भारतीय संविधान के महत्‍वपूर्ण अनुच्छेद एवं अनुसूचियाँ



भारत, संसदीय प्रणाली की सरकार वाला एक प्रभुसत्तासम्पन्न, समाजवादी धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य है। यह गणराज्य भारत के संविधान के अनुसार शासित है। भारत का संविधान संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को पारित हुआ तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ।भारत का संविधान दुनिया का सबसे बडा लिखित संविधान है। इसमें अब 450 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण अनुच्छेद निम्नलिखित है जिन्‍हे प्रत्‍येक भारतीय को जानना बहुत आवाश्‍यक है-
  • अनुच्छेद 1 : यह घोषणा करता है कि भारत राज्यों का संघ है।
  • अनुच्छेद 3: संसद विधि द्वारा नए राज्य बना सकती है तथा पहले से अवस्थित राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं एवं नामों में परिवर्तन कर सकती है।
  • अनुच्छेद 5: संविधान के प्रारंभ होने के, समय भारत में रहने वाले वे सभी व्यक्ति यहां के नागरिक होंगे, जिनका जन्म भारत में हुआ हो, जिनके पिता या माता भारत के नागरिक हों या संविधान के प्रारंभ के समय से भारत में रह रहे हों।
  • अनुच्छेद 13:-- मौलिक अधिकारों को असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियों के बारे में
  • अनुच्छेद 14:- कानून के समक्ष समानता
  • अनुच्छेद 16:- सरकारी नौकरियों में सभी को अवसर की समानता
  • अनुच्छेद 17:- अस्पृश्यता का उन्मूलन
  • अनुच्छेद 19:- “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” के बारे में कुछ अधिकारों का संरक्षण
  • अनुच्छेद 21:- प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
  • अनुच्छेद 21A:- प्राथमिक शिक्षा का अधिकार
  • अनुच्छेद 25:- अंतरात्मा की स्वतंत्रता, मनचाहा काम और धर्म के प्रचार-प्रसार की स्वतंत्रता
  • अनुच्छेद 30:- अल्पसंख्यकों को शैक्षिक संस्थानों को स्थापित करने, उनका प्रशासन करने का अधिकार
  • अनुच्छेद 31C: - कुछ निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी करने वाली विधियों की व्याख्या
  • अनुच्छेद 32:- मौलिक अधिकारों को लागू के लिए “रिट” सहित अन्य उपचार
  • अनुच्छेद 38:- राज्य, लोगों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए एक सामाजिक व्यवस्था को बनाएगा
  • अनुच्छेद 40:- ग्राम पंचायतों का संगठन
  • अनुच्छेद 44:- नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता
  • अनुच्छेद 45:- 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान
  • अनुच्छेद 46:- अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातिओं और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा
  • अनुच्छेद 50:- कार्यपालिका से न्यायपालिका को अलग किया जाना
  • अनुच्छेद 51:- अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना
  • अनुच्छेद 51A: - मौलिक कर्तव्य
  • अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका संबंधी शक्ति राष्ट्रपति में निहित रहेगी।
  • अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति राज्य सभा का पढ़ें अध्यक्ष होगा।
  • अनुच्छेद 74: एक मंत्रिपरिषद होगी, जिसके शीर्ष पर प्रधानमंत्री रहेगा, जिसकी सहायता एवं सुझाव के आधार पर राष्ट्रपति अपने कार्य संपन्न करेगा। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद के लिए किसी सलाह के पुनर्विचार को आवश्यक समझ सकता है, पर पुनर्विचार के पश्चात दी गई सलाह के अनुसार वह कार्य करेगा। इससे संबंधित किसी विवाद की परीक्षा किसी न्यायालय में नहीं की जाएगी।
  • अनुच्छेद 76: राष्ट्रपति द्वारा महान्यायवादी की नियुक्ति की जाएगी।
  • अनुच्छेद 78: प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य होगा कि वह देश के प्रशासनिक एवं विधायी मामलों तथा मंत्रिपरिषद के निर्णयों के संबंध में राष्ट्रपति को सूचना दे, यदि राष्ट्रपति इस प्रकार की सूचना प्राप्त करना आवश्यक समझे।
  • अनुच्छेद 86: इसके अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा संसद को संबोधित करने तथा संदेश भेजने के अधिकार का उल्लेख है।
  • अनुच्छेद 108: यदि किसी विधेयक के संबंध में दोनों सदनों में गतिरोध उत्पन्न हो गया हो तो संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान है।
  • अनुच्छेद 110: धन विधेयक को इसमें परिभाषित किया गया है।
  • अनुच्छेद 111: संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति के पास जाता है। राष्ट्रपति उस विधेयक को सम्मति प्रदान कर सकता है या अस्वीकृत कर सकता है। वह सन्देश के साथ या बिना संदेश के संसद को उस पर पुनर्विचार के लिए भेज सकता है, पर यदि दोबारा विधेयक को संसद द्वारा राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है तो वह इसे अस्वीकृत नहीं करेगा।
  • अनुच्छेद 112: प्रत्येक वित्तीय वर्ष हेतु राष्ट्रपति द्वारा संसद के समक्ष बजट पेश किया जाएगा।
  • अनुच्छेद 123: संसद के अवकाश (सत्र नहीं चलने की स्थिति) में राष्ट्रपति को अध्यादेश जारी करने का अधिकार।
  • अनुच्छेद 124: इसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के गठन का वर्णन है।
  • अनुच्छेद 129: सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है।
  • अनुच्छेद 143:- सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति
  • अनुच्छेद 148: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी।
  • अनुच्छेद 149:- भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की शक्तियां
  • अनुच्छेद 155:- राज्यपाल की नियुक्ति
  • अनुच्छेद 161:- क्षमा को कम करने, टालने और निलंबित करने की राज्यपाल की शक्ति
  • अनुच्छेद 163: राज्यपाल के कार्यों में सहायता एवं सुझाव देने के लिए राज्यों में एक मंत्रिपरिषद एवं इसके शीर्ष पर मुख्यमंत्री होगा, पर राज्यपाल के स्वविवेक संबंधी कार्यों में वह मंत्रिपरिषद के सुझाव लेने के लिए बाध्य नहीं होगा।
  • अनुच्छेद 165:- राज्य के महाधिवक्ता
  • अनुच्छेद 167:- राज्यपाल को जानकारी देने के लिए मुख्यमंत्री के कर्तव्य
  • अनुच्छेद 168:- राज्यों में विधानमंडलों की व्यवस्था
  • अनुच्छेद 169: राज्यों में विधान परिषदों की रचना या उनकी समाप्ति विधान सभा द्वारा बहुमत से पारित प्रस्ताव तथा संसद द्वारा इसकी स्वीकृति से संभव है।
  • अनुच्छेद 170:- राज्यों में विधान सभाओं की संरचना
  • अनुच्छेद 171:- राज्यों में विधान परिषदों की संरचना
  • अनुच्छेद 172:- राज्य विधान मंडलों की अवधि
  • अनुच्छेद 173:- राज्य विधानमंडल की सदस्यता के लिए योग्यता
  • अनुच्छेद 174:- राज्य विधायिका का सत्र, सत्रावसान और राज्य विधायिका का विघटन
  • अनुच्छेद 178:- विधान सभा के स्पीकर और डिप्टी स्पीकर
  • अनुच्छेद 194:- महाधिवक्ता की शक्तियां, विशेषाधिकार और प्रतिरोधक क्षमता
  • अनुच्छेद 200: राज्यों की विधायिका द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। वह इस पर अपनी सम्मति दे सकता है या इसे अस्वीकृत कर सकता है। वह इस विधेयक को संदेश के साथ या बिना संदेश के पुनर्विचार हेतु विधायिका को वापस भेज सकता है, पर पुनर्विचार के बाद दोबारा विधेयक आ जाने पर वह इसे अस्वीकृत नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त वह विधेयक को राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भी भेज सकता है।
  • अनुच्छेद 202:- राज्य विधानमंडल का वार्षिक वित्तीय विवरण (राज्य बजट)
  • अनुच्छेद 210:- राज्य विधानमंडल में इस्तेमाल की जाने वाली भाषा
  • अनुच्छेद 212:- न्यायालयों को राज्य विधानमंडल की कार्यवाही के बारे में पूछताछ करने का अधिकार नहीं
  • अनुच्छेद 213: राज्य विधायिका के सत्र में नहीं रहने पर राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है।
  • अनुच्छेद 214: सभी राज्यों के लिए उच्च न्यायालय की व्यवस्था होगी।
  • अनुच्छेद 217:- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति की शर्तें
  • अनुच्छेद 226: मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्च न्यायालय को लेख जारी करने की शक्तियां।
  • अनुच्छेद 233: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाएगी।
  • अनुच्छेद 235: उच्च न्यायालय का नियंत्रण अधीनस्थ न्यायालयों पर रहेगा।
  • अनुच्छेद 239: केंद्र शासित प्रदेशों का प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा होगा। वह यदि उचित समझे तो बगल के किसी राज्य के राज्यपाल को इसके प्रशासन का दायित्व सौंप सकता है या प्रशासन की नियुक्ति कर सकता है।
  • अनुच्छेद 239A: - दिल्ली के संबंध में विशेष उपबंध
  • अनुच्छेद 243B: - पंचायतों का गठन
  • अनुच्छेद 243C: - पंचायतों की संरचना
  • अनुच्छेद 243G: - पंचायतों की जिम्मेदारियां, शक्तियां और अधिकार
  • अनुच्छेद 243K: - पंचायतों के चुनाव
  • अनुच्छेद 245: संसद संपूर्ण देश या इसके किसी हिस्से के लिए तथा राज्य विधानपालिका अपने राज्य या इसके किसी हिस्से के ले कानून बना सकता है।
  • अनुच्छेद 248: विधि निर्माण संबंधी अवशिष्ट शक्तियां संसद में निहित हैं।
  • अनुच्छेद 249: राज्यसभा विशेष बहुमत द्वारा राज्य सूची के किसी विषय पर लोक सभा को एक वर्ष के लिए कानून बनाने के लिए अधिकृत कर सकती है, यदि वह इसे राष्ट्रहित में आवश्यक समझे।
  • अनुच्छेद 262: अंतरराज्यीय नदियां या नदी घाटियों के जल के वितरण एवं नियंत्रण से संबंधित विवादों के लिए संसद द्वारा निर्णय कर सकती है।
  • अनुच्छेद 263: केंद्र राज्य संबंधों में विवादों का समाधान करने एवं परस्पर सहयोग के क्षेत्रों के विकास के उद्देश्य राष्ट्रपति एक अंतरराज्यीय परिषद की स्थापना कर सकता है।
  • अनुच्छेद 265:- कानून के प्राधिकार के बिना करों का अधिरोपण न किया जाना
  • अनुच्छेद 266: भारत की संचित निधि, जिसमें सरकार की सभी मौद्रिक अविष्टियां एकत्र रहेंगी, विधि समस्त प्रक्रिया के बिना इससे कोई भी राशि नहीं निकली जा सकती है।
  • अनुच्छेद 267: संसद विधि द्वारा एक आकस्मिक निधि स्थापित कर सकती है, जिसमें अकस्मात उत्पन्न परिस्थितियां के लिए राशि एकत्र की जाएगी।
  • अनुच्छेद 275: केंद्र द्वारा राज्यों को सहायक अनुदान दिए जाने का प्रावधान।
  • अनुच्छेद 280: राष्ट्रपति हर पांचवें वर्ष एक वित्त आयोग की स्थापना करेगा, जिसमें अध्यक्ष के अतिरिक्त चार अन्य सदस्य होंगें तथा जो राष्ट्रपति के पास केंद्र एवं राज्यों के बीच करों के वितरण के संबंध में अनुशंषा करेगा।
  • अनुच्छेद 300 क: राज्य किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं करेगा। पहले यह प्रावधान मूल अधिकारों के अंतर्गत था, पर संविधान के 44 वें संशोधन, 1978 द्वारा इसे अनुच्छेद 300 (क) में एक सामान्य वैधानिक (क़ानूनी) अधिकार के रूप में अवस्थित किया गया।
  • अनुच्छेद 311:- संघ या किसी राज्य के अधीन सिविल क्षमताओं में कार्यरत व्यक्तियों के रैंक में कमी बर्खास्तगी।
  • अनुच्छेद 312: राज्यसभा विशेष बहुमत द्वारा नई अखिल भारतीय सेवाओं की स्थापना की अनुशंसा कर सकती है।
  • अनुच्छेद 315: संघ एवं राज्यों के लिए एक लोक सेवा आयोग की स्थापना की जाएगी।
  • अनुच्छेद 320:- लोक सेवा आयोगों के कार्य
  • अनुच्छेद 323-A: - प्रशासनिक न्यायाधिकरण
  • अनुच्छेद 324: चुनावों के पर्यवेक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण संबंधी समस्त शक्तियां चुनाव आयोग में निहित रहेंगी।
  • अनुच्छेद 326: लोक सभा तथा विधान सभाओं में चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होगा।
  • अनुच्छेद 331: आंग्ल भारतीय समुदाय के लोगों का राष्ट्रपति द्वारा लोक सभा में मनोनयन संभव है, यदि वह समझे की उनका उचित प्रतिनिधित्व नहीं है।
  • अनुच्छेद 332: अनुसूचित जाति एवं जनजातियों का विधानसभाओं में आरक्षण का प्रावधान।
  • अनुच्छेद 333: आंग्ल भारतीय समुदाय के लोगों का विधान सभाओं में मनोनयन।
  • अनुच्छेद 335: अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं पिछड़े वर्गों के लिए विभिन्न सेवाओं में पदों पर आरक्षण का प्रावधान।
  • अनुच्छेद 343: संघ की आधिकारिक भाषा देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी होगी।
  • अनुच्छेद 347: यदि किसी राज्य में पर्याप्त संख्या में लोग किसी भाषा को बोलते हों और उनकी आकांक्षा हो कि उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को मान्यता दी जाए तो इसकी अनुमति राष्ट्रपति दे सकता है।
  • अनुच्छेद 351: यह संघ का कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार एवं उत्थान करे ताकि वह भारत की मिश्रित संस्कृति के सभी अंगों के लिए अभिव्यक्ति का माध्यम बने।
  • अनुच्छेद 352: राष्ट्रपति द्वारा आपात स्थिति की घोषणा, यदि वो समझता हो कि भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा युद्ध, बाह्य आक्रमण या सैन्य विद्रोह के फलस्वरूप खतरे में है।
  • अनुच्छेद 356: यदि किसी राज्य के राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को यह रिपोर्ट दी जाए कि उस राज्य में संवैधानिक तंत्र असफल हो गया है तो वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
  • अनुच्छेद 360: यदि राष्ट्रपति यह समझता है की भारत या इसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता एवं साख खतरे में है तो वह वित्तीय आपात स्थिति की घोषणा कर सकता है।
  • अनुच्छेद 365: यदि कोई राज्य केंद्र द्वारा भेजे गए किसी कार्यकारी निर्देश का पालन करने में असफल रहता है तो राष्ट्रपति द्वारा यह समझा जाना विधि समस्त होगा कि उस राज्य में संविधान तंत्र के अनुरूप प्रशासन चलने की स्थिति नहीं है और वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।
  • अनुच्छेद 368: संसद को संविधान के किसी भी भाग का संशोधन करने का अधिकार है।
  • अनुच्छेद 370: इसके अंतर्गत जम्मू कश्मीर की विशेष स्थिति का वर्णन है।
  • अनुच्छेद 371: कुछ राज्यों के विशेष क्षेत्रों के विकास के लिए राष्ट्रपति बोर्ड स्थापित कर सकता है, जैसे - महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, मणिपुर आदि।
  • अनुच्छेद 394 क: राष्ट्रपति अपने अधिकार के अंतर्गत इस संविधान का हिंदी भाषा में अनुवाद कराएगा।
  • अनुच्छेद 395: भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947, भारत सरकार अधिनियम, 1953 तथा इनके अन्य पूरक अधिनियमों को, जिसमें प्रिवी कौंसिल क्षेत्राधिकार अधिनियम शामिल नहीं है, यहां रद्द किया जाता है।

भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ
  • प्रथम अनुसूची राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों का वर्णन
  • दूसरी अनुसूची राष्ट्रपति , राज्यों के राज्यपाल, लोकसभा के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, राज्य सभा के सभापति तथा उपसभापति, विधान सभा के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति तथा उप-सभापति, उच्चतम तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों एवं भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक के संबंध में उपबंध
  • तीसरी अनुसूची शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप
  • चौथी अनुसूची राज्यसभा में सीटों का आबंटन
  • पांचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उपबंध
  • छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में उपबंध
  • सातवीं अनुसूची संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची
  • आठवीं अनुसूची मान्यता प्राप्त भाषाओं की सूची
  • नौवीं अनुसूची विशिष्ट अधिनियमों और विनियमों के सत्यापन के प्रावधान
  • दसवीं अनुसूची दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता के बारे में उपबंध
  • ग्यारहवीं अनुसूची पंचायतों के अधिकार, प्रधिकार और दायित्व ।
  • बारहवीं अनुसूची नगर पालिकाओं की के अधिकार, प्रधिकार और दायित्व ।


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भारत का संविधान - प्रस्तावना अथवा उद्देशिका



Preamble of the Indian Constitution
Preamble of Indian Constitution

"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को:

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सबमें व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढाने के लिए

दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0 (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हजार छह विक्रमी) को एतद्द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"
संविधान के उद्देश्यों को प्रकट करने हेतु प्राय: उनसे पहले एक प्रस्तावना प्रस्तुत की जाती है जिसे भारतीय संविधान की उद्देशिका भी कहा जाता है। भारतीय संविधान की प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रभावित तथा विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। प्रस्तावना के माध्यम से भारतीय संविधान का सार, अपेक्षाएँ, उद्देश्य उसका लक्ष्य तथा दर्शन प्रकट होता है। प्रस्तावना यह घोषणा करती है कि संविधान अपनी शक्ति सीधे जनता से प्राप्त करता है इसी कारण यह 'हम भारत के लोग' - इस वाक्य से प्रारम्भ होती है।
Preamble to the Constitution of India

सुप्रीम कोर्ट द्वारा व्याख्या

संविधान में प्रस्तावना को तब जोड़ा गया था, जब शेष संविधान पहले ही लागू हो चुका था। बेरूबरी यूनियन प्रकरण (1960) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है। हालांकि, यह स्वीकार किया गया कि यदि संविधान के किसी अनुच्छेद में प्रयुक्त कोई शब्द अस्पष्ट हो अथवा उसके एक से अधिक अर्थ निकलते हों, तो प्रस्तावना का उपयोग एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में किया जा सकता है।

केहर सिंह बनाम भारत संघ के वाद में यह कहा गया था कि संविधान सभा भारतीय जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नहीं करती थी, अतः संविधान को विधि की विशेष अनुकम्पा प्राप्त नहीं हो सकती। परंतु न्यायालय ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए संविधान को सर्वोपरि माना, जिस पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।

केशवानंद भारती प्रकरण (1973) में सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व निर्णय को पलटते हुए कहा कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधित किया जा सकता है। पुनः भारतीय जीवन बीमा निगम के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि प्रस्तावना संविधान का एक भाग है।

इस प्रकार स्वतंत्र भारत के संविधान की प्रस्तावना सुंदर शब्दों की एक भूमिका मात्र नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय संविधान के मूल आदर्श, उद्देश्य तथा दार्शनिक अवधारणाएँ निहित हैं। ये संवैधानिक प्रावधानों को तर्कसंगतता एवं वैधता प्रदान करती हैं।

प्रस्तावना के मूल शब्दों की व्याख्या

संप्रभुता

प्रस्तावना यह उद्घोषित करती है कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है। संप्रभुता का अर्थ है कि भारत किसी भी विदेशी अथवा आंतरिक शक्ति के नियंत्रण से पूर्णतः मुक्त एवं संप्रभु राष्ट्र है। संविधान द्वारा निर्धारित सीमाओं के अधीन भारत की विधायिका को देश के लिए कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

समाजवादी

‘समाजवादी’ शब्द संविधान के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया था। समाजवाद का आशय सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की प्राप्ति से है, जो लोकतांत्रिक साधनों द्वारा हासिल की जाती है। भारत ने ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ को अपनाया है। लोकतांत्रिक समाजवाद मिश्रित अर्थव्यवस्था में विश्वास रखता है, जहाँ निजी एवं सार्वजनिक दोनों क्षेत्र साथ-साथ कार्य करते हैं। इसका उद्देश्य गरीबी, अज्ञानता, बीमारी तथा अवसरों की असमानता को समाप्त करना है।

धर्मनिरपेक्ष

‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द भी 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में जोड़ा गया था। भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि भारत में सभी धर्मों को राज्य द्वारा समान संरक्षण, सम्मान एवं समर्थन प्राप्त है। संविधान के भाग-III के अनुच्छेद 25 से 28 तक धर्म की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार के रूप में सुनिश्चित किया गया है।

लोकतांत्रिक

लोकतांत्रिक शब्द का अर्थ है कि शासन की स्थापना ऐसी व्यवस्था के रूप में होती है, जिसे जनता चुनावों के माध्यम से चुनती है और वैध अधिकार प्रदान करती है। प्रस्तावना यह स्पष्ट करती है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, अर्थात सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित है।

लोकतंत्र का आशय केवल राजनीतिक लोकतंत्र से ही नहीं, बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र से भी है। उत्तरदायी शासन, सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, ‘एक व्यक्ति-एक मत-एक मूल्य’ तथा स्वतंत्र न्यायपालिका भारतीय लोकतंत्र की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

गणराज्य

गणराज्य में राज्य का प्रमुख प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित किया जाता है। भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता द्वारा परोक्ष रूप से, अर्थात संसद एवं राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाता है। गणराज्य में राजनीतिक संप्रभुता किसी राजा के स्थान पर जनता में निहित होती है।

न्याय

प्रस्तावना में न्याय को तीन रूपों में स्वीकार किया गया है— सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक। इन उद्देश्यों की प्राप्ति संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों तथा राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के माध्यम से की जाती है।

सामाजिक न्याय का अर्थ है समान सामाजिक स्थिति पर आधारित न्यायपूर्ण समाज की स्थापना। आर्थिक न्याय का तात्पर्य समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संपत्ति एवं संसाधनों के न्यायसंगत वितरण से है, जिससे संपत्ति कुछ हाथों में केंद्रित न हो। राजनीतिक न्याय का आशय सभी नागरिकों को राजनीतिक प्रक्रिया में समान भागीदारी का अधिकार प्रदान करना है।

स्वतंत्रता

स्वतंत्रता का तात्पर्य व्यक्ति को बंधनों, दासता, तानाशाही, कारावास एवं अन्य प्रकार की अनुचित बाधाओं से मुक्त होकर अपने व्यक्तित्व के विकास का अवसर प्रदान करना है।

समानता

समानता का अर्थ समाज के किसी भी वर्ग के प्रति विशेषाधिकार अथवा भेदभाव का अंत करना है। संविधान की प्रस्तावना देश के सभी नागरिकों को अवसर एवं स्थिति की समानता प्रदान करने का आश्वासन देती है। संविधान सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समानता स्थापित करने का प्रयास करता है।

भाईचारा

भाईचारे का अर्थ बंधुत्व की भावना से है। संविधान की प्रस्तावना व्यक्ति की गरिमा तथा राष्ट्र की एकता एवं अखंडता बनाए रखने के लिए नागरिकों के बीच बंधुत्व की भावना को प्रोत्साहित करती है।

प्रस्तावना में संशोधन

वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा (अब तक केवल एक बार) प्रस्तावना में संशोधन किया गया। इस संशोधन के माध्यम से तीन नए शब्द— ‘समाजवादी’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ तथा ‘अखंडता’ — प्रस्तावना में जोड़े गए। न्यायालय ने इस संशोधन को वैध एवं संवैधानिक माना है।



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श्री गणेश चालीसा एवं आरती Shri Ganesha Chalisa and Aarati



॥दोहा॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
जय जय जय गणपति गणराजू।
मंगल भरण करण शुभ काजू॥
Jai Shri Ganesha HD Wallpapers

॥चौपाई॥
जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥1॥

सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्वविख्याता॥
ऋद्घिसिद्घि तव चंवर सुधारे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगलकारी॥2॥

एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा॥
अतिथि जानि कै गौरि सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥3॥

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण, यहि काला॥
गणनायक, गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम, रुप भगवाना॥
अस कहि अन्तर्धान रुप है। पलना पर बालक स्वरुप है॥
बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥4॥

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं। नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं। सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक, देखन चाहत नाहीं॥5॥

गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर, न शनि तुहि भायो॥
कहन लगे शनि, मन सकुचाई। का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहाऊ॥
पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा। बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा॥6॥

गिरिजा गिरीं विकल है धरणी। सो दुख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटि चक्र सो गज शिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण, मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥7॥

नाम गणेश शम्भु तब किन्हें। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वन दीन्हे॥
बुद्ध परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥8॥

तुम्हरी महिमा बुद्घि बड़ाई। शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥9॥
Lord-Ganesha-Wallpaper
॥दोहा॥
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश॥

 

आरती श्री गणेश जी की 

 जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय...

एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय...

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय...

हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय...

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय...


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हिंदी के अशुद्ध शब्द और उनके शुद्ध शब्‍द



List of Hindi Shudh Ashudh Shabd

हिंदी शुद्ध अशुद्ध शब्द सूची (List of Hindi Shudh Ashudh Shabd)

शुद्ध / मानक- - - - -अशुद्ध / अमानक

  1. अनधिकार- - - - -अनाधिकार
  2. अधीन- - - - -आधीन
  3. अतिथि- - - - -अतिथी
  4. अफ़सोसनाक- - - - -अफ़सोसजनक
  5. अंतरराष्ट्रीय- - - - -अंतर्राष्ट्रीय
  6. अध्यात्म- - - - -आध्यात्म
  7. अत्यधिक- - - - -अत्याधिक
  8. अंत्येष्टि- - - - -अंत्येष्ठि
  9. अंतर्धान- - - - -अंतर्ध्यान
  10. अभीष्ट- - - - -अभीष्ठ
  11. अनुगृहीत- - - - -अनुग्रहीत
  12. अनजान- - - - -अंजान
  13. अंतरिक्ष- - - - -अंतरीक्ष
  14. अठखेलियाँ- - - - -अटखेलियाँ
  15. अधीक्षक- - - - -अधिक्षक
  16. अनिश्चित- - - - -अनिश्च्त
  17. अवयस्क- - - - -अवयस्क
  18. अवाम- - - - -आवाम
  19. अष्टांगयोग- - - - -अष्ठांगयोग
  20. असम- - - - -आसाम
  21. अंपायर- - - - -एंपायर
  22. असम्मानजनक- - - - -गैरसम्मानजनक


  1. आवश्यकता- - - - -अवश्यकता
  2. आटा- - - - -आँटा
  3. आशीर्वाद- - - - -आशिर्वाद
  4. आहार- - - - -अहार
  5. आरूढ़- - - - -आरुढ़
  6. आनुषंगिर- - - - -अनुषांगिर
  7. आस्तीन- - - - -अस्तीन
  8. आइए- - - - -आईए
  9. आइना- - - - -आईना
  10. आकंठ- - - - -आकंट
  11. आगामी- - - - -अगामी
  12. आधारित- - - - -अधारित
  13. आधिकारित- - - - -अधिकारित
  14. आध्यात्मिक- - - - -अध्यात्मिक
  15. आवारा- - - - -अवारा
  16. आतंकवादी- - - - -आंतकवादी
  17. आँसुओं- - - - -आँसूओं
  18. आडवाणी- - - - -आडवानी
  19. आर्द्रता- - - - -आर्दता
  20. आवंटन- - - - -आबंटन


  1. इनकार- - - - -इंकार
  2. इमारत- - - - -ईमारत
  3. इत्तफ़ाक़ / इत्तिफ़ाक़- - - - -अत्तेफ़ाक़
  4. इकट्ठा- - - - -इकठ्ठा
  5. इच्छा- - - - -ईच्छा
  6. इंग्लैंड- - - - -इंगलैंड
  7. इंजेक्शन- - - - -इंजैक्शन


  1. ईजाद- - - - -इजाद
  2. ईसाई- - - - -इसाई
  3. ईमानदारी- - - - -इमानदारी
  4. ईश्वर- - - - -इश्वर


  1. उज्ज्वल- - - - -उज्ज्वल
  2. उपजाऊ- - - - -उपजाउ
  3. उद्घाटन- - - - -उदघाटन
  4. उद्यत- - - - -उद्दत
  5. उनतीस- - - - -उंतीस
  6. उनचास- - - - -उनंचास
  7. उँगलियाँ- - - - -ऊँगलियाँ
  8. उपलक्ष्य- - - - -उपलक्ष


  1. ऊहापोह- - - - -उहापोह
  2. ऊधम- - - - -उधम
  3. ऊष्मा- - - - -उष्मा


  1. एकेडेमिक / अकादमिक- - - - -अकेडमिक
  2. एनकाउंटर / एनकाउण्टर- - - - -एनकाउन्टर
  3. एकत्र- - - - -एकत्रित
  4. एहसास- - - - -अहसास
  5. एजेंसी- - - - -एंजसी
  6. एहतियात- - - - -ऐहतियात
  7. ऐतिहासिक- - - - -एतिहासिक
  8. ऐक्ट- - - - -एक्ट
  9. ऐच्छिक- - - - -एच्छिक
  10. ऐंकर- - - - -एंकर


  1. कालिदास- - - - -कालीदास
  2. कोटि- - - - -कोटी
  3. क़ूवत- - - - -कूबत
  4. कीजिए- - - - -करीए
  5. कीजिएगा- - - - -करिएगा
  6. क्योंकि- - - - -क्योंकी
  7. काग़ज़ात- - - - -काग़ज़ातों
  8. कसौटी- - - - -कसोटी
  9. कठिनाइयाँ- - - - -कठिनाईयाँ
  10. केंद्रीय- - - - -केंद्रिय
  11. कुमुसिनी- - - - -कुमुदनी
  12. कैबिनेट- - - - -केबिनेट
  13. क़ाबिलियत- - - - -काबिलयत
  14. कारागृह- - - - -काराग्रह
  15. कार्रवाई- - - - -कार्यवाई
  16. कनिष्ठ- - - - -कनिष्ट
  17. कौआ- - - - -कौव्वा
  18. कृतकृत्य- - - - -कृत्यकृत्य
  19. कृपया- - - - -कृप्या
  20. कुआँ / कुँआ- - - - -कूआँ


  1. खरोंच- - - - -खरोच
  2. ख़बरनवीस- - - - -ख़बरनबीस
  3. ख़याल- - - - -ख्याल
  4. खटाई- - - - -खटायी
  5. खल्वाट- - - - -खलवाट
  6. ख़ूबानी- - - - -ख़ुबानी


  1. गीतांजलि- - - - -गीतांजली
  2. गुरु- - - - -गुरू
  3. गृहिणी- - - - -गृहणी
  4. गठजोड- - - - -गँठजोड
  5. गद्गद- - - - -गदगद
  6. गलघोंटू- - - - -गलाघोंटू
  7. गँवाना- - - - -गवाँना / गवाना


  1. घंटे / घण्टे- - - - -घन्टे
  2. घनिष्ठ- - - - -घनिष्ट
  3. घबराना- - - - -घबड़ाना
  4. घरौंदा- - - - -घरोंदा
  5. घूँट- - - - -घूट


  1. चेष्टा- - - - -चेष्ठा
  2. चित्त- - - - -चित
  3. चिह्न- - - - -चिन्ह
  4. चरागाह- - - - -चारागाह


  1. छिपकली- - - - -छिपकिली
  2. छुआछूत- - - - -छूआछूत
  3. छेड़छाड़- - - - -छेंड़छाड़ / छेड़छाँड़


  1. जीर्णोद्धार- - - - -जीर्णोंद्धार
  2. जाति- पाँति / जात - पाँत- - - - -जाँति- पाँति / जाति - पाति
  3. ज़रूरी- - - - -ज़रुरी
  4. जयंती- - - - -जयंति
  5. जवाब- - - - -जबाव
  6. ज्योत्स्ना- - - - -ज्योत्सना
  7. ज्योतिषी- - - - -ज्योतिषि
  8. जुआरी- - - - -जुआड़ी
  9. जूठा (खाना)- - - - -झूठा (खाना)


  1. झँपना- - - - -झपना
  2. झाग- - - - -झाँग
  3. झुँझलाना- - - - -झुझलाना
  4. झोंका- - - - -झोका
  5. झोंपडी- - - - -झौपड़ी


  1. टेलीविज़न- - - - -टेलिविज़न
  2. टिप्पणी- - - - -टिप्पड़ी


  1. डाकुओं- - - - -डाकूओं
  2. ड्राइवर- - - - -ड्राईवर


  1. ढाँकना- - - - -ढाँकना
  2. ढूँढ़ना- - - - -ढूँढना


  1. ताबूत- - - - -ताबुत
  2. तूफ़ान- - - - -तुफान
  3. तत्त्व- - - - -तत्व
  4. तात्कालिक- - - - -तत्कालिक
  5. तृतीय- - - - -त्रितीय
  6. त्रिकालदर्शी- - - - -तृकालदर्शी
  7. तुम्हें, तुमको- - - - -तुम्हारे को
  8. तत्त्वावधान- - - - -तत्वाधान
  9. तैंतीस- - - - -तैतीस
  10. तिनतरफ़ा- - - - -तीनतरफा
  11. तबीयत- - - - -तबियत
  12. तिथि- - - - -तिथी
  13. त्यौरी- - - - -त्योरी
  14. त्योहार- - - - -त्यौहार
  15. तिलिस्म- - - - -तिलस्म
  16. तुष्टीकरण- - - - -तुष्टिकरण


  1. थर्माकोल- - - - -थरमाकोल
  2. थीसीस- - - - -थिसिस
  3. थूकना- - - - -थुकना
  4. थ्योरी- - - - -थ्यौरी
  5. थ्रिलर- - - - -थ्रीलर
  6. थूत्कार- - - - -थुत्कार
  7. थेगली- - - - -थिगली


  1. दरियाई- - - - -दरियायी
  2. दूसरे- - - - -दुसरे
  3. द्वंद्व- - - - -द्वंद
  4. दंपति / दंपती- - - - -दंपत्ति
  5. दीवाली- - - - -दिवाली
  6. दयालु- - - - -दयालू
  7. दूल्हे- - - - -दुल्हे
  8. दायित्व- - - - -दायित्त्व
  9. दुरूह- - - - -दुरुह
  10. दुरवस्था- - - - -दुरावस्था
  11. दुरुपयोग- - - - -दुरुपयोग
  12. दुकानें- - - - -दुकाने
  13. द्रष्टा- - - - -दृष्टा
  14. दुनिया- - - - -दुनियाँ
  15. दृश्य- - - - -दृष्य
  16. दामाद- - - - -दमाद
  17. दाँवपेंच- - - - -दावपेच
  18. दवाइयाँ- - - - -दवाईयाँ
  19. दीवानगी- - - - -दिवानगी
  20. दस्तावेज़- - - - -दस्ताबेज
  21. दुपहिया- - - - -दोपहिया


  1. धकेला- - - - -ढकेला
  2. धुरंधर- - - - -धुरंदर
  3. धातुएँ- - - - -धातूएँ
  4. ध्रुपद- - - - -ध्रूपद
  5. धौंस- - - - -धौस
  6. धौंकनी- - - - -धौकनी


  1. नाकोदम- - - - -नाकोंदम
  2. नरक- - - - -नर्क
  3. नाकारा- - - - -नकारा
  4. नीरोग- - - - -निरोग
  5. नादान- - - - -नदान
  6. नाराज़- - - - -नराज
  7. निलंबित- - - - -निलंवित
  8. न्यायालय- - - - -न्यालय
  9. न्योछावर- - - - -न्यौछावर
  10. नक़द- - - - -नगद
  11. नूपुर- - - - -नुपुर
  12. नई- - - - -नयी
  13. नौकरी- - - - -नोकरी
  14. नि:शुल्क- - - - -निशुल्क
  15. नवाब- - - - -नबाब
  16. नेस्तनाबूद- - - - -नेस्तनाबूत
  17. नवरात्र- - - - -नवरात्री
  18. न्योता- - - - -न्यौता
  19. निर्माणाधीन- - - - -निर्माणधीन
  20. निरुपम- - - - -निरूपम
  21. नुकसानदेह- - - - -नुकसानदेय
  22. नौसिखिया- - - - -नौसीखिया


  1. पूर्णिमा- - - - -पुर्णिमा
  2. पूर्वार्ध (पूर्वार्द्ध)- - - - -पूर्वार्द
  3. पूर्ति- - - - -पूर्ती
  4. परिस्थिति- - - - -परिस्थित
  5. प्रतिनिधि- - - - -प्रतिनिध
  6. पुष्पांजलि- - - - -पुष्पांजली
  7. प्रौढ़- - - - -प्रोढ़
  8. पारलौकिक- - - - -परलौकिक
  9. पाजामा- - - - -पजामा
  10. पांडेय- - - - -पांडे
  11. पूछकर- - - - -पूँछकर
  12. प्रतीक्षा- - - - -प्रतिक्षा
  13. पाँचवाँ- - - - -पांचवा
  14. पीतांबर- - - - -पितांबर
  15. परखचे- - - - -परखच्चे
  16. पेचीदा- - - - -पेंचीदा
  17. प्राचीनतम- - - - -प्राचीनतम्
  18. पश्चात्ताप- - - - -पश्चाताप
  19. परिशिष्ट- - - - -परिशिष्ठ
  20. प्रविष्ट- - - - -प्रविष्ठ
  21. पुनरुत्थान- - - - -पुर्नुत्थान
  22. पक्षिगण- - - - -पक्षीगण
  23. पूजनीय- - - - -पूज्यनीय
  24. पूछना- - - - -पूँछना
  25. परिप्रेक्ष्य- - - - -परिपेक्ष्य
  26. पुनर्वास- - - - -पुर्नवास
  27. पड़ोस- - - - -पड़ौस
  28. प्रदर्शन- - - - -प्रर्दशन
  29. प्रदर्शनी- - - - -प्रदर्शिनी
  30. प्रामाणिक- - - - -प्रमाणिक
  31. प्रसंस्कृत- - - - -प्रसंस्करित
  32. पुनर्जन्म- - - - -पुर्नजन्म
  33. पुनर्मतदान- - - - -पुर्नमतदन


  1. फाँसी- - - - -फासी
  2. फुट- - - - -फिट
  3. फ़ज़ूल- - - - -बेफ़ज़ूल
  4. फ़ेहरिस्त- - - - -फेहरिश्त


  1. बाबत- - - - -बावत
  2. बरात- - - - -बारात
  3. बीमार- - - - -बिमार
  4. बरदाश्त- - - - -बर्दाश्त/बर्दास्त
  5. बादाम- - - - -बदाम
  6. बनिस्बत- - - - -बनिस्पत
  7. ब्राह्मण- - - - -ब्रह्मण
  8. बजाय- - - - -बजाए
  9. बहू- - - - -बहु
  10. ब्रह्म- - - - -ब्रम्ह
  11. बाज़ार- - - - -बज़ार
  12. बांग्ला (भाषा)- - - - -बंगला
  13. बाक़ायदा- - - - -बकायदा
  14. बढ़ोतरी- - - - -बढ़ौत्तरी
  15. बिस्वा- - - - -बिसवा
  16. बेईमान- - - - -बइमान
  17. बल्ब- - - - -बल्व
  18. बीवी (पत्नी)- - - - -बीबी
  19. बेचना- - - - -बेंचना
  20. बंदरबाँट- - - - -बंदरबाट


  1. भगवत्प्रेम- - - - -भागवत्प्रेम
  2. भालुओं- - - - -भालूओं
  3. भाषाएँ- - - - -भाषाऐं
  4. भागीदारी- - - - -भागेदारी
  5. भुखमरी- - - - -भूखमरी
  6. भौंक- - - - -भोंक
  7. भडकाऊ- - - - -भडकाऊँ
  8. भास्कर- - - - -भाष्कर
  9. भेड़- - - - -भेंड़


  1. महत्त्व- - - - -महत्व
  2. मालूम- - - - -मालुम
  3. महाबली- - - - -महाबलि
  4. मुनिनण- - - - -मुनीनण
  5. मुहूर्त- - - - -मुहूर्त्त
  6. मौलवी- - - - -मोलवी
  7. मुकदमे- - - - -मुकदमें
  8. मैथिली- - - - -मैथली
  9. मुकुंद- - - - -मुकंद
  10. मालिन- - - - -मालन
  11. मंजु- - - - -मंजू
  12. मंत्रिपरिषद- - - - -मंत्रीपरिषद
  13. मांस- - - - -माँस
  14. मिष्टान्न- - - - -मिष्ठान
  15. महँगा- - - - -मँहगा
  16. मंत्रोच्चार- - - - -मंत्रोचार
  17. महारत- - - - -महारथ
  18. मखौल- - - - -माखौल
  19. मुख़ालफ़त- - - - -मुखालिफत


  1. यानी- - - - -यानि
  2. यथेष्ट- - - - -यथेष्ठ
  3. यथोचित- - - - -यथोचित्
  4. यथावत्- - - - -यथावत
  5. योगिराज- - - - -योगीराज


  1. रुपये- - - - -रुपये/ रूपए
  2. रवींद्र- - - - -रबिंद्र
  3. रेणु- - - - -रेणू
  4. रूठ- - - - -रुठ
  5. रुपहला- - - - -रूपहला
  6. रणबाँकुरे- - - - -रणबाकुरे
  7. रासायनिक- - - - -रसायनिक
  8. राशिफल- - - - -राशीफल
  9. रेस्तराँ- - - - -रेस्तरा
  10. राष्ट्रीय- - - - -राष्ट्रिय
  11. रूखा- - - - -रुखा


  1. लक्षद्वीप- - - - -लक्षदीप
  2. लब्धप्रतिष्ठ- - - - -लब्धप्रतिष्ठित
  3. लैस- - - - -लैश
  4. लड़ाई- - - - -लड़ायी
  5. लिपि- - - - -लिपी
  6. लाखों- - - - -लाखो
  7. लहूलुहान- - - - -लहुलुहान
  8. लीवर- - - - -लिवर


  1. वरिष्ठ- - - - -वरिष्ट
  2. वरुण- - - - -वरूण
  3. वियतनाम- - - - -विएतनाम
  4. वानर- - - - -बानर
  5. वाल्मीकि- - - - -वाल्मीकी
  6. वधू- - - - -वधु
  7. वस्तुओं- - - - -वस्तूओं
  8. वेश्यागमन- - - - -वैश्यागमन
  9. विलास- - - - -बिलास
  10. विकराल- - - - -बिकराल
  11. व्यावसायिक- - - - -व्यवसायिक
  12. विजयी- - - - -विजई
  13. वापस- - - - -वापिस
  14. व्रज- - - - -वृज
  15. विरहिणी- - - - -विरहणी
  16. विहार- - - - -बिहार
  17. वियोग- - - - -बियोग
  18. वेशभूषा- - - - -वेषभूषा
  19. विश्वास- - - - -विस्वास
  20. विराजमान- - - - -विराजमान्


  1. शांति- - - - -शांती
  2. शिशु- - - - -शिशू
  3. शशिकांत- - - - -शशीकांत
  4. शंभु- - - - -शंभू
  5. श्मशान- - - - -शमशान
  6. शिविर- - - - -शिवर
  7. शिखर- - - - -शिखिर
  8. शांतिमय- - - - -शांतमय
  9. शय्या- - - - -शैया
  10. शुरुआत- - - - -शुरूआत

श्र

  1. श्रीमती- - - - -श्रीमति
  2. श्रृंगार- - - - -श्रृगांर


  1. षड्यंत्र- - - - -षड़यंत्र
  2. षष्टि- - - - -षष्ठ
  3. षष्टिपूर्ति- - - - -षष्ठिपूर्ति


  1. स्थिति- - - - -स्थिती
  2. स्थायी- - - - -स्थाई
  3. सुमेरु- - - - -सुमेरू
  4. संवर्धन/ संवर्द्धन- - - - -संवर्दन
  5. सन्न्यास- - - - -सन्न्यास
  6. सूची- - - - -सूचि
  7. सामान- - - - -समान
  8. संपत्ति- - - - -संपत्ती
  9. साप्ताहिक- - - - -सप्ताहिक
  10. सोचेंगे- - - - -सोचेंगें
  11. सांसारिक- - - - -संसारिक
  12. सिंहवाहिनी- - - - -सिंहवाहनी
  13. साहित्यिक- - - - -सात्यिक
  14. साधु- - - - -साधू
  15. स्वास्थ्य- - - - -स्वास्थ
  16. साइकिल- - - - -सायकिल
  17. सौंदर्य- - - - -सौंदर्यता
  18. स्वावलंबी- - - - -स्वालंबी
  19. सामर्थ्य- - - - -सामर्थ
  20. सशक्तीकरण- - - - -सशक्तिकरण
  21. स्वप्नद्रष्टा- - - - -स्वप्नदृष्टा
  22. सदृश- - - - -सदृश्य
  23. साइबर- - - - -साईबर
  24. सिंकाई- - - - -सिकाई
  25. सिरीज़- - - - -सीरीज़
  26. सुचारु- - - - -सुचारू
  27. सूबेदार- - - - -सुबेदार
  28. सूचीबद्ध- - - - -सूचिबद्ध
  29. संवाद- - - - -सम्वाद
  30. समाधि- - - - -समाधी
  31. सुनामी- - - - -सूनामी
  32. सुनसान- - - - -सूनसान
  33. सेवानिवृत्त- - - - -सेवानिवृत्त
  34. समलिंगी- - - - -समानलिंगी
  35. स्वावलंबन- - - - -स्वालंबन
  36. संग्रहीत- - - - -संग्रहित


  1. हिंदुओं- - - - -हिंदूओं
  2. हथिनी- - - - -हाथिनी
  3. हेरोइन- - - - -हरोईन
  4. हम पर- - - - -हमारे पर
  5. हेतु- - - - -हेतू
  6. हाउस- - - - -हाऊस
  7. हृदय- - - - -हृदय
  8. हिमाचल- - - - -हिमांचल
  9. हश्र (ह+श्+र)- - - - -हस्र

क्ष 

  1. क्षत्रिय- - - - -क्षत्रीय


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वाक्यांश के लिए एक शब्द



अनेक शब्दों के लिए एक शब्द (One Word Substitution)
वाक्यांश के लिए एक शब्द Vakyansh ke Liye ek Shabd
अच्छी रचना के लिए आवश्यक है कि कम से कम शब्दों में विचार प्रकट किए जाए। भाषा में यह सुविधा भी होनी चाहिए कि वक्ता या लेखक कम से कम शब्दों में अर्थात् संक्षेप में बोलकर या लिखकर विचार अभिव्यक्त कर सके। कम से कम शब्दों में अधिकाधिक अर्थ को प्रकट करने के लिए ‘वाक्यांश या शब्द–समूह के लिए एक शब्द’ का विस्तृत ज्ञान होना आवश्यक है। भाषा की सुदृढ़ता, भावों की गम्भीरता और चुस्त शैली के लिए यह आवश्यक है कि लेखक शब्दों (पदों) के प्रयोग में संयम से काम ले, ताकि वह विस्तृत विचारों या भावों को थोड़े-से-थोड़े शब्दों में व्यक्त कर सके। समास, तद्धित और कृदन्त वाक्यांश या वाक्य एक शब्द या पद के रूप में संक्षिप्त कसिये जा सकते है। ऐसी हालत में मूल वाक्यांश या वाक्य के शब्दों के अनुसार ही एक शब्द या पद का निर्माण होना चाहिए। वाक्यांश को संक्षेप में सामासिक पद का भी रूप दिया जाता है। कुछ ऐसे लाक्षणिक पद या शब्द भी है, जो अपने में पूरे एक वाक्य या वाक्यांश का अर्थ रखते है। भाषा में कई शब्दों के स्थान पर एक शब्द बोल कर हम भाषा को प्रभावशाली एवं आकर्षक बनाते है। यहाँ पर अनेक शब्दों के लिए एक शब्द के कुछ उदाहरण दिए जा रहे है:- 
वाक्यांश या शब्द-समूह शब्द
जो नेत्रों से दिखाई न दे अगोचर
जो इन्द्रियों से परे हो अगोचर
समाचार पत्र का मुख्य लेख अग्रलेख
जिसकी कल्पना न की जा सके अकल्पनीय
जो कहा न जा सके अकथनीय
आगे का विचार करने वाला अग्रसोची
जो सबके आगे रहता हो अग्रणी
जिसका ज्ञान इन्द्रियों के द्वारा न हो अगोचर
जो ख़ाली न जाये अचूक
जो अपने स्थान या स्थिति से अलग न किया जा सके अच्युत
जिसकी चिंता नहीं हो सकती अचिंत्य
हाथी को हाँकने वाला लोहे का हुक अंकुश
जो खाया न जा सके अखाद्य
जिसका जन्म पहले हुआ हो अग्रज
जो छूने योग्य न हो अछूत
जो छुआ न गया हो अछूता
जो बूढ़ा ना हो अजर
जिसका कोई शत्रु उत्पत्र न हुआ हो अजातशत्रु
जिसे जीता न जा सके अजेय
जो जाना ना गया हो अज्ञात
जो कुछ नहीं जानता हो अज्ञानी
जिसके कुल का पता ज्ञात न हो अज्ञातकुल
जिस हँसी से अट्टालिका तक हिल जाये अट्टहास
जो अपनी बात से न टले अटल
न टूटने वाला अटूट
जो अपनी जगह से न डिगे अडिग
आढ़त का व्यापार करने वाला आढ़तिया
पदार्थ का सबसे छोटा इन्द्रिय-ग्राह्य विभाग या मात्रा अणु
सीमा का अनुचित उल्लंघन अतिक्रमण
जिसके आने की तिथि ज्ञात न हो अतिथि
किसी कथा के अंतर्गत आने वाली दूसरी कथा अंत:कथा
जो सबके मन की जानता हो अन्तर्यामी
आवश्यकता से अधिक वर्षा अतिवृष्टि
किसी बात या कथन को बढ़ा-चढ़ा कर कहना अतिशयोक्ति
जो बीत गया है अतीत
इन्द्रियों की पहुँच से बाहर अतींद्रिय
जिसकी तुलना न की जा सके अतुलनीय
जो दबाया न जा सके अदम्य
जो देखा न जा सके अदृश्य
जिसके समान दूसरा न हो अद्वितीय
जो देखने योग्य न हो अदर्शनीय
जो पहले ना देखा गया हो अदृष्टपूर्व
धर्म या शास्त्र के विरुद्ध कार्य अधर्म
अधिकार या कब्जे में आया हुआ अधिकृत
सर्वाधिकार सम्पन्न शासक या अधिकारी अधिनायक
विधानमंडल द्वारा पारित या स्वीकृत नियम अधिनियम
कर या शुल्क का वह अंश जो किसी कारणवश अधिक से अधिक लिया जाता है अधिभार
वह पत्र, जिसमें किसी को कोई काम करने का अधिकार दिया जाये अधिपत्र
किसी पक्ष का समर्थन करने वाला अधिवक्ता
वास्तविक मूल्य से अधिक लिया जाने वाला शुल्क अधिशुल्क
सरकार द्वारा प्रकाशित या सरकारी बजट में छपी सूचना अधिसूचना
किसी कार्यालय या विभाग का वह अधिकारी जो अपने अधीन कार्य करने वाले कर्मचारियों की निगरानी रखे अधीक्षक
किसी सभा, संस्था का प्रधान अध्यक्ष
नीचे की ओर मुख किये हुए अधोमुख
राज्य के अधिपति द्वारा जारी किया गया वह आधिकारिक आदेश जो किसी विशेष समय तक ही लागू हो अध्यादेश
वह स्त्री जिसका पति दूसरा विवाह कर ले अध्यूढ़ा
अन्य से संबंध न रखने वाला अनन्य
जिसका कोई दूसरा उपाय न हो अनन्योपाय
जिसका स्वामी न हो अनाथ
जिसका आदर न किया गया हो अनादृत
दूसरों के गुणों में दोष ढूँढने की वृत्ति का न होना अनसूया
जिसका वचन द्वारा वर्णन न किया जा सके अनिवर्चनीय
जिसका निवारण न किया जा सके अनिवार्य
बिना पलक गिराए हुए अनिमेष
जिसका उच्चारण न किया जा सके अनुच्चरित
जो परीक्षा में उत्तीर्ण न हुआ हो अनुत्तीर्ण
किसी कार्य के लिए दी जाने वाली सहायता अनुदान
जिसकी उपमा न दी जा सके अनुपम
जिसका अनुभव किया गया हो अनुभूत
किसी मत या प्रस्ताव का समर्थन करने की क्रिया अनुमोदन
किसी व्यक्ति या सिद्धांत का समर्थन करने वाला अनुयायी
एक भाषा की लिखी हुई बात को दूसरी भाषा में लिखना या कहना अनुवाद
परम्परा से चली आई हुई बात, उक्ति या कला अनुश्रुति
जिसका मन किसी दूसरी ओर हो अन्यमनस्क/अनमना
जिसका कोई निश्चित घर न हो अनिकेत
नीचे की ओर लाना या खींचना अपकर्ष
जो पहले पढ़ा न गया हो अपठित
दोपहर के बाद का समय अपराह्न
शरीर के लिए जितना धन आवश्यक हो उससे अधिक न लेना अपरिग्रह
जो मापा न जा सके अपरिमेय
जिसके बिना कार्य न चल सके अपरिहार्य
जो आँखों के सामने न हो अप्रत्यक्ष/परोक्ष
जिसके पार न देखा जा सके अपारदर्शक/अपारदर्शी
जो पूरा या भरा हुआ न हो अपूर्ण
जिसकी अपेक्षा (उम्मीद) हो अपेक्षित
अभिनय करने वाला पुरुष अभिनेता
अभिनय करने वाली स्त्री अभिनेत्री
जो किसी की ओर मुँह किये हुए हो अभिमुख
जिस पर अभियोग लगाया गया हो अभियुक्त
जिसका जन्म उच्च कुल में हुआ हो अभिजात
किसी कार्य को बार-बार करना अभ्यास
भली प्रकार से सीखा हुआ अभ्यस्त
किसी वस्तु का भीतरी भाग अभ्यन्तर
किसी वस्तु को प्राप्त करने की तीव्र इच्छा अभीप्सा
जो कभी मृत्यु को प्राप्त न हो अमर
जो काव्य, संगीत आदि का रस न ले अरसिक
द्वार या आँगन के फर्श पर रंगों से चित्र बनाने या चौक पूरने की कला अल्पना
जो अल्प (कम) जानता हो अल्पज्ञ
जो इस लोक का न हो अलौकिक
जो कम बोलता हो अल्पभाषी
शरीर का कोई भाग अवयव
जिस पर विचार न किया गया हो अविचारित
सरकार द्वारा दूसरे देश की तुलना में अपने देश की मुद्रा का मूल्य कम कर देना अवमूल्यन
बिना वेतन के कार्य करने वाला अवैतनिक
जो साधा (ठीक किया) न जा सके असाध्य
जो शोक करने योग्य नहीं है अशोक्य
जो स्त्री (ऐसी पर्दानशीन है कि) सूर्य को भी न देख सके असूर्यम्पश्या
जिसका विभाजन न किया जा सके अविभाजित
अच्छा-बुरा समझने की शक्ति का अभाव अविवेक
जो विधान या नियम के विरुद्ध हो असंवैधानिक
जिसमें शक्ति नहीं है अशक्त
न हो सकने वाला अशक्य/असंभव
गुरु के समीप रहने वाला विद्यार्थी अंतेवासी
जिसका जन्म छोटी (अंत्य) जाति में हुआ हो अंत्यज
जिसका जन्म अनु (पीछे) हुआ हो अनुज
जो पहले कभी भी न हुआ हो अभूतपूर्व
जो बीत चुका है अतीत
जिसकी गहराई की थाह न लग सके अथाह
जो सदा से चलता आ रहा है अनवरत
जो आगे की न सोचता हो अदूरदर्शी
धरती और आकाश के बीच का स्थान अंतरिक्ष
जिस पर आक्रमण न किया गया हो अनाक्रान्त
जो जीता न जा सके अजेय
जिसके पास कुछ न हो अकिंचन
जो क़ानून के विरुद्ध हो अवैध
जो समय पर न हो असामयिक
अपने हिस्से या अंश के रूप में कुछ देना अंशदान
जिसमें कुछ करने की क्षमता न हो अक्षम
जो गिना न जा सके अनगिनत
जो कार्य रूप में न लाया जा सके अव्यावहारिक
जिसका खंडन न हो सके अकाट्य
जिस पर मुकदमा चल रहा हो अभियुक्त
जिसकी सीमा न हो असीम/असीमित
जो दिया न जा सके अदेय
अनुकरण करने योग्य अनुकरणीय
जो मानव के योग्य न हो अमानुषिक
जो बिना बुलाये आया हो अनाहूत
जिस पर कोई नियंत्रण न हो अनियंत्रित
जो शोक करने योग्य नहीं अशोक्य
फेंककर चलाया जाने वाला हथियार अस्त्र
किसी प्राणी को न मारना अहिंसा
अंडे से जन्म लेने वाला अंडज
महल का भीतरी भाग अंत:पुर
जिसे अधिकार दिया गया हो अधिकृत
जारी किया गया आधिकारिक आदेश अध्यादेश
वर्षा का अभाव अनावृष्टि
जिस पर निर्णय न हुआ हो अनिर्णीत
जिस पर अनुग्रह किया गया हो अनुग्रहीत
सीमा का उल्लंघन करना अतिक्रमण
जो पहले कभी नहीं सुना गया हो अश्रुतपूर्व
जिसमें सामर्थ्य नहीं है असमर्थ
जिसकी आशा न की जाये अप्रत्याशित
जिसे पढ़ा न जा सके अपाठ्य
जिसे भेदा (तोड़ा) न जो सके अभेद्य
आत्मा व परमात्मा का द्वैत (अलग-अलग होना) न मानने वाला अद्वैतवादी
अल्प (कम) वेतन भोगने वाला (पाने वाला) अल्पवेतनभोगी
अध्ययन (पढ़ना) प्राप्त करने वाला अध्यापक
आग से झुलसा हुआ अनलदग्ध
जहाँ गमन (जाया) न किया जा सके अगम्य
जो हिसाब-क़िताब की जाँच करता हो अंकेक्षण
जिसकी परिभाषा देना संभव न हो अपरिभाषित
जो पहले कभी घटित न हुआ हो अघटित
वह पत्र जिसमें किसी को कुछ करने का अधिकार दिया गया हो अधिपत्र
अपने प्राण आप लेने वाला आत्मघाती
पैर से लेकर सिर तक आपादमस्तक
ऐसा व्रत, जो मरने पर ही समाप्त हो आमरणव्रत
किसी पात्र आदि के अन्दर का स्थान, जिसमें कोई चीज़ आ सके आयतन
दूसरे के हित में अपने आप को संकट में डालना आत्मोत्सर्ग
अर्थ या धन से सम्बन्ध रखने वाला आर्थिक
वह स्त्री जिसका पति परदेश से लौटा हो आगतपतिका
वह स्त्री जिसका पति आने वाला है आगमिस्यतपतिका
किसी बात पर बार-बार ज़ोर देना आग्रह
वह जो अपने आचार से पवित्र है आचारपूत
सामाजिक एवं प्रशासनिक अनुशासन की अपने क्रूरता से उत्पन्न स्थिति आतंक
देश में विदेश से माल आने की क्रिया आयात
जो जन्म लेते ही गिर या मर गया है आदण्डपात
सर्वप्रथम मत को प्रवर्तित करने वाला आदि प्रवर्तक
आदि से अंत तक आद्योपांत
गुण-दोषों का विवेचन करने वाला आलोचक
जिसे आश्वासन दिया गया हो आश्वस्त
वह कवि जो तत्क्षण कविता कर सके आशुकवि
आयोजन करने वाला व्यक्ति आयोजक
धन से संबंध रखने वाला आर्थिक
जो आलोचना के योग्य हो आलोच्य
किसी अवधि से संबंध रखने वाला आवधिक
आशुलिपि जानने वाला लिपिक आशुलिपिक
किसी देश के वे निवासी जो पहले से वहाँ रहते रहे हैं आदिवासी
ईश्वर में विश्वास रखने वाला आस्तिक
जिसकी बाँहें जानु तक पहुँचती हों आजानुबाहु
आशा से अतीत आशातीत
सेतुबंध रामेश्वरम से हिमालय तक आसेतु हिमालय
बालक से वृद्ध तक आबालवृद्ध
किसी चीज़ या बात की इच्छा रखने वाला इच्छुक
अपनी इच्छा के अनुसार काम करने वाला इच्छाकारी
किन्हीं घटनाओं का कालक्रम से किया गया वृत इतिवृत्त
इन्द्रियों को वश में करने वाला इन्द्रियजित
इन्द्रियों पर किया जाने वाला वश इंद्रियविग्रह
जो इन्द्रियों के ज्ञान के बाहर है इंद्रियातीत
इतिहास को जानने वाला इतिहासज्ञ
पूरब और उत्तर के बीच की दिशा ईशान
दूसरों की उन्नति को न देख सकना ईर्ष्या
किसी नई चीज को बनाना ईजाद, आविष्कार
जिसकी ईप्सा की गई हो ईप्सित
जो किसी नियम को न माने उच्छृंखल
किसी के बाद उसकी संपत्ति प्राप्त करने वाला उत्तराधिकारी
जिसने ऋण चुका दिया हो उऋण
जिसका हृदय उदार हो उदार हृदय
ऊपर कहा हुआ उपर्युक्त
जिसका उल्लेख किया गया हो उल्लिखित
जो धरती फोड़कर जनमता है उद्भिज
जो उद्धार करता है उद्धारक
ऊपर आने वाला श्वास उच्छ्वास
खाने से बचा हुआ जूठा भोजन उच्छिष्ट
सूर्योदय से पहले का समय उषाकाल
जिसके विषय में उल्लेख करना आवश्यक हो उल्लेखनीय
जो भूमि उपजाऊ हो उर्वरा
वह व्यक्ति जो हाथ उठाए हो उर्ध्वबाहु
ऊपर की ओर बढ़ती हुई सांस ऊर्ध्व श्वास
जो छाती के बल चलता हो उदग
जिसकी उपमा दी जाए उपमेय
जिससे उपमा दी जाए उपमान
जिसका मन उदार हो उदारमना
जिस पर किसी काम का उत्तरदायित्व हो उत्तरदायी
वह वस्तु जिसका उत्पादन हुआ हो उत्पाद
सूर्य जिस पर्वत के पीछे निकलता है उदयाचल
जिस पर उपकार किया गया है उपकृत
पर्वत के पास की भूमि उपत्यका
जिस भूमि में कुछ पैदा न होता हो ऊसर
ऊपर की ओर जाने वाला ऊर्ध्वगामी
जिसका चित्त एक जगह स्थिर हो एकाग्रचित
जिस पर किसी अन्य का कुछ अधिकार न हो एकाधिकार
जो दिन में एक बार भोजन करता है एकाहारी
जिसका संबंध किसी एक देश से हो एकदेशीय
किसी एक पक्ष से संबंधित एकपक्षीय
इस लोक से सम्बंधित ऐहिक
इन्द्रजाल करने वाला ऐन्द्रजालिक
इंद्रियों से संबंधित ऐंद्रिक
इस लोक से संबंध रखने वाला इहलौकिक
इतिहास से संबंधित ऐतिहासिक
जो अपनी इच्छा पर निर्भर हो ऐच्छिक
परब्रह्म का सूचक 'ओं' शब्द ओंकार
जिसका उच्चारण ओष्ठ (ओंठ) से हो ओष्ठय
आड़ या परदे के लिये रथ या पालकी को ढकने वाला कपड़ा ओहार
सारे संसार के देशों की खेल प्रतियोगिताएं ओलम्पिक
अपनी विवाहित पत्नी से उत्पन्न (पुत्र) औरस (पुत्र)
जिसका संबंध उपनिवेश या उपनिवेशों से हो औपनिवेशिक
उपचार या ऊपरी दिखावे के रूप में होने वाला औपचारिक
जिसका संबंध उपन्यास से हो औपन्यासिक
जो पुरुष कविता रचता है कवि
जो स्त्री कविता रचती है कवयित्री
जिसके पास करोड़ों रुपये हों करोड़पति
जिस लड़की का विवाह न हुआ हो कुमारी
किसी के उपकार को न मानने वाला कृतघ्न
जो कहा गया है कथित
जो कहने योग्य हो कथ्य/कथनीय
जो कान को कटु लगे कर्णकटु
कष्टों या काँटो से भरा हुआ कंटकाकीर्ण
अपने कर्तव्य का निर्णय न कर सकने वाला किंकर्तव्यविमूढ़
जो कटु बोलता है कटुभाषी
जो कष्ट को सहन कर सके कष्टसहिष्णु
जो काम से जी चुराता है कामचोर
जो कला जानता हो कलाविद्/कलाकार
जो अच्छे कुल में उत्पन्न हुआ हो कुलीन
बेलों आदि से घिरा हुआ सुरम्य स्थान कुंज
जो किये गये उपकारों को जानता (मानता) हो कृतज्ञ
जो कर्तव्य से च्युत हो गया है कर्तव्यच्युत
जिसे बाह्य जगत् का ज्ञान न हो कूपमण्डूक
किसी की कृपा से पूरी तरह संतुष्ट कृतार्थ
जिसकी बुद्धि कुश के उग्र (नोक) की तरह तेज़ हो कुशाग्र बुद्धि
जिसे क्रय किया गया हो क्रीत
वह नायिका जो कृष्ण पक्ष में अपने प्रेमी से मिलने जाती हो कृष्णाभिसारिका
जो कल्पना से परे हो कल्पनातीत
कारागार से संबंध रखने वाला कारागारिक
क्रम के अनुसार क्रमानुसार
किसी विचार/निर्णय को कार्यरूप देना कार्यान्वयन
धन का देवता कुबेर
कुंती का पुत्र कौंतेय
राजनीतिज्ञों एवं राजदूतों की कला कूटनीति
क्षमा पाने योग्य क्षम्य
क्षणभर में नष्ट होने वाला क्षणभंगुर
जिसका हाथ बहुत तेज चलता हो क्षिप्रहस्त
भूख से व्याकुल क्षुधातुर
कार्य करने वाला व्यक्ति कार्यकर्ता
किन्हीं निश्चित कार्यों के लिए बनायी गयी समिति कार्यसमिति
पद, उम्र आदि के विचार से औरों से अपेक्षाकृत छोटा कनिष्ठ
ठीक अपने क्रम से आया हुआ क्रमागत
नियम विरुद्ध या निंदनीय कार्य करने वालों की सूची काली सूची (ब्लैक लिस्ट)
जो केंद्र की ओर उन्मुख होता हो केंद्राभिमुख
वह नायिका जिसका पति रात को किसी अन्य स्त्री के पास रहकर प्रातः: उसके पास आता हो खंडिता
जो सदैव हाथ में खड्ग लिए रहता हो खड्गहस्त
खाने योग्य पदार्थ खाद्य
जिसका कोई हिस्सा टूटकर अलग हो गया हो खंडित
किसी के घर की होने वाली तलाशी खानातलाशी
ऐसा जो अंदर से खाली हो खोखला
ऐसा ग्रहण जिसमें सूर्य या चंद्रमा का पूरा बिम्ब ढक जाये खग्रास
पृथ्वी की वह शक्ति जो सभी चीजों की अपनी ओर खींचती हो गुरुत्वाकर्षण
जो कठिनाइयों से पचता है गरिष्ठ/गुरुपाक
प्राचीन आदर्श के अनुकूल चलने वाला गतानुगतिको
जो क़ानून के विरुद्ध है ग़ैरक़ानूनी
गंगा का पुत्र गांगेय
बहुत गप्पे हाँकने वाला गपोड़िया
जो गिरि (पहाड़) को धारण करता हो गिरधारी
गृह (घर) बसाकर रहने वाला गृहस्थ
रात और संध्या के बीच का समय गोधूलि
जो छिपाने योग्य हो गोपनीय
गगन (आकाश) चूमने वाला गगनचुम्बी
जो बीत चुका हो गत
जो इन्द्रियों के ज्ञान के बाहर है गोतीत
गणित शास्त्र के जानकार गणितज्ञ
जो गांव से संबंधित हो ग्रामीण
वह नाटक जिसमें गीत अधिक हों गीतरूपक
बहुत-सी घटनाओं का सिलसिला घटनावली, घटनाक्रम
घास छीलने वाला घसियारा
जिसकी घोषणा की गयी हो घोषित
घूस लेना वाला/रिश्वत लेने वाला घूसखोर/रिश्वतखोर
घुलने योग्य पदार्थ घुलनशील
घृणा करने योग्य घृणास्पद
किसी के इर्द-गिर्द घेरा डालने की क्रिया घेराबन्दी
जो चिरकाल तक बना रहे चिरस्थायी
चेतन स्वरूप की माया चिद्विलास
बरसात की चार महीने चतुर्मास
चार वेदों को जानने वाला चतुर्वेदी
जो चक्र धारण करता है चक्रधर/चक्रधारी
जिसके चूड़ा पर पर चंद्र रहे चंद्रचूड़
जो चंद्र धारण करता हो चंद्रधारी
जिसके शिखर (सिर) पर चंद्र हो चंद्रशेखर
करने की इच्छा चिकीर्षा
जिसकी चिकित्सा की जा सके चिकित्स्य
चार राहों वाला चौराहा
किसी को सावधान करने के लिए कही जाने वाली बात चेतावनी
चौथे दिन आने वाला ज्वर चौथिया
चारों ओर की सीमा चौहद्दी
जिस पर चिन्ह लगाया गया हो चिह्नित
जो चर्चा का विषय हो चर्चित
किसी वस्तु का चौथा भाग चतुर्थांश
जो अपने स्थान से डिग गया हो च्युत
जिसका चिंतन किया जाना चाहिए चिंतनीय
रोगियों की चिकित्सा करने का स्थान चिकित्सालय
चूहे फंसाने का पिंजरा चूहेदानी
करुण स्वर में चिल्लाना चीत्कार
महीने के किसी पक्ष की चौथी तिथि चतुर्थी
जिसकी चार भुजाएं हैं चतुर्भुज
जिसके हाथ में चक्र हो चक्रपाणि
जिसके चार पैर हों चतुष्पद
अधिक दिनों तक जीने वाला चिरंजीवी
छिपे वेश में रहना छद्मवेश
सेना के रहने का स्थान छावनी
छात्रों के रहने का स्थान छात्रावास
सहसा छिपकर आक्रमण करने वाला छापामार
दूसरों के दोषों को खोजना छिन्द्रान्वेषण
दूसरों के दोषों को ढूंढने वाला छिन्द्रांवेषी
किसी काम या व्यक्ति में छिद्र या दोष निकालने का कार्य छिन्द्रोन्वेषण
कर्मचारियों आदि को छाँटकर निकालने की क्रिया छँटनी
छ: महीने के समय से सम्बन्धित छमाही
इन्द्रियों को जीतने वाला जीतेन्द्रिय
जान से मारने की इच्छा जिघांसा
जीने की इच्छा जिजीविषा
जेठ का पुत्र जेठौत
जनता द्वारा संचालित शासन जनतंत्र
कुछ जानने या ज्ञान प्राप्त करने की चाह जिज्ञासा
किसी के सम्पूर्ण जीवन के कार्यों का विवरण जीवनचरित
जन्म से सौ वर्ष का समय जन्मशती
अन्न को पचाने वाली जठर (पेट) की अग्नि जठराग्नि
जो जरायु (गर्भ की थैली) से जनमता है जरायुज
जल में जन्म लेने वाला जलज
जल में रहने वाले जीव-जन्तु जलचर
जो यान जल में चलता हो जलयान
किसी भी बात को जानने की इच्छा जिज्ञासा
जो जन्म से अंधा हो जन्मांथ
जिसे जानना चाहिए ज्ञातव्य
ज्ञान देने वाला ज्ञानदा
जो जानने को उत्सुक है जिज्ञासु
जीतने की इच्छा जिगीषा
जोतने का काम जुताई
झमेला करने वाला झमेलिया
कांटेदार झाड़ियों का समूह झाड़ झंखाड़
अपनी झक (धुन) में मस्त रहने वाला झक्की
वह कपड़ा जिससे कोई चीज़ झाड़ी जाये झाड़न
झीं-झीं की तेज़ आवाज़ करने वाला कीड़ा झींगुर
जिसके लम्बे-लम्बे बिखरे बाल हों झबरा
झूठ बोलने वाला झूठा
गातार घंटा बजने से होने वाला शब्द टनाटन
चारों ओर जल से घिरा हुआ भू-भाग टापू
सिक्के ढालने का कारखाना टकसाल
किसी ग्रंथ या रचना की टीका करने वाला टीकाकार
किराए पर चलने वाली मोटर गाड़ी टैक्सी
ठगों का मोदक/लड्डू जिसमें बेहोश करने वाली चीज़ मिली रहती है ठगमोदक/ठगलड्डू
मूल बातों को संक्षेप में लिखना टिप्पणी
टाइप करने की कला टंकण
ठन-ठन की अवाज़ ठनकार
दिन रात ठाढ़े (खड़े) रहने वाले साधु ठाढ़ेश्वरी
ठीका लेने वाला ठीकेदार
ठठेरे की बिल्ली जो ठक-ठक शब्द से न डरे ठठेरमंजारिका
ठूसकर भरा हुआ ठसाठस
ठक-ठक करके बर्तन बनाने वाला ठठेरा
डंडी मारने वाला डंडीमार
डाका मारने वाला डकैत
डफली बजाने वाला डफालची/डफाली
स्थल या जल का वह तंग या पतला भाग, जो स्थल या जल के दो बड़े खंडों को मिलाता है डमरूमध्य
बहुत डरने वाला डरपोक
पन्नों आदि को दूरस्थ स्थानों पर पहुंचने वाली सेवा डाक सेवा
डाका मारने का काम डकैती
ड्योढ़ी पर रहने वाला पहरेदार ड्योढ़ीदार
ढीला होने का भाव ढिलाई
ढोंग रचने वाला ढोंगी
जिसमें ढाल हो ढालू/ढालवाँ
ढोलक बजाने वाला ढोलकिया
ढिंढोरा पीटने वाला ढिंढोरिया
ढालने का काम ढलाई
दैहिक, दैविक व भौतिक ताप या कष्ट त्रिताप
वात, पित्त व कफ त्रिदोष
तैरने की इच्छा तितीर्षा
विवाद या गुटबंदी से अलग रहने वाला तटस्थ/गुटनिरपेक्ष
कोई काम या पद छोड़ने के लिये लिखा गया पत्र त्यागपत्र
तीन वेदों को जानने वाला त्रिवेदी
तीनों कालों को देखने वाला त्रिकालदर्शी
तीन कालों को जानने वाला त्रिकालज्ञ
जो तीन गुणों (सत्व, रज व तम) से परे हो त्रिगुणातीत
किसी पद अथवा सेवा से मुक्ति का पत्र त्यागपत्र
किसी भी पक्ष का समर्थन न करने वाला तटस्थ
ऐसा तर्क जो देखने पर ठीक प्रतीत होता हो, किंतु वैसा न हो तर्काभास
तीन कालों की बात जानने वाला त्रिकालज्ञ
ऋण के रूप में आर्थिक सहायता तकावी
एक व्यक्ति द्वारा चलायी जाने वाली शासन प्रणाली तानाशाही
चोरी छिपे चुंगी शुल्क आदि दिये बिना माल लाकर बेचने वाला तस्कर
जो तर्क के आधार पर सही सिद्ध हो तर्कसंगत
तर्क के द्वारा जो माना गया हो तर्कसम्मत
भौंहों के बीच का ऊपरी भाग त्रिकुटी
सत्व, रज व तम त्रिगण
आँवला, हर्र व बहेड़ा त्रिफला
तीन युगों में होने वाला त्रियुगी
तीन नदियों का संगम त्रिवेणी
तीन लोकों का समूह त्रिलोक
उसी समय का तत्कालीन
जिसे त्याग देना उचित हो त्याज्य
स्वर्गलोक, मृत्युलोक और पाताल लोक त्रिभुवन/त्रिलोक
शीतल, मंद व सुगंधित वायु त्रिविधवायु
जो तर्क योग्य हो तार्किक
जमी हुई गाढ़ी चीज़ की मोटी तह थक्का
चौपायों के बाँधने का स्थान थान
कुछ निश्चित लंबाई का कपड़ा थान
पुलिस की बड़ी चौक थाना
थाने का प्रधान अधिकारी थानेदार
किसी के पास रखी हुई दूसरे की वस्तु थाती/धरोहर/अमानत
दाव (जंगल) में लगने वाली आग दावानल
जो द्वार का पालन (रक्षा) करता है द्वारपाल
दिन पर दिन दिनोंदिन
दो बार जन्म लेने वाला द्विज
जिसे समझना बहुत कठिन हो दुष्कर
जिसका दमन कठिन हो दुर्दम्य/दुर्दांत/दुर्धर्ष
जिसको प्राप्त करना बहुत कठिन हो दुर्लभ
जो मुश्किल से प्राप्त हो दुष्प्राप्य
अपने देश के साथ विश्वासघात करने वाला देशद्रोही
प्रतिदिन होने वाला दैनिक
तेज़ गति से चलने वाला द्रुतगामी/तीव्रगामी
जिसको रोकना या निवारण करना कठिन हो दुर्निवार
जिसे भेदना या तोड़ना कठिन हो दुर्भेद्य
जिसे सताया गया हो दलित
दो भाषाएं बोलने वाला द्विभाषी
दो वेदों को जानने वाला द्विवेदी
जिसने गुरु से दीक्षा ली हो दीक्षित
जिसने किसी विषय में मन लगा लिया हो दत्तचित
एक राजनीतिक दल को छोड़कर दूसरे दल में शामिल होने वाला दलबदलू
पति-पत्नी का जोड़ा दम्पति
गोद लिया हुआ पुत्र दत्तक (पुत्र)
जो दिया जा सके देय
स्त्री-पुरुष का जोड़ा/पति-पत्नी का जोड़ा दम्पति
दण्ड दिये जाने योग्य दण्डनीय
कपड़ा सीने का व्यवसाय करने वाला दर्जी
दस वर्षों का समय दशक
जिसके दस आनन (मुख) हों दशानन
जो दर्शन-शास्त्र का ज्ञाता हो दार्शनिक
देने की इच्छा दित्सा
अनुचित या बुरा आचरण करने वाला दुराचारी
बहुत दूर की बात पहले से ही सोच लेने वाला दूरदर्शी
आँख की बीमारी दृष्टिदोष
जो देखने योग्य हो द्रष्टव्य/दर्शनीय
जिसमें जाना या समझना कठिन हो दुर्गम
जिसको लांघना कठिन हो दुर्लंघ्य
पति के छोटे भाई की स्त्री देवरानी
दैव या प्रारब्ध सम्बन्धी बातें जानने वाला देवज्ञ
दिन के समय अपने प्रिय से मिलने जाने वाली नायिका दिवाभिसारिका
अपराध और उन पर दण्ड देने के नियम निर्धारित करने वाला प्रश्न दण्ड संहिता
अपने देश से प्यार करने वाला देशभक्त
नापाक इरादे से की जाने वाली मंत्रणा या साजिश दुरभिसंधि
जिस समय बड़ी मुश्किल से भिक्षा मिलती है दुर्भिक्ष
जो कठिनाइयों से पचता है दुष्पाच्य
अनुचित बात के लिये आग्रह दुराग्रह
जिस पर दिनांक (तारीख का अंक) लगाया गया हो दिनांकित
जो विलम्ब या टालमटोल से काम करे दीर्घसूत्री
दशरथ का पुत्र दाशरथि
देखने की इच्छा दिदृक्षा
विवाह के पश्चात् वधू का ससुराल में दूसरी बार आना द्विरागमन
सदा प्रसन्न रहने वाली या कला-प्रेमी नायक धीरललित
शक्तिशाली, दयालु और योद्धा नायक धीरोदात्त
धन देने वाला धनद
धर्म में रुचि रखने वाला धर्मात्मा
यात्रियों के लिए धर्मार्थ बना हुआ घर धर्मशाला
मछली पकड़ने या बेचने वाली जाति विशेष धीवर
हवा में मिली हुई धूल या भाप के कारण होने वाला अँधेरा धुंध
जो वस्तु दूसरे के यहाँ रखी हो धरोहर
ध्यान करने योग्य या लक्ष्य ध्येय
जिस पर लम्बी-लम्बी धारियाँ हों धारीदार
बहुत चंचल, दुष्ट और अपनी प्रशंसा करने वाला नायक धारोद्धत
जिसका कोई आश्रय न हो निराश्रय
निर्वाचन में अपना मत देने वाला निर्वाचक
जिसमें मल (गंदगी) न हो निर्मल
जिस स्थान पर अभिनेता अपना वेश-विन्यास करते हैं नेपथ्य
जो अपने लाभ या स्वार्थ का ध्यान न रखता हो निस्वार्थ
जो निंदा के योग्य हो निंदनीय
जो कामना रहित हो निष्काम
जो चिंता रहित हो निश्चिन्त
जिसका कोई आधार न हो निराधार
नया उदित होने वाला नवोदित
अभी-अभी जन्म लेने वाला नवजात
नदी से खींचा जाने वाला प्रदेश नदीमातृक
जिसका कोई आकार न हो निराकार
बिना पलक गिराए हुए निर्निमेष
जो अति (बहुत) लद्यु (छोटा) नहीं है नातिलद्यु
उच्च न्यायालय का न्यायाधीश न्यायमूर्ति
जो तेजहीन हो निस्तेज
जिसे कोई भय न हो निर्भय
जो एक अक्षर भी न जानता हो निरक्षर
जिसमें कोई दोष न हो निर्दोष
जिसकी उपमा न दी जा सके निरुपम
जिसके हृदय में ममता न हो निर्मम
जिसके हृदय में दया न हो निर्दय
जिसमें हानि या अनर्थ का भय न हो निरापद
जिसे कोई आकांक्षा न हो नि:स्पृह
नगर में रहने वाला नागरिक
जिसे देश से निकाला गया हो निर्वासित
जिसका मूल नहीं है निर्मूल
जिसका कोई अर्थ न हो निरर्थक
जो सत्व, रज और तम तीनों गुणों से परे हो निर्गुण
जो अति (बहुत) दीर्घ (बड़ा) नहीं है नातिदीर्घ
जो नृत्य करता है नृत्यकार/नर्तक
जिसमें तेज़ नहीं है निस्तेज
जो नीचे लिखा गया है निम्नलिखित
जिसके बारे में मतभेद न हो निर्विवाद
जिसके पास शक्ति न हो निर्बल
जिस पर किसी प्रकार का अंकुश (नियंत्रण) न हो निरंकुश
जो उत्तर न दे सके निरुत्तर
जो न्याय जानता है नैयायिक
शासकीय अधिकारियों का शासन नौकरशाही
नया-नया आया हुआ नवागन्तुक
नगर में जन्म लेने वाला नागरिक
जिसे ईश्वर पर विश्वास न हो नास्तिक
जिसके हृदय में पाप न हो निष्पाप
निशि में विचरण निशाचर
जिसे कोई भ्रम या संदेह न हो निर्भ्रांत
एक देश से माल दूसरे देश में जाने की क्रिया निर्यात
जिसका कोई शुल्क न लिया जाये नि:शुल्क
किसी के साथ सम्बन्ध न रखने वाला नि:संग
जिसके कोई संतान न हो निसंतान
नाक से रक्त बहने का रोग नकसीर
नख से शिखा तक के सब अंग नखशिख
नष्ट होने वाला नश्वर
नभ (आकाश) में विचरण करने वाला नभचर/खेचर
अपने पद से हटाया हुआ पदच्युत
अपने को पंडित मानने वाला पंडितम्मन्य
पंडितों में पंडित पंडितरा
पथ का प्रदर्शन करने वाला पथ प्रदर्शक
जिसमें पांच कोने हों पंचकोण
जो दृष्टि के क्षेत्र से परे हो परोक्ष
जो परायों का अर्थ (हित) चाहता है परमार्थी
जो अपने पथ से भटक गया हो पथभ्रष्ट
प्राण देने वाली औषधि प्राणदा
पाप या अपराध करने पर दोषमुक्त होने के लिए किया जाने वाला धार्मिक या शुभ कार्य प्रायश्चित
जो देखने में प्रिय हो प्रियदर्शी
जो प्रिय बोलता हो प्रियवादी
प्रिय बोलने वाली स्त्री प्रियंवदा
जो दूसरे के अधीन हो पराधीन
जो प्रशंसा के योग्य हो प्रशंसनीय
ऐतिहासिक युग के पूर्व का प्रागैतिहासिक
वह स्त्री जिसको पति ने त्याग (छोड़) दिया हो परित्यक्ता
जो दूसरों का भला चाहने वाला हो परार्थी
पानी में डूबकर चलने वाली नाव पनडुब्बी
जो दूसरों का उपकार करने वाला हो परोपकारी
जो उक्ति बार-बार कही जाये पुनरुक्ति
जो किसी का प्रतिनिधित्व (किसी की जगह काम) करता है प्रतिनिधि
वह शासन प्रणाली जिसमें जनसाधारण का शासन हो प्रजातंत्र
जो शीघ्र किसी बात या युक्ति को सोच ले प्रत्युत्पन्नमति
शरीर के एक पार्श्व का लकवा पक्षाघात
अपने पति के प्रति अनन्य अनुराग रखने वाली स्त्री पतिव्रता
पिता की हत्या करने वाला पितृहंता
पिता का पिता पितामह
पिता के पिता का पिता प्रतितामह
जिसकी बाँहें अधिक लंबी हो प्रलंब बाहु
दूसरों के आश्रय में रहने वाला पराश्रयी
जो पृथ्वी से संबंधित हो पार्थिव
जिसके आर-पार देखा जा सके पारदर्शी
आटा पीसने वाली स्त्री पिसनहारी
पीने की इच्छा पिपासा
जो पिंड से जनमता है पिंडज
पिता से प्राप्त की हुई (सम्पत्ति) पैतृक
आँखों के समक्ष प्रत्यक्ष
जो अपनी मातृभूमि छोड़ विदेश में रहता हो प्रवासी
प्रयोग में लाने योग्य प्रयोजनीय
किसी टूटी-फूटी वस्तु का पुनर्निर्माण पुनर्निर्माण
जो पांचाल देश की हो पांचाली
पर्वत की कन्या पार्वती
कही हुई बात को बार-बार कहना पिष्टपेषण
बच्चे को जन्म देने वाली स्त्री प्रसूता
जो पहरा देने वाला हो प्रहरी
उपकार के प्रति किया गया उपकार प्रत्युपकार
किसी आरोप के उत्तर में किया जाने वाला आरोपी प्रत्यारोप
लौटकर आया हुआ प्रत्यागत
वह नायिका जिसका पति विदेश जाने को हो प्रवत्स्यपतिका
वह स्त्री जिसका पति प्रोषित (परदेश गया) हो प्रोषितपतिका
जो पूछने योग्य हो प्रष्टव्य
वह जिससे प्रेम किया जाये प्रेमपात्र
समान रूप से आगे बढ़ने की चेष्टा प्रतिस्पर्धा
जिसमें प्रतिभा है प्रतिभावान
जो प्रणाम करने योग्य हो प्रणच्य
जो मुकदमे का प्रतिवाद करे प्रतिवादी/मुद्दालेह
जो केवल फल खाकर निर्वाह करता हो फलाहारी
छत में टांगने का शीशे का कमल या गिलास, जिसमें मोमबत्तियां जलती हों फानूस
फलने वाला या फल (ठीक परिणाम) देने वाला फलदायी
जुआ खेलने का स्थान फड़
आय से अधिक व्यर्थ खर्च करने वाला फ़िज़ूलखर्ची
घूम-फिर कर सौदा बेचने वाला फेरीवाला
जिस काग़ज़ पर मानचित्र, विवरण या कोष्ठक अंकित हो फलक
जिस स्थान पर बैठकर माल खरीदा और बेचा जाता हो फड़
वह पात्र जिसमें शोभा के लिए फूल लगाकर रखे जाते हैं फूलदान
जिसने बहुत कुछ देखा हो बहुदर्शी
बहुत-से रूप धारण करने वाला बहुरूपिया
बहुत-सी भाषाओं को बोलने वाला बहुभाषाभाषी
बहुत-सी भाषाओं को जानने वाला बहुभाषाविद्
आधे से अधिक लोगों की सम्मिलित एक राय बहुमत
जिसके पास कोई रोजगार न हो बेरोजगार
जिस स्त्री के संतान पैदा न होती हो बाँझ
छोटे कद का आदमी बौना
भोजन करने की इच्छा बुभुक्षा
किसी देवता पर चढ़ाने के लिए मारा जाने वाला पशु बलि
जल में लगने वाली आग बड़वाग्नि
जो बहुत कुछ जानता हो बहुज्ञ
जिसने बहुत कुछ सुन रखा हो बहुश्रुत
जिसकी जीविका बुद्धि के बल पर चलती हो बुद्धिजीवी
जो बुद्धि द्वारा जाना जा सके बोधगम्य
बहुत बोलने वाला बहुभाषी
वह शास्त्र जिसमें पृथ्वी के स्वरूप का वर्णन हो भूगोल
वे बातें जो पुस्तक के आरंभ में लिखी जाए भूमिका/प्राक्कथन
जो पूर्व में था या हुआ पर अभी नहीं है भूतपूर्व
दीवार पर बने हुए चित्र भित्तिचित्र
भूतों का ईश्वर भूतेश
जो भू धारण करता है भूधर
(किसी पद पर) जो पहले रहा हो भूतपूर्व
जिसका हृदय भग्न हो भग्नहृदय
भविष्य में होने वाला भावी
जो भाग्य का धनी हो भाग्यवान्
जो पृथ्वी के गर्भ (भीतर) के हाल/शास्त्र जानता हो भूगर्भवेत्ता/भूगर्भशास्त्री
मरने की इच्छा मुमूर्षा
मुँह पर निकलने वाली फुंसियां मुँहासे
देवताओं पर चढ़ाने हेतु बनाया गया दही, घी, जल, चीनी और शहद का मिश्रण मधुपर्क
किसी मत को मानने वाला मतानुयायी
मनन करने योग्य मननीय
कम खर्च करने वाला मितव्ययी
एक महीने में होने वाला मासिक
माता की हत्या करने वाला मातृहंता/मातृघाती
जिसे मोक्ष की कामना हो मुमुक्षु
भेड़ का बच्चा मेमना
किसी विषय पर दूसरे से मत न मिलना मतभेद
चुनाव में अपना मत देने की क्रिया मतदान
मनपसंद या नामांकित मनोनीत
वह स्थिति जब मुद्रा का चलन अधिक हो मुद्रास्फीति
जो मान-सम्मान के योग्य हो माननीय
जो मधुर बोलता है मधुरभाषी
मित (कम) बोलने वाला मितभाषी
जिसकी आत्मा महान हो महात्मा
किसी बात का गूढ़ रहस्य जानने वाला मर्मझ
जो मछली का आहार करता है मत्स्याहारी
जिसकी भुजाएँ बड़ी हों महाबाहु
जिसने मृत्यु को जीत लिया है मृत्युंजय
मांस आहार या भोजन करने वाला मांसाहारी/मांसभोजी
जो हाथों से मुक्त है अर्थात् अधिक देने वाला मुक्त हस्त
जो मुकदमा लड़ता है मुकदमेबाज
जिसमें मल (गंदगी) हो मलिन
मेघ की तरह नाद करने वाला मेघनाद
जो रथ पर सवार है रथी
जिसे देख या सुनकर रोम (रोंगटे) खड़े हो जायें रोमांचकारी
राजा या राज्य के प्रति किया जाने वाला विद्रोह राजद्रोह
जो राज्य या राजा से द्रोह करे राजद्रोही
राष्ट्र का प्रमुख राष्ट्रपति
गोपों को घेरा बांधकर नाचने की क्रिया रास
रक्त में रंगा हुआ या भरा हुआ रक्तरंजित
जो राजनीति जानता है राजनीतिज्ञ
जिसकी सूचना राजपत्र में दी गयी हो राजपत्रित
जो रंग (नाट्य) का मंच (स्टेज) है रंगमंच
रात को दिखाई न देने वाला रोग रतौंधी
वह पूंजी जो संपत्ति आदि के रूप में हो रिक्थ
वह काव्य जिसका अभिनय किया जाये रूपक
वह शासन प्रणाली जो जनता द्वारा जनता के हित के लिए है। लोकतंत्र
आय-व्यय, लेन-देन का लेखा करने वाला लेखाकार
जो आसानी से पचता हो लघुपाक
जिसके पास लाख रुपये की संपत्ति हो लखपति
जिसका उदर लम्बा (बड़ा) हो लम्बोदर
जिसने प्रतिष्ठा प्राप्त की है लब्धप्रतिष्ठ
जो भूमि का हिसाब-किताब रखता हो लेखपाल
बच्चों को सुलाने के लिए गाया जाने वाला गीत लोरी
जो विषय विचार में आ सकता है विचारगम्य
बोलने की इच्छा विवाक्षा
विश्व का पर्यटन करने वाला विश्वपर्यटक
प्रतिकूल पक्ष का विपक्षी
जिस पुरुष की स्त्री मर गई हो विधुर
जिसकी पत्नी साथ में न हो विपत्नीक
जो वर्णन के बाहर हो वर्णनातीत
जो वचन से परे हो वचनातीत
जो पूर्ण रूप से बहरा हो वज्रबधिर
जिसके पाणि (हाथ) में वीणा हो वीणापाणि
जिस पर विश्वास न किया जा सके विश्वासघाती
जो विश्वास करने योग्य हो विश्वसनीय
जिस पर विश्वास किया गया है विश्वस्त
जो विश्व का हित चाहता है विश्वहितैषी
विधि (क़ानून) के द्वारा प्राप्त हो विधिप्रदत्त
बिजली की तरह तीव्र वेग वाला विद्युत्वेग
वाडव (सागर) का अनल (आग) वाड्वानल
जो कोई वस्तु वहन करता है वाहक
बिक्री करने वाला विक्रेता
जो अपने धर्म के विपरीत आचरण करता हो विधर्मी
जिस स्त्री का धव (पति) मर गया हो विधवा
जो विश्व भर में बंधु है विश्वबंधु
जो विषयों में आसक्त है विषयासक्त
स्पष्टीकरण के लिए दिया जाने वाला वक्तव्य विवृति
जो व्याकरण का ज्ञाता हो वैयाकरण
जो विज्ञान का ज्ञाता हो वैज्ञानिक
वेतन पर काम करने वाला वैतनिक
जिसके हाथ में वज्र हो वज्रपाणि
बाल्यावस्था और युवावस्था के बीच का समय वय:संधि
जिस स्त्री के कोई संतान न हुई हो बन्ध्या
जो अधिक बोलता हो वाचाल
जो मुक़दमा दायर करता है वादी/मुद्दई
वसुदेव के पुत्र वासुदेव
जिसके भीतर की हवा और तापमान सम स्थिति में रखा गया हो वातानुकूलित
जो कानून के अनुसार हो वैध
जो व्याख्या करता हो व्याख्याता
विष्णु का भक्त या विष्णु संबंधी वैष्णव
बिजली की तरह कांति (चमक) वाला विद्युत्प्रभ
जिसमें किसी प्रकार का विकार हो विकृत
जिसका कोई अंग बेकार हो विकलांग
किसी विषय को विशेष रूप से जानने वाला विशेषज्ञ
जिसके विषय में विवाद हो विवादास्पद
जो सुनने योग्य हो श्रोतव्य/श्रवणीय
जो सुनने में मधुर हो श्रुतिमधुर
जो सुनने में कटु लगे श्रुति कटु
सदैव रहने वाला शाश्वत
जो अन्न और साग-सब्जी खाता हो शाकाहारी
सौ वर्ष का समय शताब्दी
जिसके हाथ में शूल हो शूलपाणि (शिव)
जो तेज चलता हो शीघ्रगामी
जो शिव की उपासना करता हो शैव
शत्रु का नाश करने वाला शत्रुघ्न
वह स्थान जहाँ मुर्दे जलाये जाते हैं श्मशान
सौ में सौ शत प्रतिशत
शयन (सोने) का आगार (कमरा) शयनागार
शरण में आया हुआ शरणागत
जो शक्ति का उपासक हो शाक्त
जो शास्त्र को जानता हो शास्त्रज्ञ
सिर पर धारण करने योग्य शिरोधार्य
जिसके नख सूप के समान हो शूर्पणखा
संगीत के छ: राग षट्‌राग
छ: मुँहों वाला षण्मुख/षडानन
छह-छह महीने पर होने वाला षाण्मासिक
सोलह वर्ष की लड़की षोडशी
छह कोने वाली आकृति षट्कोण
जो दया के साथ (दयालु) है सदय
जो सरलता से बोध्य (समझने योग्य) हो सुबोध
जो आसानी से पचता हो सुपाच्य
जहाँ मुफ्त में खाना बँटता हो सदावर्त
सब कुछ खाने वाला सर्वभक्षी
एक ही जाति का सजातीय
जहाँ अनेक नदियों का संगम (मिलन) हो संगम
जो संगीत जानता है संगीतज्ञ
एक ही समय में उत्पन्न होने वाला समकालीन
जो सबको एक समान देखता है समदर्शी
सत्य के प्रति आग्रह सत्याग्रह
जो सब जगह व्याप्त हो सर्वव्यापी
वह पुरुष जिसकी पत्नी साथ है सपत्नीक
जो सर्वशक्ति सम्पन्न है सर्वशक्तिमान
समान वय वाला समवयस्क
समान (एक ही) उदर से जन्म लेने वाला सहोदर
एक ही समय में वर्तमान समसामयिक
जिसका आचार अच्छा हो सदाचारी
सड़ी हुई वस्तु की गंध सड़ाँध
जिसमें सात रंग हो सतरंग
अपने परिवार के साथ है जो सपरिवार
सहन करना जिसका स्वभाव है सहनशील
जो किसी सभा का सदस्य हो सभासद
जो सब कुछ जानता हो सर्वज्ञ
जो सबका प्यारा हो सर्वप्रिय
जिस स्त्री का पति जीवित हो सधवा
सबको जीतने वाला सर्वजित
जो सव्य (बायें हाथ से हथियार आदि चलाने में) सधा हुआ हो सब्यसाची
जो नाटक का सूत्र धारण (संचालन) करता है सूत्रधार
साहित्य से सम्बन्धित साहित्यिक
जिनकी ग्रीवा (गर्दन) सुन्दर हो सुग्रीव
स्वेद (पसीने) से उत्पन्न होने वाला स्वेदज
जो स्मरण करने योग्य है स्मरणीय/स्मर्तव्य
किसी काम में दूसरों से बढ़ने की इच्छा स्पर्धा
जो स्त्री के वशीभूत या उसके स्वभाव का हो स्त्रैण
जो स्वयं उत्पन्न हुआ हो स्वयंभू
अपना हित चाहने वाला स्वार्थी
अपनी इच्छा से दूसरों की सेवा करने वाला स्वयंसेवक
जो स्वयं ही सिद्ध (ठीक) हो स्वयंसिद्ध
न बहुत शीत (ठंडा) न बहुत उष्ण (गर्म) समशीतोष्ण
प्राणों पर संकट लाने वाला सांघातिक
जिसका कोई आकार हो साकार
सब लोगों से संबंध रखने वाला सार्वजनिक
एक सप्ताह में होने वाला सारस्वत
सरस्वती का भक्त या सरस्वती से संबद्ध साप्ताहिक
सब कालों में होने वाला सार्वकालिक
सब देशों से सम्बद्ध सार्वदेशिक
समस्त पृथ्वी से सम्बन्ध रखने वाला सार्वभौमिक
दूसरे के स्थान पर काम करने वाला स्थानापन्न
एक स्थान से दूसरे स्थान को जाना स्थानान्तरण
अपने ही बल पर निर्भर रहने वाला स्वावलम्बी
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद का स्वातंत्र्योत्तर
कुछ ख़ास शर्तों द्वारा कोई कार्य करने का समझौता संविदा
समय से संबंधित सामयिक
जिसके लोचन (आँखें) सुंदर हों सुलोचन
जिसे सरलता से पढ़ा जा सके सुपाठ्‌य
शयन करने की इच्छा सुषुप्सा
जो अक्षर पढ़ना लिखना जानता हो साक्षर
सिंह का बच्चा सिंह शावक
जो आसानी से लब्ध (प्राप्त) हो सके सुलभ
सुन्दर हृदय वाला सुहृदय
मिठाई बनाने और बेचने वाला हलवाई
हंस के समान सुंदर मंद गति से चलने वाली स्त्री हंसगामिनी
हाथ का लिखा हुआ हस्तलिखित
दूसरे के हाथ में गया हुआ हस्तांतरित
भलाई की इच्छा रखने वाला हितैषी
अगहन और पूस में पड़ने वाली ऋतु हेमन्त
जो दूसरे की हत्या करता है हत्यारा
हृदय को विदीर्ण करने वाला हृदयविदारक
हिन्द की भाषा हिन्दी

पाठकों की जिज्ञासा

  1. शरण में आया हुआ - शरणागत
  2. श्रम से प्राप्त होने वाला - श्रमसाध्य
  3. दूसरों के द्वारा किया गया विश्वास - भरोसा
  4. एक साथ पढने वाला - सहपाठी  
  5. सूर्य के अस्त होने का समय - सूर्यास्त


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