सांस की बदबू



क्यों आती है सांसों में बदबू? (Why Do You Have Bad Breath?)
साँस की दुर्गंध या मुंह की दुर्गन्ध के रोगी के मुख से एक विशेष दुर्गन्ध (बदबू) आती है जो, सांस के साथ मिली होती है। सांसों की दुर्गन्ध ग्रसित व्यक्ति में चिन्ता का कारण बन सकती है। यह एक गंभीर समस्या बन सकती है किंतु कुछ साधारण उपायों से साँस की दुर्गंध को रोका जा सकता है। साँस की दुर्गंध उन बैक्टीरिया से पैदा होती है, जो मुँह में पैदा होते हैं और दुर्गंध पैदा करते हैं। नियमित रूप से ब्रश नहीं करने से मुँह और दांतों के बीच फंसा भोजन बैक्टीरिया पैदा करता है। लहसुन और प्याज जैसे कुछ खाद्य पदार्थां में तीखे तेल होते हैं। इनसे साँसों की दुर्गंध पैदा होती है, क्योंकि ये तेल आपके फेफड़ों में जाते हैं और मुँह से बाहर आते हैं। साँस की दुर्गंध का एक अन्य प्रमुख कारण धूम्रपान है। साँस की दुर्गंध पर काबू पाने के बारे में अनेक धारणाएं प्रचलित हैं।
सांस की बदबू

कारण
साँसों की अधिकांश दुर्गंध आपके मुंह से शुरू होती है। सांसों की दुर्गंध के कई कारण होते हैं। इनमें से कुछ कारण निम्नलिखित हैं-
  1. दांतों की खराब सफाई और दांत की बीमारियां साँसों की दुर्गंध का कारण हो सकती हैं।
  2. यदि हर दिन ब्रश और कुल्ला नहीं करते हैं, तो भोजन के टुकड़े आपके मुँह में रह जाते हैं।वे बैक्टीरिया पैदा करते हैं और हाइड्रोजन सल्फाइड भाप बनाते हैं। आपके दांतों पर बैक्टीरिया (सड़न) का एक रंगहीन और चिपचिपा फिल्म जमा हो जाता है।
  3. दांतों में और इसके आसपास भोजन के टुकड़ों के टूटने से दुर्गंध पैदा हो सकती है।
  4. पतले तैलीय पदार्थ युक्त भोजन भी साँसों की दुर्गंध के कारण हो सकते हैं।
  5. प्याज और लहसुन इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं, लेकिन अन्य सब्जियां और मसाले भी साँसों में दुर्गंध पैदा कर सकते हैं।
  6. जब ये भोजन पचते हैं और तीखे गंध वाले तेल आपके खून में शामिल होते हैं, तो वे आपके फेफड़ों तक पहुंचते हैं और तब तक आपकी साँसों से बाहर निकलते रहते हैं, जब तक कि वह भोजन आपके शरीर से पूरी तरह खत्म न हो जाये।
  7. प्याज और लहसुन खाने के 72 घंटे बाद तक साँसों में दुर्गंध पैदा कर सकते हैं।
  8. धूम्रपान से आपका मुंह सूखता है और उससे एक खराब दुर्गंध पैदा होती है।
  9. तंबाकू का सेवन करने वालों को दांतों की बीमारी भी होती है, जो सांसों की दुर्गंध का अतिरिक्त स्रोत बनती है।
  10. फेफड़े का गंभीर संक्रमण और फेफड़े में गांठ से साँसों में बेहद खराब दुर्गंध पैदा हो सकती है। अन्य बीमारियां, जैसे कुछ कैंसर और चयापचय की गड़बड़ी से भी साँसों में दुर्गंध पैदा हो सकती है।
  11. साँसों की दुर्गंध का संबंध साइनस संक्रमण से भी है, क्योंकि आपके साइनस से नाक होकर बहने वाला द्रव आपके गले में जाकर सांसों में दुर्गंध पैदा करता है।
  12. लार से आपके मुँह में नमी रहने और मुँह को साफ रखने में मदद मिलती है। सूखे मुँह में मृत कोशिकाओं का आपकी जीभ, मसूड़े और गालों के नीचे जमाव होता रहता है। ये कोशिकाएं क्षरित होकर दुर्गंध पैदा कर सकती हैं। सूखा मुँह आमतौर पर सोने के समय होता है।
उपाय
  1. अत्यधिक कॉफी पीने से बचना चाहिए।
  2. दांतों के डॉक्टर या फार्मासिस्ट द्वारा अनुशंसित माउथवॉश का उपयोग करें।
  3. इलायची और लौंग चूसने से भी सांस की बदबू से निजात मिलता है।
  4. गाजर का जूस रोज पिएं। तन की दुर्गंध दूर भगाने में यह कारगर है।
  5. जीभ साफ करने के लिए जीभी का उपयोग करें और जीभ के अंतिम छोर तक सफाई करें।
  6. ताजी और रेशेदार सब्जियां खाएं।
  7. दुग्ध उत्पाद, मछली और मांस खाने के बाद अपने मुँह को साफ करें।
  8. नहाने से पहले शरीर पर बेसन और दही का पेस्ट लगाएं। इससे त्वचा साफ हो जाती है और बंद रोम छिद्र भी खुल जाते हैं।
  9. नियमित रूप से अपने दांतों के डॉक्टर के पास जाएं और अपने दांतों की अच्छी तरीके से सफाई करायें।
  10. नियमित रूप से दातुन करें।
  11. ब्रश करने के अलावा दांतों के बीच की सफाई के लिए कुल्ला भी करते रहें।
  12. मुँह और दांतों की साफ-सफाई का उच्च स्तर बनाए रखें।
  13. मुँह सूखने लगे, चीनी-मुक्त मुँह गम का इस्तेमाल करें,
  14. सांस की बदबू दूर करने के लिए रोज तुलसी के पत्ते चबाएं।
घरेलू उपाय
इलायची खाएं, खाना खाने के बाद ज्यादा पानी न पिएं, तुलसी के पत्ते और जामुन के पत्ते को बराबर मात्रा में लेकर चबाए, नींबू और गरम पानी का घोल पियें, पान में पुदीना के पत्ते का इस्तेमाल करें, मुलेठी चूसें, लौंग चूसें और सौंफ खाएं।

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मोच आने पर करे यह उपचार



अक्सर चलते-दौड़ते वक्त अक्सर मोच आ जाती है। दर्द होता है और हम मजबूर हो जाते हैं अपना पैर पकड़ कर बैठने के लिए। घुटना और टखना शरीर के दो ऐसे जोड़ हैं, जो चोटिल होते रहते हैं। पैर और पंजे को जोड़ने का काम करता है टखना। टखने के भीतरी लिगामेंट्स बहुत मजबूत होते हैं, जो कम ही परिस्थितियों में चोटिल होते हैं। बाहरी लिगामेंट्स तीन भाग में बंटे होते हैं- सामने, मध्य और पीछे। आमतौर पर मोच आने पर सामने और बीच वाले लिगामेंट्स ही चोटिल होते हैं। टखने के लिगामेंट्स के घायल होने की घटनाएं तब होती हैं, जब पंजा अंदर की ओर मुड़ जाता है। ऐसा असमान भूमि पर चलने से होता है और शरीर का पूरा वजन इन लिगामेंट्स पर पड़ने से वे चोटिल हो जाते हैं।
सामान्य परिस्थितियों में छह से आठ सप्ताह का समय पूरी तरह मोच ठीक होने मे लग जाता है। कई लोगों में लंबे समय तक मोच बनी रहती है। मोच आने पर इंसान एक जगह अपना पैर पकड़कर बैठ जाता है और उसे काफी दर्द झेलना पड़ता है। पैरों में मोच या फिर खिंचाव आने पर काफी सूजन और दर्द पैदा हो जाता है। यह कभी भी हो सकता है, चाहे कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे लेकर आए हैं जिन्हें अपनाकर पैर में आई हुई मोच से जल्दी आराम पाया जा सकता है। खेल-कूद में लीन हो या फिर चलते चलते पैर मुड़ जाए और ऐसा होने पर टखनों की मोच आ जाती है जो काफी दर्द भरी होती है।
मोच आने पर अगर हम तुरंत डॉक्टर के पास न जा सके तो उसका भी समाधान है। कुछ खास घरेलू नुस्खों को अपनाकर पैर में आई हुई मोच से जल्दी आराम पाया जा सकता है। यह नुस्‍खे काफी पुराने हैं जिसमें किचन में रखी हुई सामग्रियां काम आ सकती हैं। मोच आने पर इन नुस्खों को आजमाएं और ढेर सारा आराम करें, जिससे कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे लेकर आए हैं जिन्हें अपनाकर पैर में आई हुई मोच से जल्दी आराम पाया जा सकता है। जल्द ही ठीक हो सके। इसके बाद अगर ठीक ठाक चल सकने की स्थिति न हो तो तो डॉक्टर के पास जाना बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए।

 उपचार
  1. 48 घंटो तक मोच वाली जगह पर किसी भी तरह का दबाव न डालें।
  2. आधा चम्मच हल्दी को दूध के साथ तुरंत सेवन करने से हड्डियों के अंदर की चोट को आराम मिलता है।
  3. एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच फिटकरी मिलाकर इसका सेवन करने से मोच काफी जल्दी ठीक हो जाएगी।
  4. तुलसी की कुछ पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना लें और उसको मोच वाले स्थान पर लगाएं। ऐसा करने से काफी आराम महसूस होगा।
  5. तुलसी के पत्तों के रस तथा सरसों के तेल को एक साथ मिलाकर गर्म कर के मोंच वाले भाग पर रखें। ऐसा दिन में 4-5 बार करें।
  6. थोड़े से बर्फ के टुकड़ों को किसी एक कपड़े में रखकर सूजन वाले जगह पर लगाएं। इससे सूजन कम हो जाती है और दर्द धीरे-धीरे कम होने लगता है।
  7. दो चम्‍मच हल्‍दी में थोड़ा सा पानी मिला कर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को हल्का गर्म करके मोच वाली जगह पर लगाएं। फिर 2 घंटे के बाद पैरों को गुनगुने पानी से धो लें।
  8. नमक और सरसों के तेल को गरम करें और मोंच पर रखें। फिर इसे किसी कपड़े से बांध कर रात में सो जाएं, आराम मिलेगा।
  9. पान के पत्ते पर सरसों का तेल लगा कर, उस पत्ते को हल्का गर्म कर के मोच वाले अंग पर बांध लें।
  10. पीड़ा और सूजन में कमी लाने के लिए मोच खाए अंग पर हर घंटे बाद बर्फ या ठंडे पानी की भीगी हुई पट्टियाँ रखें। इससे पीड़ा और सूजन में कमी आती है।
  11. पैर पर अगर मोच आई तो हमेशा पैर को सोते वक्त थोड़ा ऊंचाई पर रखें। इससे मोच की वजह से आई पैर की सूजन में कमी आती है।
  12. पैरों के नीचे तकिया रखें जिससे आपका पैर थोड़ा ऊपर उठ सके। इससे खून एक जगह पर नहीं जम पाएगा और वह पूरे शरीर में सर्कुलेट होगा। इससे पैरों की सूजन कम हो जाएगी।
  13. फिटकरी का आधा चम्‍मच ले कर उसे एक गिलास गर्म दूध में मिक्‍स कर के पी जाएं, इससे चोट जल्दी ठीक हो जाएगी ।
  14. मोच को बैंडेज या पट्टी से बांधने से राहत मिलती है। पैरों में प्लास्टिक बैंडेज बांधिये जिससे पैरों में ब्‍लड सर्कुलेशन भी ठीक रहे। मोच को कस के नहीं बांधना चाहिए नहीं तो उससे खून का दौरा धीमा पड़ जाता है। अगर बैंडेज को कस के बांध लिया तो दर्द बढ जाएगा।
  15. मोच खाए जोड़ को ठीक करने के लिए इलास्टिक की पट्टियों से बांधे।
  16. मोच खाए टखने पर एड़ी से शुरू कर पट्टी को ऊपर की ओर बांधें, ध्यान रहे कि पट्टी बहुत सख्त न हो और हर दो घंटे में खोलते रहें। यदि दर्द और सूजन 48 घंटे में कम न हो तो चिकित्सा सहायता लें।
  17. मोच खाए या टूटे अंग की मालिश कभी भी न करें। इससे कोई लाभ नहीं होता, बल्कि हानि पहुँच सकती है।
  18. मोच वाले स्थान पर एलोवेरा जेल लगाने से आराम मिलेगा।
  19. यदि मोच लगने के तुरंत बाद ही उस जगह पर बर्फ लगा कर सिकाई की जाए तो उस जगह पर सूजन नहीं आती। दर्द को दूर करने के लिये हर 1-2 घंटे में 20 मिनट की बर्फ से सिकाई करनी चाहिये। बर्फ को हमेशा किसी कपड़े में लपेट कर लगाना चाहिए।
  20. शहद और चूने दोनों को बराबर मात्रा में मिला कर मोच वाली जगह पर हल्की मालिश करें।
  21. सूजन को कम करने के लिए बर्फ या आइस पैक को दिन में 4-8 बार जरूर लगाएं।
  22. हल्दी लगाने से पैरों की सूजन कम हो जाती है। हल्दी एक एंटीसेप्टिक गुणों वाला मसाला है जो लंबे समय से प्रयोग में लाई जा रही है। इसे लगाने से आपको मोच में काफी आराम मिल सकता है। 2 चम्‍मच हल्‍दी में थोड़ा सा पानी मिला कर पेस्ट बना कर हल्का गर्म करें और मोच पर लगाएं। फिर 2 घंटे के बाद पैरों को गर्म पानी से धो लें।
मोच आने पर घर में करें ये व्यायाम
  1.  अपना पंजा दरवाजे के पास इस तरह रखें, जिससे एड़ी जमीन पर रहे और पंजा 45 डिग्री के कोण के साथ दरवाजे से थोड़ा ऊंचाई पर रहे। सपोर्ट के लिए दरवाजे को पकड़ लें। अब घुटने को मोड़ते हुए दरवाजे के करीब लाएं। इस खिंचाव को दो मिनट तक बनाए रखें। यदि सुविधाजनक नहीं लग रहा है तो एक ब्रेक लेकर दोबारा ऐसा करें। अगर आप लगातार दो मिनट तक स्ट्रेच कर रहे हैं तो ऐसा एक बार ही करें।
  2. टखने का लचीलापन और उसको गति देने के बाद अब बैठने का व्यायाम करें। एक चटाई बिछा लें। पैरों को पीछे की ओर मोड़ लें। ध्यान रखें कि पैरों की उंगलियां पीछे की ओर से सीधी रहें, अंदर की ओर मुड़ी न हों। अब कूल्हे के हिस्से को एड़ियों पर टिका कर बैठ जाएं। इससे जमीन पर पंजे के सामने के हिस्से पर स्ट्रेच उत्पन्न होगा। स्ट्रेच अधिक बढ़ाने के लिए शरीर के वजन को कूल्हों पर रखें और दो मिनट तक इसी स्थिति में रहें। शुरुआत में इसे कम समय के लिए कर सकते हैं।
  3. पंजे से दीवार पर इसी तरह दबाव बनाए रखें। अब घुटने को अंदर और बाहर की ओर गोल घुमाएं। ऐसा करते हुए दबाव टखने के पीछे के हिस्से की ओर पड़ना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो अपनी स्थिति को ठीक करें और इसे दोबारा दोहराएं।
प्रश्‍नोत्तरी
  1. मोच आ जाए तो क्या लगाना चाहिए?
    बर्फ से सिकाई - मोच लगने के तुरंत बाद उस जगह पर बर्फ की सिकाई करने से सूजन नहीं आती है। इसके लावा बर्फ की सिकाई करने से दर्द भी दूर हो जाती है। ऐसे में मोच आने पर हर एक से दो घंटे में बर्फ से सिकाई करनी चाहिए। हालांकि सीधे ही बर्फ से सिकाई नहीं करनी चाहिए।
  2. मोच की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
    Arnica और कोलेजन गोल्ड जेल - [7 Oz] एक बहुत ही प्रभावी जेल की ट्यूब। चोट, सूजन, मांसपेशियों की कठोरता, मोच और तनाव के लिए आपकी सबसे अच्छी शर्त।
  3. पैर की मोच कितने दिन में ठीक होती है?
    पैर की मोच कितने दिन में ठीक होती है? पैर की मोच ठीक होने में लगने वाला समय आपकी चोट की गंभीरता पर निर्भर करता है। मामूली मोच दो सप्ताह में ठीक हो सकती है, लेकिन गंभीर मोच को ठीक होने में 6 से 12 सप्ताह लग सकते हैं।
  4. मोच आने पर कौन सी दवाई लेनी चाहिए?
    फिटकरी: एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच फिटकरी मिलाकर इसका सेवन करें। इसका सेवन करने से मोच काफी जल्दी ठीक हो जाएगी। इमली का पत्ता: इमली के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-सेप्टिक गुण पाए जाते हैं जो मोच के दर्द में लाभकारी होते हैं। इमली के पत्तों को पीसकर इसमें गुनगुना पानी मिलाकर पेस्ट बना लें।
  5. आपको कैसे पता चलेगा कि यह मोच है या टूट गई है?
    यदि आप कोई हड्डी तोड़ते हैं, तो आपको चटकने की आवाज सुनाई दे सकती है। दर्द का स्रोत। यदि आपको जो दर्द महसूस हो रहा है वह किसी जोड़ के आसपास के मुलायम ऊतकों में है, तो संभवतः यह मोच है। यदि हड्डी पर हल्का दबाव डालने से अत्यधिक दर्द होता है, तो चोट संभवतः फ्रैक्चर है।
  6. क्या मोच वाला पैर रात भर ठीक हो सकता है?
    अधिकांश छोटी-से-मध्यम चोटें 2 से 4 सप्ताह के भीतर ठीक हो जाएंगी। अधिक गंभीर चोटें, जैसे ऐसी चोटें जिनमें कास्ट या बूट की आवश्यकता होती है, को ठीक होने में 6 से 8 सप्ताह तक का लंबा समय लगेगा।
  7. क्या हल्दी मोच के लिए अच्छी है?
    हल्दी: यह हमारे भोजन में अनोखा स्वाद लाने के अलावा और भी बहुत कुछ करती है। इससे हमें दर्द से भी राहत मिलेगी और मोच के कारण होने वाली सूजन भी शांत होगी । इससे रक्त के थक्कों से बचा जा सकता है, रक्त की आपूर्ति बढ़ सकती है और त्वचा और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं का समाधान हो सकता है।
    पैर, घुटने, हाथ, उंगली या बाजुओं में अगर आपको किसी प्रकार की चोट, मोच या अंदरूनी घाव महसूस हो रहा है तो आप गेहूं के आटे, घी और हल्दी के लेप का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस लेप के इस्तेमाल से आपको बहुत जल्द दर्द में आराम मिलेगा।
  8. पैर में मोच आने के बाद मैं कब चल सकता हूं?
    टखने की मोच का दर्द और सूजन अक्सर 48 घंटों के भीतर ठीक हो जाता है। उसके बाद, आप अपने घायल पैर पर वापस वजन डालना शुरू कर सकते हैं। अपने पैर पर केवल उतना ही वजन डालें जितना शुरू में आरामदायक हो। धीरे-धीरे अपने पूरे वजन तक पहुंचें।
  9. बर्फ से सिकाई कब करनी चाहिए?
    अगर कोई पुरानी चोट भी तुरंत पैदा हुई हो, तो वहां भी बर्फ लगाया जा सकता है, लेकिन ध्‍यान रखना होगा कि तुरंत तेज दर्द हो तभी। चोट वाली जगह पर अगर खून बह रहा हो तब तो जरूर बर्फ से सिकाई करनी चाहिए। लेकिन ध्‍यान रखें कि बर्फ को सीधे कभी चोट पर नहीं रखना चाह‍िए। तौल‍िए में आइस को लपेटकर ही लगाएं।
  10. मोच या हड्डी की चोटों में क्या नहीं करना चाहिए?
    मोच लगने वाली जगह पर कभी भी मसाज न करें। इस दौरान किसी भी तरह की एक्ससाइज करने से बचें। मोच वाले हिस्से को गर्मी न दें। बहुत से लोग मोच करने पर स्टीमबाथ लेते हैं, लेकिन ऐसा करने से बचना चाहिए।
  11. मोच के स्थान पर बर्फ से सिकाई करने से क्या फायदा होता है?
    अगर आपको कहीं मोच आ जाए तो बर्फ की स‍िकाई कर सकते हैं। बर्फ से स‍ेकने पर नसों को आराम म‍िलता है और मोच जल्दी ठीक होती है। अगर कहीं चोट लग जाए तो आइस लगा देनी चाहिए। इससे खून का फ्लो उस जगह रुक जाता है।
  12. क्या मोच चोट लगने से ज्यादा खराब होती है?
    कभी-कभी, मोच टूटने से भी ज्यादा दर्दनाक हो सकती है। मोच आघात के कारण होती है जो स्नायुबंधन को अत्यधिक खींचती है और जोड़ पर तनाव डालती है।
  13. मोच किस प्रकार की चोट है?
    मोच , स्नायुबंधन की चोटें हैं जो किसी जोड़ के भींचने या मुड़ने से उत्पन्न होती हैं । खिंचाव मांसपेशियों या कण्डरा की चोटें हैं, और अक्सर अत्यधिक उपयोग, बल या खिंचाव के कारण होती हैं। टखना सबसे आम तौर पर मोच या खिंचाव वाला जोड़ है।
  14. मोच आने का क्या कारण होता है?
    मोच जोड़ में चोट लगने के कारण अस्थिबंध (लिगामेंट) की क्षमता से अधिक खीच जाने या मॉसपेशीयॉ के फटने के कारण होता है। इस तरह की बीमारियों का किसी तरह के आघात से खास रिश्ता होता है। चोट लगने के साथ ही सूजन शुरू हो जाती है। मोच किसी भी जोड़ में हो सकता है पर ऐड़ी और कलाई के जोड़ पर ज्यादा मोच आती है।
  15. क्या नमक का पानी मोच वाले टखने के लिए अच्छा है?
    कुछ दिनों के बाद, आप अपने टखने को एप्सम नमक के साथ गर्म स्नान में भिगो सकते हैं। चोट लगने के बाद पहले कुछ दिनों के दौरान ठंड लगाना महत्वपूर्ण है। एप्सम नमक दर्द वाली मांसपेशियों और संयोजी ऊतकों को शांत करने में मदद कर सकता है, और यह जोड़ों की कठोरता में मदद कर सकता है। प्रतिदिन 1-2 बार गर्म या थोड़े गर्म स्नान में एप्सम नमक मिलाने का प्रयास करें।
  16. सरसों का तेल मोच के लिए अच्छा है?
    गठिया और गठिया के दर्द से छुटकारा पाने के लिए सरसों के तेल से मालिश करने की सलाह दी जाती है - जो अपने सूजन-रोधी गुणों के लिए जाना जाता है। यह टखनों की मोच और अन्य जोड़ों के दर्द से भी राहत दिला सकता है । सेलेनियम नामक ट्रेस खनिज की उपस्थिति जोड़ों और त्वचा की सूजन से राहत दिलाने में मदद करती है।
  17. मोच वाले टखने में कितनी देर तक चोट लगती है?
    यदि यह सीधी चोट थी, मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं थी और आपको कोई झटका नहीं लगा था, तो आप उम्मीद कर सकते हैं कि लिगामेंट ठीक होने तक लक्षण 10 से 12 सप्ताह तक बने रहेंगे। एक बार जब आपके टखने में मोच आ गई, तो भविष्य में चोट लगने की संभावना अधिक होती है। टखने की आस्तीन या लेस-अप ब्रेस अतिरिक्त समर्थन और स्थिरता प्रदान कर सकता है।
  18. मोच आए हुए स्थान पर कितने देर तक बर्फ से सिकाई करनी चाहिए?
    अगर मोच लगने के तुरंत बाद आप उस जगह पर बर्फ की सिकाई कर दें तो सूजन नहीं आती। इसके अलावा बर्फ की सिकाई करने से पेन में भी आराम मिलता है। ऐसे में मोच आने पर हर एक से 2 घंटे मे बर्फ से सिकाई करनी चाहिए।
  19. क्या गर्म पानी सूजन को कम करता है?
    गर्म पानी में भीगना कई कारणों से काम करता है। यह जोड़ को दबाने वाले गुरुत्वाकर्षण बल को कम करता है, दर्द वाले अंगों को 360-डिग्री समर्थन प्रदान करता है, सूजन और सूजन को कम कर सकता है और परिसंचरण को बढ़ा सकता है। तो, आपको कितनी देर तक भिगोना चाहिए? लगभग 20 मिनट के बाद अधिकतम लाभ मिलता हुआ प्रतीत होता है।
  20. मोच और खिंचाव के दौरान प्राथमिक उपचार क्या है?
    आराम: घायल हिस्से को तब तक आराम दें जब तक दर्द कम न हो जाए। बर्फ: एक तौलिये में आइसपैक या ठंडा सेक लपेटें और तुरंत चोट वाले हिस्से पर रखें। इसे एक बार में 20 मिनट से अधिक न जारी रखें, दिन में चार से आठ बार। संपीड़न: घायल हिस्से को कम से कम 2 दिनों के लिए इलास्टिक संपीड़न पट्टी से सहारा दें।
  21. मोच या फ्रैक्चर कौन सा बदतर है?
    हालांकि मोच को आमतौर पर फ्रैक्चर की तुलना में कम गंभीर चोट माना जाता है , लेकिन इसे ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। क्यों? स्नायुबंधन में रक्त की आपूर्ति बहुत सीमित होती है। मोच की गंभीरता के आधार पर, पूर्ण उपचार में एक वर्ष तक का समय लग सकता है।
  22. मोच या खिंचाव कौन सा बदतर है?
    एक तकनीकी रूप से दूसरे से बदतर नहीं है । खिंचाव टेंडन को प्रभावित करता है (इसे याद रखने का एक आसान तरीका है sTrains = टेंडन या मांसपेशियां), और मोच स्नायुबंधन को प्रभावित करता है। कण्डरा और स्नायुबंधन दोनों संयोजी ऊतक हैं, और दोनों को गंभीरता से मापा जाता है।
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दस्त/डायरिया के लक्षण और उपचार



अतिसार या डायरिया में या तो बार-बार मल त्याग करना पड़ता है या मल बहुत पतले होते हैं या दोनों ही स्थितियां हो सकती हैं। पतले दस्त, जिनमें जल का भाग अधिक होता है, थोड़े-थोड़े समय के अंतर से आते रहते हैं। अतिसार का मुख्य लक्षण और कभी-कभी अकेला लक्षण, विकृत दस्तों का बार-बार आना होता है। तीव्र दशाओं में उदर के समस्त निचले भाग में पीड़ा तथा बेचैनी प्रतीत होती है अथवा मल त्याग के कुछ समय पूर्व मालूम होती है। धीमे अतिसार के बहुत समय तक बने रहने से, या उग्र दशा में थोड़े ही समय में, रोगी का शरीर कृश हो जाता है और जल ह्रास (डिहाइड्रेशन) की भयंकर दशा उत्पन्न हो सकती है। खनिज लवणों के तीव्र ह्रास से रक्तपूरिता तथा मूर्छा (कोमा) उत्पन्न होकर मृत्यु तक हो सकती है।
डायरिया के लक्षण - डायरिया से जूझ रहे व्यक्ति द्वारा इनमे से एक या इससे अधिक लक्षण हो सकते हैं: पानी का मल, पेट में ऐंठन या ऐंठन होना, मतली और उल्टी, बुखार, निर्जलीकरण और भूख में कमी

उपचार 
  1.  अदरक का रस नाभि के आस-पास लगाने से दस्त में आराम मिलता है।
  2. अनार के बीजों को चबाएं। दिन भर में कम से कम दो बार अनाज का जूस पिएं। अनार की पत्तियों को पानी में उबाल लें। इस पानी को छानकर पीने से भी दस्त में आराम मिलता है।
  3. आधा चम्मच सौंठ को छाछ के साथ लें। इस मिश्रण को दिन में दो-तीन बार लेने से डायरिया से राहत मिलती है।
  4. इससे पेट की गर्मी छंट जाएगी और दस्त की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। यह पाउडर खाली पेट दो से तीन दिनों तक लेना चाहिए। बहुत जल्दी आराम मिलता है।
  5. एक गिलास छाछ में थोड़ा नमक, एक चुटकी काली मिर्च, जीरा और थोड़ी हल्दी डालकर पीने से दस्त में आराम मिलता है। दिन में दो से तीन बार ऐसी एक गिलास छाछ बनाकर पीना चाहिए।
  6. एक नीबू के रस में एक चम्मच नमक और थोड़ी चीनी मिलाकर अच्छे से मिक्स करने के बाद पिएं। हर एक घंटे में ये घोल बनाकर पीने से डायरिया में बहुत जल्दी आराम मिलता है। इस नुस्खे को अपनाने के साथ ही हल्का खाना लें। इससे इस समस्या से जल्दी छुटकारा मिल जाता है।
  7. एक-चौथाई चम्मच मेथी दाना पाउडर ठंडे पानी से लें।
  8. कच्चा पपीता उबालकर खाने से दस्त में आराम मिलता है।
  9. कच्चे पपीते को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उबाल लें। इस पानी को छानकर पिएं। दस्त बंद हो जाएंगे। यह पानी दिन भर में दो से तीन बार पीना चाहिए।
  10. कुकर में बने चावल को ताजे दही के साथ खाएं। दिन भर में दो से तीन बार दही-चावल खाने से दस्त की समस्या से मुक्ति मिल जाती है।
  11. खाना खाने के बाद एक कप लस्सी में एक चुटकी भुना जीरा और काला नमक ड़ालकर पीएं। दस्त में आराम आयेगा।
  12. जब भी दस्त की समस्या हो, दिन भर में कम से कम दो से तीन चम्मच शुद्ध शहद खाएं। एक चम्मच शहद में आधा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर लेने पर भी दस्त से राहत मिलती है।
  13. ताजा लौकी के रस को छानकर दिन में दो-तीन बार पिएं। दस्त की समस्या खत्म हो जाएगी।
  14. बेल की पत्तियों या बेल के फलों का पाउडर दस्त में दवा का कामकरता है। 25 ग्राम बेल के पाउडर को शहद में मिलाकर लेने से दस्त से राहत मिलती है। दिन में कम से कम चार बार बेल पाउडर का सेवन करें।
  15. मिश्री और अमरूद खाने से भी आराम मिलता है।
  16. सरसों के एक-चौथाई चम्मच बीजों को एक कप पानी में भिगो दें। एक घंटे बाद इस पानी को छानकर पी लें। यह नुस्खा एक दिन में दो से तीन बार दोहराएं। डायरिया की समस्या से बहुत जल्दी आराम मिल जाएगा।


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