क्या करूँगा में अमीर बन कर
मेरा महाकाल तो फ़क़ीरों का
दीवाना है
नाकाम होगा हर वो मकसद
ना हुनर मेरे पास है ना
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क्या करूँगा में अमीर बन कर
मेरा महाकाल तो फ़क़ीरों का
दीवाना है
नाकाम होगा हर वो मकसद
ना हुनर मेरे पास है ना
सिकरवार राजपूत
सिकरवार एक सूर्यवंशी गोत्र है। सिकरवार वंश राजस्थान, मध्य प्रदेश के मुरैना, भिण्ड और ग्वालियर क्षेत्रों, बिहार तथा उत्तर प्रदेश के आगरा और गाजीपुर जनपदों के आसपास पाया जाता है।
आगरा जनपद की खेरागढ़ तहसील में स्थित जाजौ, बसई और अयेला गाँव सिकरवार वंश के अत्यंत प्राचीन ग्राम माने जाते हैं। ग्राम अयेला में माँ कामाख्या देवी का एक अत्यंत प्राचीन मंदिर स्थित है। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद (अगस्त–सितम्बर) मास में यहाँ एक भव्य और अद्भुत मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक सम्मिलित होते हैं तथा लक्ष्मण कुण्ड में स्नान कर माँ कामाख्या के दर्शन प्राप्त करते हैं।
'सिकरवार' शब्द राजस्थान के 'सीकर' जिले से बना माना जाता है। कहा जाता है कि इस जिले की स्थापना सिकरवार राजपूतों द्वारा की गई थी। इसके पश्चात उन्होंने 823 ईस्वी में 'विजयपुर सीकरी' की स्थापना की। बाद में खानवा के युद्ध में विजय प्राप्त करने के उपरान्त 1527 ईस्वी में बाबर ने इसका नाम 'फतेहपुर सीकरी' रख दिया।
ऐतिहासिक परम्पराओं के अनुसार इस नगर का विकास चित्तौड़ के महाराणा के शासनकाल में सिकरवार वंशीय शासकों एवं सामन्तों के संरक्षण में हुआ था। कुछ परम्पराओं में इसका श्रेय 'खानवजी सिकरवार' को भी दिया जाता है।
सिकरवार वंश का इतिहास
1527 ईस्वी में राव धामदेव सिंह सिकरवार ने खानवा के युद्ध में महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) की ओर से बाबर के विरुद्ध युद्ध में सहयोग किया। युद्ध के पश्चात अपने वंश की सुरक्षा के लिए सिकरवार वंश के अनेक परिवार सीकरी क्षेत्र छोड़कर अन्य स्थानों की ओर चले गए।
राव जयराज सिंह सिकरवार के तीन पुत्र थे—
कामदेव सिंह सिकरवार (दलपति)
धामदेव सिंह सिकरवार
विराम सिंह सिकरवार
कामदेव सिंह सिकरवार, जो आगे चलकर दलखू बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए, मध्य प्रदेश के वर्तमान मुरैना जिले में जाकर बस गए और वहीं अपने वंश का विस्तार किया।
चंबल घाटी के सिकरवार स्वयं को राव दलपत सिंह (दलखू बाबा) का वंशज मानते हैं। दलखू बाबा द्वारा स्थापित अथवा उनसे संबंधित प्रमुख ग्राम इस प्रकार बताए जाते हैं—
सिरसैनी — स्थापना विक्रम संवत 1404
भैंसरोली — स्थापना विक्रम संवत 1465
पहाड़गढ़ — स्थापना विक्रम संवत 1503
सिहौरी — स्थापना विक्रम संवत 1606
परगना जौरा में इनके कुल लगभग 70 ग्राम बताए जाते हैं।
दलखू बाबा की प्रथम पत्नी से उत्पन्न पुत्र रतनपाल के अधिकार में बर्रेड़, पहाड़गढ़, चिन्नौनी, हुसैनपुर, कोल्हेरा, बाल्हेरा, सिकरौदा, पनिहारी आदि 29 ग्राम रहे।
भैरोंदास एवं त्रिलोकदास के अधिकार में सिहौरी, भैंसरोली, खांडोली आदि 11 ग्राम रहे।
हैबंत रूपसेन के अधिकार में तोर, तिलावली, पंचमपुरा, बागचीनी, देवगढ़ आदि 22 ग्राम रहे।
दलखू बाबा की दूसरी पत्नी की संतानें— गोरे, भागचंद, बादल, पोहपचंद एवं खानचंद के वंशज कोटड़ा तथा मिलौआ परगना सहित जौरा क्षेत्र के अनेक ग्रामों में आबाद हुए।
गोरे और बादल अपने समय के प्रसिद्ध योद्धा माने जाते हैं।
राव दलपत सिंह (दलखू बाबा) के वंशजों की प्रमुख जागीरें—
कोल्हेरा
बाल्हेरा
हुसैनपुर
चिन्नौनी (चिलौनी)
पनिहारी
सिकरौदा
मुरैना जिले में सिहौरी से बर्रेड़ तक सिकरवार राजपूतों की उल्लेखनीय आबादी पाई जाती है। कहा जाता है कि सिकरवारों ने विक्रम संवत 1606 में सिहौरी की अंतिम गढ़ी पर विजय प्राप्त की और इसके बाद मुंगावली तथा आसपास के क्षेत्रों में अपना प्रभाव स्थापित किया। इनके आखेट एवं युद्धकौशल से संबंधित अनेक लोककथाएँ एवं वृत्तांत प्रचलित हैं।
मुरैना जिले की पहाड़गढ़ रियासत के सिकरवार शासकों की वंशावली इस प्रकार बताई जाती है—
राव धन सिंह — विक्रम संवत 1503 से 1560
राव भारतीचंद — विक्रम संवत 1560 (उसी वर्ष देहावसान)
राव नारायण दास — विक्रम संवत 1560 से 1597
राव पत्रखान सिंह — 1597 से 1641
राव जगत सिंह — 1641 से 1670
राव वीर सिंह — 1670 से 1703
राव दलेल सिंह — 1703 से 1779
राव कुँवर राय — 1779 से 1782
राव बसंत सिंह — 1782 से 1791
राव पृथ्वीपाल सिंह — 1791 से 1801
राव विक्रमादित्य — 1801 से 1824
राव अपरवल सिंह — 1824 से 1860
राव मनोहर सिंह — 1860 से 1899
राव गणपत सिंह — 1899 से 1905 (चिन्नौनी से दत्तक पुत्र)
राव अजमेर सिंह — 1905 से 1973 (निसंतान, दत्तक परंपरा)
राजा पंचम सिंह — 1973 से 2004
इसके पश्चात जमींदारी एवं जागीरदारी प्रथा समाप्त हो गई तथा अधिकांश भू-स्वामी कृषक बन गए।
राजा पंचम सिंह सिकरवार की प्रथम रानी से निहाल सिंह, पद्म सिंह तथा एक पुत्री का जन्म हुआ। पद्म सिंह का विवाह राय सिंह तोमर की पुत्री से हुआ। दूसरी रानी (सिरसावाली) से हरी सिंह का जन्म हुआ। हरी सिंह का विवाह कश्मीरी डोगरा राजपूत परिवार में हुआ।
भवानीपुर ग्राम में कालिका माता का एक प्राचीन मंदिर स्थित है। क्षेत्र के सिकरवार क्षत्रियों ने कालिका माता को अपनी कुलदेवी के रूप में स्वीकार किया है।
भवानीपुर कोथावां ब्लॉक का एक प्रमुख ग्राम है। सिकरवार क्षत्रियों के घरों में होने वाले मांगलिक अवसरों पर आज भी सर्वप्रथम कालिका माता का स्मरण किया जाता है।
यह मंदिर नैमिषारण्य से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार कभी गोमती नदी मंदिर के समीप बहती थी, परंतु समय के साथ उसने अपना मार्ग परिवर्तित कर लिया। नदी की पुरानी धारा आज भी एक झील के रूप में विद्यमान है।
नवरात्र के अवसर पर यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें भवानीपुर, जियनखेड़ा, महुआखेड़ा, काकूपुर, जरौआ, अटिया तथा कोथावां सहित अनेक गाँवों के श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं। इस अवसर पर सिकरवार क्षत्रिय विशेष रूप से एकत्र होकर माता कालिका की आराधना करते हैं।
स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार पराजय के पश्चात पेशवा बाजीराव द्वितीय ने अपने जीवन का एक कालखंड गोमती तट के इस क्षेत्र में व्यतीत किया था। वे देवी-उपासक थे, इसलिए इस क्षेत्र का नाम भवानीपुर प्रचलित हुआ। यह भी कहा जाता है कि उन्होंने नैमिषारण्य स्थित देव-देवेश्वर मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान दिया था। मंदिर परिसर में उनकी स्मृति से जुड़ी एक समाधि भी विद्यमान बताई जाती है।
सिकरवारों की वीरता और स्वतंत्रता-प्रियता
सिकरवार राजपूत अपनी वीरता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता-प्रिय स्वभाव के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। इतिहास और लोकपरंपराओं में वर्णित है कि उन्होंने सदैव अपने सम्मान और स्वाधीनता की रक्षा के लिए संघर्ष किया। खानवा के युद्ध के बाद भी सिकरवारों ने पराधीनता स्वीकार करने के बजाय विभिन्न क्षेत्रों में जाकर नई बस्तियाँ बसाईं और अपने पराक्रम तथा परिश्रम से पुनः प्रतिष्ठा प्राप्त की। यही कारण है कि आज भी सिकरवार वंश के लोग अपने गौरवशाली अतीत, युद्ध कौशल और क्षत्रिय परंपराओं के लिए जाने जाते हैं।
सिकरवार राजपूत समाज में शिक्षा, सैन्य सेवा, कृषि तथा प्रशासनिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारतीय सेना, पुलिस, न्यायिक सेवा तथा विभिन्न प्रशासनिक पदों पर सिकरवार वंश के अनेक व्यक्तियों ने उल्लेखनीय सेवाएँ प्रदान की हैं। समाज में संगठन, अनुशासन और परंपराओं के संरक्षण की भावना आज भी इस वंश की विशेष पहचान मानी जाती है।
सिकरवार वंश में शक्ति उपासना की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। माता कालिका, माँ कामाख्या, दुर्गा और भवानी के प्रति विशेष श्रद्धा रखी जाती है। नवरात्रि, दशहरा तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर कुलदेवी की पूजा का विशेष महत्व है। अनेक सिकरवार परिवार आज भी किसी शुभ कार्य के प्रारंभ से पूर्व कुलदेवी का स्मरण करना आवश्यक मानते हैं।
लोक परंपराओं में सिकरवारों को "शौर्य, स्वाभिमान और धर्मरक्षा" का प्रतीक माना गया है। उनके इतिहास में मातृभूमि, धर्म और कुल-मर्यादा की रक्षा के लिए संघर्ष और बलिदान की अनेक गाथाएँ सुनने को मिलती हैं।
डी.के. बासु बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल (1997 (1) एससीसी 416) के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी भी गिरफ्तारी के मामले में निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना अपेक्षित है।
गिरफ्तारी का कार्य कर रहा पुलिस अधिकारी, गिरफ्तारी के समय, गिरफ्तारी का एक ज्ञापन-पत्र तैयार करेगा और यह ज्ञापन-पत्र दो गवाहों द्वारा अनुप्रमाणित किया जाएगा, जो गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार के सदस्य या जिस क्षेत्र से गिरफ्तारी की गई है, उस क्षेत्र का कोई सम्मानित व्यक्ति हो सकता है। यह ज्ञापन-पत्र गिरफ्तार व्यक्ति द्वारा भी प्रतिहस्ताक्षरित किया जाएगा तथा इस पर गिरफ्तारी का समय एवं तिथि दर्ज होगी।
वह व्यक्ति जिसकी गिरफ्तारी की गई है या रोककर रखा गया है तथा किसी पुलिस थाना, पूछताछ केन्द्र या अन्य हवालात में अभिरक्षा में रखा जा रहा है, उसे यह अधिकार होगा कि उसके किसी मित्र, रिश्तेदार अथवा उसे जानने या उसका भला चाहने वाले व्यक्ति को यथाशीघ्र सूचित किया जाए कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और किसी विशेष स्थान पर रखा गया है, जब तक कि गिरफ्तारी के ज्ञापन-पत्र को अनुप्रमाणित करने वाला गवाह स्वयं गिरफ्तार व्यक्ति का ऐसा मित्र या रिश्तेदार न हो।
पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का समय, स्थान तथा गिरफ्तार व्यक्ति की अभिरक्षा का स्थान अवश्य अधिसूचित किया जाएगा। जहाँ गिरफ्तार व्यक्ति का कोई अन्य मित्र या रिश्तेदार जिले या शहर से बाहर रहता है, वहाँ कानूनी सहायता संगठनों तथा संबंधित क्षेत्र के पुलिस थानों के माध्यम से गिरफ्तारी के 8 से 12 घंटे के भीतर टेलीग्राम द्वारा सूचना दी जाएगी।
गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी या हवालात में रखे जाने की सूचना अपने किसी मित्र को दिलवाने के अधिकार से अवश्य अवगत कराया जाएगा।
हवालात के स्थान पर व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में, उस व्यक्ति के उस मित्र का नाम जिसे गिरफ्तारी की सूचना दी गई है तथा उस पुलिस अधिकारी का नाम एवं पद, जिसकी अभिरक्षा में गिरफ्तार व्यक्ति को रखा गया है, डायरी में दर्ज किया जाएगा।
यदि गिरफ्तार व्यक्ति के शरीर पर कोई छोटा या बड़ा जख्म विद्यमान है, तो उसके निवेदन पर गिरफ्तारी के समय उसकी जांच की जाएगी तथा उसका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। गिरफ्तार व्यक्ति तथा गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी दोनों निरीक्षण ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे और इसकी एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को उपलब्ध कराई जाएगी।
गिरफ्तार व्यक्ति को हवालात में रखने के दौरान प्रत्येक 48 घंटे में अनुमोदित डॉक्टरों की सूची में से किसी एक डॉक्टर द्वारा अथवा निदेशक स्वास्थ्य सेवा द्वारा संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के लिए नियुक्त डॉक्टर द्वारा चिकित्सा जांच कराई जाएगी। निदेशक स्वास्थ्य सेवा सभी तहसीलों एवं जिलों के लिए ऐसी सूची तैयार करेगा।
उपर्युक्त के संदर्भ में, गिरफ्तारी ज्ञापन सहित सभी दस्तावेजों की प्रतियाँ अभिलेख हेतु मजिस्ट्रेट को भेजी जाएँगी।
गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जाएगी, तथापि संपूर्ण पूछताछ के दौरान नहीं।
सभी जिला एवं राज्य मुख्यालयों में एक पुलिस नियंत्रण कक्ष उपलब्ध कराया जाएगा, जहाँ गिरफ्तारी तथा गिरफ्तार व्यक्ति की अभिरक्षा के स्थान के संबंध में गिरफ्तार करने वाले अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी के 12 घंटों के भीतर सूचना प्रदान की जाएगी तथा पुलिस नियंत्रण कक्ष के सूचना-पट्ट पर प्रदर्शित की जाएगी।
गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारियों के नाम एवं पदनाम स्पष्ट एवं पठनीय होने चाहिए तथा उनकी पहचान के लिए नाम-पट्ट (Name Tag) लगा होना चाहिए। ऐसे सभी पुलिस अधिकारियों का विवरण, जो गिरफ्तार व्यक्ति की पूछताछ या अभिरक्षा से संबंधित हों, एक रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।
बिना वारंट के गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग किसी शिकायत की सच्चाई और महत्व तथा संबंधित व्यक्ति की अपराधिता के संबंध में उचित विश्वास होने पर, और साथ ही गिरफ्तारी की आवश्यकता के संबंध में कुछ जांच के उपरांत तर्कसंगत निर्णय पर पहुँचने के बाद ही किया जा सकता है।
(जोगिन्दर कुमार का मामला - (1994) 4 एस.सी.सी. 260)
संज्ञेय अपराध के मामले में केवल शक्ति होने के आधार पर कानून के हिसाब से बिना वारंट के गिरफ्तारी करना न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है।
जोगिन्दर कुमार के मामले के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने प्रश्न संख्या 54 में घोषणा की कि क्या गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग उचित रूप से किया गया या नहीं, यह स्पष्ट रूप से न्यायोचित होना चाहिए।
निम्नलिखित में से किसी एक या अन्य परिस्थितियों में संज्ञेय मामले में गिरफ्तारी को न्यायोचित ठहराया जा सकता है:-
ऐसे मामलों में हत्या, डकैती, लूटमार, बलात्कार जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इन मामलों में संदिग्ध व्यक्ति को भाग जाने से रोकने तथा कानूनी प्रक्रिया से बच न पाने के लिए गिरफ्तारी आवश्यक है।
जब किसी व्यक्ति के हिंसात्मक आचरण पर संदेह हो और उसके द्वारा आगे भी अपराध किए जाने की संभावना हो।
संदिग्ध व्यक्ति को साक्ष्यों को नष्ट करने, गवाहों के साथ छेड़छाड़ करने अथवा अब तक गिरफ्तार न किए गए अन्य संदिग्धों को चेतावनी देने से रोकना आवश्यक हो।
यदि संदिग्ध व्यक्ति एक अभ्यस्त अपराधी है, जो सामान्य प्रकार के या अन्य अपराध कर सकता है।
(राष्ट्रीय पुलिस आयोग की तृतीय रिपोर्ट)
उपर्युक्त जघन्य अपराधों के अतिरिक्त, यदि कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को पुलिस थाने में उपस्थित होने तथा बिना अनुमति पुलिस थाना न छोड़ने की सूचना जारी करता है, तो गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।
(जोगिन्दर कुमार का मामला (1994) 4 एस.सी.सी. 260)
जिन अपराधों में जमानत दी जा सकती है, उनमें गिरफ्तारी नहीं की जाएगी, जब तक कि संदिग्ध व्यक्ति के फरार होने की पूर्ण आशंका न हो।
गिरफ्तार करने या पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारी की स्पष्ट पहचान तथा पदनाम सहित नाम का टैग प्रदर्शित होना चाहिए। गिरफ्तार करने या पूछताछ करने वाले पुलिसकर्मी का विवरण उसी समय पुलिस थाने में रखे गए रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए।
1. नियमानुसार, गिरफ्तार करते समय जोर-जबरदस्ती नहीं की जाएगी। तथापि, गिरफ्तारी का बलपूर्वक प्रतिरोध किए जाने की स्थिति में न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग किया जा सकता है। फिर भी यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गिरफ्तार किए जा रहे व्यक्ति के शरीर पर कोई दृश्य अथवा अदृश्य चोट न लगे।
2. गिरफ्तार किए जा रहे व्यक्ति की गरिमा की रक्षा की जाएगी। गिरफ्तार व्यक्ति की परेडिंग अथवा सार्वजनिक प्रदर्शन की किसी भी परिस्थिति में अनुमति नहीं होगी।
3. व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करते हुए, जोर-जबरदस्ती तथा आक्रामकता के बिना, उसकी गोपनीयता के अधिकार की रक्षा करते हुए तलाशी ली जाएगी। महिलाओं की तलाशी केवल महिला द्वारा ही शालीनता के साथ की जाएगी। (धारा 51(2), दण्ड प्रक्रिया संहिता)
4. हथकड़ी और बेड़ी का कदापि प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने प्रेम शंकर शुक्ला बनाम दिल्ली प्रशासन (1980) 3 एस.सी.सी. 526 तथा लोकतंत्र के नागरिक बनाम असम राज्य (1995) 3 एस.सी.सी. 743 के निर्णयों में विधि के अनुसार बार-बार स्पष्ट किया है और अनिवार्य बनाया है।
5. जहाँ तक व्यवहारिक रूप से संभव हो, महिला पुलिस अधिकारी को संबद्ध किया जाएगा, जहाँ गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति महिला हो। सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।
6. जहाँ किसी बच्चे या किशोर की गिरफ्तारी की जानी हो, वहाँ किसी भी परिस्थिति में बल प्रयोग या पिटाई नहीं की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए पुलिस अधिकारी सम्मानित नागरिकों को सम्मिलित करेंगे, ताकि बच्चा या किशोर आतंकित न हो और न्यूनतम बल का प्रयोग किया जाए।
7. जहाँ बिना वारंट के गिरफ्तारी की जाती है, वहाँ गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तारी का कारण उस भाषा में सूचित किया जाएगा जिसे वह समझता/समझती हो। इस उद्देश्य के लिए यदि आवश्यक हो तो पुलिस सम्मानित नागरिकों की सहायता ले सकती है। गिरफ्तारी का कारण पुलिस रिकॉर्ड में पहले से लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा। गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित कारण दिखाया जाएगा तथा मांग करने पर उसकी एक प्रति भी दी जाएगी। (धारा 50(1), दण्ड प्रक्रिया संहिता)
8. गिरफ्तार व्यक्ति, अपने द्वारा किए गए निवेदन पर, किसी मित्र, संबंधी या उसे जानने वाले अन्य व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी तथा हिरासत के स्थान की सूचना देने की मांग कर सकता है। पुलिस, जिस व्यक्ति को यह सूचना दी गई है, उसका विवरण एक रजिस्टर में दर्ज करेगी। (जोगिन्दर कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (1994) 4 एस.सी.सी. 260)
9. यदि किसी व्यक्ति को जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाता है, तो पुलिस अधिकारी उसे जमानत पर छोड़े जाने के उसके अधिकार के विषय में सूचित करेगा, ताकि वह जमानत की व्यवस्था कर सके। (धारा 50(2), दण्ड प्रक्रिया संहिता)
10. गिरफ्तार व्यक्ति को उक्त अधिकारों की सूचना देने के अतिरिक्त, पुलिस उसे अपने पसंद के वकील से परामर्श एवं बचाव का अधिकार होने की सूचना भी देगी। उसे यह भी बताया जाएगा कि वह राज्य के खर्च पर निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने का हकदार है। (डी.के. बासु बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल, 1997 (1) एस.सी.सी. 416)
11. जब गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस थाने लाया जाता है, तो यदि वह इस संबंध में निवेदन करता है, उसे शीघ्र चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी। उसे इस अधिकार की सूचना भी तुरंत दी जाएगी। जहाँ पुलिस अधिकारी यह पाता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है, किंतु उसकी स्थिति ऐसी है कि वह निवेदन करने में असमर्थ है, वहाँ पुलिस अधिकारी ऐसी सहायता की शीघ्र व्यवस्था करेगा। इसका विवरण उसी समय रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। महिला द्वारा चिकित्सा सहायता के निवेदन पर पंजीकृत महिला चिकित्सक द्वारा ही जांच की जाएगी। (धारा 53, दण्ड प्रक्रिया संहिता)
12. गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी और हिरासत के स्थान की सूचना अविलंब पुलिस नियंत्रण कक्ष तथा जिला/राज्य मुख्यालय को दी जाएगी। इसके लिए एक निगरानी प्रणाली दिन-रात कार्य करेगी।
13. जैसे ही व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, गिरफ्तार करने वाला पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति के शरीर पर विद्यमान चोट के होने या न होने का विवरण गिरफ्तारी रजिस्टर में दर्ज करेगा। यदि गिरफ्तार व्यक्ति के शरीर पर कोई चोट पाई जाती है, तो वह चोट कैसे लगी, इसका पूर्ण विवरण तथा अन्य आवश्यक ब्यौरा रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, जिस पर गिरफ्तार व्यक्ति और पुलिस अधिकारी दोनों हस्ताक्षर करेंगे। गिरफ्तार व्यक्ति की रिहाई के समय उक्त विवरण के संबंध में पुलिस अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाण-पत्र उसे प्रदान किया जाएगा।
14. यदि गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय के आदेश के अधीन पुलिस हिरासत में रखा जाता है, तो हिरासत के दौरान प्रत्येक 48 घंटे में संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के स्वास्थ्य निदेशक द्वारा अनुमोदित चिकित्सकों के पैनल से नियुक्त किसी प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी द्वारा उसकी चिकित्सा जांच कराई जाएगी। पुलिस हिरासत से रिहा किए जाने के समय भी उसकी चिकित्सा जांच कराई जाएगी तथा उसे एक प्रमाण-पत्र दिया जाएगा, जिसमें उसके शरीर पर किसी चोट के विद्यमान होने या न होने का उल्लेख होगा।
15. गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। (धारा 56 तथा 57, दण्ड प्रक्रिया संहिता)
16. गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान किसी भी समय अपने वकील से मिलने की अनुमति होगी।
17. पूछताछ स्पष्ट पहचान वाले स्थान पर की जाएगी, जिसे इस प्रयोजन हेतु अधिसूचित किया गया हो। यह स्थान सुलभ होना चाहिए तथा पूछताछ के स्थान की सूचना गिरफ्तार व्यक्ति के मित्रों या परिजनों को अवश्य दी जाएगी।
18. पूछताछ की विधि जीवन, गरिमा तथा स्वतंत्रता के अधिकार और उत्पीड़न एवं अपमानजनक व्यवहार के विरुद्ध अधिकार के अनुरूप होनी चाहिए।
19. दिशा-निर्देशों का यथासंभव विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा तथा प्रत्येक पुलिस थाने को उपलब्ध कराया जाएगा। इसे पुस्तिका में भी शामिल किया जाएगा, जो प्रत्येक पुलिसकर्मी को दी जाएगी।
20. दिशा-निर्देशों का प्रिंट मीडिया तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अधिकतम प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इन्हें प्रत्येक पुलिस थाने में एक से अधिक भाषाओं में सूचना-पट्ट के प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित किया जाएगा।
21. पुलिस एक शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करेगी, जो दिशा-निर्देशों के उल्लंघन संबंधी शिकायतों की शीघ्र जांच कर सुधारात्मक कार्रवाई करेगी।
22. जिस सूचना-पट्ट पर दिशा-निर्देश प्रदर्शित किए जाएंगे, उसी पर शिकायत निवारण प्रणाली की स्थिति तथा उस निकाय तक पहुँचने का तरीका भी प्रदर्शित किया जाएगा।
23. इन दिशा-निर्देशों के व्यापक प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करने हेतु न्यायालयों, गैर-सरकारी संगठनों, अस्पतालों तथा विश्वविद्यालयों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।
24. शिकायत निवारण प्रणाली के कार्यकलाप पारदर्शी होंगे तथा उसकी रिपोर्टें सुलभ होंगी।
25. दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर दोषी पुलिस अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आवश्यकता अनुसार आपराधिक न्याय तंत्र को भी संदर्भित की जाएगी।
परिचय : बिना संतुष्टि के संभोग करते हुए यदि वीर्य स्खलन हो जाए, तो उसे शीघ्रपतन कहा जाता है।
अपने नाम के विपरीत, स्वप्नदोष कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है, जिसके अंतर्गत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात (स्खलन) हो जाता है। यह महीने में यदि 1 या 2 बार ही हो, तो सामान्य बात कही जा सकती है और यह कहा जा सकता है कि कोई रोग नहीं है। किन्तु यदि यह इससे अधिक बार होता है, तो वीर्य या शुक्र की हानि होती है और व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी का अहसास होता है, क्योंकि यह शुक्र भी रक्त कणों से पैदा होता है। अतः अत्यधिक शुक्र-क्षय व्यक्ति को कमजोर कर देता है।
स्वप्नदोष किशोरावस्था और शुरुआती वयस्क वर्षों के दौरान होने वाली एक सामान्य घटना है, लेकिन यह उत्सर्जन यौवन के बाद किसी भी समय हो सकता है। आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक पुरुष स्वप्नदोष का अनुभव करे। जहाँ अधिकांश पुरुष इसे अनुभव करते हैं, वहीं कुछ पूर्ण रूप से स्वस्थ और सामान्य पुरुष भी इसका अनुभव नहीं करते।
स्वप्नदोष के दौरान पुरुषों को कामोद्दीपक सपने आ सकते हैं और यह स्तंभन के बिना भी हो सकता है। अधिकतर पुरुषों को सुबह उठने के बाद अपने अंडरवियर या पायजामे में गीला और चिपचिपा पदार्थ देखने को मिलता है, जो कि मूत्र नहीं होता। यह मूत्र से अधिक गाढ़ा होता है। पहली बार इसे देखकर आप आश्चर्यचकित हो जाते हैं, क्योंकि कभी-कभी इसके कारण बिस्तर भी गीला हो जाता है, जिससे आप शर्मिंदगी भी महसूस करते हैं।
वास्तव में ऐसा कामुक सपने देखने के कारण होता है, इसलिए इसे स्वप्नदोष कहा जाता है। स्वप्नदोष अधिकतर रात में आते हैं, इसी कारण इन्हें नाइट फॉल (Nightfall) भी कहते हैं। यह सोते समय ही होता है। स्वप्नदोष एक आम घटना है, जो पुरुषों के जीवनकाल में कई बार होती है।
सोते समय लिंग से वीर्य मुक्त होने की क्रिया को स्वप्नदोष कहते हैं। इसमें लिंग से वीर्य मुक्त होता है। सामान्य रूप से यह सेक्स के सपने देखने के कारण होता है। हालांकि जागने के बाद कई बार वे सपने याद नहीं रहते हैं। स्वप्नदोष के दौरान आप अपने लिंग का स्पर्श तक नहीं करते, जिससे उत्तेजना का अनुभव हो, और यह हस्तमैथुन (Masturbation) से बहुत भिन्न है।
यह सारी करामात आपके मस्तिष्क की होती है और क्योंकि आप सपने में होते हैं, इसलिए इस दौरान यह पहचानना थोड़ा कठिन होता है कि आप सेक्स की वास्तविक स्थिति में हैं या काल्पनिक। स्वप्नदोष अकस्मात् होने वाले उत्सर्जन होते हैं, क्योंकि इन पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता है। कभी-कभी यह लंबे समय से संभोग न करने के फलस्वरूप भी होता है।
सामान्यतः यह उन नौजवानों में अधिक देखने को मिलता है, जो अभी यौन संबंधों में संलग्न नहीं हुए हैं। पुरुषों में स्वप्नदोष किशोरावस्था की शुरुआत के बाद जीवनपर्यन्त होता है।
स्वप्नदोष के स्पष्ट कारण अभी तक अज्ञात हैं। अध्ययनों के अनुसार, जब पुरुष किशोरावस्था में आते हैं, तो उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) का उत्पादन होने लगता है। आपके शरीर में टेस्टोस्टेरोन के बनने का मतलब है कि अब शरीर स्पर्म मुक्त कर सकता है। इसका अर्थ यह है कि आप बच्चे पैदा करने के योग्य हो गए हैं। यदि आप किसी महिला से असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करेंगे, तो वह गर्भवती हो सकती है।
यौवन के दौरान, जब आपके शरीर में वीर्य बन जाता है, तब उसके मुक्त होने का स्वप्नदोष ही एकमात्र ज़रिया होता है।
ऐसा कहा जाता है कि स्वप्नदोष / नाइट फॉल के कारण पुरुषों की आँखों के नीचे काले घेरे बनने लगते हैं। इसके अधिक होने से कमजोरी, तनाव आदि की समस्या होने लगती है। खासकर शादी के बाद के जीवन के बारे में सोचकर पुरुष परेशान होने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो सकती है। इतना ही नहीं, कुछ चिकित्सकों के अनुसार स्वप्नदोष अधिक होने के कारण शीघ्रपतन, नपुंसकता जैसी समस्याएँ भी जन्म ले सकती हैं। इसलिए यदि यह अधिक हो रहा है, तो इसका उचित उपचार कराना चाहिए।
अगर आप हेल्दी सेक्स लाइफ जीना चाहते हैं, तो आपको अपनी लाइफस्टाइल बदलनी होगी। तभी आप स्वप्नदोष या किसी अन्य प्रकार की सेक्स-संबंधी बीमारी / समस्या से बच सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित बातों का पालन करें—
हर दिन कसरत करने की आदत डालें।
हेल्दी फूड्स खाएँ।
सोने से पहले अंतरंग (इंटीमेट) विषयों से संबंधित चीजें न देखें और न ही उनकी चर्चा करें।
हमेशा ढीले (लूज) नाइट ड्रेस पहनें।
रात्रि-परिधान को साफ-सुथरा रखें।
पोर्न की लत न लगाएँ।
रात में अश्लील कहानियाँ न पढ़ें।
स्वप्नदोष कोई चिंताजनक विषय नहीं है। लेकिन इसे रोकने या नियंत्रित करने का कोई निश्चित चिकित्सीय इलाज भी नहीं है। यदि एक बार हस्तमैथुन या यौन संबंध स्थापित करके आप अपना स्पर्म निकाल चुके हैं, तो स्वप्नदोष की प्रक्रिया कुछ कम हो सकती है।
यदि आपको पिछली रात स्वप्नदोष हुआ है, तो सुबह उठकर स्वयं को अच्छी तरह साफ कर लीजिए। सफाई का सबसे अच्छा तरीका है कि आप स्नान कर लें। यदि ऐसा संभव न हो, तो अपने लिंग और वृषण (Testes) को साबुन की सहायता से अच्छी तरह साफ कर लें।
यदि आपको स्वप्नदोष के बारे में शर्मिंदगी या असहजता महसूस होती है अथवा इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो डॉक्टर, अभिभावक, परामर्शदाता या किसी ऐसे वयस्क व्यक्ति से बात करें जिससे आप खुलकर चर्चा कर सकें।
इसके अलावा, जैसा कि हमने ऊपर बताया, स्वप्नदोष का कोई निश्चित चिकित्सीय इलाज नहीं है, लेकिन आप कुछ घरेलू उपायों और स्वस्थ जीवनशैली की सहायता से इसे नियंत्रित कर सकते हैं। नीचे बताए गए उपायों को नियमित रूप से अपनाकर आप स्वप्नदोष की समस्या को कम करने का प्रयास कर सकते हैं।
अश्लील वातावरण में रहना, मस्तिष्क की कमजोरी तथा हर समय सहवास की कल्पना में खोए रहना, शीघ्रपतन का कारण बन सकता है। अधिक गर्म, मिर्च-मसालेदार तथा अम्लीय खाद्य पदार्थों का सेवन, शराब पीना, चाय-कॉफी का अत्यधिक सेवन करना, अश्लील फिल्में देखना तथा अश्लील पुस्तकें पढ़ना भी शीघ्रपतन की समस्या को बढ़ा सकता है।
वीर्य का पतला होना, सहवास के समय स्तंभन-शक्ति का अभाव होना, शीघ्रपतन हो जाना तथा वीर्य का जल्दी निकल जाना इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।
अजवाइन : खुरासानी अजवायन के साथ लगभग आधा ग्राम कपूर मिलाकर गोली बनाकर रात को सोने से पहले खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।
अमरबेल : अमरबेल का रस मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।
असगंध : असगंध एवं विदारीकंद 25-25 ग्राम कूटकर छान लें और 50 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।
असगंध नागौरी : असगंध नागौरी का चूर्ण 1 चम्मच तथा 3 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात को सोते समय खाने से शीघ्रपतन एवं वीर्य संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
असरोल : असरोल तथा धनिया 10-10 ग्राम पीसकर 1 ग्राम की मात्रा में रात्रि को सोते समय पानी के साथ सेवन करें।
आंवला : आंवले का चूर्ण 6 ग्राम तथा मिश्री का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कुछ सप्ताह में स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।
उड़द : अंकुरित उड़द की दाल में मिश्री या शक्कर मिलाकर कम से कम 58 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन खाने से शीघ्रपतन में लाभ होता है। उड़द के बेसन को घी में हल्का भूनकर रख लें। लगभग 50 ग्राम मात्रा में मिश्री मिले दूध के साथ रात्रि में सेवन करने से वीर्य तथा नपुंसकता संबंधी विकारों में लाभ होता है।
कतीरा गोंद : कतीरा गोंद 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो दें। सुबह मिश्री या शक्कर मिलाकर शरबत की तरह सेवन करने से वीर्य की मात्रा, गाढ़ापन तथा स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।
कपूर : लगभग एक ग्राम के चौथे भाग कपूर की गोली खुरासानी अजवायन के साथ सोने से पूर्व लेने से स्वप्नदोष में लाभ होता है। कपूर एवं चीनी को पीसकर फंकी लेने से भी लाभ बताया गया है।
काले तिल : काले तिल 50 ग्राम, अजवायन 25 ग्राम तथा 75 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।
कुलिंजन : लगभग डेढ़ ग्राम कुलिंजन चूर्ण 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटें तथा ऊपर से गाय का दूध पिएँ।
केला : प्रतिदिन 2 केले शहद के साथ खाने से लाभ मिलता है। 2 केले खाकर 250 मिलीलीटर दूध पीने से भी लाभ बताया गया है।
कौंच :
कौंच बीज की गिरी एवं खसखस का चूर्ण 4-6 ग्राम सेवन करें।
कौंच बीज चूर्ण, तालमखाना एवं मिश्री समान मात्रा में लेकर 3-3 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लें।
कौंच की जड़ मुंह में रखकर सहवास करने का उल्लेख मिलता है।
खादिर (कत्था) : खादिर सार 1 ग्राम ठंडे पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष में लाभ बताया गया है।
गिलोय :
गिलोय चूर्ण एवं वंशलोचन समान मात्रा में मिलाकर 2 ग्राम सेवन करें।
गिलोय, गोक्षुर एवं आंवला समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सेवन करें।
गुलकंद : 5 से 10 ग्राम गुलकंद मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
गुलाब : गुलाब की पंखुड़ियों में मिश्री मिलाकर सेवन करने तथा गुलाब शर्बत पीने से लाभ बताया गया है।
गोक्षुर : गोक्षुर, आंवला एवं हरड़ का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ बताया गया है।
चोपचीनी : चोपचीनी चूर्ण, मिश्री और घी समान मात्रा में मिलाकर 7 दिन सेवन करें।
छोटी माई : 2 से 4 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम सेवन करें।
जामुन : जामुन की गुठली का चूर्ण 3-4 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।
तुलसी : तुलसी के बीज या जड़ का काढ़ा नियमित सेवन करने से लाभ बताया गया है।
त्रिफला :
त्रिफला चूर्ण एवं शहद मिलाकर सेवन करें।
4-6 ग्राम त्रिफला चूर्ण दूध के साथ लें।
त्रिफला, गुड़, वच एवं भीमसेनी कपूर की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।
धनिया :
धनिया एवं मिश्री मिलाकर सेवन करें।
सूखा धनिया एवं मिश्री का चूर्ण बनाकर सेवन करें।
धनिया, नीलोफर, कुर्फा, काहू, कासनी आदि का मिश्रण भी उपयोग में लाया जाता है।
नकछिकनी : नकछिकनी, सौंठ एवं बायबिडंग का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।
पिंड खजूर : प्रतिदिन 5 खजूर तथा मिश्री मिला दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होने का उल्लेख मिलता है।
पीपलामूल : पीपलामूल एवं गुड़ की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।
प्याज : सफेद प्याज का रस, अदरक का रस, शहद एवं घी मिलाकर रात्रि में सेवन करें।
फिटकरी : फिटकरी के प्रयोग का उल्लेख मिलता है।
बड़ी गोखरू : बड़ी गोखरू के फांट या घोल का सेवन लाभकारी बताया गया है।
बबूल : बबूल की गोंद या फली का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करें।
बरगद :
बरगद के दूध की बूंदें बताशे पर डालकर सेवन करें।
बरगद की कोपल, गूलर की छाल एवं मिश्री का मिश्रण लें।
बरगद के कच्चे फलों का चूर्ण दूध के साथ लें।
बहुफली : बहुफली चूर्ण 5 ग्राम सुबह पानी के साथ सेवन करें।
बादाम : बादाम, मिश्री, घी एवं गिलोय चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करें।
ब्रह्मदण्डी : ब्रह्मदण्डी एवं बहुफली का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।
मुलेठी : मुलेठी चूर्ण को शहद, घी या मक्खन के साथ लें।
मूसली सिम्बल : मूसली सिम्बल एवं खांड मिलाकर दूध या पानी के साथ लें।
लहसुन : रात्रि में लहसुन की एक कली चबाकर खाने का उल्लेख मिलता है।
लाजवंती : लाजवंती के बीजों का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।
वंशलोचन : वंशलोचन एवं सत गिलोय शहद के साथ लें।
विदारीकंद : विदारीकंद एवं गोखरू का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।
शकरकंद : शकरकंद का हलवा बनाकर सेवन करें।
शतावर :
शतावर, मूसली, विदारीकंद, असगंध, गोखरू आदि का मिश्रण।
शतावरी, असगंध एवं विधारा का चूर्ण खांड के साथ।
शतावरी रस एवं शहद का सेवन।
समुद्रशोष : समुद्रशोष के बीजों का लुआब मिश्री मिलाकर सेवन करें।
सिरस : सिरस के फूलों का रस मिश्री मिले दूध के साथ लें।
हरड़ : हरड़ चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। हरड़ का मुरब्बा भी लाभकारी बताया गया है।
लाइकोपोडियम 200 – कामुक सपनों के साथ होने वाले स्वप्नदोष के लिए प्रभावी मानी जाती है। यह रात में होने वाले वीर्यपात के कारण उत्पन्न कमजोरी और दुर्बलता में भी उपयोगी बताई जाती है।
कैंथरिस 200 – दर्दयुक्त इरेक्शन तथा तीव्र यौन इच्छा के साथ होने वाले स्वप्नदोष में उपयोग की जाने वाली होम्योपैथिक औषधि मानी जाती है।
लाइकोपोडियम क्यू – ईडी (Erectile Dysfunction) और शीघ्रपतन के लिए प्रमुख होम्योपैथिक दवाओं में से एक मानी जाती है। अत्यधिक भोग अथवा अत्यधिक हस्तमैथुन के कारण उत्पन्न स्तंभन शक्ति की कमी या कमजोर इरेक्शन में इसका उपयोग बताया जाता है।
वियोला ट्राईकलर क्यू (Viola Tricolor Q) – अनैच्छिक वीर्य उत्सर्जन के साथ होने वाले स्वप्नदोष में प्रभावी मानी जाती है। विशेष रूप से उन व्यक्तियों में, जिन्हें अश्लील सामग्री देखने के कारण कामुक एवं उत्तेजक सपने आते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रायः नींद में व्यवधान तथा रात में बार-बार जागने की शिकायत भी करते हैं।
नोट : किसी भी दवा या उपचार का प्रयोग करने से पूर्व अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
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