गिरफ्तारी के मामले में डी.के बासु के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देश



पुलिस अगर आपको कर रही हो गिरफ्तार तो ये हैं आपके कानूनी अधिकार


डी.के. बासु के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा-निर्देश

Guidelines given by Hon'ble Supreme Court in the case of D.K. Basu

पुलिस अगर आपको कर रही हो गिरफ्तार, तो ये हैं आपके कानूनी अधिकार

डी.के. बासु बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल (1997 (1) एससीसी 416) के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी भी गिरफ्तारी के मामले में निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना अपेक्षित है।

  1. गिरफ्तारी का कार्य कर रहा पुलिस अधिकारी, गिरफ्तारी के समय, गिरफ्तारी का एक ज्ञापन-पत्र तैयार करेगा और यह ज्ञापन-पत्र दो गवाहों द्वारा अनुप्रमाणित किया जाएगा, जो गिरफ्तार व्यक्ति के परिवार के सदस्य या जिस क्षेत्र से गिरफ्तारी की गई है, उस क्षेत्र का कोई सम्मानित व्यक्ति हो सकता है। यह ज्ञापन-पत्र गिरफ्तार व्यक्ति द्वारा भी प्रतिहस्ताक्षरित किया जाएगा तथा इस पर गिरफ्तारी का समय एवं तिथि दर्ज होगी।

  2. वह व्यक्ति जिसकी गिरफ्तारी की गई है या रोककर रखा गया है तथा किसी पुलिस थाना, पूछताछ केन्द्र या अन्य हवालात में अभिरक्षा में रखा जा रहा है, उसे यह अधिकार होगा कि उसके किसी मित्र, रिश्तेदार अथवा उसे जानने या उसका भला चाहने वाले व्यक्ति को यथाशीघ्र सूचित किया जाए कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और किसी विशेष स्थान पर रखा गया है, जब तक कि गिरफ्तारी के ज्ञापन-पत्र को अनुप्रमाणित करने वाला गवाह स्वयं गिरफ्तार व्यक्ति का ऐसा मित्र या रिश्तेदार न हो।

  3. पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का समय, स्थान तथा गिरफ्तार व्यक्ति की अभिरक्षा का स्थान अवश्य अधिसूचित किया जाएगा। जहाँ गिरफ्तार व्यक्ति का कोई अन्य मित्र या रिश्तेदार जिले या शहर से बाहर रहता है, वहाँ कानूनी सहायता संगठनों तथा संबंधित क्षेत्र के पुलिस थानों के माध्यम से गिरफ्तारी के 8 से 12 घंटे के भीतर टेलीग्राम द्वारा सूचना दी जाएगी।

  4. गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी या हवालात में रखे जाने की सूचना अपने किसी मित्र को दिलवाने के अधिकार से अवश्य अवगत कराया जाएगा।

  5. हवालात के स्थान पर व्यक्ति की गिरफ्तारी के संबंध में, उस व्यक्ति के उस मित्र का नाम जिसे गिरफ्तारी की सूचना दी गई है तथा उस पुलिस अधिकारी का नाम एवं पद, जिसकी अभिरक्षा में गिरफ्तार व्यक्ति को रखा गया है, डायरी में दर्ज किया जाएगा।

  6. यदि गिरफ्तार व्यक्ति के शरीर पर कोई छोटा या बड़ा जख्म विद्यमान है, तो उसके निवेदन पर गिरफ्तारी के समय उसकी जांच की जाएगी तथा उसका रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। गिरफ्तार व्यक्ति तथा गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी दोनों निरीक्षण ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे और इसकी एक प्रति गिरफ्तार व्यक्ति को उपलब्ध कराई जाएगी।

  7. गिरफ्तार व्यक्ति को हवालात में रखने के दौरान प्रत्येक 48 घंटे में अनुमोदित डॉक्टरों की सूची में से किसी एक डॉक्टर द्वारा अथवा निदेशक स्वास्थ्य सेवा द्वारा संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के लिए नियुक्त डॉक्टर द्वारा चिकित्सा जांच कराई जाएगी। निदेशक स्वास्थ्य सेवा सभी तहसीलों एवं जिलों के लिए ऐसी सूची तैयार करेगा।

  8. उपर्युक्त के संदर्भ में, गिरफ्तारी ज्ञापन सहित सभी दस्तावेजों की प्रतियाँ अभिलेख हेतु मजिस्ट्रेट को भेजी जाएँगी।

  9. गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान अपने वकील से मिलने की अनुमति दी जाएगी, तथापि संपूर्ण पूछताछ के दौरान नहीं।

  10. सभी जिला एवं राज्य मुख्यालयों में एक पुलिस नियंत्रण कक्ष उपलब्ध कराया जाएगा, जहाँ गिरफ्तारी तथा गिरफ्तार व्यक्ति की अभिरक्षा के स्थान के संबंध में गिरफ्तार करने वाले अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी के 12 घंटों के भीतर सूचना प्रदान की जाएगी तथा पुलिस नियंत्रण कक्ष के सूचना-पट्ट पर प्रदर्शित की जाएगी।

  11. गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारियों के नाम एवं पदनाम स्पष्ट एवं पठनीय होने चाहिए तथा उनकी पहचान के लिए नाम-पट्ट (Name Tag) लगा होना चाहिए। ऐसे सभी पुलिस अधिकारियों का विवरण, जो गिरफ्तार व्यक्ति की पूछताछ या अभिरक्षा से संबंधित हों, एक रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा।


गिरफ्तारी पूर्व

बिना वारंट के गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग किसी शिकायत की सच्चाई और महत्व तथा संबंधित व्यक्ति की अपराधिता के संबंध में उचित विश्वास होने पर, और साथ ही गिरफ्तारी की आवश्यकता के संबंध में कुछ जांच के उपरांत तर्कसंगत निर्णय पर पहुँचने के बाद ही किया जा सकता है।
(जोगिन्दर कुमार का मामला - (1994) 4 एस.सी.सी. 260)

संज्ञेय अपराध के मामले में केवल शक्ति होने के आधार पर कानून के हिसाब से बिना वारंट के गिरफ्तारी करना न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है।

जोगिन्दर कुमार के मामले के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने प्रश्न संख्या 54 में घोषणा की कि क्या गिरफ्तारी की शक्ति का प्रयोग उचित रूप से किया गया या नहीं, यह स्पष्ट रूप से न्यायोचित होना चाहिए।

निम्नलिखित में से किसी एक या अन्य परिस्थितियों में संज्ञेय मामले में गिरफ्तारी को न्यायोचित ठहराया जा सकता है:-

  1. ऐसे मामलों में हत्या, डकैती, लूटमार, बलात्कार जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इन मामलों में संदिग्ध व्यक्ति को भाग जाने से रोकने तथा कानूनी प्रक्रिया से बच न पाने के लिए गिरफ्तारी आवश्यक है।

  2. जब किसी व्यक्ति के हिंसात्मक आचरण पर संदेह हो और उसके द्वारा आगे भी अपराध किए जाने की संभावना हो।

  3. संदिग्ध व्यक्ति को साक्ष्यों को नष्ट करने, गवाहों के साथ छेड़छाड़ करने अथवा अब तक गिरफ्तार न किए गए अन्य संदिग्धों को चेतावनी देने से रोकना आवश्यक हो।

  4. यदि संदिग्ध व्यक्ति एक अभ्यस्त अपराधी है, जो सामान्य प्रकार के या अन्य अपराध कर सकता है।
    (राष्ट्रीय पुलिस आयोग की तृतीय रिपोर्ट)

उपर्युक्त जघन्य अपराधों के अतिरिक्त, यदि कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति को पुलिस थाने में उपस्थित होने तथा बिना अनुमति पुलिस थाना न छोड़ने की सूचना जारी करता है, तो गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।
(जोगिन्दर कुमार का मामला (1994) 4 एस.सी.सी. 260)

जिन अपराधों में जमानत दी जा सकती है, उनमें गिरफ्तारी नहीं की जाएगी, जब तक कि संदिग्ध व्यक्ति के फरार होने की पूर्ण आशंका न हो।

गिरफ्तार करने या पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारी की स्पष्ट पहचान तथा पदनाम सहित नाम का टैग प्रदर्शित होना चाहिए। गिरफ्तार करने या पूछताछ करने वाले पुलिसकर्मी का विवरण उसी समय पुलिस थाने में रखे गए रजिस्टर में दर्ज किया जाना चाहिए।

गिरफ्तार

1. नियमानुसार, गिरफ्तार करते समय जोर-जबरदस्ती नहीं की जाएगी। तथापि, गिरफ्तारी का बलपूर्वक प्रतिरोध किए जाने की स्थिति में न्यूनतम आवश्यक बल का प्रयोग किया जा सकता है। फिर भी यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गिरफ्तार किए जा रहे व्यक्ति के शरीर पर कोई दृश्य अथवा अदृश्य चोट न लगे।

2. गिरफ्तार किए जा रहे व्यक्ति की गरिमा की रक्षा की जाएगी। गिरफ्तार व्यक्ति की परेडिंग अथवा सार्वजनिक प्रदर्शन की किसी भी परिस्थिति में अनुमति नहीं होगी।

3. व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करते हुए, जोर-जबरदस्ती तथा आक्रामकता के बिना, उसकी गोपनीयता के अधिकार की रक्षा करते हुए तलाशी ली जाएगी। महिलाओं की तलाशी केवल महिला द्वारा ही शालीनता के साथ की जाएगी। (धारा 51(2), दण्ड प्रक्रिया संहिता)

4. हथकड़ी और बेड़ी का कदापि प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसे सर्वोच्च न्यायालय ने प्रेम शंकर शुक्ला बनाम दिल्ली प्रशासन (1980) 3 एस.सी.सी. 526 तथा लोकतंत्र के नागरिक बनाम असम राज्य (1995) 3 एस.सी.सी. 743 के निर्णयों में विधि के अनुसार बार-बार स्पष्ट किया है और अनिवार्य बनाया है।

5. जहाँ तक व्यवहारिक रूप से संभव हो, महिला पुलिस अधिकारी को संबद्ध किया जाएगा, जहाँ गिरफ्तार किया जाने वाला व्यक्ति महिला हो। सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।

6. जहाँ किसी बच्चे या किशोर की गिरफ्तारी की जानी हो, वहाँ किसी भी परिस्थिति में बल प्रयोग या पिटाई नहीं की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए पुलिस अधिकारी सम्मानित नागरिकों को सम्मिलित करेंगे, ताकि बच्चा या किशोर आतंकित न हो और न्यूनतम बल का प्रयोग किया जाए।

7. जहाँ बिना वारंट के गिरफ्तारी की जाती है, वहाँ गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तारी का कारण उस भाषा में सूचित किया जाएगा जिसे वह समझता/समझती हो। इस उद्देश्य के लिए यदि आवश्यक हो तो पुलिस सम्मानित नागरिकों की सहायता ले सकती है। गिरफ्तारी का कारण पुलिस रिकॉर्ड में पहले से लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा। गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित कारण दिखाया जाएगा तथा मांग करने पर उसकी एक प्रति भी दी जाएगी। (धारा 50(1), दण्ड प्रक्रिया संहिता)

8. गिरफ्तार व्यक्ति, अपने द्वारा किए गए निवेदन पर, किसी मित्र, संबंधी या उसे जानने वाले अन्य व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी तथा हिरासत के स्थान की सूचना देने की मांग कर सकता है। पुलिस, जिस व्यक्ति को यह सूचना दी गई है, उसका विवरण एक रजिस्टर में दर्ज करेगी। (जोगिन्दर कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (1994) 4 एस.सी.सी. 260)

9. यदि किसी व्यक्ति को जमानती अपराध के लिए गिरफ्तार किया जाता है, तो पुलिस अधिकारी उसे जमानत पर छोड़े जाने के उसके अधिकार के विषय में सूचित करेगा, ताकि वह जमानत की व्यवस्था कर सके। (धारा 50(2), दण्ड प्रक्रिया संहिता)

10. गिरफ्तार व्यक्ति को उक्त अधिकारों की सूचना देने के अतिरिक्त, पुलिस उसे अपने पसंद के वकील से परामर्श एवं बचाव का अधिकार होने की सूचना भी देगी। उसे यह भी बताया जाएगा कि वह राज्य के खर्च पर निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त करने का हकदार है। (डी.के. बासु बनाम स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल, 1997 (1) एस.सी.सी. 416)

11. जब गिरफ्तार व्यक्ति को पुलिस थाने लाया जाता है, तो यदि वह इस संबंध में निवेदन करता है, उसे शीघ्र चिकित्सा सहायता प्रदान की जाएगी। उसे इस अधिकार की सूचना भी तुरंत दी जाएगी। जहाँ पुलिस अधिकारी यह पाता है कि गिरफ्तार व्यक्ति को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है, किंतु उसकी स्थिति ऐसी है कि वह निवेदन करने में असमर्थ है, वहाँ पुलिस अधिकारी ऐसी सहायता की शीघ्र व्यवस्था करेगा। इसका विवरण उसी समय रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। महिला द्वारा चिकित्सा सहायता के निवेदन पर पंजीकृत महिला चिकित्सक द्वारा ही जांच की जाएगी। (धारा 53, दण्ड प्रक्रिया संहिता)

12. गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी और हिरासत के स्थान की सूचना अविलंब पुलिस नियंत्रण कक्ष तथा जिला/राज्य मुख्यालय को दी जाएगी। इसके लिए एक निगरानी प्रणाली दिन-रात कार्य करेगी।

13. जैसे ही व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है, गिरफ्तार करने वाला पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति के शरीर पर विद्यमान चोट के होने या न होने का विवरण गिरफ्तारी रजिस्टर में दर्ज करेगा। यदि गिरफ्तार व्यक्ति के शरीर पर कोई चोट पाई जाती है, तो वह चोट कैसे लगी, इसका पूर्ण विवरण तथा अन्य आवश्यक ब्यौरा रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा, जिस पर गिरफ्तार व्यक्ति और पुलिस अधिकारी दोनों हस्ताक्षर करेंगे। गिरफ्तार व्यक्ति की रिहाई के समय उक्त विवरण के संबंध में पुलिस अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक प्रमाण-पत्र उसे प्रदान किया जाएगा।

14. यदि गिरफ्तार व्यक्ति को न्यायालय के आदेश के अधीन पुलिस हिरासत में रखा जाता है, तो हिरासत के दौरान प्रत्येक 48 घंटे में संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के स्वास्थ्य निदेशक द्वारा अनुमोदित चिकित्सकों के पैनल से नियुक्त किसी प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी द्वारा उसकी चिकित्सा जांच कराई जाएगी। पुलिस हिरासत से रिहा किए जाने के समय भी उसकी चिकित्सा जांच कराई जाएगी तथा उसे एक प्रमाण-पत्र दिया जाएगा, जिसमें उसके शरीर पर किसी चोट के विद्यमान होने या न होने का उल्लेख होगा।

गिरफ्तारी के बाद

15. गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। (धारा 56 तथा 57, दण्ड प्रक्रिया संहिता)

16. गिरफ्तार व्यक्ति को पूछताछ के दौरान किसी भी समय अपने वकील से मिलने की अनुमति होगी।

17. पूछताछ स्पष्ट पहचान वाले स्थान पर की जाएगी, जिसे इस प्रयोजन हेतु अधिसूचित किया गया हो। यह स्थान सुलभ होना चाहिए तथा पूछताछ के स्थान की सूचना गिरफ्तार व्यक्ति के मित्रों या परिजनों को अवश्य दी जाएगी।

18. पूछताछ की विधि जीवन, गरिमा तथा स्वतंत्रता के अधिकार और उत्पीड़न एवं अपमानजनक व्यवहार के विरुद्ध अधिकार के अनुरूप होनी चाहिए।

दिशा-निर्देश को लागू करना

19. दिशा-निर्देशों का यथासंभव विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा तथा प्रत्येक पुलिस थाने को उपलब्ध कराया जाएगा। इसे पुस्तिका में भी शामिल किया जाएगा, जो प्रत्येक पुलिसकर्मी को दी जाएगी।

20. दिशा-निर्देशों का प्रिंट मीडिया तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अधिकतम प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इन्हें प्रत्येक पुलिस थाने में एक से अधिक भाषाओं में सूचना-पट्ट के प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित किया जाएगा।

21. पुलिस एक शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करेगी, जो दिशा-निर्देशों के उल्लंघन संबंधी शिकायतों की शीघ्र जांच कर सुधारात्मक कार्रवाई करेगी।

22. जिस सूचना-पट्ट पर दिशा-निर्देश प्रदर्शित किए जाएंगे, उसी पर शिकायत निवारण प्रणाली की स्थिति तथा उस निकाय तक पहुँचने का तरीका भी प्रदर्शित किया जाएगा।

23. इन दिशा-निर्देशों के व्यापक प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करने हेतु न्यायालयों, गैर-सरकारी संगठनों, अस्पतालों तथा विश्वविद्यालयों को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।

24. शिकायत निवारण प्रणाली के कार्यकलाप पारदर्शी होंगे तथा उसकी रिपोर्टें सुलभ होंगी।

25. दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर दोषी पुलिस अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आवश्यकता अनुसार आपराधिक न्याय तंत्र को भी संदर्भित की जाएगी।



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उच्‍चतर शिक्षा आयोग प्रयागराज के असिस्टेंट प्रोफेसर बी.एड. पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ



Higher Education Commission Prayagraj Assistant Professor B.Ed. Clear the way for the appointment

नीतू गौतम एवं अन्‍य तथा उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्‍य याचिका में याचिकाकर्ता ने रिट याचिका के माध्यम से निदेशक, उच्च शिक्षा द्वारा जारी विज्ञापन संख्या 50 दिनांक 25.02.2021 के क्रमांक 12 को चुनौती दी थी जिसमें विकलांग व्यक्तियों की विकलांगता के कारण नियुक्ति में उनके लिए प्राथमिकता का कोई प्रावधान नहीं था।
Higher Education Commission Prayagraj Assistant Professor


याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया कि वह शारीरिक रूप से विकलांग श्रेणी के अंतर्गत आता है और ग्रेजुएट/ पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिए पूरी तरह से पात्र है और वह असिस्टेंट प्रोफेसर बी.एड. पद के लिए आवेदन किया है।

याचिकाकर्ता के अनुसार विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के चैप्टर IV सेक्शन 20 क्लॉज 5 के अनुसार, शारीरिक रूप से विकलांग उम्मीदवारों के लिए एक प्रावधान है कि उपयुक्त सरकार शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति के लिए कर्मचारियों की पोस्टिंग और स्थानांतरण के लिए नीति तैयार कर सकती है और याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि उपरोक्त अधिनियम के अध्याय II धारा 3 उपखंड (2) के तहत विकलांग व्यक्तियों के लिए अधिकार भी प्रदान करते हैं। जिसका पालन आयोग द्वारा प्रकाशित विज्ञापन संख्या 50 में नही किया गया है। जिससे क्षुब्‍ध होकर याचिकाकर्ताओं ने यह रिट योजित किया था।

दिनांक 27.4.2022 को इस रिट याचिका की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने पूर्व में रिजल्‍ट घोषित करने पर लगाई गई रोक समाप्त करते हुए उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को रिजल्ट घोषित करने तथा निदेशक, उच्च शिक्षा को उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को अगली सुनवाई तिथि तक नियुक्ति न देने का आदेश दिया।

दिनांक 25.5.2022 को पुन: उक्‍त रिट याचिका सुनवाई हेतु प्रस्‍तुत हुई जिसमें याचिकाकर्ता की अधिवक्‍ता श्री आरती राजे ने न्यायालय को अवगत कराया कि कि रिट याचिका निष्फल हो गई है और उच्‍च न्‍यायालय ने उक्त रिट याचिका को निष्फल (infructuous) हो जाने के पश्चात खारिज कर दिया। मामले में अधिवक्ता प्रमेन्द्र प्रताप सिंह ने उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का पक्ष रखा। उच्‍च न्‍यायालय के इस निर्णय से असिस्टेंट प्रोफेसर बी.एड. पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।


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स्वप्नदोष अथवा नाइट फॉल जिससे सबसे अधिक परेशान हैं भारतीय पुरुष



स्वप्नदोष / नाइट फॉल क्यों होता है?

परिचय : बिना संतुष्टि के संभोग करते हुए यदि वीर्य स्खलन हो जाए, तो उसे शीघ्रपतन कहा जाता है।

अपने नाम के विपरीत, स्वप्नदोष कोई दोष न होकर एक स्वाभाविक दैहिक क्रिया है, जिसके अंतर्गत एक पुरुष को नींद के दौरान वीर्यपात (स्खलन) हो जाता है। यह महीने में यदि 1 या 2 बार ही हो, तो सामान्य बात कही जा सकती है और यह कहा जा सकता है कि कोई रोग नहीं है। किन्तु यदि यह इससे अधिक बार होता है, तो वीर्य या शुक्र की हानि होती है और व्यक्ति को शारीरिक कमजोरी का अहसास होता है, क्योंकि यह शुक्र भी रक्त कणों से पैदा होता है। अतः अत्यधिक शुक्र-क्षय व्यक्ति को कमजोर कर देता है।

स्वप्नदोष किशोरावस्था और शुरुआती वयस्क वर्षों के दौरान होने वाली एक सामान्य घटना है, लेकिन यह उत्सर्जन यौवन के बाद किसी भी समय हो सकता है। आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक पुरुष स्वप्नदोष का अनुभव करे। जहाँ अधिकांश पुरुष इसे अनुभव करते हैं, वहीं कुछ पूर्ण रूप से स्वस्थ और सामान्य पुरुष भी इसका अनुभव नहीं करते।

स्वप्नदोष के दौरान पुरुषों को कामोद्दीपक सपने आ सकते हैं और यह स्तंभन के बिना भी हो सकता है। अधिकतर पुरुषों को सुबह उठने के बाद अपने अंडरवियर या पायजामे में गीला और चिपचिपा पदार्थ देखने को मिलता है, जो कि मूत्र नहीं होता। यह मूत्र से अधिक गाढ़ा होता है। पहली बार इसे देखकर आप आश्चर्यचकित हो जाते हैं, क्योंकि कभी-कभी इसके कारण बिस्तर भी गीला हो जाता है, जिससे आप शर्मिंदगी भी महसूस करते हैं।

वास्तव में ऐसा कामुक सपने देखने के कारण होता है, इसलिए इसे स्वप्नदोष कहा जाता है। स्वप्नदोष अधिकतर रात में आते हैं, इसी कारण इन्हें नाइट फॉल (Nightfall) भी कहते हैं। यह सोते समय ही होता है। स्वप्नदोष एक आम घटना है, जो पुरुषों के जीवनकाल में कई बार होती है।

सोते समय लिंग से वीर्य मुक्त होने की क्रिया को स्वप्नदोष कहते हैं। इसमें लिंग से वीर्य मुक्त होता है। सामान्य रूप से यह सेक्स के सपने देखने के कारण होता है। हालांकि जागने के बाद कई बार वे सपने याद नहीं रहते हैं। स्वप्नदोष के दौरान आप अपने लिंग का स्पर्श तक नहीं करते, जिससे उत्तेजना का अनुभव हो, और यह हस्तमैथुन (Masturbation) से बहुत भिन्न है।

यह सारी करामात आपके मस्तिष्क की होती है और क्योंकि आप सपने में होते हैं, इसलिए इस दौरान यह पहचानना थोड़ा कठिन होता है कि आप सेक्स की वास्तविक स्थिति में हैं या काल्पनिक। स्वप्नदोष अकस्मात् होने वाले उत्सर्जन होते हैं, क्योंकि इन पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता है। कभी-कभी यह लंबे समय से संभोग न करने के फलस्वरूप भी होता है।

सामान्यतः यह उन नौजवानों में अधिक देखने को मिलता है, जो अभी यौन संबंधों में संलग्न नहीं हुए हैं। पुरुषों में स्वप्नदोष किशोरावस्था की शुरुआत के बाद जीवनपर्यन्त होता है।

स्वप्नदोष के स्पष्ट कारण अभी तक अज्ञात हैं। अध्ययनों के अनुसार, जब पुरुष किशोरावस्था में आते हैं, तो उनके शरीर में टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) का उत्पादन होने लगता है। आपके शरीर में टेस्टोस्टेरोन के बनने का मतलब है कि अब शरीर स्पर्म मुक्त कर सकता है। इसका अर्थ यह है कि आप बच्चे पैदा करने के योग्य हो गए हैं। यदि आप किसी महिला से असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करेंगे, तो वह गर्भवती हो सकती है।

यौवन के दौरान, जब आपके शरीर में वीर्य बन जाता है, तब उसके मुक्त होने का स्वप्नदोष ही एकमात्र ज़रिया होता है।



स्वप्नदोष / नाइट फॉल के नुकसान

ऐसा कहा जाता है कि स्वप्नदोष / नाइट फॉल के कारण पुरुषों की आँखों के नीचे काले घेरे बनने लगते हैं। इसके अधिक होने से कमजोरी, तनाव आदि की समस्या होने लगती है। खासकर शादी के बाद के जीवन के बारे में सोचकर पुरुष परेशान होने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनकी सेक्स लाइफ बोरिंग हो सकती है। इतना ही नहीं, कुछ चिकित्सकों के अनुसार स्वप्नदोष अधिक होने के कारण शीघ्रपतन, नपुंसकता जैसी समस्याएँ भी जन्म ले सकती हैं। इसलिए यदि यह अधिक हो रहा है, तो इसका उचित उपचार कराना चाहिए।

स्वप्नदोष से कैसे बचें?

अगर आप हेल्दी सेक्स लाइफ जीना चाहते हैं, तो आपको अपनी लाइफस्टाइल बदलनी होगी। तभी आप स्वप्नदोष या किसी अन्य प्रकार की सेक्स-संबंधी बीमारी / समस्या से बच सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित बातों का पालन करें—

  1. हर दिन कसरत करने की आदत डालें।

  2. हेल्दी फूड्स खाएँ।

  3. सोने से पहले अंतरंग (इंटीमेट) विषयों से संबंधित चीजें न देखें और न ही उनकी चर्चा करें।

  4. हमेशा ढीले (लूज) नाइट ड्रेस पहनें।

  5. रात्रि-परिधान को साफ-सुथरा रखें।

  6. पोर्न की लत न लगाएँ।

  7. रात में अश्लील कहानियाँ न पढ़ें।

स्वप्नदोष का इलाज

स्वप्नदोष कोई चिंताजनक विषय नहीं है। लेकिन इसे रोकने या नियंत्रित करने का कोई निश्चित चिकित्सीय इलाज भी नहीं है। यदि एक बार हस्तमैथुन या यौन संबंध स्थापित करके आप अपना स्पर्म निकाल चुके हैं, तो स्वप्नदोष की प्रक्रिया कुछ कम हो सकती है।

यदि आपको पिछली रात स्वप्नदोष हुआ है, तो सुबह उठकर स्वयं को अच्छी तरह साफ कर लीजिए। सफाई का सबसे अच्छा तरीका है कि आप स्नान कर लें। यदि ऐसा संभव न हो, तो अपने लिंग और वृषण (Testes) को साबुन की सहायता से अच्छी तरह साफ कर लें।

यदि आपको स्वप्नदोष के बारे में शर्मिंदगी या असहजता महसूस होती है अथवा इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, तो डॉक्टर, अभिभावक, परामर्शदाता या किसी ऐसे वयस्क व्यक्ति से बात करें जिससे आप खुलकर चर्चा कर सकें।

इसके अलावा, जैसा कि हमने ऊपर बताया, स्वप्नदोष का कोई निश्चित चिकित्सीय इलाज नहीं है, लेकिन आप कुछ घरेलू उपायों और स्वस्थ जीवनशैली की सहायता से इसे नियंत्रित कर सकते हैं। नीचे बताए गए उपायों को नियमित रूप से अपनाकर आप स्वप्नदोष की समस्या को कम करने का प्रयास कर सकते हैं।

कारण

अश्लील वातावरण में रहना, मस्तिष्क की कमजोरी तथा हर समय सहवास की कल्पना में खोए रहना, शीघ्रपतन का कारण बन सकता है। अधिक गर्म, मिर्च-मसालेदार तथा अम्लीय खाद्य पदार्थों का सेवन, शराब पीना, चाय-कॉफी का अत्यधिक सेवन करना, अश्लील फिल्में देखना तथा अश्लील पुस्तकें पढ़ना भी शीघ्रपतन की समस्या को बढ़ा सकता है।

लक्षण

वीर्य का पतला होना, सहवास के समय स्तंभन-शक्ति का अभाव होना, शीघ्रपतन हो जाना तथा वीर्य का जल्दी निकल जाना इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं।


विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों से उपचार

अजवाइन : खुरासानी अजवायन के साथ लगभग आधा ग्राम कपूर मिलाकर गोली बनाकर रात को सोने से पहले खाने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

अमरबेल : अमरबेल का रस मिश्री मिलाकर पीने से स्वप्नदोष में फायदा होता है।

असगंध : असगंध एवं विदारीकंद 25-25 ग्राम कूटकर छान लें और 50 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से सेवन करने से स्वप्नदोष में आराम मिलता है।

असगंध नागौरी : असगंध नागौरी का चूर्ण 1 चम्मच तथा 3 काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन रात को सोते समय खाने से शीघ्रपतन एवं वीर्य संबंधी रोगों में लाभ मिलता है।

असरोल : असरोल तथा धनिया 10-10 ग्राम पीसकर 1 ग्राम की मात्रा में रात्रि को सोते समय पानी के साथ सेवन करें।

आंवला : आंवले का चूर्ण 6 ग्राम तथा मिश्री का चूर्ण 6 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कुछ सप्ताह में स्वप्नदोष में लाभ मिलता है।

उड़द : अंकुरित उड़द की दाल में मिश्री या शक्कर मिलाकर कम से कम 58 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन खाने से शीघ्रपतन में लाभ होता है। उड़द के बेसन को घी में हल्का भूनकर रख लें। लगभग 50 ग्राम मात्रा में मिश्री मिले दूध के साथ रात्रि में सेवन करने से वीर्य तथा नपुंसकता संबंधी विकारों में लाभ होता है।

कतीरा गोंद : कतीरा गोंद 1 से 2 चम्मच रात को पानी में भिगो दें। सुबह मिश्री या शक्कर मिलाकर शरबत की तरह सेवन करने से वीर्य की मात्रा, गाढ़ापन तथा स्तंभन शक्ति में वृद्धि होती है।

कपूर : लगभग एक ग्राम के चौथे भाग कपूर की गोली खुरासानी अजवायन के साथ सोने से पूर्व लेने से स्वप्नदोष में लाभ होता है। कपूर एवं चीनी को पीसकर फंकी लेने से भी लाभ बताया गया है।

काले तिल : काले तिल 50 ग्राम, अजवायन 25 ग्राम तथा 75 ग्राम खांड मिलाकर 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।

कुलिंजन : लगभग डेढ़ ग्राम कुलिंजन चूर्ण 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटें तथा ऊपर से गाय का दूध पिएँ।

केला : प्रतिदिन 2 केले शहद के साथ खाने से लाभ मिलता है। 2 केले खाकर 250 मिलीलीटर दूध पीने से भी लाभ बताया गया है।

कौंच :

  1. कौंच बीज की गिरी एवं खसखस का चूर्ण 4-6 ग्राम सेवन करें।

  2. कौंच बीज चूर्ण, तालमखाना एवं मिश्री समान मात्रा में लेकर 3-3 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लें।

  3. कौंच की जड़ मुंह में रखकर सहवास करने का उल्लेख मिलता है।

खादिर (कत्था) : खादिर सार 1 ग्राम ठंडे पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष में लाभ बताया गया है।

गिलोय :

  1. गिलोय चूर्ण एवं वंशलोचन समान मात्रा में मिलाकर 2 ग्राम सेवन करें।

  2. गिलोय, गोक्षुर एवं आंवला समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर सेवन करें।

गुलकंद : 5 से 10 ग्राम गुलकंद मिश्री मिले दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें।

गुलाब : गुलाब की पंखुड़ियों में मिश्री मिलाकर सेवन करने तथा गुलाब शर्बत पीने से लाभ बताया गया है।

गोक्षुर : गोक्षुर, आंवला एवं हरड़ का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करने से लाभ बताया गया है।

चोपचीनी : चोपचीनी चूर्ण, मिश्री और घी समान मात्रा में मिलाकर 7 दिन सेवन करें।

छोटी माई : 2 से 4 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम सेवन करें।

जामुन : जामुन की गुठली का चूर्ण 3-4 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ सेवन करें।

तुलसी : तुलसी के बीज या जड़ का काढ़ा नियमित सेवन करने से लाभ बताया गया है।

त्रिफला :

  1. त्रिफला चूर्ण एवं शहद मिलाकर सेवन करें।

  2. 4-6 ग्राम त्रिफला चूर्ण दूध के साथ लें।

  3. त्रिफला, गुड़, वच एवं भीमसेनी कपूर की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।

धनिया :

  1. धनिया एवं मिश्री मिलाकर सेवन करें।

  2. सूखा धनिया एवं मिश्री का चूर्ण बनाकर सेवन करें।

  3. धनिया, नीलोफर, कुर्फा, काहू, कासनी आदि का मिश्रण भी उपयोग में लाया जाता है।

नकछिकनी : नकछिकनी, सौंठ एवं बायबिडंग का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।

पिंड खजूर : प्रतिदिन 5 खजूर तथा मिश्री मिला दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होने का उल्लेख मिलता है।

पीपलामूल : पीपलामूल एवं गुड़ की गोलियाँ बनाकर सेवन करें।

प्याज : सफेद प्याज का रस, अदरक का रस, शहद एवं घी मिलाकर रात्रि में सेवन करें।

फिटकरी : फिटकरी के प्रयोग का उल्लेख मिलता है।

बड़ी गोखरू : बड़ी गोखरू के फांट या घोल का सेवन लाभकारी बताया गया है।

बबूल : बबूल की गोंद या फली का चूर्ण मिश्री के साथ सेवन करें।

बरगद :

  1. बरगद के दूध की बूंदें बताशे पर डालकर सेवन करें।

  2. बरगद की कोपल, गूलर की छाल एवं मिश्री का मिश्रण लें।

  3. बरगद के कच्चे फलों का चूर्ण दूध के साथ लें।

बहुफली : बहुफली चूर्ण 5 ग्राम सुबह पानी के साथ सेवन करें।

बादाम : बादाम, मिश्री, घी एवं गिलोय चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करें।

ब्रह्मदण्डी : ब्रह्मदण्डी एवं बहुफली का मिश्रण खांड के साथ सेवन करें।

मुलेठी : मुलेठी चूर्ण को शहद, घी या मक्खन के साथ लें।

मूसली सिम्बल : मूसली सिम्बल एवं खांड मिलाकर दूध या पानी के साथ लें।

लहसुन : रात्रि में लहसुन की एक कली चबाकर खाने का उल्लेख मिलता है।

लाजवंती : लाजवंती के बीजों का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।

वंशलोचन : वंशलोचन एवं सत गिलोय शहद के साथ लें।

विदारीकंद : विदारीकंद एवं गोखरू का चूर्ण खांड के साथ दूध में लें।

शकरकंद : शकरकंद का हलवा बनाकर सेवन करें।

शतावर :

  1. शतावर, मूसली, विदारीकंद, असगंध, गोखरू आदि का मिश्रण।

  2. शतावरी, असगंध एवं विधारा का चूर्ण खांड के साथ।

  3. शतावरी रस एवं शहद का सेवन।

समुद्रशोष : समुद्रशोष के बीजों का लुआब मिश्री मिलाकर सेवन करें।

सिरस : सिरस के फूलों का रस मिश्री मिले दूध के साथ लें।

हरड़ : हरड़ चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। हरड़ का मुरब्बा भी लाभकारी बताया गया है।

स्वप्नदोष की होम्योपैथी दवाएं और उनके कार्य करने का तरीका

लाइकोपोडियम 200 – कामुक सपनों के साथ होने वाले स्वप्नदोष के लिए प्रभावी मानी जाती है। यह रात में होने वाले वीर्यपात के कारण उत्पन्न कमजोरी और दुर्बलता में भी उपयोगी बताई जाती है।

कैंथरिस 200 – दर्दयुक्त इरेक्शन तथा तीव्र यौन इच्छा के साथ होने वाले स्वप्नदोष में उपयोग की जाने वाली होम्योपैथिक औषधि मानी जाती है।

लाइकोपोडियम क्यू – ईडी (Erectile Dysfunction) और शीघ्रपतन के लिए प्रमुख होम्योपैथिक दवाओं में से एक मानी जाती है। अत्यधिक भोग अथवा अत्यधिक हस्तमैथुन के कारण उत्पन्न स्तंभन शक्ति की कमी या कमजोर इरेक्शन में इसका उपयोग बताया जाता है।

वियोला ट्राईकलर क्यू (Viola Tricolor Q) – अनैच्छिक वीर्य उत्सर्जन के साथ होने वाले स्वप्नदोष में प्रभावी मानी जाती है। विशेष रूप से उन व्यक्तियों में, जिन्हें अश्लील सामग्री देखने के कारण कामुक एवं उत्तेजक सपने आते हैं। ऐसे व्यक्ति प्रायः नींद में व्यवधान तथा रात में बार-बार जागने की शिकायत भी करते हैं।

नोट : किसी भी दवा या उपचार का प्रयोग करने से पूर्व अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

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गौ भक्त संत माधवदास



संत माधवदास का जन्म वि० सं० 1601 में कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को सूरत के सौदागरगंज में हुआ था। इनके पिता का नाम करवत सिंह और माता का नाम हिरल देवी था। इनके पूर्वज मेवाड़ के केलवाड़ा नामक परगना के निवासी थे और प्रसिद्ध सिसोदिया वंश के सूर्यवंशी क्षत्रिय थे।
Gau Mata

बाल्यावस्था में माधवदास जी की मुखाकृति देखकर एक अवधूत महात्मा ने उनके पिता से कहा था कि यह बालक कोई महान् दिव्यात्मा होगा। ये बचपन से ही बड़ी उदार वृत्ति के थे और दरवाजे पर आये भिक्षुक को निराश नहीं जाने देते थे। जब ये मात्र पाँच वर्ष के ही थे, तभी इनके पिता का देहांत हो गया था। अतः इनका पालन-पोषण इनकी माता ने ही हुआ। माता ने इन्हें अच्छा विद्याभ्यास तो कराया ही, एक राजपूत वीर के लायक शस्त्रास्त्र की योग्यता भी इन्हें बचपन में ही प्राप्त हो गयी थी ।
एक बार ये भ्रमण करते हुए अहमदाबाद के पास पहुँचे। वहाँ इन्होंने देखा कि कुछ मुसलमान ग्वालों से उनकी गायें छीनकर ले जा रहे हैं। ईद का त्यौहार था और हाकिम की आज्ञा थी, इसलिए कोई कुछ बोल भी नहीं सकता था। पचास मुसलमान सैनिकों की एक टुकड़ी गायों को घेर कर लेकर चल दी, मुसलमानी शासन में ग्वाले भला रोने के अतिरिक्त और कर ही क्या सकते थे? गाय रंभा रही थीं, चाबुक की मार खा रही थीं, उनकी आँखों से आँसुओं की धारा बह रही थी। यह सब माधवदास जी से देखा न गया। उनका राजपूती रक्त उबल पड़ा। वे तलवार लेकर उन पर टूट पड़े। एक तरफ अकेले माधवदास और दूसरी ओर पचास सैनिक! पर सिंह सिंह होता है, मांसलोभी सैकड़ों सियारों का झुंड उस की एक दहाड़ और भाग खड़ा होता है।
माधवदास में सत्साहस था, गौमाता के प्रति प्रेम था, उधर सैनिकों में था सत्ता का अभिमान। माधवदास ने उन यवन सिपाहियों को गाजर-मूली की तरह काटना प्रारम्भ किया। सिपाहियों की जान पर बन आयी। कुछ तो मारे गये और कुछ भाग गये। सिसोदिया वंश के उस वीर ने सब गायें छुड़ा ली और रोते हुए ग्वालों के सुपुर्द कर दी।
माता की प्रेरणा से माधवदास जी ने सद्गुरु की शरण ली। वे समर्थदास नामक एक योगी के शिष्य हो गये। संत माधव दास जी सच्चे संत थे, उनका अधिकांश समय तीर्थाटन में ही बीतता था। गौमाता के प्रति उनकी अद्भुत भक्ति थी। उन्होंने दिल्ली के शाही कसाई खाने के जल्लाद हाशम को अपने उपदेश से भगवान की भक्ति में लगा दिया। मुलतान के मुस्लिम सूबेदार ने उन्हें तरह तरह से प्रताड़नाएं देने की कोशिश की, परंतु माधवदास जी सिद्ध संत थे, वह उनका बाल भी बाँका न कर सका और अंत में उनके चरणों में गिरकर क्षमा याचना की और भविष्य में किसी को न सताने की कसम खाई।
वि० सं० 1652 में आप इस नश्वर शरीर को त्याग कर अविनाशी परब्रह्म प्रभु के स्वरूप में अवस्थित हो गये। धन्य हैं ऐसे संत रत्न और गौ भक्त माधवदास जी और धन्य है भारत-धरा ऐसे सपूत को प्राप्त करके।


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प्रेरक प्रसंग - सच्ची कृपा



एक निर्धन ब्राह्मण के मन में धन पाने की तीव्र कामना हुई। वह सकाम यज्ञ की विधि जानता था, किंतु धन ही नहीं तो यज्ञ कैसे हो? वह धन की प्राप्ति के लिये देवताओं की पूजा और व्रत करने लगा। कुछ समय एक देवता की पूजा करता, परंतु उससे कुछ लाभ नहीं दिखायी पड़ता तो दूसरे देवता की पूजा करने लगता और पहले को छोड़ देता। इस प्रकार उसे बहुत दिन बीत गये। अंत में उसने सोचा-'जिस देवता की आराधना मनुष्य ने कभी न की हो, मैं अब उसी की उपासना करूँगा। वह देवता अवश्य मुझपर शीघ्र प्रसन्न होगा।'


ब्राह्मण यह सोच ही रहा था कि उसे आकाश में कुण्डधार नामक मेघ के देवता का प्रत्यक्ष दर्शन हुआ। ब्राह्मण ने समझ लिया कि 'मनुष्य ने कभी इनकी पूजा न की होगी। ये बृहदाकार मेघ देवता देव लोक के समीप रहते हैं, अवश्य ये मुझे धन देंगे।' बस, बड़ी श्रद्धा-भक्ति से ब्राह्मण ने उस कुंड धार मेघ की पूजा प्रारम्भ कर दी।

ब्राह्मण की पूजा से प्रसन्न होकर कुण्डधारने देवताओं की स्तुति की, क्योंकि वह स्वयं तो जल के अतिरिक्त किसी को कुछ दे नहीं सकता था। देवताओं की प्रेरणा से यक्ष श्रेष्ठ मणिभद्र उसके पास आकर बोले-'कुंड धार! तुम क्या चाहते हो?'

कुण्डधार - 'यक्षराज! देवता यदि मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे उपासक इस ब्राह्मण को वे सुखी करें।'

मणिभद्र-'तुम्हारा भक्त यह ब्राह्मण यदि धन चाहता हो तो इसकी इच्छा पूर्ण कर दो। यह जितना धन माँगेगा, वह मैं इसे दे दूंगा।'

कुण्डधार - 'यक्षराज! मैं इस ब्राह्मण के लिये धन की प्रार्थना नहीं करता। मैं चाहता हूँ कि देवताओं की कृपा से यह धर्मपरायण हो जाए। इसकी बुद्धि धर्म में लगे।'

मणिभद्र-'अच्छी बात ! अब ब्राह्मण की बुद्धि धर्म में ही स्थित रहेगी।' उसी समय ब्राह्मण ने स्वप्न में देखा कि उसके चारों ओर कफन पड़ा हुआ है। यह देखकर उसके । हृदय में वैराग्य उत्पन्न हुआ।वह सोचने लगा - 'मैंने इतने । देवताओं की और अंत में कुण्डधार मेघ की भी धन के लिये आराधना की, किंतु इनमें कोई उदार नहीं दिखता। इस प्रकार धन की आस में ही लगे हुए जीवन व्यतीत करने से । क्या लाभ! अब मुझे परलोक की चिंता करनी चाहिये।'

ब्राह्मण वहां से वन में चला गया। उसने अब तपस्या करना प्रारम्भ किया। दीर्घकाल तक कठोर तपस्या करने के कारण उसे अद्भुत सिद्धि प्राप्त हुई। वह स्वयं आश्चर्य करने लगा-'कहाँ तो मैं धन के लिये देवताओं की पूजा करता था और उसका कोई परिणाम नहीं होता था और कहाँ अब मैं स्वयं ऐसा हो गया कि किसी को धनी होने का आशीर्वाद दे दूँ तो वह नि:संदेह धनी हो जाएगा!'

ब्राह्मण का उत्साह बढ़ गया। तपस्या में ही उसकी श्रद्धा बढ़ गयी। वह तत्परतापूर्वक तपस्या में ही लगा रहा। एक दिन उसके पास वही कुण्डधार मेघ आया। उसने कहा ब्रह्मन् ! तपस्या के प्रभाव से आपको दिव्य दृष्टि प्राप्त हो गयी है। अब आप धनी पुरुषों तथा राजाओं की गति देख सकते हैं।' ब्राह्मण ने देखा कि धन के कारण गर्व से आकर लोग नाना प्रकार के पाप करते हैं और घोर नरक में गिरते हैं।

कुण्डधार बोला-'भक्तिपूर्वक मेरी पूजा करके आप यदि धन पाते और अंत में नरक की यातना भोगते तो मुझसे आपको क्या लाभ होता? जीव का लाभ तो कामनाओं का त्याग करके धर्माचरण करने में ही है। उन पर सच्ची कृपा तो उन्हें धर्म में लगाना ही है। उन्हें धर्म में लगाने वाला ही उनका सच्चा हितैषी है।'

ब्राह्मण ने मेघ के प्रति कृतज्ञता प्रकट की और कामनाओं का त्याग करके अंत में मुक्त हो गया।

(महाभारत के शान्तिपर्व से)


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प्रदोष व्रत की महिमा



विदर्भ-देश में सत्यरथ नाम के एक परम शिवभक्त, पराक्रमी और तेजस्वी राजा थे। उन्होंने अनेक वर्षां तक राज्य किया, परंतु कभी एक दिन भी शिव पूजा में किसी प्रकार का अंतर न आने दिया।
प्रदोष व्रत की महिमा

एक बार शाल्व देश के राजा ने दूसरे कई राजाओं को साथ लेकर विदर्भ पर आक्रमण कर दिया। सात दिन तक घोर युद्ध होता रहा, अंत में दुर्दैव वश सत्यरथ को पराजित होना पड़ा, इससे दुखी होकर वे देश छोड़कर कहीं निकल गये। शत्रु नगर में घुस पड़े। रानी को जब यह ज्ञात हुआ तो वह भी राजमहल से निकलकर सघन वन में प्रविष्ट हो गयी। उस समय उसके नौ मास गर्भ था और वह आसन्नप्रसवा ही थी। अचानक एक दिन अरण्य में ही उसे एक पुत्र रत्न उत्पन्न हुआ। बच्चे को वहाँ ही अकेला छोड़कर वह प्यास के मारे पानी के लिये वन में एक सरोवरके पास गयी और वहाँ एक मगर उसे निगल गया।

उसी समय उमा नाम का एक ब्राह्मणी विधवा अपने शुचिव्रत नामक एक वर्ष के बालक को गोद में लिये उसी रास्ते से होकर निकली। बिना नाल कटे उस बच्चे को देखकर उसे बड़ा ही आश्चर्य हुआ। वह सोचने लगी कि यदि इस बच्चे को अपने घर ले जाऊँ तो लोग मुझपर अनेक प्रकारकी शंका करेंगे और यदि यहीं छोड़ देती हूँ तो कोई हिंस्र पशु भक्षण कर लेगा। वह इस प्रकार सोच ही रही थी कि उसी समय यती वेष में भगवान शंकर वहां प्रकट हुए और उस विधवा से कहने लगे-'इस बच्चे को तुम अपने घर ले जाओ, यह राजपुत्र है। अपने ही पुत्र के समान ही इसकी रक्षा करना और लोगों में इस बात को प्रकट न करना, इससे तुम्हारा भाग्योदय होगा।' इतना कहकर शिवजी अंतर्धान हो गये। ब्राह्मणी ने उस राजपुत्र का नाम धर्म गुप्त रखा।

वह विधवा दोनों को साथ लेकर उस बच्चे के माता-पिता को ढूंढने लगी। ढूँढ़ते-ढूँढ़ते शांडिल्य ऋषि के आश्रम में पहुँची। ऋषि ने बताया कि 'यह राजा राजा का देहांत हो पूर्व जन्म में क्रोधवश प्रदोष व्रत को अधूरा छोड़ने के कारण ही उसकी ऐसी गति हुई है तथा रानी ने भी पूर्व जन्म में अपनी सपत्नी को मारा था, उसने इस जन्म में मंगर के रूप में इससे बदला लिया।'

ब्राह्मणी ने दोनों बच्चों को ऋषि के पैरों पर डाल दिया। ऋषि ने उन्हें शिव पंचाक्षरी मंत्र देकर प्रदोष व्रत करने का उपदेश दिया। इसके बाद उन्होंने ऋषि का आश्रम छोड़कर एकचक्रा नगरी में निवास किया और वहाँ वे चार महीने तक शिवाराधना करते रहे। दैवात् एक दिन शुचिव्रत को नदी के तट पर खेलते समय एक अशर्फियों से भरा स्वर्ण कलश मिला, उसे लेकर वह घर आया। माताको यह देखकर अत्यन्त ही आनन्द हुआ और इसमें उसने प्रदोष की महिमा देखी। 

इसके बाद एक दिन वे दोनों लड़के वन विहार के लिये एक साथ निकले, वहाँ अंशुमती नाम की एक गन्धर्व कन्या क्रीडा करती हुई उन्हें दीख पड़ी। उसने धर्मगुप्त से कहा कि 'मैं एक गन्धर्वराज की कन्या श्री शिव ने मेरे पिता से कहा है कि अपनी कन्या को सत्यरथ राजा के पुत्र धर्मगुप्तको प्रदान करना।' गन्धर्व कन्या की ‘यही धर्मगुप्त है' ऐसी जानकारी होने पर उसने विवाह का प्रस्ताव रखा।

धर्मगुप्त ने वापस आकर अपनी माता से यह बात कही। ब्राह्मणी ने इसे शिव पूजा का फल और शांडिल्य मुनि का आशीर्वाद समझा। बड़े ही आनंद से अंशुमती के साथ धर्मगुप्त का विवाह हो गया। गन्धर्वराज ने बहुत-सा धन और अनेकों दास-दासी उन्हें प्रदान किये। इसके पश्चात धर्मगुप्त ने अपने पिता के शत्रुओं पर आक्रमण कर विदर्भ-राज्य को प्राप्त किया। वह सदा प्रदोष-व्रत में शिवाराधना करते हुए उस ब्राह्मणी और उसके पुत्र शुचिव्रत के साथ जीवन पर्यन्त सुख से राज्य करता रहा और अंत में शिव लोक को प्राप्त हुआ।

(स्कन्द पुराण से)


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Food and Civil Supplies Department Uttar Pradesh Ration Card Application Form



Ration Card Application Form ( For Rural Areas )
राशन कार्ड आवेदन पत्र (ग्रामीण क्षेत्रों के लिए)



Ration Card Application Form ( For Urban Areas )
राशन कार्ड आवेदन पत्र (शहरी क्षेत्रों के लिए)

प्रवासी श्रमिकों हेतु राशन कार्ड आवेदन प्रपत्र
Ration card application form for migrant workers




Food and Civil Supplies Department Uttar Pradesh Ration Card Application Form
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग उत्तर प्रदेश राशन कार्ड आवेदन पत्र


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धर्म अधर्म के कुरुक्षेत्र में हे केशव दे हमें विवेक - संघ गीत



धर्म अधर्म के कुरुक्षेत्र में हे केशव दे हमें विवेक
हे युग सारथी हटा मिटा दे मन में धुंधवाता अविवेक ॥
Dharm Adharma Ke Kurukshetra Me
 
सच्चा दान वही जो सत्पात्रों को विनत दिया जाता
पर वह व्यर्थ अधर्म अधीन है जब कुपात्र होता दाता
देखो छिलका तिनका खाकर गौरस देती गौमाता
पर गौरस पी पीकर पन्नग जग को विष ही विष देता
दानव ही सच्चा जब दाता सांधे पात्रापात्र विवेक ॥ 1॥
 
कपटी घौरी के कुचक्र में पृथ्वीराज छले जाते
शकुनि जाल में फसने देखो धर्मराज खुद ही आते
भस्मासुर को भी वर देकर भोले खुद फिसले जाते
वह गोकुल क्या कुटिल पूतना पय से पूत पले जाते
सद्गुण बन जाता है दुर्गुण जब हो जाता गुण अतिरेक || 2 ॥
 
सर्वपंथ समभाव सही जब सबके मन में भाव यही
मेरा ही पथ सर्वश्रेष्ठ है अहंभाव है सही नहीं कौन है
कट्टर कौन सहिष्णु इतिहासों ने कथा लिखी अरी
अफजल पर वीर शिवा की युक्त नीति ही सफल रही
हिन्दू की है देन विश्व को सत्य एक है मार्ग अनेक ॥ 3 ॥


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आज हिमालय की चोटी से, ध्वज भगवा लहराएगा - संघ गीत



आज हिमालय की चोटी से, ध्वज भगवा लहराएगा ।
जाग उठा है हिन्दू फिर से, भारत स्वर्ग बनाएगा ॥ध्रु॥
 
इस झंडे की महिमा देखो, रंगत अजब निराली है ।
इस पर तो ईश्वर ने डाली सूर्योदय की लाली है ।
प्रखर अग्नि में इसकी पड़, शत्रु स्वाहा हो जाएगा ॥1॥
 
इस झंडे को चन्द्रगुप्त ने हिन्दू-कुश पर लहराया ।
मरहटों ने मुग़ल-तख़्त को चूर-चूर कर दिखलाया ।
मिट्टी में मिल जाएगा जो इसको अकड़ दिखाएगा ॥2॥
 
इस झंडे की खातिर देखो प्राण दिए रानी झांसी ।
हमको भी यह व्रत लेना है, सूली हो या हो फांसी ।
बच्चा-बच्चा वीर बनेगा, अपना रक्त बहाएगा ॥3॥




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