आलोक पुराणिक को हरा दिया, और कह रहे हो कि हार गये



तरकश का पुरस्‍कार भी हिन्‍दी ब्‍लागिंग के ब्लागर के लिये भारत रत्न से कम नही है। :) इसका अनुमान मै तब पता चला कि जब मेरे मित्र तारा चन्‍द्र ने मुझसे पूछा कि क्या हुआ चुनाव का परिणाम ? हमने तो कहा कि हम तो हार गये, और यह कहते हुऐ मैने परिणाम का लिंक उसे भेज दिया। पर मुझे तब उनकी बात पर इतनी हंसी आई की मै उसे रोक नही सका कि जब उसने कहा कि (श्री) आलोक पुराणिक जी को हरा दिया, और कह रहे हो कि हार गये। निश्चित रूप से उसके यह शब्‍द प्रोत्‍साहन देने वाले थे। वाकई में आलोक पुराणिक को हम और वो तब से पढ़ रहे थे जब से जागरण जोश में उनका प्रपंचतंत्र आता था और मित्र का कहना भी गलत नही था। उनका यह कहना मात्र हास्‍य था क्‍योकि यह चुनाव किसी की जीत या हार का नही था बल्कि आपसी प्रेम व्‍यवहार का था।

मैने शुरूवाती तौर पर इस चुनाव के लिये कोई तैयारी नही कि थी, और प्रथम दौर में अपना नाम देख कर आश्‍चर्य भी हुआ क्‍योकि मैने दोनों दौर में अपने को वोट नही दिया था। मेरा इस चुनाव में सक्रिय न होने का प्रमुख कारण था कि मेरी मास्‍टर डिग्री की परीक्षाऐं, इन प‍रीक्षाओं के चलते मैने मित्र से कहा कि मै रूचि नही ले रहा हूँ किन्‍तु मित्र ने कहा कि जब बिना प्रयास के प्रथम दस में आ गये हो तो थोड़ा जोर लगाओंगें तो जीत भी हाथ आ सकती है, पर मैने असर्मथता जता दी। पर मित्रता इसी को कहते है कि उसने कहा कि तुम मुझे अपना चुनाव एजेंट तो बना ही सकते हो बाकी का काम मै कर दूँगा, मैने भी हॉं कर दिया। बस उसकी शर्त यही थी कि अपने इमेल से सभी को एक बार मेल कर दो, मैने ऐसा कर भी दिया। बाकी जो कुछ भी हुआ मित्र ताराचंद्र का कमाल है कि इस मुझे चौथे स्‍थान पर ला कर खड़ा कर दिया। :) इस चुनाव में मुझे जो सम्‍मान दिया गया शायद ही मै उसका अधिकारी होता क्‍योकि इस चुनाव में मुझे ज्ञानजी, गुरूजी श्री आलोक जी, शास्‍त्री जी, और युनुश खान भाई के समकक्ष खड़ा होने का अवसर प्रदान किया। अत: आप सभी के प्‍यार को मै कभी भुला नही पाऊँगा। आप सभी पाठकों का कोटिश: धन्‍यवाद। वैसे मित्र ताराचंद्र जो इस चुनाव में मेरे एजेन्‍ट की भूमिका में थे वे भी अपनी रिर्पोट प्रस्‍तुत करने को कह रहे थे, किन्‍तु अब वे परीक्षा कार्य में व्‍यस्‍त होने के कारण नही कर पा रहे है आशा है कि जल्‍द ही वे आयेगें :) आप सभी को पुन: आपके स्‍नेह के लिये धन्‍यवाद।


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6 comments:

बेनाम said...

एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. अब तो सोच कर लगता है कि अगर मास्टर डिग्री की परीक्षा नहीं होती और आप इस चुनाव के लिए सीरियस रहते तो अलोक पुराणिक जी तो क्या, बाकी लोगों को भी हरा देते.

मित्र ताराचंद्र जी का कहना बिल्कुल ठीक है. ये आपकी जीत ही है.

अरुण said...

मतलग जुगाड काम आ गया,थोडी सी मेहनत और करते प्रथम आते

mahashakti said...

बेनाम भाई/बहन,
बात तो आप पते की कह रहे है, अगली बार कोई चुनाव आया तो मै कोशिश करूँगा कि परीक्षा छोड़कर चुनाव ही जीता जाये :)

उपलब्धि तो उपलब्धि होती है चाहे वह ऐतिहासिक हो या प्रागएतिहासिक :)

Gyandutt Pandey said...

वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो।
सामने आलोक हो या कोहरा घटाटोप हो!

Mired Mirage said...

:)

घुघूती बासूती

anitakumar said...

हा हा मित्र सूरज की परछांई पानी में दिखे तो क्या सूरज जमीन पर उतर आता है या उसकी रोशनी कम हो जाती है? आलोक जी तो आलोक जी है, जहां खड़े होंगे लाइन वहीं से शुरु मानो…।:)वैसे आप की उपलब्धी के लिए बधाई…अगली बार दो एजंट रखिएगा