हिन्‍दी के प्रथम चिट्ठाकार से मुलाकात



काफी दिनो से मुझे समय नही मिल रहा था किन्‍तु काफी लोग कहते है कि समय निकाला जाता है, उनमें से मै भी एक हूँ। अपनी व्‍यस्‍तताओं के आगे मुझे बहुत कुछ सूझ नही रहा था। हिन्‍दी के प्रथम चिट्ठकार श्री आलोक जी का प्रयाग आने के कार्यक्रम का मेल मुझे दो दिन पूर्व ही मिल गया था। किन्‍तु मै मेल का प्रतिउत्‍तर न दे सका और न ही काल के द्वारा कोई सूचना ही किन्‍तु उनकी आई मेल को मैने तारांकित कर लिया था। 14 दिसम्‍बर को करीब 11 बजे मैने श्री आलोक जी से सम्‍पर्क किया और उन्‍होने बताया कि वो करीब 2 बजे की ट्रेन से वापसी कर रहे है, इसी पर एक और इलाहाबाद जक्शंन पर ब्‍लागर मीट की रूप रेखा तैयार हो गई।
 
किन्‍तु यही पर एक दिक्‍कत हो गई, करीब 12.45 पर मेरे मोबाइल की बैटरी काफी काम हो गई थी मुझे भय था कि कही यहॉं मिलने के समय पर समय यह खत्‍म न हो जाये। मैने उसे स्‍वीच ऑफ करके चर्जिग पर लगा दिया। जो करीब 1.05 तक चार्जिग पर लगा रहा। जैसे ही मैने उसे चर्जिग से हटाया तो आलोक जी का मिस्‍ड काल की सूचना और उनका SMS दोनो से मिली और मैने उन्‍हे फोन लगाया और 5 मिनट पर स्‍टेशन पर पहुँचने की बात कही। इस बार मै काफी जल्‍दी में था, दूध का जला छांछ भी फूँक फुँक भी पीता है। जब समीर लाल जी आये थे वो दिन हमें याद था अब रिस्‍क लेने के मूड में नही था। हमने प्‍लेट फार्म टिकट भी नही लिया, जबकि मेरे भइया बार बार लेने के लिये कह रहे थे। टिकट न लेने का भी कारण था जो मेरे और भइया के बीच रहस्‍य है।
 
स्‍टेशन पर चाय का जिक्र तो श्री आलोक जी कर ही चुके है, पर उन्होने बिस्‍किट का जिक्र नही किया वो हम कर देने है। आलोक जी ने चाय की कै‍न्‍टीन से ग्लूकोस बिस्किट की मॉंग ही किन्‍तु दुकादार ने कहा कि नही है, मैने उसे प्रियागोल्‍ड का CnC देने को कहा जो स्‍वाद में 50-50 और Parle Krack Jack की तरह ही था। इस बार मेरे साथ मेरे भइया मानवेन्‍द्र प्रताप सिंह भी थे कुछ समय पूर्व मेरे ब्‍लाग पर मेरी अनुपस्थिति में ब्‍लाग लेखन किया था। अगर हम लोगों में काफी चर्चाऍं आयोजित हुई, जिसका ज्‍यादा जिक्र करना समय व्‍यर्थ करना ज्‍यादा होगा। क्‍योकि जब ब्लागर आपस में बात करते है तो बहुत कुछ बातें गोपनीय होती है। :)
 
अन्‍तोगत्‍वा 2 बजे हमारी ब्‍लागर मीट समाप्‍त हुई। आलोक जी ने हमें एक बहुत अच्‍छी पुस्‍तक भेंट की जो मेरे उपयोगी है। हम जल्‍दीबाजी में ठीक से मेहमान नवाजी न कर सके उसका हमें अफसोस है। जल्‍द ही मिलने के वायदे के साथ हमें ब्‍लागर भेंट वार्ता समाप्‍त हो गई।


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6 comments:

संगीता पुरी said...

आज आलोकजी ने भी आपसे मिलने का उल्‍लेख अपने चिटठे में किया है....बधाई।

आलोक said...

मेहमाननवाज़ी का शुक्रिया। वापस अपने ढकोली गाँव आ गया हूँ।

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब मजा आया.इस सुंदर जानकारी के लिये ...
धन्यवाद

हिमांशु said...

आप मेहमाननवाजी नहीं कर सके इसका अफ़सोस मर करिये. दिल खोल कर मिलना जरूरी था .
धन्यवाद.

डा. अमर कुमार said...


चिट्ठाकारी और गोपनीयता.. ?
क्या दोनों परस्पर विरोधी बातें नहीं लगतीं ?

ePandit said...

विवरण अच्छा लगा, आदि चिट्ठाकार से मिलने की काफी समय से हमारी भी इच्छा है।

कुछ फोटू-शोटू नहीं लिये क्या?