पीलिया (Jaundice) - एक जानलेवा रोग, लक्षण व इलाज



 
रोग
पीलिया रोग लीवर व पित्त की थैली से सम्बन्धित रोग है, खून में विलिरुबिन पिगमेंट अधिक होने से पीलिया हो जाता है।
पीलिया होने के कारण
  1. इन्पफैक्शन - हिपेटाइटिस वायरस संक्रामण ए बी सी
  2. पित्त की थैली की नली में रुकावट, स्टोन, कैंसर या पफोड़ा,
  3. खून की बीमारियों में - जिससे खून हीमोलाइश हो,
  4. दवाईयों से लिवर डैमेज होने पर,
  5. शराब व बीमारियों से लिवर सैल सिकुड़ जाती हैं इसे लीवर सिरोहोसिस कहते हैं।
लक्षण
अधिकतर पीलिया वायरल इन्पफैक्शन होता है। इसका संक्रमण होने के बाद बुखार, कमजोरी, जी मिचलाना व भूख न लगना, पेट में दर्द (दाँई तरफ) तथा पेशाब गहरा पीला होने लगता है, आँखें पीली हो जाती हैं, मरीज बहुत कमशोरी महसूस करता है। यदि समय से इलाज न किया गया तो कोमा में आजाता है और मृत्यु तक हो सकती है।
जाँच
  1. खून की जाँच से वायरस के प्रकार की जाँच होती है। यह तीन प्रकार का होता है, हिपेटाइटिस ए, बी, सी। इसमें हिपेटाइटिस बी बहुत खतरनाक होता है तथा इसके ठीक होने में 6 हफ्रते लग सकते हैं। पीलिया ठीक होने के बाद सिरोहोसिस, जलन्धर या कैंसर भी हो सकता है।
  2. खून में Serum Bilirubin SGPT जाँच करने से पीलिया के कारण का पता लगता है।
  3. खून में Alkaline Phosphatase जाँच करने से कैंसर का पता लगता है।
  4. पेशाब की जाँच करने से पीलिया का पता लगता है।
  5. अल्ट्रासाउण्ड से पित्त की थैली की बीमारी (स्टोन, कैंसर) का पता लगता है।
  6. ERCP से Endoscopy - इससे आँतों के ऊपरी भाग में कैंसर या नली में स्टोन को हटाकर पीलिया ठीक किया जा सकता हैं।
  7. MRI Abdomenसे कैंसर का गहराई से पता लग सकता है यदि कैंसर पेट के अन्य भागों में पफैल गया है तो इलाज उसी तरह सुनियोजित किया जा सकता हैं।
इलाज
साधारण तौर पर संक्रामण पीलिया वायरस है इसकी म्याद होती है तथा यह 2-3 हफ्रते में ठीक हो जाता है। इसमें कार्बोहाईड्रेट जैसे ग्लूकोश, शक्कर, गन्ने का रस अधिक लें, प्रोटीन कम लें (दालें न लें), चिकनाई न लें (घी, तेल, मक्खन, दही व दूध चिकनाई निकला हुआ लें), नीबू ले सकते हैं, फलों के रस न लें, लिवर की आयुर्वेदिक दवाएँ ले सकते हैं। जी मिचलाना या उल्टी के लिए डोमेस्टाल टेबलेट ले सकते हैं। अधिक तकलीपफ या दवा हजम न होने पर डाक्टर को दिखायें वह आवश्यकतानुसार इलाज व ग्लूकोज़ चढ़ायें। यदि पीलिया किसी स्टोन या कैंसर के कारण है तो किसी सर्जन या एन्डोस्कोपिस्ट की सलाह लें।
रोकथाम
  1. सीवर लाइन व जल पाइप एक दूसरे से पानी का संक्रामण करते हैं इसलिए पानी उबाल कर पीएँ।
  2. बाजार की खुली चीजें जैसे पफल या चाट व खाना न खाएँ।
  3. बाजार के ठण्डे पेय पदार्थ न पिएँ सपफाई का ध्यान रखें।
  4. पीलिया के टीके लगवायें।
  5. यदि पित्त की थैली में स्टोन या गाँठ मालूम हो तो तुरन्त इलाज करायें।
  6. लिवर कमजोर हो तो डाॅक्टर द्वारा बताई गई दवा लें।
  7. शराब का सेवन न करें।
  8. अपने चिकित्सक की सलाह लें तथा इलाज पर विशेष ध्यान दें।


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