ईश्‍वर के अस्तित्‍व पर प्रश्‍न चिन्‍ह



ईश्वर Ishwar Ishwar Hindi calligraphy
एक जगह है चर्चा चल रही थी कि क्या आप ईश्वर को मानते हैं? ,वह चर्चा चर्चा न हो गई हो गई संसद हो गई। कह रहे थे कि ईश्वर का अस्तित्‍व नही है। क्या वे कहगे कि मै गंजा हूं? तो क्‍या मै मान लूगां और का ये कह देगे तो हम (सब) मान लेगे की ईश्‍वर का अस्तित्‍व नही है, जैसे संसद समझ कर कोई कानून बना दिया है कि ईश्‍वर नही है। ईश्‍वर का अस्तित्‍व न होता तो करोडो लोग धर्म के नाम पर फकीरीगीरी न कर रहे होते। कुछ का कहना है कि ईश्‍वर को कभी देखा नही इस लिये ईश्‍वर नही है, क्‍या किसी और के बताने से पहले आपको अपने अस्तित्‍वि पता था कि ‘मै कौन हूं मेरे माता-पिता कौन है’ नही न, किसी ने आपको बताया था कि आप कौन है। ऐसा नही था जन्‍म लेते ही मम्मी-पापा कहना चालू कर दिया था। ईश्वर का महत्व तथा अर्थ तो वह जानता है जो ईश्‍वर जानता हो, कभी क,ख,ग पढा नही चल दिये बिहारी के पद की व्‍याखा करने।
जितने लोग ईश्‍वर को न मानने का ढोग करते है, इनमे से एक भी बन्‍दा ऐसा नही होगा, जिसने कि कभी ईश्‍वर के सम्‍मुख सिर न झुकाया हो, कोई कितना भी नास्तिक हो वह कभी न कभी ईश्‍वर को जरूर मानता है। हाईटेक जमाना है जहां हंसो के बीच बहुला पहुच कर बांग मारता है तो हंसो को भी लगता है कि हम कही नये दौर मे पिछड न जाये ऐसे मे कुछ हंस भी है जो बकुला की तरह बाग मारते है कि ईश्‍वर नही है, यह तो वही कहावत हो गई कि ‘कौआ कान ले गया’ अपने कान को न देख कर कौवे के पीछे दौड जाना, ऐसे ही कुछ अनुयायी है जो केवल हां मे हां मिलाना उचित समझते है। क्‍या चार लोग मिल कर पंचरा कर ले की ईश्‍वर नही है तो क्‍या वास्‍तव मे ईश्‍वर का अस्तित्‍व नही है।
इस विषय पर मतदान भी हुआ, बात आती है कि कभी-2 वालो के मत को किसमे लिया जाये, क्‍या आप कभी-2 ईश्‍वर को मानने वाले को आप यह थोडे ही कह सकते है वह ईश्‍वर को नही मानता है वह जरुरत पडने पर ईश्‍वर को मानता है। एक दिन मे सौ बार जरूरत पडेगी सौ बार मानेगा तथा नही पडेगी तो नही मानेगा। अर्थात बह ईश्‍वर को अवश्‍य (जरूरत पर ही सही) मानेगा। चार को तो 50-50 कर लिये पाचवां होता तो क्‍या हलाल करके उसका वोट लेते। ये चारो झारखण्‍ड के विधायक थोडे है कि खरीद कर नास्तिक घोषित करवा कर अपनी सरकार बना लोगे लोकतंत्र नही भक्‍ततंत्र है। ये वो भक्‍त है जो सशर्त समर्थन तो देते है किन्तु भगवान की सत्ता को मानने से इन्‍कार नही करते है। क्योकि भगवान जी से इन भक्‍तो की मांग काफी होती है किन्‍तु देने न देने की इच्‍छा भगवान पर होती है भगवान दे या न दे पर ये भगवान का साथ नही छोड़ते है क्योकि कल समर्थन न देगे तो कल किस मुँह से मागेगें।
ईश्वर Ishwar Ishwar Hindi calligraphy
भगवान का होना या न होना किसी मतदान से नही तय किया जा सकता है वहां तो कद्दापि नही जहां विचार रखने वालो कर संख्‍या सीमित हो, यह तो ऐसा होगा 50 किलो के पतीले ढाई चाउर (चावल) की खीर पकाना और फिर पूछना कि कितने खा लेगें। यह कहावत तो सही है कि यह चावल के 4 दानों को देख कर पकने का पता चल जाता है किन्तु विषय बहुत बडा है यह 6 अरब लोगों के बीच की बात है मात्र दो दर्जन के विचारो को हम 6 अरब व्यक्तियो के विचार नही मान सकते है। यहां पतीली भी काफी बडी है ऊपर के जिन चावलो को टो रहे है वे आंच न लगने के कारण पके नही है वे नास्तिक है और वे ईश्‍वर को नही मानते है, और जो टोने के लिये नीचे पहुच के बाहर थे वे जल गये वे ईश्‍वर के ज्ञान को प्राप्‍त कर लिया, अर्थात ईश्‍वर को देख लिया। वैसे ईश्‍वर को मानने न मानने का जो पूर्वानुमान जो निकाला जा रहा है वह चुनाव की एक्जिट पोल की तरह फ्लाप जायेगा। हर वर्ष प्रयाग मे करोड़ो श्रद्धालु माघ मेले मे आते है, अयोध्‍या आते है, काशी आते है पता नही कौन-2 से मतावलम्बी विश्व के कोने कोने मे जाते है। वे सब मूरख है और ये चर्चालु बुद्धिमान।
ईश्‍वर को यह बताने की आवश्‍यता नही है मै हूं वो भी हम जैसे तुच्छ प्राणियो के लिये, जो हर क्षण जिन्‍दगी और मौत से जूझता रहता है। इस विशाल ब्रम्‍हाड मे उपलब्‍ध भगवान की का सृष्टि का अध्‍ययन लाखो करोडो वैज्ञानिक सैकड़ों वर्षो से करते चले आये है और करते रहेगें। जब ये करोड़ो विद्वान इस परमात्मा की इस रचना का आर छोर नही पा सके तो तो चार लोग क्या ईश्वर को मिटा सकेगें।


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