घरेलू धनिये के सर्वश्रेष्ठ औषधीय फायदे



धनिये के फायदे और नुकसान
Coriander (Dhaniya) In Hindi
घरेलू धनिये के सर्वश्रेष्ठ औषधीय फायदे

भारतीय भोजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए जितने महत्वपूर्ण मसाले होते हैं, उतना ही योगदान सब्जी, दाल और सलाद को जायकेदार बनाने के लिए गार्निशिंग का होता है। गार्निशिंग के लिए वैसे तो बहुत सारी चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। मगर सबसे प्रमुख धनिया के पत्ते होते हैं। बाजार में मात्र 5 से 10 रुपए में मिल जाने वाली धनिया खाने के स्वाद को दोगुना कर देती है, साथ ही इसमें सेहत का रस भी घोल देती है। इतना ही नहीं, धनिया की हरी चटनी भी लगभग हर कोई खाना पसंद करता है। ऐसे में देखा जाए तो धनिया के पत्ते भारतीय भोजन को स्वादिष्ट बनाने का मुख्‍य इंग्रीडिएंट हैं। लेकिन धनिया के पत्ते खाने का स्वाद तब ही बढ़ा पाएंगे जब आप बाजार से अच्छी, ताजी और हरी-भरी धनिया लेकर आएंगी। बहुत सारे लोग यह बात नहीं जानते हैं कि बाजार में आपको कई वैरायटी की धनिया पत्ती मिल जाती हैं। मगर खाने को स्वादिष्ट केवल देसी धनिया के पत्ते ही बना सकते हैं।
धनिया एक जड़ी-बूटी के रूप में अपने आप उगने वाला प्राकृतिक पौधा होता है जिसकी पत्तियां और बीजों का प्रयोग हर घर में किया जाता है। धनिया एक हर जगह पर खाने में प्रयोग की जाने वाली हरी पत्तियों की टहनियां होती हैं जो खाने में प्रयोग की जाती हैं। इनसे बहुत ही हल्की और सुगंधित महक आती है जिससे खाने का स्वाद बढ़ता है और खाना सुगंधित भी हो जाता है। इसे सभी जगहों पर प्रयोग किया जाता है। धनिया का प्रयोग सब्जी को सजाने और मसाले के रूप में किया जाता है क्योंकि इसके प्रयोग से सब्जी में स्वाद बढ़ जाता है। धनिये के बीज को सुखाकर सूखे मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है। धनिया जितना खाना का स्वाद बढ़ाने के लिए फायदेमंद होता है उतना ही स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है। धनिया हर प्रकार से यहाँ तक की धनिया का पानी भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। खाने में भले ही मिर्च-मसले न हो लेकिन अगर उसकी धनिया से सजावट की जाये तो उसके स्वाद में चार-चाँद लग जाते हैं।
घरेलू धनिये के सर्वश्रेष्ठ औषधीय फायदे

धनिया की तासीर (Dhaniya Ki Taseer)
धनिया की तासीर ठंडी होती है। धनिया में बहुत से पोषक तत्व जैसे – फॉस्फोरस, आयरन, कैरोटीन, थियामिन, मैगनीज, जिंक, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, आयरन, विटामिन बी6, मैग्नीशियम, विटामिन ए, विटामिन सी, सोडियम पाए जाते हैं।

धनिये के औषधीय फायदे -(Medicinal Benefits of Coriander In Hindi) :
  1. एनीमिया में फायदेमंद (Dhaniya Goods For Anemia)
    अगर किसी व्यक्ति को किसी कारण वश खून की कमी हो जाती है तो उसके लिए धनिया के बीजों का सेवन बहुत अधिक लाभदायक होता है क्योंकि धनिया में आयरन की मात्रा पाई जाती है जो खून में हीमोग्लोबिन बनाता है इसलिए धनिया के बीजों के सेवन से खून की कमी नहीं होती है।
  2. ऑस्टियोपोरोसिस में फायदेमंद (Dhaniya Goods For Osteoporosis)
    आप धनिया के पानी के सेवन से ऑस्टियोपोरोसिस के होने से बच सकते हैं क्योंकि धनिया के पानी में विटामिन ए और विटामिन के पाई जाती हैं जो कैल्शियम संश्लेषण में मदद करती हैं। इसके सेवन से हड्डियों को कैल्शियम मिल जाता है और हम ऑस्टियोपोरोसिस रोग के खतरे से बच जाते हैं।
  3. कोलेस्ट्रोल कम करने में फायदेमंद (Dhaniya Goods For Reduce Cholesterol)
    आज के समय में बहुत से ऐसे कारण होते हैं जिसकी वजह से हमारे शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है और हमें बहुत से रोगों का शिकार होना पड़ जाता है लेकिन आप धनिया का प्रयोग करके खराब कोलेस्ट्रोल को कम कर सकते हैं जिससे बहुत से रोगों के होने का खतरा भी कम हो जाता है। विशेषज्ञों के एक प्रयोग से यह पता चला है कि धनिया के बीज में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रोल को कम कर सकते हैं। अगर आपको हाई कोलेस्ट्रोल की समस्या है तो आप धनिया के बीजों को पानी में उबालकर उस पानी को छानकर पिएं। इस पानी को पीने से हाई कोलेस्ट्रोल की समस्या ठीक हो जाएगी।
  4. डायबिटीज में फायदेमंद-(Dhaniya Goods For Diabetes)
    जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है उनके लिए धनिया का सेवन बहुत अधिक लाभकारी होता है क्योंकि धनिया का सेवन शरीर में शुगर लेवल को कम कर देता है और इंसुलिन की मात्रा को बढ़ा देता है जिससे हमारे शरीर का शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है और हमें कोई परेशानी नहीं होती। आप धनिया का सेवन अपना भोजन पकाते समय भोजन में कर सकते हैं इससे भी बहुत लाभ होगा।
  5. थायराइड में फायदेमंद-(Dhaniya Good For Thyroid)
    अगर आपको थायराइड की समस्या है तो आप धनिया का सेवन कर सकते हैं। आप रात के समय धनिया को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह के समय उस पानी को पी लें इससे आपकी थायराइड की समस्या ठीक हो जाएगी।
  6. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद-(Dhaniya Goods For Digestive System)
    किसी व्यक्ति का पूरा शरीर उसके पाचन तंत्र पर निर्भर करता है क्योंकि पाचन तंत्र की वजह से ही शरीर को पूरी ऊर्जा मिलती है और अगर वह सही तरह से काम न करें तो बहुत सी समस्याएं हो जाती हैं जैसे कब्ज, गैस, अपच, पेट दर्द, उल्टी, दस्त आदि। ऐसे में धनिया का सेवन आपके लिए बहुत अधिक फायदेमंद होता है क्योंकि धनिया के सेवन से बहुत सी बीमारियों को दूर किया जा सकता हैं। आप थोडा सा धनिया पाउडर लें और उसमें हींग और काला नमक मिला लें। अब इस मिश्रण को एक गिलास पानी में घोलकर पिएं इससे आपकी पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं ठीक हो जाएंगी।
  7. मासिक धर्म में फायदेमंद-(Dhaniya Goods For Menstrual Cycle)
    जब किसी महिला को मासिक धर्म से संबंधित कोई परेशानी होती है या मासिक धर्म बहुत अधिक होता है तो वह धनिया का सेवन करें यह उसके लिए बहुत अधिक लाभकारी होगा। आप थोड़े से धनिया का बिज लें और उन्हें पानी में डालकर उबालें। अब उस पानी को छान लें और उसमें अपने हिसाब से चीनी मिलाकर सेवन करें। इस पानी के सेवन से मासिक धर्म की समस्या ठीक हो जाएगी।
  8. वजन कम करने में फायदेमंद-(Dhaniya Goods For Weight Loss)
    अगर आपका वजन बहुत अधिक है और आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो आप धनिया का सेवन कर सकते हैं क्योंकि धनिया का सेवन करने से आपका वजन बहुत कम हो जाएगा। अपने वजन को कम करने के लिए सबसे पहले आप धनिया के कुछ बीज लें। अब इन बीजों को एक गिलास पानी में डाल दें और गैस पर उबालने के लिए रख दें। जब पानी की मात्रा आधे गिलास के बराबर हो जाए तो उसे छान लें और इस पानी ओ दिन में दो बार पिएं। इसके सेवन से आपका वजन बहुत अधिक कम हो जाएगा।
  9. सर्दी जुकाम में फायदेमंद-(Dhaniya Goods For Cold)
    सर्दियों और बरसात के मौसम में अक्सर देखा जाता है कि लोगों को सर्दी जुकाम की समस्या हो जाती है जो कुछ जीवाणुओं की वजह से होती है अगर आपको भी यह समस्या है तो आप धनिया का सेवन कर सकते हैं क्योंकि धनिया में जीवाणुरोधी गुण पाए जाते हैं जो जीवाणुओं से हमारी रक्षा करते हैं।
हरा धनिया अपनी डेली डायट में शामिल करने के तीन आसान तरीके हैं
  1. आप दाल और सब्जी में हरा धनिया के पत्तियां महीन काटकर मिलाएं। ध्यान रखें सब्जी बनने और दाल पकने के बाद धनिया मिलाया जाता है। धनिया मिलाकर इन्हें नहीं पकाते हैं। क्योंकि ऐसा करने से धनिया के प्राकृतिक गुणों में कमी आती है।
  2. धनिए की चटनी बनाकर खाएं। हरा धनिया के साथ प्याज और हरी मिर्च को पीसकर चटनी तैयार करें बाद में इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर इसका सेवन करें। यह पाचन को दुरुस्त करती है और गैस, बदहजमी जैसी समस्याओं से बचाती है।
  3. तीसरी विधि है कि आप हरे धनिए का रायता बनाकर खाएं। इसे पीसकर रायते में मिला लें। या फिर पिसे हुए हरे धनिया को छाछ, जलजीरा, आम पना इत्यादि में मिलाकर इसका सेवन करें।
सूजन में फायदेमंद (Dhaniya Goods For Swelling)
अगर आपके किसी अंग पर किसी वजह से सूजन आ गई है तो धनिया का प्रयोग आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा क्योंकि धनिया में सूजन को कम करने के गुण पाए जाते हैं । आप धनिया के एशेंशियल ऑइल का प्रयोग सूजन वाले भाग पर करें इससे आपकी सूजन कम हो जाएगी।

धनिये के अन्य फायदे -(Dhaniya Ke Fayde) :
  1. अनिद्रा के लिए : आप नींद लाने वाली दवाइयों के सेवन की जगह पर धनिया का सेवन कर सकते हैं क्योंकि इससे आपको नींद भी आ जाएगी और आपको किसी भी तरह की कोई मानसिक हानि नहीं होगी जबकि दवाइयों का प्रयोग करने से मानसिक रोग होने का खतरा रहता है इसलिए आपके लिए दवाइयों की जगह पर धनिया का प्रयोग करना बहुत लाभकारी होता है।
  2. आँखों के लिए : धनिया में विटामिन ए की भरपूर मात्रा पाई जाती है जो आँखों की रौशनी बढ़ाने में मदद करती है। आप धनिया को अपने खाने में मिलाकर सेवन कर सकते हैं इससे आपको बहुत अधिक फायदा होगा।
  3. कमजोरी के लिए : धनिया का सेवन करने से कमजोरी और चक्कर आने की समस्या दूर हो जाती है। आप रात के समय में धनिया पाउडर और आंवला पाउडर को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह के समय उसका सेवन करें।
  4. जलन के लिए : जब किसी वजह से आपकी आँखों हाथों और पैरों में जलन होती है तो आपको धनिया का सेवन करना चाहिए इससे आपको आँखों, पेट, हाथों और पैरों में जलन होनी बंद हो जाएगी। सबसे पहले आप सौंफ, मिश्री और साबुत धनिया को समान मात्रा में लें और उन्हें पीस लें। भोजन करने के बाद आप एक चम्मच या दो चम्मच उस पाउडर का सेवन करें इससे आपकी जलन की समस्या बिलकुल ठीक हो जाएगी।
  5. त्वचा के लिए : धनिया के सेवन से हमारी त्वचा साफ होने के साथ-साथ ग्लो भी करने लगती है। धनिया का सेवन करके आप त्वचा के बहुत से रोगों से छुटकारा पा सकते हैं क्योंकि धनिया में कीटाणुनाशक, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं जो त्वचा के रोगों को दूर करते हैं।
  6. नकसीर के लिए : हरे धनिये की बीस से इक्कीस ग्राम पत्तियां लें और उसमें चुटकी भर कपूर को मिला लें और पीस लें। इसे पिसने के बाद इसका रस निकालकर छान लें। अब इस रस को एक-एक बूंद करके अपने नाक में डालें इससे आपकी नाक से निकलने वाला खून रुक जाएगा और नकसीर की समस्या ठीक हो जाएगी।
  7. पथरी के लिए : धनिया के प्रयोग से पथरी को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है। आप सुबह के समय हरे धनिया को पानी में उबाल लें और ठंडा होने पर उसे छान लें। आप इस पानी का सेवन प्रतिदिन सुबह के समय खाली पेट करें। इस पानी के सेवन से पथरी यूरिन के साथ बाहर निकल जाएगी और आपकी पथरी की समस्या ठीक हो जाएगी।
  8. पेट की बिमारियों के लिए : धनिया के कुछ पत्ते और जीरा लेकर थोड़े से पानी में डालें। इसके थोड़ी देर बाद उसमें चाय की पत्ती और सौंफ डाल दें और अपने स्वादनुसार उसमें चीनी और अदरक डालें। इसे थोड़ी देर उबालने के बाद ठंडा होने के लिए रख दें। हल्का गर्म रहने पर आप इस काढ़े का सेवन करें इससे आपकी पेट से संबंधित समस्या जैसे गैस ठीक हो जाएगी।
  9. मुंह के छालों के लिए : धनिया में किट्रोनेलोल नाम का एक एंटीसेप्टिक पाया जाता है जो मुंह के छालों और घावों को ठीक करने में मदद करता है। धनिया का प्रयोग बहुत से टूथपेस्ट में भी किया जाता है क्योंकि यह आपको खुलकर सांस लेने में बहुत मदद करता है और मुंह से बदबू को भी समाप्त कर देता है।
  10. मुंहासों के लिए : आप धनिया का जूस बनाकर उसमें हल्दी पाउडर मिलाकर लेप बना लें अब इस लेप को दिन में दो बार अपने चेहरे पर लगाएं और कुछ देर बाद इसे पानी से धो दें। इस क्रिया को करने से आपके चेहरे के दाग-धब्बे और मुंहासे ठीक हो जाएंगे और आपके चेहरे का ग्लो भी वापस आ जाएगा। अगर आपको घमोरिया हो गया है तो आप धनिया का पानी लेकर उससे स्नान करें आपकी घमोरिया की परेशानी ठीक हो जाएगी।
  11. रक्तचाप के लिए : धनिया हमारे शरीर के नर्वस सिस्टम की सहायता से रक्तचाप को कम करने में मदद करता है। धनिया रक्तचाप में दवा की तरह काम करता है जिसकी वजह से बहुत से रोगों से छुटकारा मिल जाता है।
  12. संक्रमण के लिए : धनिया के प्रयोग से बहुत से संक्रमण के कणों को अपने शरीर से दूर रखा जा सकता है। जब आप प्रतिदिन धनिया का सेवन करते हैं तो आपकी संक्रमण रोगों से रक्षा होती है क्योंकि इसके सेवन में पेट में होने वाले कीड़े और बैक्टीरिया मर जाते हैं जिससे पेट को आराम और ठंडक मिलती है।
  13. सेमोलिना बैक्टीरिया के लिए : धनिया में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो इस बैक्टीरिया को दूर रखने में मदद करते हैं। आप धनिया का प्रयोग अपने भोजन में कर सकते हैं इससे भी आपको लाभ होगा।
  14. हृदय के लिए : धनिया का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रण में रहता है और रक्तचाप भी ठीक रहता है जिससे हृदय की बहुत सी बीमारियों से हमारा बचाव होता है। धनिया में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हृदय के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं। धनिया के सेवन से दिल के दौरे की समस्या भी ठीक हो जाती है।
धनिया के नुकसान-(Coriander Side Effects In Hindi)
  1. एलर्जी : हो सकता है कि धनिया का सेवन करने से आपको चक्कर, सूजन, रैशेज, साँस लेने में कठिनाई आदि समस्याएं हो सकती हैं इसलिए धनिया का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
  2. कैंसर : धनिया का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से त्वचा पर सनबर्न की समस्या हो जाती है जिसके लंबे समय तक होने पर कैंसर का कारण भी बन सकती है।
  3. गर्भवती महिला : जब धनिया का सेवन अधिक हो जाता है तो शरीर की ग्रंथिय प्रभावित हो जाती है इसलिए गर्भवती महिलाएं और दूध पिलाने वाली महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से उनके भ्रूण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  4. लीवर : एक नजर से देखा जाए तो धनिया हमारे शरीर के लिए बहुत लाभकारी होता है लेकिन जब धनिया का जरूरत से ज्यादा सेवन किया जाता है तो उससे पित्त पर दवाब पड़ता है जिससे लीवर की परेशानी हो सकती है।
Disclaimer: इस लेख में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल सुझाव और जानकारी के रूप में लें, इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर/वैद्य/चिकित्सक की सलाह जरूर लें।


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परमवीर चक्र विजेता अब्‍दुल हमीद



अब्दुल हमीद

अब्दुल हमीद का जन्म 1 जुलाई, 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित धरमपुर नामक छोटे से गाँव में एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहम्मद उस्मान था। परिवार की आजीविका चलाने के लिए कपड़ों की सिलाई का कार्य किया जाता था। लेकिन अब्दुल हमीद का मन इस काम में बिल्कुल नहीं लगता था। उनका मन तो कुश्ती, दंगल और दाँव-पेंचों में रमता था, क्योंकि पहलवानी उन्हें विरासत में मिली थी। उनके पिता और नाना दोनों ही प्रसिद्ध पहलवान थे।

बचपन से ही लाठी चलाना, कुश्ती लड़ना, बाढ़ के समय नदी पार करना, फौज और युद्ध के सपने देखना तथा गुलेल से सटीक निशाना लगाना उनकी विशेषताओं में शामिल था। वे इन सभी कार्यों में अपने साथियों से आगे रहते थे।

उनका एक गुण सबसे उल्लेखनीय था—दूसरों की सहायता करना, जरूरतमंद लोगों के काम आना तथा अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना। वे अन्याय को किसी भी स्थिति में सहन नहीं करते थे।

ऐसी ही एक घटना उनके गाँव में घटी। एक गरीब किसान की फसल को जबरन काटकर ले जाने के लिए वहाँ के एक जमींदार ने लगभग पचास गुंडों को भेजा। जब अब्दुल हमीद को इस बात का पता चला, तो उन्हें यह अन्याय सहन नहीं हुआ। वे अकेले ही उन गुंडों से भिड़ गए। उनके साहस और दृढ़ता के सामने सभी गुंडों को पीछे हटना पड़ा और अंततः उस गरीब किसान की फसल बच गई।

एक अन्य अवसर पर उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना गाँव में आई भीषण बाढ़ के दौरान डूब रही दो युवतियों की जान बचाई। इस प्रकार उन्होंने अदम्य साहस, परोपकार और मानवता का परिचय दिया।



अब्दुल हमीद का बचपन

अब्दुल हमीद की बचपन से ही इच्छा एक वीर सैनिक बनने की थी। वे अपनी दादी से अक्सर कहा करते थे—“मैं फौज में भर्ती होऊँगा।” जब उनकी दादी कहतीं—“अपने पिता की सिलाई की मशीन चलाओ,” तब वे दृढ़ता से उत्तर देते—“हम जइब फौज में! तोहरे रोकले ना रुकब हम, समझलू।”

दादी को उनकी जिद के आगे झुकना पड़ता और कहना पड़ता—“अच्छा-अच्छा, जइय फौज में।” यह सुनकर हमीद बहुत प्रसन्न हो जाते। इसी प्रकार वे अपने पिता मोहम्मद उस्मान से भी सेना में भर्ती होने की जिद करते थे और कपड़ा सिलने के पारिवारिक व्यवसाय को अपनाने से इंकार कर देते थे।

सेना में भर्ती

इक्कीस वर्ष की आयु में अब्दुल हमीद जीविका की तलाश में रेलवे में भर्ती होने के लिए गए, किंतु उनके संस्कार और देशभक्ति की भावना उन्हें सेना में भर्ती होकर राष्ट्र-सेवा करने के लिए प्रेरित कर रही थी। अतः उन्होंने वर्ष 1954 में एक सैनिक के रूप में अपने सैन्य जीवन की शुरुआत की।

27 दिसम्बर, 1954 को उन्हें ग्रेनेडियर्स इन्फैंट्री रेजिमेंट में शामिल किया गया। जम्मू-कश्मीर में तैनाती के दौरान वे पाकिस्तान से आने वाले घुसपैठियों पर कड़ी निगरानी रखते थे और उन्हें करारा जवाब देते थे।

इसी दौरान उन्होंने इनायत अली नामक एक कुख्यात घुसपैठिये और डाकू को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। उनके इस साहसिक कार्य से प्रभावित होकर सेना ने उन्हें पदोन्नति प्रदान की और वे लांस नायक बना दिए गए।

वर्ष 1962 में जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया, उस समय अब्दुल हमीद पूर्वोत्तर सीमांत क्षेत्र (नेफा—वर्तमान अरुणाचल प्रदेश) में तैनात थे। यद्यपि उस युद्ध में उन्हें अपनी वीरता का व्यापक प्रदर्शन करने का अवसर नहीं मिल सका, फिर भी उनके मन में सदैव यह आकांक्षा बनी रही कि वे युद्धभूमि में असाधारण पराक्रम दिखाकर शत्रु को परास्त करें और मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वोच्च योगदान दें।

1965 का युद्ध

8 सितम्बर 1965 की रात पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण किए जाने पर भारतीय सेना के जवान उसका मुकाबला करने के लिए डटकर खड़े हो गए। वीर अब्दुल हमीद तरनतारन जिले के खेमकरण सेक्टर में सेना की अग्रिम पंक्ति में तैनात थे।

पाकिस्तान ने उस समय के लगभग अपराजेय माने जाने वाले अमेरिकी पैटन टैंकों के साथ खेमकरण सेक्टर के असल उताड़ गाँव पर हमला कर दिया। भारतीय सैनिकों के पास न तो पर्याप्त टैंक थे और न ही अत्याधुनिक भारी हथियार, किंतु उनके पास मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर कर देने का अदम्य साहस था। भारतीय सैनिक अपनी साधारण .303 रायफल और एल.एम.जी. के सहारे पैटन टैंकों का सामना कर रहे थे।

हवलदार वीर अब्दुल हमीद के पास एक "गन-माउंटेड जीप" थी, जो विशाल पैटन टैंकों की तुलना में मानो एक खिलौना प्रतीत होती थी। किंतु उन्होंने असाधारण साहस और युद्ध-कौशल का परिचय देते हुए अपनी जीप पर लगी गन से पैटन टैंकों के कमजोर हिस्सों पर सटीक निशाना साधना प्रारम्भ किया और एक-एक करके उन्हें ध्वस्त करने लगे।

अब्दुल हमीद के इस अद्वितीय पराक्रम को देखकर अन्य सैनिकों का भी उत्साह बढ़ गया। देखते ही देखते पाकिस्तानी सेना में भगदड़ मच गई। वीर अब्दुल हमीद ने अपनी गन-माउंटेड जीप से सात पाकिस्तानी पैटन टैंकों को नष्ट कर दिया। कुछ ही समय में भारत का असल उताड़ गाँव पाकिस्तानी पैटन टैंकों की कब्रगाह बन गया।

किन्तु पीछे हटती पाकिस्तानी सेना का पीछा करते समय उनकी जीप पर एक गोला आकर गिरा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। अगले दिन, 9 सितम्बर 1965 को उन्होंने वीरगति प्राप्त की। हालांकि, उनके निधन की आधिकारिक घोषणा 10 सितम्बर को की गई।

सम्मान और पुरस्कार

1965 के भारत-पाक युद्ध में असाधारण वीरता और अद्वितीय साहस का परिचय देने के लिए हवलदार अब्दुल हमीद को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से अलंकृत किया गया।

28 जनवरी 2000 को भारतीय डाक विभाग ने वीरता पुरस्कार विजेताओं के सम्मान में पाँच डाक टिकटों का एक विशेष सेट जारी किया, जिसमें वीर अब्दुल हमीद के सम्मान में तीन रुपये मूल्य का एक सचित्र डाक टिकट भी शामिल था। इस डाक टिकट पर जीप पर सवार होकर रिकॉइललेस राइफल से निशाना साधते हुए वीर अब्दुल हमीद का चित्र अंकित किया गया है।

चौथी ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट ने उनकी स्मृति में उनकी कब्र पर एक समाधि का निर्माण कराया है। प्रत्येक वर्ष उनकी शहादत दिवस पर वहाँ मेले का आयोजन किया जाता है। असल उताड़ गाँव के निवासी उनके नाम पर एक डिस्पेंसरी, पुस्तकालय और विद्यालय का संचालन करते हैं।

सैन्य डाक सेवा ने भी 10 सितम्बर 1979 को उनके सम्मान में एक विशेष आवरण (Special Cover) जारी किया था। वीर अब्दुल हमीद की वीरता, राष्ट्रभक्ति और बलिदान आज भी देशवासियों को प्रेरित करते हैं। समूचा राष्ट्र उनके अद्वितीय साहस को श्रद्धापूर्वक नमन करता है।


अब्दुल हमीद प्रश्नोत्तरी

अब्दुल हमीद ने कितने टैंक तोड़े थे?

परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965 Indo-Pak War) में अपना पराक्रम दिखाया था। 'असल उत्तर की लड़ाई' (Battle of Asal Uttar) में हमीद ने अकेले ही पाकिस्तान के आठ पैटन टैंक बर्बाद कर दिए। पंजाब के तरनतारन जिले में एक गाँव है—असल उताड़।

अब्दुल हमीद ने दुश्मन के टैंकों को कैसे नष्ट किया?

इस बार हमीद ने देर न करते हुए अपनी जीप संभाली और टैंकों की ओर निकल पड़े। सामने से फायरिंग भी हो रही थी, लेकिन हमीद को कपास की खड़ी फसल का लाभ मिला और दुश्मन उन्हें सीधे निशाने पर नहीं ले सका। हमीद ने पहले प्रमुख टैंक को नष्ट किया और फिर अपनी स्थिति बदलकर दो और टैंकों को ध्वस्त कर दिया।

वीर अब्दुल हमीद कैसे शहीद हुए थे?

साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान वीर अब्दुल हमीद ने पाकिस्तानी दुश्मनों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी थी। उन्होंने पाकिस्तान के सात पैटन टैंकों के परखच्चे उड़ा दिए थे। इसी दौरान वे शहीद हो गए थे।

अब्दुल हमीद कब शहीद हुए थे?

युद्धक्षेत्र में ही 10 सितम्बर, 1965 को अब्दुल हमीद शहीद हुए, लेकिन तब तक वे अप्रतिम शौर्य की अविस्मरणीय दास्तान लिख चुके थे। इससे पहले कि अब्दुल हमीद की जाँबाज़ी का किस्सा याद करें, आइए उनके निजी जीवन के बारे में जानते हैं। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धरमपुर गाँव में 1 जुलाई, 1933 को हमीद का जन्म हुआ था।

अब्दुल हमीद को परमवीर चक्र कब मिला?

10 सितम्बर, 1965 को अब्दुल हमीद ने देश पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। मरणोपरांत परमवीर चक्र (भारत का सर्वोच्च वीरता पदक) से सम्मानित अब्दुल हमीद को 'टैंक डिस्ट्रॉयर' के नाम से जाना जाता है।

1965 के युद्ध में शहीद वीर अब्दुल हमीद को कौन-से वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया?

उनकी नज़र 4 ग्रेनेडियर्स के कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद के पोस्टर पर पड़ी। अब्दुल हमीद को 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में खेमकरण सेक्टर में पाकिस्तान के कई पैटन टैंकों को नष्ट करने के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

अब्दुल हमीद को परमवीर चक्र क्यों मिला?

अविचलित रहकर सी.क्यू.एम.एच. अब्दुल हमीद ने लगातार गोलीबारी जारी रखी और गंभीर रूप से घायल होने से पहले अपनी टुकड़ी को पाकिस्तान के सात टैंकों को नष्ट करने के लिए प्रेरित किया। उनकी विशिष्ट बहादुरी, प्रेरक नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।



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एक अंग्रेज जिलाधिकारी पर श्री राम कृपा



मधुरांतकम चेंगलपेट जिले का एक छोटा-सा शहर है, जो मद्रास (वर्तमान में चेन्नई) से पांडिचेरी के रास्ते पर है। वहां पर श्री रामचन्द्र जी का एक छोटा-सा मंदिर है। उस मंदिर के नजदीक एक बड़ी झील भी है। मद्रास से पांडिचेरी जाने वालों को उसी सड़क से जाना पड़ता है, जो मधुरांतकम की उस झील के बांध पर है। वह झील इतनी सुन्दर और काफी बड़ी है कि जिन लोगों को उस रास्ते पर जाना पड़ता है, उन लोगों का मन उस झील की तरफ आकर्षित हो जाता है और वे लोग उस झील के सुन्दर और मनोहर दृश्य को कभी भूल नहीं सकते।
उपर्युक्त झील और श्री रामचन्द्र जी के मंदिर के बारे में एक विचित्र लेकिन सच्ची कहानी प्रचलित है, जिससे मालूम होता है कि एक ईसाई अंग्रेज साहब भी श्री रामचन्द्र जी के भक्त बन सके और उनको भगवान के दर्शन भी मिले थे।
bhagwan shri ram


बात १८८२ ई० की है। उस समय लियानल प्राइस साहब चेंगलपेट जिले के कलक्टर थे। उनको मधुरांतकम की झील देखने की बड़ी इच्छा हुई। झील इतनी बड़ी थी कि उसके आस-पास के कई गाँवों की खेती बारी के लिये उसका जल पर्याप्त था। लेकिन दुर्भाग्य से हर साल बरसात में जब झील भर जाती थी, तब उसका बाँध टूटकर सारा पानी बाहर चला जाता था और झील हमेशा सूखी-की-सूखी ही रह जाती थी।
इलाके वाले प्रतिवर्ष गर्मी के दिनों में उस झील के बांध की मरम्मत करते थे। हर साल मरम्मत के समय मि० प्राइस खुद वहाँ आकर पड़ाव डालते और अपनी मौजूदगी में ही सारा काम कराते थे। बरसात में बाढ़ से इसका बाँध हर साल टूट जाया करता था। कलक्टर साहब की झील की बड़ी चिंता होती थी। सन् १८८२ में भी सदा की तरह झील की मरम्मत शुरू हुई। स्वयं कलेक्टर साहब उसका निरीक्षण कर रहे थे। एक बार आप मंदिर के पास से निकले। उनकी इच्छा हुई कि चलकर मन्दिर देख आवें।
वे मंदिर में आये। ब्राह्मणों ने उनको मंदिर दिखाया। साहब ने देखा कि एक स्थान पर ढेरों पत्थर जमा हैं। साहब ने ब्राह्मणों से पत्थरों के जमा कर रखने का कारण पूछा। ब्राह्मणों ने जवाब दिया- 'साहब! श्री सीता जी का मंदिर बनाना है। लेकिन उसके लिये हम लोग सिर्फ पत्थर ही जमा कर सके हैं। शेष काम के लिये काफी धन जमा करने में हम असमर्थ हैं। ऐसे सत्कार्य के सफलतापूर्वक सिद्ध होने में धन का अभाव ही एक बाधा हो रही है। ' 'मुझे भी तुम्हारी देवी जी से एक प्रार्थना करने दो।'
वहां के भक्त ब्राह्मण अपनी-अपनी मनोवृत्ति के अनुसार भगवान श्री रामचंद्र जी और माता सीताजी के गुणों और महिमाओं का वर्णन करने लगे। उसे सुनकर साहब ने उन लोगों से पूछा- 'क्या तुम लोग विश्वास करते हो कि तुम्हारी देवी भक्तों की मनोकामना पूरी करेंगी ?"
ब्राह्मणों ने दृढ़तापूर्वक जवाब दिया- 'निस्सन्देह।' कलक्टर साहब ने फिर पूछा-'अच्छा, यदि मैं भी तुम्हारी देवी जी से कुछ प्रार्थना करूं तो मेरी भी इच्छा उनकी कृपा से पूरी होगी?' ब्राह्मणों ने जवाब दिया जरूर।' तब साहब ने उन लोगों से कहा, 'यदि तुम लोगों की बात सच हो तो मैं भी तुम्हारी देवी जी से प्रार्थना करता हूँ कि इस झील की रक्षा, जिसकी मरम्मत हर साल हो रही है और पीछे जिसका नाश भी होता आ रहा है, यदि तुम्हारी देवी जी की कृपा से हो जाये, तो तुम्हारी देवी जी का मंदिर बनाने का भार मैं अपने ऊपर लूँगा।' प्रार्थना करके साहब वहां से लौट गए। मरम्मत का काम पूरा हो जाने के बाद साहब अपने घर चले गये।
फिर वर्षा शुरू हुई। साहब को बड़ी चिंता लगी। अबकी बार साहब घर में चुप न बैठ सके। उन्होंने मधुरांतकम में अपना पड़ाव डाला। एक रात को बहुत जोर से पानी बरस रहा था। इतने जोर से वृष्टि हो रही थी कि उस समय बाहर निकलना भी बहुत कठिन था। साहब बहुत अधीर हो उठे। उनको जरा भी चैन न मिला। वे तुरंत हाथ में छतरी लेकर झील की तरफ लपके। उनके दो नौकर, जो उस समय जाग रहे थे, पीछे-पीछे चले। उनको साहब के काम पर बड़ा अचरज हो रहा था।
साहब झील के बांध पर आकर खड़े हो गये। आकाश से मूसलाधार वृष्टि हो रही थी। रह-रहकर बिजली चमकती थी। बिजली के प्रकाश में साहब ने देखा कि झील पानी से ठसाठस भरी है। अब यदि थोड़ा भी जल उसमें ज्यादा पड़ जाएगा तो बस, सारा परिश्रम व्यर्थ हो जायेगा।
साहब घबड़ाये हुए वहाँ आकर खड़े हो गये, जहाँ हर साल बांध टूटता था। लेकिन वहाँ उन्हें कहीं टूट जाने का कोई लक्षण नहीं दिखाई पड़ा। अकस्मात् वहाँ बिजली की रोशनी दीख पड़ी। उस तेज:पुंज के बीच में श्याम और गौर वर्ण के दो सुन्दर युवक हाथ में धनुष-बाण लिए खड़े नजर आये। उन दोनों के सुन्दर और सुदृढ़ शरीर और उनके अनुपम रूप-लावण्य को देखकर साहब को बड़ा अचंभा हुआ। एक साथ आश्चर्य और भय का अनुभव होने लगा। वे एकाग्र दृष्टि से उसी तरफ देखने लगे, जहाँ दोनों वीर खड़े थे। अब साहब को पक्का विश्वास हो गया कि वे दोनों अलौकिक और अतुलनीय हैं। साहब अपनी छतरी और टोपी दूर फेंक कर उन करुणा मूर्तियों के पैरों पर गिर पड़े और हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगे।
नौकरों को साहब का यह अद्भुत आचरण देखकर संदेह हुआ कि कहीं हमारे साहब पागल तो नहीं हो गये। वे दोनों दौड़कर साहब के पास आये और घबड़ाये हुए से पूछने लगे– 'साहब! आपको क्या हो गया?" साहब उन लोगों से गद्गद स्वर में कहने लगे- 'नादानो। उधर देखते नहीं हो ?' देखो उधर, उधर ! कैसे सुन्दर दो सुन्दर और बलवान् युवक हाथों में धनुष-बाण लिये खड़े हैं। उनके चारों ओर बिजली की रोशनी सी  फैल रही है। उनमें एक हैं श्याम वर्ण के और दूसरे गौर वर्ण के। उनकी आँखों से करुणा की मानो वर्षा हो रही है। उनको देखते ही हमारी व्यग्रता मिटती जा रही है। अभी उन दोनों को देख लो। उधर देखो, उधर !!!'
नौकरों को कुछ भी दिखाई नहीं पड़ा। साहब को पूरा विश्वास हो गया कि स्वयं श्री रामचन्द्रजी और लक्ष्मण जी ने ही झील की रक्षा की। दूसरे दिन सवेरे ही मधुरांतकम के लोगों ने पहली बार देखा कि झील पानी से परिपूर्ण है। लोगों के आनन्द की कोई सीमा न थी। साहब ने अपने कथनानुसार दूसरे ही दिन से श्रीसीताजी के मंदिर का काम शुरू कर दिया। जब तक मंदिर का काम पूरा न हुआ, तब तक वे वहीं रहे। जिस दिन झील की रक्षा हुई, उस दिन से वहाँ के श्री रामचंद्र जी का नाम पड़ा 'एरि कात्त पेरुमाल' अर्थात 'भगवान जिसने झील की रक्षा की है।'
श्री जानकी जी के मंदिर में एक पत्थर पर तमिल में यह बात खुदी हुई है, जिसके माने यह है कि, 'यह धर्म कार्य जान कंपनी की जागीर - कलेक्टर लियानल प्राइसका है।' इस विचित्र घटना से हम लोगों को मालूम होता है कि एक अंग्रेज ईसाई सज्जन श्री रामचंद्र जी के भक्त बनकर उनके दर्शन पा सके और श्रीसीता जी के मन्दिर के निर्माता बने। जो मनुष्य भगवान का सच्चा भक्त है और भगवान पर विश्वास करके उनको मानता है, वह चाहे जिस कुल का भी क्यों न हो, उसपर दया सिन्धु भगवान की पूर्ण रूप से अनुकम्पा रहती है।

संकलन


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