स्वप्नदोष रोकने का आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक इलाज



अपने नाम के विपरीत स्वप्नदोष (Nocturnal Emission or Wet Dream) कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है जिसके अंतर्गत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात (स्खलन) हो जाता है। अंग्रेंजी में यह रोग स्पर्माटोरिया के नाम से जाना जाता है। सामान्य अवस्था में स्त्री व पुरुष के सम्मिलन की चरमावस्था पर पुरुष का वीर्य स्खलित होता है। या यह कहा जा सकता है कि वीर्य़ का स्खलन संभोग की चरम सीमा है जिसमें पुरुष का वीर्य स्खलित होता है। इसमें पुरुष व स्त्री शारीरिक व मानसिक तल पर एक साथ सम्मिलित होते हैं और दोनो का एक ही लक्ष्य होता है सम्भोग की चरम अवस्था पर पहुँच कर परमानन्द की अनुभूति प्राप्त करना है। लेकिन स्वप्नदोष एक एसी अवस्था या प्रक्रिया है जिसमें कोई भी स्त्री शारीरिक रुप से उपस्थित नही होती है। व्यक्ति केवल स्वप्न में स्त्री या कामिनी को देखता है और शारीरिक रुप से किसी स्त्री की अनुस्थिति होने के कारण से व्यक्ति केवल कल्पना में ही सारे सम्भोग को करता है और उस मानसिक सम्भोग की पूर्णता से पहले या पूर्णता पर वीर्य का स्खलन हो जाता है। इस असामान्य स्थिति को स्वप्नदोष कहते है। यह व्यक्ति के सोच विचार का परिणाम होता है। व्यक्ति सोते समय वीर्य का स्त्राव होने वाली इस क्रिया को स्वप्नदोष कहते हैं। इस रोग को वैसे रोग कहना अतिशयोक्ति ही होगी। 

इस प्रक्रिया में  चाहे आपका लिंग तना हुआ हो या नहीं, वीर्य आपके लिंग से अपने आप बाहर निकल जाता है। प्रायः अविवाहित युवकों तथा किशोरों को रात में सोते समय स्वप्न में वीर्यपात होने लगता है, इसी को स्वप्नदोष कहते हैं। वास्तव में स्वप्नदोष कोई रोग नहीं है। पर जब इसके कारण व्यक्ति के दिमाग में तनाव घिर जाता है, तो यह रोग का रूप धारण कर लेता है। शुरू-शुरू में यह रोग स्वप्न से संबंधित होता है, परंतु कुछ समय बाद जननेन्द्रिय तथा मानसिक स्थिति इतनी कमजोर हो जाती है कि वैसे ही सोये रहने पर लिंग उत्तेजित हो जाता है और बिना स्वप्न के ही वीर्य-स्खलन होने लगता है। स्वप्नदोष होने में कोई खराबी नहीं है। यह बड़े होने का स्वाभाविक हिस्सा है। अगर आपको बहुत ज्यादा स्वप्नदोष भी होता है, इसका मतलब यह नहीं की आपके शरीर में कोई खराबी है। और इस से आपके शरीर और सेहत पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता। कुछ लोगों को हफ्ते में कई बार स्वप्नदोष होता है। और कुछ को अपनी पूरी ज़िन्दगी में केवल कुछ ही बार स्वप्नदोष होता है। जैसे-जैसे आप उम्र में बड़े होते हैं, स्वप्नदोष होने की संभावना उतनी ही घट जाती है। स्वप्नदोष जैसा कि इसके नाम से प्रतीत होता है कि यह स्वप्न से संबधित रोग है। तो हाँ यह सच है कि यह स्वप्न से संबधित रोग है। यह रोग अधिकतर युवाओं में पाया जाता है।

यह प्रक्रिया महीने में अगर 1 या 2 बार ही हो तो सामान्य बात कही जा सकती है और यह कहा जा सकता है कि कोई रोग नही है किन्तु यदि यह इससे ज्यादा बार होता है तो वीर्य की या शुक्र की हानि होती है और व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी का अहसास होता है। क्योंकि यह शुक्र भी रक्त कणों से पैदा होता है। अतः अत्यधिक शुक्र क्षय व्यक्ति को कमजोर कर देता हैं। अधिकतर तो स्वप्नदोष अपनी इच्छा के विपरीत ही होता है किन्तु कभी कभी यह ऐच्छिक भी हो सकता है। इस क्रिया मे रोगी मानसिक रुप से सम्भोगावस्था में होता है किन्तु वास्तविकता में शारिरिक रुप से ऐसा न होने के कारण तथा स्त्री की अनुपस्थिति होने के कारण न तो कभी संभोग का वास्तविक आनन्द ही प्राप्त हो सकता है औऱ न ही संतुष्टि ही मिल सकती है। बल्कि यह तो मानसिक दुर्बलता, कुण्ठित व्यक्तित्व व आध्यात्मिक दुर्बलता का प्रतीक है।
 

Treatment for Wet Dreams or Night Fall
इसके मुख्य कारण हैं कि किशोरावस्था में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण, कामुकता, अश्लील साहित्य व अश्लील चलचित्रों का अवलोकन, खाने में तली-भुनी चीजों का ज्यादा इस्तेमाल, तेल-मसालेदार वस्तुओं का अत्यधिक सेवन, अधिक गर्म वस्तुएं चाय, कॉफ़ी आदि का अधिक प्रयोग, व्यायाम का अभाव व मानसिक तनाव ही इस रोग के कारण हैं। रात-दिन कामुक विचारों में रत रहने के कारण स्वप्न में भी युवक यही सब देखता है। परिणामस्वरूप लिंग से वीर्यपात होता रहता है। हालांकि स्वप्नदोष एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, पर जब इसके बाद सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, शिथिलता आदि दिखाई दे, तो इसके इलाज की ओर उन्मुख हो जाना चाहिए।

स्वप्नदोष रोकने का आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक इलाज


कुछ विद्वानों का मानना है कि स्वप्नदोष कोई समस्या नहीं है अपितु यह किशोरावस्था के दौरान लड़कों में स्वतः ही वीर्य स्खलन हो जाता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो एक किशोर लड़के के जननांगों की परिपक्वता को दर्शाती है। अध्कितर लड़कों में प्रातःकाल के समय स्वतः वीर्य स्खलन होता है। कुछ में यह प्रक्रिया रात के समय भी होती है जब अनैच्छिक रूप से वीर्य स्खलन हो जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य है। तथा उनकी सैक्स के रूप में कमजोरी को प्रदर्शित नहीं करती। ना ही इससे शरीर को कोई हानि होती है तथा न ही इसके इलाज की कोई आवश्यकता है।
किशोर लड़कों को यह आश्वासन दिलाना जरूरी है ताकि यह उनकी चिन्ता का कारण ना बन सके। क्योंकि लड़कों के शरीर में शुक्राणु तथा वीर्य लगातार बनते रहते हैं इसलिए नाईट फाॅल से हुए नुकसान की पूर्ति होती रहती है। वीर्य के नुकसान से कभी कमजोरी नहीं होती। इस स्थिति में किसी इलाज की आवश्यकता नहीं है तथा परिपक्वता के साथ-साथ यहधीरे-धीरे कम होती जाती है।

स्वप्न दोष के लक्षण क्या हैं
मध्य-किशोर अवस्था के दौरान वीर्य बनना और निकलना आरंभ हो सकता है और नोक्चुरनल एमिसन या स्वप्न दोष के रूप में बाहर निकल सकता है। इससे पता चलता है कि किशोर प्रजनन के लिए परिपक्व हो गया है। यह सामान्य घटना है और इसके लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि अनेक किशोर इसके बारे में तनाव में होते हैं तथा उपचार के लिए चले जाते हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक हो सकता है। हस्तमैथुन के बाद होने वाले स्वप्न दोष में रोगी बेहद कमजोरी महसूस करने लगता है। रोगी का तनाव बढ़ता जाता है। घबराहट, एकाग्रता की कमी, किसी भी कार्य में उत्साह न रहना, शिथिलता, स्नायु दुर्बलता, धातुक्षीणता, राह चलते-चलते अचानक आंखों के आगे अंधेरा छा जाना (कमजोरी) आदि के लक्षण रोगी में पाये जा सकते हैं।

स्वप्न दोष के क्या कारण हैं? 
स्वप्न दोष के अनेक कारण हो सकते हैं जो यौन फंतासी या नींद में उत्तेजित होने से संबंधित हो सकता है या संबंधित नहीं भी हो सकता। स्वप्न दोष मूत्राशय या पुरुष का प्रजनन अंग पर दबाव के कारण अथवा बिना इच्छा के स्खलन के जरिए हो सकता है।
क्या स्वप्न दोष होना हानिकारक है? 
इससे पुरुषत्व की हानि नहीं होती या यौन दुर्बलता नहीं आती, यह निश्चित रूप से हानि रहित है और इसके लिए किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती। किशोरों को पुनः यह आश्वासन देने की आवश्यकता है जिससे यह उनके लिए परेशानी या अनावश्यक चिंता का करण न बने। शरीर निरंतर वीर्य और शुक्राणु बनाता रहता है, इसलिए स्वप्न दोष से हुई हानि की पूर्ति हो जाती है।
स्वप्न दोष से संबंधित चिंता से छुटकारा पाने के लिए कैसे और किससे सम्पर्क करें?
स्वप्न दोष प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसलिए इसके लिए उपचार की आवश्यकता नहीं होती। जैसे-जैसे व्यक्ति परिपक्व होगा स्वप्न दोष या इसकी बारंबारता धीरे-धीेरे कम हो जाएगी। यदि इसके बारे में अब भी कोई संदेह है तो व्यक्ति को नजदीकी एडोलेसेंट क्लीनिक/पीएचसी/अस्पताल में डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
स्वप्न दोष के उपचार-संयमित आहार, योगासन, ध्यान व सात्विक विचार हैं
  • पेट व पीठ के निचले भाग पर गर्म-ठंडा सेंक करते रहने से स्वप्नदोष में विशेष लाभ मिलता है।
  • नपुंसकता वाले सारे आसन, योग व ध्यान करना चाहिए।
  • सात्विक भोजन, गर्म, तली-भुनी, मसालेदार युक्त चीजों से परहेज, सूप (सब्जियों के) व फलों के जूस का अधिक इस्तेमाल, दूध, दही का सेवन, खाने में सलाद का प्रयोग आदि रोगी को कहें।
स्वप्न दोष निवारण का आसान उपाय
इस सच को रोगी मन में बिठाए कि स्वप्नदोष कोई रोग नहीं है। यह एक प्राकृतिक कारण है। शरीर की आवश्यकता है। अपना ध्यान पढ़ाई में लगाकर अच्छे परिणाम के लिए कड़ी मेहनत करने से यह रोग स्वतः दूर हो जाता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि सोने से पहले हस्‍तमैथुन करने से भी स्‍वप्‍नदोष से बचा जा सकता है किंतु यह कोई समाधान नहीं क्योकि वीर्य स्खानल दोनों ही तरीके से होगा। रोजाना व्‍यायाम करने से भी शारीरिक ऊर्जा का सही इस्‍तेमाल होता है और आप स्‍वप्‍नदोष से बच सकते हैं  क्योकि व्यायाम द्वारा शरीर थके होने पर अच्छी नींद आने की सम्भावना अधिक होती है। कोशिस करें कि कामुक विचारों की पुस्तको से परहेज करें और हस्‍तमैथुन की संख्‍या कम करके भी इस समस्‍या से बचा जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति को विटामिन बी से भरपूर आहार लेने से भी स्‍वप्‍नदोष की समस्‍या से बच सकते हैं।
रोग के उपचार-जड़ी बूटियों द्वारा
  • अत्यधिक हस्तमैथुन के कारण वीर्य पतला हो जाता है। यह पतला वीर्य ही स्वप्नदोष के जरिये बाहर आता है। वीर्य को गाढ़ा करने के लिए शिरीष के बीजों का 2 ग्राम चूर्ण, 4 ग्राम शक्कर मिलाकर प्रतिदिन गरम दूध के साथ प्रातः-सायं लेने से बहुत लाभ होता है।
  • ताजी शतावर की जड़ का चूर्ण 250 ग्राम, मिश्री 250 ग्राम, दोनों को कूट-पीस लें तथा 6-11 ग्राम की मात्रा 250 ग्राम दूध के साथ सुबह-सायं लेने से स्वप्नदोष दूर होता है तथा शरीर बलवान् होता है।
  • प्याज का रस 6 ग्राम, गाय का घी 4 ग्राम और शहद 3 ग्राम प्रातः सायं चाटने से स्वप्नदोष से निजात मिलती है।
  • कसौंदी की मूलवक के चूर्ण को महीन पीसकर 1-4 ग्राम की मात्रा में 5-10 ग्राम मधु के साथ मिलाकर सुबह-शाम एक गिलास दूध के साथ लेने से वीर्य का पतलापन दूर होकर वीर्य पुष्ट होता है। धातु क्षय भी ठीक होता है।
  • इमली को पानी में भिगोकर इसके छिलके उतार लें। सपफेद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बनाएं तथा इसे एक शीशी में बंद करके रख दें। एक चम्मच की मात्रा में दिन में तीन बार दूध के साथ सेवन करने से स्वप्न दोष नहीं होता। वीर्य का पतलापन भी दूर होता है।
  • मुंडी की ताजी जड़ों के पीसे हुए कल्क, कलईदार पीतल की कड़ाही में रखकर चैगुना काले तिल का तेल और सोलह गुना पानी डालकर पकाएं। तेल केवल शेष रहने पर छान लें। इस तेल को कामेन्द्रियों पर मालिश करने से तथा 10-30 बूंद तक पान में लगाकर दिन में 2-3 बार खाने से स्वप्नदोष में विशेष लाभ होता है। इसके साथ-साथ नपुंसकता भी दूर होती है।
  • आंवले के 20 मिलीलीटर रस में 1 ग्राम इलायची के दाने और ईसबगोल बराबर-बराबर की मात्रा में मिलाकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम नियमित रूप से जल के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष नहीं होता, साथ ही वीर्य भी गाढ़ा होता है।
  • बबूल की पफलियों को छाया में सुखाकर पीस लें और बराबर की मात्रा में मिश्री मिला लें। एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से जल के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष नहीं होता। साथ ही वीर्य भी गाढ़ा होता है।
  • अखरोट के छिलकों की भस्म बना लें। इसमें बराबर की मात्रा में खांड मिलाकर 10 ग्राम तक की मात्रा में जल के साथ 10 दिन प्रातः सायं सेवन करने से स्वप्नदोष दूर होता है।
  • 3 ग्राम अजवाइन को सपफेद प्याज के रस में (लगभग 10 मिलीलीटर) 3 बार 10-10 ग्राम शक्कर मिलाकर सेवन करें। 21 दिनों में पूर्ण लाभ होगा। इस प्रयोग से स्वप्नदोष के अलावा नपुंसकता, शीघ्रपतन व शुक्राणु अल्पता के रोग में भी लाभ होता है।
  • Nux Vomica 200 रात को सोते समय 2 बूंद हर तीन दिन बाद फिर से ले सकत हैं। रोज नहीं।
स्वप्नदोष के लिए आसान उपाय 
  • मुलहठी (मुलेठी) का चूर्ण आधा चम्मच और आक की छाल का चूर्ण एक चम्मच दूध के साथ लें।
  • काली तुलसी के पत्ते 10-12 रात में जल के साथ लें।
  • रात को एक लीटर पानी में त्रिफला चूर्ण भिगा दें और सुबह मथकर साफ़ महीन कपड़े से छानकर पी जाएँ।
  • अदरक रस 2 चम्मच, प्याज रस 3 चम्मच, शहद 2 चम्मच, गाय का घी 2 चम्मच, सबको मिलाकर सेवन करने से स्वप्नदोष तो ठीक होगा ही साथ मर्दाना ताकत भी बढ़ती है।
  • नीम की पत्तियाँ नित्य चबाकर खाते रहने से स्वप्नदोष जड़ से गायब हो जाएगा।
  • आँवले का मुरब्बा रोज खाएँ और उसके बाद गाजर का रस पीने से लाभ होता है।
  • तुलसी की जड़ के टुकड़े को पीसकर पानी के साथ पीना लाभकारी होता है यदि जड़ नहीं उपलब्ध हो तो तो बीज 2 चम्मच शाम के समय लें।
  • लहसुन की दो कली कुचल कर निगल जाएँ और थोड़ी देर बाद गाजर का रस पीने से लाभ होता है।
  • इसका एक उपचार यह भी है कि डन्ठल युक्त पान के 2 पत्ते नीम की 5 कोपलें, विल्व पत्र या बेल पत्थर के 2पत्ते, केले के तने का रस 2 चम्मच लेकर सबका रस निकाल लें अब शिश्न के मुख या लिंग मुण्ड को इसमें से 5 ग्राम मात्रा लेकर अलग करके इस रस में डुबाकर लगभग 10 मिनट तक डुवोऐं। बाकी रस में मिश्री डालकर पी लें। इस प्रयोग के करने के 10 मिनट बाद सम्भोग करें। नियमित  रुप से कम से कम चालीस दिन तक प्रयोग करें यह वीर्य स्तम्भक अचूक योग है।
हस्तमैथुन के नुकसान
हस्तमैथुन वास्तव में यौन क्रिया कि वैकल्पिक और सामान्य प्रक्रिया है और अधिकांश व्यक्ति किसी न किसी रुप मे हस्तमैथुन करते है। हमारे समाज में हस्तमैथुन के प्रति काफी भांतियां है जैसे कि हस्तमैथुन से शरीरिक और यौन कमजोरी आती है आदि। परन्तु, वास्तव में समस्या हस्तमैथुन से नहीं बल्कि इससे जुडी हुई भ्रातियों के कारण ज्यादा होती है। व्यक्ति शर्म और लज्जा के कारण मानसिक रुप से अपने आप को रुग्ण पाता है पर वास्तव में उसे कोई बीमारी नही होती हैं परन्तु यदि आपको बहुत ज्यादा हस्तमैथुन की आदत है तो उसे सुधारने की आश्यकता है क्योंकि किसी भी कार्य की अति खराब होती है इसलिये संस्कृत का बहुत प्रसिद्ध लघु सूत्र है अति सर्वत्र वर्जयेत् जिसका हिंदी शब्दार्थ है कि अति करने से हमेशा बचना चाहिए अति का परिणाम हमेशा हानिकारक होता है कि तो आइये जानते हैं कि हस्तमैथुन से क्या क्या नुकसान हो सकते हैं :
  1. मानसिक प्रभाव : हस्तमैथुन से घबराहट और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं होती हैं। क्यों कि स्खलन के बाद अवसाद पैदा होते हैं और व्‍यक्ति ये सोचता है कि उसने गलत किया, जिससे मन में नकारत्मकता भर जाती है।
  2. असंतुष्टि : लगातार हस्‍तमैथुन करने से आपको सेक्स की आदत पड़ जाती है। जिससे आपका वीर्य स्‍खलित होने का समय भी बढ़ जाता है। जिससे आप सेक्स के दौरान जल्दी संतुष्टि महसूस नहीं करते हैं।
  3. लिंग का टेड़ा होना : हस्तमैथुन के दौरान असाधारण क्रियाकलाप करने से `पायरोनी` नाम की बीमारी हो सकती है। पायरोनी होने पर लिंग टेढ़ा हो जाता है मांसपेशियों में तनाव होने की स्थिति में आप उसके टेढ़ेपन को आसानी से देख सकते हैं।
  4. सन्तानोत्त्पति में समस्या : अधिक हस्‍तमैथुन करने से वीर्य में शुक्राणुओं की संख्‍या घटने लगती है। इसका असर सन्तानोत्पत्ति करने की क्षमता पर भी पड़ता है।
  5. इरेक्टाइल डिसफंक्शन : हस्‍तमैथुन की आदत इरेक्टाइल डिसफंक्शन रोग का मुख्‍य कारण होती है।
  6. पोर्नोग्राफी की लत : हस्‍तमैथुन आपको पोर्नोग्राफी की ओर ले जाता है जिसमें आप अपनी उत्तेजना के चित्र खोजने लगते हैं, सेक्स चैट जैसी क्रियायों की और उन्मुख होते हैं और अंत में आप हर प्रकार के यौन सुख के लिए विवेक खोते जाते हैं।
  7. चयापचय पर असर : वीर्य द्रव में प्रोटीन होता है जो कई चयापचय गतिविधियों और सेल संरचनाओं के लिए आवश्यक होता है। प्रोटीन हमारे शरीर में कई संरचनाओं का निर्माण करता है, हस्तमैथुन की अधिकता के कारण अधिक प्रोटीन बर्बाद हो जाता है।  
  8. लिंग में सूजन : लगातार हस्तमैथुन करने से लिंग की मासपेशियों में वीर्य के पहले निकलने वाला द्रव मांसपेशियों में चला जाता है, और लिंग में सूजन आ जाती है। और यह सूजन काफी देर तक बनी रहती है, जिससे मूत्र विसर्जन में भी दिक्क्त आती है।
  9. लिंग में चोट : हस्तमैथुन करते समय उत्तेजना में लिंग को कस कर दबाने या मोड़ने की क्रिया हानिकारक हो सकती है, कभी कभी पेनाइल फ्रेक्‍चर भी हो सकता है यानी आपके लिंग की मांसपेशियां टूट सकती हैं।
  10. असामाजिक होना : हस्तमैथुन का आधिक्य ऐसी मानसिकता पैदा कर देता है, जिसमें जो भी आपको आपके यौन प्रयोजन सिद्ध करता नहीं दिक्ता उससे आप दूरी बनाते जाते हैं, गर्लफ्रेंड हो या पत्नी, बॉयफ्रेंड हो या पति, सबसे दूरी बढ़ा कर आप सिर्फ अपनी कामनाओं के संगम को ही अपना प्रिय समझने लगते हैं।
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