देवताओं का शहर प्रयागराज इलाहाबाद City of God Prayagraj Allahabad



इलाहाबद उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहर है। यह तीन नदियों गंगा, यमुना, तथा अदृश्य सरस्वती का संगम हैं। इन तीनों के मिलान का स्थान त्रिवेणी कहलाता है। विशेष रूप से हिन्दूओं के लिये यह एक पवित्र स्थान है। आर्यो का पहले निवास इस शहर में होने के कारण इसको प्रयाग के नाम से जाना गया इसकी पवित्रता का प्रमाण पुराण, रामायण तथा महाभारत में संदर्भित है। हिन्दु पौराणिक कथाओ के अनुसार भगवान ब्रहमा परमेशवर के निर्माता है। जिन्होने सृष्टि के प्रारम्भ मे प्रकृषठ यज्ञ पूरा करने हेतु पृथ्वी पर भूमि प्रयाग चूनी और इसे तीथ्र राज अथवा सभी तीर्थ स्थानों का राजा कहा गया । पदम् पुराण के अनुसार सूर्य के बीच चन्द्र तथा चन्द्र के बीच में तारे है इस प्रकार सभी तीर्थ स्थलों में प्रयाग सबसे अच्छा है।

इलाहाबाद एक महत्वपूर्ण शहर है जहाँ इतिहास संस्कृति और धर्म एक जादुई प्रभाव उत्पन्न करते है उसी शहर जहाँ इतिहास संस्कृति और धर्म एक जादुई प्रभाव उत्पन्न करते है उसी तरह पवित्र नदियों के स्पर्श से यह पृथ्वी धन्य है। इसी धर्मिक महत्व के कारण बहुत से तीर्थ यात्री स्नान पर्व पर इलाहाबाद आते है। मार्च माह जनवरी से फरवरी के मध्य मे हिन्दु स्वय को शुद्ध करते है। इस माह के दौरान एक विशाल भीड़ होती है और बालू की भूसी पर लगने वाला यह मेला माघ मेले के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक 12 वर्ष में जब विशेष रूप से पानी पवित्र हो जाता है तब इलाहाबाद में एक वृहत मेला लगता है जिसे कुभ मेला कहते है। भारत वर्ष के प्रत्येक कोने से लाखों तीर्थ यात्री इस मेले मे आते है। ऐसा विश्वास है कि इस कुंभ मेले में स्नान करने से सभी पाप और बुराईयाँ नष्ट हो जाती है। और स्नान से मोक्ष प्राप्त होता है। जनवरी और फ़रवरी में इलाहाबाद माघ मेले का आयोजन होता है। 1885 में मार्क दवेन ने इलाहाबाद कुंभ के संबंध में लिखा है 1 माह तक जोश में लेाग यहाँ थके हुए, अकिंचन तथा भूखे रहते है फिर उनका विश्वास अटल बना हुआ है। इस माह के दौरान आयोजित इस धार्मिक प्रवचन सांस्कृतिक गतिविधियों एवं अन्य क्रिया कलाप बड़ी संख्या में लोगों को बाधे रखते है। इस वृहत मेले में दर्शको का विश्वास प्रतिबिंबित होता है। यह जगत कुटुम्बकम् अथवा सार्वमोम गाँव का प्रतीक है इसमें विभिन्न सांस्कृतियां विभिन्न धर्म विभिन्न विचार धाराओं के लोग आपस में विचार विमर्श कर सूचनाओं का व ज्ञान का आदान - प्रदान करते है।
भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान और सम्पूर्ण शताब्दी में इलाहाबाद का राष्ट्रीय महत्व सर्वविदित रहा है। इलाहाबाद के इतिहास ने उपने धार्मिक सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के फलस्वरूप अनेक प्रतिष्ठित विद्वान, कविलेखक विचारक, राजनेता दिये है। 

इलाहाबाद के रोचक स्थान 
  • संगम
    हिन्दु पुराण के अनुसार पवित्र संगम तीन पावन नदियो गंगा, यमुना, एवं अदृश्य सरस्वती का सम्मिलन है। ऐसी धारणा है कि संगम मे अमृत की कुछ बूँदें मिलायी गयी। जिससेे इसका जन जादुई प्रभाव वाला हो गया। सिविल लाइन से करीब 7 किलोमीटर दूर इलाहाबाद के पूर्व मिट्टी से घिरे किनारों वाले पवित्र संगम के पास किला स्थित है। पंडा (पूजारी) एक छोटे चबूतर पर बैठ कर पूजा - अर्चना कराते है और श्रद्धलुओं को विधि अनुसार पवित्र जन में स्नान करते है। तीर्थ यात्री अपने मृतक माता - पिता को पिंड दान करते है साथ ही अपने पूर्वजों को भेट दान देते हैं। संगम पर लगी नावें तीर्थ यात्री एवं पर्यटक द्वारा प्रयोग में लाई जाती है। जो किले के पूर्व में 12/- रूपया प्रति व्यक्ति की दर से तत्काल उपलब्ध हो सकती हैं वार्षिक माघ मेला/अर्द्ध कुम्भं कुम्भ मेला का स्थान पवित्र संगम है।
  • इलाहाबाद किला
    बादशाह अकबर द्वारा ईसवी सन् 1583 में बनाया गया यह किला संगम के करीब यमुना नदी के किनारे स्थित है। सिविल लाइन से यह करीब 8 किलोमीटर दूर हैं। कला, निर्माण तथा शिल्पकारी में यह किला अद्वितीय है। वर्तमान समय में किले का उपयोग सेना द्वारा किया जाता है तथा एक सीमित क्षेत्र ही आगन्तुक के लिए खुला है। आगन्तुकों का अशोक स्तम्भ एवं सरस्वती कूप देखने की ही अनुमति है ऐसा कहा जाता है कि यह कूप सरस्वती नदी तथा जोधाबाई महल का प्रमाण है यहां पातालपूरी मन्दिर भी यहां का अक्षय-वट अथवा बरगद के वृक्ष का नाम भी श्रद्धा के साथ लिया जाता है।
  • हनुमान मन्दिर
    संगम के समीप स्थित इस मन्दिर का उत्तरी भारत में एक विशेष महत्व हैं जहां भगवान हनुमान एक आदर्श है। यह करीब 20 फिट लम्बे एवं 8 फीट चैड़े है इन्हें लेटी हुई मुद्रा में देखा जा सकता है। जब गंगा में बाढ़ आती है तो यह मन्दिर जलमग्न हो जाता है।
  • शंकर विमान मण्डपम्
    यह मण्डपम् हनुमान मन्दिर के नज़दीक 130 फीट उंचा 4 मंजिला है। इसमें कुमारिल भटट् जगतगुरू शंकराचार्य, कामाक्षी देवी करीब 5 शक्तिणी सहित योगशस्त्र शास्त्रयोग लिंग कबीब 108 शिव की प्रतिमाएँ है। इलाहाबाद का यह सबसे महत्व पूर्ण शिव मनकामेश्वर मन्दिर यमुना नदी के किनारे सरस्वती घाट पर स्थित है यह जगत गुरू शंकराचार्य के अधिकार क्षेत्र में हैं।
  • मिन्टो पार्क
    सरस्वती घाट के नज़दीक स्थित इस पार्क के ऊपरी भाग में चार शेरों का प्रतीक एक यादगार पत्थर लगा हुआ हैं। जिसे 1910 मे लार्ड मिन्टों द्वारा लगाया गया था।
  • आनन्द भवन
    यह नेहरू परिवार का पैतृक भवन है। स्वतत्रता संर्घष के लिए घटित विभिन्न युगों की घटनाओं का यह भवन प्रत्यक्षदर्शी रहा है। आज यह महत्वपूर्ण संग्रहालय में परिणित है जो नेहरू परिवार से संबंधित यादें ताजा करती है। आगमन समय 9.30 प्रातः काला से 5.00 बजे शाम टिकट - 5रू0 प्रति व्यक्ति दूरभाष 600476 सोमवार एवं अन्य सरकारी अवकाश में बंद रहेगा।
  • स्वराज भवन
    पुराना आनंन्द भवन को सन् 1930 में मोतीलाल नेहरू ने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था जिसे काग्रेंस कमेटी के मुख्यालय के रूप उपयोग किया जाता था स्वर्गीय प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी का जन्म यही हुआ था। अब यह भवन बच्चों का चित्रकारी एवं दस्तकारी सिखने के लिए उपयोग में लाया जाता हैं यहां प्रकाश एवं घ्वनि से संबंधित कार्यक्रम भी देखे जा सकते हैं। प्रकाश एवं ध्वनि से संबंधित 4 कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है। प्रातः काल 10.00 1.30 सायंकाल तथा 2.30 सांय काल एवं 4 बजे सायंकाल, टिकट 5 रू0 प्रति व्यक्ति सोमवार एवं सरकारी अवकाश में बंद रहेगा।
  • जवाहर प्लेटोरियम
    यह आनन्द भवन के बगल में स्थित है। यहां वैज्ञानिक दृष्टि कोण से खगोलीय दर्शन हेतु लोग आते है। यह हमेशा चलता रहता हैं यहां पांच शो होते है - 11.00 प्रातःकाल 12.00 दोपहर , 2.00 सायंकाल एवं 4 बजे सायंकाल। टिकट दर 10 रू0 प्रति व्यक्ति, यहाँ का फोन नंबर 2600493 हैं और सोमवार एवं सरकारी अवकाशों में बंद रहेगा।
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय
    इलाहाबाद विश्वविद्यालय 1887 में स्थापित भारत के प्रसिद्ध विश्व विद्यालयों में एक यह आनन्द भवन के करीब स्थित है। विस्तृत भू भाग में फैले इस के कैम्पस में विकटोरियन तथा इस्लामिक वास्तुकला कौशल से प्रतीक भवन हैं म्योर कालेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय का विज्ञान संकाय है। म्योर कालेज का विजयनगरम हाल उत्कृष्ट गाॅथिक वास्तुशिल्प का नमूना है।
  • इलाहाबाद संग्रहालय
    चन्द्रशेखर आजाद पार्क के पास स्थित गुप्त काल की मूर्तिकला का यह सग्रहालय विशेष रूप से दर्शनीय है।
  • चन्द्रशेखर आजाद पार्क
    अलफ्रेड पार्क संग्रहालय के पीछे स्थित यह इालाहाबद का सबसे बड़ा पार्क है। पहले इसे अलफ्रेड पार्क कहा जाता था। जार्ज-5 तथा विकटोरिया की विशाल मूर्ति इसके केन्द्र में लगी थी। जहां कभी कभी पुलिस बैंड का प्रयोग होता था स्ववंत्रता के पश्चात इस पार्क को चन्द्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना गया और ब्रिटिश अवधि में पुलिस मुठभेंड में मारे गये स्थान पर आजाद की अर्द्ध प्रतिमा लगाई गई इस पार्क के केन्द्र में मदन मोहन मालवीय के नाम पर एक स्टेडियम बनाया गया है जहां सभी महत्पूर्ण मैंच एवं खेल कूद कराये जाते है इस पार्क में सार्वजनिक वाचनालय भी है जहां करीब 75,000 हजार किताबें हैं। इसी के समीप पाण्डुलिपियेां का खज़ाना एवं जनरल मौजूद है।
  • खुसरोबाग
    यह मुगल गार्डेन में एक है जिसे जहांगीर द्वारा अपने बेटे राजकुमार खुसरो की याद मे बनवाया गया था। इसके मध्य में राजकुमार का मकबरा बनवाया गया था। यह इलाहाबाद जक्शन के पास जी.टी.रोड पर स्थित है। अमरूद तथा आम इस बगीचे के प्रसिद्ध फल है।
  • भरद्ववाज आश्रम
    आनन्द भवन के सामने स्थित है। एकसी धारणा है कि भगवान राम अपनी पत्नी सीता तथा भाई लक्ष्मण के साथ बनवास के समय इसी आश्रम मे रूके थे। उन दिन मुनि भरद्वाज गंगा से भरद्वाज आश्रम आते थे। अब यहां अनेक मन्दिर विद्यामान हैं सभी सन्त कैथीड्रल (पत्थर गिरजाघर) उन सभी आयु ओर स्थान के व्यक्तियों की याद में समर्पित है जिनका सर्वशक्तिमान पर विश्वास है। इस खूबसूरत कैथीड्रल की रचना सर विलियम इमरसन ने 1870 में की तथा 1887 में इसे समर्पित किया। यह एशिया का एक खूबसूरत कैथीड्रल है इसमें सफ़ेद तथा लाल पत्थर लगे हैं इसको देखने के लिये आया हुआ कोई भी व्यक्ति जटिलता से लगाये गये मारबल तथा मोजेक कार्य की सुन्दरता से प्रभावित हुए बिना नही रह सकता। इसमें विशिष्ट शीशे तथा चित्रकारी भी प्रदर्शित है। यह सिविल लाइन में स्थित है।


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