लंगोट पहनने के फायदे और लाभ



जब भी लंगोट का नाम आता है, तो मन में सबसे पहले हनुमान जी का स्मरण होता है, क्योंकि उन्हें सदैव लंगोट धारण किए हुए चित्रित किया जाता है। लंगोट साधकों का भी प्रतीक माना जाता है, क्योंकि प्राचीन काल में अनेक साधु-संत साधना के समय अपने शरीर पर लंगोट के अतिरिक्त कोई अन्य वस्त्र धारण नहीं करते थे। ऐसे साधक आज भी कहीं-कहीं देखने को मिल जाते हैं।

इसके अतिरिक्त, लंगोट ब्रह्मचर्य का भी प्रतीक माना जाता है, क्योंकि यह विश्वास किया जाता है कि जो व्यक्ति लंगोट धारण करता है, उसका अपनी कामेच्छा और इंद्रियों पर अधिक नियंत्रण रहता है।

लंगोट त्रिकोणाकार आकार का एक अंतःवस्त्र है, जिसे प्रायः कुश्ती करने वाले पहलवान तथा व्यायाम करने वाले व्यक्ति अपने अभ्यास के दौरान पहनते हैं। अभ्यास के समय यह शरीर के गुप्त अंगों को ढके रखने के साथ-साथ उन्हें चोट से भी सुरक्षित रखता है। इसके अतिरिक्त भी लंगोट की अनेक विशेषताएँ बताई जाती हैं।

लंगोट में किसी विशेष रंग को अनिवार्य नहीं माना जाता, किंतु लाल रंग का लंगोट विशेष रूप से लोकप्रिय है। इसके पीछे लोगों के अपने-अपने मत हैं। कोई इसे आस्था से जोड़ता है, तो कोई इसे चिकित्सा-शास्त्र से संबंधित मानता है।

पूर्वकाल में अनेक लोग और साधु ब्रह्मचर्य का पालन करते थे, जिसके कारण वे सदैव लंगोट धारण किए रहते थे। उनका मानना था कि लंगोट कामेच्छा पर नियंत्रण बनाए रखने में सहायक होता है।

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अक्सर आपने पहलवानों को लंगोट पहने हुए देखा होगा, जो अखाड़े में अभ्यास या कुश्ती करते हैं। अखाड़े में जाने वाले लोग लंगोट पहनना आवश्यक मानते हैं। लंगोट भारतीय पुरुषों द्वारा लंगोटी अथवा अंतःवस्त्र के रूप में पहना जाने वाला एक पारंपरिक वस्त्र है। मलयालम भाषा में इसे "लैंकोटी" या "लंगोटी" कहा जाता है। लंगोट को "कौपीन" भी कहा जाता है।

अब केवल अखाड़ों में ही नहीं, बल्कि कुछ जिमों में भी कठिन व्यायाम और जटिल वर्कआउट के दौरान लंगोट पहनना आवश्यक माना जाने लगा है। आइए जानते हैं कि लंगोट पहनना पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए कितना महत्वपूर्ण माना जाता है।

अखाड़े में व्यायाम या कुश्ती के समय पुरुष लंगोट अवश्य पहनते हैं। लंगोट कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि वैदिक काल से ही हमारे देश में पुरुष इसे अंतःवस्त्र के रूप में धारण करते आ रहे हैं। समय के साथ पुरुषों का यह पारंपरिक अंतःवस्त्र मुख्यतः अखाड़ों, योगाभ्यास और पारंपरिक व्यायाम तक सीमित होकर रह गया है।

लंगोट को विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे—कौपीनम्, कौपीन, लंकौटी, लंगौटी और लंगोट। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अंतःवस्त्र के रूप में लंगोट पहनना पुरुषों के जननांगों के लिए लाभकारी माना जाता रहा है। इतना ही नहीं, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह यौन स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

हालाँकि, इन मान्यताओं के संबंध में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के निष्कर्ष भिन्न हो सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है।

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लंगोट का संबंध केवल परंपरा, अखाड़ों और व्यायाम से ही नहीं, बल्कि पुरुषों के स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लंगोट पहनना पुरुषों के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके प्रजनन स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही कारण है कि प्राचीन काल से पहलवान, साधक और व्यायाम करने वाले लोग लंगोट धारण करते रहे हैं।

आपने अक्सर अखाड़ों में जाने वाले पहलवानों को लंगोट पहने देखा होगा। उनके लिए लंगोट केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि व्यायाम और अनुशासन का आवश्यक अंग माना जाता है। लंगोट व्यायाम के दौरान शरीर के संवेदनशील अंगों को सहारा प्रदान करता है तथा उन्हें अनावश्यक झटकों और चोटों से बचाने में सहायक माना जाता है।

इसी कारण आज भी कुछ जिमों और पारंपरिक व्यायाम केंद्रों में कठिन एवं जटिल वर्कआउट के दौरान लंगोट पहनने की सलाह दी जाती है, जबकि कुछ स्थानों पर इसे अनिवार्य भी किया गया है। पारंपरिक दृष्टिकोण से यह माना जाता है कि लंगोट पहनने से शरीर में स्थिरता बनी रहती है और पुरुषों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि नियमित रूप से लंगोट धारण करने से पुरुषों के यौन स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन को लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस संबंध में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के निष्कर्ष अलग हो सकते हैं। इसलिए स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है।

आइए जानें कि परंपरागत मान्यताओं और व्यायाम पद्धतियों में लंगोट को पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है।

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अन्तःवस्त्र के रूप में लंगोट को पारंपरिक रूप से ऊर्जा-संरक्षण और शारीरिक सुरक्षा का साधन माना गया है। लंगोट बाँधने का सबसे बड़ा लाभ अंडकोश (टेस्टिकल्स) को सहारा और सुरक्षा प्रदान करना माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार अत्यधिक शारीरिक श्रम या भारी व्यायाम के कारण कभी-कभी अंडकोशों में सूजन आ सकती है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में "पानी भर जाना" भी कहा जाता है। माना जाता है कि लंगोट अंडकोशों को उचित सहारा देकर ऐसी समस्याओं की संभावना को कम करने में सहायक होता है।

इसके अतिरिक्त लंगोट निचले उदर (लोअर एब्डॉमेन) की मांसपेशियों को भी सहारा प्रदान करता है। जिन लोगों को भारी व्यायाम या कठिन शारीरिक श्रम के कारण पेट के निचले हिस्से में तनाव अथवा सूजन की शिकायत रहती है, उनके लिए भी इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है।

दौड़ते समय भी लंगोट पहनने की परंपरा रही है, क्योंकि यह शरीर के संवेदनशील अंगों को स्थिरता प्रदान करता है और अनावश्यक झटकों से बचाने में सहायक माना जाता है। इसी कारण पहलवान, व्यायामकर्ता और अखाड़ों में अभ्यास करने वाले लोग लंबे समय से इसका उपयोग करते आ रहे हैं।

यद्यपि लंगोट किसी भी रंग का हो सकता है, फिर भी लाल रंग का लंगोट विशेष रूप से लोकप्रिय माना जाता है। पारंपरिक दृष्टि से लाल रंग अनुशासन, शक्ति और उत्साह का प्रतीक माना जाता है। यह रंग भगवान हनुमान से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। अधिकांश अखाड़ों में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होती है और वहाँ लाल रंग का विशेष महत्व होता है। इसी कारण अनेक पहलवान और साधक लाल रंग का लंगोट धारण करना पसंद करते हैं।

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जिस प्रकार हमारे पूर्वज लंगोट का उपयोग करते थे, उसे देखकर कहा जा सकता है कि लंगोट हमारी परंपराओं का एक महत्वपूर्ण अंग है। किंतु आज की पीढ़ी को हमारे पुराने रीति-रिवाजों और परंपराओं के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप वे इन बातों से वंचित रह जाते हैं।

हमारी वर्तमान पीढ़ी को लंगोट के महत्व के बारे में बहुत कम जानकारी है और यही कारण है कि हम अपनी पारंपरिक धरोहर को धीरे-धीरे पीछे छोड़ते जा रहे हैं। इसका प्रभाव भविष्य में हमारी सांस्कृतिक पहचान पर पड़ सकता है।

मांगलिक कार्यों, विशेषकर रामचरितमानस के अखंड पाठ, विभिन्न यज्ञों, महायज्ञों तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में जो ध्वज स्थापित किया जाता है, उसका आकार प्रायः लंगोट के समान माना जाता है। इसे ब्रह्मचर्य, संयम और ऊर्जा-संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। इस प्रकार यह आत्मसंयम और शक्ति-संचय का संदेश देता है।

कुल मिलाकर, लंगोट को ऊर्जा-संरक्षण और अनुशासन का प्रतीक-चिह्न माना गया है। आज भी बाल-ब्रह्मचारी हनुमान जी सहित अनेक देवी-देवताओं को लंगोट अर्पित किया जाता है। अनेक स्थानों पर मनोकामना पूर्ण होने पर लंगोट चढ़ाने की परंपरा आज भी जीवित है और श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है।

वाराणसी घाट पर लंगोट पहना हुआ व्‍यक्ति
वाराणसी घाट पर लंगोट पहना हुआ व्‍यक्ति

क्या है लंगोट?

लंगोट वास्तव में पुरुषों का एक अंडरगारमेंट (अंतःवस्त्र) है। इसे पुरुषों का पारंपरिक अंतःवस्त्र भी कहा जाता है। यह बिना सिला हुआ (Unstitched) त्रिकोणाकार कपड़ा होता है, जिसे विशेष रूप से पुरुष जननांगों, अर्थात् अंडकोष (टेस्टिकल्स) और लिंग (पेनिस) को ढकने एवं सहारा देने के लिए बनाया जाता है। इसे बाँधने का एक विशेष तरीका होता है, जिसके कारण इसे पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

लंगोट का अर्थ

लंगोट शब्द को परंपरागत रूप से दो भागों में समझाया जाता है—

लंगोट = लं + गोट

अर्थात् जो "लं" और "गोट" दोनों को संभालकर रखे तथा उनकी रक्षा करे, उसे लंगोट कहा जाता है। यह इसकी लोक-प्रचलित व्याख्या है।

लंगोट कैसे पहनी जाती है?

लंगोट देखने में भले ही साधारण प्रतीत होती हो, किंतु इसे बाँधने का एक विशेष तरीका होता है। इसे किसी अनुभवी पहलवान, व्यायाम प्रशिक्षक अथवा अखाड़े में जाकर सीखा जा सकता है।

लंगोट को अंडकोष और लिंग के चारों ओर इस प्रकार बाँधा जाता है कि उन्हें पर्याप्त सहारा मिले तथा अनावश्यक दबाव भी न पड़े। पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह अंडकोषों को स्थिर रखने में सहायक होता है।

लंगोट बाँधने की विधि

लंगोट के मुख्यतः तीन भाग होते हैं—

  1. ऊपरी भाग में दोनों ओर पतली डोरियाँ (रस्सियाँ) होती हैं।

  2. इन डोरियों को कमर पर बाँधा जाता है।

  3. इसके बाद लंगोट के तीसरे भाग को पीछे की ओर रखा जाता है।

  4. फिर उसे नीचे से प्राइवेट पार्ट के साथ ऊपर की ओर लाकर कमर पर बँधी दोनों डोरियों के बीच से निकाला जाता है।

  5. अंत में उसे पुनः पीछे की ओर ले जाकर दोनों डोरियों के मध्य सुरक्षित रूप से फँसा दिया जाता है।

इस प्रकार लंगोट शरीर पर ठीक प्रकार से बँध जाती है और आवश्यक सहारा प्रदान करती है।

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लंगोट कैसे पहनें

लंगोट एक प्रकार का अंतःवस्त्र (अंडरवियर) है, जिसे पारंपरिक रूप से भारतीय उपमहाद्वीप में पुरुषों द्वारा पहना जाता है। जॉकस्ट्रैप के समान यह कपड़े के एक त्रिकोणीय भाग से बना होता है, जिसके ऊपरी हिस्से में बाँधने के लिए डोरियाँ होती हैं तथा नीचे की ओर कपड़े की एक लंबी पट्टी होती है। एक बार इसे सही स्थान पर स्थापित कर लेने के बाद, इसकी पट्टियों को उचित ढंग से लपेटना और बाँधना अपेक्षाकृत सरल होता है।

कुछ लोग भारोत्तोलन (वेट लिफ्टिंग), योगाभ्यास अथवा कुश्ती जैसे खेलों के दौरान लंगोट पहनते हैं, क्योंकि इसे जननांगों को सहारा और सुरक्षा प्रदान करने वाला वस्त्र माना जाता है।

लंगोट बाँधना

1. लंगोट का एक भाग ऐसा होता है, जहाँ आप उसकी सिलाई (सीम) को महसूस कर सकते हैं, और दूसरा भाग ऐसा होता है जहाँ सिलाई का अनुभव नहीं होता। अधिक आराम के लिए लंगोट पहनते समय उसका बिना सिलाई वाला भाग शरीर की ओर रखना चाहिए। इसके बाद लंगोट को सही स्थिति में रखकर आगे की बाँधने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

2. त्रिकोण के लंबे, सपाट किनारे को, जिससे दो पट्टियाँ जुड़ी होती हैं, अपनी पीठ के ऊपरी भाग पर रखें। प्रत्येक हाथ में एक-एक पट्टी पकड़ें और उन्हें शरीर के सामने की ओर लाएँ, ताकि कपड़ा अच्छी तरह तना रहे। इस स्थिति में कपड़े की लंबी पट्टी अथवा त्रिकोण का निचला सिरा आपके पीछे तथा दोनों पैरों के बीच लटका रहना चाहिए।

3. कपड़े के लंबे टुकड़े को अपने पैरों के बीच से होते हुए ऊपर की ओर खींचें। अपने पैरों के बीच हाथ ले जाकर कपड़े को पकड़ें। इसे अपने पैरों के बीच से ऊपर खींचें और ध्यान रखें कि कपड़ा सीधा तथा बिना सिलवटों के रहे। इसके बाद इसे अपनी कमर तक लाएँ और उसके सिरे को अपने कंधे पर डाल दें। कपड़े को कसकर खींचते समय यह सुनिश्चित करें कि आपके गुप्तांग शरीर के साथ सटे हुए रहें और पीछे की ओर व्यवस्थित हों। लंबे टुकड़े को कंधे पर डाल देने से वह सामने की गाँठ बाँधते समय रास्ते में नहीं आता और लंगोट को ठीक प्रकार से बाँधने में सुविधा होती है।

4. डोरियों को अपने सामने लाएँ और उन्हें एक बार आपस में पार करें। इसके बाद उन्हें खींचकर कस लें और एक डोरी को दूसरी डोरी के ऊपर इस प्रकार लपेटें, जैसे आप चौकोर गाँठ (Square Knot) या जूते के फीते बाँधना शुरू करते हैं। ध्यान रखें कि यह गाँठ आपकी प्राकृतिक कमर (Natural Waist) के स्तर पर बँधे।

5. डोरियों को पीछे की ओर ले जाकर पुनः क्रॉस करें। डोरियों को कसकर खींचते हुए उन्हें अपनी पीठ के चारों ओर लपेटें। फिर उन्हें एक-दूसरे के ऊपर से गुजारते हुए क्रॉस करें और विपरीत दिशाओं से पुनः सामने की ओर ले आएँ। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डोरियों को पर्याप्त रूप से कसा हुआ रखें, ताकि लंगोट अपनी जगह पर मजबूती से बनी रहे।

6. डोरियों को सामने की ओर लाकर एक सुरक्षित गाँठ बाँधें। डोरियों को शरीर के ठीक मध्य में बाँधने के बजाय कूल्हे के किसी एक ओर थोड़ा हटकर बाँधें। इससे लंगोट बँधने के बाद अधिक आरामदायक महसूस होगा। इसके बाद डोरियों को अच्छी तरह कस लें और फिर उन्हें धनुषाकार (Bow Knot) में बाँधें, जैसे आप जूते के फीते बाँधते हैं। इससे लंगोट सुरक्षित रूप से अपनी जगह पर बनी रहेगी। चाहें तो धनुषाकार गाँठ के स्थान पर चौकोर गाँठ (Square Knot) भी बाँध सकते हैं।


7. कपड़े के लंबे टुकड़े को पीछे की ओर सुरक्षित करें। कपड़े के लंबे टुकड़े को अपने कंधे से नीचे उतारें और उसे उस गाँठ के ऊपर रखें, जिसे आपने अभी बाँधा है। इसके बाद पीछे की ओर से अपने पैरों के बीच हाथ ले जाकर कपड़े के सिरे को पकड़ें और उसे अपने पैरों के बीच से पीछे की ओर खींचें। कपड़े को अच्छी तरह तना हुआ रखें और फिर उसके सिरे को पीछे स्थित त्रिकोण के ऊपरी भाग अथवा कमर पर बँधी डोरियों के बीच सुरक्षित रूप से खोंस दें। इस प्रकार लंगोट पूरी तरह से सुरक्षित हो जाती है और अपनी जगह पर मजबूती से बनी रहती है।

 

कार्डियो के समय है जरूरी

जब भी आप कोई जटिल एक्सरसाइज या कठिन वर्कआउट करें, उस समय लंगोट अवश्य पहनें। यह पुरुषों के गुप्तांगों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। इससे उन पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। कार्डियो एक्सरसाइज करते समय भी आप इस प्रकार अपना ध्यान रख सकते हैं।

सेहत से है लंगोट का संबंध

लंगोट को पारंपरिक रूप से पुरुषों के अंडकोषों (टेस्टिकल्स) के लिए लाभकारी माना जाता है। कई बार अत्यधिक वर्कआउट या शारीरिक श्रम के कारण इस क्षेत्र में असुविधा या दर्द की शिकायत हो सकती है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी प्रजनन क्षमता बनाए रखने के लिए अंडकोषों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।

कई बार अंडकोषों में पानी भर जाने जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं, जो व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार लंगोट इन समस्याओं से बचाव में सहायक माना जाता है।

स्किन-फ्रेंडली

लंगोट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सामान्यतः सूती (कॉटन) कपड़े से बनाया जाता है। सूती कपड़ा त्वचा के लिए अनुकूल माना जाता है और इससे रैशेज या अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं की संभावना अपेक्षाकृत कम रहती है। इसे स्किन-फ्रेंडली माना जाता है तथा यह अनावश्यक गर्मी उत्पन्न नहीं होने देता। इसी कारण इसे पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है।

क्या लंगोट बाँधना जरूरी है?

लंगोट बाँधने के संभावित लाभों के बारे में ऊपर बताया जा चुका है। बहुत से लोग वर्षों से जिम में अभ्यास कर रहे हैं और लंगोट का उपयोग नहीं करते, फिर भी उन्हें कोई विशेष समस्या नहीं होती। ऐसे लोग सपोर्टर या टाइट अंडरवियर का भी उपयोग करते हैं।

हालाँकि यह भी आवश्यक नहीं है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति को कोई समस्या नहीं हुई, तो आपको भी कभी कोई समस्या न हो। दूसरी बात यह है कि कई लोग अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में खुलकर चर्चा नहीं करते।

यदि आपको लंगोट पहनने से किसी प्रकार की एलर्जी या असुविधा नहीं है, तो इसे पहनने में संकोच करने की आवश्यकता नहीं है। यह आपकी व्यायाम-तैयारी का एक हिस्सा माना जा सकता है। जैसे स्पोर्ट्स शूज, ट्रैक पैंट और टी-शर्ट व्यायाम की तैयारी का हिस्सा होते हैं, उसी प्रकार पारंपरिक व्यायाम पद्धतियों में लंगोट को भी तैयारी का एक आवश्यक अंग माना गया है।

यदि आप भारतीय व्यायाम परंपराओं से जुड़ाव रखते हैं, तो लंगोट धारण करना उन परंपराओं के प्रति सम्मान का एक प्रतीक भी माना जा सकता है। पारंपरिक मान्यता है कि व्यायाम से पूर्व लंगोट पहनने से मन और शरीर कठिन परिश्रम के लिए अधिक अनुशासित एवं तैयार महसूस करते हैं।



लंगोट पहनने के फायदे

  • लंगोटी शारीरिक व्यायाम या योगाभ्यास के दौरान हड्डियों और अंगों के विस्थापन तथा तंत्रिकाओं पर पड़ने वाले खिंचाव को रोकने में सहायक मानी जाती है।

  • लंगोट पहनने से पुरुषों के टेस्टिकल्स अर्थात् अंडकोषों की सेहत अच्छी रहती है। कई बार अधिक वर्कआउट या मेहनत करने की वजह से उनका आकार बढ़ जाता है, जिससे उनमें दर्द होने लगता है।

  • वैज्ञानिक मानते हैं कि प्रजनन क्षमता बनाए रखने के लिए टेस्टिकल्स की सेहत का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। कई बार इनमें पानी भर जाने की समस्या भी हो जाती है, जो यौन जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

  • पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह ऊर्जा को पूरे शरीर में संतुलित रूप से प्रवाहित करने में सहायक होता है।

  • लंगोटी के उपयोग से व्यायाम या योगाभ्यास के दौरान ऊर्जा, शक्ति और सहनशक्ति प्राप्त होती है।

  • लंगोट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सामान्यतः सूती (कॉटन) कपड़े से बना होता है, जिससे किसी भी प्रकार के रैशेज या अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं की संभावना कम रहती है। इसे स्किन-फ्रेंडली माना जाता है तथा इससे अनावश्यक गर्मी उत्पन्न नहीं होती। इसलिए भी लंगोट पहनना पुरुषों की सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।

  • जब भी आप कोई भारी एक्सरसाइज या वर्कआउट करते हैं, तो लंगोट एक प्रकार का सहारा प्रदान करता है। इसे पहनने से व्यायाम के दौरान पुरुषों के गुप्तांगों पर अधिक दबाव नहीं पड़ता और वे अधिक आराम महसूस करते हैं।

  • पारंपरिक रूप से अंतःवस्त्र के रूप में लंगोट पहनना पुरुषों के जननांगों के लिए लाभकारी माना जाता है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह यौन जीवन को बेहतर बनाने में सहायक होता है।

  • पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अंतःवस्त्र लंगोट कामेच्छा पर नियंत्रण बनाए रखने में सहायक माना जाता है। साथ ही यह अंडकोषों को चोट से बचाने में भी मदद करता है, विशेषकर साइकिल, मोटरसाइकिल आदि से गिरने पर लगने वाली चोटों से। दौड़ने, चलने, योगासन करने तथा व्यायाम करने में भी इसे सुविधाजनक माना जाता है।

लंगोट पहनने के कोई नुकसान नहीं हैं

लंगोट बाँधने का सबसे बड़ा फायदा आपके टेस्टिकल्स अर्थात् अंडकोषों को पहुँचता है। कई बार अधिक मेहनत करने की वजह से उनका आकार बढ़ जाता है। आम भाषा में हम यह भी कहते हैं कि उनमें पानी भर गया है। यदि एक बार ऐसा हो जाए, तो कई मामलों में उसके उपचार के लिए शल्य-चिकित्सा (ऑपरेशन) की आवश्यकता पड़ सकती है।

लंगोट अंडकोषों को सहारा देकर रखता है, जिससे पारंपरिक मान्यता के अनुसार पानी भरने जैसी समस्याओं की संभावना कम हो जाती है। इसके अतिरिक्त इससे लोअर एब्डॉमेन (पेट के निचले हिस्से) की मांसपेशियों को भी सहारा मिलता है। जिन लोगों के पेट के निचले हिस्से में अधिक भारी कसरत करने से सूजन आ जाती है, उन्हें भी इसका उपयोग करना चाहिए।

दौड़ते समय भी लंगोट पहनना लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर के संवेदनशील अंगों को स्थिरता मिलती है। वैसे तो लंगोट किसी भी रंग का हो सकता है, लेकिन लाल लंगोट विशेष रूप से लोकप्रिय माना जाता है। लाल रंग अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। यह रंग बजरंग बली से भी जुड़ा हुआ है। अखाड़ों में सामान्यतः हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित होती है और वहाँ लाल रंग का विशेष महत्व माना जाता है।

लंगोट और सपोर्टर

वर्तमान समय में लंगोट के स्थान पर अधिकांश लोग इलास्टिक सपोर्टर का उपयोग करते हैं। यह लंगोट की तरह ही सहारा प्रदान करता है, किंतु इसे बाँधने की आवश्यकता नहीं होती। इसका उपयोग भी लंगोट की तरह ही किया जाता है।

हालाँकि, यह लंगोट से भिन्न होता है। लंगोट और सपोर्टर दोनों का उद्देश्य समान हो सकता है, लेकिन उनकी संरचना अलग होती है। जिस प्रकार अंडरवियर और निक्कर दोनों वस्त्र हैं, किंतु उनका उपयोग अलग-अलग होता है, उसी प्रकार लंगोट और सपोर्टर भी भिन्न प्रकार के अंतःवस्त्र हैं।

सपोर्टर के ऊपरी भाग में एक इलास्टिक बेल्ट या रबर लगी होती है। इसके अतिरिक्त, ग्रोइन एरिया (जंघा-मूल क्षेत्र) में कपड़े की दोहरी परत होती है, जिसका उपयोग ग्रोइन गार्ड लगाने के लिए किया जाता है। शेष संरचना काफी हद तक अंडरवियर के समान होती है।

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Unlimited Best Sad Shayari in Hindi




Unlimited Best Sad Shayari in Hindi


कुछ अधूरा पन था जो
पूरा हुआ नहीं,
कोई मेरा होकर भी मेरा
हुआ नहीं…!

परवाह करने वाले अक्सर रुला जाते है,
अपना कहकर पराया कर जाते है,
वफ़ा जितनी भी करो कोई फर्क नहीं,
“मुझे मत छोड़ना” कहकर खुद छोड़ जाते.!

किसी को चाहकर छोड़ देना
बहुत आसान है
किसी को छोड़कर भी चाहो तो
पता चलेगा मुहब्बत किसे कहते हैं.!

बरबाद करना था तो किसी और
तरीके से करते
जिन्दगी बनकर जिन्दगी से जिन्दगी
ही छीन ली तुमने.!

बहुत तकलीफ देती है न मेरी बातें
तुम्हें देख लेना मेरी खामोशी एक
दिन तुम्हें रुला देगी.!

सब कुछ करो बुरा भला कहलो
थप्पड़ मारलो, मगर याद रखो
दोराहे पर लाकर किसी का साथ मत
छोड़ो इंसान जीते जी मर जाता है

आजाद कर देंगे तुम्हें
अपनी चाहत की कैद से,
मगर वो शख्स तो लाओ,
जो हमसे ज्यादा कदर करे तुम्हारी..

मरने वाले तो एक दिन बिना बताए
मर जाते है
रोज़ तो वो मरते है जो
खुद से ज़्यादा किसी को चाहते है.

मेरी मौत की खबर उसे न देना
मेरे दोस्तों घबराहट होती है
कही पागल न हो जाये
वो इस खुशी में🥹

कभी-कभी इंसान इतना
अकेला होता है
की वो बस अपने आँसूओं को ही
अपना सहारा समझता है!!

जब दर्द सहने की
आदत हो जाती है ना
तो आंसू आना
खुद ही बंद हो जाते है.!

कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें ना हम
भुला सकते हैं,
और ना ही किसी को
बता सकते हैं.!!

क्यूं शर्मिंदा करते हो रोज
हाल हमारा पूछ कर
हाल हमारा वही है जो तुमने
बना रखा है.!!

जो जाहिर करना पड़े
वो दर्द कैसा
और जो दर्द ना समझ सके
वो हमदर्द कैसा..!!

जिंदगी गुजर रही है,
इम्तिहानों के दौर से,
एक ज़ख्म भरता नही,
और दूसरा आने की जिद करता है।

चेहरे ” अजनबी” हो जाये तो
कोई बात नही, लेकिन
रवैये “अजनबी” हो जाये तो
बड़ी “तकलीफ” होती है!

जिंदगी की तलाश में मौत की
राह चलते गए,
समझ आया जब तक, तब तक
तनहाइयों में डूबते चले गए।

मोहब्बत जब रहती है
तब समझ नहीं रहती,
और जब समझ आती है तब
मोहब्बत नहीं रहती !!

ऐसा भी क्या जीना मेरा,
की पल पल तड़पता हूं मैं,
किसी की याद में किसी के इंतजार में,
रोज़ जीता रोज़ मरता हूं मैं ।💔

वक़्त पर सीखो
अपने प्यार की कदर करना
लोग वापस नहीं आते
एक बार चले जाने के बाद.!

सांसों से बंधी थी एक डोर
जो तोड़ दी हमने,
अब हम भी चैन से सोयेंगे,
मोहब्बत छोड़ दी हमने..!

बात वफ़ा की होती
तो कभी ना हारते
बात नसीब की थी
कुछ कर ना सके..!

मेरी तलाश का है जुर्म
या मेरी वफ़ा का कसूर,
जो दिल के करीब आया
वही बेवफा निकला।

भर जायेंगे जख्म मेरे भी तुम
जमाने से जिक्र मत करना,
मैं ठीक हूं तुम दुबारा कभी
मेरी फिक्र मत करना।

उसके दर पर दम तोड़ गईं
तमाम ख्वाहिशें मेरी,
मगर वो पूछ रहा है
तेरे रोने की वजह मैं तो नहीं।।

मुझे डर नहीं है अब
कुछ खोने का क्योंकि
मैंने अपनी जिंदगी में
जिंदगी को खोया है !!

उसने दोस्ती चाही
मुझे प्यार हो गया,
मै अपने ही कत्ल का
गुनहगार हो गया।

जिस फूल की परवरिश हम ने
अपनी मोहब्बत से की,
जब वो खुशबु के काबिल हुआ
तो औरो के लिए महकने लगा.।

तरसेगा जब तेरा दिल
मुझसे मिलने को,
तब हम तेरे ख्यालों में तो क्या
इस दुनिया में भी नहीं होंगे।

बड़े ही अजीब हैं ये जिंदगी के रास्ते,
अंजान मोड़ पर कुछ लोग अपने बन जाते हैं,
मिलने की खुशी दें या न दें,
मगर बिछड़ने का गम ज़रूर दे जाते हैं।

कुछ पल की ख़ुशी देकर
जिंदगी रुलाती क्यूं है
जो लकीरो में नहीं होते
जिंदगी उनसे मिलाती क्यूं है।

वो करीब तो बहुत हैं
मगर कुछ दूरियों के साथ
हम दोनों जी तो रहे हैं
मगर मजबूरियों के साथ.!

जिसने अपनों को बदलते देखा है
वो जिन्दगी में हर परिस्थिति का
सामना कर सकता है ।

यूँ ना कहो की
ये क़िस्मत की बात है
मुझे बर्बाद करने में तुम्हारा भी
हाथ है ।

आसूं आ जाते हैं रात को
यह सोच कर की
कोई था जो कहता था की पागल
सोना मत बात करनी हैं । 

ख़ुदा करें मैं मर जाऊँ
तुझे खबर तक ना मिले
तू ढूँढता रहे मुझे पागलों की तरह
पर तुझे कब्र तक ना मिले ।

हम उन हालातों से गुजरे है दोस्तों,
जहाँ सुनने वाला हिम्मत छोड़ देता है,
और देखने वाला दम…।

हमें रोता देखकर
वो ये कह के चल दिए की
रोता तो हर कोई है
क्या हम सबके हो जाए ।

आज खुद को
इतना तन्हा महसूस किया
जैसे लोग दफना कर चले गए
हों …। 

वो मिली भी तो क्या मिली बन के
बेवफा मिली,
इतने तो मेरे गुनाह ना थे जितनी मुझे
सजा मिली।

रात भर जलता रहा ये दिल
उसी की याद में
समझ नहीं आता दर्द प्यार करने से
होता है या याद करने से । 

सब चले जाते हैं महफिल से
पर तेरी खुशबू नहीं जाती
जिंदगी गुजरी चली जाती है
पर तेरी यादें नहीं जाती । 

प्यार का मतलब सिर्फ उन्हें
पाना नहीं होता
उनकी खुशी के लिए खुद को
कुर्बान कर देना भी प्यार होता है ।

एक दिन हम भी कफन ओढ़ जाएंगे…
हर एक रिश्ता इस ज़मीन से तोड़े जाएंगे
जितना जी चाहे सता लो यारो,
एक दिन रुलाते हुए सबको छोड़ जाएंगे…। 

दर्द बताऊँ कब ज़्यादा
होता है दोस्तों
जब आपसे कोई झूट बोल रहा हो
और आपको सच पता हो ।  

जितने दिन तक जी गई
बस उतनी ही है जिन्दगी
मिट्टी के गुल्लकों की कोई उम्र
नहीं होती ।

एक बात बोलूं
अगर जिंदगी प्यारी है तो
ज़िन्दगी में कभी मोहब्बत मत करना ।

अगर मेरी कोई बात बुरी
लगी हो
तो दुआओं में मेरी मौत
मांग लेना ।


कहने वाले तो कुछ भी कह देते हैं,
कभी सोचा है…
सुनने वाले पर क्या गुजरती
है।

“ज़िंदगी” नहीं “रूलाती” है रुलाते तो वह,
“लोग” हैं जिन्हें हम अपनी …
ज़िन्दगी “समझ” बैठते हैं ..!!  
  

वो आएगी नहीं
मैं फिर भी इंतजार करता हूँ
एक तरफ ही सही पर सच्चा प्यार करता हूँ ।

दर्द बनकर ही रह जाओ
हमारे साथ
सुना है दर्द बहुत देर तक
साथ रहता है ।

आज़ाद कर देंगे तुझे
अपनी मोहब्बत की क़ैद से,
करे जो हमसे बेहतर कदर
पहले वो शख्स तो ढूंढ़ ! 

बचपन कितना खूबसूरत था
तब खिलौने ज़िन्दगी थे
आज
ज़िन्दगी खिलौना है…। 

नफरत करनी है तो
इस कदर करना
की हम दुनिया से चले जाए पर
तेरी आँख मे आंसू ना आए ।

ऐ मोहब्बत बता क्या दिल तोड़ना ही
तेरा पेशा है !
मर जाती है रूह
मैंने मोहब्बत में लाशों को चलते हुए देखा है !


टूट जायेगी तुम्हारी
जिद की आदत भी उस दिन,
जब पता चलेगा की
याद करने वाला अब याद बन गया ।  

क्या रोग दे गई है ये
नये मौसम की बारिश,
बहुत याद आ रहे हैं मुझे भूल
जाने वाले ।

आप हर रोज कहते हो मुझसे थोड़ी
देर में बात करेंगे
थोड़ी देर में हमारी आँख ही न खुली
तो आप क्या करेंगे । 

मेरी मौत की खबर उसे न देना
मेरे दोस्तों घबराहट होती है
कही पागल न हो जाये
वो इस खुशी में ।  

मरता नहीं कोई किसी के बग़ैर,
ये हक़ीक़त है, पर क्या सिर्फ
सांस लेने को ही जीना कहते
हैं! !

दर्द क्या होता है कोई उस शख्स से पूछो
जो अपनी मोहब्बत को किसी और की
बांहों में देखे । 
 

इतनी रात को जागते हुए
अहसास हुआ
अगर मोहब्बत ना होती तो हम भी
सौ जाते ।

बड़े ही अजीब हैं ये जिंदगी के रास्ते,
अंजान मोड़ पर कुछ लोग अपने बन जाते हैं,
मिलने की खुशी दें या न दें,
मगर बिछड़ने का गम ज़रूर दे जाते हैं ।

अपना बनाकर फिर कुछ दिनों मे
बेगाना बना दिया
भर गया दिल हमसे और मजबूरी का
बहाना बना दिया । 

इस नाज़ुक दिल में किसी के लिए
इतनी मोहब्बत आज भी है यारों
की हर रात जब तक आँखें ना भीग जाए
नींद नहीं आती ।

दिल को तोड़ कर जाने से
क्या हासिल हुआ तुमको
मार ही देते तो यूँ रात की तनहाई में
रोना नहीं पड़ता ।

अकेले रोना भी
क्या खूब कारीगरी है !
सवाल भी खुद के होते है
और जवाब भी खुद के ।  

लोग मुझसे पूछते हैं कि तुम्हारी
आंखें हमेशा लाल क्यूं रहती है
हम भी हंसकर कह देते हैं
हम नशा करते हैं किसी की यादों का । 

बहुत आसाँ है
इश्क़ में हार के खुदकुशी कर लेना,
कितना मुश्किल है जीना,
ये हमसे पूछ लेना…।

मुझे किसी के बदल जाने का
कोई गम नहीं
बस कोई था जिससे
ये उम्मीद नहीं थी । 

इतना दर्द तो मौत भी नहीं
देती,
जितना तेरी ख़ामोशी दे रही
है !  

औकात से ज्यादा
मोहब्बत करली
इसलिए बर्दाश्त से ज्यादा
दर्द मिला ।

झूठी मोहब्बत.. वफ़ा के वादे..
साथ निभाने की कसमें..
इतना सब किया तुमने,
सिर्फ मेरे साथ वक़्त गुजरने के लिए । 

तेरा हाल पूछे भी तो
किस तरह पूछे सुना है
मोहब्बत करने वाले बोला कम
और रोया ज़्यादा करते है ।  

अजीब है ये मोहब्बत का
दर्द… हँसता खेलता इंसान
दुआओं में मौत मांगने
लगता है…।

“जो फुर्सत मिले तो मुड़कर देख लेना मुझे
एक दफा तेरे प्यार में पागल होने की चाहत
मुझे आज भी है !”

बरबाद कर देती है मोहब्बत हर
मोहब्बत करने वाले को
क्योंकि इश्क हार नहीं मानता और दिल
बात नहीं मानता ।


बहुत तकलीफ देते है
वो ज़ख़्म
जो बिना कसूर के
मिले हो ।

पलकों में आँसू और दिल में दर्द सोया है,
हँसने वालों को क्या पता रोनेवाला किस
कदर रोया है ।


अब ना करूँगा
दर्द को बयान किसी के सामने
जब दर्द मुझको सहना है
तो तमाशा क्यूं करना ।

किसी दिन नींद आएगी तो
हम सोयेंगे इस तरह की
तडप जाओगे मुझे जगाने के लिए ।

दिल तोड़कर ये मत सोचना की
तुमको भूल जायेंगे,
मोहब्बत की थी हमने तुम्हारी तरह
टाइमपास नही…। 

जीते जी कौन करता है
कदर किसी की
ये तो मौत ही है जो इंसान को
अनमोल बना देती है । 

उठाकर कफ़न
ना दिखाना चेहरा मेरा उसको
उसे भी तो पता चले की
यार का दीदार ना हो तो कैसा लगता है।

पागल हो जो अब तक
याद कर रहे हो उसे
उसने तो तेरे बाद भी हज़ारो को
भुला दिया ।



ज़िंदगी में खुद को कभी किसी
इंसान का आदी मत बनाना,
क्यूंकि इंसान केवल अपने मतलब से
ही प्यार करता है ।  

मैं उस किताब का आखरी
पन्ना था
मैं ना होता तो
कहानी खत्म न होती ….।

एक तेरा ही दिल नहीं पिघलता जालिम मेरे लफ्ज़ अब पत्थर को रुला देते हैं
मेरे दोस्त भी अब मेरे दर्द का मज़ा लेते हैं,
मुझे अक्सर तेरे नाम से बुला लेते हैं ।

दुआ करना
दम भी इस तरह निकले
जिस तरह
तेरे दिल से हम निकले ।

इंसान इसलिये अकेला हो जाता है
क्योंकि अपनों को छोड़ने की सलाह
गैरों से ले लेता है ।

एक साँस सबके हिस्से से
हर पल घट जाती हैं,
कोई जी लेता हैं ज़िन्दगी
किसी की कट जाती हैं.।  

हुनर मोहब्बत का
हर किसी को कहाँ आता है,
लोग हुस्न पर फ़िदा होकर
उसे इश्क़ कह देते हैं.।

नींद भी क्या गजब की चीज है
आ जाए तो सब कुछ भुला देती है
और ना आए तो
सब कुछ याद दिला देती है ।

जब तेरा दर्द मेरे साथ वफ़ा करता है,
एक समंदर मेरी आंखों से बहा करता है !

मोहब्बत जिसे हो जाए
उसे मरने की ज़रूरत ही नहीं
ज़िन्दगी ख़ुद ही
अलविदा कह देगी ।

उसकी दर्द भरी आँखों ने जिस जगह कहा
था, अलविदा आज भी वही खड़ा है दिल
उसके आने के इंतजार में ।

आंसुओं की हमें ऐसी आदत हुई
के खुशियों से अब मन भरा ही नहीं
ग़म हमें सिर्फ इस बात का है सनम
तुमने वो भी कहा जो हुआ ही नहीं । 

सनम बेवफा है,
ये वक्त बेवफा है,
हम शिकवा करें भी तो किस्से,
कमबख्त ज़िन्दगी भी तो वेबफा है..!!

मुस्कुरा के दूर हुए वो
दिल ने मेरे रो दिया
ऐसा महसूस हुआ जैसे की
अपने जिस्म से मैंने जान खो दिया ।

हर किसी को नहीं मिलती
मोहब्बत में वफ़ा
कोई सोता है रात भर
कोई रोता है रात भर ।

झगडा तभी होता हैं जब
दर्द होता है,
और दर्द तब होता हैं
जब प्यार होता है

दुनिया का दस्तूर है ये
जिसे टूट कर चाहोगे
वही तोड़ कर जाएगा ।

किसी ने मुझसे पूछा
वादें ” और ” यादें” में क्या अन्तर है
मैंने कहा वादें इन्सान तोड़ता है
और यादें इन्सान को तोड़ती हैं..।

  

दर्द कम नहीं हुआ मेरा बस सहने
की आदत हो गयी हैं ।

सारी रात जागा जिसके लिए
वो अब
किसी और के लिए
जागने लगी है।

मुझे पता था कि,
आज नहीं तो कल तुम मेरा
साथ छोड़ ही दोगे,
लेकिन इतनी जल्दी छोड़ दोगे,
ये नहीं पता था ।

मोहब्बत अब नहीं रही
ज़माने मे
अब लोग इश्क़ नहीं
मज़ाक़ किया करते है..।

कहाँ छिपी है खुशियाँ हमारी,
कहाँ खोई है दुनियाँ हमारी,
समझ नहीं आ रहा है क्या करे
दर्द पर दर्द दे रही है जिंदगी हमारी …|

नसीब का प्यार और
गरीब की दोस्ती
कभी धोखा नही देतीं ।

आजकल धोरखा भी लोग
बड़े धोखे से देते हैं…
इधर प्यार जताते हैं
दिल कहीं और लगाते हैं.. !

हर कोई सो जाता है
अपने कल के लिए मगर
ये नहीं सोचते की आज जिसका दिल दुखाया
वो सोया होगा या नहीं । 

तड़पोगे तुम एक दिन यह सोच कर
की थी कोई जिद्दी चाहनेवाली…!
कहां चली गई अब वो
अपनी जिद छोडकर…!

मेरी ज़िन्दगी मुझे
ऐसे मोड़ पे लाकर खड़ा कर चुकी है
कि मजबूरी हैं जीने की
और चाहत है मरने की…।

कोई ठुकरा दे तो हंसकर जी लेना
क्योंकि
मोहब्बत की दुनिया में जबरदस्ती
नहीं होती ।

जिनके दिल पर
चोट लगती है ना…
वो लोग आँखों से कम और दिल से
ज्यादा रोते है…।

सब कुछ आसानी से मिल जाये,
ऐसा कभी मेरा नसीब ना रहा..
सुख दुःख में बराबर का हिस्सा बनें,
इतना कोई मेरे करीब ना रहा..।

न जाने इतना दर्द क्यों देती है
ये मोहब्बत
हँसता हुआ इंसान भी
दुआओ में मौत मांगता है ।

क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर
कहे…!! तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ
होती है

आज खुद को
इतना तन्हा महसूस किया
जैसे लोग दफना कर चले गए
हों …।

जिंदगी मे अगर कोई अच्छा लगे तो,
उसे सिर्फ चाहना प्यार मत करना,
क्योकि प्यार खतम हो जाता है
पर चाहत कभी नही खतम होती

मौत आ जाये पर जो नसीब में ना हो,
उस पर दिल कभी न आये..!! 

मोहब्बत का कानून अलग है
साहिब इसकी अदालत मे वफादार
सज़ा पाते है।  Boys

हर किसी को एक बार तो
प्यार करना ही चाहिए
ताकि उसको पता चल सके कि
प्यार क्यों नहीं करना चाहिए ।

याद रखना एक बात
किसी की आँख में आँसू दे
कर आप अपने खुद के सपने
कभी नहीं सजा सकते…।

मेरे अलावा काफ़ी लोग है उसकी
जिंदगी में,
अब मैं रहूं याँ ना रहूं क्या फ़र्क
पड़ता है।

दुनिया में सबसे
बेहतरीन भीख मोहब्बत की
होती है
और मैंने वो भी मांगी थी ।

मन से वहम निकाल दो कि
कोई याद करता है क्योंकि
जो रुला सकता है
वो भूला भी सकता है ।

अकेले ही गुजरती हैं जिंदगी,
लोग तसल्लियां तो देते हैं पर साथ नहीं…।

एक ही ईसान था जिंदगी में
जिसे देख कर लगता था
कि ये कभी साथ नहीं छोड़ेगा
लेकिन वो भी अकेला छोड़ दिया ।

काश आज मेरी साँस रुक जाए,
सुना है की साँस रुक जाए तो रूठे हुए भी
देखने आते है ।

जब तुम पर बीतेगी तो तुम भी
जान जाओगे कि
कितना दर्द होता है नज़र अंदाज़
करने से ।

मोहब्बत दोनों ही करते थे
में उसी से वो किसी और से ।

तन्हाई से तंग आकर हम मोहब्बत की
तलाश में निकले थे
लेकिन मोहब्बत भी ऐसी मिली की और
तनहा कर गयी ।

मन में जो दर्द छुपा था आँखों
से खली करने लगा हूँ…
और जब कोई उन आँसुओं कोई देख लेता है
उन्हें आँखों की खराबी कहने लगा हूँ ।

सुकून की तलाश में हम अपना दिल
बेचने निकले थे
खरीददार ऐसा मिला के
दर्द भी दे गया और दिल भी ले गया ।

जो दर्द समझता था
वही इंसान
जब दर्द देता है तो बहुत दर्द होता है…।

जिंदगी नहीं रुकती
किसी के बगैर
बस उस शख्स की जगह हमेशा
खाली रह जाती है ?

दर्द दो तरह के होते है
एक दर्द आपको दर्द देता है
और दूसरा दर्द आपको बदल देता है ।

जब मर्द की आंखों से
आंसू छलकने लगे
तो समझलो मुसीबत पहाड़ से भी
ज़्यादा बड़ी और संगीन है ।

ये जो तुम लफ़्ज़ों से बार बार
चोट देते हो ना
दर्द वही होता है जहां
तुम रहते है ।

कभी कभी सोचती हूँ यार
इतनी बूरी भी नही मैं
जितना मेरे साथ बूरा होता है…।

प्यार में दर्द पता है कब मिलता
है जब कोई पहले जी भर के प्यार करे
और बाद में बदल जाये तब
दिल नही हिम्मत टूट जाती है यार ।

तुम निभा न सके वो अलग बात है,
मगर वादे तुमने कमाल के किये थे।

मैने दिल से कहा थोड़ा कम याद किया कर उसे !!
दिल ने मुझसे कहा याद मैं कर रहा हु उसे !!
फिर तकलीफ क्या है तुझे।

ना मौत से दूर हूं, ना
जिंदगी के पास हूं, साँसे
चल रही हैं, एक जिंदा
लाश हूं.!!

अगर कोई अपना हो तो आइने
जैसा हो,
हंसे भी साथ और रोए भी
साथ..!

कुछ ना बचा मेरे इन,
दो खाली हाथों में,
एक हाथ से किस्मत रूठ गई,
तो दूसरे हाथ से मोहब्बत छूट गई ।।

मेरी निगाहो मे देखके कह दे
की हम तेरे काबिल नही
क़सम है तेरी चलती साँसों की
तेरी दुनिया ही छोड़ देंगे ।

बाज़ आजाओ मोहब्बत से
मोहब्बत करने वालों
हमने इसमे एक उम्र गुज़ारी
मिला कुछ भी नहीं ।

मोहब्बत सीखनी है तो
मौत से सीखो
जो एक बार गले लगा ले तो फिर
किसी का होने नहीं देतीं । 




उस से कहना तेरे भूल जाने से
कुछ भी तो नहीं बदला
बस पहले जहा दिल हुआ करता था
अब वहा दर्द होता है ।

जो लोग दूसरों की आँखों में
आँसूं भरते है
वो क्यूँ भूल जाते है की उनके पास भी
दो आँखें है…!!!

सोचा था तड़पायेंगे हम उन्हें,
किसी और का नाम लेके जलायेगें उन्हें,
फिर सोचा मैंने उन्हें तड़पाके दर्द मुझको ही होगा,
तो फिर भला किस तरह सताए हम उन्हें।

दिन हुआ है, तो रात भी होगी,
मत हो उदास, उससे कभी बात भी होगी।
वो प्यार है ही इतना प्यारा,
ज़िंदगी रही तो मुलाकात भी होगी।

वो बिछड़ के हमसे ये दूरियां कर गई,
न जाने क्यों ये मोहब्बत अधूरी कर गई,
अब हमे तन्हाइयां चुभती है तो क्या हुआ,
कम से कम उसकी सारी तमन्नाएं तो पूरी हो गई।


होले होले कोई याद आया करता है,
कोई मेरी हर साँसों को महकाया करता है,
उस अजनबी का हर पल शुक्रिया अदा करते हैं,
जो इस नाचीज़ को मोहब्बत सिखाया करता है।

अब तेरे बिना जिंदगी गुजारना मुमकिन नही है,
अब और किसी को इस दिल में बसाना आसान नही है,
हम तो तेरे पास कब के चले आये होते सब कुछ छोड़ कर,
लेकिन तूने कभी हमे दिल से पुकारा ही नही है।

मंजिल भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था,
एक मैं ही अकेला था, बाकि सारा काफिला भी उसका था,
एक साथ चलने की सोच भी उसकी थी,
और बाद में रास्ता बदलने का फैसला भी उसी का था।



चिंगारी का ख़ौफ़ न दिया करो हमे,
हम अपने दिल में दरिया बहाय बैठे है,
अरे हम तो कब का जल गये होते इस आग में,
लेकिन हमतो खुद को आंसुओ में भिगोये बैठे है।


कोई मिला ही नही हमे कभी हमारा बन कर,
वो मिला भी तो हमे सिर्फ किनारा बनकर,
हर ख्वाब बन कर टुटा है यहां,
अब बस इंतज़ार ही मिला है एक सहारा बन कर।  

हम जानते है आप जीते हो जमाने के लिए,
एक बार तो जीके देखो सिर्फ हमारे लिए,
इस नाचीज़ की दिल क्या चीज़ है,
हम तो जान भी देदेंगे आप को पाने के लिए।   

हम तो ख्वाबो की दुनिया में बस खोते गये,
होश तो था फिर भी मदहोश होते गये,
उस अजनबी चेहरे में क्या जादू था,
न जाने क्यों हम उसके होते गये।
 Top   

वफ़ा का दरिया कभी रुकता नही,
मोहब्बत में प्रेमी कभी झुकता नही,
किसी की खुशियों के खातिर चुप है,
पर तू ये न समझना की मुझे दुःखता नही।   

हर पल साथ देने का वादा करते हैं तुझसे,
क्यों अपनापन इतना ज्यादा है तुझसे,
कभी ये मत सोचना भूल जायेंगे तुझे हम,
हर पल साथ निभाने का वादा है तुझसे।


तेरा यूँ मेरे सपनो में आना ये तेरा कसूर था,
और तुझ से दिल लगाना ये मेरा कसूर था,
कोई आया था पल दो पल को जिंदगी में,
और सर अपना समझ लेना वो मेरा कसूर था।

कितना दर्द है इस दिल में लेकिन हमे एहसास नही है,
कोई था बहुत खास पर वो पास नही है,
हमे उनके इश्क ने बर्बाद कर दिया,
और वो कहते है की ये कोई प्यार नही है।

इस दिल में आग सी लग गई जब वो खफा हुए,
फर्क तो तब पड़ा जब वो जुदा हुए,
हमे वो वफ़ा करके तो कुछ दे न सके,
लेकिन दे गये वो बहुत कुछ जब वो वेबफा हुए।

जब कोई ख्याल इस दिल से टकराता है,
तो दिल न चाहते हुए भी खामोश हो जाता है,
कोई सब कुछ कह कर भी कुछ नही कह पाता है,
और कोई बिना कुछ कह भी सब कुछ कह जाता है।

गम कितना है हम आपको दिखा नही सकते है,
ज़ख्म कितने गहरे है ये आपको दिखा नही सकते है,
जरा हमारे इन आंसुओ को तो देख लो,
ये आंसू गिरे है कितने ये हम आपको गिना नही सकते है।  

अब तो हम दर्द से खेलना सीख गये है,
अब तो हम वेबफाई के साथ जीना सीख गये है,
क्या बताये यारो की कितना दिल टूटा है हमारा,
अब तो हम मौत से पहले कफ़न ओढ़ कर सोना सीख गये है।
   

ये वक्त बदला और बदली ये कहानी है,
अब तो बस मेरे पास उनकी यादें पुरानी है,
न लगाओ मेरे ज़ख्मो पे मरहम,
क्योंकि मेरे पास बस उनकी यही बची हुई निशानी है।  

वो करते है मोहब्बत की बात,
लेकिन मोहब्बत के दर्द का उन्हें एहसास नही,
मोहब्बत तो वो चाँद है जो दिखता तो है सबको,
लेकिन उसको पाना सबके बस की बात नही।Top  

वक्त के बदल जाने से इतनी तकलीफ नही होती है,
जितनी किसी अपने के बदल जाने से तकलीफ होती है।
    
हर बात में आँसू बहाया नही करते,
हर बात दिल की हर किसी से कहा नही करते,
ये नमक का शहर है,
इसलिए ज़ख्म यहाँ हर किसी को दिखाया नही करते।

हम अगर खो गये तो कभी न पा सकोगे,
हम वहाँ चले जायेंगे जहाँ कभी नही आ सकोगे,
जिस दिन मेरी मोहब्बत का एहसास हो गया तुम्हे,
पछताओगे बहुत क्योंकि,
हम वहाँ चले जायेंगे जहाँ से फिर न बुला सकोगे।

उसे हमने बहुत चाहा था पर प न सके,
उसके सिवा ख्यालो में किसी और को ला न सके,
आँखों के आँसू तो सूख गये उन्हें देख कर,
लेकिन किसी और को देख कर मुस्कुरा न सके।

जब तक दर्द न हो किसी के आंसू आया नही करते,
बिना वजह किसी का दिल दुखाया नही करते,
ये बात सुन लो कान खोल कर,
किसी के सपने तोड़ कर अपने सपने सजाया नही करते।
   

चाहत इतनी थी की उनको दिखाई न गई,
चोट दिल पर लगी इसलिए दिखाई न गई,
हम चाहते तो थे सारी दूरियां मिटाना,
लेकिन दूरियां इतनी थी की मिटाई न गई।  

हमारी चाहत ने उस वेबफा को ख़ुशी देदी,
और उस वेबफा ने बदले में ख़ामोशी देदी,
मांगी तो उस रब से दुआ मरने की थी,
लेकिन उसने भी हमे तड़पने के लिए जिंदगी देदी।
    

जरूरी नही जीने के लिए सहारा हो,
जरूरी नही जिसे हम अपना माने वो हमारा हो,
कई कस्तियां बीच भबर में डूब जाया करती हैं,
जरूरी नही हर कस्ती को किनारा हो।Top   

जो पल बीत गये वो बापस आ नही सकते,
सूखे फूलो को बापस खिला नही सकते,
कभी ऐसा लगता है वो हमे भूल गये होंगे,
पर ये दिल कहता है वो हमे कभी भुला नही सकते।    

हम दुआएं करेंगे उनपर एतवार रखना,
न कोई हमसे कभी सवाल रखना,
अगर दिल में चाहत हो हमे खुश देखने की,
बस हमेशा मुश्कुराना और अपना ख्याल रखना।


कभी किसी को इतना सताया न करो,
अपने लिए कभी किसी को तड़पाया न करो,
जिनकी साँसे ही वो आपके लव्ज़ हो,
उन लफ़्ज़ों के लिए कभी किसी को तरसाया न करो।

हमे तो सिर्फ जिंदगी से एक ही गिला है,
क्यों हमे खुशियां न मिल सकी क्यों ये गम मिला है,
हमने तो उनसे इश्क-ए-वफ़ा की थी,
क्यों वफ़ा करने के बाद वेबफाई ही सिला है।

मुझे जिसने जिंदगी दी, वो मरता छोड़ गये,
जिससे मोहब्बत की वो मुझे तन्हा छोड़ गये,
थी हमे भी एक हमसफ़र साथ चलने को जरूरत,
जो साथ चलने बाले थे वही रास्ता मोड़ गये।

मोहब्बत उससे करो जो आपसे प्यार करे,
अपने आप से भी ज्यादा आप पर एतवार करे,
आप उससे एक बार दो पल के लिए रुकने को तो कहो,
और उन दो पलो के लिए सारी जिंदगी इंतज़ार करे।

प्यार मोहब्बत तो सब करते है,
इसको खोने से भी सब डरते है,
हम तो न प्यार करते है न मोहब्बत करते है,
हमतो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने को तरसते है।
  

हम आँखों से रोये और होठो से मुस्कुरा बैठे,
हमतो बस यूँ ही उनसे इश्क-ए-वफ़ा निभा बैठे,
वो हमे अपनी मोहब्बत का एक लम्हा भी न दे सके,
और हम उन पर यूही हर लम्हा लूट बैठे।   

प्यार हर किसी को जीना सिखा देता है,
वफ़ा के नाम पर मरना सिखा देता है,
प्यार नही किया तो करके देखो,
ये हर दर्द सहना सिखा देता है।  

आज तेरी याद को सीने से लगा कर हम रोये,
हम तुझे तन्हाई में पास बुलाकर रोये,
पाना तो बहुत चाहा था हर बार तुझे,
पर हर बार तुझे न पाकर हम रोये।

Top   

वो नही आती पर अपनी निशानी भेज देती है,
ख्वाबो में दास्ताँ पुरानी भेज देती है,
उसकी यादों के पल कितने भी मीठे हैं,
मगर कभी कभी आँखों में पानी भेज देती है।
    

इन आँखों में कभी हमारे आंसू आये न होते,
अगर वो पीछे मुड़ कर मुस्कुराये न होते,
उनके जाने के बाद यही गम रहेगा,
के काश वो हमारी जिंदगी में आये न होते।


अब तो हमे उदास रहना भी अच्छा लगता है,
किसी के पास न होना भी अच्छा लगता है,
अब मैं दूर हूँ तो मुझे कोई फर्क नही पड़ता,
क्योंकि मुझे किसी की यादो में आना भी अच्छा लगता है।


अगर कोई खता हो गई हो तो सजा बता दो,
क्यों है इतना दर्द बस इसकी वजह बता दो,
भले ही देर हो गई हो तुम्हे याद करने में,
लेकिन तुम्हे भूल जायेंगे ये ख्याल दिल से मिटा दो।

क्यों अनजाने में हम अपना दिल गवां बैठे,
क्यों प्यार में हम धोखा खा बैठे,
उनसे हम अब क्या शिकवा करे क्योंकि गलती हमारी ही थी,
क्यों हम वेदिल इंसान से दिल लगा बैठे।



इस इश्क की किताब से,
बस दो ही सबक याद हुए,
कुछ तुम जैसे आबाद हुए,
कुछ हम जैसे बर्बाद हुए।


हम तो आपसे पलके बिछा कर प्यार करते हैं,
ये वो गुनहा है जो हम बार बार करते हैं,
दिल में ख्वाइशों के कई चिराग जलाकर,
हम सुबहो शाम तेरे मिलने का इंतज़ार करते हैं।

जब कोई आपसे मजबूरी में जुदा होता है,
जरूरी नही वो इंसान वेबफा होता है,
जब कोई देता आपको जुदाई के आँसू,
तन्हाइयों में वो आपसे ज्यादा रोता है।

मुझे दिल से यूँ पुकारा न करो,
यूँ आँखों से हमे इशारा न करो,
दूर हूँ तुझसे मजबूरी है मेरी,
यूँ तन्हाइयों में मुझे तड़पाया न करो।

ये तेरी चाहत मुझे किस मोड़ पर ले आई,
इस दिल में गम है,और दुनिया में रुसबाई,
अब तो कटता है हर पल सदियों के बराबर,
अब तो लगता है के मार ही डालेगी तेरी ये जुदाई।

यादों में तेरी आहे भरता है कोई,
हर साँस के साथ तुझे याद करता है कोई,
मरना तो सभी को है वो एक हकीकत है,
लेकिन तेरी यादों में हर दिन मरता है कोई।   

हर घड़ी इस जिंदगी को आज़माया है हमने,
इस जिंदगी में सिर्फ गम पाया है हमने,
जिस ने हमारी कभी कदर ही न जानी,
उस वेबफा को इस दिल में बसाया है हमने।  

तुम हमे क्यों इतना दर्द देते हो,
जब जी में आये तब रुला देते हो,
लफ़्ज़ों में तीखा पन और नजरो में बेरुखी,
ये कैसा इश्क है जो तुम हमसे करते हो।

बीच सफर में तुम हमसे अलविदा कह गये,
पहले अपना बनाया फिर पराया कर गये,
जब जिंदगी की जरूरत सी बन गये,
तभी वो हमसे किनारा कर गये।

छोड़ने से पहले कहते तो आप,
दर्दे दिल एक बार हमे सुनाते तो आप,
ऐसी क्या मजबूरी थी आपकी,
जो हमे जिंदगी के सफर में छोड़ गये आप।

हमे दिल में बसाया था तो साथ निभाया क्यों नही,
जब नजरे मिलाई थी हमसे तो नजर में बसाया क्यों नही,
तूने तो हमसे जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया था,
तो छोड़ कर जाने से पहले एक बार बताया क्यों नही।

मेरे ख्यालो में सिर्फ तुम हो तुम्हे कैसे भुला दूँ,
इस दिल की धड़कन हो सिर्फ तुम, तुम्हे कैसे निकाल दूँ।

सच कहो तो उन्हें ख्वाब लगता है,
और शिकवा करो तो उन्हें मज़ाक लगता है,
हम कितनी शिद्दत से उन्हें याद करते है,
और एक वो हैं जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है।

ख्वाइशें तमाम पिघलने लगी है,
फिर से एक और शाम ढलने लगी है,
उनसे मुलाकात के इंतज़ार में बैठे है,
अब ये जिद भी तो हद से गुजर ने लगी है।

कितनी दूर निकल आये हम इश्क निभाते निभाते,
खुद को खो दिया हमने उनको पाते पाते,
लोग कहते है दर्द बहुत है तेरी आँखों में,
और हम दर्द छुपाते रहे मुस्कुराते मुस्कुराते।

किसी की चाहत पर हमे अब एतवार न रहा,
अब किसी भी ख़ुशी का हमे एहसास न रहा,
इन आँखों ने सपनो को टूटते देखा है,
इसलिए अब जिंदगी में किसी का इंतज़ार न रहा।

तू क्या जाने की क्या है तन्हाई,
टूटे हर पत्ते से पूंछो की क्या है जुदाई,
हमको तू कभी वे वेबफाई का इलज़ाम न देना,
तू उस वक्त से पूछ की मुझे तेरी याद कब नही आई।  

तू याद आता है बहुत इसलिए तेरी याद में खो लेते है,
तेरी याद जब आती है तो आंसुओ से रो लेते है,
नींद तो अब हमे आती नही,
तू हमारे सपनो में आयेगा ये सोच कर सो लेते है।  

कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ नही देखा,
तेरे जाने के बाद किसी और को नही देखा,
तेरा इंतज़ार करना तो है लाज़िम,
इसलिए कभी हमने घड़ी की तरफ नही देखा।   

सारे फासले मिटा कर तू हमसे प्यार रखना,
हमारा रिश्ता हमेशा बरकरार रखना,
अगर कभी इत्तेफाक से हम आपसे जुदा हो जाये,
तो कुछ पलों के लिए मेरा अपनी आँखों में इंतज़ार रखना।

वक्त नूर को बेनूर कर देता है,
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है,
कोन चाहता अपनी मोहब्बत से दूर रहना,
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।    

अपनी मोहब्बत की बस इतनी कहानी है,
डूबी हुई कस्ती और ठहरा हुआ पानी है।

यूँ सजा न दे मुझे बेकसूर हूँ मैं,
अपना ले मुझे गमों से चूर हूँ मैं,
तू छोड़ गई हो गया मैं पागल,
और लोग कहते है बड़ा मगरूर हूँ मैं।


न जाने क्यों ये लहरे समंदर से टकराती है,
और फिर समंदर में लौट जाती है,
कुछ समझ नही पाते की किनारों से वेबफाई करती है,
या समंदर से वफ़ा निभाती है।

कभी गम तो कभी वेबफाई मार गई,
कभी उनकी याद आई तो जुदाई मार गई,
जिसको हमने बेइन्तहा मोहब्बत की,
आखिर में हमे उसी की वेबफाई मार गई।
  

उनके इश्क की पहचान अभी बाकी है,
नाम उसका लवो पर है और मुझ में जान बाकी है,
वो हमे देख कर मुँह फेर लेते है तो क्या हुआ,
कम से कम उनके चेहरे की पहचान तो बाकि है।  

कभी दूर तो कभी पास थे वो,
न जाने किस किस के करीब थे वो,
हमे तो उन पर खुद से भी ज्यादा भरोसा था,
लेकिन ठीक ही कहता था ये जमाना, वेबफा थे वो।   

हमने तो देखा है खुद को कई बार आजमा कर,
अक्सर लोग धोखा देते है करीब आकर,
इस जमाने ने समझाया था लेकिन दिल नही माना,
छोड़ जाओगे एक दिन हमे अपना बना कर।

तुझे मोहब्बत करना नही आता,
और मुझे मोहब्बत के सिवा कुछ नही आता,
जिंदगी जीने के दो ही तरीकें है,
एक तुझे नही आता, और दूसरा मुझे नही आता।     

“सजा न दे मुझे बे-कसूर हूँ मैं,
थाम ले मुझको गमो से चूर हूँ मैं,
तेरी दूरी ने कर दिया है पागल मुझे,
और लोग कहते हैं कि मगरूर हूँ मैं।”

   
“दूरियाँ बहुत है पर इतना समझ लो,
पास रहकर कोई रिस्ता खास नहीं होता,
तुम मेरे दिल के इतने हो पास के,
मुझे दूरियों का एहसास नहीं होता।”  –  

“तेरे लिए खुद को मजबूर कर लिया,
जख्मो  को अपने हमने नासूर कर लिया,
मेरे दिल में क्या था ये जाने बिना,
तूने खुद  को हमसे कितना दूर कर लिया।”

“गलतियों से जुदा तू भी नहीं और में भी नहीं,
दोनों इंसान हैं खुदा तू भी नहीं मैं भी नहीं,
गलत-फह्मिओं ने कर दी दोनों में पैदा दूरियाँ,
वरना फितरत का बुरा तू भी  नहीं मैं भी नहीं।”


“मिलना इत्तेफाक था बिछड़ना नसीब था,
वो उतना ही दूर चला गया जितना करीब था,
हम उसको देखने के लिए तरसते रहे,
जिस शख्स कि हथेली पे हमारा नसीब था।”

“दूर रहना आपका हमसे सहा नहीं जाता,
जुदा हो के आपसे हमसे रहा नहीं जाता,
अब तो वापस लौट आईये हमसे  पास,
दिल  का हाल अब किसी से कहा नहीं जाता।”


“मोहब्बत ऐसी थी कि बतायी न गयी,
चोट दिल पर थी इसलिए दिखाई न गयी,
चाहते नहीं थे उनसे दूर रहना,
दूरी इतनी थी उनसे के मिटायी न गयी।”


“मरने की दुआएँ क्यूँ माँगूँ
जीने की तमन्ना कौन करे..
ये दुनिया हो या वो दुनिया अब
ख़्वाहिश-ए-दुनिया कौन करे।”  –  


“हर तन्हा रात में एक नाम याद आता है,
कभी सुबह कभी शाम याद आता है,
जब सोचते हैं कर लें दोबारा मोहब्बत,
फिर पहली मोहब्बत का अंजाम याद आता है।”

   
“चल मेरे हमनशीं अब कहीं और चल,
इस चमन में अब अपना गुजारा नहीं,
बात होती गुलों तक तो सह लेते हम,
अब काँटों पे भी हक हमारा नहीं।”


“सपनों से दिल लगाने की आदत नहीं रही,
हर वक्त मुस्कुराने की आदत नहीं रही,
ये सोच के कि कोई मनाने नहीं आएगा,
अब हमको रूठ जाने की आदत नहीं रही।”


“मुद्दत से कोई शख्स रुलाने नहीं आया,
जलती हुई आँखों को बुझाने नहीं आया,
जो कहता था कि रहेंगे उम्र भर साथ तेरे,
अब रूठे हैं तो कोई मनाने नहीं आया।”


“हम तो मौजूद थे रात में उजालों की तरह​,
लोग निकले ही नहीं ढूढ़ने वालों की तरह​,
दिल तो क्या हम रूह में भी उतर जाते​,
तुमने चाहा ही नहीं चाहने वालों की तरह​।”


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बडगुजर या बढ़गुजर राजपूत Badgujar Rajputs



बडगूजर (राघव) भारत की सबसे प्राचीन सूर्यवंशी राजपूत जातियों में से एक है। वे प्राचीन भारत के सबसे सम्मानित राजवंशो में से हैं। उन्होंने हरावल टुकड़ी या किसी भी लड़ाई में आगे की पहली पंक्ति में मुख्य बल गठित किया। बडगुजर ने मुस्लिम राजाओं की सर्वोच्चता को प्रस्तुत करने के बजाय मरना चुना। मुस्लिम शासकों को अपनी बेटियों को न देने के लिए कई बडगूजरों की मौत हो गई थी। कुछ बडगुजर उनके कबीले नाम बदलकर सिकरवार को उनके खिलाफ किए गए बड़े पैमाने पर नरसंहार से बचने के लिए बदल दिया।
Badgujar Rajputs

वर्तमान समय में एक उपनिवेश को शरण मिली, जिसे राजा प्रताप सिंह बडगूजर के सबसे बड़े पुत्र राजा अनूप सिंह बडगूजर ने स्थापित किया था। उन्होंने सरिस्का टाइगर रिजर्व में प्रसिद्ध नीलकांत मंदिर समेत कई स्मारकों का निर्माण किया, कालीजर में किला और नीलकंठ महादेव मंदिर शिव उपासक हैं; अंबर किला, अलवर, मच्छारी, सवाई माधोपुर में कई अन्य महलों और किलों; और दौसा का किला। नीलकंठ बडगूजर जनजाति की पुरानी राजधानी है। उनके प्रसिद्ध राजाओं में से एक राजा प्रताप सिंह ने कहा बडगूजर था, जो पृथ्वीराज चौहान के भतीजे थे और मुस्लिम आक्रमणकारियों के खिलाफ अपनी लड़ाई में सहायता करते थे, जिनका नेतृत्व 1191 में मुहम्मद ऑफ घोर ने किया था। वे मेवार और महाराणा के राणा प्रताप के पक्ष में भी लड़े थे) हम्मर अपने जनरलों के रूप में। उनमें से एक, समर राज्य के राजा नून शाह बडगुजर ने अंग्रेजों के साथ लड़ा और कई बार अपनी सेना वापस धकेल दिया लेकिन बाद में 1817 में अंग्रेजों के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर किए। बडगूजर हेपथलाइट्स, या हंस के साथ उलझन में नहीं हैं, क्योंकि वे केवल 6 वीं शताब्दी की ओर आए थे। इस बडगूजर की एक शाखा, राजा बाग सिंह बरगुजर विक्रमी संवत 202 मे, जो एडी.145 से मेल खाते थे, अंतर 57 वर्ष है। इस जगह को 'बागोला' भी कहा जाता था। उन्होंने उसी वर्ष सिलेसर झील के पास एक झील भी बनाई और जब इसे लाल पानी खोला गया, जिसे कंगनून कहा जाता था।
महाराजा अचलदेव बड़गूजर के लिए कहा जाता है कि जब खलीफा -अल- मामून ने 880 विक्रम संवत भारत पर चढ़ाई करि थी तो मेवाड़ के महाराणा खुम्मान के नेतृत्व में भारत के सभी राजपूत राजाओं ने मिलकर उससे युद्ध किया था, उस सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व महाराज अचलदेव बड़गूजर ने किया था। राजस्थान में जालौर जिले में स्थित भीनमाल प्राचीन गुर्जर देश (गुर्जरात्रा) की राजधानी थी, जिसका वास्तविक नाम "श्रीमाल" था, जो बाद में भिलमाल और फिर भीनमाल हुआ।
गल्लका लेख के अनुसार अवन्ति के राजा नागभट्ट प्रतिहार ने 7 वी सदी में गुर्जरो को मार भगाया और गुर्जर देश पर कब्जा किया, गुर्जर देश पर आधिपत्य करने के कारण ही नागभट्ट प्रतिहार गुरजेश्वर कहलाए जैसे रावण लंकेश कहलाता था। यही से इनकी एक शाखा दौसा,अलवर के पास राजौरगढ़ पहुंची, राजौरगढ़ में स्थित एक शिलालेख में वहां के शासक मथनदेव पुत्र सावट को गुर्जर प्रतिहार लिखा हुआ है जिसका अर्थ है गुर्जरदेश से आए हुए प्रतिहार शासक। इन्ही मथंनदेव के वंशज 12 वी सदी से बडगूजर कहलाए जाने लगे क्योंकि राजौरगढ़ क्षेत्र में पशुपालक गुर्जर/गुज्जर समुदाय भी मौजूद था जिससे श्रेष्ठता दिखाने और अंतर स्पष्ट करने को ही गुर्जर प्रतिहार राजपूत बाद में बडगूजर कहलाने लगे।
पशुपालक शूद्र गुर्जर/गुज्जर समुदाय का राजवंशी बडगूजर क्षत्रियों से कोई सम्बन्ध नहीं था। पशु पालक गुज्जर/गुर्जर दरअसल बडगूजर (गुर्जर प्रतिहार) राजपूतों के राज्य में निवास करते थे। राजा रघु के वंशज (क्योंकि श्रीराम और लक्ष्मण जी दोनों रघु के वंशज थे) होने के कारण ही इन्होंने राघव/रघुवंशी पदवी धारण की, इनकी वंशावली में एक अन्य शासक रघु देव के होने के कारण भी इनके द्वारा राघव टाइटल लिखा जाना बताया जाता है। इस प्रकार बडगूजर राजपूत वंशावली में श्रीमाल (गुर्जरदेश की राजधानी भीनमाल का प्राचीन नाम) का होना तथा राजौरगढ़ शिलालेख में बड़गुजरो के पूर्वज मथनदेव को गुर्जर प्रतिहार सम्बोधित किया जाना आधुनिक बडगूजर राजपूत वंश को प्रतिहार राजपूत वंश की ही शाखा होना सिद्ध करता है।

बड़गूजर वंश की कुलदेवी :- मां आशावारी
राजौरगढ के महाराजा अचलदेव बड़गूजर जी ने कुलदेवी मां आशावारी का भव्य गढ़ ( मन्दिर ) बनवाया था। महाराज अचलदेव बड़गूजर मेवाड़ के महाराणा खुम्मान के समकालीन थे। महाराज अचलदेव बड़गूजर ने 9 वी शताब्दी के अंदर राजौरगढ का दुर्ग , कुलदेवता नीलकंठ महादेव जी का मंदिर , कुलदेवी आशावारी माँ का मंदिर बनवाया। महाराजा अचलदेव बड़गूजर ने कई जैन मंदिर का निर्माण करवाया। कहा जाता है कि अचलदेव बड़गूजर के समय में राजौरगढ को काशी की संज्ञा दी जाती थी। जबकि राजौरगढ ( राजगढ़ ) तो महाराज बाघराज बड़गूजर के वंशज राजदेव बड़गूजर ने अपने नाम पर तीसरी सदी में बसाया ओर सम्पूर्ण ढूंढाड़ क्षेत्र में बड़गूजर राजपुतो की स्थिति को मजबूत किया।
कछवाहा राजपूतों के आगमन से पूर्व सम्पूर्ण ढूँढाड़ बड़गूजर राजपुतो के अधिकार में था। बड़गूजर राजपुतो के शासन काल के कई किले एवं महल बनवाये गए जिसे कछवाह के आगमन के बाद वो सभी उनके अधिकार में चले गये। पहले माताजी का छोटा सा मन्दिर था और मूर्ति खंडित अवस्था मे थी परंतु वर्तमान में देवती , राजौरगढ , माचेड़ी से निकले बड़गूजर जागीरदारों ने पुनः मन्दिर का निर्माण करवाया और पुनः शक्ति केंद्र के रूप में उभारा है। मुगल - बड़गूजर युद्ध और कछवाहा - बड़गूजर युद्ध मे मन्दिर को बहुत हानि उठानी पड़ी है इसके बावजूद भी बड़गूजर राजपूतों ने अपनी प्राचीन राजधानी को वर्तमान समय तक कायम रखा। समाज के कुछ लोगो ने मिलकर सभी को एक करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष माताजी के गढ़ ( मन्दिर ) में मिलन समारोह का आयोजन किया जाता है। वर्तमान समय मे बड़गूजर राजपूतों की राजौरा शाखा का बहुत योगदान रहा है।


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