विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार
अजवाइन : खुरासानी अजवायन के साथ लगभग आधा ग्राम कपूर मिलाकर गोली बनाकर रात को सोने से पहले खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।
अमरबेल : अमरबेल का रस मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।
असगंध : असगंध एवं विदारीकंद 25-25 ग्राम कूटकर छान लें और 50 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।
असगंध नागौरी : असगंध नागौरी का चूर्ण 1 चम्मच तथा 3 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात को सोते समय खाने से शीघ्रपतन एवं वीर्य संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।
असरोल : असरोल तथा धनिया 10-10 ग्राम पीसकर 1 ग्राम की मात्रा में रात्रि को सोते समय पानी के साथ सेवन करें।
आंवला : आंवले का चूर्ण 6 ग्राम तथा मिश्री का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कुछ सप्ताह में स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।
उड़द : अंकुरित उड़द की दाल में मिश्री या शक्कर मिलाकर कम से कम 58 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन खाने से शीघ्रपतन में लाभ होता है। उड़द के बेसन को घी में हल्का भूनकर रख लें। लगभग 50 ग्राम मात्रा में मिश्री मिले दूध के साथ रात्रि में सेवन करने से वीर्य तथा नपुंसकता संबंधी विकारों में लाभ होता है।
कतीरा गोंद : कतीरा गोंद 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो दें। सुबह मिश्री या शक्कर मिलाकर शरबत की तरह सेवन करने से वीर्य की मात्रा, गाढ़ापन तथा स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।
कपूर : लगभग एक ग्राम के चौथे भाग कपूर की गोली खुरासानी अजवायन के साथ सोने से पूर्व लेने से स्वप्नदोष में लाभ होता है। कपूर एवं चीनी को पीसकर फंकी लेने से भी लाभ बताया गया है।
काले तिल : काले तिल 50 ग्राम, अजवायन 25 ग्राम तथा 75 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।
कुलिंजन : लगभग डेढ़ ग्राम कुलिंजन चूर्ण 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटें तथा ऊपर से गाय का दूध पिएँ।
केला : प्रतिदिन 2 केले शहद के साथ खाने से लाभ मिलता है। 2 केले खाकर 250 मिलीलीटर दूध पीने से भी लाभ बताया गया है।
कौंच :
कौंच बीज की गिरी एवं खसखस का चूर्ण 4-6 ग्राम सेवन करें।
कौंच बीज चूर्ण, तालमखाना एवं मिश्री समान मात्रा में लेकर 3-3 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लें।
कौंच की जड़ मुंह में रखकर सहवास करने का उल्लेख मिलता है।
खादिर (कत्था) : खादिर सार 1 ग्राम ठंडे पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष में लाभ बताया गया है।
गिलोय :
गिलोय चूर्ण एवं वंशलोचन समान मात्रा में मिलाकर 2 ग्राम सेवन करें।
गिलोय, गोक्षुर एवं आंवला समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सेवन करें।
गुलकंद : 5 से 10 ग्राम गुलकंद मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें।
गुलाब : गुलाब की पंखुड़ियों में मिश्री मिलाकर सेवन करने तथा गुलाब शर्बत पीने से लाभ बताया गया है।
गोक्षुर : गोक्षुर, आंवला एवं हरड़ का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ बताया गया है।
चोपचीनी : चोपचीनी चूर्ण, मिश्री और घी समान मात्रा में मिलाकर 7 दिन सेवन करें।
छोटी माई : 2 से 4 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम सेवन करें।
जामुन : जामुन की गुठली का चूर्ण 3-4 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।
तुलसी : तुलसी के बीज या जड़ का काढ़ा नियमित सेवन करने से लाभ बताया गया है।
त्रिफला :
त्रिफला चूर्ण एवं शहद मिलाकर सेवन करें।
4-6 ग्राम त्रिफला चूर्ण दूध के साथ लें।
त्रिफला, गुड़, वच एवं भीमसेनी कपूर की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।
धनिया :
धनिया एवं मिश्री मिलाकर सेवन करें।
सूखा धनिया एवं मिश्री का चूर्ण बनाकर सेवन करें।
धनिया, नीलोफर, कुर्फा, काहू, कासनी आदि का मिश्रण भी उपयोग में लाया जाता है।
नकछिकनी : नकछिकनी, सौंठ एवं बायबिडंग का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।
पिंड खजूर : प्रतिदिन 5 खजूर तथा मिश्री मिला दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होने का उल्लेख मिलता है।
पीपलामूल : पीपलामूल एवं गुड़ की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।
प्याज : सफेद प्याज का रस, अदरक का रस, शहद एवं घी मिलाकर रात्रि में सेवन करें।
फिटकरी : फिटकरी के प्रयोग का उल्लेख मिलता है।
बड़ी गोखरू : बड़ी गोखरू के फांट या घोल का सेवन लाभकारी बताया गया है।
बबूल : बबूल की गोंद या फली का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करें।
बरगद :
बरगद के दूध की बूंदें बताशे पर डालकर सेवन करें।
बरगद की कोपल, गूलर की छाल एवं मिश्री का मिश्रण लें।
बरगद के कच्चे फलों का चूर्ण दूध के साथ लें।
बहुफली : बहुफली चूर्ण 5 ग्राम सुबह पानी के साथ सेवन करें।
बादाम : बादाम, मिश्री, घी एवं गिलोय चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करें।
ब्रह्मदण्डी : ब्रह्मदण्डी एवं बहुफली का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।
मुलेठी : मुलेठी चूर्ण को शहद, घी या मक्खन के साथ लें।
मूसली सिम्बल : मूसली सिम्बल एवं खांड मिलाकर दूध या पानी के साथ लें।
लहसुन : रात्रि में लहसुन की एक कली चबाकर खाने का उल्लेख मिलता है।
लाजवंती : लाजवंती के बीजों का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।
वंशलोचन : वंशलोचन एवं सत गिलोय शहद के साथ लें।
विदारीकंद : विदारीकंद एवं गोखरू का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।
शकरकंद : शकरकंद का हलवा बनाकर सेवन करें।
शतावर :
शतावर, मूसली, विदारीकंद, असगंध, गोखरू आदि का मिश्रण।
शतावरी, असगंध एवं विधारा का चूर्ण खांड के साथ।
शतावरी रस एवं शहद का सेवन।
समुद्रशोष : समुद्रशोष के बीजों का लुआब मिश्री मिलाकर सेवन करें।
सिरस : सिरस के फूलों का रस मिश्री मिले दूध के साथ लें।
हरड़ : हरड़ चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। हरड़ का मुरब्बा भी लाभकारी बताया गया है।
स्वप्नदोष की होम्योपैथी दवाएं और उनके कार्य करने का तरीका
लाइकोपोडियम 200 – कामुक सपनों के साथ होने वाले स्वप्नदोष के लिए प्रभावी मानी जाती है। यह रात में होने वाले वीर्यपात के कारण उत्पन्न कमजोरी और दुर्बलता में भी उपयोगी बताई जाती है।
कैंथरिस 200 – दर्दयुक्त इरेक्शन तथा तीव्र यौन इच्छा के साथ होने वाले स्वप्नदोष में उपयोग की जाने वाली होम्योपैथिक औषधि मानी जाती है।
लाइकोपोडियम क्यू – ईडी (Erectile Dysfunction) और शीघ्रपतन के लिए प्रमुख होम्योपैथिक दवाओं में से एक मानी जाती है। अत्यधिक भोग अथवा अत्यधिक हस्तमैथुन के कारण उत्पन्न स्तंभन शक्ति की कमी या कमजोर इरेक्शन में इसका उपयोग बताया जाता है।
वियोला ट्राईकलर क्यू (Viola Tricolor Q) – अनैच्छिक वीर्य उत्सर्जन के साथ होने वाले स्वप्नदोष में प्रभावी मानी जाती है। विशेष रूप से उन व्यक्तियों में, जिन्हें अश्लील सामग्री देखने के कारण कामुक एवं उत्तेजक सपने आते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रायः नींद में व्यवधान तथा रात में बार-बार जागने की शिकायत भी करते हैं।
नोट : किसी भी दवा या उपचार का प्रयोग करने से पूर्व अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।
Tag – स्वप्नदोष की रामबाण दवा, पतंजलि नाइट फॉल मेडिसिन, Nightfall Hindi Meaning, नाइट फॉल की दवा घरेलू, नाइट फॉल के नुकसान, नाइट फॉल इंग्लिश मेडिसिन, स्वप्नदोष के लक्षण, स्वप्नदोष की सबसे अच्छी दवा।