प्रमुख महापुरुषों की सूक्तियां एवं अमृत वचन



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हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्रोत है।

— सुमित्रानंदन पंत

राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी का प्रयोग देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।

— महात्मा गांधी

भाषा एक नगर है, जिसके निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति एक-एक पत्थर लाता है।

— राल्फ वाल्डो एमर्सन

हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है, जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया।

— डॉ. राजेंद्र प्रसाद

आस्था वह पक्षी है, जो भोर के अंधकार में भी उजाले को महसूस कर लेता है।

— रवीन्द्रनाथ ठाकुर

प्रेम ही एकमात्र वास्तविकता है। यह महज़ एक भावना नहीं है; यह वह परम सत्य है, जो सृष्टि के आरंभ से ही आत्मा में निवास करता है।

— रवीन्द्रनाथ ठाकुर

कवि और चित्रकार में यही भेद है कि कवि अपने स्वर में और चित्रकार अपनी रेखाओं में जीवन के तत्व तथा सौंदर्य के रंग भरता है।

— डॉ. रामकुमार वर्मा

शाश्वत शांति की प्राप्ति के लिए शांति की इच्छा नहीं, बल्कि इच्छाओं की शांति आवश्यक है।

— स्वामी ज्ञानानंद

धर्म का अर्थ तोड़ना नहीं, बल्कि जोड़ना है। धर्म एक संयोजक तत्व है। धर्म लोगों को परस्पर जोड़ता है।

— डॉ. शंकर दयाल शर्मा

त्योहार वर्ष की गति के पड़ाव हैं, जहाँ भिन्न-भिन्न मनोरंजन, भिन्न-भिन्न आनंद और भिन्न-भिन्न क्रीड़ास्थल होते हैं।

— बरुआ

दुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी कम प्यारे नहीं होते।

— प्रेमचंद

अधिक हर्ष और अधिक उन्नति के बाद ही अधिक दुःख और पतन की बारी आती है।

— जयशंकर प्रसाद

अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं। वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींचकर महाप्राण शक्तियाँ बनाते हैं।

— महर्षि अरविंद

चाहे गुरु पर हो या ईश्वर पर, श्रद्धा अवश्य रखनी चाहिए; क्योंकि श्रद्धा के बिना सब बातें व्यर्थ हो जाती हैं।

— समर्थ रामदास

यदि असंतोष की भावना को लगन और धैर्य के साथ रचनात्मक शक्ति में न बदला जाए, तो वह खतरनाक भी हो सकती है।

— इंदिरा गांधी

प्रजा के सुख में ही राजा का सुख है और प्रजाओं के हित में ही राजा अपना हित समझे। आत्मप्रियता में राजा का हित नहीं है, प्रजाओं की प्रियता में ही उसका हित निहित है।

— चाणक्य

द्वेष को द्वेष से नहीं मिटाया जा सकता; प्रेम की शक्ति ही उसे मिटा सकती है।

— विनोबा भावे

साहित्य का कर्तव्य केवल ज्ञान देना नहीं है, बल्कि एक नया वातावरण निर्मित करना भी है।

— डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

लोकतंत्र के पौधे का, चाहे वह किसी भी किस्म का क्यों न हो, तानाशाही में पनपना संदेहास्पद है।

— जयप्रकाश नारायण

बाधाएँ व्यक्ति की परीक्षा होती हैं। उनसे उत्साह बढ़ना चाहिए, मंद नहीं पड़ना चाहिए।

— यशपाल

सहिष्णुता और समझदारी संसदीय लोकतंत्र के लिए उतनी ही आवश्यक हैं, जितने संतुलन और मर्यादित चेतना।

— डॉ. शंकर दयाल शर्मा

जिस प्रकार रात्रि का अंधकार केवल सूर्य दूर कर सकता है, उसी प्रकार मनुष्य की विपत्तियों को केवल ज्ञान दूर कर सकता है।

— नारद भक्ति

ज्ञानी जन विवेक से सीखते हैं, साधारण मनुष्य अनुभव से, अज्ञानी आवश्यकता से और पशु स्वभाव से।

— कौटिल्य

जिस व्यक्ति के हृदय में संगीत का स्पंदन नहीं है, वह कर्म और चिंतन के क्षेत्र में कभी महान नहीं बन सकता।

— नेताजी सुभाषचंद्र बोस


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