क्षत्रिय - राजपूत के गोत्र और उनकी वंशावली



Kshatriya - Rajput Clan and their Lineage

Thakur Kshatriya Rajput

क्षत्रिय - राजपूत - ठाकुर

राजपूतों के वंश

"दस रवि से दस चन्द्र से, बारह ऋषिज प्रमाण।
चार हुतासन सों भये, कुल छत्तीस वंश प्रमाण।
भौमवंश से धाकरे, टांक नाग अनुमान।
चौहानी चौबीस बँटि, कुल बासठ वंश प्रमाण।।"

अर्थ : दस सूर्यवंशी क्षत्रिय, दस चन्द्रवंशी, बारह ऋषिवंशी एवं चार अग्निवंशी—ये कुल मिलाकर छत्तीस क्षत्रिय वंशों का प्रमाण माने गए हैं। बाद में भौमवंश तथा नागवंश के क्षत्रियों को सम्मिलित करने के पश्चात्, और जब चौहान वंश चौबीस अलग-अलग शाखाओं में विभक्त होने लगा, तब क्षत्रियों के बासठ वंशों का उल्लेख प्राप्त होता है।

क्षत्रिय- राजपूत के गोत्र और उनकी वंशावली

इसे भी पढ़े - राजपूत - क्षत्रिय वंश की कुल देवियाँ

सूर्य वंश की शाखायें
--------------------------
1. कछवाह, 2. राठौड, 3. बडगूजर, 4. सिकरवार, 5. सिसोदिया , 6. गहलोत, 7. गौर, 8. गहलबार, 9. रेकबार, 10. जुनने, 11. बैस, 12 रघुवंशी
चन्द्र वंश की शाखायें
---------------------------
1. जादौन, 2. भाटी, 3. तोमर, 4. चन्देल, 5. छोंकर, 6. होंड, 7. पुण्डीर, 8. कटैरिया, 9. दहिया,

अग्नि वंश की चार शाखायें
----------------------------
1. चौहान, 2. सोलंकी, 3. परिहार, 4. पमार

ऋषि वंश की बारह शाखायें
----------------------------
1. सेंगर, 2. दीक्षित, 3. दायमा, 4. गौतम, 5. अनवार (राजा जनक के वंशज), 6. विसेन, 7. करछुल, 8. हय, 9. अबकू तबकू, 10. कठोक्स, 11. द्लेला 12. बुन्देला

चौहान वंश की चौबीस शाखायें
----------------------------
1. हाडा, 2. खींची, 3. सोनीगारा, 4. पाविया, 5. पुरबिया, 6. संचौरा, 7. मेलवाल, 8. भदौरिया, 9. निर्वाण, 10. मलानी, 11. धुरा, 12. मडरेवा, 13. सनीखेची, 14. वारेछा, 15. पसेरिया, 16. बालेछा, 17. रूसिया, 18. चांदा, 19. निकूम, 20. भावर, 21. छछेरिया, 22. उजवानिया, 23. देवडा, 24. बनकर


Kshatriya - Rajput
राजपूत कितने प्रकार के होते हैं - प्रमुख क्षत्रिय वंश
How many types of Rajput are there - Major Kshatriya clan

राजपूत कितने प्रकार के होते हैं - प्रमुख क्षत्रिय वंश

How many types of Rajput are there - Major Kshatriya Clans

रघुवंश - रघुवंशी का अर्थ है रघु के वंशज। अयोध्या (कोसल देश) के सूर्यवंशी राजा इक्ष्वाकु के वंश में राजा रघु हुए। राजा रघु एक महान राजा थे। इनके नाम पर इस वंश का नाम रघुवंश पड़ा तथा इस वंश के वंशजों को रघुवंशी कहा जाने लगा। बौद्ध काल तक रघुवंशियों को इक्ष्वाकु, रघुवंशी तथा सूर्यवंशी क्षत्रिय कहा जाता था। यह वंश सूर्यवंश, इक्ष्वाकु वंश, ककुत्स्थ वंश व रघुवंश नाम से जाना जाता है।

आदिकाल में ब्रह्माजी ने भगवान सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु को पृथ्वी का प्रथम राजा बनाया था। भगवान सूर्य के पुत्र होने के कारण मनुजी सूर्यवंशी कहलाए तथा उनसे चला यह वंश सूर्यवंश कहलाया। अयोध्या के सूर्यवंश में आगे चलकर प्रतापी राजा रघु हुए। राजा रघु से यह वंश रघुवंश कहलाया। इस वंश में इक्ष्वाकु, ककुत्स्थ, हरिश्चन्द्र, मान्धाता, सगर, भगीरथ, अम्बरीष, दिलीप, रघु, दशरथ और राम जैसे प्रतापी राजा हुए हैं।

नागवंश - नागवंशी क्षत्रियों का भारत और भारत के बाहर एक बड़े भूभाग पर लंबे समय तक शासन रहा है। प्राचीन काल में नागवंशियों का राज्य भारत के कई स्थानों पर तथा सिंहल में भी था। पुराणों में स्पष्ट लिखा है कि सात नागवंशी राजा मथुरा पर राज्य करेंगे, उसके पश्चात् गुप्त राजाओं का राज्य होगा।

नौ नाग राजाओं के जो प्राचीन सिक्के मिले हैं, उन पर 'बृहस्पति नाग', 'देवनाग', 'गणपति नाग' इत्यादि नाम मिलते हैं। ये नागगण विक्रम संवत् 150 और 250 के बीच राज्य करते थे। इन नव नागों की राजधानी कहाँ थी, इसका ठीक पता नहीं है, पर अधिकांश विद्वानों का मत यही है कि उनकी राजधानी 'नरवर' थी।

मथुरा और भरतपुर से लेकर ग्वालियर और उज्जैन तक का भू-भाग नागवंशियों के अधिकार में था। कृष्णकाल में नाग जाति ब्रज में आकर बस गई थी। इस जाति की अपनी एक पृथक संस्कृति थी। कालिय नाग को संघर्ष में पराजित करके श्रीकृष्ण ने उसे ब्रज से निर्वासित कर दिया था, किन्तु नाग जाति यहाँ प्रमुख रूप से बसी रही। मथुरा पर उन्होंने काफी समय तक शासन भी किया।

इतिहास में यह बात प्रसिद्ध है कि महाप्रतापी गुप्तवंशी राजाओं ने शक अथवा नागवंशियों को परास्त किया था। प्रयाग के किले के भीतर जो स्तम्भलेख है, उसमें स्पष्ट लिखा है कि महाराज समुद्रगुप्त ने गणपति नाग को पराजित किया था। इस गणपति नाग के सिक्के बहुत मिलते हैं।

महाभारत में भी कई स्थानों पर नागों का उल्लेख है। पाण्डवों ने नागों के हाथ से मगध राज्य छीना था। खाण्डव वन जलाते समय भी बहुत से नाग नष्ट हुए थे। जिसका अर्थ यह हुआ कि मगध, खाण्डवप्रस्थ, तक्षशिला (तक्षक नाग द्वारा बसाई गई थी। यहाँ का प्रथम राजा तक्षक नाग था, जिसके नाम पर तक्षक नागवंश चला) तथा मथुरा आदि महाभारत काल में इनके प्रमुख राज्य थे।

शिशुनाग के नाम पर शिशुनाग वंश मगध राज्य (दक्षिण बिहार, भारत) पर लंबे समय तक शासन करने के लिए जाना जाता है। महाभारत में ऐरावत नाग के वंश में उत्पन्न कौरव्य नाग की पुत्री का विवाह भी अर्जुन से हुआ बताया गया है, जब एक गलती के कारण अर्जुन युधिष्ठिर के आदेशानुसार 12 वर्ष तक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कर रहे थे।

सोमवंशी ठाकुर - जो सोमवंशी पश्चिमी प्रयाग की ओर बसे, उनका गोत्र भारद्वाज है क्योंकि भारद्वाज आश्रम भी उसी क्षेत्र में था। सोमवंशी क्षत्रिय मुख्यतः उत्तर प्रदेश के फैजाबाद, बहराइच, अम्बेडकर नगर, जौनपुर, प्रतापगढ़, गोंडा, वाराणसी, बरेली, सीतापुर, कानपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, शाहजहाँपुर और इलाहाबाद में पाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त पंजाब, दिल्ली तथा बिहार प्रान्त में भी सोमवंशी क्षत्रिय पाए जाते हैं।

गुरुग्राम, रोहतक, हिसार, पंजाब एवं दिल्ली के सोमवंशी क्षत्रियों का निवास हस्तिनापुर से सम्बन्धित माना जाता है तथा बिहार प्रदेश के सोमवंशी क्षत्रियों का सम्बन्ध कौशाम्बी, प्रतिष्ठानपुर (वर्तमान झूँसी, प्रयागराज) और हरदोई क्षेत्र से माना जाता है।


उज्जैनीय क्षत्रिय - ये क्षत्रिय अग्निवंशी परमार की शाखा हैं। गोत्र शौनक है। ये राजा विक्रमादित्य और भोज की सन्तान माने जाते हैं। ये लोग अवध और आगरा प्रान्त के पूर्वी जिलों में पाए जाते हैं। इस वंश की एक बहुत बड़ी रियासत डुमराँव, बिहार प्रान्त के शाहाबाद जिले में है। वर्तमान में डुमराँव के राजा कलमसिंह जी सांसद हैं। इस वंश के क्षत्रिय बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर, दलीपपुर, डुमराँव, मेठिला, बक्सर, केसठ, चौगाई आदि स्थानों में तथा मुजफ्फरपुर, पटना, गया, मुंगेर और छपरा आदि जिलों में बसे पाए जाते हैं।

कछवाहा (कछवाहे) - ये सूर्यवंशी क्षत्रिय कुश के वंशज हैं। कुशवाहा को कछवाहा राजावत भी कहते हैं। गोत्र गौतम, गुरु वशिष्ठ, कुलदेवी दुर्गा मंगला, वेद सामवेद, निशान पचरंगा, इष्ट रामचन्द्र तथा वृक्ष वट है। इनके प्रमुख ठिकाने जयपुर, अलवर (राजस्थान), रामपुर, गोपालपुरा, लहार, मछंद (उत्तर प्रदेश) तथा अन्य जनपदों में पाए जाते हैं।

गहरवार क्षत्रिय - इनका गोत्र कश्यप है। गहरवार, राठौरों की एक शाखा है। महाराजा जयचन्द के भाई माणिकचन्द्र को विजयपुर-माड़ा की गहरवारी रियासत का आदि संस्थापक कहा गया है। ये क्षत्रिय इलाहाबाद, बनारस, मिर्जापुर, रामगढ़, श्रीनगर आदि में पाए जाते हैं। इनकी एक शाखा बुन्देला है। बिहार में बागही, करवासी और गोड़ीवाँ में भी गहरवार पाए जाते हैं।

गहलौत - ये क्षत्रिय सूर्यवंशी हैं। रामचन्द्र के छोटे पुत्र लव के वंशज माने जाते हैं। गोत्र वैशम्पायन, वेद यजुर्वेद, गुरु वशिष्ठ, नदी सरयू, इष्ट एकलिंग शिव तथा ध्वज लाल-सुनहरा है, जिस पर सूर्यदेव का चिह्न अंकित रहता है। इनकी प्रधान गद्दी चित्तौड़ (वर्तमान उदयपुर) है। इस वंश के क्षत्रिय मेवाड़, राजपूताना, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा बिहार प्रान्त के मुंगेर, मुजफ्फरनगर और गया जिलों में पाए जाते हैं। इसकी 24 शाखाएँ थीं, जिनमें से अधिकांश शाखाएँ समाप्त हो गईं।

गोहिल क्षत्रिय - इस वंश का पहला राजा गोहिल था, जिसने मारवाड़ के अन्तर्गत बड़गढ़ में राज्य किया। इनका गोत्र कश्यप है।

गौड़ क्षत्रिय - इनका गोत्र भारद्वाज है। यह वंश भरत से चला माना जाता है। ये मारवाड़, अजमेर, राजगढ़, शिवपुर, बड़ौदा, शिवगढ़, कानपुर, सीतापुर, उन्नाव, इटावा, शाहजहाँपुर और फर्रुखाबाद आदि जिलों में पाए जाते हैं। ये क्षत्रिय सूर्यवंशी हैं।

गौतम क्षत्रिय - इनका गोत्र गौतम है। ये उत्तर प्रदेश तथा बिहार के मुजफ्फरनगर, आरा, छपरा, दरभंगा आदि जिलों में पाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से फतेहपुर और कानपुर जिलों में इनकी उपस्थिति है।

चन्देल क्षत्रिय - इनका गोत्र चन्द्रायण तथा गुरु गोरखनाथ जी हैं। ये क्षत्रिय बिहार प्रान्त में गिद्धौर नरेश क्षेत्र, कानपुर, मिर्जापुर, जौनपुर तथा दरभंगा जिले की आलमनगर और बंगरहरा रियासतों में पाए जाते थे। बस्तर राज्य (मध्य प्रदेश) तथा बुन्देलखण्ड में भी ये यत्र-तत्र पाए जाते हैं।

चावड़ा क्षत्रिय - ये अग्निवंशी हैं। इनका गोत्र कश्यप है। यह परमार वंश की 16वीं शाखा मानी जाती है। चावड़ा एक प्राचीन राजवंश है। ये दक्षिण भारत तथा काठियावाड़ में पाए जाते हैं। इस वंश के विवाह-संबंध स्थान-भेद के अनुसार समान क्षत्रियों के साथ होते हैं।

चौहान क्षत्रिय - ये क्षत्रिय अग्निवंशी हैं। इनका गोत्र वत्स है। इस वंश की 24 शाखाएँ हैं— 1. हाड़ा, 2. खींची, 3. भदौरिया, 4. सोनगिरा, 5. देवड़ा, 6. पाविया (पावागढ़ के नाम से), 7. संचोरा, 8. गैलवाल, 9. निर्वाण, 10. मालानी, 11. पूर्विया, 12. सूरा, 13. नाडडेचा, 14. चाचेरा, 15. संकेचा, 16. मुरेचा, 17. बालेचा, 18. तस्सेरा, 19. रोसिया, 20. चान्दू, 21. भावर, 22. वंकट, 23. भोपले तथा 24. धनारिया।

इनके वर्तमान ठिकाने छोटा उदयपुर, सोनपुर राज्य (उड़ीसा), सिरोही (राजस्थान), बरिया (मध्य प्रदेश), मैनपुरी, प्रतापनेर, राजौर, एटा, ओयल (लखीमपुर), चक्रनगर, बरिया राज्य, बून्दी, कोटा, नौगाँव (आगरा), बलरामपुर तथा बिहार में पाए जाते हैं।

जोड़जा क्षत्रिय - ये क्षत्रिय श्रीकृष्ण के शाम्ब नामक पुत्र की सन्तान माने जाते हैं। ये मोरबी राज्य, कच्छ राज्य, राजकोट तथा नवानगर (गुजरात) में पाए जाते हैं।

झाला क्षत्रिय - इनका गोत्र कश्यप है। इनके प्रमुख ठिकाने बीकानेर, काठियावाड़ तथा राजपूताना आदि में हैं।

डोडा क्षत्रिय - यह अग्निवंशी परमार की शाखा है। इनका गोत्र आदि परमारों के समान है। प्राचीनकाल में बड़ौदा डोडा की राजधानी थी। मेरठ और हापुड़ के आसपास इनका राज्य था। वर्तमान समय में पिपलोदा (मालवा) तथा सरदारगढ़ (मेवाड़) इनके प्रमुख स्थान हैं। ये मुरादपुर, बाँदा, बुलन्दशहर, मेरठ, सागर (मध्य प्रदेश) आदि में पाए जाते हैं।

तोमर क्षत्रिय - इनका गोत्र गर्ग है। ये जोधपुर, बीकानेर, पटियाला, नाभा और धौलपुर आदि में पाए जाते हैं। इनका मुख्य घराना तुमरगढ़ है। इनकी एक प्रशाखा जैरावत अथवा जैवार नाम से झाँसी जिले में यत्र-तत्र आबाद है।

दीक्षित क्षत्रिय - यह वंश सूर्यवंशी है। इनका गोत्र कश्यप है। इस वंश के लोग उत्तर प्रदेश और बघेलखण्ड में यत्र-तत्र पाए जाते हैं। इस वंश के क्षत्रियों ने नेवतनगढ़ में राज्य किया, इसलिए ये नेवतनी कहलाए। ये लोग छपरा जिले में भी पाए जाते हैं। दीक्षित लोग विवाह-संबंध स्थान-भेद के अनुसार समान क्षत्रियों में करते हैं।

निकुम्भ क्षत्रिय - इनका गोत्र वशिष्ठ है। ये शीतलपुर, दरभंगा, आरा, भागलपुर आदि जिलों में पाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश में भी ये यत्र-तत्र पाए जाते हैं। ये सूर्यवंशी क्षत्रिय हैं। राजा इक्ष्वाकु के 13वें वंशधर निकुम्भ माने जाते हैं।

परमार क्षत्रिय - ये अग्निवंशी हैं। इनका गोत्र गर्ग है। इस वंश की प्राचीन राजधानी चन्द्रावती थी। मालवा में इनकी प्रथम राजधानी धारा नगरी थी, जिसके पश्चात् उज्जैन को राजधानी बनाया गया। विक्रमादित्य इस वंश के सबसे प्रतापी राजा हुए, जिनके नाम पर विक्रम संवत् प्रारम्भ हुआ। इसी वंश में सुप्रसिद्ध राजा मुंज और भोज हुए। इनकी 35 शाखाएँ हैं। इन क्षत्रियों के प्रमुख ठिकाने तथा राज्य नरसिंहगढ़, दाँता राज्य, सूंथ, धार, देवास, पंचकोट, नीलगाँव (उत्तर प्रदेश) तथा अन्य स्थानों पर पाए जाते हैं।

परिहार क्षत्रिय - ये क्षत्रिय अग्निवंशी हैं। इनका गोत्र कश्यप तथा गुरु वशिष्ठ हैं। इनके प्रमुख ठिकाने हमीरपुर, गोरखपुर, नागौद, सोहरतगढ़, उरई (जालौन) आदि में हैं। इस वंश की 19 शाखाएँ हैं, जो भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से जानी जाती हैं।

बघेल क्षत्रिय - इनका गोत्र भारद्वाज है। यह सोलंकियों की एक शाखा है। बघेलों को सोलंकी वंश के राजा व्याघ्रदेव की सन्तान माना गया है। इन्हीं व्याघ्रदेव के नाम से सन् 615 ई. में बघेलखण्ड प्रसिद्ध हुआ। रीवा राज्य, सोहाबल, मदरवा, पाण्डू, पेथापुर, नयागढ़, रणपुर, देवधर (मध्य प्रदेश) तथा तिर्वा (फर्रुखाबाद) बघेलों के प्रमुख ठिकाने हैं।

बल्ल क्षत्रिय - यह वंश रामचन्द्र के पुत्र लव से चला माना जाता है। ये बल्लगढ़ तथा सौराष्ट्र में पाए जाते हैं।

बिसेन क्षत्रिय - इनका गोत्र पराशर (तथा अन्य परम्पराओं में भारद्वाज, शाण्डिल्य, अत्रि, वत्स) माना जाता है। ये मझौली (गोरखपुर), भिनगा (बहराइच), मनकापुर (गोंडा), भरौरिया (बस्ती) तथा कालाकांकर (प्रतापगढ़) में अधिक संख्या में पाए जाते हैं।

बुन्देला क्षत्रिय - ये गहरवार क्षत्रियों की शाखा हैं। गहरवार हेमकरण ने अपना नाम बुन्देला रखा था। राजा रुद्रप्रताप ने बुन्देलखण्ड की राजधानी गढ़कुण्डार से ओरछा स्थानान्तरित की। बैशाख शुक्ल त्रयोदशी, संवत् 1588 विक्रम को ओरछा को राजधानी के रूप में स्थापित किया गया। इस वंश के प्रमुख राज्य चरखारी, अजयगढ़, बिजावर, पन्ना, ओरछा, दतिया, टीकमगढ़, सरीला तथा जिगनी आदि रहे हैं।

बैस क्षत्रिय - इनका गोत्र भारद्वाज है। इस वंश की रियासतें सिगरामऊ, मुरारमऊ, खजुरगाँव, कुर्री-सिदौली, कोड़िहार, सतांव, पाहू, पिलखा, नरेन्द्र, चरहुर, कसो, देवगाँव, हसनपुर तथा अवध और आजमगढ़ जिले में स्थित रही हैं।

भाटी क्षत्रिय - यह श्रीकृष्ण के बड़े पुत्र प्रद्युम्न की सन्तान माने जाते हैं। ये राजस्थान के जैसलमेर तथा बिहार के भागलपुर और मुंगेर जिलों में पाए जाते हैं।

भोंसला क्षत्रिय - ये सूर्यवंशी हैं। इनका गोत्र कौशिक है। दक्षिण भारत में सतारा, कोल्हापुर, तंजावूर, नागपुर तथा सावंतवाड़ी इनके प्रमुख राजवंश रहे हैं। इसी वंश में छत्रपति शिवाजी जैसे प्रतापी राजा हुए।

महरौड़ या मड़वर क्षत्रिय - यह चौहानों की एक प्रशाखा है। इनका गोत्र वत्स है। चौहान वंश में गोगा नामक एक प्रसिद्ध वीर का जन्म हुआ था। उनकी राजधानी मैरीवा (मिहिरनगर) थी। यवन आक्रमण के समय अपनी राजधानी की रक्षा हेतु वे अपने 45 पुत्रों एवं 60 भ्रातृ-पुत्रों सहित युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। उनके वंशजों ने अपने को महरौड़ अथवा मड़वर कहना प्रारम्भ किया। इस वंश के क्षत्रिय उत्तर प्रदेश के बनारस, गाजीपुर और उन्नाव में तथा बिहार के शाहाबाद, पटना, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में पाए जाते हैं।

मालव क्षत्रिय - ये अग्निवंशी हैं। इनका गोत्र भारद्वाज है। मालवा प्रान्त से भारत के विभिन्न स्थानों में जाकर बसने के कारण ये मालविया अथवा मालव नाम से प्रसिद्ध हुए। ये उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों तथा बिहार के गया जिले में पाए जाते हैं।

यदुवंशी क्षत्रिय - इनका गोत्र कौण्डिन्य तथा गुरु दुर्वासा हैं। मथुरा के यदुवंशी तथा करौली के राजा इसी वंश से सम्बन्धित माने जाते हैं। मैसूर राज्य भी यदुवंशियों का माना जाता है। इस वंश की 8 शाखाएँ हैं।

राजपाली (राजकुमार) क्षत्रिय - ये अग्निवंशी हैं। इनका गोत्र वत्स है। यह राजवंश वत्स गोत्रीय चौहानों की शाखा माना जाता है। राजौर से निकलकर ये लोग खीरी, शाहाबाद, पटना, दियरा, सुल्तानपुर, छपरा तथा मुजफ्फरपुर आदि स्थानों में बसे।

राठौर क्षत्रिय - इनका गोत्र राजपूताना में गौतम, पूर्वी क्षेत्रों में कश्यप तथा दक्षिण भारत में अत्रि माना जाता है। बिहार के राठौरों का गोत्र शाण्डिल्य है। इनके गुरु वशिष्ठ माने जाते हैं।

रायजादा क्षत्रिय - ये अग्निवंशी चौहानों की प्रशाखा में हैं। इनका गोत्र चौहानों के समान है। ये लोग अपनी कन्याएँ भदौरिया, कछवाहा और तोमर वंशों में देते हैं तथा श्रीनेत, बैस, विश्वेन, सोमवंशी आदि वंशों से वैवाहिक संबंध स्थापित करते हैं। ये उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में पाए जाते हैं।

रैकवार क्षत्रिय - इनका गोत्र भारद्वाज है। ये बौंडी (बहराइच), रहबा (रायबरेली), भल्लापुर (सीतापुर), रामनगर, धनेड़ी (रामपुर), मथुरा (बाराबंकी), गोरिया कला (उन्नाव) आदि स्थानों में पाए जाते हैं। बिहार प्रान्त के मुजफ्फरपुर जिले में चेंचर, हरपुर आदि गाँवों में तथा छपरा और दरभंगा में भी यत्र-तत्र पाए जाते हैं।

लोहतमिया क्षत्रिय - यह सूर्यवंश की एक शाखा है। इन्हें लव की सन्तान माना जाता है। ये बलिया, गाजीपुर तथा शाहाबाद जिलों में पाए जाते हैं।

श्रीनेत क्षत्रिय - ये सूर्यवंशी हैं। इनका गोत्र भारद्वाज है। इनकी गद्दी श्रीनगर (टिहरी गढ़वाल) में मानी जाती है। यह निकुम्भ वंश की एक प्रसिद्ध शाखा है। ये लोग उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर तथा बस्ती जिले की बाँसी रियासत में पाए जाते हैं। बिहार प्रान्त के मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा और छपरा जिले के कुछ ग्रामों में भी इनकी उपस्थिति है।

सविया सौर (सिरमौर) क्षत्रिय - इनका गोत्र कश्यप है। ये लोग बिहार के गया जिले में अधिक संख्या में पाए जाते हैं।

सिकरवार क्षत्रिय - इनका गोत्र भारद्वाज है। ये ग्वालियर, आगरा, हरदोई, गोरखपुर, गाजीपुर और आजमगढ़ आदि स्थानों में पाए जाते हैं।

सिसोदिया क्षत्रिय - राहत जी के वंशजों के "सिसोदाग्राम" में निवास करने के कारण यह नाम प्रसिद्ध हुआ। यह ग्राम उदयपुर से लगभग 24 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित है। सिसोदिया, गहलौत राजपूतों की एक शाखा हैं। इस वंश का राज्य उदयपुर की प्रसिद्ध रियासतों में रहा है। इस वंश की 24 शाखाएँ मानी जाती हैं।

सिसोदिया शब्द की व्याख्या "शीश + दिया" अर्थात् "शीश (सिर या मस्तक) का दान देना, त्याग करना अथवा न्योछावर कर देना" के रूप में भी की जाती है। इसी कारण ऐसे स्वाभिमानी क्षत्रिय वंशजों को सिसोदिया कहा गया। इनकी अधिकता के कारण इनके प्रारम्भिक राज्य को "शिशोदा" कहा गया तथा राजधानी कुम्भलगढ़ (केलवाड़ा) मानी गई।

सेंगर क्षत्रिय - इनका गोत्र गौतम तथा गुरु श्रृंगी ऋषि एवं विश्वामित्र माने जाते हैं। ये क्षत्रिय जालौन, हरदोई, अतरौली और इटावा में अधिक पाए जाते हैं। इन्हें ऋषिवंशी माना जाता है। सेंगरों के प्रमुख ठिकाने जालौन और इटावा में भरेह, जगम्मनपुर, सरु, फखावतू, कुर्सी तथा मल्हसौ हैं। मध्य प्रदेश के रीवा राज्य में भी इनकी बसावट रही है।

सोलंकी क्षत्रिय - ये क्षत्रिय अग्निवंशी हैं। इनका गोत्र भारद्वाज है। दक्षिण भारत में इन्हें चालुक्य कहा जाता है। इनके प्रमुख ठिकाने अन्हिलवाड़ा, बासंदा, लिमड़ी राज्य, रेवाकांठा, रीवा, सोहाबल तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हैं।

हेहय वंश क्षत्रिय - इनका गोत्र कृष्णात्रेय तथा गुरु दत्तात्रेय माने जाते हैं। ये बिहार, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में यत्र-तत्र पाए जाते हैं। ये क्षत्रिय चन्द्रवंशी माने जाते हैं।

विभिन्न लेखकों एवं विद्वानों के अनुसार क्षत्रिय राजवंश

कर्नल जेम्स टॉड के मतानुसार -

1- इक्ष्वाकु, 2- कछवाहा, 3- राठौर, 4- गहलौत, 5- काठी, 6- गोहिल, 7- गौड़, 8- चालुक्य, 9- चावड़ा, 10- चौहान, 11- जाट, 12- जेतवा, 13- जोहिया, 14- झाला, 15- तंवर, 16- डाबी, 17- दाहिमा, 18- दाहिया, 19- डोडा, 20- गहरवाल, 21- नागवंशी, 22- निकुम्भ, 23- परमार, 24- परिहार, 25- बड़गुजर, 26- बल्ल, 27- बैस, 28- मोहिल, 29- यदु, 30- राजपाली, 31- सरविया, 32- सिकरवार, 33- सिलार, 34- सेंगर, 35- सोमवंशी, 36- हूण।

डॉ. इन्द्रदेव नारायण सिंह रचित 'क्षत्रिय वंश भास्कर' के अनुसार -

1- सूर्यवंश, 2- चन्द्रवंश, 3- यदुवंश, 4- गहलौत, 5- तोमर, 6- परमार, 7- चौहान, 8- राठौर, 9- कछवाहा, 10- सोलंकी, 11- परिहार, 12- निकुम्भ, 13- हैहय, 14- चन्देल, 15- तक्षक, 16- निमिवंशी, 17- मौर्यवंशी, 18- गोरखा, 19- श्रीनेत, 20- द्रह्युवंशी, 21- भाटी, 22- जाड़ेजा, 23- बघेल, 24- चावड़ा, 25- गहरवार, 26- डोडा, 27- गौड़, 28- बैस, 29- बिसेन, 30- गौतम, 31- सेंगर, 32- दीक्षित, 33- झाला, 34- गोहिल, 35- काबा, 36- लोहथम्भ।

चन्द्रबरदाई के अनुसार राजवंश -

1- सूर्यवंश, 2- सोमवंशी, 3- राठौर, 4- अनंग, 5- अर्भाट, 6- ककुत्स्थ, 7- कवि, 8- कमाय, 9- कलिचूरक, 10- कोटपाल, 11- गोहिल, 12- गोहिलपुत्र, 13- गौड़, 14- चावोत्कर, 15- चालुक्य, 16- चौहान, 17- छिन्दक, 18- टांक, 19- दधिकर, 20- देवला, 21- दोयमत, 22- धन्यपालक, 23- निकुम्भ, 24- पड़िहार, 25- परमार, 26- पोतक, 27- मकवाना, 28- यदु, 29- राज्यपालक, 30- सदावर, 31- सिकरवार, 32- सिन्धु, 33- सिलारु, 34- हरितट, 35- हूण, 36- कारद्वपाल।

मतिराम कृत वंशावली -

1- सूर्यवंश, 2- पैलवार, 3- राठौर, 4- लोहथम्भ, 5- रघुवंशी, 6- कछवाहा, 7- सिरमौर, 8- गहलौत, 9- बघेल, 10- काबा, 11- श्रीनेत, 12- निकुम्भ, 13- कौशिक, 14- चन्देल, 15- यदुवंश, 16- भाटी, 17- तोमर, 18- बनाफर, 19- काकन, 20- वंशं, 21- गहरवार, 22- करमवार, 23- रैकवार, 24- चन्द्रवंश, 25- सिकरवार, 26- गौड़, 27- दीक्षित, 28- बड़बलिया, 29- बिसेन, 30- गौतम, 31- सेंगर, 32- हैहय, 33- चौहान, 34- परिहार, 35- परमार, 36- सोलंकी।

 
 
Kshatriya - Rajput

राजपूत जातियो की सूची, राजपूतों की वंशावली, राजपूत गोत्र लिस्ट इन हिंदी
राजपूत नाम लिस्ट, गोत्र , वंश, स्थान और जिला की सूची

Rajput Caste List
--------------------------

क्रमांक नाम गोत्र वंश स्थान और जिला
1. सूर्यवंशी भारद्वाज सूर्य बुलंदशहर आगरा मेरठ अलीगढ
2. गहलोत बैजवापेण सूर्य मथुरा कानपुर और पूर्वी जिले
3. सिसोदिया बैजवापेड सूर्य महाराणा उदयपुर स्टेट
4. कछवाहा मानव सूर्य महाराजा जयपुर और ग्वालियर राज्य
5. राठोड कश्यप सूर्य जोधपुर बीकानेर और पूर्व और मालवा
6. सोमवंशी अत्रय चन्द प्रतापगढ़ और जिला हरदोई
7. यदुवंशी अत्रय चन्द राजकरौली राजपूताने में
8. भाटी अत्रय जादौन महारजा जैसलमेर राजपूताना
9. जाडेचा अत्रय यदुवंशी महाराजा कच्छ भुज
10. जादवा अत्रय जादौन शाखा अवा. कोटला उमरगढ आगरा
11. तोमर व्याघ्र चन्द पाटन के राव तंवरघार जिला ग्वालियर
12. कटियार व्याघ्र तोंवर धरमपुर का राज और हरदोई
13. पालीवार व्याघ्र तोंवर गोरखपुर
14. परिहार कौशल्य अग्नि इतिहास में जानना चाहिये
15. तखी कौशल्य परिहार पंजाब कांगड़ा जालंधर जम्मू में
16. पंवार वशिष्ठ अग्नि मालवा मेवाड धौलपुर पूर्व मे बलिया
17. सोलंकी भारद्वाज अग्नि राजपूताना मालवा सोरों जिला एटा
18. चौहान वत्स अग्नि राजपूताना पूर्व और सर्वत्र
19. हाडा वत्स चौहान कोटा बूंदी और हाडौती देश
20. खींची वत्स चौहान खींचीवाडा मालवा ग्वालियर
21. भदौरिया वत्स चौहान नौगावां पारना आगरा इटावा ग्वालियर
22. देवडा वत्स चौहान राजपूताना सिरोही राज
23. शम्भरी वत्स चौहान नीमराणा रानी का रायपुर पंजाब
24. बच्छगोत्री वत्स चौहान प्रतापगढ़ सुल्तानपुर
25. राजकुमार वत्स चौहान दियरा कुडवार फ़तेहपुर जिला
26. पवैया वत्स चौहान ग्वालियर
27. गौर,गौड भारद्वाज सूर्य शिवगढ रायबरेली कानपुर लखनऊ
28. बैस भारद्वाज सूर्य उन्नाव रायबरेली मैनपुरी पूर्व में
29. गहरवार कश्यप सूर्य माडा हरदोई उन्नाव बांदा पूर्व
30. सेंगर गौतम ब्रह्मक्षत्रिय जगम्बनपुर भरेह इटावा जालौन
31. कनपुरिया (कन्हपुरिया) भारद्वाज ब्रह्मक्षत्रिय पूर्व में राजा अवध के जिलों में हैं
32. बिसैन वत्स ब्रह्मक्षत्रिय गोरखपुर गोंडा प्रतापगढ में हैं
33. निकुम्भ वशिष्ठ सूर्य गोरखपुर आजमगढ हरदोई जौनपुर
34. सिरसेत भारद्वाज सूर्य गाजीपुर बस्ती गोरखपुर
35. कटहरिया वशिष्ठ भारद्वाज, सूर्य बरेली बदायूं मुरादाबाद शाहजहांपुर
36. वाच्छिल अत्रयवच्छिल चन्द्र मथुरा बुलन्दशहर शाहजहांपुर
37. बढगूजर वशिष्ठ सूर्य अनूपशहर एटा अलीगढ मैनपुरी मुरादाबाद हिसार गुडगांव जयपुर
38. झाला मरीच कश्यप चन्द्र धागधरा मेवाड झालावाड कोटा
39. गौतम गौतम ब्रह्मक्षत्रिय राजा अर्गल फ़तेहपुर
40. रैकवार भारद्वाज सूर्य बहरायच सीतापुर बाराबंकी
41. करचुल हैहय कृष्णात्रेय चन्द्र बलिया फ़ैजाबाद अवध
42. चन्देल चान्द्रायन चन्द्रवंशी गिद्धौर कानपुर फ़र्रुखाबाद बुन्देलखंड पंजाब गुजरात
43. जनवार कौशल्य सोलंकी शाखा बलरामपुर अवध के जिलों में
44. बहरेलिया भारद्वाज वैस की गोद सिसोदिया रायबरेली बाराबंकी
45. दीत्तत कश्यप सूर्यवंश की शाखा उन्नाव बस्ती प्रतापगढ़ जौनपुर रायबरेली बांदा
46. सिलार शौनिक चन्द्र सूरत राजपूतानी
47. सिकरवार भारद्वाज बढगूजर ग्वालियर आगरा और उत्तरप्रदेश में
48. सुरवार गर्ग सूर्य कठियावाड में
49. सुर्वैया वशिष्ठ यदुवंश काठियावाड
50. मोरी ब्रह्मगौतम सूर्य मथुरा आगरा धौलपुर
51. टांक (तत्तक) शौनिक नागवंश मैनपुरी और पंजाब
52. गुप्त गार्ग्य चन्द्र अब इस वंश का पता नही है
53. कौशिक कौशिक चन्द्र बलिया आजमगढ गोरखपुर
54. भृगुवंशी भार्गव चन्द्र बनारस बलिया आजमगढ़ गोरखपुर
55. गर्गवंशी गर्ग ब्रह्मक्षत्रिय नृसिंहपुर सुल्तानपुर
56. पडियारिया, देवल,सांकृतसाम ब्रह्मक्षत्रिय राजपूताना
57. ननवग कौशल्य चन्द्र जौनपुर जिला
58. वनाफ़र पाराशर,कश्यप चन्द्र बुन्देलखन्ड बांदा वनारस
59. जैसवार कश्यप यदुवंशी मिर्जापुर एटा मैनपुरी
60. चौलवंश भारद्वाज सूर्य दक्षिण मद्रास तमिलनाडु कर्नाटक में
61. निमवंशी कश्यप सूर्य संयुक्त प्रांत
62. वैनवंशी वैन्य सोमवंशी मिर्जापुर
63. दाहिमा गार्गेय ब्रह्मक्षत्रिय काठियावाड राजपूताना
64. पुंडीर कपिल ब्रह्मक्षत्रिय पंजाब गुजरात रींवा यू.पी.
65. तुलवा आत्रेय चन्द्र राजाविजयनगर
66. कटोच कश्यप भूमिवंश राजानादौन कोटकांगडा
67. चावडा,पंवार,चोहान,वर्तमान कुमावत वशिष्ठ पंवार की शाखा मलवा रतलाम उज्जैन गुजरात मेवाड
68. अहवन वशिष्ठ चावडा,कुमावत खीरी हरदोई सीतापुर बाराबंकी
69. डौडिया वशिष्ठ पंवार शाखा बुलंद शहर मुरादाबाद बांदा मेवाड गल्वा पंजाब
70. गोहिल बैजबापेण गहलोत शाखा काठियावाड
71. बुन्देला कश्यप गहरवार शाखा बुन्देलखंड के रजवाडे
72. काठी कश्यप गहरवार शाखा काठियावाड झांसी बांदा
73. जोहिया पाराशर चन्द्र पंजाब देश मे
74. गढावंशी कांवायन चन्द्र गढावाडी के लिंग पट्टम में
75. मौखरी अत्रय चन्द्र प्राचीन राजवंश था
76. लिच्छिवी कश्यप सूर्य प्राचीन राजवंश था
77. बाकाटक विष्णुवर्धन सूर्य अब पता नहीं चलता है
78. पाल कश्यप सूर्य यह वंश सम्पूर्ण भारत में बिखर गया है
79. सैन अत्रय ब्रह्मक्षत्रिय यह वंश भी भारत में बिखर गया है
80. कदम्ब मान्डग्य ब्रह्मक्षत्रिय दक्षिण महाराष्ट्र मे हैं
81. पोलच भारद्वाज ब्रह्मक्षत्रिय दक्षिण में मराठा के पास में है
82. बाणवंश कश्यप असुर वंश श्रीलंका और दक्षिण भारत में,कैन्या जावा में
83. काकुतीय भारद्वाज चन्द्र, प्राचीन सूर्य था अब पता नहीं मिलता है
84. सुणग वंश भारद्वाज चन्द्र,प्राचीन सूर्य था, अब पता नहीं मिलता है
85. दहिया कश्यप राठौड शाखा मारवाड में जोधपुर
86. जेठवा कश्यप हनुमानवंशी राजधूमली काठियावाड
87. मोहिल वत्स चौहान शाखा महाराष्ट्र मे है
88. बल्ला भारद्वाज सूर्य काठियावाड़ में मिलते हैं
89. डाबी वशिष्ठ यदुवंश राजस्थान
90. खरवड वशिष्ठ यदुवंश मेवाड उदयपुर
91. सुकेत भारद्वाज गौड की शाखा पंजाब में पहाडी राजा
92. पांड्य अत्रय चन्द अब इस वंश का पता नहीं
93. पठानिया पाराशर वनाफ़रशाखा पठानकोट राजा पंजाब
94. बमटेला शांडल्य विसेन शाखा हरदोई फ़र्रुखाबाद
95. बारहगैया वत्स चौहान गाजीपुर
96. भैंसोलिया वत्स चौहान भैंसोल गाग सुल्तानपुर
97. चन्दोसिया भारद्वाज वैस सुल्तानपुर
98. चौपटखम्ब कश्यप ब्रह्मक्षत्रिय जौनपुर
99. धाकरे भारद्वाज(भृगु) ब्रह्मक्षत्रिय आगरा मथुरा मैनपुरी इटावा हरदोई बुलन्दशहर
100. धन्वस्त यमदागिनी ब्रह्मक्षत्रिय जौनपुर आजमगढ़ बनारस
101. धेकाहा कश्यप पंवार की शाखा भोजपुर शाहाबाद
102. दोबर(दोनवर) वत्स या कश्यप ब्रह्मक्षत्रिय गाजीपुर बलिया आजमगढ़ गोरखपुर
103. हरद्वार भार्गव चन्द्र शाखा आजमगढ
104. जायस कश्यप राठौड की शाखा रायबरेली मथुरा
105. जरोलिया व्याघ्रपद चन्द्र बुलन्दशहर
106. जसावत मानव्य कछवाह शाखा मथुरा आगरा
107. जोतियाना(भुटियाना) मानव्य कश्यप,कछवाह शाखा मुजफ़्फ़रनगर मेरठ
108. घोडेवाहा मानव्य कछवाह शाखा लुधियाना होशियारपुर जालंधर
109. कछनिया शांडिल्य ब्रह्मक्षत्रिय अवध के जिलों में
110. काकन भृगु ब्रह्मक्षत्रिय गाजीपुर आजमगढ
111. कासिब कश्यप कछवाह शाखा शाहजहांपुर
112. किनवार कश्यप सेंगर की शाखा पूर्व बंगाल और बिहार में
113. बरहिया गौतम सेंगर की शाखा पूर्व बंगाल और बिहार
114. लौतमिया भारद्वाज बढगूजर शाखा बलिया गाजीपुर शाहाबाद
115. मौनस मानव्य कछवाह शाखा मिर्जापुर प्रयाग जौनपुर
116. नगबक मानव्य कछवाह शाखा जौनपुर आजमगढ़ मिर्जापुर
117. पलवार व्याघ्र सोमवंशी शाखा आजमगढ़ फैजाबाद गोरखपुर
118. रायजादे पाराशर चन्द्र की शाखा पूर्व अवध में
119. सिंहेल कश्यप सूर्य आजमगढ़ परगना मोहम्दाबाद
120. तरकड कश्यप दीक्षित शाखा आगरा मथुरा
121. तिसहिया कौशल्य परिहार इलाहाबाद परगना हंडिया
122. तिरोता कश्यप तंवर की शाखा आरा शाहाबाद भोजपुर
123. उदमतिया वत्स ब्रह्मक्षत्रिय आजमगढ गोरखपुर
124. भाले वशिष्ठ पंवार अलीगढ
125. भालेसुल्तान भारद्वाज वैस की शाखा रायबरेली लखनऊ उन्नाव
126. जैवार व्याघ्र तंवर की शाखा दतिया झांसी बुंदेलखंड
127. सरगैयां व्याघ्र सोम वंश हमीरपुर बुन्देलखण्ड
128. किसनातिल अत्रय तोमर शाखा दतिया बुन्देलखंड
129. टडैया भारद्वाज सोलंकी शाखा झांसी ललितपुर बुंदेलखंड
130. खागर अत्रय यदुवंश शाखा जालौन हमीरपुर झांसी
131. पिपरिया भारद्वाज गौडों की शाखा बुंदेलखंड
132. सिरसवार अत्रय चन्द्र शाखा बुन्देलखंड
133. खींचर वत्स चौहान शाखा फतेहपुर में असौंथड राज्य
134. खाती कश्यप दीक्षित शाखा बुंदेलखंड, राजस्थान में कम संख्या होने के कारण इन्हें बढई गिना जाने लगा
135. आहडिया बैजवापेण गहलोत आजमगढ
136. उदावत बैजवापेण गहलोत आजमगढ
137. उजैने वशिष्ठ पंवार आरा डुमरिया
138. अमेठिया भारद्वाज गौड अमेठी लखनऊ सीतापुर
139. दुर्गवंशी कश्यप दीक्षित राजा जौनपुर राजाबाजार
140. बिलखरिया कश्यप दीक्षित प्रतापगढ उमरी राजा
141. डोमरा कश्यप सूर्य कश्मीर राज्य और बलिया
142. निर्वाण वत्स चौहान राजपूताना (राजस्थान)
143. जाटू व्याघ्र तोमर राजस्थान,हिसार पंजाब
144. नरौनी मानव्य कछवाहा बलिया आरा
145. भनवग भारद्वाज कनपुरिया जौनपुर व भदोही 
146. देवरिया वशिष्ठ पंवार बिहार मुंगेर भागलपुर
147. रक्षेल कश्यप सूर्य रीवा राज्य में बघेलखंड
148. कटारिया भारद्वाज सोलंकी झांसी मालवा बुंदेलखंड
149. रजवार वत्स चौहान पूर्व में बुन्देलखंड
150. द्वार व्याघ्र तोमर जालौन झांसी हमीरपुर
151. इन्दौरिया व्याघ्र तोमर आगरा मथुरा बुलन्दशहर
152. छोकर अत्रय यदुवंश अलीगढ़ मथुरा बुलन्दशहर
153. जांगडा वत्स चौहान बुलंदशहर पूर्व में झांसी
154.   वाच्छिल, अत्रयवच्छिल, चन्द्र, मथुरा बुलन्दशहर शाहजहांपुर
155.   सड़ माल  सूर्य  भारद्वाज  जम्मू - कश्मीर , साम्बा , कठुआ , 
156.   रावत राजपूत की गोत्र उपलब्ध जानकारी के अनुसार रावत राजपूत  का गोत्र भारद्वाज और वेद यजुर्वेद है.


नोट -
  1. क्षत्रियों का इतिहास गौरवशाली है और पूर्व में और भी विस्तृत रहा है। इस लेख का प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। अगर आपके हिसाब से कोई त्रुटि या सुधार संभव हो तो कमेंट के माध्यम से जरूर रखे त्रुटि को दूर किया जायेगा।
  2. अगर कोई क्षत्रिय-राजपूत शाखा इसमें नहीं जुडी है तो उसे भी अवगत कराये उसे भी सही श्रेणी में जोड़ा जाएगा ताकि अपने नये क्षत्रिय भाई अपने इतिहास से अवगत हो सके। इस काम में आपके सहयोग की अपेक्षा है और बिना सामूहिक सहयोग के यह सम्भव भी नहीं है। इस बारे में आपके पास कोई जानकारी हो तो पर PRAMENDRAPS@जीमेल.COM पर ईमेल करें।
  3. क्षत्रिय वंशावली से सम्‍बन्धित अन्‍य लेख ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित राजपूतों-क्षत्रियों की वंशावली लिखा गया है, जिसे उस पेज पर जा कर पढ़ा जा सकता है।
धन्यवाद सहित

क्षत्रिय राजपूतों से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण लेख -
Tags- Rajputana, Rajput status, Rajput song, Rajputana song, Rajputi dress, Rajput photo, Rajput image, Rajput hindi status, Rajput status in hindi, Rajput wallpaper, Rajput video, Rajput logo, Rajput attitude status, Rajput matrimony, Rajput ka chora, Rajput film, Rajput regiment, Rajput t shirt, Rajput movie, Rajput caste, is Rajput a caste, Rajput pic, Rajput photo download, Rajput quotation, Rajput quotes, Rajput new song, Rajput history, Rajput ke gane, Rajput population in india, Rajput song download, Rajput dj song, Rajput song dj, Rajput hd wallpaper, Rajput wallpaper hd, Rajput picture, Rajput tattoo, Rajput bike, Rajput dialogue, Rajput dp, Rajput painting, Rajput of Rajasthan, Rajput photo hd, Rajput boy, Rajput lodhi, Rajput girl, Rajput in india, Rajput of india, Rajput image hd, Rajput gotra, Rajput attitude, Rajput ringtone, Rajput jewellery, Rajput sticker, Rajput wallpaper download, Rajput image download, Rajput hindi, Rajput in hindi, Rajput whatsapp status, Rajputana whatsapp status, Rajput dynasty, Rajput history in hindi, Rajput love status, chauhan rajput gotra list, rajput vanshavali, rajput caste list


Share:

केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विभाग एवं उनकी सम्पत्तियाँ और देयताएं



केंद्रीय मंत्रिपरिषद

प्रधानमंत्री 
श्री नरेन्द्र मोदी 

प्रधानमंत्री और निम्नलिखित के भी प्रभारी: कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय; परमाणु ऊर्जा विभाग; अंतरिक्ष विभाग; और सभी महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दे; तथा किसी मंत्री को आबंटित नहीं किये गए सभी अन्य विभाग 

कैबिनेट मंत्री
  1. श्री राजनाथ सिंह - रक्षा मंत्री
  2. श्री अमित शाह - गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री
  3. श्री नितिन जयराम गडकरी - सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री
  4. श्रीमती निर्मला सीतारमण - वित्त मंत्री और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री
  5. श्री नरेंद्र सिंह तोमर - कृषि और किसान कल्याण मंत्री
  6. डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर - विदेश मंत्री
  7. श्री अर्जुन मुंडा - जनजातीय मामलों के मंत्री
  8. श्रीमती स्मृति जूबिन इरानी - महिला एवं बाल विकास मंत्री
  9. श्री पीयूष गोयल - वाणिज्य और उद्योग मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री और कपड़ा मंत्री
  10. श्री धर्मेंद्र प्रधान - शिक्षा मंत्री और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री
  11. श्री प्रल्हाद जोशी - संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री
  12. श्री नारायण तातु राणे - सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री
  13. श्री सर्बानंद सोनोवाल - पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री और आयुष मंत्री
  14. श्री मुख्तार अब्बास नकवी - अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री
  15. डॉ. वीरेंद्र कुमार - सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री
  16. श्री गिरिराज सिंह - ग्रामीण विकास मंत्री और पंचायती राज मंत्री
  17. श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया - नागरिक उड्डयन मंत्री
  18. श्री रामचंद्र प्रसाद सिंह - इस्पात मंत्री
  19. श्री अश्विनी वैष्णव - रेल मंत्री, संचार मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री
  20. श्री पशुपति कुमार पारस - खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री
  21. श्री गजेंद्र सिंह - शेखावत जल शक्ति मंत्री
  22. श्री किरेन रिजिजू - कानून और न्याय मंत्री
  23. श्री राज कुमार सिंह - विद्युत मंत्री और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री
  24. श्री हरदीप सिंह पुरी - पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री तथा आवास और शहरी मामलों के मंत्री
  25. श्री मनसुख मंडाविया - स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री तथा रसायन व उर्वरक मंत्री
  26. श्री भूपेंद्र यादव - पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री तथा श्रम और रोजगार मंत्री
  27. श्री महेंद्र नाथ पांडेय - भारी उद्योग मंत्री
  28. श्री परशोत्तम रूपाला - मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री
  29. श्री जी. किशन रेड्डी - संस्कृति मंत्री, पर्यटन मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री
  30. श्री अनुराग सिंह ठाकुर - सूचना और प्रसारण मंत्री तथा युवा मामले और खेल मंत्री
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
  1. राव इंद्रजीत सिंह - सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), योजना मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  2. डॉ. जितेंद्र सिंह - विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री,कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री, परमाणु ऊर्जा विभाग में राज्य मंत्री तथा अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री
राज्य मंत्री
  1. राज्य मंत्री - पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री और पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  2. श्री फग्गन सिंह कुलस्ते इस्पात मंत्रालय में राज्य मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री
  3. श्री प्रहलाद सिंह पटेल - - जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  4. श्री अश्विनी कुमार चौबे - उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  5. श्री अर्जुन राम मेघवाल - संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री
  6. जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह - सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  7. श्री कृष्ण पाल - विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री और भारी उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  8. श्री दानवे रावसाहेब दादाराव - रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री, कोयला मंत्रालय में राज्य मंत्री और खान मंत्रालय में राज्य मंत्री
  9. श्री रामदास आठवले - सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  10. साध्वी निरंजन ज्योति - उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री 
  11. डॉ. संजीव कुमार बालियान - मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री
  12. श्री नित्यानंद राय - गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री
  13. श्री पंकज चौधरी - वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री
  14. श्रीमती अनुप्रिया सिंह पटेल - वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  15. प्रो. एस. पी. सिंह बघेल - विधि और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री
  16. श्री राजीव चंद्रशेखर - कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय में राज्य मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री
  17. सुश्री शोभा करंदलाजे - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  18. श्री भानु प्रताप सिंह वर्मा - सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री
  19. श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश - कपड़ा मंत्रालय में राज्य मंत्री और रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री
  20. श्री वी. मुरलीधरन - विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री और संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री
  21. श्रीमती मीनाक्षी लेखी - विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री और संस्कृति मंत्रालय में राज्य मंत्री
  22. श्री सोम प्रकाश - वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  23. श्रीमती रेणुका सिंह सरुता - जनजातीय मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  24. श्री रामेश्वर तेली - पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में राज्य मंत्री और श्रम और रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री
  25. श्री कैलाश चौधरी - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  26. श्रीमती अन्नपूर्णा देवी - शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री
  27. श्री ए. नारायणस्वामी - सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  28. श्री कौशल किशोर - आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  29. श्री अजय भट्ट - रक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री और पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री
  30. श्री बी. एल. वर्मा - पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री और सहकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  31. श्री अजय कुमार - गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री
  32. श्री देवुसिंह चौहान - संचार मंत्रालय में राज्य मंत्री
  33. श्री भगवंत खुबा - नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में राज्य मंत्री और रसायन व उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री
  34. श्री कपिल मोरेश्वर पाटिल - पंचायती राज मंत्रालय में राज्य मंत्री
  35. सुश्री प्रतिमा भौमिक - सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री
  36. डॉ. सुभाष सरकार - शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री
  37. डॉ. भागवत किशनराव कराड - वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री
  38. डॉ. राजकुमार रंजन सिंह - विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री और शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री
  39. डॉ. भारती प्रवीण पवार - स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  40. श्री बिश्वेश्वर टुडू - जनजातीय मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री और जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री
  41. श्री शांतनु ठाकुर - पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय में राज्य मंत्री
  42. डॉ. मुंजापारा महेंद्रभाई - महिला और बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री और आयुष मंत्रालय में राज्य मंत्री
  43. श्री जॉन बारला - अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री
  44. डॉ. एल. मुरुगन - मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री
  45. श्री निसिथ प्रमाणिक - गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री और युवा मामले और खेल मंत्रालय में राज्य मंत्री
(07.07.2021 तक)


Share:

आचरण की सभ्यता और 15 अगस्त की स्वतंत्रता



आज सबसे बड़ी कमी यह है कि हमारे समाज का पूरा जोर इस बात बात पर होता है कि हम देश भक्ति दिखाने ज्यादा हैं पर उसे आत्मसात नहीं करते। दिखावे की नीव पर खड़ी इमारत कितनी मजबूत होगी और कितनी देशभक्ति इस पर हमें विचार करना होगा। हम हमेशा संविधान के भाग 3 में द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों की बात दलील देकर करते है कि हमारे संविधान में हमें यह अधिकार दिया है कि जब उसी संविधान में निर्देशित मौलिक कर्तव्य की बात आती है तो हम मौन हो जाते है। यही है देश भक्ति कि हमें हमारे अधिकार तो याद रहते है किन्तु देश के प्रति कर्तव्य नहीं याद रहता।
मित्रों, निश्चित रूप से भारत के सर्वशक्तिमान सविधान में आपको अधिकार दिया है कि आप अपने देश भक्ति का प्रदर्शन अपने मन मुताबिक करें किन्तु तनिक विचार करें कि जिस Whatsapp के प्रोफाइल पर आप तिरंगा लगाये हुए हो उसी Whatsapp क में तिरंगे कि आड़ में इनबॉक्स में गैरकानूनी अश्लील सामग्रियां रखते है और इलेक्ट्रॉनिक ढंग से प्रकाशित करने, किसी को भेजने या किसी और के जरिये प्रकाशित करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून लागू होता है और किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ अश्लील संदेश भेजते हैं तो आज जुर्म कर रहे होते है। आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 67 (ए) और आईपीसी की धारा 292, 293, 294, 500, 506 और 509 आप अपराध कर रहे होते है और जुर्म की गंभीरता के लिहाज से पहली गलती पर पांच साल तक की जेल और/या दस लाख रुपये तक जुर्माना और दूसरी बार गलती करने पर जेल की सजा सात साल हो जाती है। Whatsapp में तिरंगे कि आड़ में 7 साल तक जेल जाने वाला कृत्य करेंगे और कितना देशभक्ति से ओतप्रोत होने वाला कृत्य होगा की तिरंगा भी अपने आधुनिक रणबाकुरों से लहलहा उठेगा।
देशभक्ति सिर्फ बार्डर पर ही नहीं होती देश भक्ति आचरण से होती है।। जापान के लोग जो देश के प्रति सर्मपित है सन 2000 कि रिपोर्ट के अनुसार 1% कम बलात्कार प्रतिशत है जबकि भारत में इससाल में आकड़ों में 2% दर दर्ज हुई है। दोहरे मापदंडो पर देशभक्ति नहीं हो सकती, फेसबुक प्रोफाइल पर रेप और महिला उत्पीडन के नाम पर काला गोला होगा किंतु सड़क पर लडकियों पर नजरें गिद्ध सी होगी ये पैमाने जब तक रहेगा तब तक रेप होते ही रहेंगे और तिरंगा शर्मसार होता ही रहेगा। चाल, चरित्र और चेहरा जब तक एक सामान नहीं होता सच्ची देश भक्ति नहीं हो सकती।

15 अगस्त की स्वतंत्रता

झंडू और झंडे से देशभक्ति नहीं हो सकती, अन्ना आये आन्दोलन लाये, खूब झंडा लहराए जब खेल ख़त्म हुआ तो तिरंगा पैरों तले रौदा गया उस रैले में सब देश भक्त पहुंचे थे देश को बदलने पर कोई अपने आपको नहीं बदला नहीं। तिरंगे झंडे को फहराना बड़ी बात मानी जानी चाहिए हमारे हम में तिरंगे के प्रति सही सम्मान हो यह बड़ी बात होनी चाहिए और एक बात हम आपसे बड़े है तो जरूरी नहीं कि मेरी हर बात सही ही हो, जब तब आपकी सोच वहां तक नहीं जाएगी कि मेरे इस आचरण से देश, समाज और परिवार पर क्या असर जायेगा।

हम बदलेगे और हमारी सोच बदलेगी तो निश्चित रूप से हमारा देश और समाज भी बदलेगा, भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पुरुष प्रत्येक नारी में माँ, बहन बेटी के दर्शन करता था यहां तक स्वामी रामकृष्ण परमहंस स्वयं अपनी पत्नी में माँ के स्वरूप को देखते थे।पश्चिम के विचार में चाहे इस्लाम हो या ईसाइयत नारी कभी व्यक्ति माना ही नहीं गया इस्लाम में खुदा द्वारा दी गयी भोग सम्पदा तो ईसाइयत में सम्पति या इस्लाम से इतर नहीं।

मुझे कष्ट होता है कि जब बहुत से अपने आप को हिंदूवादी और तथाकथित राष्ट्रवादी कहने वाले लोग नारियों के प्रति पश्चात संस्कृति के प्रभाव में आकर कुत्सित विचार रखते है। एक व्यक्ति दो नाव पर एक साथ सवारी नहीं कर सकता अर्थात एक पश्चात आचरण के साथ भारतीय संस्कृति की रक्षा संभव ही नहीं है।


Share: