मादक पदार्थों का सेवन के दुष्परिणाम



आज हमारा समाज बहुत व्यस्तता के कारण एक अजनबी दौर से गुजर रहा है। माता-पिता अपने-अपने व्यवसाय में इतने व्यस्त हैं कि जो समय अपने बच्चों को देना चाहिए वह नहीं दे पा रहे हैं। इससे हमारी नौजवान पीढ़ी मानसिक तनाव एवम् सही मार्गदश्रन के अभाव से मुख्य लक्ष्य से भटक रही है और क्षणिक आनन्द प्राप्ति के लिए मादक पदार्थों की तरफ आकर्षित हो रही है। यह एक सामाजिक विडम्बना है।

मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों से युवा वर्ग को अवगत करवाना ताकि यह इस बुराई में लिप्त न हो। खाली दिमाग शैतान का घर होता है। इसलिए युवा वर्ग को अपने खाली समय का सदुपयोग सृजनात्मक व रचनात्मक कार्य करने में करना चाहिए। ताकि वह बुरी संगति में न पड़कर अपने अन्दर छिपी कला में निखार ला सके। और समाज के अच्छे नागरिक बन सके। अगर अब भी हम इसके प्रति सजग न हुये तो ये हमारी भावी युवा पीढ़ी को नष्ट कर देगी। पाश्चात्यकरण का अनुसरण करते हुए व मीडिया के दबाव के प्रभाव से किशोर-किशोरियों पर तनाव, दबाव एवम् माता-पिता द्वारा आपेक्षित सफलता न मिलने पर नकारात्मक रवैया अपनाने पर वे मादक पदार्थों के संरक्षण में जाते हैं। यह मादक पदार्थ किशोरों के सम्पूर्ण विकास में बाधक हैं। ये मादक पदार्थ उसको अन्धेरों की तरफ ले जाते हैं। आज हमारे अध्यापकों, माता-पिता एवम् समाज के बु(िजीवियों का नैतिक कर्तव्य बनता है कि हम उनको इसके दुष्परिणामों से अवगत करवाते हुए उनकी लक्ष्य प्राप्ति में किशोरों का मार्गदर्शन करें।

यूं तो पूरे विश्व में मादक पदार्थों के सेवन से किशोर वर्ग जूझ रहा है, हमारा देश भी इससे अछूता नहीं है। यह पूरे विश्व की गम्भीर समस्या है। जिसका प्रभाव भारत जैसे आदर्श देश पर भी अत्याधिक मात्रा  में पड़ा है। आज की युवा पीढ़ी मादक पदार्थों के सेवन से अपने लक्ष्य को भूल रही है और वह अपने जीवन को बर्बाद करके अपने माता-पिता को भी दुःख दे रही है। मादक पदार्थों के सेवन से किशोर माता-पिता की आशाओं के विपरित निकलने से स्वयं को उपहास का पात्रा तो बनाते ही हैं, लेकिन परिवार को भी तनाव ग्रसित करते हैं।
आज किशोरों को मादक पदार्थों के सेवन के प्रति रुझान के अनेकों कारण हैं। जिन्हें दूर करने के लिए आज समाज के सभी समुदायों का कर्तव्य बनता है कि इस बुराई को जड़ से निकालने के लिए किशोरों के इन मादक पदार्थों के प्रति रुझान को खत्म करके समाज में एक अच्छा नागरिक बनाने में सम्पूर्ण मदद करने की कोशिश करें। मादक पदार्थ कई तरह के होते हैं, जैसे- शराब, बीड़ी, सिग्रेट, तम्बाकू, खैनी, गुटका, अफीम, चरस, सुलफा, कोकीन, हेरोइन, भांग, गांजा, इत्यादि। इसके अलावा ब्राउन शूगर जैसे कई ऐसे मादक पदार्थ हैं जो कि शरीर को क्षीण करते हैं।

मादक पदार्थ का संक्षिप्त अर्थ है, मादकता उत्पन्न करना। अर्थात् क्षणिक सुख या खुशी के बाद पूरे जीवन को विनाशकारी बनाना, जो कि किशोरावस्था में अत्यन्त प्रबल मात्रा में स्वयं लेकर किशोर अपने जीवन को दुःखदायी बनाते हैं। ऐसा नहीं है कि इन मादक पदार्थों के सेवन से किशोर वर्ग बच नहीं सकते हैं लेकिन इसका सीधा व सरल उपाय है कि स्वयं उन्हें इन आदतों में पड़ने से बचना चाहिए। प्रायः देखने में आता है कि अधिकांश किशोर कुसंगति में पड़कर मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। जिसके लिए किशोरों को आत्मनियन्त्राण रखना पड़ता है। और सही मित्रों का चुनाव स्वयं ही करना होता है। क्योंकि मादक पदार्थों के प्रति रूचि पैदा करने वाले भी अधिकांश किशोर मित्रा ही होते हैं। यदि किशोरों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना हो तो वे अवश्य सही राह चुनंे। बुरी संगत से बचंे, अपने ऊपर नियन्त्राण रखें, माता-पिता या शिक्षकों का पूरा सहयोग लें। यदि किशोर ऐसा करने में सक्षम हैं तो वह निश्चय ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए अपने जीवन को सफल बनाकर माता-पिता व परिवार तथा समाज में एक अच्छी पहचान बना सकता है। तथा परिवार व अपने देश का नाम उज्जवल कर देश को उन्नति के रास्ते पर ले जा सकता है।
मनुष्य प्राचीन काल से ही नशीली वस्तुओं का प्रयोग करता आ रहा है। उसका विश्वास था कि इनके प्रयोग से रोग दूर हो जाते हैं व वह तरोताज़ा हो जाता है। पर वह इसके कुप्रभाव से अनभिज्ञ है।

मादक पदार्थ (द्रव्य) क्या है?
मादक पदार्थ एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो चिकित्सक की सलाह के बिना मात्रा शारीरिक एवम् मानसिक कार्य प्रणाली बदलने हेतु अपने आप ही लिया जाता है। जो अस्थायी तौर पर कुछ समय के लिए तनावमुक्त, हल्का व आनन्दित कर देता है। 

मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले निम्न दुष्प्रभाव अधिकतर हैं :-
  1. अल्पवधि प्रभाव :कुछ मादक पदार्थों के सेवन से उनके प्रभाव उसी समय प्रकट हो जाते हैं। इससे लेने वाला तनावमुक्त व प्रफुल्लित महसूस करता है।
  2. दीर्घकालीन प्रभाव :मादक पदार्थों के दीर्घकालीन प्रयोग से शारीरिक एवम् मानसिक तौर पर भी रोगग्रस्त हो सकते हैं।
चिकित्सा संबंधी दवाएँ भी मादक हो सकती हैं अगरः-

  1. अत्याधिक प्रयोग : चिकित्सक की सलाह लिए बिना दवाई की मात्रा अगर बढ़ा दी जाए तो वह मादक रूप ले लेती है।
  2. अक्सर प्रयोग : चिकित्सक की सलाह के बावजूद कोई दवा अगर लम्बे समय तक बार-बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भी ली जाए तो यह दवा भी मादक सि˜ हो सकती है। इसे द्रव्य निर्भरता (Drug Dependency) भी कहते हैं।
  3. गलत प्रयोग : कई बार जब कोई दवा बिना बीमारी या बिना चिकित्सक की सलाह से ली जाए तो वह भी मादक बन जाती है।
  4.  गलत संयोग : अगर किसी दवा को बिना चिकित्सक की सलाह के किसी अन्य दवा के साथ मिलाकर ली जाए तो वह घातक सि˜ हो सकती है। इसके अलावा शराब, गुटका, खैनी, गांजा, भांग, चरस, अफीम, सुलफा , तम्बाकू, सिग्रेट, बीड़ी, सिगार, हुक्का, कोकीन, ब्राउन शूगर, हेरोइन, यहां तक कि ज्यादा मात्रा में चाय या काॅफी भी मादक होती हैं। तथा नशीले पदार्थ हैं। इनके सेवन से व्यक्ति के अन्दर अलग-अलग प्रकार के विकार एवम् दुष्प्रभाव दिखते हैं।

युवा वर्ग का मादक द्रव्यों के प्रति आकर्षण के कारण : युवा वर्ग का मादक द्रव्यों के प्रति आकर्षण के विभिन्न कारण हैं जो कि पारिवारिक, सामाजिक, व्यक्तिगत एवं मनोवैज्ञानिक भी हो सकता है। हमने यहां पर किन्हीं कारणों का उल्लेख किया है। इनको पढ़कर किशोर वर्ग को अगर कभी जिन्दगी में ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़े तो मादक द्रव्यों का सेवन न करके उससे बचना चाहिए।

  1. उत्सुकतावश : कई बार किशोर परिवार में मादक द्रव्यों का सेवन करते हुए अपने पिता या बड़े बुजुर्गों एवम् कुछ क्षेत्रों में माताओं को भी देखते हैं। तब भी उनमें उत्सुकता होती है कि इसका सेवन करके देखें कि कैसा अनुभव होता है। क्योंकि वह अपने माता-पिता को अपना आदर्श मानते हैं और सोचते हैं कि अगर वे ले सकते हैं तो हमारे लेने में क्या बुराई है? लेकिन वह इसके दुष्परिणामों से अनभिज्ञ रहते हैं।
  2. मित्रों  वर्गों के सम्पर्क में आने से ; अपने सहपाठियों व हम उमर के दबाव में आकर भी वह मादक पदार्थों का सेवन करता है। कई बार उसके लाख मना करने पर भी उसके मित्रा उसके जबरदस्ती लेने पर मजबूर कर देते हैं। वे कहते हैं कि कभी-कभी लेने से कुछ नहीं होता। परन्तु नशा है खराब। वह बार-बार लेने पर मजबूरर हो जाता है, व नशे की लत में पड़ जाता है।
  3. स्वच्छन्दता : कुछ किशोर-किशोरियां छात्रावास एवम् शहरों में अकेले अपने माता-पिता व परिजनों की निगाह से दूर अपने आप को स्वच्छन्द महसूस करते हैं। तथा वे नशे की आदत में पड़ जाते हैं। 
  4. पारिवारिक वातावरण : जब परिवार में माता-पिता की व्यस्तता अध्कि हो तथा बच्चों को ज्यादा ध्यान न दे पाएं तो भी किशोर इस नशे की आदत में पड़ जाते हैं। वह अपने आप को अकेला और माता-पिता के प्यार से वंचित समझकर इस ओर मुड़ता है। वह सोचता है कि शायद उसकी परिवार में कोई जरूरत नहीं है। कभी-कभी माता-पिता के परस्पर तनावपूर्ण आपसी संबंध व उनकी कलह या उच्च सोसायटी में शादी का अधिक मात्रा में टूटना ;ठतवामद डंततपंहमेद्ध भी बच्चों को मादक पदार्थों के सेवन के लिए प्रेरित करता है। बच्चों में हीन भावना व असुरक्षा की भावना आ जाती हैं वे सोचते हैं कि उनके माता-पिता औरों की तरह एक साथ प्यार से क्यों नहीं रहते। पर बच्चों के मस्तिष्क परिपक्व न होने के कारण वे यह समझ नहीं सकते कि माता-पिता का व्यवसाय के लिए घर से बाहर अधिक समय तक रहना आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए जरूरी है।
  5. बाजार से बच्चों द्वारा मादक पदार्थों की खरीददारी करवाना : कई बार पिता या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा बच्चों को बाजार से शराब, सिग्रेट, बीड़ी, गुटका, खैनी इत्यादि नशीली वस्तुएंे खरीदनें भेजा जाता है। इससे उसके अन्दर इसका सेवन करने की जिज्ञासा उत्पन्न होती है। तथा शराब की दुकान से शराब खरीदने की आदत सी हो जाती है। उसके शराब खरीदनें में कोई शर्म महसूस नहीं होती है। इसके सेवन से बचने के लिए दिल्ली सरकार ने नियम लागू किया है कि 18 वर्ष से कम उमर के बच्चों से खरीददारी पर रोक लगाई है। यदि कोई दुकानदार बेचता हुआ पकड़ा गया तो उसे दंडित किया जाएगा। 
  6. मीडिया के प्रभाव से : फिल्में, टेलीविजन, रेडियों, पत्रिकाओं, इत्यादि में प्रसारित होने वाले विज्ञापनों के प्रभाव से युवा वर्ग में उत्सुकतावश व आकर्षित होकर अपने मन चाहे फिल्मी अदाकारों की नकल करते हुए इन व्यसनों में फंस जाते हैं। इन विज्ञापनों में मादक द्रव्यों को इतना सुसज्जित करके दिखाया जाता है कि वह इसकी ओर आकर्षित होकर लेने के लिए प्रेरित होते हंै। क्योंकि वह उनके जैसा दिखना चाहते हैं।
  7. बच्चों में भेदभाव के प्रभाव से : कई परिवारों में बच्चों के बीच में भेदभाव करते हैं जैसे कि लड़का एवं लड़की या दो बेटों अथवा बेटियों में तुलना की जाती है। जिससे बच्चों में हीन भावना आ जाती है। इस हीन भावना से ग्रसित होकर किशोर मादक पदार्थों का सेवन करते हैं।
  8. बच्चों के प्रति अविश्वास : कई बार माता-पिता बच्चों के ऊपर अत्याधिक निगरानी रखते हैं व उन पर विश्वास भी नहीं करते। इस कारण वह विद्रोह की भावना से इस ओर कदम बढ़ाते हैं लेकिन इसके सेवन से वे अपने ही स्वास्थ्य एवं शिक्षा को नुकसान पहुंचाते हैं तथा वे हर क्षेत्रा में पिछड़ जाते हैं।
  9. किशोरावस्था में आने वाले बदलाव के कारण : किशोरावस्था में होने वाले बदलाव एवं उसके बारे में पूरी जानकारी न होने के कारण वे भ्रमित होकर भी मादक पदार्थों का सेवन करने लगते हैं। माता-पिता को चाहिए कि इस बारे में वे बच्चों को सही निर्देश दें। तथा उनको बताएं कि यह स्वाभाविक परिवर्तन हैं। कई बार किशोर-किशोरियां इस उम्र में न तो बड़ों जैसा व्यवहार कर सकते हैं और न ही बच्चों जैसा। इस वक्त उन्हें अधिक प्रेम, स्नेह, लाड़-दुलार की आवश्यकता होती है। उन पर कोई भी कार्य बिना मर्जी के न थोपे जाएंे। हर कार्य में उनकी भी राय ले लें जिससे वे अपने आप को परिवार के लिए कुछ कर दिखाने की क्षमता बनाऐं।
  10. अतिरिक्त समय का सदुपयोग न करने के कारण : घर में अकेलापन व पढ़ाई-लिखाई के अतिरिक्त समय में कुछ न करने से खाली दिमाग में किशोरों के मन में कई तरह की भ्रांतियां उत्पन्न होती हैं। वे सोचते हैं कि क्यों न अकेले में कुछ ऐसी चीजों का सेवन करें जिससे उसे रोकते हैं। सिग्रेट, बीड़ी, गुटका, खैनी आदि चीजों का सेवन करने के लिए वे अकेले में खाली समय में अपने आप को स्वतन्त्रा महसूस करते हैं। माता-पिता का कर्तव्य बनाता है कि वे अपने बच्चों में रूचि लें एवं खाली समय के लिए उन्हें मार्गदर्शन करें। ताकि वे अपनी अभिरूचि के अनुसार कोई न कोई सृजनात्मक व रचनात्मक कार्यों के प्रति प्रेरित हों।
  11. हीन भावना से ग्रसित होने के कारण : कुछ किशोर-किशोरियों में अपने बारे में कई बार गलत प्रश्न उठते हैं कि वे कुरूप हैं या पढ़ाई में पिछड़े हुए हैं। ऐसी भावनाओं से ग्रसित होकर वे इस ओर कदम बढ़ाते हैं। लेकिन उनको ऐसा न करने की अपेक्षा अपने अन्दर के गुणों को उजागर करना चाहिए। तथा जिस क्षेत्रा में पिछड़ रहे हों उसमें और अधिक मेहनत करनी चाहिए।
  12. प्रेम प्रसंगों (घनिष्ठता) के असफल होने के कारण : कई बार किशोर-किशोरियां एक दूसरे की तरफ आकर्षित होते हैं यह एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन कई बार अधिक घनिष्ठता हो जाने के कारण, तथा माता-पिता द्वारा प्रताड़ित होने पर या किशोर अथवा किशोरियों द्वारा नकारात्मक रवैये के कारण कुंठित हो जाते हैं। व मादक पदार्थों का सेवन करने लगते हैं। असल में उन्हें इस वक्त किसी की ओर अनायास आकर्षित न होकर सभी के साथ प्रेम व आदर भाव रखना चाहिए। इससे वह ऐसी नशीली वस्तुओं के सेवन के प्रति रूचि कम करके अपने भविष्य को सुधर कर परिवार तथा देश का नाम उज्जवल कर सकता है।
  13. बीमारियों के कारण : लम्बी बीमारी होने से कई बार किशोर वर्ग मादक पदार्थों के सेवन के लिए मादक पदार्थों के सेवन के लिए मजबूर हो जाते हैं। क्योंकि उनकी बीमारी का सही उपचार नहीं हो पाता या पैसे के अभाव के कारण वे इलाज नहीं करवा पाते हैं। उन्हें चाहिए कि धैर्य रखकर अपनी बीमारी का इलाज करवाए।
  14. बेरोजगार होकर अथवा परीक्षा में असफल होने के कारण : बेरोजगारी एक सबसे बड़ी समस्या है जो कि किशोरों को निराश करके मादक पदाथों के सेवन के प्रति प्रेरित करती है। कई बार परीक्षा में असफल होकर भी किशोर वर्ग इसके सेवन करने से बच नहीं सकते हैं। बच्चों को परीक्षा में असफलता पर निराश नहीं होना चाहिए। उन्हंे निरन्तर प्रयास व परिश्रम करते रहना चाहिए। उन्हें बेरोजगारी से निरुत्साहित नहीं होना चाहिए। कोई न कोई छोटे-छोटे व्यवसाय करने में संकोच नहीं करना चाहिए। लघु उद्योग स्थापित कर अपने जीवन को ऊँचा उठाना चाहिए। ताकि वे अच्छा नागरिक बनकर अपना तथा माता-पिता व समाज का नाम रोशन कर सके। और अपने राज्य तथा देश का नाम ऊँचा करके देश को प्रगति की राह पर चला सके।
मादक पदार्थों का सेवन करने वालों के लक्षण : मादक पदार्थों का सेवन करने वालों में विभिन्न लक्षण परिलक्षित होते हैंः-

  1. सिग्रेट : सिग्रेट पीने वाले व्यक्ति के शरीर से, श्वास से, कपड़ों से दुर्गन्ध आना, होठों का काला होना, मुंह का कैंसर, दाँतों का सड़ना व पीलापन, मसूड़ों में सूजन, व पीक, फेफड़ों का कैंसर, खाँसी, दमा व गले में खराश इत्यादि लक्षण मिलते हैं।
  2. एल्कोहल (शराब) : शराब पीने वालों के स्नायुतंत्रा व मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है, आँखें लाल व सूजी हुई, जुबान का लड़खड़ाना, मुंह व शरीर से बदबू, सफाई की कमी, मुंह का कैंसर, यकृत का बढ़ना, छोटी व बड़ी आँत का सड़ना, भूख की कमी, विवेकशील निर्णय का न ले पाना, स्मृति में कमी, स्वभाव में परिवर्तन कभी अति प्रसन्न कभी अति दुःखी, कई बार बेवकूफों जैसी हरकतें, आँखों से सही न दिखना जैसे एक से दो दिखना व सही दूरी व ऊँचाई का अनुमान न लगा सकना, जिससे गाड़ी चलाते हुए दुर्घटना का शिकार होना, बेहोशी का हालत, स्नायु का शरीर का तालमेल न बन पाना, बदहाल स्थिति।
  3. हेरोइन, चरस, गांजा, कोकीन, भांग, एल-एस-डी, कोडीन, अफीम व अन्य मादक पदार्थ : शरीर पर सुइयों के निशान, कपड़ों पर खून के धब्बे, आँखें लाल व नशीली, आँखों का धुंधलापन, चिड़चिड़ापन, बेकाबू क्षीण व शिथिल शरीर, पीलापन, भूख न लगना, अनिंद्रा, हल्का व लगातार बुखार, कई लोगों द्वारा एकही सिरिंज के इस्तेमाल से एड्स जैसी जान लेवा बीमारी को आमंत्राण।

मादक द्रव्यों के प्रभाव

स्वास्थ्य पर धूम्रपान के प्रभाव : आधुनिक समाज में सिग्रेट पीना या धूम्रपान सभ्यता का प्रतीक समझा जाता है। परन्तु हम सिग्रेट की प्रत्येक डिब्बिया पर लिखी हुई चेतावनी फ्सिग्रेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैय् ;ष्ब्पहंतमजजम ेउवापदह पे पदरनतपवने जव ीमंसजीष्द्ध की ओर ध्यान नहीं देते और सिग्रेट पीने से बाज़ नहीं आते। इससे हमारे शरीर में कई प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं। तम्बाकू का निरन्तर सेवन करने से मनुष्य के शरीर में रोगों का प्रतिरोध करने की शक्ति क्षीण हो जाती है। अधिक सिग्रेट पीने से मनुष्य की आयु प्रति सिग्रेट 11.5 मिनट कम हो जाती है।

तम्बाकू में निकोटिन नामक विषैला रासायनिक तत्व पाया जाता है जब रासायनिक पदार्थ सिग्रेट, बीड़ी आदि के धुंए के साथ मिलकर मनुष्य के मुंह, नाक तथा फेफड़ों द्वारा सोख लिया जाता है तब उसे अनुभव होता है कि उसे आराम मिल रहा है परन्तु जब इसका प्रभाव समाप्त हो जाता है तो मनुष्य को सिग्रेट पीने की ललक महसूस होती है। इस प्रकार मनुष्य की सिग्रेट पीने की क्षमता बढ़ती ही जाती है। धूम्रपान एक व्यसन है जो मनुष्य के शरीर की सभी प्रणालियां विकृत कर देता है।

धूम्रपान के फलस्वरूप मनुष्य का पाचन तंत्र (Digestive System) बिगड़ जाता है। तथा रक्त चाप ;ठसववक च्तमेेनतमद्ध में उतार-चढ़ाव होने लगता है। सिग्रेट पीने वालों को हृदय रोग, श्वास रोग, नाक एवं गले के रोग होने की सम्भावना अधिक रहती है। अधिक सिग्रेट पीने से कैंसर की बीमारी होने का भय भी बना रहता है।

सिग्रेट पीने की आदत से छूटकारा पाने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। दूसरे हरी सब्जियों और फलों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।

तीसरे सच्चे मन से धूम्रपान न करने का दृढ़ संकल्प करना चाहिए।

स्वास्थ्य पर एल्कोहल(शराब) के प्रभाव : शराब पीने का हमारे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे हमारे पेट में कई तरह के विकार उत्पन्न हो जाते हैं।
  1. यकृत का बढ़ना : अत्याधिक शराब पीने से एल्कोहल Acetaldehyde में बदल जाती है जो कि एल्कोहल से भी बुरी रसायन है। यह यकृत में वसा का निर्माण करती है और यकृत की कोशिकाएँ जो कि ग्लाकोजन, इनजाईम, प्रोटीन का निर्माण करती हैं को न करके सिर्फ वसा का संग्रह करती रहती हैं। इसे फेट्टी लीवर सिंडरोम यकृत द्वारा वसा का संग्रहद्ध कहते हैं। इससे यकृत धीरे-धीरे सख्त होती है और फिर सूख जाती है और उसकी कोशिकाएं धागों का रूप ले लेती है। इससे यकृत धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। इसे सिरोसिस ;ब्पतीवेपेद्ध भी कहते हैं। अन्ततः व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
  2. हृदय पर प्रभाव : शराब के लगातार सेवन से धमनियाँ व शिराएं जल्दी से फैल जाती हैं और उसी अवस्था में ज्यादा देर तक रहने से उनकी फैलने और सिकुड़ने की क्षमता खत्म हो जाती हैं और ये सख्त हो जाती हैं। इससे हृदय गति के संचालन में भी विघ्न पड़ता है।
  3. गुर्दों पर प्रभाव : शराब के साथ लिया जाने वाला सोडा या पानी गुर्दे पर बुरा प्रभाव डालता है क्योंकि शराब पीने वालों के गुर्दे को आदमी के गुर्दों की क्षमता से ज्यादा काम करना पड़ता है। शराब पीने से शरीर में अस्थाई रूप से गर्मी पैदा होती है। जिसको सामान्य करने के लिए शरीर से पानी भाप बन कर निकल जाता है। इससे कई बार शरीर में पानी की कमी (dehydration) नाइट्रोजिनस व्यर्थ पदार्थ ज्यादा एकत्रित हो जाते हैं जो कि सामान्य तौर पर इसके निष्कासन में बाधा बन जाती है। शराबी अक्सर अपने खाने-पीने का सही ध्यान न रख पाने के कारण प्रायः कुपोषण या प्रतिरोधक शक्ति की कमी के शिकार हो जाते हैं। इसका हमारे शरीर के सभी अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मदिरा पान से हमारा स्नायुतन्त्रा बिगड़ जाता है। मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे श्वास की गति बढ़ जाती है। जिस से कई रोग हो जाते हैं। रक्त संचार की गति बढ़ जाती है। कार्य करने की शक्ति कम हो जाती है।
तथ्यों तथा अनुभवों पर आधारित विश्लेषण : इस भाग में हम मादक पदार्थों के सेवन से हुए कुछ अनुभवों का तथ्यों के आधार पर विश्लेषण कर रहे हैं। मादक पदार्थों के सेवन से समाज में हुए दुष्प्रभावों को रेखांकित किया गया है। यह तथ्य सत्य घटनाओं पर आधारित है। इन तथ्यों को प्रस्तुत करने का हमारा विशेष अभिप्राय किशोरों को उनके स्वास्थ्य एवम् मनोवैज्ञानिक तरीके से शिक्षित करके समाज में एक अच्छा नागरिक बनाना है। इन तथ्यों को पढ़कर वह ध्यान रखें कि वह कभी ऐसी दुःखद परिस्थिति में न पड़े व पहले ही इससे बचें। क्योंकि नशा है अभिशाप इससे बचें
  1. समाचार पत्रों में पढ़ी सूचना के अनुसार एक करीबी सम्बन्धी ने ने शराब के नशे में धुत होकर अपने परिवार की लड़की का बलात्कार किया। जो कि एक अमानवीय, घृणित कुकृत्य है। शराब के नशे में डूबकर शराबी किसी से भी उलझ जाता है। कलह करता है, कभी-कभी तो अपने घर में चोरी करता है। परिवार की जरूरतों को नजर अन्दाज करता है। यहां तक कि अपने बच्चों की स्कूल की फीस भी अदा नहीं कर पाता। जिससे शराबी ही नहीं पूरा परिवार ही छिन्न-भिन्न हो जाता है। सही कहा है- शराब है खराब।
  2. कई शहरों के प्रतिष्ठित स्कूलों में बहुत से ऐसे उदाहरण मिले हैं जहाँ बच्चे कुसंगति में पड़कर मादक पदार्थों का सेवन करने के पश्चात् पढ़ाई से विमुख होकर माता-पिता को आँसुओं में डूबोकर अपना जीवन बर्बाद करते हैं।
  3. अपने किसी साथी द्वारा सुनाई गई बात पर आधारित एक घटना : दो विद्यार्थी आपस में परीक्षा के दिनों में बात कर रहे थे। उनमें से एक विद्यार्थी ने डेट शीटस् गलत उतार ली थी। जिसके हिसाब से उसने जिस विषय का पेपर देना था उसकी तैयारी न करके गलत उतारी डेट शीटस् के हिसाब से पेपर की तैयारी कर ली। जब वह पेपर देने के लिए स्कूल जा रहा था तो बस में उससे अन्य विद्यार्थी ने पूछा कि तुमने पांचवा पाठ याद किया? तो उसे समझ आया कि मैनें तो दूसरे विषय का पाठ याद कर लिया है। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो दूसरे विद्यार्थी ने उससे कहा कि तू घबरा मत। एक ऐसी दवाई आती है जिसे लेने से तुझे इस पेपर का सारा याद आ जाएगा। उस विद्यार्थी ने सच में दवाईयों की दुकान से उस विद्यार्थी द्वारा बताई गई दवाई खाई। याद तो बच्चे ने पहले ही किया हुआ था सो उसने परीक्षा दे दी। घर जाकर जब उसने अपने माता-पिता को बताया कि आज पेपर दूसरे विषय का था व मैं दूसरे विषय का याद करके गया था। तो उसकी मम्मी डांटने लगी कि तुझे सही डेट शीटस् उतारनी चाहिए थी। इस पर बच्चे ने मां से कहा आप डांटो नहीं मैंने दवा ले ली र्थी वह मुझे सारा याद आ गया था। मैंने सारा पेपर सही कर दिया है।
  4.  एक बार मंै अपनी सहेलियों के साथ एक होटल में रात के खाने पर गई थी। वहां का दृश्य जो मैनें देखा उसे बताती हूँ। एक किशोर का जन्मदिन था । वह पाँच-छः मित्रों के साथ उसी होटल में जन्मदिन मना रहा था। उन बच्चों में दो बच्चे शराब नहीं पी रहे थें जिसका जन्म दिन था वह जबरदस्ती उन दो बच्चों को शराब पीने के लिए कह रहा था। वह कह रहा था कि आप दोनों को मेरे जन्मदिन की खुशी नहीं है जो आप दोनों नहीं पी रहे हो। उनके लाख मना करने पर भी उसने उन्हें जबरदस्ती कोक में मिलाकर शराब पीला दी। ध्यान रहे कि अगर ऐसी जगह जाओ तो ध्यान रखना चाहिए कि आपके साथ कोई ऐसा तो नहीं कर रहा।
  5. प्रेम प्रसंग में असफल होकर : मैं पड़ोस में घटी एक घटना का विवरण देना चाहती हूँ। हमारे पड़ोस में एक लड़के की एक लड़की से बहुत घनिष्टता थी। लेकिन लड़की मे माता-पिता इस बात से सहमतनहीं थे कि लड़की का किसी से मिलना जुलना हो। लड़की के माता-पिता ने लड़की को लड़के से मिलने पर पूरी पाबन्दी लगा दी। अब प्रेम में निराश होकर उसने मादक पदार्थों का सहारा लेना उचित समझा। और वह अपने अन्य मित्रों से अलग रहने लगा। इससे वह पढ़ाई-लिखाई में भी पिछड़ गया। इस प्रकार उसने मादक पदार्थों का सहारा लेकर अपने जीवन को बर्बाद कर लिया।
  6. एक बार हम अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए थे। वहां पर हमने दूसरे शहर से आए हुए कुछ बच्चों को पिकनिक मनाते हुए देखा। उन्होंने मौज मस्ती में धूम्रपान व शराब पी। और वापसी में जब दो लड़के स्कूटर में सवार होकर नशे में धुत होकर घर वापिस जा रहे थे तो नशे के कारण सहीं संतुलन न रख पाने के कारण मोड़ काटते हुए एक गहरी खाई में गिर गए। उनमें से एक की तत्काल मृत्यु हो गई। तथा दूसरा बूरी तरह जख्मी हो गया।
इस प्रकार के बहुत से उदाहरण हमें प्रतिदिन देखने को मिलते हैं जो कि नशे की हालत में अपना जीवन तो खोते ही हैं लेकिन औरों का जीवन भी बर्बाद करते हैं। इसलिए हमको यह अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि नशा चाहे किसी भी तरह का हो हमारे जीवन को हमेशा घातक ही बनाता है। हमें अपने ऊपर आत्मनियन्त्राण करके इन मादक पदार्थों से दूर रहकर अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर होना चाहिए।

मादक पदार्थों के प्रति भ्रांतियाँ :मादक पदार्थों के प्रति अक्सर तरह-तरह की भ्रंातियाँ देखने को मिलती हैं। जिनमें निम्नलिखित भ्रंातियों की यहाँ चर्चा की गई हैः-
  1. ऐसा समझा जाता है कि प्रायः एक बार मादक पदार्थ लेने से कुछ बुरा नहीं होता व जब चाहे इसे छोड़ा जा सकता है। परन्तु जब कोई एक बार इसमें लिप्त हो जाता है तो वह इसमें फंसता ही जाता है। इसलिए हमें यह शुरू से ही दृढ़ निश्चय बना लेना चाहिए कि मादक पदार्थों को अभी नहीं और कभी नहीं लेना है।
  2. शराब से जुड़ी कुछ ऐसी भ्रांतियां है कि प्रायः यह शरीर को गर्मी प्रदान करती है तथा ठंड से बचाती है। परन्तु ऐसा नहीं है। वह जो गर्मी मिलती है वह क्षणिक होती है क्योंकि ली गई शराब आमाशय व छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में ही अवशोषित होती है। इसका तुरन्त Oxidation शुरू हो जाता है, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है, और यह उष्मा शरीर के अन्दरूनी भाग में न जाकर सिर्फ त्वचा को गर्म करती है। इस गर्मी को कम करने के लिए शरीर के पानी का एक बहुत बड़ा हिस्सा भाप बनकर उड़ जाता है जिससे कमीलकतंजपवद या पानी की कमी हो जाती है। यह ऊर्जा शरीर के किसी काम में प्रयोग नहीं होता बल्कि शरीर में विद्यमान ऊर्जा का भी ह्यस होता है।
  3. शराब का सेवन उत्तेजक होता है ऐसा भी कहा जाता है। पर यह मिथ्या है। शराब व्यक्ति के स्नायु तन्त्र को धीमा कर देती है। इससे व्यक्ति सोचता है कि वह जो बात होशोहवाश में नहीं कर सकता है, वह शराब पीकर कर सकता है, परन्तु ऐसा नहीं है। क्योंकि जितने प्रभावशाली ढंग से व्यक्ति बिना पीये काम कर सकता है उतना शराब पीकर नहीं।
  4. छोटे बच्चों को सर्दी से बचाव के लिए शराब दी जाती है। पर अगर इसकी मात्रा थोड़ी ज्यादा हो जाए तो इसका उल्टा प्रभाव भी पड़ता है, व बच्चा इसका आदी भी बन सकता है।
  5. उच्च सोसाइटी में लोग शराब को उच्च स्तर मानते हैं। पर क्या यह सही है? देखा गया है कि अच्छे भले परिवार शराब को सेवन करने से अन्धकार में डूब जाते हैं तथा पैसे का भी नाश करते हैं।
  6. कई लोग सिग्रेट को एकाग्रता बढ़ाने के लिए लेते हैं। परन्तु इससे एकाग्रता नहीं बढ़ती बल्कि कार्बनमोनोआक्साइड का परिमाण उसके रक्त में बढ़ जाने के कारण हिमोग्लोबिन के साथ जुड़ जाने से इसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। तथा कोशिकाओं को आॅक्सीजन न मिलने के कारण शरीर की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली अस्त-व्यस्त हो जाती है। इसमें निकोटिन एल्कोलायड होता है, जो स्नायुतन्त्रा को तोड़ता है व क्रिया शक्ति क्षीण हो जाती है। तथा शरीर में अलग-अलग हिस्सों के कैंसर हो जाते हैं।
  7. कई लोग सिग्रेट पीना व्यक्तित्व का निखार समझते हैं। परन्तु यह एक मात्रा भ्रम है। सिग्रेट पीने वाले के शरीर, श्वास व कपड़ों से दुर्गन्ध आती है। दांत होंठ (ओष्ठ) काले हो जाते हैं। कोई पास बैठना भी पसन्द नहीं करता।
  8. कुछ राज्यों में पान खाना व खिलाना शालीनता मानी जाती है व वैवाहिक जीवन में होठों की सुन्दरता के लिए भी लिया जाता है, परन्तु यह एक मात्रा भ्रम है। क्योंकि पान खाने वाले के होंठ, दाँत व मुंह लाल हो जाता है, व लगातार इसका सेवन करने से इसके दाग पक्के हो जाते हैं। ये दाग देखने में बहुत भद्दे लगते हैं। इससे मुंह तथा गले का कैंसर भी हो जाता है व पान में चूने के प्रयोग से मंुह का स्वाद भी खराब हो जाता है। पान खाकर जगह-2 उसका थूक फैंकने से सड़क व दीवारें, गन्दी हो जाती हैं। यह देखने में भी बहुत गन्दा लगता है। सिंगापुर व शिमला में अंग्रेजों के समय सड़क पर थूकने वालों को जुर्माना हुआ करता था।
  9. कई गांव में ऐसा परिचलन है कि एक ही हुक्के से पूरे समुदाय के लोग हुक्का पीते हैं। इससे वह अपना आपसी प्रेम दर्शाते हैं और अगर किसी को तिरस्कृत करना हो तो उसका हुक्का-पानी बंद कर देते हैं व अपने समुदाय से बाहर कर देते हैं। परन्तु वह यह नहीं समझते कि एक ही हुक्के से हुक्का पीने से एक दूसरे से होने वाली संक्रामक बीमारियां उन्हें आ घेरेंगी।
  10. शिव भक्त मानते हैं कि शिवरान्नि के दिन भंग पीने से शिव भगवान के दर्शन हो जाएंगे। पर ऐसा मानना उनका भ्रम है। इसके ज्यादा सेवन से कई बार जीवन से हाथ भी धोने पड़ सकते हैं।
  11. खिलाड़ियों में यह भ्रांति भी है कि कुछ दवाईयों के सेवन से वह अपने खेल का प्रदर्शन अच्छा कर पायेगें। पर जब रासायनिक परीक्षण में वह पकड़े जाते हैं तो उन्हें खेल से निष्कासित किया जाता है। इससे उनकी सारे वर्ष की मेहनत पर पानी फिर जाता है। उनका तथा देश का नाम भी बदनाम होता है।
  12. कई बार खिलाड़ी मादक द्रव्यों का सेवन करके खेल के मैदान में उतरते हैं क्योंकि इसके सेवन से उनके मस्तिष्क के स्नायु बोझिल हो जाते हैं। इसलिए वह खेल को खेल न समझकर लड़ाई का मैदान बना देते हैं।


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