सबसे चर्चित अनमोल वचन एवं अमृत वचन - Amrit Vachan



  • न ही किसी मंदिर की जरूरत है और न ही किसी जटिल दर्शनशास्त्र की। मेरा मस्तिष्क और मेरा हृदय ही मेरा मंदिर है और करुणा ही मेरा दर्शनशास्त्र है।
  • शांति हमारे अंदर से आती है। आप इसे कहीं और न तलाशें।
  • अध्यात्मिकता का एकमात्र उद्देश्य आत्म अनुशासन है। हमें दूसरों की आलोचना करने के बजाय खुद का मूल्यांकन और आलोचना करनी चाहिए।
  • मैं इस बात को लेकर चिंतित नहीं रहता कि ईश्वर मेरे पक्ष में है या नहीं। मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि मैं ईश्वर के पक्ष में रहूं, क्योंकि ईश्वर हमेशा सही होते हैं।
  • आपका सबसे व्यर्थ समय वो है, जिसे आपने बिना हंसे बिता दिया।
  • हमारे निर्माता ईश्वर ने हमारे मस्तिष्क और व्यक्तित्व में विशाल क्षमता और योग्यता संग्रहित की है। प्रार्थना के जरिए हम इन्हीं शक्तियों को पहचान कर उसका विकास करते हैं।
  • अतीत पर ध्यान केंद्रित मत करो, भविष्य का सपना भी मत देखो। वर्तमान क्षण ध्यान केंद्रित करो। 
  • यह देश, धर्म, दर्शन और प्रेम की जन्मभूमि है। ये सब चीजें अभी भी भारत में विद्यमान है। मुझे इस दुनिया की जो जानकारी है, उसके बल पर दृढ़ता पूर्वक कह सकता हूँ कि इन बातों में भारत अन्य देशों की अपेक्षा अब भी श्रेष्ठ है। 
  • दूसरों से सहायता की आशा करना या भीख माँगना किसी दुर्बलता का चिन्ह है। इसलिये बंधुओं निर्भयाता के साथ यह घोषणा करो की हिंदुस्तान हिंदुओं का ही है। अपने मन की दुर्बलता को बिल्कुल दूर भगा दो।


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9 comments:

Udan Tashtari said...

स्वामी विवेकानन्द जी के वचन पेश करने के लिये आभार.

Sanjeet Tripathi said...

शुक्रिया बंधु!!

परमजीत बाली said...

स्वामी विवेकानंद जी के विचार प्रेषित करने के लिए धन्यवाद।

shashi said...

बन्धु, वर्तनी-दोष अवश्य सुधारें, भाषा के प्रति यह अपराध है, यदि आलस्य है तो और भी बुरा | यदि विवेकानंद का नाम ले रहे हो तो इतना तो हमसे भी सुन ही सकते हो :)

niranjan said...

क्या प्रमेन्द्र जी हिन्दुस्तान में रहते हो और और हिन्दुस्तान ही लिखना नही आता. दर्बलता नही होता. दुर्बलता होता है. बंधूओं नही बंधुओ होता है. कम से कम हिन्दुओं तो सही लिखों.
उम्मीद करते हैं अगली बार आपकी वर्तनी में सुधार आएगा.

niranjan said...

क्या प्रमेन्द्र जी हिन्दुस्तान में रहते हो और और हिन्दुस्तान ही लिखना नही आता. दर्बलता नही होता. दुर्बलता होता है. बंधूओं नही बंधुओ होता है. कम से कम हिन्दुओं तो सही लिखों. उम्मीद करते हैं अगली बार आपकी वर्तनी में सुधार आएगा.

Satyendra said...

niranjan ji pahale aap thik sw padhana to sikh lo, dusron ko updesh baad me dena

Ashok Agarwal said...

Great

Ashok Agarwal said...

Great