हँसो जरा ध्यान से



नौकरानी ने सुशीला से कहा, मेमसाब गजब हो गया। पड़ोस की तीन औरतें बाहर आपकी सास को पीट रहीं हैं। सुशीला नौकरानी के साथ बालकनी में आई और चुपचाप तमाशा देखने लगी। नौकरानी ने पूछा, आप मदद करने नहीं जाएंगी?
सुशीला: नहीं ! तीन ही काफी हैं।

ट्रेन में ऊपर की बर्थ पर बैठे एक बूढ़े बाबा बार बार बाथरूम जा रहे थे।
नीचे की बर्थ पर बैठी महिला ने परेशान होकर पूछा - आपको चैन नहीं है।
बूढ़े ने बड़ी बैचेनी से कहा - चेन तो है लेकिन खुल नहीं रही है।

तीन लड़के मरने के बाद यमलोक पहुंचे जहां उनके कर्मो के आधार पर फल बांटे जा रहे थे। यमदूत पहले लड़के को यमराज के सामने लाए। उन्होंने पूछा, इसका कसूर क्या है। यमदूत ने कहा, इसने अपने जीवनकाल में एक चींटी की हत्या की है। यमराज ने एक बदसूरत लड़की को बुलवाया और कहा इसे इस लड़के के साथ हथकड़ी से बांधकर छोड़ दो। फिर दूसरे लड़के को पेश किया गया। यमराज ने पूछा, इसका कसूर? यमदूत ने बताया, इसने भी एक चींटी को मारा है। यमराज ने फिर एक बदसूरत लड़की को बुलवाया और कहा, इन दोनों को भी हथकड़ी से बांधकर छोड़ दो।
उसके बाद तीसरे लड़के का नंबर आया। यमदूतों ने बताया कि इसने अपने जीवन में कोई गुनाह नहीं किया है। फिर यमराज ने एक बेहद खूबसूरत लड़की को बुलवाया और कहा, इसे इस लड़की के साथ हथकड़ी से बांधकर छोड़ दो। लड़के ने आश्चर्य जताते हुए पूछा, जब मैने कोई गुनाह नहीं किया तो यह हथकड़ी क्यों? यमराज ने कहा, इस लड़की ने अपने जीवन में एक चींटी को मारा था। 

एक प्रेमी, कबूतर के पैर में संदेश बांधकर अपनी प्रेमिका के पास भेजा करता था। एक दिन उसने बिना संदेश के ही कबूतर भेज दिया। मिलने पर प्रेमिका ने पूछा, तुमने कोई संदेश क्यों नहीं भेजा? प्रेमी ने जवाब दिया-मैने मिस कॉल की थी

रात को कब्रिस्तान में एक आदमी कब्र के ऊपर बैठा हुआ था। इतने में एक मुसाफिर उधर से गुजरा और पूछा : इतनी रात को कब्रिस्तान में बैठे हो, तुम्हें डर नहीं लगता?
आदमी बोला, इसमें डरने की क्या बात है। कब्र के अंदर गरमी हो रही थी इसलिए थोड़ी देर के लिए बाहर आ गया।

पति पत्नी से, अजी, आज तो मैं छाता ले जाना ही भूल गया
पत्नी : पर आपको ये बात पता कब चली।
पति : मुझे पता तब चला, जब बारिश खत्म हुई तो मैंने छाता बंद करने के लिए अपना हाथ ऊपर उठाया।

मेजर (जवान से)- 'इतनी ज्यादा क्यों पीते हो? तुम्हें खबर है कि अगर तुम्हारा रिकॉर्ड अच्छा रहा होता तो अब तक तुम सूबेदार हो गए होते।'
जवान (मेजर से)- 'माफ कीजिए सर, मगर बात यह है कि जब दो घूंट मेरे अंदर पहुंच जाते हैं तो मैं अपने आपको कर्नल समझने लगता हूं।'

इंस्पेक्टर बांकेलाल के घर में एक मरियल कुत्ता बंधा हुआ था।
रामलाल (बांकेलाल से)- यह आवारा कुत्ता कहां से ले आए?
बांकेलाल (रामलाल से)- आवारा नहीं पुलिस का कुत्ता है।
रामलाल- पर लगता तो नहीं है।
बांकेलाल- कैसे लगेगा, यह गुप्तचर विभाग में जो है।

मां (बांकेलाल से)- तुमने आज फिर रामलाल से लड़ाई की जबकि मैंने तुमको कई बार समझाया है कि जब भी गुस्सा आए फौरन 100 तक गिनती गिनो।
बांकेलाल (मां से)- हां मां, मैं तो ऐसा ही कर रहा था पर रामलाल की मां ने उसे 50 तक ही गिनने को कहा था।


हड्डियों के दो डॉक्टर घूमने निकले। रास्ते में उन्हें एक लंगड़ाता हुआ व्यक्ति दिखाई दिया। उसे देखकर एक ने कहा- मुझे तो लगता है जैसे इसके टखने की हड्डी टूट गई है।
दूसरे ने कहा- नहीं जी, टखने की नहीं, उसके घुटने की हड्डी टूटी हुई है।
इस पर दोनों में बहस शुरू हो गई। तभी पहले डॉक्टर ने उसे बुलाकर पूछा- आपके टखने की हड्डी टूटी है या घुटने की।
नहीं, जी मेरी तो कोई हड्डी नहीं टूटी। मेरी तो चप्पल टूटी है।


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1 comment:

Vishu said...

hahahhhaha. bhai badiya vyang hain