आदित्यनाथ को पप्पू बनाते उनके अधिकारीगण



उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जन शिकायतों के निवारण के लिए जनसुनवाई तंत्र स्थापित किया है, जिसे आईजीआरएस के नाम से भी जाना जाता है.. 

कहने के लिए पर्याप्त है कि यह इसकी मोनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जाती है, हकीकत यह है कि यह व्यवस्था सिर्फ अधिकारियों के खेल की वस्तु से अधिक नहीं है.. 

जनता के हाथ में शिकायत संख्या के नाम पर ऐसा झुनझुना पकड़ा दिया जाता है जो सिर्फ आत्मसंतुष्टि ही दे पाती अपितु कोई परिणाम देने के बजाय... 

अब तो यह प्रतीत होता है कि अधिकारियों में सरकार का कोई खौफ नहीं है क्योकि जबावदेही ही नहीं है बिना दंड और जवादेही के कोई सरकारी व्यवस्था सुचारू रूप से काम कर ही नहीं सकती है..

बहुतायत जनशिकायतों पर अधिकारीयों द्वारा नज़र इनायत कि तक न अहि जाती और बिना पढ़े ही मामले को अधिनस्त अधिकारी को भेज दी जाति है और अंत में जिसके विरुद्ध शिकायत की जाती है उसके पास शिकायत पहुच जाती है और वह अधिकारी अपने आपको दोष मुक्त कर जन शिकायत का निस्तारण कर देता है.. अर्थात अधिकारीगण आपस में मिल कर मुख्यमत्री सहित पुरे मंत्रिमंडल और जानता को पप्पू बनाने सफल प्रयास में लगे है..

क्या यह प्रणाली वास्तव में जनउपयोगी है या सिर्फ जानता को ठगने भर का प्रभावशाली कोशिश !

नोट- आईजीआरएस के सम्बन्ध में आपके अनुभव हो तो जरूर शेयर करें..


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उत्‍तर प्रदेश के वर्तमान मंत्रियों की सूची (कैबिनेट, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार एवं राज्य मंत्री)



Cabinet Ministers Of U.P. Government
1. Shri Yogi Adityanath Hon'ble Chief Minister Home, Housing and Urban Planning, Revenue, Food and logistics, Civil Supplies, Food Safety and Drug Administration, Economics and Statistics, Mining and Minarals, Flood Control, Tax Registration, Jail, General Administration, Secretariat Administration, Confidential, Vigilance, Appointment, Personnel, Information, Electoral, Institutional Finance, Planning, State Property, Town Land, Uttar Pradesh Restructuring Coordination, Administrative Reform, Program Implementation, National Integration, Infrastructure,  Language, External Aided Project, Scarcity, Relief and Rehabilitation, Public service Management , Rent Control, Consumer Protection, Weights and Measures
2. Shri Keshav Prasad Maurya Deputy Chief Minister Public Works Department, Food Processing,Entertainment Tax, Public Enterprises
3. Dr. Dinesh Sharma Deputy Chief Minister Secondary Education and Higher Education, Science and Technology, Electronics, Information Technology
4. Shri Surya Pratap Shahi Cabinet Minister Agriculture, Agricultural Education, Agricultural research
5. Shri Suresh Khanna Cabinet Minister Parliamentary Affairs, Urban Development, Overall Urban Development, Urban Employment and Poverty Alleviation 
6. Shri Swami Prasad Maurya Cabinet Minister Labour, Employment, Coordination
7. Shri Satish Mahana Cabinet Minister Industrial development
8. Shri Rajesh Agarwal Cabinet Minister Finance
9. Smt. Reeta Bahuguna Joshi Cabinet Minister Women's Welfare, Family Welfare, Mother and Child Welfare, Tourism
10. Shri Dara Singh Chauhan Cabinet Minister Forest, Environment, Zoological Garden, Horticulture
11. Shri Dharam Pal Singh Cabinet Minister Irrigation, Irrigation (Mechanical)
12. Shri S P Singh Baghel Cabinet Minister Animal Husbandry, Minor Irrigation, Fisheries
13. Shri Satya Dev Pachauri Cabinet Minister Khadi Village Industries, Sericulture, Textile, Micro, Small and Medium Enterprises, Export Promotion
14. Shri Ramapati Shastri Cabinet Minister Social Welfare, Scheduled Castes and Tribal Welfare
15. Shri Jai Pratap Singh Cabinet Minister Excise, Prohibition
16. Shri Om Prakash Rajbhar Cabinet Minister Backward class welfare, Divyangjan Empowerment
17. Shri Brijesh Pathak Cabinet Minister Legislative, Justice, Conventional Energy Sources, Political Pension
18. Shri Laxmi Narayan Chaudhary Cabinet Minister Dairy Development, Religious Affairs, Culture, Minority Welfare, Muslim Waqf and Haj
19. Shri Chetan Chauhan Cabinet Minister Sports, Youth Welfare, Vocational Education, Skilled Development
20. Shri Shrikant Sharma Cabinet Minister Energy
21. Shri RajendraPratap Singh (Moti Singh) Cabinet Minister Rural engineering service
22. Shri SidharthNath Singh Cabinet Minister Medical and health
23. Shri Mukut Bihari Verma Cabinet Minister Cooperative
24. Shri AshutoshTandon Cabinet Minister Technical Education, Medical Education
25. Shri Nand Gopal Gupta "Nandi" Cabinet Minister Stamp and court fees, Registration, Civil aviation
केबिनेट मंत्री उ.प्र. सरकार
1. श्री योगी आदित्यनाथ मा. मुख्यमंत्री गृह, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अर्थ एवं संख्या, भूतत्व एवं खनिजकर्म, बाढ़ नियंत्रण, कर निबंधन, कारागार, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सर्तकता, नियुक्ति, कार्मिक, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, प्रशासनिक सुधार, कार्यक्रम कार्यान्वयन, राष्ट्रीय एकीकरण, अवस्थापना, भाषा, वाह्य सहायतित परियोजना, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास, लोक सेवा प्रबंधन, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बांट माप विभाग
2. श्री केशव प्रसाद मौर्य उप मुख्यमंत्री लोक निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर, सार्वजनिक उद्यम
3. डा0 दिनेश शर्मा उप मुख्यमंत्री माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी
4. श्री सूर्य प्रताप शाही केबिनेट मंत्री कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
5. श्री सुरेश खन्ना केबिनेट मंत्री संसदीय कार्य, नगर विकास, शहरी समग्र विकास,नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन
6. श्री स्वामी प्रसाद मौर्य केबिनेट मंत्री श्रम, सेवायोजन, समन्वय
7. श्री सतीश महाना केबिनेट मंत्री औद्योगिक विकास
8. श्री राजेश अग्रवाल केबिनेट मंत्री वित्त
9. श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी केबिनेट मंत्री महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण, पर्यटन
10. श्री दारा सिंह चौहान केबिनेट मंत्री वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान, उद्यान
11. श्री धर्मपाल सिंह केबिनेट मंत्री सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)
12. श्री एस. पी. सिंह बघेल केबिनेट मंत्री पशुधन, लघु सिंचाई, मत्स्य
13. श्री सत्यदेव पचौरी केबिनेट मंत्री खादी ग्रामोद्योग, रेशम, वस्त्रोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात प्रोत्साहन
14. श्री रमापति शास्त्री केबिनेट मंत्री समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
15. श्री जय प्रताप सिंह केबिनेट मंत्री आबकारी, मद्यनिषेध
16. श्री ओम प्रकाश राजभर केबिनेट मंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तीकरण
17. श्री बृजेश पाठक केबिनेट मंत्री विधायी, न्याय, अतिरिक्त उर्जा स्रोत, राजनैतिक पेंशन
18. श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी केबिनेट मंत्री दुग्ध विकास, धमार्थ कार्य, संस्कृति, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ़ एवं हज
19. श्री चेतन चौहान केबिनेट मंत्री खेल, युवा कल्याण, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास
20. श्री श्रीकांत शर्मा केबिनेट मंत्री ऊर्जा
21. श्री राजेन्द्र प्रताप सिंह (मोती सिंह) केबिनेट मंत्री ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
22. श्री सिद्धार्थनाथ सिंह केबिनेट मंत्री चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
23. श्री मुकुट बिहारी वर्मा केबिनेट मंत्री सहकारिता
24. श्री आशुतोष टंडन केबिनेट मंत्री प्राविधिक शिक्षा,  चिकित्सा शिक्षा
25. श्री नन्द गोपाल गुप्ता ''नंदी'' केबिनेट मंत्री स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क, पंजीयन, नागरिक उड्डयन

Ministers Of State (Independent Charge) Of U.P. Government
1 Smt. Anupma Jaiswal State Minister (Independent Charge) Basic Education, Child Development and Neutrition, Revenue (MOS), Finance (MOS)
2 Shri Suresh Rana State Minister (Independent Charge) Sugarcane Development, Sugar Mills, Industrial Development (MOS)
3 Shri UpendraTiwari State Minister (Independent Charge) Water Supply, Land Development and Water Resources, Waste Land Development, Forest, Environment, Zoological Garden, Horticulture, Cooprative (MOS)
4 Dr. Mahendra Singh State Minister (Independent Charge) Rural Development, Overall Village Development, Medical and Health (MOS)
5 Shri Swatantradev Singh State Minister (Independent Charge) Transport, Protocol, Energy (MOS)
6 Shri Bhupendra Singh Choudhary State Minister (Independent Charge) Panchayati Raj, Public Works Department (MOS)
7 Shri Dharam Singh Saini State Minister (Independent Charge) Ayush, Scarcity, Relief and Rehabilitation (MOS)
8 Shri Anil Rajbhar State Minister (Independent Charge) Sainik Welfare, Food Processing (MOS), Home Guards, PRD, Civil Protection
9 Smt. Swati Singh State Minister (Independent Charge) N.R.I., Flood Control, Agricultural Exports, Agricultural Marketing, Agricultural Foreign Trade, Women's Welfare, Family Welfare, Mother and Child Welfare (MOS)

राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उ.प्र. सरकार
1 श्रीमती अनुपमा जैसवाल राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, राजस्व (MOS), वित्त (MOS)
2 श्री सुरेश राणा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गन्ना विकास, चीनी मिलें, औद्योगिक विकास (MOS)
3 श्री उपेन्द्र तिवारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जल सम्पूर्ति, भूमि विकास एवं जल संसाधन, परती भूमि विकास, वन, पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान, सहकारिता (MOS)
4 डा. महेन्द्र सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ग्राम्य विकास, समग्र ग्राम विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (MOS)
5 श्री स्वतंत्रदेव सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) परिवहन, प्रोटोकॉल, ऊर्जा (MOS)
6 श्री भूपेन्द्र सिंह चौधरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पंचायती राज, लोक निर्माण (MOS)
7 श्री धरम सिंह सैनी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास (MOS)
8 श्री अनिल राजभर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सैनिक कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण (MOS), होमगार्ड्स, प्रांतीय रक्षक दल, नागरिक सुरक्षा
9 श्रीमती स्वाती सिंह राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एन0आर0आई0, बाढ़ नियंत्रण, कृषि निर्यात, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण (MOS)

State Ministers Of U.P. Government
1 Smt. Gulabo Devi State Minister Social Welfare, Scheduled Castes and Tribal Welfare
2 Shri Jai Prakash Nishad State Minister Animal Husbandry and Fishery, State Property, Urban land
3 Smt. Archana Pandey State Minister Mining and Minirals, Excise, Prohibition
4 Shri Jai Kumar Singh Jaiki State Minister Jail, Public service management
5 Shri Atul Garg State Minister Food and Logistics, Civil Supplies, Rent Control, Consumer Protection, Weights and Measures, Food Safety and Drug Administration
6 Shri Ranvendra Pratap Singh (Dhunni Singh) State Minister Agriculture, Agriculture Education, Agriculture Research
7 Dr. NeelkanthTiwari State Minister Legislative and justice, Information, Sports and Youth Welfare
8 Shri Mohsin Raza State Minister Science and Technology, Electronics, Information Technology, Muslim Waqf and Haj
9 Shri Girish Chandra Yadav State Minister Urban Development, Scarcity, Relief and rehabilitation
10 Shri Baldev Aulakh State Minister Minority Welfare, Irrigation, Irrigation (Mechanical)
11 Shri Manoharlal Mannu Kori State Minister Labour and Employment
12 Shri Sandeep Singh State Minister Primary Education, Secondary Education, Higher Education, Technical Education, Medical Education
13 Shri Suresh Passi State Minister Housing and Urban Planning, Vocational Education and Skilled Development
राज्य मंत्री उ.प्र. सरकार
1
श्रीमती गुलाबो देवी
राज्य मंत्री
समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
2
श्री जय प्रताप निषाद
राज्य मंत्री
पशुधन एवं मत्स्य, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि
3
श्रीमती अर्चना पाण्‍डे
राज्य मंत्री
भूतत्व एवं खनिकर्म, आबकारी, मद्यनिषेध
4
श्री जय कुमार सिंह जैकी
राज्य मंत्री
कारागार, लोक सेवा प्रबंधन
5
श्री अतुल गर्ग
राज्य मंत्री
खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बांट माप, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
6
श्री रणवेन्द्र प्रताप सिंह (धुन्नी सिंह)
राज्य मंत्री
कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
7
डा0 नीलकंठ तिवारी
राज्य मंत्री
विधायी एवं न्याय, सूचना, खेल एवं युवा कल्याण
8
श्री मोहसिन रजा
राज्य मंत्री
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, मुस्लिम वक्फ, हज
9
श्री गिरीश चन्द्र यादव
राज्य मंत्री
नगर विकास, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास
10
श्री बलदेव ओलख
राज्य मंत्री
अल्पसंख्यक कल्याण, सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)
11
श्री मनोहरलाल मन्नु कोरी
राज्य मंत्री
श्रम, सेवायोजन
12
श्री संदीप सिंह
राज्य मंत्री
बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा
13
श्री सुरेश पासी
राज्य मंत्री
आवास एवं शहरी नियोजन, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास


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भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498 व 498 ए



  • भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498
    आईपीसी की इस धारा के अंतर्गत किसी विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या ले जाना या निरुद्ध रखने के अपराध को परिभाषित किया गया है अर्थात जो कोई किसी स्त्री को, जो किसी अन्य पुरुष की पत्नी है, और जिसका अन्य पुरुष की पत्नी होना वह जानता है, या विश्वास करने का कारण रखता है, उस पुरुष के पास से, या किसी ऐसे व्यक्ति के पास से, जो उस पुरुष की ओर से उसकी देखरेख करता है, इस आशय से ले जाएगा, या फुसलाकर ले जाएगा कि वह किसी व्यक्ति के साथ अयुक्त संभोग करे या इस आशय से ऐसी किसी स्त्री को छिपाएगा या निरुद्ध करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ।
  • भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498 ए
    भादंसं की इस धारा के अंतर्गत किसी स्त्री के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करने के अपराध को परिभाषित किया गया है अर्थात जो कोई, किसी स्त्री का पति या पति नातेदार होते हुए, ऐसी स्त्री के प्रति क्रूरता करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।
    स्पष्टीकरण के लिये इस धारा के प्रयोजनों के लिए, क्रूरता निम्नलिखित परिभाषित हैः--
    • (क) जानबूझकर किया गया कोई आचरण जो ऐसी प्रकॄति का है जिससे स्त्री को आत्महत्या करने के लिए या उसके जीवन, अंग या स्वास्थ्य (जो चाहे मानसिक हो या शारीरिक) के प्रति गंभीर क्षति या खतरा कारित करने के लिए उसे प्रेरित करने की सम्भावना है ; या
    • (ख) किसी स्त्री को तंग करना, जहां उसे या उससे सम्बन्धित किसी व्यक्ति को किसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति के लिए किसी विधिविरुद्ध मांग को पूरी करने के लिए प्रपीडित करने को दृष्टि से या उसके अथवा उससे संबंधित किसी व्यक्ति के ऐसे मांग पूरी करने में असफल रहने के कारण इस प्रकार तंग किया जा रहा है ।



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दीपावली और पटाखे



दीपावली पर पटाखे के संबध में दो बाते आ रही है..

1. पटाखे फोड़ने के बारे में और
2. पटाखे न फोड़ने के बारे में
 पटाखे जरूर फोड़े पर इतना ध्यान रहे कि दीपावली के पटाखे हिंदू फैक्ट्रियों में बने हो अन्यथा जिन फटाखे से आप मुस्लिमों के कान खाने वाले हो वही पटाखे उनके घर को आबाद करगे, एक अनुमान के अनुसार दीपावली के पटाखों के निर्माण में मुस्लिमों भागीदारी 70% है इस प्रकार हिंदुवो का 70% पैसा सिर्फ धमको में मुस्लिमों कि प्रगति कर रहा है और उनको आतंकियों के समर्थन में धन मुहैया करवा रहा है... 
 
 
दीपावली में पटाखे के समर्थन के संबध में कोई पौराणिक साक्ष्य नहीं मिलते है, कि पटाखे दीपावली का अनिवार्य तत्व है और इसके बिना दीपावली नहीं मनाई जा सकती है.. 
 
 
दीपावली दैवी साधना का दिन है और साधना शांति के बिना संभव नहीं है, पटाखों की धूम में शांति कैसे हो सकती है और बिना शांति के साधना भी असम्भव है... 
 
लक्ष्मी पूजा के संबध में मान्यता है कि लक्ष्मी जी की पूजा के समय घंटी बजाने का प्राविधान नहीं है क्योकि घंटी बजाने से जिस उल्लू की सावरी पर लक्ष्मी जी आती है वह घंटी की आवाज सुन कर घरों में नहीं आता है वह पटाखों के धमको कि आवाज सुन कर कैसे आ सकता है?
 
मैं पटाखा विरोधी नहीं हूँ किन्तु इस बात का जरूर विरोधी हूँ कि दीपावली का पटाखों से कोई पौराणिक वास्ता नहीं है, अगर दीपावली पटाखों का पर्व होता तो इसका नाम दीपावली नहीं पटाखावली होता..


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विवाह, दहेज और कानून



विवाह एक ऐसा सामाजिक अवसर है जहां दो परिवार उपहारों का लेन-देन करते हैं। पर इन लेन-देनों में समानता नहीं होती, किसी एक पक्ष की ओर आमतौर पर झुकाव ज्यादा होता है। इसके अलावा विवाह के बाद भी काफी अर्से तक लेन-देन की यह प्रक्रिया चलती रहती है।

हमारे समाज में दहेज समुदाय के हर वर्ग तक पहुंच चुका है। इसका अमीरी-गरीबी से कोई ताल-मेल नहीं है और न ही सम्प्रदाय-जाति का भेद-भाव है। आज दहेज के रूप में मोटी रकम के साथ-साथ कार, फर्नीचर, कीमती कपड़े व भारी गहने भी वधू के परिवार से वर के परिवार भेजे जाते हैं। इसके अलावा वधू-पक्ष, वर-पक्ष एवं ब्याह के सारे खर्चे, जिसमें यात्रा खर्च भी शामिल होता है वहन करता है। यहीं नही वर-पक्ष को हक है कि वह कोई भी अप्रत्याशित मांग वधू के परिवार के सामने रखे और जिसे पूरी करना विवाह के लिए अनिवार्य समझा जाता है।
 
दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की कुछ खास बातें
  •  दहेज का लेन-देन दोनों अपराध हैं। इसके लिए कम से कम पांच वर्ष कैद या पंद्रह हजार रुपये जुर्माना किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त दहेज की मांग करने पर भी छः मास सजा और दस हजार रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है।
  • यह कानून महिलाओं को पति या ससुराल वालों से सम्पत्ति/सामान लेने की स्थिति में उनकी सुविधा के लिए बनाया गया है। इसके तहत महिला के नाम पर शादी के समय दी गई सारी सम्पत्ति/दहेज शादी के बाद तीन माह के भीतर महिला के नाम कर दिया जाएगा। अगर इस सम्पत्ति/दहेज की मिल्कियत पाने से पहले महिला की मौत हो जाती है तो महिला के वारिस इस सम्पत्ति/दहेज को वापस लेने की मांग कर सकते हैं। अगर विवाह के सात साल के अंदर महिला की मौत हो जाती तो सारा दहेज उसके माता-पिता या बच्चों को दिया जायेगा।
  • दहेज हत्या के लिए सात साल की सजा दी जा सकती है। यह अपराध गैरजमानतीय है।
  • दोषी व्यक्ति पर धारा 304 बी के साथ ही भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 (हत्या) 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) 44 ए (क्रूरता) और दहेज विरोधी कानून सेक्शन 4 लगाया जा सकता है।
इस अधिनियम से क्या राहत मिल सकती है?
  • धारा 304बी :  यह धारा दहेज हत्या के मामलों में सजा के लिए लागू की जाती है। दहेज हत्या का अर्थ है, अगर औरत की मौत जलने या किसी शारीरिक चोट के कारण हुई है या शादी के सात साल के अन्दर किन्हीं अन्य संदेहास्पद कारणों से हुई है। यह धारा उस समय भी लागू की जा सकती है, जब साबित हो जाए कि पति या उसके माता-पिता या अन्य संबंधी दहेज के लिए उसके साथ हिंसा और बदसलूकी कर रहे थे जिसके कारणवश औरत की मौत हो गई हो।
  • धारा 302 : यह धारा दहेज हत्या के आरोप में सजा के मामले में लागू की जाती है जिसमें उम्र कै़द या फांसी की सजा हो सकती है।
  • धारा 306 : यह धारा मानसिक और भावनात्मक हिंसा, जिसके फलस्वरूप औरत आत्महत्या के लिए मजबूर हो गई हो, के मामलों में लागू होती है। इसके तहत जुर्माना तथा 10 साल तक की सजा सुनाई जा सकती है।
  • धारा 498ए : यह धारा पति या रिश्तेदारों द्वारा दहेज के लालच में क्रूरता और हिंसा के लिए लागू की जाती है। यहां क्रूरता के मायने हैं औरत को आत्महत्या के लिए मजबूर करना, उसकी ज़िंदगी के लिए खतरा पैदाकरना व दहेज के लिए सताना व हिंसा। इस सभी धाराओं के अलावा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 113 ए, 174 (3) और धारा 176 भी दहेज व इससे जुड़ी हत्या की स्थिति में लागू की जा सकती है। इसके तहत दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने पर आत्महत्या या मौत की दूसरी वजह होने के बावजूद पुलिस छान-बीन, कानूनी कार्यवाही, लाश का पोस्टमार्टम आदि करने का आदेश दे सकती है; ख़ासतौर पर जब मौत विवाह के सात वर्ष के अन्दर हुई हो या फिर किसी पर दहेज हत्या का संदेह हो।


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दिल्ली का इण्डिया गेट



इंडिया गेट प्रथम विश्वयुद्ध एवं अपफगानयुद्ध में मारे गए शहीद सैनिकों की स्मृति में बनाया गया था। प्रथम विश्वयुद्ध में 70,000 भारतीय सैनिक तथा अपफगानिस्तान युद्ध में पश्चिमोत्तर सीमा पर भारतीय सैनिक शहीद हुए। इन्ही ब्रिटिश और भारतीय सैनिकों के नाम इंडिया गेट की दीवार पर अंकित है। इंडिया गेट की स्थापना की नींव ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में रखी। यह स्मारक ल्यूटियन्स के द्वारा डिजायन किया गया जो दस वर्ष के बाद तत्कालीन वायस लार्ड इरविन के द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया। इसी में स्वतंत्राता प्राप्ति के काफी बाद भारत सरकार ने ‘अमर जवान ज्योति’बनवाये जो दिन-रात जलता है। अमर जवान ज्योति दिसंबर 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। भारतीय सैनिकों के सम्मान में यह बनाया गया है।
दिल्ली का इण्डिया गेट

इंडिया गेट का वास्तु प्रारूप में भी यूरोपीय और भारतीय कला का मिश्रण है। यह षटभुजीय आकार में है। यह भारतीय परिस्थिति में यूरोपीय मेमोरियल आर्क ‘‘आर्क डी ट्राइम्पफ’’ पेरिस की संरचना के अनुसार बना है। इंडिया गेट का स्मारक भरतपुर (राजस्थान) के लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। दोनों तरपफ पत्थर पर ‘इंडिया गेट’ खुदा  हुआ है। 1914-1919 भी लिखा है। शिखर पर तेल डालने का स्थान है जो लाॅ को जलने के लिए ईंध्न उपलब्ध् करता है। पर अब गैस ईंध्न से यह चलता है। इंडिया गेट के चारों तरपफ विशाल हरा-भरा आकर्षक लॉन है जो  इसकी सुंदरता को बढ़ाता है। यहां नौकायन की सुविध उपलब्ध् है। शाम होते ही इंडिया गेट आश्चर्यजनक रूप से प्रकाशित हो जाता है। झरने, प्रकाश के रंग के साथ मनोरम दृश्य प्रस्तु करते हैं जिससे पर्यटक आकर्षित होते हैं। इंडिया गेट राजपथ के अंतिम छोर पर अवस्थित है जो लोगों के लिए मनोरंजक पिकनिक स्थल है। यहां सालोभर पर्यटक और लोग आते हैं परंतु ग्रीष्म ऋतू में विशेष भीड़ रहती है। इंडिया गेट में प्रवेश और फोटोग्राफी निःशुल्क हैं तथा  दर्शकों के लिए हमेशा दिन-रात खुला रहता है। नजदीकी मेट्रो स्टेशन - प्रगति मैदान है।
दिल्ली का इण्डिया गेट
राष्ट्रपति भवन:- ब्रिटिश शासन के दौरान वाइसराय भारत में सत्ता का केंद्र था। एक ऐसी घुरी जिसके चारों और प्रशासनिक व्यवस्था घूमती थी। इसलिए नई दिल्ली को इस तरह बनाने का पैफसला किया कि इसे केंद्र मान कर शहर का नक्शा बनाया जाए। दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक वाइसराय निवास, कनॉट प्लेस और इंडिया गेट राजपथ। इंडिया गेट पर एक हेक्सामेन बनाया गया जिस के चारों ओर उससे निकलने वाली सड़कों पर राजा महाराजा के निवास बनाने का विचार था अंग्रेज निर्माताओं का स्वपन था कि राज भवन को पहाड़ी के उफपर बनया जाए ताकि पूरे शहर में कहीं से भी देखा जा सके, परंतु जिस रूप में वायसराय हाउफस बना वह ल्यूटेन के लिए जीवन भर एक पीड़ा का कारण बना रहा यह। विजय चैक से भी दिखाई नहीं देती। नार्थ और साउथ ब्‍लाक कहीं ज्यादा भव्य रूप में दिखाई देते हैं। ल्यूटेन ने बहुत प्रयास किया हरर्बट बैंकर से विवाद भी हुआ और उसके सचिवालय बाद एक ऐसी बड़ी खाली जगह छोड़ने की व्यवस्था की गई जहां सरकारी समारोह आयोजित किए जा सके। आज हम इसे विजय चैक कहते हैं। उस समय इसे ग्रेट प्लेस कहते थे।



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जमानतीय एवं गैर जमानती अपराध



भारतीय दंड संहिता  जमानतीय और अजमानतीय अपराध का वर्गीकरण किया गया है जो निम्‍न है- 

जमानती अपराध Bailable Offense 
भारतीय दंड संहिता की धारा 2 (a) के अनुसार जमानतीय अपराध की परिभाषा दी गई है जमानती अपराध से तात्पर्य ऐसे अपराध से है जो प्रथम सूची में जमानती अपराध के रूप में दिखाया गया हो या जो तब समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा जमानतीय अपराध बनाया गया हो या जो जमानती अपराध से भिन्न अन्य कोई अपराध हो। दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की प्रथम अनुसूची में जमानतीय एवं अजमानतीयअपराधों का उल्लेख किया गया है जो अपराध जमानतीय बताया गया है उसमें अभियुक्त को जमानत स्वीकार करना पुलिस अधिकारी एवं न्यायालय का कर्तव्य है।  
गैर जमानती अपराध Non-Bailable Offense 
जबकि दंड प्रक्रिया संहिता में अजमानतीय (गैर जमानती) अपराध की परिभाषा नहीं दी गई है अतः यह कहा जा सकता है कि जो अपराध जमानतीय नहीं है एवं जिसे प्रथम अनुसूची में अजमानतीय अपराध के रूप में स्वीकार किया गया है वह अजमानतीय अपराध है। वास्तव में गंभीर प्रकृति के अपराधों को अजमानतीय अपराध बताया गया है ऐसे अपराधों में जमानत स्वीकार करना या नहीं करना मजिस्ट्रेट के विवेक पर निर्भर करता है।


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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके कैबिनेट मंत्रियों के मोबाइल और व्हात्सप्प नंबर



उत्तरप्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना व्हाटसअप नंबर जारी किया है। इस नंबर के जरिये राज्य का कोई भी नागरिक शिकायत दर्ज करवा सकता है और सरकार की ओर से 3 घंटो के अंदर कार्यवाई की जाएगी। यूपी में भाजपा सरकार ने बहुत से बदलाव किये है और आदेश जारी किया है, जिनसे राज्य में सुरक्षा कानून सख्त हुआ है। योगी सरकार द्वारा राज्य में जारी उनका यह संपर्क नंबर एक नई योजना का काम कर रही है। मुख्यमंत्री के इस नंबर पर कोई भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है और दर्ज की गई समस्या या शिकायत पर 3 घंटो के अंदर करवाई की जाएगी। इस नंबर पर आने वाली समस्याओ व शिकायतों पर योगी जी की नज़र रहेगी। इस नंबर के जरिये कोई भी अभी समस्याओ को बिना परेशानी दर्ज करवा सकता है। यूपी राज्य में जारी मुख्यमंत्री जी के नंबर पर शिकायत दर्ज करवाने का समय प्रात: 7 बजे से सायं 7 बजे तक होंगी । इसके लिए राज्य में कण्ट्रोल रूम भी स्थापित किये जाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व्हाटसअप नंबर :- 09454404444





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बैस राजपूत वंश



बैंस सूर्यवंशी क्षत्रिय कुल है,  हालाँकि कुछ विद्वान इन्हें नागवंशी भी बताते हैं।
  • इनका गोत्र भारद्वाज है
  • प्रवर-तीन है : भारद्वाज, वृहस्पति और अंगिरस
  • वेद-यजुर्वेद
  • कुलदेवी-कालिका माता
  • इष्ट देव-शिव जी
  • ध्वज-आसमानी और नाग चिन्ह
प्रसिद्ध बैस व्यक्तित्व
  • शालिवाहन - शालिवाहन राजा, शालिवाहन (जिसे कभी कभी गौतमीपुत्र शताकर्णी के रूप में भी जाना जाता है) को शालिवाहन शक के शुभारम्भ का श्रेय दिया जाता है जब उसने वर्ष 78 में उजयिनी के नरेश विक्रमादित्य को युद्ध मे हराया था और इस युद्ध की स्मृति मे उसने इस युग को आरंभ किया था। एक मत है कि, शक् युग उज्जैन, मालवा के राजा विक्रमादित्य के वंश पर शकों की जीत के साथ शुरु हुआ।
  • हर्षवर्धन - हर्षवर्धन प्राचीन भारत में एक राजा था जिसने उत्तरी भारत में अपना एक सुदृढ़ साम्राज्य स्थापित किया था। वह अंतिम हिंदू सम्राट् था जिसने पंजाब छोड़कर शेष समस्त उत्तरी भारत पर राज्य किया। शशांक की मृत्यु के उपरांत वह बंगाल को भी जीतने में समर्थ हुआ। हर्षवर्धन के शासनकाल का इतिहास मगध से प्राप्त दो ताम्रपत्रों, राजतरंगिणी, चीनी यात्री युवेन संग के विवरण और हर्ष एवं बाणभट्टरचित संस्कृत काव्य ग्रंथों में प्राप्त है। उसके पिता का नाम 'प्रभाकरवर्धन' था। राजवर्धन उसका बड़ा भाई और राज्यश्री उसकी बड़ी बहन थी।
  • त्रिलोकचंद
  • सुहेलदेव
  • अभयचंद
  • राणा बेनीमाधव बख्श सिंह
  • मेजर ध्यानचंद आदि
बैस राजपूतों की शाखाएँ
  • कोट बहार बैस
  • कठ बैस
  • डोडिया बैस
  • त्रिलोकचंदी(राव, राजा, नैथम, सैनवासी) बैस,
  • प्रतिष्ठानपुरी बैस,
  • रावत,
  • कुम्भी,
  • नरवरिया,
  • भाले सुल्तान,
  • चंदोसिया

बैस राजपूतों के प्राचीन राज्य और ठिकाने
  • प्रतिष्ठानपुरी, स्यालकोट ,स्थानेश्वर, मुंगीपट्टम्म, कन्नौज, बैसवाडा, कस्मांदा, बसन्तपुर, खजूरगाँव थालराई, कुर्रिसुदौली, देवगांव,मुरारमउ, गौंडा, थानगाँव, कटधर आदि
बैस राजपूतों वर्तमान निवास
  • यूपी के अवध में स्थित बैसवाडा, मैनपुरी, एटा, बदायूं, कानपुर, इलाहबाद, बनारस, आजमगढ़, बलिया, बाँदा, हमीरपुर, प्रतापगढ़, सीतापुर रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ, हरदोई, फतेहपुर, गोरखपुर, बस्ती, मिर्जापुर, गाजीपुर, गोंडा, बहराइच, बाराबंकी, बिहार, पंजाब, पाक अधिकृत कश्मीर, पाकिस्तान में बड़ी आबादी है और मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी थोड़ी आबादी है।

परम्पराएँ
बैस राजपूत नागो को नहीं मारते हैं, नागपूजा का इनके लिए विशेष महत्व है, इनमे ज्येष्ठ भ्राता को टिकायत कहा जाता था और सम्पत्ति का बड़ा हिस्सा आजादी से पहले तक उसे ही मिलता था। मुख्य गढ़ी में टिकायत परिवार ही रहता था और शेष भाई अलग किला/मकान बनाकर रहते थे, बैस राजपूतो में आपसी भाईचारा बहुत ज्यादा होता है। बिहार के सोनपुर का पशु मेला बैस राजपूतों ने ही प्रारम्भ किया था।

बैस क्षत्रियों कि उत्पत्ति : बैस राजपूतों कि उतपत्ति के बारे में कई मत प्रचलित हैं-
  1. ठाकुर ईश्वर सिंह मढ़ाड कृत राजपूत वंशावली के प्रष्ठ संख्या 112-114 के अनुसार सूर्यवंशी राजा वासु जो बसाति जनपद के राजा थे, उनके वंशज बैस राजपूत कहलाते हैं, बसाति जनपद महाभारत काल तक बना रहा है
  2. देवी सिंह मंडावा कृत राजपूत शाखाओं का इतिहास के पृष्ठ संख्या 67-74 के अनुसार वैशाली से निकास के कारण ही यह वंश वैस या बैस या वैश कहलाया, इनके अनुसार बैस सूर्यवंशी हैं, इनके किसी पूर्वज ने किसी नागवंशी राजा कि सहायता से उन्नति कि इसीलिए बैस राजपूत नाग पूजा करते हैं और इनका चिन्ह भी नाग है।
  3. महाकवि बाणभट ने सम्राट हर्षवर्धन जो कि बैस क्षत्रिय थे उनकी बहन राज्यश्री और कन्नौज के मौखरी (मखवान, झाला) वंशी महाराजा गृहवर्मा के विवाह को सूर्य और चन्द्र वंश का मिलन बताया है, मौखरी चंद्रवंशी थे अत: बैस सूर्यवंशी सिद्ध होते हैं।
  4. महान इतिहासकार गौरिशंकर ओझा जी कृत राजपूताने का इतिहास के पृष्ठ संख्या 154-162 में भी बैस राजपूतों को सूर्यवंशी सिद्ध किया गया है।
  5. श्री रघुनाथ सिंह कालीपहाड़ी कृत क्षत्रिय राजवंश के प्रष्ठ संख्या 78, 79 एवं 368, 369 के अनुसार भी बैस सूर्यवंशी क्षत्रिय हैं।
  6. डा देवीलाल पालीवाल कि कर्नल जेम्स तोड़ कृत राजपूत जातियों का इतिहास के प्रष्ठ संख्या 182 के अनुसार बैस सूर्यवंशी क्षत्रिय हैं।
  7. ठाकुर बहादुर सिंह बीदासर कृत क्षत्रिय वंशावली एवं जाति भास्कर में बैस वंश को स्पष्ट सूर्यवंशी बताया गया है।
  8. इनके झंडे में नाग का चिन्ह होने के कारण कई विद्वान इन्हें नागवंशी मानते हैं,लक्ष्मण को शेषनाग का अवतार भी माना जाता हैअत: कुछ विद्वान बैस राजपूतो को लक्ष्मण का वंशज और नागवंशी मानते हैं,कुछ विद्वानों के अनुसार भरत के पुत्र तक्ष से तक्षक नागवंश चला जिसने तक्षिला कि स्थापना की,बाद में तक्षक नाग के वंशज वैशाली आये और उन्ही से बैस राजपूत शाखा प्रारम्भ हुई
  9. कुछ विद्वानों के अनुसार बैस राजपूतों के आदि पुरुष शालिवाहन के पुत्र का नाम सुन्दरभान या वयस कुमार था जिससे यह वंश वैस या बैस कहलाया,जिन्होंने सहारनपुर कि स्थापना की
  10. कुछ विद्वानों के अनुसार गौतम राजा धीरपुंडीर ने 12 वी सदी के अंत में राजा अभयचन्द्र को 22 परगने दहेज़ में दिए इन बाईस परगनों के कारण यह वंश बाईसा या बैस कहलाने लगा
  11. कुछ विद्वान इन्हें गौतमी पुत्र शातकर्णी जिन्हें शालिवाहन भी कहा जाता है उनका वंशज मानते हैं, वहीं कुछ के अनुसार बैस शब्द का अर्थ है वो क्षत्रिय जिन्होंने बहुत सारी भूमि अपने अधिकार में ले ली हो

बैस वंश कि उत्पत्ति के सभी मतों का विश्लेष्ण एवं निष्कर्ष
 
बैस राजपूत नाग कि पूजा करते हैं और इनके झंडे में नाग चिन्ह होने का यह अर्थ नहीं है कि बैस नागवंशी हैं, महाकवि बाणभट ने सम्राट हर्षवर्धन जो कि बैस क्षत्रिय थे उनकी बहन राज्यश्री और कन्नौज के मौखरी (मखवान, झाला) वंशी महाराजा गृहवर्मा के विवाह को सूर्य और चन्द्र वंश का मिलन बताया है, मौखरी चंद्रवंशी थे अत: बैस सूर्यवंशी सिद्ध होते हैंलक्ष्मण जी को शेषनाग का अवतार माना जाता है किन्तु लक्ष्मन जी नागवंशी नहीं रघुवंशी ही थे और उनकी संतान आज के प्रतिहार(परिहार) और मल्ल राजपूत है।
जिन विद्वानों ने 12 वी सदी में धीरपुंडीर को अर्गल का गौतमवंशी राजा लिख दिया और उनके द्वारा दहेज में अभयचन्द्र को 22 परगने दहेज़ में देने से बैस नामकरण होने का अनुमान किया है वो बिलकुल गलत है,क्योंकि धीरपुंडीर गौतम वंशी नहीं पुंडीर क्षत्रिय थे जो उस समय हरिद्वार के राजा थे, बाणभट और चीनी यात्री ह्वेंस्वांग ने सातवी सदी में सम्राट हर्ष को स्पष्ट रूप से बैस या वैश वंशी कहा है तो 12 वी सदी में बैस वंशनाम कि उतपत्ति का सवाल ही नहीं है, किन्तु यहाँ एक प्रश्न उठता है कि अगर बैस वंश कि मान्यताओं के अनुसार शालिवाहन के वंशज वयस कुमार या सुंदरभान सहारनपुर आये थे तो उनके वंशज कहाँ गए?
बैस वंश कि एक शाखा त्रिलोकचंदी है और सहारनपुर के वैश्य जैन समुदाय कि भी एक शाखा त्रिलोकचंदी है इन्ही जैनियो के एक व्यक्ति राजा साहरनवीर सिंह ने अकबर के समय सहारनपुर नगर बसाया था, आज के सहारनपुर, हरिद्वार का क्षेत्र उस समय हरिद्वार के पुंडीर शासको के नियन्त्रण में था तो हो सकता है शालिवाहन के जो वंशज इस क्षेत्र में आये होंगे उन्हें राजा धीर पुंडीर ने दहेज़ में सहारनपुर के कुछ परगने दिए हों और बाद में ये त्रिलोकचंदी बैस राजपूत ही जैन धर्म ग्रहण करके व्यापारी हो जाने के कारण वैश्य बन गए हों और इन्ही त्रिलोकचंदी जैनियों के वंशज राजा साहरनवीर ने अकबर के समय सहारनपुर नगर कि स्थापना कि हो, और बाद में इन सभी मान्यताओं में घालमेल हो गया होअर्गल के गौतम राजा अलग थे उन्होंने वर्तमान बैसवारे का इलाका बैस वंशी राजा अभयचन्द्र को दहेज़ में दिया था।
गौतमी पुत्र शातकर्णी को कुछ विद्वान बैस वंशावली के शालिवाहन से जोड़ते हैं किन्तु नासिक शिलालेख में गौतमी पुत्र श्री शातकर्णी को एक ब्राह्मण (अद्वितिय ब्राह्मण) तथा खतिय-दप-मान-मदन अर्थात क्षत्रियों का मान मर्दन करने वाला आदि उपाधियों से सुशेभित किया है। इसी शिलालेख के लेखक ने गौतमीपुत्र की तुलना परशुराम से की है। साथ ही दात्रीशतपुतलिका में भी शालीवाहनों को मिश्रित ब्राह्मण जाति तथा नागजाति से उत्पन्न माना गया है। अत: गौतमी पुत्र शातकर्णी अथवा शालिवाहन को बैस वंशी शालिवाहन से जोड़ना उचित प्रतीत नहीं होता क्योंकि बैसवंशी सूर्यवंशी क्षत्रिय हैं
उपरोक्त सभी मतो का अधयन्न करने पर हमारा निष्कर्ष है कि बैस राजपूत सूर्यवंशी हैं, प्राचीन काल में सूर्यवंशी इछ्वाकू वंशी राजा विशाल ने वैशाली राज्य कि स्थापना कि थी, विशाल का एक पुत्र लिच्छवी था यहीं से सुर्यवंश कि लिच्छवी, शाक्य (गौतम), मोरिय (मौर्य), कुशवाहा (कछवाहा), बैस शाखाएँ अलग हुई, जब मगध के राजा ने वैशाली पर अधिकार कर लिया और मगध में शूद्र नन्दवंश का शासन स्थापित हो गया और उसने क्षत्रियों पर जुल्म करने शुरू कर दिए तो वैशाली से सूर्यवंशी क्षत्रिय पंजाब, तक्षिला, महाराष्ट्र, स्थानेश्वर, दिल्ली आदि में आ बसे, दिल्ली क्षेत्र पर भी कुछ समय बैस वंशियों ने शासन किया, बैंसों की एक शाखा पंजाब में आ बसी। इन्होंने पंजाब में एक नगर श्री कंठ पर अधिकार किया, जिसका नाम आगे चलकर थानेश्वर हुआ। दिल्ली क्षेत्र थानेश्वर के नजदीक है अत:दिल्ली शाखा,थानेश्वर शाखा,सहारनपुर शाखा का आपस में जरुर सम्बन्ध होगा, बैसवंशी सम्राट हर्षवर्धन अपनी राजधानी थानेश्वर से हटाकर कन्नौज ले गए, हर्षवर्धन ने अपने राज्य का विस्तार बंगाल, असम, पंजाब, राजपूताने, मालवा व नेपाल तक किया और स्वयं राजपुत्र शिलादित्य कि उपाधि धारण की।
हर्षवर्द्धन के पश्चात् इस वंश का शासन समाप्त हो गया और इनके वंशज कन्नौज से आगे बढकर अवध क्षेत्र में फ़ैल गए, इन्ही में आगे चलकर त्रिलोकचंद नाम के प्रसिद्ध व्यक्ति हुए इनसे बैस वंश कि कई शाखाएँ चली, इनके बड़े पुत्र बिडारदेव के वंशज भाले सुल्तान वंश के बैस हुए जिन्होंने सुल्तानपुर कि स्थापना की.इन्ही बिडारदेव के वंशज राजा सुहेलदेव हुए जिन्होंने महमूद गजनवी के भतीजे सैय्यद सलार मसूद गाजी को बहराइच के युद्ध में उसकी सेना सहित मौत के घाट उतार दिया था और खुद भी शहीद हो गए थे
चंदावर के युद्ध में हर्षवर्धन के वंशज केशवदेव भी जयचंद के साथ युद्ध लड़ते हुए शहीद हो गए बाद में उनके वंशज अभयचंद ने अर्गल के गौतम राजा कि पत्नी को तुर्कों से बचाया जिसके कारण गौतम राजा ने अभयचंद से अपनी पुत्री का विवाह कर उसे 1440 गाँव दहेज़ में दे दिए जिसमें विद्रोही भर जाति का दमन कर अभयचंद ने बैस राज्य कि नीव रखी जिसे आज बैसवाडा या बैसवारा कहा जाता है, इस प्रकार सूर्यवंशी बैस राजपूत आर्याव्रत के एक बड़े भू भाग में फ़ैल गए

बैसवंशी राजपूतों का सम्राट हर्षवर्धन से पूर्व का इतिहास
बैस राजपूत मानते हैं कि उनका राज्य पहले मुर्गीपाटन पर था और जब इस पर शत्रु ने अधिकार कर लिया तो ये प्रतिष्ठानपुर आ गए, वहां इस वंश में राजा शालिवाहन हुए, जिन्होंने विक्रमादित्य को हराया और शक सम्वत इन्होने ही चलाया,कुछ ने गौतमी पुत्र शातकर्णी को शालिवाहन मानकर उन्हें बैस वंशावली का शालिवाहन बताया है और पैठण को प्रतिष्ठानपुर बताया और कुछ ने स्यालकोट को प्रतिष्ठानपुर बताया है, किन्तु यह मत सही प्रतीत नहीं होते कई वंशो बाद के इतिहास में यह गलतियाँ कि गई कि उसी नाम के किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को यह सम्मान देने लग गए, शालिवाहन नाम के इतिहास में कई अलग अलग वंशो में प्रसिद्ध व्यक्ति हुए हैं। भाटी वंश में भी शालिवाहन हुए हैं और सातवाहन वंशी गौतमीपुत्र शातकर्णी को भी शालिवाहन कहा जाता था, विक्रमादित्य के विक्रम सम्वत और शालिवाहन के शक सम्वत में पूरे 135 वर्ष का फासला है अत: ये दोनों समकालीन नहीं हो सकते.दक्षिण के गौतमीपुत्र शातकर्णी को नासिक शिलालेख में स्पष्ट ब्राह्मण लिखा है अत:इसका सूर्यवंशी बैस वंश से सम्बन्ध होना संभव नहीं है। 

वस्तुत: बैस इतिहास का प्रतिष्ठानपुर न तो दक्षिण का पैठण है और न ही पंजाब का स्यालकोट है यह प्रतिष्ठानपुर इलाहबाद (प्रयाग) के निकट और झूंसी के पास था, किन्तु इतना अवश्य है कि बैस वंश में शालिवाहन नाम के एक प्रसिद्ध राजा अवश्य हुए जिन्होंने प्रतिष्ठानपूरी में एक बड़ा बैस राज्य स्थापित किया, शालिवाहन कई राज्यों को जीतकर उनकी कन्याओं को अपने महल में ले आये, जिससे उनकी पहली तीन क्षत्राणी रानियाँ खिन्न होकर अपने पिता के घर चली गयी, इन तीन रानियों के वंशज बाद में भी बैस कहलाते रहे और बाद कि रानियों के वंशज कठबैस कहलाये, ये प्रतिष्ठानपुर (प्रयाग)के शासक थे।

इन्ही शालिवाहन के वंशज त्रिलोकचंद बैस ने दिल्ली (उस समय कुछ और नाम होगा) पर अधिकार कर लिय.स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुसार दिल्ली पर सन 404 ईस्वी में राजा मुलखचंद उर्फ़ त्रिलोकचंद प्रथम ने विक्रमपाल को हराकर शासन स्थापित किया इसके बाद विक्र्मचन्द, कर्तिकचंद, रामचंद्र, अधरचन्द्र, कल्याणचन्द्र, भीमचंद्र, बोधचन्द्र, गोविन्दचन्द्र और प्रेमो देवी ने दो सो से अधिक वर्ष तक शासन किया,वस्तुत ये दिल्ली के बैस शासक स्वतंत्र न होकर गुप्त वंश और बाद में हर्षवर्धन बैस के सामंत के रूप में यहाँ पर होंगे,इसके बाद यह वंश दिल्ली से समाप्त हो गया,और सातवी सदी के बाद में पांडववंशी अर्जुनायन तंवर क्षत्रियों(अनंगपाल प्रथम) ने प्राचीन इन्द्रप्रस्थ के स्थान पर दिल्ली कि स्थापना की. वस्तुत:बैसवारा ही बैस राज्य था. (देवी सिंह मंडावा कृत राजपूत शाखाओं का इतिहास पृष्ठ संख्या 70,एवं ईश्वर सिंह मढ़ाड कृत राजपूत वंशावली पृष्ठ संख्या 113,114)

बैस वंश कि शाखाएँ
  • कोट बाहर बैस - शालिवाहन कि जो रानियाँ अपने पीहर चली गयी उनकी संतान कोट बाहर बैस कहलाती है
  • कठ बैस - शालिवाहन कि जो जीती हुई रानियाँ बाद में महल में आई उनकी संतान कोट बैस या कठ बैस कहलाती हैं।
  • डोडिया बैस - डोडिया खेडा में रहने के कारण राज्य हल्दौर जिला बिजनौर
  • त्रिलोकचंदी बैस - त्रिलोकचंद के वंशज इनकी चार उपशाखाएँ हैं राव, राजा, नैथम व सैनवासी
  • प्रतिष्ठानपूरी बैस - प्रतिष्ठानपुर में रहने के कारण
  • चंदोसिया - ठाकुर उदय बुधसिंह बैस्वाड़े से सुल्तानपुर के चंदोर में बसे थे उनकी संतान चंदोसिया बैस कहलाती है
  • रावत - फतेहपुर, उन्नाव में
  • भाले सुल्तान - ये भाले से लड़ने में माहिर थे मसूद गाजी को मारने वाले सुहेलदेव बैस संभवत: इसी वंश के थे,रायबरेली, लखनऊ, उन्नाव में मिलते हैं
  • कुम्भी एवं नरवरिया - बैसवारा में मिलते हैं

बैसवंशी राजपूतो कि वर्तमान स्थिति 
बैस राजपूत वंश वर्तमान में भी बहुत ससक्त वंश मन जाता है, ब्रिटिश गजेटियर में भी इस वंश कि सम्पन्नता और कुलीनता के बारे में विस्तार से लिखा गया है। अवध, पूर्वी उत्तर प्रदेश के बैसवारा में बहुत से बड़े जमीदार बैस वंश से थे, बैस वंशी राणा बेनी माधव बख्श सिंह और दूसरे बैस जमीदारों ने सन 1857 इसवी में अवध क्षेत्र में अंग्रेजो से जमकर लोहा लिया था, बैस राजपूतों द्वारा अंग्रेजो का जोरदार विरोध करने के बावजूद अंग्रेजो कि हिम्मत इनकी जमिदारियां खत्म करने कि नहीं हुई, बैस राजपूत अपने इलाको के सरताज माने जाते हैं और सबसे साफ़ सुथरे सलीकेदार वस्त्र धारण करने से इनकी अलग ही पहचान हो जाती है, अंग्रेजी ज़माने से ही इनके पक्के ऊँचे आवास इनकी अलग पहचान कराते थे, इनके बारे में लिखा है कि-
"The Bais Rajput became so rich at a time it is recorded that each Bais Rajput held Lakhs (Hundreds of thousands) of rupees a piece which could buy them nearly anything. To hold this amount of money you would have to have been extremely rich.This wealth caused the Bais Rajput to become the "best dressed and housed people"[22] in the areas they resided. This had an influence on the areas of Baiswara and beyond as recorded the whole area between Baiswara and Fyzabad was.
जमीदारी के अतिरिक्त बैस राजपूत राजनीती और व्यापार के क्षेत्र में भी कीर्तिमान बना रहे हैं,कई बड़े व्यापारी और राजनेता भारत और पाकिस्तान में बैस बंश से हैं जो विदेशो में भी व्यापार कर रहे हैं,राजनीती और व्यापार के अतिरिक्त खेलो कि दुनियां में मेजर ध्यानचंद जैसे महान हॉकी खिलाडी,उनके भाई कैप्टन रूप सिंह आदि बड़े खिलाडी बैस वंश में पैदा हुए हैं.कई प्रशासनिक अधिकारी,सैन्य अधिकारी बैस वंश का नाम रोशन कर रहे हैं। वस्तुत: जिस सूर्यवंशी बैस वंश में शालिवाहन, हर्षवर्धन, त्रिलोकचंद, सुहेलदेव, अभयचंद, राणा बेनी माधव बख्श सिंह, मेजर ध्यानचंद आदि महान व्यक्तित्व हुए हैं उन्ही के वंशज भारत,पाकिस्तान,पाक अधिकृत कश्मीर, कनाडा, यूरोप में बसा हुआ बैस राजपूत वंश आज भी पूरे परिश्रम, योग्यता से अपनी सम्पन्नता और प्रभुत्व समाज में कायम किये हुए है और अपने पूर्वजो कि गौरवशाली परम्परा का पालन कर रहा है


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