श्रद्धांजली - डा. सत्‍य प्रकाश मिश्र



क्‍या हो रहा है इलाहाबाद के साथ ? किसकी नज़र लग गई है इलाहाबाद के साहित्‍यकारों के ? पहले कैलास गौतम, फिर कमलेश्‍वर फिर अतीक इलाहाबादी और अब प्राख्‍यात हिंदी साहित्‍यकार और समालोचक डा. सत्‍य प्रकाश मिश्र को इलाहाबाद ने असमयिक खो दिया है।
 
डा. मिश्र का निधन इलाहाबाद के ही स्‍थानीय अस्‍पताल में हुआ। कुछ दिनों पूर्व ही उन्‍हे गले मे इन्‍फेकशन के कारण भर्ती करया गया था। डा. मिश्र इलाहाबाद के साहित्‍यकारों में बड़ा नाम थे, उत्‍तर प्रदेश सरकार ने उन्‍हे उनके हिन्‍दी साहित्‍य के योगदान को देखते हुए साहित्‍य भूषण सम्‍मान से नवाजा था। उल्‍लेखनीय है कि डा. मिश्र हिन्‍दी साहित्‍य के तीन शीर्ष सम्‍मानों भारतीय ज्ञानपीठ, सरस्‍वती, और व्‍यास सम्‍मान के निर्णायक मंडल के सदस्‍य भी थे।
 
डाक्‍टर सत्‍य प्रकाश मिश्र ऐसे व्‍यक्तित्‍व के धनी व्‍यक्ति थे जिन्‍हे भूलाया जाना कठिन होगा। डाक्‍टर मिश्र केन्‍द्रीय इलाहाबाद विश्‍ववि‍द्यालय के हिन्‍दी विभाग के विभागाध्‍यक्ष थे और उन्‍हे इसी वर्ष अवकाश प्राप्‍त करना था। जहाँ तक कि मैने इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से स्‍नातक स्‍तर की शिक्षा ग्रहण की है और मेरा विषय भी हिन्‍दी था। मैने उन्‍हे वयक्तिगत तौर पर बहुत ज्‍यादा नही जानता था किन्‍तु मै उनके बारे में जिनता जनता हूँ कि वे एक अच्‍छे मृदु स्‍वाभाव के व्‍यक्ति थे। चूकिं वे कभी स्‍नातक स्‍तान की क्‍लास नही लिया करते थे, पर मैने अपने वरिष्‍ठ साथियों से उनके बारे मे सुना एवं जाना था तो वे एक अच्‍छे छात्र मित्र गुरू भी थे। विश्‍वविद्यलय मे मेरा एक बार उनसे सामना हुआ था जब मुझे अपने फार्म पर विभागाघ्‍यक्ष के हस्‍ताक्षर चाहिऐ था।
 
डाक्‍टर मिश्र जिनते बड़े व्‍यक्ति थे उससे भी बड़ा था उनका अनुशासन और कर्त्तव्‍य निष्‍ठा। वे एक गुरू के रूप मे सफल अध्‍यापन करते थे तो एक साहित्‍यकार के रूप मे सफल अलोचना। उन्‍होने अपनी सहित्‍यक प्रसिद्धि को अपने अध्‍यापन के बीच नही आने दिया। डाक्‍टर साहब की यही कर्तव्य निष्‍ठा हमारे बीच खलेगी।
 
हिन्‍दी साहित्‍य के समालोचक डा. सत्‍य प्रकाश को उनके शिष्‍य की तरफ से श्रद्धांजली, आज जो मेरी लेखनी चल रही है उसमें उनका महान योग दान है। गुरू के बिना शिष्‍य केवल शून्‍य है बड़ा शून्‍य।


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3 comments:

Udan Tashtari said...

डा. सत्‍य प्रकाश जी को श्रद्धांजली.

शैलेश भारतवासी said...

मैं भी इलाहाबाद में कुछ वर्ष रहा हूँ जहाँ मेरे कई साथी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में परास्तानक व पीएचडी जैसी डिग्रियाँ ले रहे थे। उनको मेरी श्रद्धांजलि।

गिरिराज जोशी "कविराज" said...

डा. सत्‍य प्रकाश जी को श्रद्धांजली