलोय के पत्तों के ये फायदे

गिलोय के फायदे, स्वास्थ्य लाभ और औषधीय गुण
  • आंखों की रोशनी बढ़ाये - जिनकी आंखों की रोशनी कम हो रही हो, उन्हें गिलोय के रस को आंवले के रस के साथ देने से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है और आंख से संबंधित रोग भी दूर होते हैं। गिलोय एक शामक औषधि है, जिसका ठीक तरह से प्रयोग शरीर में पैदा होने वाली वात, पित्त और कफ से होने वाली बीमारियों से छुटकारा दिला सकता है।इसके लिए गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में पीपल का चूर्ण और शहद मिलकर सुबह-शाम सेवन करें।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं - गिलोय में एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं, जो खतरनाक रोगों से लड़कर शरीर को सेहतमंद रखते है। गिलोय किडनी और लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है और रक्त को साफ करती है। नियमित रूप से गिलोय का जूस पीने से रोगों से लड़ने की क्षमता में बढ़ोत्तरी होती है।
  • उल्टियां में फायदेमंद - गर्मियों में कई लोगों को उल्‍टी की समस्‍या होती हैं। ऐसे लोगों के लिए भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय के रस में मिश्री या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से गर्मी के कारण से आ रही उल्टी रूक जाती है।
  • कान दर्द में लाभकारी - गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। साथ ही गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानों में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।
  • खुजली दूर भगाएं -  गिलोय के रस पीने से रक्त विकार दूर होकर खुजली से छुटकारा मिलता है। इसके लिए गिलोय के पत्तों को हल्दी के साथ पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाइए या सुबह-शाम गिलोय का रस शहद के साथ मिलाकर पीएं।
  • खून की कमी दूर करें - गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर में खून की कमी को दूर करता है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी या शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।
  • गठिया में राहत - अगर वातरोगी गठिया से पीड़ित हैं तो गिलोय का सेवन करना चाहिए। इसमें सूजन को कम करने के साथ-साथ गठिया विरोधी गुण भी होते हैं जो कि गठिया और जोड़ों में दर्द सहित इसके कई लक्षणों का इलाज करते हैं।
  • गैस दूर करे - गैस, जोड़ों का दर्द, शरीर का टूटना वात असंतुलित होने के लक्षण हैं। गिलोय का एक चम्मच चूर्ण घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है।
  • चिकनगुनिया में फायदेमंद - यह शरीर को ठंडा रखता है जिससे बुखार कम करने में मदद मिलती है। साथ ही क्रोनिक फीवर जैसे डेंगू और चिकनगुनिया के लिए भी प्रभावी है। गिलोय का सेवन वाइट ब्‍लड सेल्‍स को रेगुलेट करने में मदद करते है। गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी और अल्‍कालाइन गुण पाचन में मदद करते हैं। इसके अलावा यह अर्थराइटिस और अस्‍थमा के उपचार और टाइप -2 डायबिटीज के लिए ब्‍लड ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करता है।
  • शारीरिक जलन दूर करें - अगर आपके पैरों में जलन होती है और बहुत उपाय करने के बाद भी आपको कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आप गिलोय का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए गिलोय के रस को नीम के पत्ते एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करें इससे हाथ पैरों और शरीर की जलन दूर हो जाती है।
  • ज्वरनाशक है गिलोय - गिलोय को ज्वरनाशक भी कहा जाता है। अगर कोई व्यक्ति काफी दिनों से किसी भी तरह के बुखार से पीड़ित है और काफी दवाएं लेने के बाद भी बुखार में कोई आराम नहीं मिल रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को रोजाना गिलोय का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही अगर किसी को डेंगू बुखार आ रहा हो तो उसके लिए मरीज को डेंगू की संशमनी वटी (गिलोय घनवटी) दवा का सेवन कराया जाए तो बुखार में आराम मिलता है। संशमनी वटी दवा डेंगू बुखार की आयुर्वेद में सबसे अच्छी दवा मानी जाती है।
  • डायबिटीज में फायदेमंद - जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी है, उन्हें गिलोय के रस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह वरदान है। ऐसे लोगों को हाथ की छोटी उंगली के बराबर (एक बलिस्त) गिलोय के तने का रस और बेल के एक पत्ते के साथ थोड़ी सी हल्दी मिलाकर एक चम्मच रस का रोजाना सेवन करना चाहिए। इससे डायबिटीज की समस्या नियंत्रित हो जाती है।
  • डेंगू में प्लेटलेट बढ़ाने के लिए गिलोय - गिलोय की बेल का सत्व मरीज को दिन में 2-3 बार दें, या गिलोय के 7-8 पत्‍तों को लेकर पीस लें उसमें 4-5 तुलसी की पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर काढा बना लीजिए और इसमें पपीता के 3-4 पत्तों का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है। प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है। यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी आयुर्वेदिक स्‍टोर से आप गिलोय घनवटी लेकर एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दे सकते हैं।
  • मोटापा दूर करे - मोटापा से परेशान व्यक्ति को रोजाना गिलोय का सेवन करना चाहिए। इसके एक चम्मच रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से मोटापा दूर हो जाता है। इसके अलावा अगर पेट में कीड़े हो गए हों और कीड़े के कारण शरीर में खून की कमी हो रही हो तो पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों तक नियमित रूप से गिलोय का सेवन कराना चाहिए।
  • पाचन बनाए बेहतर - गिलोय के रस का नियमित रूप से सेवन करने से पाचन तंत्र ठीक रहता है। हमारा पाचन तंत्र ठीक रहे, इसके लिए आधा ग्राम गिलोय पाउडर को आंवले के चूर्ण के साथ नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। गिलोय शरीर में खून के प्लेटलेट्स की गिनती को बढ़ाती है। गिलोय पाचन तंत्र की देखभाल कर सकता है। आधा ग्राम गिलोय पाउडर को आंवले के साथ नियमित रूप से लें। अच्छे परिणाम के लिए, गिलोय का रस छाछ के साथ भी लिया जा सकता है। यह उपाय बवासीर से पीड़ित रोगियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पीलिया में फायदेमंद - गिलोय का सेवन पीलिया रोग में भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण, काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। एक चम्‍मच रस को एक गिलास मट्ठे में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।
  • पेट के रोगों में लाभकारी - गिलोय के रस या गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट से संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते है। इसके साथ ही आप गिलोय और शतावरी को साथ पीस कर एक गिलास पानी में मिलाकर पकाएं। जब उबाल कर काढ़ा आधा रह जाये तो इस काढ़े को सुबह-शाम पीयें।
  • बुखार में फायदेमंद - गिलोय एक रसायन है जो रक्तशोधक, ओजवर्धक, हृदयरोग नाशक ,शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है। गिलोय के रस में शहद मिलाकर लेने से बार-बार होने वाला बुखार ठीक हो जाता है। या गिलोय के रस में पीपल का चूर्ण और शहद को मिलाकर लेने से तेज बुखार तथा खांसी ठीक हो जाती है।
  • मस्तिष्क का टॉनिक - गिलोय को अडाप्टोजेनिक जड़ी बूटी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है जो मानसिक तनाव और चिंता को कम करता है। एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य टॉनिक बनाने के लिए, गिलोय अक्सर अन्य जड़ी बूटियों के साथ मिश्रित किया जाता है। यह स्मृति को बढ़ावा देने और काम पर ध्यान लगाने में मदद करता है। यह मस्तिष्क से सभी विषाक्त पदार्थों को भी साफ करता है।
  • मुंहासों में दे फायदा - मुंहासे , फोड़े-फुंसियां और झाइयों पर गिलोय के फलों को पीसकर लगाने से फायदा होता है।
  • मोटापा कम करे - गिलोय मोटापा कम करने में भी मदद करता है। मोटापा कम करने के लिए गिलोय और त्रिफला के चूर्ण को सुबह और शाम शहद के साथ खाएं। इसके नियमित सेवन से मोटापे में फायदा मिल सकता है।
  • सर्दी-खांसी दूर भगाए - किसी व्यक्ति को लगातार सर्दी-खांसी-जुकाम की समस्या हो रही हो तो उन्हें गिलोय के रस का सेवन कराएं। दो चम्मच गिलोय का रस हर रोज सुबह लेने से खांसी से काफी राहत मिलती है। यह उपाय तब तक आजमाएं, जब तक खांसी पूरी तरह ठीक न हो जाए।
 

गिलोय के नुकसान भी
गिलोय बहुत ही फायदेमंद मानी जाती है, इसका वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया है और यह एक बहुवर्षिय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते कि तरह होते हैं। यह बहुत ही गुणकारी औषधि मानी जाती है। गिलोय की लता जंगलों, खेतों की मेड़ों, पहाड़ों की चट्टानों आदि स्थानों पर आसानी से मिल जाती है। इसकी पत्तियां और रस दोनों ही गुणकारी होते हैं। सामान्‍य और खतरनाक बीमारी के उपचार में इसका प्रयोग किया जाता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं इतने गुण होने के बाद भी कुछ बीमारियों में इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। इस स्‍लाइडशो में हम आपको बता रहे हैं कब गिलोय का सेवन न करें। गिलोय 5 साल की उम्र या इससे ऊपर के बच्चों के लिए सुरक्षित है। हालांकि, गिलोय की खुराक दो सप्ताह से ज्यादा या बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के नहीं दी जानी चाहिए। अगर आप डायबीटीज की दवाई ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के इस जड़ी बूटी का सेवन नहीं करना चाहिए। गिलोय कब्ज और कम रक्त शर्करा की समस्या भी पैदा कर सकता है। गर्भवती महिलाओं को इसके इस्तेमाल के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  • ऑटोइम्‍यून बीमारी का खतरा - इम्‍यूनिटी का सुचारु होना बहुत जरूरी है, लेकिन अगर इम्‍यूनिटी बहुत अधिक सक्रिय हो जाये तो भी खतरनाक है। क्‍योंकि इस स्थिति में ऑटोइम्‍यून बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। यानी इसके अधिक प्रयोग से ल्‍यूपस, मल्‍टीपल स्‍क्‍लेरोसिस और रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी बीमारियां हो सकती हैं। अगर आपको ये बीमारियां हैं तो गिलोय का सेवन बिलकुल न करें।
  • गर्भावस्‍था के दौरान - गर्भवती महिलाओं और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए। क्‍योंकि इसके कारण इस दौरान शरीर पर नकारात्‍मक असर पड़ता है। इसके अलावा अगर आप सर्जरी कराने जा रहे हैं या सर्जरी हुई है तो भी गिलोय का सेवन न करें, क्‍योंकि यह ब्‍लड शुगर को को प्रभावित करता है, और इसके कारण सर्जरी के घाव सूखने में समस्‍या हो सकती है।
  • पेट की समस्‍या होने पर - अगर आपको पेट की समस्‍या है तो गिलोय का प्रयोग बिलकुल न करें, क्‍योंकि इसके कारण अपच की शिकायत हो सकती है। अपच की समस्‍या होने पर इसका किसी भी तरह से (यानी की कैप्‍सूल या रस) प्रयोग न करें। इसके कारण पेट में दर्द और मरोड़ की शिकायत भी हो सकती है।
  • ब्‍लड शुगर का स्‍तर कम होने - गिलोय के सेवन से ब्‍लड शुगर कम होता है। इसलिए अगर आपका ब्‍लड शुगर पहले से ही कम है तो इसका सेवन बिलकुल न करें। अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो ब्‍लड शुगर कम करते वक्‍त सावधानी बरतें। डायबिटीज में चिकित्‍सक की सलाह के बिना इसका सेवन न करें।


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अश्‍वगंधा के रामबाण औषधीय उपयोग



अश्वगंधा आयुर्वेदिक औषधि है और कई लाइलाज बीमारियों को ठीक करने की क्षमता रखती है। अश्वगंधा का प्रयोग कई बीमारियों में दवा के रूप में किया जाता है। अश्वगंधा दवा, चूर्ण, कैप्सूल और टेबलेट के रूप में बाजार में मिल जाती है। यह शरीर की बहुत सारी परेशानियों को दूर करने के लिए चमत्कारी औषधि के रुप में काम करती है और यह दिमाग और मन को भी स्वस्थ रखती है। पुरुषत्व बढ़ाने में भी अश्वगंधा का काफी महत्व है। अश्वगंधा कई तरह की बीमारियों को ठीक करने में भी बहुत कारगर है। इसका उपयोग एक सीमा तक करने पर ही यह फायदेमंद है किन्‍तु एक सीमा से ज्यादा इसका इस्तेमाल किया जाए तो यह नुकसानदायक भी हो सकती है।
अश्वगंधा का सेवन दे शरीर को ताकत और बनाए जवानAshwagandha Benefits in Hindi

अश्वगंधा एक बलवर्धक रसायन मानी गयी है। इसे पुरातन काल से ही आयुर्वेदाचायों ने वीर्यवर्धक, शरीर में ओज और कांति लाने वाला, परम पौष्टिक व सर्वांग शक्ति देने वाली, क्षय रोगनाशक, रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ने वाली एवं वृद्धावस्था को लम्बे समय तक दूर रखने वाली सर्वोत्तम औषधि माना है। यह वायु एवं कफ के विकारों को नाश करने वाली अर्थात खांसी, श्वास, खुजली, व्रण, आमवात आदि नाशक है।
अश्वगंधा पौधे के पत्ते और इसकी जड़ो को उबाल कर चाय बनाई जाती है जो की स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। अश्वगंधा पौधे के पत्ते त्वचा पर होने वाले रोगों से बचाता है। अश्वगंधा के पत्ते शरीर के पर हुए सुजन को कम करता है। अश्वगंधा के पत्ते शरीर पर हुए घाव व किसी प्रकार के जख्म को जल्दी भर कर ठीक कर देते है। अश्वगंधा के चूर्ण को किसी भी तेल में मिला कर शरीर के पर लगाने से चर्म रोग नहीं होता है।
अश्वगंधा सिरदर्द और माइग्रेन जैसी बीमारीयां भी नहीं होने देता है, अश्वगंधा के पाउडर को तेल में मिला कर शरीर पर लगाने से त्वचा में निखार आता है और इससे रुकी हुई ग्रोथ भी बढ़ जाती है और इसके सेवन से हड्डिया भी मजबूत होती है। यह लंबाई बढ़ाने में भी मदद करता है, इसके सेवन कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है यह मन को शांत रखता है। अश्वगंधा को पाए जाने वाले मिनरल्स और विटामिन से हमें तनाव से मुक्त होने में मदद मिलती है। इससे हॉर्मोंस निकलते है जिससे हमें तनाव से मुक्ति मिलती है। अश्वगंधा खाने पर 69% नींद न आने की समस्या और तनाव पर रहने की समस्या दूर हो जाती है।
अश्वगंधा के चमत्कारिक फायदे- Ashwagandha Benefits in Hindi
  • अनिद्रा दूर भगाता है : जो लोग नींद न आने की बीमारी से ग्रसित है उन्हें अश्वगंधा के चूर्ण को खीर में डालकर खाना चाहिए। ये नींद की दवा की तरह काम करती है।
  • आंखों की रोशनी : अश्वगंधा का इस्तेमाल आपकी आंखों की रोशनी को बढ़ाने का काम करता है। रोज दूध के साथ लेने से आंखों के अलावा स्ट्रेस से भी बचा जा सकता है और अश्वगंधा, मुलहठी और आंवले को मिलाकर खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • इम्युन सिस्टम : अश्वगंधा में मौजूद ऑक्सीडेंट आपके इम्युन सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करता है। जो आपको सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से लडने की शक्ति प्रदान करता है। अश्वगंधा वाइट ब्लड सेल्स और रेड ब्लड सेल्स दोनों को बढ़ाने का काम करता है। जो कई गंभीर शारीरिक समस्याओं में लाभदायक है।
  • कैंसर : कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी में बहुत असरकारी है अश्वगंधा का इस्तेमाल। कई रिसर्च में यह बताया गया है कि अश्वगंधा कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकता है और कैंसर के नए सेल्स नहीं बनने देता। यह शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज का निर्माण करता है। जो कैंसर सेल्स को खत्म करने और कीमोथेरपी से होने वाले साइड इफेक्ट्स से भी बचाने का काम करता है।
  • खांसी और दमा में कारगर : अश्वगंधा का चूर्ण गर्म दूध के साथ लेने पर खांसी और दमे की बीमारी में बहुत आराम मिलता है।
  • मधुमेह घटाता है : अश्वगंधा का सेवन शरीर में ब्लड शुगर का स्तर कम कर मधुमेह को नियंत्रण में रखता है। ये कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम करता है।
  • तनाव दूर करता है : आजकल ज्यादातर लोग डिप्रेशन और तनाव के शिकार होते हैं ऐसे में अश्वगंधा मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्या को ठीक करने में लाभदायक है। अश्वगंधा शारीरिक और मानसिक दोनों तनावों को दूर करता है। इसका चूर्ण भोजन के साथ खाने से मन शांत होता है और तनाव दूर होता है। एक रिर्पोट के अनुसार तनाव को 70 फिसदी तक अश्वगंधा के इस्तेमाल से कम किया जा सकता है।
  • पुरुषत्व बढ़ाता है : अश्वगंधा पुरुषों में नपुंसकता को दूर करने में बहुत फायदेमंद है। यह पुरुषत्व को बढ़ाने में रामबाण की तरह काम करता है। दूध या पानी के साथ इसका चूर्ण लेने से पुरुषों की यौन क्षमता बढ़ती है। साथ ही शरीर को एक अलग एनर्जी भी देता है।
  • पेट की समस्याओं को करे दूर : अश्वगंधा पेट की समस्याओं को दूर करता है। मिश्री और हल्के गर्म पानी के साथ इस चूर्ण का सेवन करने से गैस की बीमारी से छुटकारा मिलता है।
  • सफेद पानी (लिकोरिया) : महिलाओं में सफेद पानी की वजह से उनका शरीर कमजोर होने लगता है। जिसका असर उनके गर्भाशय में भी पडता है। लेकिन अश्वगंधा के सेवन से महिलाओं को इस रोग से निजात मिल सकती है।
  • हाई ब्लड प्रेशर में राहत : अश्वगंधा का नियमित सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर में कमी होती है। रक्तचाप नॉर्मल रहता है। अश्वगंधा के चूर्ण को दूध घोल करके पीने रक्तचाप नियंत्रण में रहता है।
  • याददाश्त वर्धक : अश्वगंधा को सुबह शाम लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और याददाश्त भी बहुत ही तेज हो जाती है।
  • यौन शक्ति वर्धक : अश्वगंधा का सेवन करने से प्रजनन में इजाफा होता है। इससे स्पर्म काउंट बढ़ता है और वीर्य भी अच्छी मात्रा में बनता है, अश्वगंधा, शरीर को जोश देता है जिससे पूरे शरीर में आलस्य नहीं रहता है और सेक्स करते समय थकान भी नहीं आती है। जिन लोगों को सेक्स के दौरान थकान होने लगती है, उन्हें अश्वगंधा के सेवन से काफी लाभ मिलता है। अश्वगंधा में जवानी को बरकरार रखने की काफी शक्ति होती है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
 Ashwagandha Side Effects in Hindi
अश्वगंधा से होने वाले नुकसान- Ashwagandha Side Effects in Hindi
  • अश्वगंधा का अधिक इस्तेमाल पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इसको लेने से डायरिया की समस्या हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले आप डॉक्टर की सलाह लें उसके बाद ही इसका सेवन करें।
  • अश्वगंधा का इस्तेमाल नींद के लिए अच्छा है। लेकिन इसका बहुत दिनों तक इस्तेमाल आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है।
  • अश्वगंधा का ज्यादा प्रयोग आपके लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। अश्वगंधा के ज्यादा इस्तेमाल से आपको बुखार, थकान, दर्द की शिकायत भी हो सकती है।
  • अश्वगंधा का सही डोज़ न लेने से आपको उलटी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • बल्ड प्रेशर से ग्रस्त लोगों को अश्वगंधा डॉक्टर के परामर्श से ही लेना चाहिए। जिनका बीपी लो होता है उन्हें अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए।





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