स्वप्नदोष अथवा नाइट फॉल जिससे सबसे अधिक परेशान हैं भारतीय पुरुष



स्वप्नदोष / नाइट फॉल क्यों होता है?

परिचय : बिना संतुष्टि के संभोग करते हुए यदि वीर्य स्खलन हो जाए, तो उसे शीघ्रपतन कहा जाता है।

अपने नाम के विपरीत, स्वप्नदोष कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है, जिसके अंतर्गत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात (स्खलन) हो जाता है। यह महीने में यदि 1 या 2 बार ही हो, तो सामान्य बात कही जा सकती है और यह कहा जा सकता है कि कोई रोग नहीं है। किन्तु यदि यह इससे अधिक बार होता है, तो वीर्य या शुक्र की हानि होती है और व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी का अहसास होता है, क्योंकि यह शुक्र भी रक्त कणों से पैदा होता है। अतः अत्यधिक शुक्र-क्षय व्यक्ति को कमजोर कर देता है।

स्वप्नदोष किशोरावस्था और शुरुआती वयस्क वर्षों के दौरान होने वाली एक सामान्य घटना है, लेकिन यह उत्सर्जन यौवन के बाद किसी भी समय हो सकता है। आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक पुरुष स्वप्नदोष का अनुभव करे। जहाँ अधिकांश पुरुष इसे अनुभव करते हैं, वहीं कुछ पूर्ण रूप से स्वस्थ और सामान्य पुरुष भी इसका अनुभव नहीं करते।

स्वप्नदोष के दौरान पुरुषों को कामोद्दीपक सपने आ सकते हैं और यह स्तंभन के बिना भी हो सकता है। अधिकतर पुरुषों को सुबह उठने के बाद अपने अंडरवियर या पायजामे में गीला और चिपचिपा पदार्थ देखने को मिलता है, जो कि मूत्र नहीं होता। यह मूत्र से अधिक गाढ़ा होता है। पहली बार इसे देखकर आप आश्चर्यचकित हो जाते हैं, क्योंकि कभी-कभी इसके कारण बिस्तर भी गीला हो जाता है, जिससे आप शर्मिंदगी भी महसूस करते हैं।

वास्तव में ऐसा कामुक सपने देखने के कारण होता है, इसलिए इसे स्वप्नदोष कहा जाता है। स्वप्नदोष अधिकतर रात में आते हैं, इसी कारण इन्हें नाइट फॉल (Nightfall) भी कहते हैं। यह सोते समय ही होता है। स्वप्नदोष एक आम घटना है, जो पुरुषों के जीवनकाल में कई बार होती है।

सोते समय लिंग से वीर्य मुक्त होने की क्रिया को स्वप्नदोष कहते हैं। इसमें लिंग से वीर्य मुक्त होता है। सामान्य रूप से यह सेक्स के सपने देखने के कारण होता है। हालांकि जागने के बाद कई बार वे सपने याद नहीं रहते हैं। स्वप्नदोष के दौरान आप अपने लिंग का स्पर्श तक नहीं करते, जिससे उत्तेजना का अनुभव हो, और यह हस्तमैथुन (Masturbation) से बहुत भिन्न है।

यह सारी करामात आपके मस्तिष्क की होती है और क्योंकि आप सपने में होते हैं, इसलिए इस दौरान यह पहचानना थोड़ा कठिन होता है कि आप सेक्स की वास्तविक स्थिति में हैं या काल्पनिक। स्वप्नदोष अकस्मात् होने वाले उत्सर्जन होते हैं, क्योंकि इन पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता है। कभी-कभी यह लंबे समय से संभोग न करने के फलस्वरूप भी होता है।

सामान्यतः यह उन नौजवानों में अधिक देखने को मिलता है, जो अभी यौन संबंधों में संलग्न नहीं हुए हैं। पुरुषों में स्वप्नदोष किशोरावस्था की शुरुआत के बाद जीवनपर्यन्त होता है।

स्वप्नदोष के स्पष्ट कारण अभी तक अज्ञात हैं। अध्ययनों के अनुसार, जब पुरुष किशोरावस्था में आते हैं, तो उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) का उत्पादन होने लगता है। आपके शरीर में टेस्टोस्टेरोन के बनने का मतलब है कि अब शरीर स्पर्म मुक्त कर सकता है। इसका अर्थ यह है कि आप बच्चे पैदा करने के योग्य हो गए हैं। यदि आप किसी महिला से असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करेंगे, तो वह गर्भवती हो सकती है।

यौवन के दौरान, जब आपके शरीर में वीर्य बन जाता है, तब उसके मुक्त होने का स्वप्नदोष ही एकमात्र ज़रिया होता है।



स्वप्नदोष / नाइट फॉल के नुकसान

ऐसा कहा जाता है कि स्वप्नदोष / नाइट फॉल के कारण पुरुषों की आँखों के नीचे काले घेरे बनने लगते हैं। इसके अधिक होने से कमजोरी, तनाव आदि की समस्या होने लगती है। खासकर शादी के बाद के जीवन के बारे में सोचकर पुरुष परेशान होने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो सकती है। इतना ही नहीं, कुछ चिकित्सकों के अनुसार स्वप्नदोष अधिक होने के कारण शीघ्रपतन, नपुंसकता जैसी समस्याएँ भी जन्म ले सकती हैं। इसलिए यदि यह अधिक हो रहा है, तो इसका उचित उपचार कराना चाहिए।

स्वप्नदोष से कैसे बचें?

अगर आप हेल्दी सेक्स लाइफ जीना चाहते हैं, तो आपको अपनी लाइफस्टाइल बदलनी होगी। तभी आप स्वप्नदोष या किसी अन्य प्रकार की सेक्स-संबंधी बीमारी / समस्या से बच सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित बातों का पालन करें—

  1. हर दिन कसरत करने की आदत डालें।

  2. हेल्दी फूड्स खाएँ।

  3. सोने से पहले अंतरंग (इंटीमेट) विषयों से संबंधित चीजें न देखें और न ही उनकी चर्चा करें।

  4. हमेशा ढीले (लूज) नाइट ड्रेस पहनें।

  5. रात्रि-परिधान को साफ-सुथरा रखें।

  6. पोर्न की लत न लगाएँ।

  7. रात में अश्लील कहानियाँ न पढ़ें।

स्वप्नदोष का इलाज

स्वप्नदोष कोई चिंताजनक विषय नहीं है। लेकिन इसे रोकने या नियंत्रित करने का कोई निश्चित चिकित्सीय इलाज भी नहीं है। यदि एक बार हस्तमैथुन या यौन संबंध स्थापित करके आप अपना स्पर्म निकाल चुके हैं, तो स्वप्नदोष की प्रक्रिया कुछ कम हो सकती है।

यदि आपको पिछली रात स्वप्नदोष हुआ है, तो सुबह उठकर स्वयं को अच्छी तरह साफ कर लीजिए। सफाई का सबसे अच्छा तरीका है कि आप स्नान कर लें। यदि ऐसा संभव न हो, तो अपने लिंग और वृषण (Testes) को साबुन की सहायता से अच्छी तरह साफ कर लें।

यदि आपको स्वप्नदोष के बारे में शर्मिंदगी या असहजता महसूस होती है अथवा इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो डॉक्टर, अभिभावक, परामर्शदाता या किसी ऐसे वयस्क व्यक्ति से बात करें जिससे आप खुलकर चर्चा कर सकें।

इसके अलावा, जैसा कि हमने ऊपर बताया, स्वप्नदोष का कोई निश्चित चिकित्सीय इलाज नहीं है, लेकिन आप कुछ घरेलू उपायों और स्वस्थ जीवनशैली की सहायता से इसे नियंत्रित कर सकते हैं। नीचे बताए गए उपायों को नियमित रूप से अपनाकर आप स्वप्नदोष की समस्या को कम करने का प्रयास कर सकते हैं।

कारण

अश्लील वातावरण में रहना, मस्तिष्क की कमजोरी तथा हर समय सहवास की कल्पना में खोए रहना, शीघ्रपतन का कारण बन सकता है। अधिक गर्म, मिर्च-मसालेदार तथा अम्लीय खाद्य पदार्थों का सेवन, शराब पीना, चाय-कॉफी का अत्यधिक सेवन करना, अश्लील फिल्में देखना तथा अश्लील पुस्तकें पढ़ना भी शीघ्रपतन की समस्या को बढ़ा सकता है।

लक्षण

वीर्य का पतला होना, सहवास के समय स्तंभन-शक्ति का अभाव होना, शीघ्रपतन हो जाना तथा वीर्य का जल्दी निकल जाना इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।


विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार

अजवाइन : खुरासानी अजवायन के साथ लगभग आधा ग्राम कपूर मिलाकर गोली बनाकर रात को सोने से पहले खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

अमरबेल : अमरबेल का रस मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।

असगंध : असगंध एवं विदारीकंद 25-25 ग्राम कूटकर छान लें और 50 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

असगंध नागौरी : असगंध नागौरी का चूर्ण 1 चम्मच तथा 3 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात को सोते समय खाने से शीघ्रपतन एवं वीर्य संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।

असरोल : असरोल तथा धनिया 10-10 ग्राम पीसकर 1 ग्राम की मात्रा में रात्रि को सोते समय पानी के साथ सेवन करें।

आंवला : आंवले का चूर्ण 6 ग्राम तथा मिश्री का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कुछ सप्ताह में स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।

उड़द : अंकुरित उड़द की दाल में मिश्री या शक्कर मिलाकर कम से कम 58 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन खाने से शीघ्रपतन में लाभ होता है। उड़द के बेसन को घी में हल्का भूनकर रख लें। लगभग 50 ग्राम मात्रा में मिश्री मिले दूध के साथ रात्रि में सेवन करने से वीर्य तथा नपुंसकता संबंधी विकारों में लाभ होता है।

कतीरा गोंद : कतीरा गोंद 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो दें। सुबह मिश्री या शक्कर मिलाकर शरबत की तरह सेवन करने से वीर्य की मात्रा, गाढ़ापन तथा स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।

कपूर : लगभग एक ग्राम के चौथे भाग कपूर की गोली खुरासानी अजवायन के साथ सोने से पूर्व लेने से स्वप्नदोष में लाभ होता है। कपूर एवं चीनी को पीसकर फंकी लेने से भी लाभ बताया गया है।

काले तिल : काले तिल 50 ग्राम, अजवायन 25 ग्राम तथा 75 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।

कुलिंजन : लगभग डेढ़ ग्राम कुलिंजन चूर्ण 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटें तथा ऊपर से गाय का दूध पिएँ।

केला : प्रतिदिन 2 केले शहद के साथ खाने से लाभ मिलता है। 2 केले खाकर 250 मिलीलीटर दूध पीने से भी लाभ बताया गया है।

कौंच :

  1. कौंच बीज की गिरी एवं खसखस का चूर्ण 4-6 ग्राम सेवन करें।

  2. कौंच बीज चूर्ण, तालमखाना एवं मिश्री समान मात्रा में लेकर 3-3 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लें।

  3. कौंच की जड़ मुंह में रखकर सहवास करने का उल्लेख मिलता है।

खादिर (कत्था) : खादिर सार 1 ग्राम ठंडे पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष में लाभ बताया गया है।

गिलोय :

  1. गिलोय चूर्ण एवं वंशलोचन समान मात्रा में मिलाकर 2 ग्राम सेवन करें।

  2. गिलोय, गोक्षुर एवं आंवला समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सेवन करें।

गुलकंद : 5 से 10 ग्राम गुलकंद मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

गुलाब : गुलाब की पंखुड़ियों में मिश्री मिलाकर सेवन करने तथा गुलाब शर्बत पीने से लाभ बताया गया है।

गोक्षुर : गोक्षुर, आंवला एवं हरड़ का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ बताया गया है।

चोपचीनी : चोपचीनी चूर्ण, मिश्री और घी समान मात्रा में मिलाकर 7 दिन सेवन करें।

छोटी माई : 2 से 4 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम सेवन करें।

जामुन : जामुन की गुठली का चूर्ण 3-4 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।

तुलसी : तुलसी के बीज या जड़ का काढ़ा नियमित सेवन करने से लाभ बताया गया है।

त्रिफला :

  1. त्रिफला चूर्ण एवं शहद मिलाकर सेवन करें।

  2. 4-6 ग्राम त्रिफला चूर्ण दूध के साथ लें।

  3. त्रिफला, गुड़, वच एवं भीमसेनी कपूर की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।

धनिया :

  1. धनिया एवं मिश्री मिलाकर सेवन करें।

  2. सूखा धनिया एवं मिश्री का चूर्ण बनाकर सेवन करें।

  3. धनिया, नीलोफर, कुर्फा, काहू, कासनी आदि का मिश्रण भी उपयोग में लाया जाता है।

नकछिकनी : नकछिकनी, सौंठ एवं बायबिडंग का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।

पिंड खजूर : प्रतिदिन 5 खजूर तथा मिश्री मिला दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होने का उल्लेख मिलता है।

पीपलामूल : पीपलामूल एवं गुड़ की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।

प्याज : सफेद प्याज का रस, अदरक का रस, शहद एवं घी मिलाकर रात्रि में सेवन करें।

फिटकरी : फिटकरी के प्रयोग का उल्लेख मिलता है।

बड़ी गोखरू : बड़ी गोखरू के फांट या घोल का सेवन लाभकारी बताया गया है।

बबूल : बबूल की गोंद या फली का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करें।

बरगद :

  1. बरगद के दूध की बूंदें बताशे पर डालकर सेवन करें।

  2. बरगद की कोपल, गूलर की छाल एवं मिश्री का मिश्रण लें।

  3. बरगद के कच्चे फलों का चूर्ण दूध के साथ लें।

बहुफली : बहुफली चूर्ण 5 ग्राम सुबह पानी के साथ सेवन करें।

बादाम : बादाम, मिश्री, घी एवं गिलोय चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करें।

ब्रह्मदण्डी : ब्रह्मदण्डी एवं बहुफली का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।

मुलेठी : मुलेठी चूर्ण को शहद, घी या मक्खन के साथ लें।

मूसली सिम्बल : मूसली सिम्बल एवं खांड मिलाकर दूध या पानी के साथ लें।

लहसुन : रात्रि में लहसुन की एक कली चबाकर खाने का उल्लेख मिलता है।

लाजवंती : लाजवंती के बीजों का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।

वंशलोचन : वंशलोचन एवं सत गिलोय शहद के साथ लें।

विदारीकंद : विदारीकंद एवं गोखरू का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।

शकरकंद : शकरकंद का हलवा बनाकर सेवन करें।

शतावर :

  1. शतावर, मूसली, विदारीकंद, असगंध, गोखरू आदि का मिश्रण।

  2. शतावरी, असगंध एवं विधारा का चूर्ण खांड के साथ।

  3. शतावरी रस एवं शहद का सेवन।

समुद्रशोष : समुद्रशोष के बीजों का लुआब मिश्री मिलाकर सेवन करें।

सिरस : सिरस के फूलों का रस मिश्री मिले दूध के साथ लें।

हरड़ : हरड़ चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। हरड़ का मुरब्बा भी लाभकारी बताया गया है।

स्वप्नदोष की होम्योपैथी दवाएं और उनके कार्य करने का तरीका

लाइकोपोडियम 200 – कामुक सपनों के साथ होने वाले स्वप्नदोष के लिए प्रभावी मानी जाती है। यह रात में होने वाले वीर्यपात के कारण उत्पन्न कमजोरी और दुर्बलता में भी उपयोगी बताई जाती है।

कैंथरिस 200 – दर्दयुक्त इरेक्शन तथा तीव्र यौन इच्छा के साथ होने वाले स्वप्नदोष में उपयोग की जाने वाली होम्योपैथिक औषधि मानी जाती है।

लाइकोपोडियम क्यू – ईडी (Erectile Dysfunction) और शीघ्रपतन के लिए प्रमुख होम्योपैथिक दवाओं में से एक मानी जाती है। अत्यधिक भोग अथवा अत्यधिक हस्तमैथुन के कारण उत्पन्न स्तंभन शक्ति की कमी या कमजोर इरेक्शन में इसका उपयोग बताया जाता है।

वियोला ट्राईकलर क्यू (Viola Tricolor Q) – अनैच्छिक वीर्य उत्सर्जन के साथ होने वाले स्वप्नदोष में प्रभावी मानी जाती है। विशेष रूप से उन व्यक्तियों में, जिन्हें अश्लील सामग्री देखने के कारण कामुक एवं उत्तेजक सपने आते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रायः नींद में व्यवधान तथा रात में बार-बार जागने की शिकायत भी करते हैं।

नोट : किसी भी दवा या उपचार का प्रयोग करने से पूर्व अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

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गौ भक्त संत माधवदास



संत माधवदास का जन्म वि० सं० 1601 में कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को सूरत के सौदागरगंज में हुआ था। इनके पिता का नाम करवत सिंह और माता का नाम हिरल देवी था। इनके पूर्वज मेवाड़ के केलवाड़ा नामक परगना के निवासी थे और प्रसिद्ध सिसोदिया वंश के सूर्यवंशी क्षत्रिय थे।
Gau Mata

बाल्यावस्था में माधवदास जी की मुखाकृति देखकर एक अवधूत महात्मा ने उनके पिता से कहा था कि यह बालक कोई महान् दिव्यात्मा होगा। ये बचपन से ही बड़ी उदार वृत्ति के थे और दरवाजे पर आये भिक्षुक को निराश नहीं जाने देते थे। जब ये मात्र पाँच वर्ष के ही थे, तभी इनके पिता का देहांत हो गया था। अतः इनका पालन-पोषण इनकी माता ने ही हुआ। माता ने इन्हें अच्छा विद्याभ्यास तो कराया ही, एक राजपूत वीर के लायक शस्त्रास्त्र की योग्यता भी इन्हें बचपन में ही प्राप्त हो गयी थी ।
एक बार ये भ्रमण करते हुए अहमदाबाद के पास पहुँचे। वहाँ इन्होंने देखा कि कुछ मुसलमान ग्वालों से उनकी गायें छीनकर ले जा रहे हैं। ईद का त्यौहार था और हाकिम की आज्ञा थी, इसलिए कोई कुछ बोल भी नहीं सकता था। पचास मुसलमान सैनिकों की एक टुकड़ी गायों को घेर कर लेकर चल दी, मुसलमानी शासन में ग्वाले भला रोने के अतिरिक्त और कर ही क्या सकते थे? गाय रंभा रही थीं, चाबुक की मार खा रही थीं, उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बह रही थी। यह सब माधवदास जी से देखा न गया। उनका राजपूती रक्त उबल पड़ा। वे तलवार लेकर उन पर टूट पड़े। एक तरफ अकेले माधवदास और दूसरी ओर पचास सैनिक! पर सिंह सिंह होता है, मांसलोभी सैकड़ों सियारों का झुंड उस की एक दहाड़ और भाग खड़ा होता है।
माधवदास में सत्साहस था, गौमाता के प्रति प्रेम था, उधर सैनिकों में था सत्ता का अभिमान। माधवदास ने उन यवन सिपाहियों को गाजर-मूली की तरह काटना प्रारम्भ किया। सिपाहियों की जान पर बन आयी। कुछ तो मारे गये और कुछ भाग गये। सिसोदिया वंश के उस वीर ने सब गायें छुड़ा ली और रोते हुए ग्वालों के सुपुर्द कर दी।
माता की प्रेरणा से माधवदास जी ने सद्गुरु की शरण ली। वे समर्थदास नामक एक योगी के शिष्य हो गये। संत माधव दास जी सच्चे संत थे, उनका अधिकांश समय तीर्थाटन में ही बीतता था। गौमाता के प्रति उनकी अद्भुत भक्ति थी। उन्होंने दिल्ली के शाही कसाई खाने के जल्लाद हाशम को अपने उपदेश से भगवान की भक्ति में लगा दिया। मुलतान के मुस्लिम सूबेदार ने उन्हें तरह तरह से प्रताड़नाएं देने की कोशिश की, परंतु माधवदास जी सिद्ध संत थे, वह उनका बाल भी बाँका न कर सका और अंत में उनके चरणों में गिरकर क्षमा याचना की और भविष्य में किसी को न सताने की कसम खाई।
वि० सं० 1652 में आप इस नश्वर शरीर को त्याग कर अविनाशी परब्रह्म प्रभु के स्वरूप में अवस्थित हो गये। धन्य हैं ऐसे संत रत्न और गौ भक्त माधवदास जी और धन्य है भारत-धरा ऐसे सपूत को प्राप्त करके।


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प्रेरक प्रसंग - सच्ची कृपा



एक निर्धन ब्राह्मण के मन में धन पाने की तीव्र कामना हुई। वह सकाम यज्ञ की विधि जानता था, किंतु धन ही नहीं तो यज्ञ कैसे हो? वह धन की प्राप्ति के लिये देवताओं की पूजा और व्रत करने लगा। कुछ समय एक देवता की पूजा करता, परंतु उससे कुछ लाभ नहीं दिखायी पड़ता तो दूसरे देवता की पूजा करने लगता और पहले को छोड़ देता। इस प्रकार उसे बहुत दिन बीत गये। अंत में उसने सोचा-'जिस देवता की आराधना मनुष्य ने कभी न की हो, मैं अब उसी की उपासना करूँगा। वह देवता अवश्य मुझपर शीघ्र प्रसन्न होगा।'


ब्राह्मण यह सोच ही रहा था कि उसे आकाश में कुण्डधार नामक मेघ के देवता का प्रत्यक्ष दर्शन हुआ। ब्राह्मण ने समझ लिया कि 'मनुष्य ने कभी इनकी पूजा न की होगी। ये बृहदाकार मेघ देवता देव लोक के समीप रहते हैं, अवश्य ये मुझे धन देंगे।' बस, बड़ी श्रद्धा-भक्ति से ब्राह्मण ने उस कुंड धार मेघ की पूजा प्रारम्भ कर दी।

ब्राह्मण की पूजा से प्रसन्न होकर कुण्डधारने देवताओं की स्तुति की, क्योंकि वह स्वयं तो जल के अतिरिक्त किसी को कुछ दे नहीं सकता था। देवताओं की प्रेरणा से यक्ष श्रेष्ठ मणिभद्र उसके पास आकर बोले-'कुंड धार! तुम क्या चाहते हो?'

कुण्डधार - 'यक्षराज! देवता यदि मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे उपासक इस ब्राह्मण को वे सुखी करें।'

मणिभद्र-'तुम्हारा भक्त यह ब्राह्मण यदि धन चाहता हो तो इसकी इच्छा पूर्ण कर दो। यह जितना धन माँगेगा, वह मैं इसे दे दूंगा।'

कुण्डधार - 'यक्षराज! मैं इस ब्राह्मण के लिये धन की प्रार्थना नहीं करता। मैं चाहता हूँ कि देवताओं की कृपा से यह धर्मपरायण हो जाए। इसकी बुद्धि धर्म में लगे।'

मणिभद्र-'अच्छी बात ! अब ब्राह्मण की बुद्धि धर्म में ही स्थित रहेगी।' उसी समय ब्राह्मण ने स्वप्न में देखा कि उसके चारों ओर कफन पड़ा हुआ है। यह देखकर उसके । हृदय में वैराग्य उत्पन्न हुआ।वह सोचने लगा - 'मैंने इतने । देवताओं की और अंत में कुण्डधार मेघ की भी धन के लिये आराधना की, किंतु इनमें कोई उदार नहीं दिखता। इस प्रकार धन की आस में ही लगे हुए जीवन व्यतीत करने से । क्या लाभ! अब मुझे परलोक की चिंता करनी चाहिये।'

ब्राह्मण वहां से वन में चला गया। उसने अब तपस्या करना प्रारम्भ किया। दीर्घकाल तक कठोर तपस्या करने के कारण उसे अद्भुत सिद्धि प्राप्त हुई। वह स्वयं आश्चर्य करने लगा-'कहाँ तो मैं धन के लिये देवताओं की पूजा करता था और उसका कोई परिणाम नहीं होता था और कहाँ अब मैं स्वयं ऐसा हो गया कि किसी को धनी होने का आशीर्वाद दे दूँ तो वह नि:संदेह धनी हो जाएगा!'

ब्राह्मण का उत्साह बढ़ गया। तपस्या में ही उसकी श्रद्धा बढ़ गयी। वह तत्परतापूर्वक तपस्या में ही लगा रहा। एक दिन उसके पास वही कुण्डधार मेघ आया। उसने कहा ब्रह्मन् ! तपस्या के प्रभाव से आपको दिव्य दृष्टि प्राप्त हो गयी है। अब आप धनी पुरुषों तथा राजाओं की गति देख सकते हैं।' ब्राह्मण ने देखा कि धन के कारण गर्व से आकर लोग नाना प्रकार के पाप करते हैं और घोर नरक में गिरते हैं।

कुण्डधार बोला-'भक्तिपूर्वक मेरी पूजा करके आप यदि धन पाते और अंत में नरक की यातना भोगते तो मुझसे आपको क्या लाभ होता? जीव का लाभ तो कामनाओं का त्याग करके धर्माचरण करने में ही है। उन पर सच्ची कृपा तो उन्हें धर्म में लगाना ही है। उन्हें धर्म में लगाने वाला ही उनका सच्चा हितैषी है।'

ब्राह्मण ने मेघ के प्रति कृतज्ञता प्रकट की और कामनाओं का त्याग करके अंत में मुक्त हो गया।

(महाभारत के शान्तिपर्व से)


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